कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ पर घमासान! राहुल-सोनिया के इशारे पर भाजपा का हमला, कांग्रेस ने दी सफाई

कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ पर घमासान! राहुल-सोनिया के इशारे पर भाजपा का हमला, कांग्रेस ने दी सफाई

vande matram

स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण के बाद ‘वंदे मातरम’ के गायन पर सियासी बवाल मच गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने वंदे मातरम के शुरुआती हिस्से के बाद भी गायन जारी रखा। इसी दौरान राहुल गांधी और सोनिया गांधी की ओर से गायन रोकने का इशारा किया गया, लेकिन कार्यकर्ताओं ने इसे नहीं रोका। ALSO READ: लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में लगातार दूसरे साल नहीं पहुंचे खरगे और राहुल गांधी, क्या सीट विवाद है वजह?

 

कांग्रेस सेवा दल के पूर्व अध्यक्ष लालजी देसाई ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए गायन पूरा कराया। कार्यक्रम के बाद राहुल गांधी और सोनिया गांधी की देसाई के साथ बातचीत भी हुई।

 

राहुल-सोनिया ने रूकने का इशारा किया

कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम’ का गायन तय हिस्से से आगे बढ़ने पर राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने इसे बीच में रोकने का संकेत दिया। हालांकि, लालजी देसाई ने दोनों नेताओं को समझाया कि गायन जारी रखा जाए। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने ‘वंदे मातरम’ पूरा गाया। बाद में राहुल गांधी और सोनिया गांधी देसाई से इस मुद्दे पर चर्चा करते नजर आए।

 

भाजपा ने मामले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया 

भाजपा ने कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ के गायन को रोकने की कोशिश बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस के शासनकाल में भी ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर विवाद सामने आए हैं। पार्टी ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं होने को लेकर भी कांग्रेस पर सवाल उठाए।

 

सोनिया गांधी गीत नहीं, खरगे के लिए कह रही थीं

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मामले में सफाई देते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को बैठने के लिए कह रही थीं, क्योंकि वह काफी देर से खड़े थे। कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को गलत तरीके से पेश किया गया घटनाक्रम बताया।

पुलिस हिरासत के समय राहुल गांधी की नाक से बहता दिखा खून, पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन के दौरान हुए चोटिल

मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस के कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई तब हुई जब सुरक्षाकर्मियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर हो रहे कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को हटाने की कोशिश की। पुलिस ने राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और विपक्ष के अन्य नेताओं को लोक कल्याण मार्ग पर प्रदर्शन स्थल से जबरदस्ती हटाने की भी कोशिश की। हटाए जाते समय राहुल गांधी ने कहा, “भारत में लोकतंत्र अभी चल रहा है।” IANS द्वारा शेयर की गई तस्वीरों में उनकी नाक से खून बहता हुआ दिखाई दिया।

बता दें कि विपक्ष के नेताओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे राहुल गांधी को हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस ने उनके साथ-साथ कई सांसदों, कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया है। इनमें कन्हैया कुमार भी शामिल हैं। प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बलों की भी तैनाती की गई है।

हिरासत में लिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने ANI से कहा, “सब कुछ आपके सामने है। देखिए किस तरह हमारे नेताओं, जिनमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी शामिल हैं, के साथ बदसलूकी की गई। क्या हम आज के देश में ऐसा माहौल चाहते हैं? क्या आपको देश में लोकतंत्र दिखाई दे रहा है? हम यहां फिर से विरोध प्रदर्शन करने आएंगे।”

हिरासत में लिए जाने से पहले, राहुल गांधी ने लोगों से विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की और छात्रों के खिलाफ की गई कथित कार्रवाई को देश पर हमला बताया।

X पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है।”

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए गांधी ने कहा, “पीएम मोदी को लगता है कि वे बिना जवाब दिए और बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे। वे ऐसा नहीं कर सकते। इस बार तो बिल्कुल नहीं।”

लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “मैं हर उस देशभक्त भारतीय से कहता हूं जो मानता है कि हमारे छात्रों को न्याय मिलना चाहिए, वे सभी प्रधानमंत्री आवास के सामने धरने में हमारे साथ शामिल हों। भारत के छात्रों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।”

इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने की और इसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा और कांग्रेस के कई सांसद शामिल हुए। पार्टी ने NEET-UG पेपर लीक मामले और प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।

