मिड-एयर हाइजैक के बाद सऊदी में हुई लैंडिंग, डर के बीच गूंजा ‘Od Avinu Chai’, जानें इसका मतलब

FlyDubai Flight Emergency Landing: दुबई से इजराइल के तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ 1073 में हवा में अचानक कुछ ऐसा हुआ, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में हड़कंप मच गया। कॉकपिट में पायलटों के बीच विवाद के बाद हाइजैक का डिस्ट्रेस सिग्नल ट्रिगर हो गया, जिसके चलते प्लेन को तुरंत सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी।

विमान के सुरक्षित जमीन पर उतरते ही यात्रियों ने राहत की सांस ली। इस दौरान पूरा केबिन ‘Od Avinu Chai’ गा रहा था जिसका मतलब यानी हमारा पिता अभी जीवित है जो एक हिब्रू प्रार्थना गीत है।

कॉकपिट में पायलटों की भिड़ंत और गलत सिग्नल का खौफ

इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उड़ते विमान के कॉकपिट में ही पायलटों के बीच आपस में तीखी बहस और हाथापाई हो गई थी। इसी घटनाक्रम के दौरान विमान से पहले सामान्य इमरजेंसी कोड 7700 भेजा गया, लेकिन इसके तुरंत बाद डिस्ट्रेस सिग्नल 7500 में बदल गया। यह कोड विमान के गैर-कानूनी कब्जे या ‘हाईजैकिंग’ को दर्शाता है।

हाइजैक कोड मिलते ही इजराइली वायुसेना एक्शन में आ गई और फाइटर जेट्स को हवा में तैनात कर दिया गया। हालांकि, बाद में सिग्नल को फिर से 7700 में स्विच किया गया और हाइजैकिंग की आशंका को खारिज कर दिया गया।

सऊदी अरब में लैंडिंग के बाद गूंजा ‘Od Avinu Chai’

तमाम आशंकाओं के बीच विमान को उत्तर-पश्चिमी सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट की तरफ डाइवर्ट किया गया, जहां प्लेन सुरक्षित लैंड हो गया। फ्लाईदुबई के प्रवक्ता ने बयान जारी कर पुष्टि की कि विमान में सवार सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं।

लैंडिंग के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो में खौफ के साये से बाहर निकले यात्री खुशी से तालियां बजाते और मशहूर हिब्रू प्रार्थना गीत ‘Od Avinu Chai’ गाकर ईश्वर का शुक्रिया अदा करते नजर आ रहे हैं।

नेतन्याहू ने की आपातकालीन समीक्षा

इस घटना की गंभीरता को देखते हुए इज़राइली प्रधानमंत्री कार्यालय और रक्षा मंत्रालय तुरंत सक्रिय हो गए। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्थिति की समीक्षा के लिए आपातकालीन बैठक की और पूरे घटनाक्रम पर सीधे नजर रखी।

पीएमओ ने बयान जारी कर कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और सभी इज़राइली यात्रियों को सुरक्षित वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इजराइल की परिवहन मंत्री मिरियम रेगेव ने सुरक्षा स्थिति का आकलन किया, जबकि फ्लाईदुबई एयरलाइन ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

Saudi’s CEER debuts with all-electric EXOBOT sedan and SUV

Saudi's CEER debuts with all-electric EXOBOT sedan and SUV
Saudi Arabia's CEER reveals EXOBOT sedan and SUV EVs

CEER, Saudi Arabia’s national automotive company, revealed the EXOBOT sedan and SUV on Monday. This marks the brand’s entry into the passenger electric vehicle space as part of the industrial diversification targets under Saudi Vision 2030. The cars were revealed by Saudi Arabia’s Crown Prince and Prime Minister, Mohammed bin Salman bin Abdulaziz Al Saud. These vehicles will be produced at CEER manufacturing complex, the largest automotive production facility in the Middle East.

The EXOBOT sedan and SUV are the brand’s flagship electric vehicles, and they are part of a portfolio of seven models that will be revealed over the next five years. These include midsize and compact vehicles with different powertrain options.

About the CEER brand

Since its inception in 2022, CEER has secured partnerships with companies such as BMW, Hyundai and Rimac. It aims to achieve 45 percent local content in its cars by 2034, while designing, engineering and testing vehicles tailored to the specific requirements of Saudi Arabia and the region.

