पानी की भारी किल्लत, पिछले साल के मुकाबले आधे रह गए जलाशय, क्या प्यासा रहेगा देश?

देश के कई राज्यों में कम बारिश का असर अब जलाशयों पर दिख रहा है। 1 अक्टूबर तक देश के प्रमुख जलाशयों में 71.84% पानी था। पिछले साल इसी समय यह 90.31% था, जबकि सामान्य स्तर 81.79% है। यानी इस बार जलाशयों में पानी पिछले साल के मुकाबले काफी कम है।

पानी की कमी का असर महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, राजस्थान और तमिलनाडु में ज्यादा दिख रहा है। कई इलाकों में खेती के लिए पानी कम पड़ रहा है और फसलों को भी नुकसान हो रहा है।

आंध्र प्रदेश में तेजी से घटा पानी का लेवल

आंध्र प्रदेश में जलाशयों का पानी काफी कम हो गया है। 1 अक्टूबर तक यहां सिर्फ 35.14% पानी बचा था। पिछले साल इसी समय यह 88.60% था, जबकि सामान्य स्तर 71.85% है। कम बारिश और फसल खराब होने से राज्य के आधे से ज्यादा हिस्से में सूखा घोषित किया गया है।

कर्नाटक में सूखे जैसे हालात

1 अक्टूबर तक कर्नाटक के जलाशयों में 59.98% पानी था। पिछले साल इसी समय यह 89.16% और सामान्य स्तर 80.42% था।

पानी का स्तर कम होने से राज्य में सिंचाई और खेती को लेकर चिंता बढ़ रही है। सूखे जैसे हालात का असर किसानों पर भी दिखाई दे रहा है।

महाराष्ट्र में मराठवाड़ा और विदर्भ की हालत खराब

5 अक्टूबर तक महाराष्ट्र के जलाशयों में 74.29% पानी था। पिछले साल इसी तारीख को यह 89.22% था। मराठवाड़ा और विदर्भ में कई जलाशयों की स्थिति इससे भी ज्यादा खराब है।

• छत्रपति संभाजीनगर में पानी का भंडार 43.55% था, जबकि पिछले साल 82.96% था।

• अमरावती में इस बार 62.92% पानी रहा, जो पिछले साल 85.87% था।

• नागपुर में पानी का स्तर 72.02% रहा, जबकि पिछले साल यह 89.08% था।

कई इलाकों में फसलें खराब हुई हैं। अगर अगले फसल सीजन तक पानी की स्थिति नहीं सुधरी, तो किसानों और गांवों में रहने वाले परिवारों की मुश्किल बढ़ सकती है।

राजस्थान में कई इलाकों में सूखे का असर

5 अक्टूबर तक राजस्थान के जलाशयों में 61.93% पानी था। जोधपुर में हालात ज्यादा खराब हैं। यहां सिर्फ 15.72% पानी बचा है, जबकि पिछले साल इसी समय 80.25% पानी था।

पाली, जालौर और जैसलमेर में सूखे की स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। जोधपुर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, बालोतरा, राजसमंद, उदयपुर और सिरोही भी प्रभावित इलाकों में शामिल हैं।

कम बारिश का असर बाजरा, मोठ, सोयाबीन, मूंग और दूसरी खरीफ फसलों पर भी पड़ा है। राज्य सरकार ने कुछ इलाकों में सूखे से राहत के लिए कदम उठाए हैं।

तेलंगाना में सूखा घोषित करने की मांग

तेलंगाना के जलाशयों में भी पानी काफी कम है। 1 अक्टूबर तक यहां 40.75% पानी था, जबकि पिछले साल इसी समय 86.10% था। सामान्य स्तर 78.95% है।

कम बारिश और फसल के नुकसान को देखते हुए विपक्षी दल सूखा घोषित करने की मांग कर रहे हैं। पानी का स्तर कम होने से आने वाले समय में खेती और पीने के पानी को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

