जंतर-मंतर विरोध-प्रदर्शन के बीच अभिजीत दीपके की दादी का निधन, अभी हिरासत में हैं CJP फाउंडर

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शनिवार, 10 अक्टूबर को राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया है। इस बीच खबर है कि CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके की दादी का उनके पैतृक गांव में निधन हो गया। वह पिछले कुछ दिनों से बीमार थीं। दीपके इस विरोध-प्रदर्शन के लिए मुंबह से दिल्ली आए हैं।

दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को राष्ट्रीय राजधानी में उनका प्लेन उतरते ही हिरासत में ले लिया। दीपके का पैतृक गांव महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में संतुक पिंपरी है। दीपके का परिवार छत्रपति संभाजीनगर में रहता है। लेकिन दादी पैतृक गांव में ही रह रही थीं और शनिवार सुबह वहीं उनका निधन हो गया। वह पिछले कुछ दिनों से बीमार थीं।

दीपके के माता-पिता हिंगोली जाने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन यह अभी साफ नहीं है कि दादी के निधन के बाद दिल्ली पुलिस दीपके को उनके पैतृक गांव जाने की इजाजत कब देगी। CJP ने एक बयान जारी कर अभिजीत दीपके को हिरासत में लिए जाने की निंदा की है। दावा किया कि है यह उसके नेताओं को प्रस्तावित प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से रोकने के लिए पहले से बनाई गई योजना का हिस्सा है।

CJP ने कहा है कि जब तक दीपके, दास और रांका हिरासत में रहेंगे, तब तक पार्टी के संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे। CEC ज्ञानेश कुमार पर मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की आड़ में मतदाता सूचियों में गड़बड़ी करने का आरोप लगा है। साथ ही वोटर रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज ‘फॉर्म 6’ में बदलाव के लिए दो सहयोगी निर्वाचन आयुक्तों की आपत्ति को दरकिनार करने के आरोप भी हैं।

आकाशवाणी भवन के निकट पुलिस पर पथराव, दो पुलिसकर्मी घायल

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, CJP के प्रदर्शन के दौरान शनिवार को प्रदर्शनकारियों ने अवरोधकों को लांघने के बाद आकाशवाणी भवन के निकट इम्तियाज अली मार्ग पर सुरक्षाकर्मियों पर कथित तौर पर पथराव किया। इसमें दो पुलिसकर्मी घायल हो गए। दोपहर में 25 से 30 प्रदर्शनकारियों ने इम्तियाज अली मार्ग पर लगे अवरोधकों को पार कर सुरक्षाकर्मियों पर पथराव किया। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है और कार्रवाई के दौरान दो पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शनिवार सुबह साढ़े 10 बजे शुरू होना था, लेकिन पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों ने प्रदर्शनकारियों को तय स्थल तक पहुंचने से रोक दिया। नई दिल्ली जिले में निषेधाज्ञा लागू है। कनॉट प्लेस सहित कई स्थानों से कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है, जबकि कई अन्य को लौटा दिया गया। इससे पहले पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था और जंतर-मंतर के पास किसी भी जमावड़े को रोकने के लिए प्रमुख चौराहों व संपर्क मार्गों पर पुलिसबल तैनात कर दिया।

₹1500 के टिकट का हिसाब मांग रही पुलिस! जंतर-मंतर आंदोलन से पहले इस बात पर भड़के अभिजीत दीपके

Abhijeet Dipke CJP Delhi Protest: देश की राजधानी दिल्ली में 10 अक्टूबर को बड़ा आंदोलन होने वाला है। इस प्रस्तावित बड़े विरोध प्रदर्शन से ठीक पहले राजनीतिक हलचलों के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंगलवार को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।

दीपके का दावा है कि 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले आंदोलन में शामिल होने से रोकने के लिए पुलिस उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को लगातार परेशान कर रही है और उन्हें कानूनी नोटिस जारी कर रही है।

‘1500 रुपये की टिकट से क्या दिक्कत?’