Saudi Arabia के ‘स्काईवास्प’ अटैक के आगे बेदम हुए हूती लड़ाके, जानें कैसे सऊदी अरब के इस सस्ते और टिकाऊ उपाय ने बदली जंग की तस्वीर

अब तक सऊदी अरब के महंगे और हाईटेक हथियार हूती लड़ाकों के गोरिल्ला अटैक के आगे बौने साबित हो रहे थे। लेकिन जब से सऊदी अरब ने जंग की पुरानी रणनीति को छोड़ कर नई रणनीति अपनाई है, तब से खाड़ी देशों के बीच जारी जंग की सूरत बदलती नजर आ रही है। हाल ही में यमन की राजधानी सना पर सऊदी अरब ने जो हमला किया, उससे हूती विद्रोहियों के पांव उखड़ गए और भागने के लिए उनके पास जमीन कम पड़ गई।

इस हमले में सऊदी अरब की मिसाइलें नहीं गरजीं, बल्कि ‘स्काईवास्प’ अटैक किया गया। इस हमले ने अटैक ने रातों-रात मध्य पूर्व के युद्ध के समीकरण को बदल कर रख दिया है। हूती विद्रोहियों के हथियार अब काम नहीं आ रहे हैं। सऊदी अरब का यह हथियार त्रिकोणीय आकार के खौफनाक ड्रोन्स हैं, जो हूतियों के ठिकानों पर तबाही मचा रहे हैं। हूती लड़ाकों की एंटी-एयरक्राफ्ट गन से ड्रोन को मार गिराने की कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं। इस हमले के बाद पूरे साना शहर में हड़कंप मच गया और हूती विद्रोहियों के कई अहम ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचने का दावा किया जा रहा है।

सऊदी अरब ने जंग में उतारे कामिकेज ड्रोन स्काईवास्प

खाड़ी देशों के बीच जारी जंग में सऊदी अरब ने बेहद विनाशकारी कामिकेज यानी ‘सुसाइड’ ड्रोन उतार दिए हैं। इनका नाम ‘स्काईवास्प’ है, जो एक तरह के कीड़े के लिए अंग्रेज में इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द वॉस्प से लिया गया है। हिंदी में इसे ततैया कहते हैं। ये सऊदी अरब का पहला स्वदेशी लंबी दूरी का सुसाइड ड्रोन है। सुसाइड ड्रोन उन हथियारों को कहा जाता है, जो मिसाइल की तरह सीधे अपने टारगेट से टकराकर खुद को भी खत्म कर लेते हैं।

ईरान के ‘शाहिद-136’ ड्रोन पर आधारित स्काईवास्प

स्काईवास्प का डिजाइन काफी हद तक ईरान के मशहूर ‘शाहिद-136’ ड्रोन से मिलता-जुलता है। शाहिद-136 का इस्तेमाल रूस-यूक्रेन युद्ध में बड़े पैमाने पर हुआ है। इसे हूती विद्रोही भी अक्सर सऊदी अरब और लाल सागर में जहाजों पर हमले के लिए इस्तेमाल करते रहे हैं। अब सऊदी अरब ने इसी से प्रेरित खुद का कामिकेज ड्रोन तैयार कर लिया है, जो दुश्मन के घर में घुसकर सटीक हमला करने में माहिर है।

सस्ता और टिकाऊ हथियार बना स्काईवास्प

एक ‘स्काईवास्प’ ड्रोन की कीमत महज करीब 35,000 डॉलर यानी लगभग 29 से 30 लाख रुपए आती है। जहां एक मिसाइल की कीमत लाखों डॉलर होती है। इस ड्रोन की मारक क्षमता करीब 1,500 किलोमीटर है। यानी सऊदी अरब अपनी सीमा से यमन के हूतियों के ठिकानों पर सटीक निशाना लगा सकता है। ये ड्रोन जीपीएस और नेविगेशन सिस्टम से पूरी तरह लैस होता है, जिससे ये दुश्मन की लोकेशन पर सटीक वार करता है और एयर डिफेंस सिस्टम को आसानी से चकमा दे सकता है।

सऊदी और अमेरिका मिलकर बनाया

स्काईवास्प सऊदी अरब का पहला स्वदेशी प्रोजेक्ट है। इसे ‘SR2Vector’ नाम की कंपनी ने बनाया है, जो सऊदी अरब और अमेरिका का एक ज्वाइंट वेंचर है।

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Lalbaugcha Raja Ganapati Utsav: गणपति उत्सव में लालबागचा राजा पर भक्तों ने लुटाया प्यार, तीन दिनों में आया 3 करोड़ से ऊपर चढ़ावा