यह प्रदर्शन संसद के दोनों सदनों में बार-बार हुए हंगामे के बाद हुआ, जहां विपक्षी दलों ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों, जिसमें कथित NEET-UG पेपर लीक का मामला भी शामिल था, पर चर्चा की मांग की थी। वहीं, लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित होने के बाद, कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करते हुए गए।

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन लोक कल्याण मार्ग पहुंचे और राहुल गांधी से कुछ देर बातचीत की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को धरना खत्म करने के लिए मनाने की कोशिश की।

X पर एक पोस्ट में, जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने उन्हें और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं से बात करने के लिए भेजा था। सिंह के अनुसार, राहुल गांधी ने शुरुआत में कहा था कि अगर केंद्र सरकार संसद में NEET और उससे जुड़े आंदोलन से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा कराने का आश्वासन दे देती है, तो वे प्रदर्शन खत्म कर देंगे।

सिंह ने दावा किया कि सरकार ने वह मांग मान ली थी, लेकिन बाद में गांधी ने कहा, “अब मेरी दो मांगें हैं: संसद में चर्चा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा।”

इस घटनाक्रम को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए सिंह ने आरोप लगाया कि “राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता का अपनी बात से पीछे हटना… लोकतंत्र के हर नियम के खिलाफ है,” साथ ही उन्होंने कहा कि “सरकार NEET और उससे जुड़े आंदोलन से संबंधित सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा करने के लिए तैयार है।”

News18 ने सूत्रों के हवाले से बताया कि गांधी रात तक विरोध स्थल पर ही रह सकते थे, हालांकि बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

इससे पहले दिन में, गांधी ने X पर पोस्ट किया, “कल युवा छात्रों के साथ हुई बर्बरता के बारे में जवाब मांगने के लिए हम पीएम मोदी के घर तक मार्च कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि “सरकार न तो कोई जिम्मेदारी लेना चाहती है और न ही संसद में इस पर बहस करना चाहती है। भारत के युवाओं का भविष्य बर्बाद करने के लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए।”

विपक्ष का पक्ष रखते हुए कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, “हमारी एक सीधी-सी मांग है। हमारे विपक्ष के नेताओं ने लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में यह मांग उठाई है। मांग यह है कि गृह मंत्री संसद में इस बारे में स्पष्टीकरण दें और सदन में इस मुद्दे पर चर्चा हो।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि गृह मंत्री इस बात का जवाब दें कि “किस तरह लोकतंत्र और हमारे संविधान की हत्या की जा रही है और छात्रों पर जुल्म किए जा रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी पिछले 45 दिनों से प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि संसद में चर्चा की बार-बार की गई मांगों पर कोई जवाब न मिलने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाया।

राजीव शुक्ला ने कहा, “हमारे पास कोई और विकल्प नहीं बचा था। वे संसद में बहस नहीं करवा रहे हैं। तो हम और क्या कर सकते थे? हमें सड़कों पर उतरना ही पड़ा।”

सैयद नसीर हुसैन ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और खड़गे को किसी भी सदन में बोलने नहीं दिया गया और कहा कि छात्रों को “लाठी-चार्ज, वॉटर कैनन और आंसू गैस” का सामना करना पड़ा। उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री संसद भी नहीं आते हैं। इसीलिए विपक्ष के सभी सांसद उनके आवास पर आए हैं, ताकि हमारी आवाज सुनी जा सके।”

मणिकम टैगोर ने कहा कि कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री से मिलकर शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग करना चाहता था। उन्होंने कहा, “उन्हें शिक्षा मंत्री को हटा देना चाहिए। दिल्ली पुलिस के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इसके लिए गृह मंत्री जिम्मेदार हैं। पीएम मोदी इसके लिए जिम्मेदार हैं। हमें प्रधानमंत्री से मिलने के लिए अंदर नहीं जाने दिया गया। इसलिए, वे यहां सभी सांसदों को हिरासत में ले रहे हैं।”

के. सुरेश ने आरोप लगाया, “वे हमें बेरहमी से हिरासत में ले रहे हैं। हम प्रधानमंत्री आवास के सामने विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, क्योंकि कल दिल्ली पुलिस ने हमारे छात्रों पर बेरहमी से हमला किया था।”

