नो मोर ट्रैफिक जाम! दिल्ली में आ रहा है AI सिस्टम, करोड़ों का बजट पास

नई दिल्ली। दिल्ली अब रोज सड़क पर लगने वाले जाम और बढ़ते ट्रैफिक को संभालने के लिए नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने जा रहा है। केंद्रीय कैबिनेट ने राजधानी के लिए 1,789.52 करोड़ रुपये के इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) को मंजूरी दी है। इस सिस्टम में AI और रियल टाइम ट्रैफिक डेटा की मदद से सड़कों पर ट्रैफिक को बेहतर तरीके से संभालने की कोशिश होगी।

यह प्रोजेक्ट दिल्ली पुलिस लागू करेगी। इसके तहत 42 बड़े ट्रैफिक कॉरिडोर को शामिल किया गया है। काम तीन चरणों में पूरा किया जाएगा।

ट्रैफिक के हिसाब से खुद बदलेंगे सिग्नल

ITMS में ट्रैफिक सिग्नल सड़क पर गाड़ियों की संख्या के हिसाब से खुद बदलेंगे। ज्यादा ट्रैफिक होने पर सिग्नल की टाइमिंग अपने आप एडजस्ट होगी। बड़े रास्तों के सिग्नल आपस में जुड़े रहेंगे, जिससे बार-बार रुकने और देरी को कम किया जा सकेगा। सिस्टम जाम, धीमी रफ्तार और हादसों का भी तुरंत पता लगाएगा। इसके बाद ट्रैफिक पुलिस जरूरत के अनुसार डायवर्जन कर सकेगी। एंबुलेंस और दूसरी इमरजेंसी गाड़ियों के लिए जरूरत के समय ग्रीन कॉरिडोर बनाने में ITMS मदद करेगा।

स्मार्ट सिस्टम से ट्रैफिक पर रहेगी नजर

  • AI कैमरों से रेड लाइट तोड़ने, तेज रफ्तार और गलत दिशा में गाड़ी चलाने वालों की पहचान होगी।
  • बिना हेलमेट या सीट बेल्ट के वाहन चलाने वालों पर भी नजर रखी जाएगी।
  • ड्राइविंग के दौरान मोबाइल इस्तेमाल और गलत पार्किंग का भी पता चलेगा।
  • सिस्टम चोरी और ब्लैकलिस्टेड वाहनों की पहचान करने में मदद करेगा।
  • लोगों को डिजिटल प्लेटफॉर्म और सड़कों पर लगे वेरिएबल मैसेज साइन से जाम, डायवर्जन और पार्किंग की जानकारी मिलेगी।
  • ट्रैफिक से जुड़ी ताजा जानकारी नेविगेशन सर्विस के साथ भी शेयर की जाएगी, जिससे लोग बेहतर रास्ता चुन सकेंगे।

1,092 सिग्नल और 1,029 एनफोर्समेंट लोकेशन

इस प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली में 1,092 जगहों पर स्मार्ट ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम और 1,029 जगहों पर ट्रैफिक नियमों की निगरानी के लिए सिस्टम लगाया जाएगा। इसके साथ ट्रैफिक कमांड और कंट्रोल सेंटर भी बनाया जाएगा। डेटा सिक्योरिटी के लिए डेटा सेंटर और डिजास्टर रिकवरी सिस्टम होगा। जरूरत के हिसाब से आगे इसमें नई टेक्नोलॉजी और फीचर भी जोड़े जा सकेंगे।

ITMS को पूरी दिल्ली में एक साथ लागू नहीं किया जाएगा। इसे तीन चरणों में शुरू किया जाएगा। हर चरण में टेस्टिंग और जांच के बाद ही आगे का काम किया जाएगा। इसका मकसद ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाना, जाम कम करना और सड़क सुरक्षा बढ़ाना है।

‘होता है…’ बुजुर्ग ड्राइवर ने 3 बार मारी कार को टक्कर, शख्स ने बताया पूरा किस्सा तो सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

Viral News: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक शख्स ने एक बुजुर्ग के ड्राइविंग को लेकर एक हैरान करने वाली पोस्ट डाली है। शख्स ने ट्रैफिक सिग्नल पर एक बुजुर्ग कार चालक के साथ हुई घटना सोशल मीडिया पर शेयर की। उसका दावा है कि बुजुर्ग चालक को कार आगे बढ़ाने में काफी परेशानी हो रही थी और इस दौरान उसने तीन बार उसकी कार को टक्कर मार दी। इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर सड़क सुरक्षा और बुजुर्ग लोगों के लिए ड्राइविंग से जुड़ी परेशानियों को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

एक्स पर विश्वरूप समाजदार ने बताया कि, वह रेड लाइट पर खड़े थे और उनके आगे हुंडई ग्रैंड आई10 में एक बुजुर्ग व्यक्ति बैठे थे। सिग्नल के ग्रीन होने के बाद बुजुर्ग चालक, कार को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन हल्की चढ़ाई होने के कारण कार बार-बार बंद हो रही थी।

‘कार बार-बार पीछे हो रही थी’

विश्वरूप समाजदार ने अपनी पोस्ट में लिखा कि एक बुजुर्ग व्यक्ति ग्रैंड आई10 चला रहा था और ट्रैफिक में उनकी कार के आगे था। रेड लाइट, ग्रीन होने के बाद बुजुर्ग चालक कार को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन कार बार-बार रुक रही थी। उन्होंने बताया कि सड़क पर हल्की चढ़ाई होने के कारण कार पीछे की ओर खिसक रही थी। समाजदार का आरोप है कि इस दौरान कार उनकी गाड़ी से तीन बार हल्के से टकराई। उन्होंने कहा कि चालक को समझ नहीं आ रहा था कि कार को कैसे संभालना है, इसलिए उन्होंने कई बार हॉर्न बजाया और फिर कार के बराबर जाकर उसकी खिड़की नीचे की।