Lalbaugcha Raja Ganapati Utsav: महाराष्ट्र सहित देश में कई जगहों पर गणेश उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। खासतौर से मुंबई इस त्योहार की शोभा देखते ही बनती है। बप्पा का भव्य पंडाल लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। मुंबई के लालबागचा राजा गणेश मंडल को गणेशोत्सव के पहले तीन दिनों में 3.18 करोड़ रुपये का चढ़ावा मिला है। इसमें कैश, सोना, चांदी और विदेशी मुद्रा शामिल है।

लालबागचा राजा मुंबई के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले सार्वजनिक गणेश मंडलों में से एक है। गणेश उत्सव के त्योहार के दौरान यहां भारी भीड़ उमड़ती है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस हफ्ते की शुरुआत में अपने परिवार के साथ लालबागचा राजा के दर्शन करने पहुंचे थे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अंबानी परिवार के सदस्य, शाहरुख खान, अबराम खान और रणवीर सिंह भी पंडाल में दिखे। गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को शुरू हुई थी। यह त्योहार 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन के साथ खत्म होगा।

मंडल की मैनेजिंग कमिटी के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक चढ़ावे में 1.9 करोड़ रुपये कैश, 98.9 लाख रुपये कीमत का 647.47 ग्राम सोना और 30.35 लाख रुपये कीमत की 12,389 ग्राम चांदी शामिल है। दान पेटियों में अमेरिकी डॉलर और दूसरी विदेशी मुद्र भी मिलीं, लेकिन जब आंकड़े जारी किए गए, तब उनकी कीमत मौजूदा एक्सचेंज रेट पर नहीं आंकी गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि सोने के चढ़ावे में चूड़ियां और चेन शामिल थीं, जबकि चांदी की चीजों में पेन और नक्काशीदार क्रिकेट बैट शामिल थे।

दान पेटियों की गिनती के पहले दिन, मंडल को 48.5 लाख रुपये कैश, 66.77 ग्राम सोना और 2,806 ग्राम चांदी मिली। 16 सितंबर को हुई गिनती में 88.9 लाख रुपये कैश, 226.12 ग्राम सोना और 5,516 ग्राम चांदी मिली। मीडिया खबरों के मुताबिक, एक दिन बाद, बक्सों में 53 लाख रुपये कैश, 354.58 ग्राम सोना और 4,067 ग्राम चांदी मिली।

लालबागचा राजा के पंडाल में पूजा के बाद रोजाना दान पेटियां खोली जाती हैं। ट्रस्ट के एक सदस्य ने बताया कि बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के अधिकारी, बैंक ऑफ महाराष्ट्र के प्रतिनिधि और लालबागचा राजा ट्रस्ट के सदस्य गिनती और जांच की प्रक्रिया की देखरेख करते हैं। ट्रस्ट सदस्य ने कहा कि कैश बैंक में जमा किया जाता है और साल भर संगठन द्वारा किए जाने वाले चैरिटेबल कामों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

मंडल इस साल के त्योहार के दौरान बीएमसी के साथ मिलकर वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहा है। इस पहल के तहत, इसके प्रसाद के हिस्से से गीला कचरा मुंबई के चार अस्पतालों में बायोमीथेनेशन प्लांट में भेजा जा रहा है, जिससे लगभग 7,744 यूनिट बिजली बनाने का लक्ष्य नगर निकाय ने तय किया है।

Saudi Arabia में पकड़े गए पंजाबी ट्रक ड्राइवर बलजिंदर सिंह को हुई मौत की सजा, परिवार ने सरकार से मांगी मदद

Saudi Arabia में पकड़े गए पंजाबी ट्रक ड्राइवर बलजिंदर सिंह को हुई मौत की सजा, परिवार ने सरकार से मांगी मदद

पंजाब के पठानकोट जिले के सिख परिवार के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। रोजी-रोटी की तलाश में सऊदी अरब गए ट्रक ड्राइवर बलजिंदर सिंह को स्थानीय प्रशासन ने मादक पदार्थ की तस्करी के मामले में पकड़ कर जेल में डाल दिया है। इस मामले में उसे मौत की सजा सुनाई गई है। इस खबर से पठानकोट स्थित उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उसके परिवार ने उसकी रिहाई के लिए राज्य और केंद्र सरकार से दखल देने की मांग की है।

पठानकोट जिले के सुजानपुर का रहने वाला बलजिंदर सिंह लगभग तीन साल से सऊदी अरब में पुलिस हिरासत में है। सऊदी अधिकारियों ने दुबई से सऊदी अरब जाते समय उसके ट्रक में मिले दवाओं के एक पैकेट से कथित तौर पर नारकोटिक्स बरामद किए थे। सिंह लगभग एक दशक से दुबई में ट्रक ड्राइवर के तौर पर काम कर रहा था और अपनी नौकरी के सिलसिले में अक्सर सऊदी अरब जाता था। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, उसके परिवार के मुताबिक, उसकी एक यात्रा से पहले, उसके एक साथी ने उसे सऊदी अरब में एक बुजुर्ग व्यक्ति को दवा का एक पैकेट देने के लिए कहा था।