अभिजीत दीपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महाराष्ट्र की चंद्रपुर पुलिस की कार्रवाई पर तीखा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा, ‘मैंने हमेशा कहा है कि महाराष्ट्र पुलिस देश की सबसे बेहतरीन पुलिस फोर्स है और दिल्ली पुलिस को उनसे सीखना चाहिए। लेकिन यह बेहद दुखद है कि चंद्रपुर पुलिस ने सीजेपी कार्यकर्ताओं को नोटिस थमाकर जंतर-मंतर आंदोलन में हिस्सा न लेने की हिदायत दी है। पुलिस कार्यकर्ताओं से यह भी पूछ रही है कि उनके दिल्ली सफर का खर्च कौन उठा रहा है और पैसे कहाँ से आए?’

दीपके ने सवाल उठाया कि क्या अब देश का कोई आम नागरिक अपनी जेब से 1,000 या 1,500 रुपये का रेल टिकट खरीदकर राजधानी नहीं जा सकता? उन्होंने कहा कि यात्रा के मामूली खर्चों पर सवाल उठाना और कार्यकर्ताओं को रोकना खुलेआम तानाशाही है।

‘क्या पुलिस ने पहले ही हिंसा का प्लान बना रखा है?’

पुलिस नोटिस में आंदोलन के संभावित रूप से ‘हिंसक’ होने की बात लिखे जाने पर सीजेपी प्रमुख ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, ‘पुलिस को इतने दिन पहले ही कैसे पता चल गया कि आंदोलन हिंसक होने वाला है? क्या पुलिस ने पहले से ही कुछ योजना बना रखी है?’

साथ ही, पुलिस द्वारा कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया पर पोस्ट न करने के निर्देशों पर भी दीपके ने एतराज जताया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी महात्मा गांधी और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के विचारों पर चलती है, तो पुलिस इसे हिंसक कैसे मान सकती है?

10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की वजह क्या है?

गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। पार्टी की मुख्य मांगें ये हैं:

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) का इस्तीफा: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की खबरों को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग।

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का विरोध: केंद्र सरकार की इस योजना पर निशाना साधते हुए दीपके ने आरोप लगाया कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ केवल एक नारा है और इसके पीछे की असली मंशा ‘वन नेशन, वन पॉलिटिकल पार्टी’ (एक देश, एक ही राजनीतिक दल) लागू करना है।

पुलिसिया कार्रवाई और नोटिस के बावजूद सीजेपी का कहना है कि वे दिल्ली में अपना विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के फैसले पर कायम हैं।

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पानी की भारी किल्लत, पिछले साल के मुकाबले आधे रह गए जलाशय, क्या प्यासा रहेगा देश?

देश के कई राज्यों में कम बारिश का असर अब जलाशयों पर दिख रहा है। 1 अक्टूबर तक देश के प्रमुख जलाशयों में 71.84% पानी था। पिछले साल इसी समय यह 90.31% था, जबकि सामान्य स्तर 81.79% है। यानी इस बार जलाशयों में पानी पिछले साल के मुकाबले काफी कम है।

पानी की कमी का असर महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, राजस्थान और तमिलनाडु में ज्यादा दिख रहा है। कई इलाकों में खेती के लिए पानी कम पड़ रहा है और फसलों को भी नुकसान हो रहा है।

आंध्र प्रदेश में तेजी से घटा पानी का लेवल

आंध्र प्रदेश में जलाशयों का पानी काफी कम हो गया है। 1 अक्टूबर तक यहां सिर्फ 35.14% पानी बचा था। पिछले साल इसी समय यह 88.60% था, जबकि सामान्य स्तर 71.85% है। कम बारिश और फसल खराब होने से राज्य के आधे से ज्यादा हिस्से में सूखा घोषित किया गया है।

कर्नाटक में सूखे जैसे हालात

1 अक्टूबर तक कर्नाटक के जलाशयों में 59.98% पानी था। पिछले साल इसी समय यह 89.16% और सामान्य स्तर 80.42% था।

पानी का स्तर कम होने से राज्य में सिंचाई और खेती को लेकर चिंता बढ़ रही है। सूखे जैसे हालात का असर किसानों पर भी दिखाई दे रहा है।