मुझे गुस्सा नहीं आया

उन्होंने आगे बताया कि बुजुर्ग चालक ने कहा कि उनकी कार बार-बार रुक रही थी। इस पर उन्होंने चालक को बताया कि उसकी कार उनकी गाड़ी से तीन बार टकराई है। उनके मुताबिक, बुजुर्ग व्यक्ति मुस्कुराए और बोले, “होता है।” टक्कर हल्की थी और उनकी कार को कोई खास नुकसान नहीं हुआ, इसलिए उन्हें गुस्सा नहीं आया। हालांकि, अगले ट्रैफिक सिग्नल पर भी बुजुर्ग चालक को कार आगे बढ़ाने में परेशानी हुई और उनकी गाड़ी फिर टकराने वाली थी। इसके बाद उन्होंने अपनी कार पीछे कर ली और दोनों गाड़ियों के बीच करीब एक कार जितनी दूरी रखी। उन्होंने कहा कि कुछ बुजुर्ग लोगों के लिए गाड़ी चलाना मुश्किल हो सकता है, लेकिन ऐसी स्थिति में उन पर चिल्लाना सही नहीं है।

 

लोगों ने ऐसा दिया रिएक्शन

इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय सामने आई है। कुछ लोगों का कहना है कि बुजुर्ग चालक पर गुस्सा करने के बजाय युवक को उनकी मदद करनी चाहिए थी। वहीं, कुछ यूजर्स ने सुझाव दिया कि बुजुर्ग लोगों की ड्राइविंग क्षमता की समय-समय पर जांच होनी चाहिए। एक यूजर ने कहा कि ऐसी परेशानी सिर्फ बुजुर्गों को ही नहीं, बल्कि युवाओं को भी हो सकती है और ऐसी स्थिति में मदद करना ज्यादा सही है। वहीं, दूसरे यूजर ने चालक के “होता है” और “चलता है” जैसे जवाब पर नाराजगी जताई।

नई कार पर 4 और बाइक पर 6 साल का इंश्योरेंस जरूरी, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने गाड़ियों के इंश्योरेंस बड़ा फैसला सुनाया है। अब नई प्राइवेट कार खरीदने पर 4 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस लेना होगा। नई बाइक खरीदने पर 6 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य होगा। पहले यह अवधि एक साल कम थी। कोर्ट ने कहा कि इससे सड़क हादसों के पीड़ितों को जल्दी मुआवजा मिलेगा।

यह आदेश जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने दिया। कोर्ट ने कहा कि देश में अब भी बड़ी संख्या में गाड़ियां बिना इंश्योरेंस के चल रही हैं। इसे रोकना जरूरी है।

2018 के बाद भी नहीं बदले हालात

सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में नई कार के लिए 3 साल और नई बाइक के लिए 5 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य किया था। लेकिन इसके बाद भी हालात नहीं सुधरे। कोर्ट ने कहा कि अब अवधि एक साल और बढ़ाई जा रही है।

IRDAI और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (GIC) ने इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि इससे लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। लेकिन कोर्ट ने सड़क सुरक्षा को ज्यादा अहम माना।

हर दूसरी गाड़ी के पास इंश्योरेंस नहीं

कोर्ट ने कहा कि देश में करीब 56% गाड़ियां बिना वैध इंश्योरेंस के चल रही हैं। संसदीय समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, 30.48 करोड़ रजिस्टर्ड गाड़ियों में से 16.54 करोड़ के पास वैध इंश्योरेंस नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का मकसद सिर्फ मुआवजा देना नहीं है। इसका मकसद पीड़ितों को लंबी कानूनी लड़ाई से बचाना भी है।

बिना इंश्योरेंस गाड़ी पर ई-चालान

कोर्ट ने कहा कि ANPR कैमरों को VAHAN पोर्टल और Insurance Information Bureau से जोड़ा जाए। इससे बिना इंश्योरेंस चल रही गाड़ियों की पहचान हो सकेगी। फिर उन्हें अपने आप ई-चालान जारी होगा।

राज्य पुलिस को भी ऐसे मोबाइल ऐप और डिवाइस दिए जाएंगे। इससे मौके पर ही इंश्योरेंस चेक किया जा सकेगा।

बिना इंश्योरेंस पेट्रोल भी नहीं

कोर्ट ने IRDAI और सड़क परिवहन मंत्रालय से पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने को कहा है। इसके तहत बिना वैध इंश्योरेंस वाली गाड़ियों को पेट्रोल देने पर रोक लगाने की योजना बनाई जाएगी।

कोर्ट ने यह भी कहा कि लोग किसी भी गाड़ी का इंश्योरेंस स्टेटस ऑनलाइन चेक कर सकें। इसके लिए भी व्यवस्था बनाई जाए।

इंश्योरेंस खरीदने से पहले पूरी जानकारी

कोर्ट ने IRDAI को चार-स्तरीय इंश्योरेंस व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया। इसमें थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के साथ पर्सनल एक्सीडेंट कवर, पिलियन या यात्रियों का कवर और ओन डैमेज कवर का विकल्प भी होगा। हर ग्राहक को बीमा खरीदने से पहले आसान भाषा में पूरी जानकारी भी देनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को 14 अगस्त 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

CIBIL Score: पुराना बैंक अकाउंट या क्रेडिट कार्ड बंद कर रहे? जानिए सिबिल स्कोर पर क्या असर पड़ेगा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।