उसके परिवार ने दावा किया कि पैकेट में क्या है, यह जाने बिना ही सिंह उसे साथ ले जाने के लिए मान गया। हालांकि, जब दुबई-सऊदी बॉर्डर पर उसकी गाड़ी की सिक्योरिटी चेकिंग हुई, तो अधिकारियों को कथित तौर पर पैकेट के अंदर छिपा हुआ नारकोटिक्स मिला। बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया और उस पर केस चलाया गया। बाद में एक सऊदी कोर्ट ने सिंह को ड्रग ट्रैफिकिंग के मामले में दोषी पाया और उसे मौत की सजा सुना दी गई।

उनके परिवार का कहना है कि सिंह का मादक पदार्थ से जुड़ी किसी गतिविधि में कोई हाथ नहीं था। उन्हें इस बात की जानकारी भी नहीं थी कि दवा के पैकेट में क्या रखा गया था। उन्होंने तुरंत राजनयिक और कानूनी मदद की अपील की है, और फांसी रोकने और उनकी रिहाई में मदद के लिए दखल देने की मांग की है।

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Houthi attack Saudi: सऊदी अरब के तेल भंडार पर बड़ा संकट! कुछ ही दिनों में खत्म हो सकता है स्टॉक, हूती विद्रोहियों के हमलों से टेंशन में MBS

Houthi attack on Saudi Arabia: सऊदी अरब के सामने तेल निर्यात को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ड्रोन हमले में क्षतिग्रस्त हुई एक महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन अगर जल्द दोबारा शुरू नहीं हुई, तो अरब देश के पास निर्यात के लिए मौजूद कच्चे तेल का भंडार महज 5 से 7 दिनों में खत्म हो सकता है। ‘रॉयटर्स’ ने सऊदी तेल शिपमेंट से जुड़े तीन उद्योग सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।

इस पाइपलाइन के लंबे समय तक बंद रहने से वैश्विक तेल बाजार पर भी बड़ा असर पड़ सकता है। सऊदी तेल खरीदारों और कारोबारियों के मुताबिक, इससे दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का करीब 4 फीसदी, यानी लगभग 40 लाख बैरल प्रतिदिन, बाजार से हट सकता है।

ड्रोन हमले के बाद बंद हुई पाइपलाइन

सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को शुक्रवार को ड्रोन हमलों में नुकसान पहुंचने के बाद बंद कर दिया गया। यह पाइपलाइन देश के पूर्वी हिस्से में मौजूद तेल क्षेत्रों से कच्चा तेल लाल सागर के किनारे स्थित यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती है। सऊदी सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि पाइपलाइन को कितना नुकसान पहुंचा है। इसकी मरम्मत कब तक पूरी होगी। रॉ

यटर्स से बातचीत में उद्योग से जुड़े सूत्रों ने मरम्मत की अलग-अलग समयसीमा बताई है। एक सूत्र के मुताबिक, इसे ठीक करने में 5 से 6 सप्ताह लग सकते हैं। जबकि दूसरे का कहना है कि पाइपलाइन इससे पहले भी चालू हो सकती है। मरम्मत के दौरान पाइपलाइन से आंशिक रूप से तेल पंपिंग शुरू किए जाने की संभावना भी बताई गई है।

यानबू में सिर्फ कुछ दिनों का तेल भंडार

सूत्रों के मुताबिक, यानबू बंदरगाह पर मौजूद कच्चे तेल का स्टॉक मौजूदा निर्यात को केवल 5 से 7 दिनों तक बनाए रखने के लिए पर्याप्त है। अगर पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रही तो यह भंडार भी खत्म हो सकता है। सऊदी अरब के पास मिस्र के कुछ बंदरगाहों पर भी एक्स्ट्रा तेल स्टॉक मौजूद है। इनमें लाल सागर पर स्थित ऐन सुखना और भूमध्य सागर पर स्थित सिदी केरिर शामिल हैं। एक अन्य उद्योग सूत्र के अनुसार, इन भंडारों से ग्राहकों को कुछ और दिनों तक तेल की आपूर्ति की जा सकती है।

भंडारण क्षमता की बात करें तो:

यानबू: करीब 3.5 करोड़ बैरल

ऐन सुखना: करीब 1.8 करोड़ बैरल

सिदी केरिर: करीब 2 करोड़ बैरल

हालांकि ये सभी भंडारण सुविधाएं पूरी क्षमता तक भरी हुई नहीं हैं। ऐसे में पाइपलाइन दोबारा शुरू नहीं होने पर इन भंडारों के भी धीरे-धीरे खत्म होने का खतरा है।

सऊदी अरब का तेल उत्पादन 30 साल के निचले स्तर पर

पाइपलाइन संकट ऐसे समय आया है जब सऊदी अरब का तेल उत्पादन पहले ही काफी गिर चुका है। सऊदी अरब ने OPEC को बताया कि अगस्त में उसका तेल उत्पादन घटकर 62 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जबकि फरवरी में यह करीब 1.09 करोड़ बैरल प्रतिदिन था। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी IEA ने शुक्रवार को कहा कि सऊदी अरब की तेल आपूर्ति तीन दशकों से अधिक समय के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।

इसके पीछे होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर के रास्ते तेल की आवाजाही में आई बाधा को प्रमुख कारण बताया गया है। IEA का अनुमान है कि इस साल वैश्विक तेल आपूर्ति में करीब 57 लाख बैरल प्रतिदिन की गिरावट आ सकती है, जो दुनिया की कुल सप्लाई का लगभग 6 फीसदी है।

होर्मुज संकट के बीच पाइपलाइन थी सऊदी अरब का अहम रास्ता

पिछले करीब छह महीनों से यह पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गई थी। इसकी मदद से सऊदी अरब होर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करते हुए लाल सागर के रास्ते तेल का निर्यात कर पा रहा था। इस पाइपलाइन के जरिए प्रतिदिन करीब 40 लाख बैरल तेल यानबू पहुंचाया जाता था। यह मात्रा दुनिया की कुल तेल आपूर्ति के लगभग 4 फीसदी के बराबर है। अब पाइपलाइन बंद होने से सऊदी अरब के सामने तेल निर्यात के वैकल्पिक रास्तों का संकट बढ़ गया है।

लाल सागर में हूतियों से भी बढ़ा खतरा

सऊदी अरब को लाल सागर क्षेत्र में एक और चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। यमन के हूती लड़ाकों ने युद्ध के बीच सऊदी तेल शिपमेंट को निशाना बनाने की धमकी दी है। शुक्रवार को उन्होंने लाल सागर के मुहाने पर स्थित एक द्वीप पर कब्जा करने का भी दावा किया।

ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए इसलिए भी अहम थी क्योंकि यह देश को होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने का रास्ता देती थी। इसके लंबे समय तक बंद रहने से सऊदी अरब को अपने स्टोरेज में मौजूद तेल और दूसरे सीमित निर्यात मार्गों पर ज्यादा निर्भर होना पड़ सकता है।

दुनिया भर में तेल कीमतों पर और बढ़ सकता है दबाव

अगर पाइपलाइन की मरम्मत में कई सप्ताह लगते हैं, तो सऊदी अरब के लिए विदेशी ग्राहकों को नियमित तेल आपूर्ति बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। लंबे समय तक बंदी का मतलब वैश्विक बाजार से हर दिन लाखों बैरल सऊदी कच्चे तेल की कमी हो सकता है।

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इससे पहले ही सीमित वैश्विक सप्लाई पर दबाव और बढ़ेगा और कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर पेट्रोल-डीजल, परिवहन लागत और महंगाई पर पड़ने की आशंका है। सऊदी अरब की यह पाइपलाइन सिर्फ एक देश की तेल सप्लाई का मामला नहीं है। इसके लंबे समय तक बंद रहने पर पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है।

सऊदी अरब पर भयंकर हमला! तेल डिपो से लेकर एयरपोर्ट तक… हूती विद्रोहियों के अटैक से तबाही

Houthi Strikes in Saudi Arabia: मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के दक्षिणी इलाके पर सिलसिलेवार बड़ा हमला किया है। इस हमले में सऊदी अरब की तेल दिग्गज कंपनी अरामको के ठिकानों, अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और मिलिट्री एयरबेस को निशाना बनाया गया है।

सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, इन हमलों के कारण कई जगहों पर भीषण आग लग गई और 73 लोग घायल हो गए हैं। हूती विद्रोहियों ने धमकी दी है कि वे आने वाले दिनों में सऊदी अरब के अंदर और भी बड़े ऑपरेशन को अंजाम देंगे।

7 प्वाइंट्स में समझिए सऊदी अरब में क्या हुआ, हूती विद्रोहियों ने हमला क्यों किया और इसका दुनिया पर क्या असर पड़ेगा।

1. क्या हुआ सऊदी अरब में?

