Best Agrolife Share: 3 दिन में 36% उछला एग्रोकेमिकल स्टॉक, दमदार रिजल्ट से निवेशकों में खरीदने की होड़

Best Agrolife Share: एग्रोकेमिकल कंपनी बेस्ट एग्रोलाइफ के शेयरों में जून तिमाही के नतीजों के बाद जोरदार तेजी आई है। यह स्टॉक रिजल्ट के बाद तीन कारोबारी सत्र में करीब 36% चढ़ चुका है। वहीं, बीते 5 दिनों में इसने 46% से ज्यादा का रिटर्न दिया है।

मंगलवार को भी स्टॉक 20% के अपर सर्किट के साथ 22.66 रुपये पर बंद हुआ। इसकी वजह जून तिमाही में मुनाफे का डबल होना और मैनेजमेंट का आने वाली तिमाहियों को लेकर सकारात्मक रुख है।

मार्जिन और मुनाफे में जोरदार उछाल

जून तिमाही में Best Agrolife का मुनाफा तेजी से बढ़ा। कंपनी का रेवेन्यू 4% बढ़कर 396 करोड़ रुपये रहा। लेकिन असली मजबूती मुनाफे में दिखी। EBITDA 70% बढ़कर 78 करोड़ रुपये पहुंच गया और EBITDA मार्जिन 12% से बढ़कर 20% हो गया।

शुद्ध मुनाफा (PAT) भी दोगुना होकर 41 करोड़ रुपये रहा। ग्रॉस मार्जिन 29% से बढ़कर 37% पहुंच गया। कंपनी का कहना है कि बेहतर प्रोडक्ट मिक्स, कीमतों में चुनिंदा बढ़ोतरी और लागत पर नियंत्रण की वजह से यह सुधार देखने को मिला।

पेटेंटेड प्रोडक्ट्स पर बढ़ा फोकस

बेस्ट एग्रोलाइफ का पेटेंटेड प्रोडक्ट पोर्टफोलियो लगातार मजबूत हो रहा है। इस तिमाही में इसकी वॉल्यूम 37% बढ़ी। वहीं, ब्रांडेड बिक्री में पेटेंटेड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 45% से बढ़कर 64% हो गई। डीलरों को ब्रांडेड प्रोडक्ट्स की बिक्री भी 13% बढ़ी। कंपनी ने तीन नए पेटेंटेड प्रोडक्ट लॉन्च किए हैं, जिससे कुल पोर्टफोलियो 12 प्रोडक्ट्स का हो गया है।

मैनेजमेंट का कहना है कि किसानों से अच्छा फीडबैक मिल रहा है और रिपीट ऑर्डर भी बढ़ रहे हैं। मानसून में देरी और फसल की धीमी शुरुआती बढ़त से खरीफ सीजन की शुरुआत कमजोर रही। लेकिन अब दूसरी तिमाही से मांग में सुधार की उम्मीद है।

कंपनी की रणनीति आगे क्या है?

मैनेजमेंट का फोकस फिलहाल कारोबार को स्थिर करने और मुनाफा बढ़ाने पर है। इसी वजह से CAPEX योजना को अभी टाल दिया गया है। कंपनी ने 60 करोड़ रुपये का सेल्स रिटर्न प्रावधान भी किया है। साथ ही वर्किंग कैपिटल सुधारने के लिए इन्वेंट्री घटाकर 764 करोड़ रुपये कर दी गई है।

कंपनी को आगे 10% से 15% की CAGR रेवेन्यू ग्रोथ और 13% से 14% के टिकाऊ EBITDA मार्जिन की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी विस्तार जारी है। नेपाल, थाईलैंड, वियतनाम और मेक्सिको में नए प्रोडक्ट रजिस्ट्रेशन मिले हैं, जबकि श्रीलंका में पेटेंटेड प्रोडक्ट्स को फास्ट-ट्रैक मंजूरी मिली है।

Best Agrolife Q1 Results: एग्रोकेमिकल कंपनी का मुनाफा 104% बढ़ा, फोकस में रहेगा स्टॉक

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Best Agrolife Q1 Results: एग्रोकेमिकल कंपनी का मुनाफा 104% बढ़ा, फोकस में रहेगा स्टॉक

Best Agrolife Q1 Results: एग्रोकेमिकल कंपनी Best Agrolife ने जून तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। इस बार कंपनी का प्रदर्शन बेहतर रहा। अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 104% बढ़कर 41 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह 20 करोड़ रुपये था।

