छात्रावास में लाठीचार्ज को लेकर केरल विधानसभा में हंगामा

केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम स्थित विश्वविद्यालय छात्रावास के भीतर छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज को लेकर सोमवार को केरल विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। अध्यक्ष के इस मुद्दे पर ‘काम रोको प्रस्ताव’ लाने की अनुमति न देने के बाद विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया।

विवाद तब बढ़ा, जब माकपा विधायक वी जॉय ने टूटी हुई पुलिस लाठी और छात्रों पर हुए हमले की तस्वीरें दिखाते हुए इस मुद्दे को उठाया। यह घटना 30 सितंबर को छात्रावास के पास स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के कार्यकर्ताओं और यूथ कांग्रेस के बीच हुई झड़प के दौरान की है।

पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाते हुए श्री जॉय ने शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने छात्रावास के भीतर पुलिस के दाखिल होने और छात्रों से मारपीट पर सवाल खड़े किए। उन्होंने घटना के दौरान छात्रों और पत्रकारों को आई चोटों का भी जिक्र किया।

इन आरोपों का जवाब देते हुए गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने कहा कि हिंसा तब शुरू हुई, जब विरोध मार्च निकाल रहे युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर छात्रावास के भीतर से बीयर की बोतलें फेंकी गयी। उन्होंने कहा कि झड़प के दौरान पत्थर और अन्य चीजें भी फेंकी गईं, जिससे पुलिसकर्मी घायल हो गये।

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पुलिस बल की संरचना में बदलाव के आरोपों को खारिज करते हुए श्री चेन्निथला ने कहा कि घटना के दौरान तैनात पुलिसकर्मी उसी बल का हिस्सा हैं, जिसने पिछली सरकार के दौरान भी सेवाएं दी थीं। उन्होंने यह भी साफ किया कि पुलिस अधिकारियों के आवासों पर विरोध प्रदर्शन करने की कोशिशों को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा।

गृह मंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा मंत्री इस घटना की जांच के आदेश दे सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने पुलिसकर्मियों के खिलाफ मिली शिकायतों की जांच कराने का भी संकेत दिया।

सरकार के दावे को खारिज करते हुए नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन ने आरोप लगाया कि युवा कांग्रेस के मार्च के दौरान छात्रावास की बिजली गुल होने के बाद विवाद शुरू हुआ। उन्होंने पुलिस पर बिना किसी वजह के छात्रों पर बल प्रयोग करने का आरोप लगाया और इस पूरे मामले पर सरकार के रुख पर सवाल उठाए।

विपक्ष की मांग थी कि छात्रावास के भीतर पुलिस कार्रवाई की व्यापक जांच हो और ज्यादतियों के लिए जवाबदेही तय की जाए। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष ने पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि पथराव और हिंसा को देखते हुए पुलिसकर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा।

तीस सितंबर को यह झड़प मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर निकाले जा रहे युवा कांग्रेस और केएसयू के मार्च के दौरान हुई थी। केरल विश्वविद्यालय हॉस्टल के पास दोनों गुटों के बीच पथराव और जलती हुई वस्तुएं फेंकने से माहौल बिगड़ गया, जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। घटना के बाद दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं के खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं।

अध्यक्ष के काम रोको प्रस्ताव की अनुमति न दिए जाने और पुलिस ज्यादती के आरोपों पर सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्यों ने विरोध स्वरूप विधानसभा से बहिर्गमन कर दिया।

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ज्ञानेश के हटने तक नहीं रूकेंगे: राहुल

नई दिल्ली। लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बुधवार को लगातार दूसरे दिन कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों के नेताओं के साथ प्रदर्शन के लिए सड़क पर उतरे। उन्होंने जंतर मंतर पर जाने की कोशिश की परंतु पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद राहुल ने कहा कि वे नहीं रूकने वाले हैं। राहुल ने दो टूक अंदाज में कहा, जब तक ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं हो जाता है तब तक हम नहीं रूकने वाले हैं…यह लड़ाई देश की सबसे पवित्र चीज को बचाने के लिए है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह कुछ भी करके हमें रोक नहीं सकते हैं।

इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी पार्टियों के सांसदों को बुधवार को कनॉट प्लेस में ‘सागर रत्ना’ रेस्तरां में दोपहर के भोजन पर बुलाया था। वहां से निकल कर सारे नेता जंतर मंतर की ओर बढ़े लेकिन पुलिस ने उनको रास्ते में रोक दिया। रोके जाने के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा सड़क पर लेट गईं। उनके हाथ में संविधान की कॉपी थी। प्रियंका ने पुलिस पर बदसलूकी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘क्या यही तरीका है? आप देख सकते हैं कि ये क्या कर रहे हैं’।

कांग्रेस और दूसरी पार्टियों के नेता बस में बैठ कर जंतर मंतर की ओर जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोका तो राहुल सड़क पर धरने पर बैठ गए। थोड़ी देर के बाद पुलिस उनको वहां से उठा कर ले गई। पुलिस ने राहुल और अन्य नेताओं को करीब एक घंटे तक बाराखंभा पुलिस स्टेशन में रखा। शाम में साढ़े सात बजे के करीब पुलिस ने सबको छोड़ दिया। उससे पहले राहुल को हिरासत में लेते समय कांग्रेस कार्यकर्ता की सुरक्षा बलों के साथ धक्कामुक्की भी हुई। पुलिस राहुल गांधी को जिस बस में लेकर जा रही थी, कांग्रेस कार्यकर्ता उसके ऊपर चढ़ गए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस की बस को भी पंक्चर कर दिया।

गौरतलब है कि एक दिन पहले मंगलवार को ‘इंडिया’ ब्लॉक के दो सौ से ज्यादा सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग के ऑफिस तक मार्च निकाला था, लेकिन उन्हें पहले ही रोक दिया गया। इसके बाद राहुल और प्रियंका ने आकाशवाणी परिसर में आठ घंटे धरना दिया था। आकाशवाणी परिसर में जबरन घुसने पर दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। विपक्षी पार्टियों के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ऊपर वोट चोरी के आरोप लगा रहे हैं और उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

इस बीच नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने कहा कि जंतर मंतर पर बीएनएसएस की धारा 163 लागू है। पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को जंतर मंतर पर जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। सचिन शर्मा ने सुरक्षाकर्मियों से सांसदों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने की अपील की। उन्होंने बताया कि सांसद और उनके समर्थक तीन बसों में जंतर मंतर जा रहे थे।

कोलकाता में कांग्रेस का विशाल प्रदर्शन

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता की सड़कों पर उतर कर हजारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में बुधवार को एक विशाल विरोध मार्च निकाला। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कहा, “यह रैली चुनावी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं के खिलाफ कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे देशव्यापी अभियान का हिस्सा है। हम चुनाव आयोग से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

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उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य पुलिस ने उनके कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई और दुर्व्यवहार भी किया। मध्य कोलकाता में आयोजित इस महारैली में श्री सरकार ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में दोबारा मतदान कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि इन क्षेत्रों में मतदाताओं को डराया-धमकाया गया और कांग्रेस के पोलिंग एजेंटों को बूथों से बाहर खदेड़ दिया गया।

प्रदर्शनकारी मध्य कोलकाता के बैंटिंक स्ट्रीट स्थित एक सिनेमा हॉल के पास एकत्र हुए और वहां से नारेबाजी करते हुए लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित ‘लोक भवन’ की ओर बढ़े। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इस बड़े प्रदर्शन के कारण शहर के केंद्रीय व्यावसायिक क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई।

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हिरासत में लेकर राहुल को हटाया

नई दिल्ली। सुरक्षा बलों की भारी घेरेबंदी के बीच दिल्ली पुलिस ने रात आठ बजे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को हिरासत में लिया और उनका ‘सत्याग्रह’ खत्म कराया। हिरासत में लिए जाने से पहले राहुल और प्रियंका कांग्रेस के अन्य नेताओं के साथ संसद मार्ग पर स्थित आकाशवाणी भवन के परिसर में करीब आठ घंटे तक धरने पर बैठे रहे। राहुल ने ऐलान कर दिया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त से मिले बगैर वे वहां से नहीं हटने वाले हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष के तीन सौ सांसदों से नहीं मिल कर मुख्य चुनाव आयुक्त लोकतंत्र का अपमान कर रहे हैं।