महाराष्ट्र में मराठवाड़ा और विदर्भ की हालत खराब

5 अक्टूबर तक महाराष्ट्र के जलाशयों में 74.29% पानी था। पिछले साल इसी तारीख को यह 89.22% था। मराठवाड़ा और विदर्भ में कई जलाशयों की स्थिति इससे भी ज्यादा खराब है।

• छत्रपति संभाजीनगर में पानी का भंडार 43.55% था, जबकि पिछले साल 82.96% था।

• अमरावती में इस बार 62.92% पानी रहा, जो पिछले साल 85.87% था।

• नागपुर में पानी का स्तर 72.02% रहा, जबकि पिछले साल यह 89.08% था।

कई इलाकों में फसलें खराब हुई हैं। अगर अगले फसल सीजन तक पानी की स्थिति नहीं सुधरी, तो किसानों और गांवों में रहने वाले परिवारों की मुश्किल बढ़ सकती है।

राजस्थान में कई इलाकों में सूखे का असर

5 अक्टूबर तक राजस्थान के जलाशयों में 61.93% पानी था। जोधपुर में हालात ज्यादा खराब हैं। यहां सिर्फ 15.72% पानी बचा है, जबकि पिछले साल इसी समय 80.25% पानी था।

पाली, जालौर और जैसलमेर में सूखे की स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। जोधपुर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, बालोतरा, राजसमंद, उदयपुर और सिरोही भी प्रभावित इलाकों में शामिल हैं।

कम बारिश का असर बाजरा, मोठ, सोयाबीन, मूंग और दूसरी खरीफ फसलों पर भी पड़ा है। राज्य सरकार ने कुछ इलाकों में सूखे से राहत के लिए कदम उठाए हैं।

तेलंगाना में सूखा घोषित करने की मांग

तेलंगाना के जलाशयों में भी पानी काफी कम है। 1 अक्टूबर तक यहां 40.75% पानी था, जबकि पिछले साल इसी समय 86.10% था। सामान्य स्तर 78.95% है।

कम बारिश और फसल के नुकसान को देखते हुए विपक्षी दल सूखा घोषित करने की मांग कर रहे हैं। पानी का स्तर कम होने से आने वाले समय में खेती और पीने के पानी को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

तमिलनाडु में भी बड़ा अंतर

तमिलनाडु में 1 अक्टूबर तक जलाशयों में 37.27% पानी था। पिछले साल इसी समय यह 91.96% था। राज्य का सामान्य स्तर 66% है।

यानी इस बार पानी का भंडार पिछले साल के मुकाबले काफी नीचे है। इससे सिंचाई और आने वाले फसल सीजन को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

केरल की स्थिति सामान्य से नीचे

केरल में जलाशयों का स्टोरेज 59.88% था। पिछले साल यह 76.06% और सामान्य स्तर 69.75% था। यहां भी पानी का भंडार पिछले साल और सामान्य स्तर दोनों से कम है।

कम पानी से बढ़ सकती है ये परेशानियां

• जलाशयों में पानी कम होने का सीधा असर सिंचाई और पीने के पानी पर पड़ सकता है। इसके साथ ही पनबिजली उत्पादन पर भी दबाव आ सकता है।

• सूखे की स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो किसानों की फसल और कमाई प्रभावित हो सकती है। ग्रामीण इलाकों में काम के मौके घटने से लोगों के दूसरे जगहों पर जाने का खतरा भी बढ़ सकता है।

• महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने यह भी चेतावनी दी है कि सूखे के दौरान बाल विवाह के मामले बढ़ सकते हैं।

आने वाले कुछ हफ्ते काफी अहम हैं। अच्छी बारिश हुई तो जलाशयों में पानी बढ़ सकता है और खेती की परेशानी कुछ कम हो सकती है। लेकिन बारिश कम हुई तो पानी की कमी और फसल के नुकसान से किसानों और ग्रामीण परिवारों की मुश्किल बढ़ सकती है।