कंपनी का कहना है कि बेहतर प्रोडक्ट मिक्स, कीमतों में बढ़ोतरी, लागत पर नियंत्रण और ऑपरेशनल एफिशिएंसी की वजह से मुनाफे में यह तेज उछाल आया है।

रेवेन्यू भी बढ़ा, मार्जिन में बड़ा सुधार

बेस्ट एग्रोलाइफ का ऑपरेशन होने वाली रेवेन्यू भी बढ़ी है। जून तिमाही में यह 4% बढ़कर 396 करोड़ रुपये रही। एक साल पहले इसी तिमाही में रेवेन्यू 381 करोड़ रुपये थी। ग्रॉस प्रॉफिट 32% बढ़कर 146 करोड़ रुपये पहुंच गया।

ग्रॉस मार्जिन 29% से बढ़कर 37% हो गया। EBITDA 70% बढ़कर 78 करोड़ रुपये रहा। वहीं EBITDA मार्जिन 12% से बढ़कर 20% पर पहुंच गया। PAT मार्जिन भी 5% से बढ़कर 10% हो गई।

तिमाही आधार पर भी रिकवरी दिखी

तिमाही आधार पर भी कंपनी का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा। मार्च तिमाही में बेस्ट एग्रोलाइफ का रेवेन्यू 156 करोड़ रुपये था, जो जून तिमाही में बढ़कर 396 करोड़ रुपये पहुंच गई। यानी इसमें 154% की बढ़ोतरी हुई।

EBITDA मार्च तिमाही में 27 करोड़ रुपये के घाटे में था, लेकिन जून तिमाही में 78 करोड़ रुपये के मुनाफे पर पहुंच गया। कंपनी का शुद्ध मुनाफा भी मार्च तिमाही में 37 करोड़ रुपये के नुकसान से निकलकर जून तिमाही में 41 करोड़ रुपये के फायदे में आ गया।

मानसून की देरी के बावजूद अच्छा प्रदर्शन

बेस्ट एग्रोलाइफ के मैनेजिंग डायरेक्टर विमल कुमार ने कहा कि इस बार मानसून देर से आया। कई इलाकों में बारिश भी बराबर नहीं हुई। इसका असर खरीफ की बुवाई और फसल सुरक्षा वाले उत्पादों की मांग पर पड़ा। इसके बावजूद कंपनी ने रेवेन्यू और मुनाफे दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की।

उनके मुताबिक Bestman, Fetagen, Warden Extra और Ronfen जैसे प्रोडक्ट्स की मांग मजबूत रही। हाल में लॉन्च किए गए Fluzam और Cubax Power Extra को भी बाजार में अच्छा रिस्पॉन्स मिला।

आगे भी ग्रोथ की उम्मीद

बेस्ट एग्रोलाइफ को उम्मीद है कि अब मानसून की रफ्तार बढ़ने के साथ खरीफ सीजन में मांग भी तेज होगी।

कंपनी का कहना है कि वह नए प्रोडक्ट्स, बाजार विस्तार और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर फोकस बनाए रखेगी। इससे आने वाली तिमाहियों में भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।

बेस्ट एग्रोलाइफ के शेयर

बेस्ट एग्रोलाइफ का गुरुवार को 1.49% की गिरावट के साथ 16.49 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में स्टॉक 6.87% चढ़ा है। हालांकि, बीते 6 महीने इसने 12.98% का नेगेटिव रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 586.21 करोड़ रुपये है।

बेस्ट एग्रोलाइफ कृषि रसायन (Agrochemicals) सेक्टर की कंपनी है। यह फसल सुरक्षा के लिए कीटनाशक, खरपतवारनाशक, फफूंदनाशक और अन्य क्रॉप प्रोटेक्शन प्रोडक्ट्स बनाती और बेचती है। कंपनी का कारोबार भारत के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी फैला है।

Stocks to Watch: 31 जुलाई को फोकस में रहेंगे ये 12 स्टॉक्स, दिख सकती है बड़ी हलचल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