बहरहाल, रात आठ बजे के करीब भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच दिल्ली पुलिस ने राहुल और प्रियंका को हिरासत में लिया। दोनों को बस में बैठा कर आकाशवाणी परिसर से हटाया गया। इससे पहले जब पुलिस की टीम राहुल और प्रियंका को हटाने पहुंची तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने घेरा बना लिया। कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं ने उस बरगद की जड़ पकड़ ली, जिसके नीचे राहुल धरने पर बैठे थे। लेकिन पुलिस ने बल प्रयोग करके सबको वहां से हटा दिया और धरने की जगह को खाली करा लिया।

गौरतलब है कि मंगलवार की सुबह कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग के मुख्यालय निर्वाचन सदन की ओर मार्च किया। सैकड़ों सांसदों और पार्टियों के नेताओं ने संसद भवन से निर्वाचन सदन की ओर मार्च किया। लेकिन पुलिस ने उनको नीति आयोग के पहले रोक दिया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे राहुल गांधी रोके जाने पर बैरिकेड के ऊपर चढ़ गए। बाद में राहुल और दूसरे विपक्षी नेता आकाशवाणी भवन के परिसर में घुस गए और वहां धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिले बगैर नहीं जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान उन्हें प्रदर्शन की इजाजत देता है।

राहुल गांधी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 19 विपक्षी पार्टियों के ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ का नेतृत्व कर रहे थे। कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी, शरद पवार की एनसीपी, लालू प्रसाद की राजद, हेमंत सोरेन की जेएमएम और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सहित ज्यादातर विपक्षी पार्टियों के नेता इस मार्च में शामिल हुए। गौरतलब है कि 30 सितंबर को हुई बैठक में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक ने एसआईआर में वोट चोरी का आरोप लगाते हुए निर्वाचन सदन के घेराव का ऐलान किया था।

मंगलवार को निर्वाचन सदन का घेराव करने जा रहे विपक्षी नेताओं को पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद राहुल और प्रियंका को हिरासत में लेकर बस में बैठाया गया। लेकिन वे उतर कर आकाशवाणी परिसर में पेड़ के नीचे बैठ गए। राहुल ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने वोट चोरी में भाजपा की मदद की। गौरतलब है कि आकाशवाणी से चुनाव आयोग का मुख्यालय सिर्फ ढाई सौ मीटर दूर है। राहुल वहां तक जाने देने की मांग कर रहे हैं। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खोजी रिपोर्ट के बाद पिछले पांच दिन में चुनाव आयोग के खिलाफ दिल्ली और मुंबई में सात प्रदर्शन हुए हैं।

राहुल ‘जेन जी’ के मतदाताओं से कनेक्ट बनाने के लिए प्रदर्शन में ‘ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो’ का पोस्टर लेकर पहुंचे थे। राहुल पुलिस के लगाए बैरिकेड पर भी चढ़ गए, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया में खूब वायरल हुई। विपक्ष के इस प्रदर्शन की वजह से सेंट्रल दिल्ली में दिन भर जाम लगा रहा।

राहुल विकल्प बनने का मैसेज दे रहे हैं

यह कमाल की बात है कि राहुल गांधी को नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ लड़ना है और उन्हीं से वैधता भी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में पार्टी नेताओं से कहा कि मोदी और शाह भी मानते हैं कि वे जाएंगे तो राहुल आएंगे। हालांकि राहुल ने यह बात एक खास संदर्भ में कही। जो संदर्भ है उससे ऐसा लग रहा है कि राहुल को अब भी कांग्रेस के कई नेताओं के बारे में ऐसा लगता है कि वे उनको नेता नहीं मानते। उनको यह भी लगता है कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो उन पर भरोसा नहीं करते। इसलिए उन्होंने कहा कि वे संवैधानिक या वैधानिक नियुक्ति के पैनल की बैठक के बाद मोदी और शाह ने कहा कि राहुल आएंगे। यह बता कर राहुल ने कहा कि जब मोदी और शाह को भरोसा है तो कांग्रेस नेताओं को भी भरोसा रखना चाहिए।