लोगों को हिरासत में लिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा, “यह बीजेपी का आतंकवाद है। वे छात्रों की बात नहीं सुनते।” सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा, “अगर सांसदों का यह हाल है, तो सोचिए छात्रों के साथ क्या हो रहा होगा,” वहीं इमरान मसूद ने आरोप लगाया, “वे हमारे साथ बुरा बर्ताव कर रहे हैं। छात्रों की पिटाई की गई। हमें धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ रहा है। वे संसद में भी हमारी बात सुनने को तैयार नहीं हैं।”

इससे पहले मंगलवार को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल ने दिल्ली में पुलिस कार्रवाई के दौरान घायल हुए छात्रों से मुलाकात की। वहीं दूसरी ओर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने आरएमएल अस्पताल में घायल प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की।

सोमवार को नड्डा ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के एक प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की, जिसने प्रधान के इस्तीफे, NEET उम्मीदवारों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा (जिनमें से “20 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है”) और एक अन्य मांग रखी। बैठक के बाद, CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने X पर पोस्ट किया, “हमें अभी तक सरकार से कोई जवाब नहीं मिला है। हम अपने प्रदर्शनकारियों का ख्याल रख रहे हैं। सरकार को सिर्फ फोटो खिंचवाने के बजाय प्रधान को बर्खास्त करना चाहिए!”

दतिया उपचुनाव : भारत सिंह कुशवाह बोले- विकास के दम पर जीतेंगे, भाजपा को मिल रहा बड़ा समर्थन

MP Bharat Singh Kushwah visited Datia in connection with the by election

– भाजपा ने हर वर्ग और हर समाज को कुछ न कुछ दिया, अब देने की बारी आपकी है

– भाजपा ने विकास के कार्यों में कभी कमी नहीं रखी और आगे भी यह विकास होते रहेंगे

– हमारा संकल्प है सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास, इसे पूरा करेंगे

Bharat Singh Kushwah : दतिया उपचुनाव के प्रभारी व ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाह ने शनिवार को दतिया में कुशवाह समाज, पाल-बघेल समाज एवं लोधी समाज के वरिष्ठजनों, प्रबुद्धजनों एवं संगठनों के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर समाजजनों को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा ने हर वर्ग, हर समाज को कुछ न कुछ दिया है। अब सभी समाजों की बारी है कि वह भाजपा प्रत्याशी को अपना आशीर्वाद देकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का हाथ मजबूत करें। भाजपा ने विकास के कार्यों में कभी कमी नहीं रखी, आगे भी विकास ही हमारा मुख्य लक्ष्य होगा। उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास, इसे हर हाल में पूरा करेंगे। 
 

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने थामा भाजपा का दामन

दतिया विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के जनकल्याणकारी कार्यों और भारतीय जनता पार्टी की रीति-नीति से प्रभावित होकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इस अवसर पर सभी ने उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को विजयी बनाने का संकल्प लिया।

भाजपा सरकार ने विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी

ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाह ने कहा कि भाजपा सरकारों ने दतिया के विकास में काई कसर नहीं छोड़ी है। भाजपा ने सभी समाज वर्ग के कल्याण के लिए कार्य किया है। सभी समाज के लोग भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को ऐतिहासिक मतों से विजयी बनाने के लिए अपना आशीर्वाद प्रदान करें।

उन्होंने सामाजिक संगठनों के वरिष्ठजनों, पदाधिकारियों एवं समाजजनों से अपील की है कि वे भाजपा प्रत्याशी को विजयी बनाने में अपना सहयोग दें, ताकि भाजपा की डबल इंजन की सरकार में एक विकास का डिब्बा और जुड़ जाए। इस दौरान सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों एवं वरिष्ठजनों ने विश्वास दिलाया है कि वे भाजपा के विकास के साथ थे और आगे भी रहेंगे।
 

ये रहे उपस्थित

कुशवाह समाज की बैठक में दतिया जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह, पूर्व मंत्री राजकुमार कुशवाह, कालीचरण कुशवाह, जिला उपाध्यक्ष श्रीमती रानी कुशवाह, भगवान सिंह कुशवाह, राजाराम कुशवाह, घनश्याम बाबूजी, इमरत कुशवाह, मानसिंह कुशवाह सहित समाज के वरिष्ठगण एवं युवा साथी उपस्थित रहे।
 