खरीफ बुआई 95% के करीब, 107 लाख हेक्टेयर में पूरा हुआ आच्छादन : शाही

Shahi UP News

कम बारिश के बावजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार की समयबद्ध तैयारियों और किसानों की मेहनत के कारण खरीफ फसलों का आच्छादन लक्ष्य के करीब पहुंच गया है। वर्ष 2026 में खरीफ आच्छादन का लक्ष्य 110 लाख हेक्टेयर रखा गया था, जिसके मुकाबले लगभग 107 लाख हेक्टेयर में बुआई पूरी हो चुकी है। यह लक्ष्य का करीब 95 प्रतिशत है, जबकि पिछले वर्ष 103 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के सापेक्ष लगभग 100 लाख हेक्टेयर में आच्छादन हो पाया था।

 

यह जानकारी बुधवार को कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने लोकभवन में पत्रकारों से वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष सुपर अल नीनो की आशंका के कारण सामान्य से कम वर्षा का अनुमान था। इसके बावजूद सरकार ने किसानों को समय पर बीज, उर्वरक और सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई। 

 

खरीफ सीजन में 50 प्रतिशत अनुदान पर 1.73 लाख कुंतल से अधिक बीज वितरित किए गए। साथ ही दलहन, तिलहन, मूंगफली, सोयाबीन और तिल जैसी फसलों के रकबे को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। सरकार ने 6.13 लाख से अधिक किसानों को 16,449 कुंतल मुफ्त मिनी किट वितरित किए, जबकि 1.23 लाख कुंतल से अधिक बीज अनुदान पर उपलब्ध कराया गया। दलहन, तिलहन तथा मोटे अनाज के बीजों का बड़े पैमाने पर वितरण कर किसानों को कम वर्षा की परिस्थितियों में भी खेती जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

अल्प अवधि की तोरिया फसल को बढ़ावा देने का निर्णय

कृषि मंत्री ने बताया कि 28 जुलाई तक प्रदेश में औसत से लगभग 25 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। 11 जिलों में 40 से 60 प्रतिशत तक कम बारिश हुई, जबकि 13 जिलों में स्थिति और अधिक चिंताजनक रही। ऐसी परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने सितंबर में अल्प अवधि की तोरिया फसल को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इसके लिए 1,000 कुंतल तोरिया बीज वितरण का लक्ष्य तय किया गया है, जिसमें 600 कुंतल मुफ्त मिनी किट और 400 कुंतल अनुदान पर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए पोर्टल खोल दिया गया है तथा 17 अगस्त के बाद ई-लॉटरी के माध्यम से किसानों का चयन किया जाएगा।

7.66 लाख किसानों तक दलहन और तिलहन के मिनी किट वितरण का लक्ष्य

श्री शाही ने किसानों को आश्वस्त किया कि योगी सरकार रबी सीजन में भी किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने देगी। इसके लिए प्रमाणित बीजों की उपलब्धता और वितरण की तैयारी अभी से शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि बीज वितरण के लिए 10 जुलाई को पोर्टल खोला जा चुका है और सितंबर के पहले सप्ताह में ई-लॉटरी के माध्यम से किसानों का चयन कर समय से बीज उपलब्ध कराया जाएगा। इस वर्ष 7.66 लाख किसानों तक दलहन और तिलहन के मिनी किट वितरण का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत 36,475 कुंतल बीज निशुल्क वितरित किए जाएंगे। उन्होंने किसानों से पोर्टल पर पंजीकरण कराने की अपील करते हुए बताया कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी ई-लॉटरी प्रणाली से होगी।

अनुदान पर उपलब्ध कराए जाएंगे 25,900 कृषि यंत्र

उन्होंने कहा कि कृषि यंत्रों पर अनुदान योजना के तहत भी पोर्टल 20 जुलाई से खोल दिया गया है। इसकी लॉटरी 10 अगस्त को निकाली जाएगी। फार्म मशीनरी बैंक, कस्टम हायरिंग सेंटर और एकल कृषि यंत्रों सहित कुल 25,900 कृषि यंत्र किसानों को अनुदान पर उपलब्ध कराए जाएंगे। अब तक 41,762 किसानों ने आवेदन किया है। फार्म मशीनरी बैंक पर 80 प्रतिशत तक तथा कस्टम हायरिंग सेंटर पर 40 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। कृषि यंत्रों के चयन की प्रक्रिया भी ई-लॉटरी के माध्यम से पूरी की जाएगी।

वैश्विक चुनौतियों के बावजूद पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध

कृषि मंत्री शाही ने पत्रकारों को बताया कि केंद्र और राज्य सरकार ने वैश्विक चुनौतियों के बावजूद प्रदेश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की है। एक अप्रैल से 28 जुलाई तक 57.70 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराया गया, जिसमें से 28.88 लाख मीट्रिक टन किसानों को वितरित किया जा चुका है। लगभग इतनी ही मात्रा में अभी भी उर्वरक उपलब्ध है। यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी, एमओपी का पर्याप्त भंडार है। किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि पहले जहां करीब 1,500 सहकारी समितियां उर्वरक वितरण करती थीं, वहीं अब 7000 समितियों के माध्यम से किसानों तक खाद पहुंचाई जा रही है। जुलाई में ही सहकारी समितियों ने 3.22 लाख मीट्रिक टन से अधिक यूरिया और 1.07 लाख मीट्रिक टन डीएपी का वितरण किया है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के किसी भी ब्लॉक में उर्वरकों की कमी नहीं है।

सपा सरकार की तुलना में 34 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का अधिक वितरण 

कृषि मंत्री ने पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 2015-16 में प्रदेश में 84.98 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण हुआ था, जबकि योगी सरकार के कार्यकाल में यह बढ़कर 2025-26 में 118 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार किसानों को पूर्ववर्ती सरकार की तुलना में 34 लाख मीट्रिक टन अधिक उर्वरक उपलब्ध करा रही है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का निपटारा करने के साथ ही कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम किया है। कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे धैर्य रखें, समय पर पंजीकरण कराएं और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं।

सरकार ने किसानों को दिलाया भरोसा, यूपी में पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध

UP fertilizer availability: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार वर्तमान खरीफ सीजन में मुख्य फसल धान की रोपाई और अन्य फसलों की बुवाई के उपरांत किसानों को फसल संस्तुति के अनुसार पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि परेशान न हों, प्रदेश में उर्वरक की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को सुगमता से उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए कृषि व संबंधित विभाग के अधिकारी लगातार मॉनीटरिंग करें। 

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान भ्रामक सूचनाओं व अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक रूप से उर्वरक भंडारण न करें। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अधिक उर्वरक उपलब्ध कराए गए हैं। किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। 

प्रदेश में पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध : कृषि मंत्री

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि प्रदेश में किसानों के लिए उर्वरक का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। खरीफ सीजन- 2026 के तहत सोमवार (27 जुलाई) तक कुल 28.25 लाख मीट्रिक टन उर्वरक बिक्री की जा चुकी है, जबकि 29.05 लाख मीट्रिक टन उर्वरक अब भी उपलब्ध है। सरकार किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। 

 

किसी भी समस्या पर जनपद व मंडल के अधिकारियों से संपर्क करें किसान

कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी ने बताया कि सभी 18 मंडलों में पर्याप्त खाद उपलब्ध है। जनपदों में किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी होती है तो वे जनपद, मंडल के कृषि अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। मंडलवार यूरिया उपलब्धता के आंकड़े इस प्रकार हैं-

  • सहारनपुर : 43,275 मी. टन
  • मेरठ : 67551 मी. टन
  • आगरा : 95852 मी. टन 
  • अलीगढ़ : 86474 मी. टन 
  • बरेली : 116987 मी. टन
  • मुरादाबाद : 83972 मी. टन
  • कानपुर : 143076 मी. टन
  • प्रयागराज : 111070 मी. टन
  • झांसी : 47722 मी. टन
  • चित्रकूट : 50189 मी. टन
  • वाराणसी : 109312 मी. टन
  • मीरजापुर : 36014 मी. टन
  • आजमगढ़ : 73086 मी. टन
  • गोरखपुर : 91659 मी. टन
  • बस्ती : 51638 मी. टन
  • गोंडा : 59199 मी. टन
  • लखनऊ : 138186 मी. टन
  • अयोध्या : 71695 मी. टन

कमजोर मानसून का असर: खरीफ बुवाई पिछले साल से 6% पीछे, दालों-तिलहन की खेती पर पड़ा ये इंपैक्ट

Weak Monsoon Impact: देश के कई प्रमुख फसल उत्पादक क्षेत्रों में मानसून की भारी कमी और बारिश में देरी का सीधा असर इस साल खरीफ फसलों की बुवाई पर देखने को मिल रहा है। मनी कंट्रोल के ईशान गेरा की रिपोर्ट के मुताबिक 17 जुलाई तक देश में खरीफ फसलों का रकबा पिछले साल की तुलना में 6 प्रतिशत पीछे चल रहा है। किसानों ने इस अवधि तक 65.82 मिलियन हेक्टेयर में बुवाई की है जबकि 2025 की इसी अवधि के दौरान यह आंकड़ा 70.05 मिलियन हेक्टेयर था। बारिश की इस लगातार बनी हुई कमी से सबसे ज्यादा मार दालों, मोटे अनाज, तिलहन और कपास की खेती पर पड़ी है। आइए जानते हैं कि मानसून की सुस्ती ने किस फसल की बुवाई को कितना प्रभावित किया है और देश में पानी के जलाशयों का क्या हाल है.