महाराष्ट्र सरकार ने 358 तालुकों में 265 को सूखा प्रभावित घोषित किया

महाराष्ट्र सरकार ने शनिवार को राज्य के 358 तालुकों में से 265 को सूखा प्रभावित घोषित करते हुए राहत उपायों की घोषणा की, जिनमें फसल ऋण नियमों को आसान बनाने, भू-राजस्व में छूट और बिजली बिल में सब्सिडी शामिल है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जिला कलेक्टरों को फसल के नुकसान का आकलन तुरंत शुरू करने का निर्देश दिया है और भरोसा दिलाया है कि सूखे की स्थिति में सरकार की राहत कोशिशों के केंद्र में किसान ही रहेंगे।

शुक्रवार देर रात जारी सरकारी आदेश के अनुसार, 32 जिलों में फैले 265 तालुका मे राज्य का 74 प्रतिशत हिस्सा आ गया है।

उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने कहा कि किसानों को दी जाने वाली वास्तविक आर्थिक सहायता का निर्णय जमीनी स्तर पर आकलन के बाद किया जाएगा।

राज्य सरकार ने सूखे की स्थिति घोषित करने और राहत कार्य शुरू करने के लिए अपने ‘सूखा प्रबंधन नियम 2016’ (2020 में अद्यतन) और ‘सूखा प्रबंधन संहिता’ के तहत ‘ट्रिगर-1’ कदम लागू किया है।

‘ट्रिगर-1’ राज्य के सूखा प्रबंधन ढांचे का पहला चरण है। इसे तब लागू किया जाता है जब बारिश में 25 प्रतिशत से ज़्यादा की कमी हो और 21 दिन तक लगातार सूखे (बिना बारिश वाला समय) का दौर रहे।

कृषि आयुक्त की एक रिपोर्ट में पाया गया कि जून से बारिश कम होने और अन्य कारणों से 32 जिलों के 265 तालुकों में सूखे जैसे हालात हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, छत्रपति संभाजीनगर मंडल में सूखे से प्रभावित तालुकाओं की संख्या सबसे ज्यादा (74) है; इसके बाद अमरावती (56), नासिक (49), नागपुर (39), पुणे (35) और ठाणे (12) का स्थान है।

छत्रपति संभाजीनगर मंडल में जालना, बीड, लातूर, धाराशिव, नांदेड़, परभणी और हिंगोली जिले शामिल हैं, जबकि बुलढाणा, अमरावती, अकोला, वाशिम और यवतमाल जिले अमरावती मंडल के अंतर्गत आते हैं।

नागपुर मंडल में वर्धा, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर और गढ़चिरौली शामिल हैं।

नासिक, धुले, जलगांव, नंदुरबार और अहिल्यानगर जिलों में 49 तालुका और पुणे, सोलापुर, सांगली, सतारा और कोल्हापुर जिलों में 35 तालुका को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने फडणवीस के हवाले से कहा, “सूखे की स्थिति में हमारे राहत कार्यों के केंद्र में किसान, खेतिहर मजदूर और अन्य कामगार हैं। उन्हें राहत पहुंचाने के लिए हर संभव कोशिश की जाएगी।

सरकार ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे प्रभावित तालुकों में फसल के नुकसान का आकलन शुरू करें और फसल की स्थिति का रिकॉर्ड रखने के लिए सर्वेक्षण वाले इलाकों की तस्वीरें तथा जीपीएस अवस्थिति के आंकड़े एकत्र करें। ये रिपोर्ट कृषि आयुक्त के जरिए सरकार को सौंपी जानी हैं।

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सरकार ने कई राहत उपायों की घोषणा की है, जिनमें भू-राजस्व में छूट, फसल ऋण नियमों को सुगम करना, खेती से जुड़े ऋण की वसूली को टालना और खेती में इस्तेमाल होने वाले पंपों के बिजली बिल में छूट आदि शामिल है।

सरकारी प्रस्ताव में कहा गया कि 7.5 हॉर्सपॉवर तक के खेती पंपों के बिजली बिल पहले ही माफ़ कर दिए गए थे और नयी घोषित छूट प्रभावित इलाकों में इससे ज़्यादा क्षमता वाले पंपों पर लागू होगी।