हालांकि इसका यह मैसेज गया कि कांग्रेस नेता राहुल को अभी नेता नहीं मानते हैं और अपने को नेता मनवाने के लिए वे मोदी और शाह की बात का हवाला दे रहे थे। यह भी याद दिलाया गया कि अमित शाह ने कहा है कि भाजपा 50 साल तक कहीं नहीं जा रही है! तो सवाल है कि राहुल गांधी को कब तक इंतजार करना है? बहरहाल, यह सिर्फ मोदी और शाह से वैधता लेने का मामला नहीं है। राहुल लगातार यह मैसेज दे रहे हैं कि उनका समय आ गया है और वे जीत कर प्रधानमंत्री बनने वाले हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ साथ भाजपा से नाराज हो रहे और युवा मतदाताओं को वे मैसेज दे रहे हैं। इसलिए उन्होंने यह बात कही और अपने को मोदी व शाह के विकल्प के रूप में पेश किया। इसी वजह से उन्हेंने कुछ समय पहले यह भी दावा किया था कि अब उनको सरकार के अंदर से सूचनाएं मिल रही हैं।

ज्ञानेश के खिलाफ 10 राज्यों में प्रदर्शन

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस के प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है। सोमवार को कांग्रेस पार्टी ने देश के 10 राज्यों में प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आगरा में ज्ञानेश कुमार के घर पर जाकर प्रदर्शन किया, उनके घर पर कालिख पोत दी और दीवार पर लिख दिया, ‘ज्ञानेश कुमार गद्दार, वोट चोर’। राजधानी दिल्ली में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ प्रदर्शन किया। इससे पहले कांग्रेस ने 25 सितंबर को देश के सभी राज्यों की राजधानियों में प्रदर्शन और विरोध मार्च किया था।

सोमवार, 28 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, गुजरात, दिल्ली और केरलम में प्रदर्शन किया। राजस्थान के जयपुर में कांग्रेस के सारे दिग्गज नेता विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। विरोध में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा भी शामिल थे।

गौरतलब है कि ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के खुलासे के बाद कांग्रेस पार्टी दावा कर रही है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में गड़बड़ी के आरोपों की पुष्टि हो गई है। इसे लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग हो रही है। उत्तर प्रदेश में सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कई जगह प्रदर्शन किए। राजधानी लखनऊ में चुनाव आयोग का कार्यालय घेरने जा रहे कार्यकर्ताओं की पुलिस से धक्का मुक्की हुई तो वाराणसी में ज्ञानेश कुमार को पोस्टर को जूतों से पीटा गया। पूर्वांचल के गोरखपुर लेकर पश्चिमी यूपी के सहारनपुर और मुरादाबाद में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पुलिस से भिड़ंत हुई।

गौरतलब है कि पिछले दिनों ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में एक खोजी रिपोर्ट छपी थी, जिसमें दावा किया गया था कि पिछले 10 महीनों में 14 बार दोनों चुनाव आयुक्तों ने आयोग के फैसलों पर आपत्ति जताई लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनकी अदेखी की। बहरहाल, सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मध्य प्रदेश में भी जोरदार विरोध किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में कार्यकर्ता मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय का घेराव करने पहुंचे हैं। इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्कामुक्की हुई। कई कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर भी चढ़ गए। इसी तरह का प्रदर्शन दूसरे राज्यों में भी हुआ।

कर्नाटक में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शन किया, सीईसी का इस्तीफा मांगा

कर्नाटक में कांग्रेस ने शनिवार को यहां फ्रीडम पार्क में निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के खिलाफ प्रदर्शन किया और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तथा उनकी गिरफ्तारी की मांग की।

पार्टी नेताओं ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कुमार ने दो निर्वाचन आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद उनकी सहमति के बिना कई फैसले लिए।

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नेताओं ने आरोप लगाया कि एसआईआर के चलते बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए।

कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सीईसी के कथित कदमों को लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ बताते हुए प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने तख्तियां लेकर नारे लगाए और कुमार के इस्तीफे तथा उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

प्रदर्शन में मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी के हरिप्रसाद, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और वीरप्पा मोइली, राज्य के मंत्री और विधायक समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। कांग्रेस ने मैसूरु और राज्य के कई अन्य हिस्सों में भी प्रदर्शन किये।