हूती विद्रोहियों ने मंगलवार तड़के सऊदी अरब के दक्षिणी हिस्से में एक साथ कई ऊर्जा, सैन्य और नागरिक ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल से हमले किए। हमले के बाद कई तेल प्रतिष्ठानों में आग लग गई, जिससे वहां कामकाज अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ। सऊदी जॉइंट फोर्सेज कमान ने पुष्टि की है कि इन हमलों में 73 नागरिक घायल हुए हैं।

2. कौन-कौन से बड़े ठिकाने बने निशाना?

हूतियों ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम ठिकानों को चुना:

  • अभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Abha International Airport)
  • किंग खालिद एयरबेस (King Khalid Air Base)
  • अरामको के तेल ठिकाने (Abha & Jazan Aramco Facilities)

सैन्य और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को एक साथ निशाना बनाकर हूतियों ने सऊदी अरब की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों पर चोट करने की कोशिश की है।

3. अरामको के तेल ठिकानों में लगी आग

सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी ‘अरामको’ के ठिकानों पर हमले के बाद कई जगह आग की लपटें दिखाई दीं। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि आग पर काबू पाने, नुकसान का आकलन करने और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए कामकाज को दोबारा बहाल करने के लिए इमरजेंसी टीमें तैनात कर दी गई हैं।

4. जाजान रिफाइनरी पहले से थी ठप

जाजान स्थित अरामको की रिफाइनरी की क्षमता रोजाना 4,00,000 बैरल तेल प्रोसेस करने की है। लेकिन यह रिफाइनरी जुलाई में हुए पिछले हूती हमले के बाद से ही बंद पड़ी है। हूतियों ने पिछले महीने भी इस कॉम्प्लेक्स पर दो बार हमले का दावा किया था, जिसमें रिफाइनरी में आग लग गई थी।

5. हमले में कितने लोग घायल हुए?

सऊदी अधिकारियों के अनुसार, अब तक 73 नागरिकों के घायल होने की खबर है। सऊदी नीत सैन्य गठबंधन ने इन हमलों को गैर-जिम्मेदाराना करार देते हुए कहा कि वे इसका मुंहतोड़ जवाब देंगे।

6. क्यों हमला कर रहे हैं हूती विद्रोही?

हूती विद्रोहियों का दावा है कि यह हमला उन्होंने सऊदी अरब की ओर से यमन में की गई एयरस्ट्राइक के जवाब में किया है।

जेल पर एयरस्ट्राइक का आरोप: हूतियों ने आरोप लगाया था कि सऊदी अरब ने उत्तरी यमन के अल-जौफ प्रांत में एक जेल पर बमबारी की, जिसमें कई लोग मारे गए।

सैन्य प्रवक्ता की चेतावनी: हूती सैन्य प्रवक्ता यह्या सरी (Yahya Saree) ने कहा कि सऊदी अरब का हमला तनाव बढ़ाने वाला था और अब वे सऊदी अरब के अंदर “बड़ा ऑपरेशन” चलाकर इसका जवाब देंगे।

7. बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम?

यह पूरा तनाव यमन में फिर से शुरू हुई जंग के बीच बढ़ रहा है, जहां हूती विद्रोही रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाब अल-मंडेब स्ट्रैट (जलडमरूमध्य) पर अपना दबदबा बढ़ाना चाहते हैं।

यह समुद्री रास्ता अदन की खाड़ी को लाल सागर से जोड़ता है और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्तों में से एक है।

अमेरिका-ईरान तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपिंग पहले से ही प्रभावित है, ऐसे में बाब अल-मंडेब का रास्ता सऊदी अरब और वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद संवेदनशील हो गया है।

Stock to Buy: यह स्टॉक इस साल 227 फीसदी भागा है, जेफरीज ने दी खरीदने की सलाह

Stock to Buy: अगर आप किसी ऐसे शेयर की तलाश में है जिसमें कम समय में जोरदार रिटर्न देने की क्षमता हो तो आप वेलस्पन कॉर्प के बारे में सोच सकते हैं। 3 सितंबर को बाजार खुलते ही इस शेयर में उछाल देखने को मिला। यह स्टॉक ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया।

जेफरीज ने दी खरीदने की सलाह

विदेशी ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने वेलस्पन के शेयर को कवर करना शुरू किया है। उसने इस पर ‘buy’ रेटिंग यानी इसे खरीदने की सलाह दी है। उसने शेयर के लिए 3,250 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि 2 सितंबर के 2,524 रुपये के क्लोजिंग प्राइस से यह शेयर करीब 29 फीसदी चढ़ सकता है।