इन उपायों में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों के परीक्षा शुल्क को माफ करना, ज़्यादा से ज़्यादा काम उपलब्ध कराने के लिए ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना के नियमों में ढील देना, ज़रूरत पड़ने पर पानी के टैंकर भेजना और पानी की कमी वाले गांवों में खेती के पंपों को बिना रुकावट बिजली आपूर्ति करना शामिल है।

प्रस्ताव के अनुसार, खेती पर निर्भर किसानों और मज़दूरों के लिए अनाज और पशुओं के लिए पर्याप्त चारे का इंतजाम भी किया जाएगा।

सरकार ने कहा कि जल संरक्षण के काम और लोगों एवं पशुओं के लिए पेयजल की व्यवस्था भी की जाएगी।

शनिवार को जारी सरकारी आदेश में कहा गया कि सूखा प्रभावित 265 तालुकों में किसानों को फसल के नुकसान के लिए आर्थिक मदद देने के संबंध में, तय प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक अलग सरकारी प्रस्ताव जारी किया जाएगा।

इस बीच, विपक्षी दलों ने सूखा घोषित करने में देरी के लिए राज्य सरकार की आलोचना की और दावा किया कि जमीनी हालात कहीं ज्यादा खराब हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंढे ने कहा कि फडणवीस ने पहले विपक्ष पर सूखे के मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया था, लेकिन अब उन्होंने इसे आधिकारिक तौर पर ‘ट्रिगर-1’ के तहत घोषित कर दिया है, जबकि जमीनी हालात पहले से ही ‘ट्रिगर-3’ के तहत तय मानकों से भी ज्यादा खराब हैं।

शिवसेना (उबाठा) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि राज्य सरकार को अब राहत उपायों को लागू करने पर ध्यान देना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर प्रभावित किसान को मदद मिले।

सूखा प्रभावित मराठवाड़ा क्षेत्र का दौरा कर रहे ठाकरे ने संवाददाताओं से कहा, “चाहे इसमें (सूखा घोषित करने में) देरी हुई हो या इसे कब घोषित किया जाना चाहिए था… हम लगातार मांग कर रहे थे कि सूखा पहले घोषित किया जाए। महाराष्ट्र से पहले कर्नाटक ने इसे घोषित कर दिया।”

उन्होंने कहा, “अब जब इसकी घोषणा हो चुकी है, तो सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सूखे से राहत के पूरे पैकेज के तहत दी जाने वाली हर मदद हर किसान को मिले।”

किसान सभा ने मांग की कि लगातार दो खरीफ सीजन में फसल खराब होने से प्रभावित किसानों को ठोस आर्थिक मदद दी जाए, जिसमें कर्ज माफी और फसल बीमा कवरेज के आधार पर मुआवजा शामिल हो।

अल नीनो की स्थिति के बीच राज्य में बारिश में 18.8 प्रतिशत कमी दर्ज की गई। जून से 18 सितंबर तक वास्तविक वर्षा 755.9 मिमी हुई, जबकि औसत बारिश 932.3 मिमी होती है।

Pic Credit : UNI

IMD weather forecast September 6: इन 24 राज्यों में आज भारी बारिश की चेतावनी! दिल्ली-NCR से यूपी-बिहार तक बरसेगा मानसून, 70 KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

IMD weather forecast September 6: देश के कई राज्यों में मानसून एक बार फिर से सक्रिय हो गया है। मौजूदा मौसम परिस्थितियों को देखते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने रविवार, 6 सितंबर को देश के 24 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है। कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। IMD के मुताबिक, आज यानी 6 सितंबर को देश के बड़े हिस्से में मानसून सक्रिय रहने वाला है। दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में बारिश के साथ तेज हवाएं और गरज-चमक लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है।

मौसम विभाग की तरफ से जारी फोरकास्ट के मुताबिक, उत्तर भारत, मध्य भारत और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में व्यापक बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की आशंका है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन के खतरे को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। वहीं, बाढ़ प्रभावित और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से भी सावधानी बरतने को कहा गया है।