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मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त के इस्तीफे की मांग को लेकर लखनऊ में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी ने यहां विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं को विधानसभा की ओर मार्च करने से रोके जाने पर पुलिस से उनकी झड़प हो गई।

शुक्रवार को भारी बारिश के बीच उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय, कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा के नेतृत्व में प्रदर्शन शुरू होते ही पुलिस ने अवरोधक लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया।

चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ता अवरोधकों पर चढ़ गए और नारेबाजी करने लगे, जिसके बाद उनकी पुलिस से झड़प हो गई।

इसके बाद पुलिस ने राय, मिश्रा और प्रदर्शनकारी कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर विरोध प्रदर्शन स्थल ‘इको गार्डन’ ले गई।

इस बीच प्रदेश कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ‘एक्‍स’ हैंडल से एक पोस्ट में कहा लोकतंत्र की हत्‍या करने वाले मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ज्ञानेश कुमार को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। ज्ञानेश ने देशद्रोह का काम किया है, उन्हें चुनाव आयुक्त की कुर्सी पर बैठने का कोई हक नहीं है। कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन जारी रहेगा।

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प्रदेश कांग्रेस ने एक अन्‍य पोस्ट में कहा जिन्‍हें लगता है हिरासत में लेकर आवाज दबा देंगे, वो गलतफहमी में हैं। यह आत्‍मविश्‍वास सत्‍ता के दमन पर सच की जीत का शंखनाद है 

प्रदर्शनकारियों ने बारिश के बीच अपना आंदोलन जारी रखा, महिला कार्यकर्ता “वोट चोर, गद्दी छोड़” लिखे पोस्टर लिए हुए थीं। राय ने भाजपा और चुनाव आयोग पर साजिश करने का आरोप लगाया।

उन्‍होंने कहा हक की यह लड़ाई न रुकी है, न रुकेगी! लोकतंत्र पर हमला और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं होगा 

गौतम ने भी कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की चुनावी गड़बड़ी देश हित के ख़िलाफ़ है।

मिश्रा ने कहा कि हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनावों में भी “वोट की चोरी” के आरोप लगे थे।

उन्होंने कहा, “राहुल जी सबूतों के साथ यह मुद्दा उठाते रहे हैं। आज वह मुद्दा लोगों के सामने आ गया है।”

उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी एक व्यक्ति या पार्टी का नहीं, बल्कि संविधान और देश के लोगों के वोट देने के अधिकार की रक्षा का है।

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कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ पर घमासान! राहुल-सोनिया के इशारे पर भाजपा का हमला, कांग्रेस ने दी सफाई

कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ पर घमासान! राहुल-सोनिया के इशारे पर भाजपा का हमला, कांग्रेस ने दी सफाई

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स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण के बाद ‘वंदे मातरम’ के गायन पर सियासी बवाल मच गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने वंदे मातरम के शुरुआती हिस्से के बाद भी गायन जारी रखा। इसी दौरान राहुल गांधी और सोनिया गांधी की ओर से गायन रोकने का इशारा किया गया, लेकिन कार्यकर्ताओं ने इसे नहीं रोका। ALSO READ: लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में लगातार दूसरे साल नहीं पहुंचे खरगे और राहुल गांधी, क्या सीट विवाद है वजह?

 

कांग्रेस सेवा दल के पूर्व अध्यक्ष लालजी देसाई ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए गायन पूरा कराया। कार्यक्रम के बाद राहुल गांधी और सोनिया गांधी की देसाई के साथ बातचीत भी हुई।

 

राहुल-सोनिया ने रूकने का इशारा किया

कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम’ का गायन तय हिस्से से आगे बढ़ने पर राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने इसे बीच में रोकने का संकेत दिया। हालांकि, लालजी देसाई ने दोनों नेताओं को समझाया कि गायन जारी रखा जाए। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने ‘वंदे मातरम’ पूरा गाया। बाद में राहुल गांधी और सोनिया गांधी देसाई से इस मुद्दे पर चर्चा करते नजर आए।

 