हर मोर्चे पर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद

जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिका और मिडिल ईस्ट में ऑयल एंड गैस इंफ्रास्ट्रक्चर में स्पेंडिंग कई साल के अपसाइकिल में है। वेलस्पन इसका फायदा उठाने की स्थिति में है, क्योंकि दोनों ही क्षेत्रों में कंपनी मैन्युफैक्चरिंग में मौजूद है। ब्रोकरेज फर्म को उम्मीद है कि FY26-FY29 के बीच कंपनी का वॉल्यूम सीएजीआर 17 फीसदी, EBITDA सीएजीआरऔर और ईपीएस सीएजीआर 32-33 फीसदी रहेगा।

अमेरिका और सऊदी अरब में कपैसिटी में 50% इजाफा

वेलस्पन कॉर्प अमेरिका और सऊदी अरब में अपनी कपैसिटी 50 फीसदी बढ़ा रही है। इससे कंपनी की अर्निंग्स ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा। इसके अलावा कंपनी के कुल रेवेन्यू में ज्यादा मार्जिन वाले विदेशी बिजनेस की हिस्सेदारी बढ़ रही है। कंपनी की ऑर्डरबुक 42,100 करोड़ रुपये की है, जो इसके FY26 के रेवेन्यू का करीब 2.5 गुना है।

रिटर्न ऑन इक्विटी भी बढ़ने की उम्मीद

कंपनी का नेट कैश पोजीशन FY26 के अंत में 1,400 करोड़ रुपये था, जिसके बढ़कर FY29 तक 3,900 करोड़ रुपये पहुंच जाने की उम्मीद है। जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि FY24-26 के दौरान कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) 21 फीसदी रहा। FY27-29 के दौरान इसके बढ़कर 22-23 फीसदी पहुंच जाने की उम्मीद है।

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इस साल 227 फीसदी चढ़ा है शेयर 

Welspun Corp का शेयर 3 सितंबर को 11:15 बजे 3.69 फीसदी चढ़कर 2,617 रुपये पर चल रहा था। इस शेयर में इस साल जबर्दस्त तेजी देखने को मिली है। 2026 में यह शेयर अब तक 227 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। इस दौरान शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों का रिटर्न निगेटिव रहा है।

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Islamic NATO: भारत के खिलाफ बांग्लादेश की साजिश? सऊदी अरब-पाकिस्तान-तुर्किये के ‘इस्लामिक NATO’ में होगा शामिल

Islamic NATO: बांग्लादेश के दो मंत्रियों ने कहा है कि उनका देश हाल में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच बने रक्षा गठबंधन में शामिल होने के लिए तैयार है। हालांकि, भारत के पड़ोसी देश ने कहा है कि इस संबंध में कोई भी फैसला राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा। 7 अगस्त को मक्का में हुए इस समझौते के तहत सामूहिक सुरक्षा और प्रतिरोध का एक ढांचा तैयार किया गया है। ‘इस्लामिक NATO’ कहे जाने वाले इस ‘मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ में प्रावधान है कि इसमें से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।

इस बीच खबर है कि फरवरी से ही अमेरिका का मुकाबला कर रहे ईरान को भी सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुए इस एग्रीमेंट में शामिल होने का न्योता दिया गया है। पाकिस्तान के SAMAA TV की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी संसद की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘खानेह मिल्लत’ के प्रमुख मेहदी रहीमी ने लेबनान के ‘अल मयादीन’ को बताया कि तेहरान को न्योता मिला है। इसके बाद इस मामले पर विचार किया जा रहा है।

बांग्लादेश ने क्या कहा?

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, नवनियुक्त विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा, “बांग्लादेश अपने हितों और वैश्विक अर्थव्यवस्था एवं व्यापार में बदलती परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये से जुड़े किसी आर्थिक या रक्षा ढांचे में शामिल होने की संभावना के प्रति सकारात्मक रुख रखता है।” कबीर ने शुक्रवार को सरकारी न्यूज एजेंसी ‘बीएसएस’ की बांग्ला सेवा को दिए इंटरव्यू में कहा कि सरकार बांग्लादेश फर्स्ट पॉलिसी और संतुलित विदेश नीति पर आगे बढ़ रही है, जिसमें राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

पाकिस्तान के करीब जा रहा ढाका!