दिल्ली-NCR में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट

राजधानी दिल्ली और आसपास के NCR क्षेत्रों नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम में रविवार (6 सितंबर) को भारी बारिश और गरज-चमक की आशंका है। कुछ हिस्सों में तेज हवाएं करीब 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं। दिल्ली में अधिकतम तापमान 29 से 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। बारिश के कारण तापमान में गिरावट और मौसम सुहाना रहने की संभावना है।

शनिवार को लगातार दूसरे दिन दिल्ली और उसके आस-पास के इलाकों में भारी बारिश हुई, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने ‘येलो अलर्ट’ जारी करते हुए पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में दिन भर और बारिश होने का अनुमान जताया है। 8 सितंबर तक इस इलाके में मौसम शुष्क रहेगा। फिर भी, IMD ने लोगों को शनिवार को सतर्क रहने और जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है, क्योंकि दिन भर गरज-चमक के साथ भारी बारिश जारी रहेगी।

IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक, पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के नोएडा और गाजियाबाद तथा हरियाणा के गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी भारी बारिश जारी रहेगी। मौसम विभाग ने बताया कि इस क्षेत्र में बने कम दबाव के एक स्पष्ट क्षेत्र के कारण व्यापक और भारी बारिश हो रही है। इसके अलावा, IMD ने चेतावनी दी है कि शनिवार को पूर्वी राजस्थान, पश्चिमी मध्य प्रदेश, चंडीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।

महाराष्ट्र में 8 सितंबर तक बारिश

महाराष्ट्र में अगले तीन दिनों यानी 8 सितंबर तक हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है। कोंकण-गोवा क्षेत्र में मानसूनी बारिश की संभावना है। जबकि राज्य के अन्य हिस्सों में कहीं-कहीं बारिश हो सकती है। मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र के कुछ जिलों में भी बारिश के आसार हैं। इनमें छत्रपति संभाजीनगर, जालना, बीड, लातूर, नांदेड, परभणी, हिंगोली, धाराशिव, पुणे, नासिक, अहमदनगर, धुले, नंदुरबार, जलगांव, कोल्हापुर, सांगली, सतारा और सोलापुर समेत कई इलाके शामिल हैं।

यूपी के इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश (UP) में भी कई जिलों में भारी बारिश और गरज-चमक की चेतावनी दी है। मेरठ, मुजफ्फरनगर, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, बिजनौर, बदायूं, पीलीभीत, सीतापुर, कानपुर, शाहजहांपुर, रायबरेली, उन्नाव, इटावा, आजमगढ़, अयोध्या, देवरिया और गोरखपुर में मौसम खराब रहने की आशंका है।

बिहार में भी जमकर बरसेगा मानसून

बिहार के कई जिलों में रविवार को बारिश के साथ आंधी-तूफान और गरज-चमक देखने को मिल सकती है। IMD ने बिहार के गया, राजधानी पटना, जहानाबाद, भोजपुर, समस्तीपुर, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार, भागलपुर, बेगूसराय, गोपालगंज, रोहतास, बक्सर और वैशाली में मौसम को लेकर अलर्ट जारी किया है।

झारखंड में भी भारी बारिश और आंधी की चेतावनी

बिहार के पड़ोसी राज्य झारखंड में भी मानसून सक्रिय रहेगा। रांची, देवघर, जमशेदपुर, बोकारो, रामगढ़, खूंटी, पलामू, धनबाद, गिरिडीह, गुमला, पश्चिमी सिंहभूम और लातेहार समेत कई जिलों में भारी बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई गई है।

जम्मू-कश्मीर में 60 KM तक पहुंच सकती है हवा की रफ्तार

जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में तेज बारिश के साथ शक्तिशाली गरज-चमक वाले तूफान की आशंका है। अनंतनाग, जम्मू, पुंछ, बारामूला, किश्तवाड़, गांदरबल, उधमपुर, रामबन, शोपियां और राजौरी में मौसम खराब रह सकता है। कुछ इलाकों में तेज हवाएं 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं।हिमाचल प्रदेश में भी कांगड़ा, किन्नौर, मंडी, ऊना, चंबा और कुल्लू में बारिश और गरज-चमक की संभावना है।