भाजपा ने मामले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया 

भाजपा ने कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ के गायन को रोकने की कोशिश बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस के शासनकाल में भी ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर विवाद सामने आए हैं। पार्टी ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं होने को लेकर भी कांग्रेस पर सवाल उठाए।

 

सोनिया गांधी गीत नहीं, खरगे के लिए कह रही थीं

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मामले में सफाई देते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को बैठने के लिए कह रही थीं, क्योंकि वह काफी देर से खड़े थे। कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को गलत तरीके से पेश किया गया घटनाक्रम बताया।

पुलिस हिरासत के समय राहुल गांधी की नाक से बहता दिखा खून, पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन के दौरान हुए चोटिल

मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस के कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई तब हुई जब सुरक्षाकर्मियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर हो रहे कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को हटाने की कोशिश की। पुलिस ने राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और विपक्ष के अन्य नेताओं को लोक कल्याण मार्ग पर प्रदर्शन स्थल से जबरदस्ती हटाने की भी कोशिश की। हटाए जाते समय राहुल गांधी ने कहा, “भारत में लोकतंत्र अभी चल रहा है।” IANS द्वारा शेयर की गई तस्वीरों में उनकी नाक से खून बहता हुआ दिखाई दिया।

बता दें कि विपक्ष के नेताओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे राहुल गांधी को हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस ने उनके साथ-साथ कई सांसदों, कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया है। इनमें कन्हैया कुमार भी शामिल हैं। प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बलों की भी तैनाती की गई है।

हिरासत में लिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने ANI से कहा, “सब कुछ आपके सामने है। देखिए किस तरह हमारे नेताओं, जिनमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी शामिल हैं, के साथ बदसलूकी की गई। क्या हम आज के देश में ऐसा माहौल चाहते हैं? क्या आपको देश में लोकतंत्र दिखाई दे रहा है? हम यहां फिर से विरोध प्रदर्शन करने आएंगे।”

हिरासत में लिए जाने से पहले, राहुल गांधी ने लोगों से विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की और छात्रों के खिलाफ की गई कथित कार्रवाई को देश पर हमला बताया।

X पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है।”

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए गांधी ने कहा, “पीएम मोदी को लगता है कि वे बिना जवाब दिए और बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे। वे ऐसा नहीं कर सकते। इस बार तो बिल्कुल नहीं।”

लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “मैं हर उस देशभक्त भारतीय से कहता हूं जो मानता है कि हमारे छात्रों को न्याय मिलना चाहिए, वे सभी प्रधानमंत्री आवास के सामने धरने में हमारे साथ शामिल हों। भारत के छात्रों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।”

इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने की और इसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा और कांग्रेस के कई सांसद शामिल हुए। पार्टी ने NEET-UG पेपर लीक मामले और प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।

यह प्रदर्शन संसद के दोनों सदनों में बार-बार हुए हंगामे के बाद हुआ, जहां विपक्षी दलों ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों, जिसमें कथित NEET-UG पेपर लीक का मामला भी शामिल था, पर चर्चा की मांग की थी। वहीं, लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित होने के बाद, कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करते हुए गए।

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन लोक कल्याण मार्ग पहुंचे और राहुल गांधी से कुछ देर बातचीत की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को धरना खत्म करने के लिए मनाने की कोशिश की।

X पर एक पोस्ट में, जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने उन्हें और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं से बात करने के लिए भेजा था। सिंह के अनुसार, राहुल गांधी ने शुरुआत में कहा था कि अगर केंद्र सरकार संसद में NEET और उससे जुड़े आंदोलन से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा कराने का आश्वासन दे देती है, तो वे प्रदर्शन खत्म कर देंगे।

सिंह ने दावा किया कि सरकार ने वह मांग मान ली थी, लेकिन बाद में गांधी ने कहा, “अब मेरी दो मांगें हैं: संसद में चर्चा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा।”

इस घटनाक्रम को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए सिंह ने आरोप लगाया कि “राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता का अपनी बात से पीछे हटना… लोकतंत्र के हर नियम के खिलाफ है,” साथ ही उन्होंने कहा कि “सरकार NEET और उससे जुड़े आंदोलन से संबंधित सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा करने के लिए तैयार है।”