पाल-बघेल समाज की बैठक में अखिल भारतीय पाल महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्षशैतान सिंह पाल, कुक्कुट विकास निगम के अध्यक्ष केशव सिंह बघेल, जिला अध्यक्ष पिछड़ा वर्ग मोर्चा मनोहर फौजी, रामसिंह पाल, हरगोविंद बघेल, डॉ अरविंद पाल, घुमक्कड़ आयोग जिला अध्यक्ष जयराम पाल, कमलेश पाल, डॉ ब्रजेश पाल, हरगोविंद पाल, रामसेवक पाल, वेद पाल, पंजाब सिंह पाल सहित पाल बघेल समाज के वरिष्ठगण उपस्थित रहे। लोधी समाज की बैठक में भाजपा विधायक प्रीतम लोधी के साथ समाज के वरिष्ठजन, पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

मध्यप्रदेश में दिग्विजय–जीतू पटवारी विवाद में अरुण यादव की एंट्री, राहुल गांधी से हस्तक्षेप की मांग, कांग्रेस महासचिव ने लगाया पुत्र मोह का आरोप

भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के बीच चल रही बयानबाजी और तल्खी अब नए राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गई है। इस विवाद में अब पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के सीनियर नेता अरुण यादव की भी एंट्री हो गई है। इसके साथ कांग्रेस के सीनियर नेता सत्यवत चतुर्वेदी की बेटी और पार्टी की महासचिव निधि चतुर्वेदी ने दिग्विजय सिंह पर निशाना साधा है।
 
पूर्व मंत्री अरुण यादव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से सीधे हस्तक्षेप करने और प्रदेश संगठन में एकता कायम करने की अपील की है। सोशल मीडिया पर अरुण यादव ने लिखा कि माननीय राहुल गांधी जी, मध्यप्रदेश में आंतरिक संघर्ष और असफलताओं सहित अन्य समस्याओं से जूझ रही भारतीय जनता पार्टी और उसकी सरकार से जब इस दौर में भी पार्टी संगठन का वास्तविक निष्ठावान कार्यकर्ता वैचारिक और सतही तौर पर संघर्ष कर रहा है उस दौर में कतिपय लोग एक मिलीजुली साजिश के तहत उन कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने की नाकाम कोशिश कर रहे है, इस बात में भी कोई संदेह नहीं है कि युवाओं का जोश और पार्टी के अनुभवी नेताओं का होश मिलजुल कर ही फासीवादी विचारधारा का सामना कर पाएगा ऐसी स्थिति में जवाबदार लोग ही अपनी व्यक्तिगत पीड़ा और वैमनस्यता पार्टी के कार्यकर्ताओं की कीमत पर भुनाने की कोशिश करेंगे तो वह समयोचित नहीं होगी । कृपा कर केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप से संघर्षशील कार्यकर्ताओं के मनोबल को टूटने से बचाएं तथा संगठनात्मक एकता को सुदृढ़ करवाने की कृपा करें।
 
पुत्र मोह में फंसे दिग्विजय सिंह-वहीं प्रदेश कांग्रेस महासचिव निधि चतुर्वेदी ने कांग्रेस हाईकमान से दिग्विजय सिंह के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर 'दिग्विजय का नागपाश, कांग्रेस पर प्रहार' नाम से एक लेख लिखा है। पोस्ट में उन्होंने लिखा कि “अपनों के ही इस घातक बाण से कब मुक्त होगी मध्य प्रदेश कांग्रेस? उज्जैन के भूमि विवाद और वीर भारत न्यास के मामले में सच क्या है और झूठ क्या, कौन सही है और कौन गलत, यह जांच का विषय हो सकता है। आज हर सच्चे कांग्रेसी का सिर शर्म से झुक गया है। दिग्विजय सिंह जैसे वरिष्ठ नेता ने प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ जिस प्रकार मोर्चा खोला वह निंदनीय है।
 