पश्चिम बंगाल में मूसलाधार बारिश के आसार

मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में रविवार को भारी बारिश के साथ आंधी-तूफान की स्थिति बन सकती है। कोलकाता, हावड़ा, बीरभूम, दार्जिलिंग, मुर्शिदाबाद, नदिया, दुर्गापुर, कलिम्पोंग, पुरुलिया और मालदा समेत कई क्षेत्रों में मानसूनी गतिविधियां तेज रहने की संभावना है।

ओडिशा में ‘येलो अलर्ट’

ओडिशा में भी रविवार को मानसून सक्रिय रहने की आशंका है। मौसम विभाग के अनुसार, 8 सितंबर से बारिश की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। उत्तरी और तटीय ओडिशा के कई जिलों के लिए 12 सितंबर तक येलो अलर्ट जारी किया गया है।

पहाड़ी और बाढ़ प्रभावित इलाकों में सावधानी की अपील

IMD के पूर्वानुमान को देखते हुए पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। लगातार बारिश से कुछ क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, नदियों और निचले इलाकों के आसपास रहने वाले लोगों को जलभराव और बाढ़ की स्थिति को लेकर सावधान रहने को कहा गया है।

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‘इन्हें खुद खाओ’: रिश्वत के आरोप में भीड़ ने महाराष्ट्र FDA अधिकारी को घेरा, मुंह में एक्सपायर्ड बिस्किट ठूंसने की कोशिश की

महाराष्ट्र के संभाजीनगर में उस वक्त अजीबोगरीब स्थिति बन गई, जब गुस्साई भीड़ ने एक फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) अधिकारी को घेर लिया और उस पर एक्सपायर्ड बिस्किट के पैकेट फेंकने लगी। NDTV के मुताबिक, भीड़ अधिकारी से कह रही थी, “इन्हें खुद खाओ।”

अधिकारी पर आरोप था कि उन्होंने एक ऐसे दुकानदार को बचाने के लिए रिश्वत ली थी जो कथित तौर पर एक्सपायर हो चुके सामान बेच रहा था। इस हंगामे के बीच, कुछ लोगों ने उनके मुँह में एक्सपायर हो चुके बिस्किट ठूंसने की भी कोशिश की।

लेकिन इतना गुस्सा क्यों?

NDTV के अनुसार, यह गुस्सा एक स्थानीय पान की दुकान पर एक्सपायर्ड (समय-सीमा खत्म हो चुके) प्रोडक्ट बेचने के आरोपों की वजह से भड़का। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक दो साल का बच्चा उस दुकान से खरीदे गए नमकीन स्नैक मिक्स को खाने के बाद बीमार पड़ गया और उसे चक्कर आने लगे।

बच्चे की हालत बिगड़ने पर उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

इस घटना से छत्रपति संभाजीनगर के लोगों में गुस्सा फैल गया और उन्होंने FDA ऑफिस से संपर्क करके शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद, FDA का एक अधिकारी मौके पर पहुंचा और दुकान की जांच शुरू की।

हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि जांच से पहले ही उस नमकीन स्नैक मिक्स को हटा दिया गया था, जिसका इस घटना से संबंध था। जांच के दौरान, अधिकारी को पान की दुकान पर एक्सपायर्ड बिस्कुट के कई पैकेट बिकते हुए मिले।

एक्सपायर्ड पैकेट जब्त तो कर लिए गए, लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि दुकानदार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनका आरोप है कि अधिकारी रिश्वत लेकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रहा था।

बता दें कि यह घटना राज्य भर में खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ FDA की बड़ी कार्रवाई के दौरान सामने आई है। हाल के हफ्तों में, खाद्य कंपनियों को कई नोटिस जारी किए गए हैं और अधिकारी खाद्य पदार्थों में मिलावट, एक्सपायर्ड प्रोडक्ट्स की बिक्री और अन्य खामियों को लेकर जांच कर रहे हैं।

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