तमिलनाडु में भी बड़ा अंतर

तमिलनाडु में 1 अक्टूबर तक जलाशयों में 37.27% पानी था। पिछले साल इसी समय यह 91.96% था। राज्य का सामान्य स्तर 66% है।

यानी इस बार पानी का भंडार पिछले साल के मुकाबले काफी नीचे है। इससे सिंचाई और आने वाले फसल सीजन को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

केरल की स्थिति सामान्य से नीचे

केरल में जलाशयों का स्टोरेज 59.88% था। पिछले साल यह 76.06% और सामान्य स्तर 69.75% था। यहां भी पानी का भंडार पिछले साल और सामान्य स्तर दोनों से कम है।

कम पानी से बढ़ सकती है ये परेशानियां

• जलाशयों में पानी कम होने का सीधा असर सिंचाई और पीने के पानी पर पड़ सकता है। इसके साथ ही पनबिजली उत्पादन पर भी दबाव आ सकता है।

• सूखे की स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो किसानों की फसल और कमाई प्रभावित हो सकती है। ग्रामीण इलाकों में काम के मौके घटने से लोगों के दूसरे जगहों पर जाने का खतरा भी बढ़ सकता है।

• महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने यह भी चेतावनी दी है कि सूखे के दौरान बाल विवाह के मामले बढ़ सकते हैं।

आने वाले कुछ हफ्ते काफी अहम हैं। अच्छी बारिश हुई तो जलाशयों में पानी बढ़ सकता है और खेती की परेशानी कुछ कम हो सकती है। लेकिन बारिश कम हुई तो पानी की कमी और फसल के नुकसान से किसानों और ग्रामीण परिवारों की मुश्किल बढ़ सकती है।

बड़ी खबर, आंध्र प्रदेश के 21 जिलों में सूखा घोषित! जानिए कितने मंडलों पर पड़ा असर

आंध्र प्रदेश में बारिश की कमी और फसल खराब होने के बाद सरकार ने राज्य के आधे से ज्यादा हिस्से को सूखाग्रस्त घोषित किया है। सरकार के मुताबिक, 21 जिलों के 388 मंडलों में सूखे की स्थिति है। इससे किसानों के सामने फसल और पानी दोनों का संकट खड़ा हो गया है।

राज्य में कुल 688 मंडल हैं। इनमें से 388 मंडलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। यानी करीब 56 फीसदी मंडल अब सूखे से प्रभावित माने जा रहे हैं।

सरकार ने सूखे की स्थिति को दो श्रेणियों में बांटा है:

1. 283 मंडलों को गंभीर सूखे की श्रेणी में रखा गया है।

2. 105 मंडलों में मध्यम सूखे की स्थिति बताई गई है।

रायलसीमा और दक्षिण आंध्र में ज्यादा असर

रायलसीमा और दक्षिण आंध्र के इलाके सूखे से सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं। बारिश कम होने से कई इलाकों में खेती पर सीधा असर पड़ा है।

इन फसलों का हुआ नुकसान

• धान

• मक्का

• नारियल

• मूंगफली

• अरहर

• कपास

इन फसलों के नुकसान के साथ किसानों को पानी की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है।

विपक्ष ने मांगा इन सवालों का जवाब

सरकार की ओर से सूखे की घोषणा के बाद विपक्ष ने इसके आकलन पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि कुछ ऐसे मंडलों को भी सूखाग्रस्त सूची में शामिल किया जाना चाहिए, जहां हालात गंभीर हैं।

विपक्ष ने खास तौर पर नेल्लोर के कुछ इलाकों का जिक्र करते हुए कहा है कि वहां सूखे का असर होने के बावजूद कई मंडलों को सूची में शामिल नहीं किया गया।

कर्नाटक और महाराष्ट्र के बाद आंध्र में भी सूखा

आंध्र प्रदेश में यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब कर्नाटक और महाराष्ट्र भी बारिश की कमी और फसल के नुकसान के चलते सूखे की घोषणा कर चुके हैं। इससे कई राज्यों में किसानों और खेती पर कम बारिश का असर साफ दिखाई दे रहा है।