इसके साथ ही उन्होंने लिखा कि अगर जीतू पटवारी कहीं गलत भी थे, तो वरिष्ठ और मार्गदर्शक होने के नाते दिग्विजय सिंह उन्हें आमने-सामने बैठकर या फ़ोन करके बता सकते थे। उनके पास दिल्ली से लेकर भोपाल तक पार्टी के तमाम आंतरिक मंच उपलब्ध हैं, जहां वे अपनी बात रख सकते थे. लेकिन इन सब मर्यादाओं को दरकिनार कर हाथ में फ़ाइल लेकर उज्जैन जाकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस बात को उछालने का क्या औचित्य है? इस तरह सरेआम मीडिया के सामने प्रदेश अध्यक्ष के बयान को खारिज करना और उनके लिए अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करना, जायज़ नहीं ठहराया जा सकता. आखिर यह सारी कवायद क्यों की गई।
 
निधि चतुर्वेदी का कहना है “दिग्विजय सिंह की यह छटपटाहट, यह गुस्सा और यह अमर्यादित आचरण और कुछ नहीं, बल्कि 'पुत्र-मोह' में उठाया गया बेहद अशोभनीय, पीड़ादायक और निंदनीय कदम है। अपने बेटे जयवर्धन सिंह को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाने की महत्वाकांक्षा में वे भूल चुके हैं कि पार्टी का अनुशासन क्या होता है। जब देशभर में राहुल गांधी भाजपा और संघ की जनविरोधी विचारधारा के खिलाफ सड़कों पर लाठियां खा रहे हैं, तब पार्टी के एक शीर्ष नेता द्वारा इस तरह की बयानबाज़ी करना कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर करारा तमाचा है।

Mallikarjun Kharge: “चुप रहो, बैठ जाओ!” कांग्रेस कार्यक्रम में ‘डीके-डीके’ नारे लगाने पर भड़के खड़गे, कार्यकर्ताओं को लगाई फटकार

Mallikarjun Kharge: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने रविवार को पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान हंगामा करने वाले कार्यकर्ताओं को जमकर फटकार लगाई। दरअसल, कार्यक्रम के बीच कुछ कार्यकर्ता कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थन में “डीके-डीके” के नारे लगाने लगे, जिससे खड़गे नाराज हो गए। उन्होंने कार्यकर्ताओं को डांटते हुए कहा कि यह कांग्रेस का कार्यक्रम है, किसी एक नेता का नहीं। उन्होंने गुस्से में कहा, “चुप रहो! बैठ जाओ। ऐसा लग रहा है जैसे पूरा देश तुम्हारे हाथ में आ गया हो। बेकार लोग!”

खड़गे ने चिल्लाते हुए कहा, “यह कांग्रेस पार्टी की बैठक है। यह किसी एक व्यक्ति के लिए आयोजित कार्यक्रम नहीं है। हम सभी लोग यहां पार्टी को मजबूत और एकजुट करने के लिए इकट्ठा हुए हैं। अगर एक व्यक्ति एक नाम का नारा लगाता है और दूसरा किसी और नाम का, तो क्या बाकी लोग यहां सिर्फ कचरा साफ करने आए हैं?”

खड़गे ने कार्यकर्ताओं को दी चेतावनी

राजनीति में अपने 58 साल के लंबे करियर का जिक्र करते हुए, उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि पार्टी ही उनकी पहचान का आधार है और उन्हें चेतावनी दी कि उनके अनुशासनहीन व्यवहार पर कार्रवाई जरूर होगी। उन्होंने कहा, “याद रखिए… पार्टी के लिए अनुशासन हमेशा जरूरी है। जो भी यहां शोर मचा रहा है, उसका फुटेज होगा। फुटेज देखने के बाद मैं अनुशासनात्मक कार्रवाई करूंगा।”

वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा कार्यकर्ताओं को फटकार लगाने पर बीजेपी नेता गौरव वल्लभ ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि इस घटना से कांग्रेस के भीतर सत्ता के लिए चल रही खींचतान उजागर हो गई है। वल्लभ ने आरोप लगाया कि खड़गे खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते थे।

इसके अलावा, बीजेपी नेता ने कांग्रेस के नेतृत्व पर भी तंज कसते हुए कहा कि पार्टी तीन “होल्डिंग कंपनियों” द्वारा नियंत्रित है – सोनिया गांधी के लिए “कांग्रेस M”, प्रियंका गांधी के लिए “कांग्रेस P” और राहुल गांधी के लिए “कांग्रेस R”, जबकि खड़गे वाली “कांग्रेस K” केवल उनकी सहायक कंपनी के रूप में काम करती है।

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