कबीर ने कहा कि इसी नीति के तहत ढाका रक्षा समझौते में शामिल होने का फैसला कर सकता है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सामान्य राजनयिक संबंधों के माध्यम से पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों को भी मजबूत करेगा जिसे व्यापार और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शुक्रवार को विदेश मामलों के दूसरे राज्य मंत्री के रूप में नियुक्त कबीर ने कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान को सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान ने रियाद आने का निमंत्रण दिया है।

प्रधानमंत्री की इस यात्रा की तारीख गर्मियां खत्म होने के बाद निर्धारित की जा सकती है। विदेश मामलों की एक अन्य राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कबीर की बातों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि रक्षा समझौते में शामिल होने को लेकर बांग्लादेश का रुख उसके राष्ट्रीय हित और वहां के लोगों के हितों से तय होगा।

बांग्लादेशी लोगों के हित सुरक्षित हैं या नहीं?

जब उनसे पूछा गया कि क्या बांग्लादेश इस त्रिपक्षीय ढांचे का हिस्सा बनेगा तो उन्होंने कहा, “हम किसी भी समझौते या बहुपक्षीय संगठन में शामिल होंगे या नहीं, इसका फैसला मुख्य रूप से इस आधार पर होगा कि बांग्लादेश और बांग्लादेशी लोगों के हित सुरक्षित हैं या नहीं।”

दोनों मंत्रियों की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री तारिक रहमान के वित्त एवं योजना सलाहकार प्रोफेसर राशेद अल महमूद तितुमीर के उस बयान के दो दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ नीति को देश की विदेश नीति में ‘बुनियादी बदलाव’ बताया था।

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उन्होंने कहा था कि इस नीति के तहत अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ बांग्लादेश के संबंधों में राष्ट्रीय हित, संप्रभुता, आपसी सम्मान और क्षेत्रीय सौहार्द को केंद्र में रखा गया है। इसके तहत सभी देशों के साथ रचनात्मक और पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंध बनाए रखने पर जोर दिया जाएगा।

Kawasaki confirms it is going to make a hydrogen powered horse

Kawasaki confirms it is going to make a hydrogen powered horse
Kawasaki confirms it is going to make a hydrogen powered horse

Kawasaki has begun development of the Corleo, a four-legged off-road mobility vehicle powered by hydrogen. While the Corleo isn’t a two-wheeler, it comes from one of the world’s biggest motorcycle manufacturers, a company that has never shied away from unconventional ideas. Kawasaki is targeting its use as an on-site mobility vm ehicle at Expo 2030 Riyadh in Saudi Arabia and is working towards commercialisation around 2035.

  1. Four-legged off-road mobility vehicle
  2. Uses a 150cc hydrogen engine to generate electricity
  3. Commercialization targeted around 2035

Kawasaki Corleo combines motorcycle and robotics technology

The Corleo was first unveiled as a concept at Expo 2025 Osaka. Kawasaki has since established a dedicated SAFE ADVENTURE Business Development Team to develop the vehicle towards commercialisation, with potential use at Expo 2030 Riyadh forming part of its plans.

The Corleo uses four independently controlled legs instead of conventional wheels. Its rear legs feature a swingarm mechanism derived from motorcycle technology, allowing them to move independently and absorb shocks while helping maintain the rider’s posture.

The vehicle is operated through the rider’s weight shifts, much like riding a horse. Stirrups and handholds detect these movements and feed the rider’s inputs into the vehicle’s control system. Kawasaki says the system is designed to help the Corleo negotiate difficult terrain, including mountainous areas and water crossings.

Corleo uses a 150cc hydrogen engine

Hydrogen is stored in canisters at the rear of the vehicle. A 150cc hydrogen engine generates electricity to power actuators in the four legs and the vehicle body. Kawasaki says the hydrogen storage canisters are designed to be swappable, allowing them to be replaced away from conventional refuelling infrastructure.

The Corleo’s control system also monitors the vehicle’s posture and movement, helping it respond to the terrain beneath its four legs. Kawasaki is developing the machine for use in environments where conventional wheeled mobility could be difficult.

Kawasaki plans Corleo riding simulator

Kawasaki is also developing a riding simulator for the Corleo, with completion targeted for 2027. The simulator will be used to evaluate the vehicle’s riding characteristics and operation, while Kawasaki is also exploring potential applications in gaming and esports.

Kawasaki is targeting commercialisation of the Corleo around 2035, although production specifications and pricing have not yet been announced. The company is continuing development as part of its SAFE ADVENTURE initiative, which also includes technology designed to assess factors such as weather, road-surface conditions and wildlife when determining safer routes.