पटना के महावीर मंदिर की अनूठी पहल, प्रसाद और दान की कमाई से चल रहे अस्पताल, बच्चों के लिए बन रहा बाल कैंसर हॉस्पिटल

बिहार की राजधानी पटना स्थित महावीर मंदिर सिर्फ एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल नहीं है। पटना जंक्शन से लगा यह मंदिर आस्था के साथ-साथ सेवा और जनकल्याण की भी एक बड़ी मिसाल है। यहां बजरंगबली के दर्शन करने के लिए हर दिन हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि मंदिर में चढ़ने वाले नैवेद्यम प्रसाद और अन्य माध्यमों से होने वाली कमाई का इस्तेमाल मरीजों के इलाज, शिक्षा और जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराने जैसे कार्यों में भी किया जाता है। महावीर मंदिर न्यास समिति के अंतर्गत कई अस्पताल, चिकित्सा संस्थान, प्रशिक्षण केंद्र और भोजनालय संचालित होते हैं।

प्रसाद की कमाई से होता है मरीजों का इलाज

महावीर मंदिर की आय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा नैवेद्यम प्रसाद की बिक्री से होने वाली बचत से आता है। इसके अलावा श्रद्धालुओं के चढ़ावे, कर्मकांड शुल्क, स्वैच्छिक दान, विक्रय केंद्रों की बचत और बैंक से मिलने वाले ब्याज से भी मंदिर को आय होती है। इन्हीं संसाधनों के जरिए महावीर मंदिर न्यास समिति स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण संस्थानों का संचालन करती है। इन संस्थानों में महावीर कैंसर संस्थान, महावीर आरोग्य संस्थान, महावीर वात्सल्य अस्पताल, महावीर नेत्रालय, महावीर हार्ट हॉस्पिटल, महावीर वरिष्ठ नागरिक अस्पताल और विशालनाथ अस्पताल शामिल हैं।

इसके अलावा भीखमदास ठाकुरबाड़ी स्थित महावीर नेत्रालय की शाखा भी संचालित की जाती है। इन संस्थानों के माध्यम से कैंसर, हृदय रोग, आंखों की बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इस अस्पतालों में बेहद कम दरों पर आधुनिक सुविधाएं दी जाती है।

बन रहा है बाल कैंसर संस्थान

महावीर मंदिर न्यास समिति का स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा विस्तार लगातार आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में महावीर किशोर कुणाल बाल कैंसर संस्थान का निर्माण कार्य भी जारी है। 100 बेड का एक नया अस्पताल बनाया जा रहा है। यह पूरी तरह कैंसर पीड़ित बच्चों के इलाज को समर्पित होगा। इसका निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और 2027 तक इसके तैयार होने की उम्मीद है। इस अस्पताल में 18 साल तक के बच्चों को निशुल्क इलाज की सुविधा दी जाएगी। यहां जांच और उपचार के लिए सभी आधुनिक उपकरण और तकनीकें होंगी।

इलाज के साथ मेडिकल शिक्षा पर भी जोर

महावीर मंदिर की गतिविधियां केवल अस्पतालों के संचालन तक सीमित नहीं हैं। महावीर पैरा मेडिकल ट्रेनिंग और महावीर एएनएम नर्सिंग ट्रेनिंग सेंटर के माध्यम से चिकित्सा एवं नर्सिंग से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाता है। वहीं, पाणिनि वेद विद्यालय के जरिए पारंपरिक वैदिक शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जाता है।

गयाजी से अयोध्या तक जरूरतमंदों के लिए भोजन की व्यवस्था

धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं और जरूरतमंद लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए भी महावीर मंदिर न्यास समिति की ओर से पहल की गई है। इसके तहत गयाजी में विष्णु रसोई, सीतामढ़ी में सीता रसोई और अयोध्या में राम रसोई का संचालन किया जाता है। इन रसोइयों में लोगों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जाता है। धार्मिक यात्राओं पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ऐसी व्यवस्था काफी उपयोगी साबित होती है।

पूर्वी चम्पारण में में आकार ले रहा विराट रामायण मंदिर

महावीर मंदिर न्यास समिति की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में पूर्वी चंपारण जिले के चकिया क्षेत्र में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर भी शामिल है। विराट रामायण मंदिर का निर्माण संसार के सबसे बड़े मंदिर के रूप में हो रहा है।

इस भव्य मंदिर परिसर में 33 फीट ऊंचा और लगभग 210 मीट्रिक टन वजनी शिवलिंग स्थापित किया गया है। मंदिर की प्रस्तावित लंबाई 1080 फीट और चौड़ाई 540 फीट है। इसकी संरचना में कुल 18 शिखर और 22 मंदिर शामिल होंगे। मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट रखी गई है, जबकि अन्य शिखरों की ऊंचाई 180, 135, 108 और 90 फीट प्रस्तावित है। महावीर मंदिर न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल के अनुसार, निर्माण कार्य को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।

रोजाना करीब 10 लाख रुपये की आय

महावीर मंदिर की आर्थिक गतिविधियों का अंदाजा मई 2023 में महावीर मंदिर न्यास समिति की ओर से जारी आंकड़ों से लगाया जा सकता है। इन आंकड़ों के अनुसार, मंदिर की प्रतिदिन की आय करीब 10 लाख रुपये थी। इस आय में भेंटपात्रों में मिलने वाली चढ़ावे की राशि, कर्मकांड शुल्क, नैवेद्यम प्रसाद से होने वाली बचत, श्रद्धालुओं की ओर से स्वेच्छा से दिए जाने वाले दान, विक्रय केंद्रों की बचत और बैंक ब्याज शामिल थे। इसमें अस्पतालों और अन्य संस्थानों की आय-व्यय राशि शामिल नहीं थी।