News18 ने सूत्रों के हवाले से बताया कि गांधी रात तक विरोध स्थल पर ही रह सकते थे, हालांकि बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

इससे पहले दिन में, गांधी ने X पर पोस्ट किया, “कल युवा छात्रों के साथ हुई बर्बरता के बारे में जवाब मांगने के लिए हम पीएम मोदी के घर तक मार्च कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि “सरकार न तो कोई जिम्मेदारी लेना चाहती है और न ही संसद में इस पर बहस करना चाहती है। भारत के युवाओं का भविष्य बर्बाद करने के लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए।”

विपक्ष का पक्ष रखते हुए कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, “हमारी एक सीधी-सी मांग है। हमारे विपक्ष के नेताओं ने लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में यह मांग उठाई है। मांग यह है कि गृह मंत्री संसद में इस बारे में स्पष्टीकरण दें और सदन में इस मुद्दे पर चर्चा हो।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि गृह मंत्री इस बात का जवाब दें कि “किस तरह लोकतंत्र और हमारे संविधान की हत्या की जा रही है और छात्रों पर जुल्म किए जा रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी पिछले 45 दिनों से प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि संसद में चर्चा की बार-बार की गई मांगों पर कोई जवाब न मिलने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाया।

राजीव शुक्ला ने कहा, “हमारे पास कोई और विकल्प नहीं बचा था। वे संसद में बहस नहीं करवा रहे हैं। तो हम और क्या कर सकते थे? हमें सड़कों पर उतरना ही पड़ा।”

सैयद नसीर हुसैन ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और खड़गे को किसी भी सदन में बोलने नहीं दिया गया और कहा कि छात्रों को “लाठी-चार्ज, वॉटर कैनन और आंसू गैस” का सामना करना पड़ा। उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री संसद भी नहीं आते हैं। इसीलिए विपक्ष के सभी सांसद उनके आवास पर आए हैं, ताकि हमारी आवाज सुनी जा सके।”

मणिकम टैगोर ने कहा कि कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री से मिलकर शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग करना चाहता था। उन्होंने कहा, “उन्हें शिक्षा मंत्री को हटा देना चाहिए। दिल्ली पुलिस के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इसके लिए गृह मंत्री जिम्मेदार हैं। पीएम मोदी इसके लिए जिम्मेदार हैं। हमें प्रधानमंत्री से मिलने के लिए अंदर नहीं जाने दिया गया। इसलिए, वे यहां सभी सांसदों को हिरासत में ले रहे हैं।”

के. सुरेश ने आरोप लगाया, “वे हमें बेरहमी से हिरासत में ले रहे हैं। हम प्रधानमंत्री आवास के सामने विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, क्योंकि कल दिल्ली पुलिस ने हमारे छात्रों पर बेरहमी से हमला किया था।”

लोगों को हिरासत में लिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा, “यह बीजेपी का आतंकवाद है। वे छात्रों की बात नहीं सुनते।” सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा, “अगर सांसदों का यह हाल है, तो सोचिए छात्रों के साथ क्या हो रहा होगा,” वहीं इमरान मसूद ने आरोप लगाया, “वे हमारे साथ बुरा बर्ताव कर रहे हैं। छात्रों की पिटाई की गई। हमें धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ रहा है। वे संसद में भी हमारी बात सुनने को तैयार नहीं हैं।”

इससे पहले मंगलवार को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल ने दिल्ली में पुलिस कार्रवाई के दौरान घायल हुए छात्रों से मुलाकात की। वहीं दूसरी ओर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने आरएमएल अस्पताल में घायल प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की।

सोमवार को नड्डा ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के एक प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की, जिसने प्रधान के इस्तीफे, NEET उम्मीदवारों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा (जिनमें से “20 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है”) और एक अन्य मांग रखी। बैठक के बाद, CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने X पर पोस्ट किया, “हमें अभी तक सरकार से कोई जवाब नहीं मिला है। हम अपने प्रदर्शनकारियों का ख्याल रख रहे हैं। सरकार को सिर्फ फोटो खिंचवाने के बजाय प्रधान को बर्खास्त करना चाहिए!”