दालों की बुवाई में आई सबसे बड़ी गिरावट (15.1% की कमी)

खरीफ फसलों में दालों की खेती सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। दालों का कुल रकबा पिछले साल के 81.52 लाख हेक्टेयर से 15.1 प्रतिशत घटकर अब 69.23 लाख हेक्टेयर रह गया है। अरहर की बुवाई में करीब 18 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है और यह घटकर 2.48 मिलियन हेक्टेयर पर आ गई है। मूंग का रकबा 11 प्रतिशत घटकर 2.398 मिलियन हेक्टेयर रहा। उड़द की बुवाई में लगभग 6 प्रतिशत की कमी आई है और यह 1.351 मिलियन हेक्टेयर दर्ज की गई।

क्यों चिंताजनक है यह गिरावट?

दालों की बुवाई में यह कमी बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत घरेलू उत्पादन और खपत के बीच के अंतर को पूरा करने के लिए पहले से ही आयात पर निर्भर रहता है।

धान, मोटे अनाज, तिलहन और कपास का क्या है हाल?

राहत की बात यह है कि धान की बुवाई पर मानसून की कमी का असर अपेक्षाकृत कम पड़ा है। यह 16.64 मिलियन हेक्टेयर पर पहुंच चुकी है जो पिछले साल की इसी अवधि के 16.78 मिलियन हेक्टेयर की तुलना में सिर्फ 0.8 प्रतिशत कम है। मोटे अनाज के रकबे में 11.2 प्रतिशत की तेज गिरावट आई है। यह पिछले साल के 13.41 मिलियन हेक्टेयर से गिरकर 11.9 मिलियन हेक्टेयर पर आ गया है। इसमें बाजरा की बुवाई में 18.5 प्रतिशत और मक्का की बुवाई में 5 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। तिलहन का रकबा 5.5 प्रतिशत घटकर 14.71 मिलियन हेक्टेयर रह गया है। कपास की बुवाई में भी 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

मानसून में 24% की कमी, इन राज्यों में गंभीर सूखा

1 जून से 19 जुलाई के बीच भारत में 253.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है जो सामान्य स्तर से 24 प्रतिशत कम है। देश के अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश का यह घाटा अलग अलग है-

  • पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत: सामान्य से 35 प्रतिशत कम बारिश
  • दक्षिण प्रायद्वीप: 27 प्रतिशत की कमी
  • उत्तर-पश्चिम भारत: 23 प्रतिशत की कमी
  • मध्य भारत: 14 प्रतिशत की कमी

राज्यों के स्तर पर बारिश का घाटा

कृषि के लिहाज से महत्वपूर्ण कई राज्यों में बारिश का गंभीर संकट बना हुआ है। बिहार में सामान्य से 44 प्रतिशत कम बारिश हुई है। झारखंड में 41 प्रतिशत की कमी देखने को मिली है। पंजाब में ये कमी 41 प्रतिशत की है। केरल में 34 प्रतिशत कम बारिश हुई है। तेलंगाना में 31 प्रतिशत बारिश कम हुई है। तटीय कर्नाटक में 31 फीसदी कम बारिश देखने को मिली है।

जलाशयों का जलस्तर पिछले साल से 39% नीचे

कम बारिश की वजह से देश के जलाशयों में पानी का भंडारण भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अभी देश के 166 प्रमुख जलाशयों में कुल क्षमता का सिर्फ 34.46 प्रतिशत पानी ही बचा है। यह उपलब्ध पानी पिछले साल की इसी अवधि के जलस्तर का सिर्फ 60.84 प्रतिशत ही है। यानी 39 प्रतिशत की भारी गिरावट देखने को मिली है। यह जलस्तर पिछले 10 वर्षों के औसत स्तर से भी 1.8 प्रतिशत नीचे चला गया है।