पटना से सच्चिदानंद की रिपोर्ट

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विश्व शाकाहारी दिवस आज : क्यों मनाया जाता है यह खास दिन? जानें इसका इतिहास और महत्व

विश्व शाकाहारी दिवस आज : क्यों मनाया जाता है यह खास दिन? जानें इसका इतिहास और महत्व

Why is World Vegetarian Day celebrated, Learn about its history and significance

World Vegetarian Day 2026 : हर साल 1 अक्टूबर को विश्व शाकाहारी दिवस (World Vegetarian Day) मनाया जाता है। यह दिन पूरी दुनिया में शाकाहार (Vegetarianism) के प्रति लोगों को जागरूक करने, स्वास्थ्य और पर्यावरण पर इसके सकारात्मक प्रभावों को रेखांकित करने और अहिंसात्मक जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। इस दिवस के साथ ही अंतरराष्ट्रीय शाकाहारी माह (1 अक्टूबर से 1 नवंबर) ‘विश्व वीगन दिवस’ की शुरुआत भी होती है। आइए जानते हैं विश्व शाकाहारी दिवस के इतिहास और महत्‍व के बारे में विस्‍तार से… 

विश्व शाकाहारी दिवस का इतिहास

विश्व शाकाहारी दिवस की शुरुआत वर्ष 1977 में नॉर्थ अमेरिकन वेजीटेरियन सोसाइटी (NAVS) द्वारा की गई थी। वर्ष 1978 में इंटरनेशनल वेजीटेरियन यूनियन (IVU) ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी और हर साल 1 अक्टूबर को इसे मनाने की घोषणा की।

विश्व शाकाहारी दिवस का मुख्य उद्देश्य

पौधे-आधारित (Plant-based) भोजन से मिलने वाले पोषक तत्वों, ऊर्जा और गंभीर बीमारियों से बचाव के फायदों के बारे में लोगों को बताना। शाकाहार को बढ़ावा देकर पशुपालन उद्योग के कारण होने वाले कार्बन उत्सर्जन, वनों की कटाई और जल संकट को कम करने में मदद करना। पशु-पक्षियों के प्रति क्रूरता को रोकना और एक संवेदनशील समाज का निर्माण करना।

शाकाहार अपनाने के प्रमुख लाभ

शाकाहारी भोजन में फाइबर, विटामिन्स और एंटी-ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जो हृदय रोग, उच्च रक्तचाप (BP), टाइप-2 मधुमेह और मोटापे जैसी समस्याओं के जोखिम को कम करते हैं। फाइबर से भरपूर होने के कारण शाकाहारी भोजन पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है और शरीर को ऊर्जावान बनाए रखता है।

मांस या पशु-आधारित आहार के उत्पादन की तुलना में शाकाहारी भोजन के उत्पादन में प्राकृतिक संसाधनों (जैसे जल और भूमि) की खपत काफी कम होती है। गौरतलब है कि पूरे अक्टूबर महीने को ‘शाकाहारी जागरूकता माह’ (Vegetarian Awareness Month) के रूप में भी जाना जाता है।

Blood Donation Day : देश में आज मनाया जा रहा है रक्तदान दिवस? क्‍या है इसका उद्देश्‍य? रक्‍तदाता को होते हैं ये फायदे

Blood Donation Day : देश में आज मनाया जा रहा है रक्तदान दिवस? क्‍या है इसका उद्देश्‍य? रक्‍तदाता को होते हैं ये फायदे

When is Blood Donation Day observed, What is its objective

National Voluntary Blood Donation Day : भारत में हर साल 1 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस मनाया जाता है ताकि व्यक्ति के जीवन में रक्त की आवश्यकता और महत्व को साझा किया जा सके। इसकी शुरुआत सबसे पहले 1 अक्टूबर, 1975 को इंडियन सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन एंड इम्यूनोहेमेटोलॉजी द्वारा की गई थी, जिसकी स्थापना 22 अक्टूबर, 1971 को के. स्वरूप कृष्ण और डॉ. जे.जी. जॉली के नेतृत्व में हुई थी। बिना किसी अपेक्षा के रक्तदान करना मानवता का महान कार्य है और जीवन रक्षक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। 

 

रक्तदान दिवस का उद्देश्य

स्वेच्छा से रक्त देने वाले दाताओं का आभार जताना और जीवन बचाने के लिए सुरक्षित रक्त की निरंतर जरूरत को समझाना है। जो लोग बिना किसी पैसे या स्वार्थ के, स्वैच्छिक रूप से (voluntarily) अपना खून दान करते हैं, उन्हें धन्यवाद कहना और उनके इस जीवनदायी योगदान की सराहना करना।

 

रक्तदाताओं के लिए महत्‍वपूर्ण बात

बहुत से लोग सोचते हैं कि रक्तदान करने से शरीर में कमजोरी आती है, जबकि सच यह है कि एक स्वस्थ व्यक्ति द्वारा दान किया गया खून शरीर में महज 24 से 48 घंटों के भीतर फिर से बन जाता है। आपका किया हुआ एक (1) यूनिट रक्तदान, तीन (3) अलग-अलग लोगों की जान बचा सकता है। 

 

रक्तदान के प्रमुख फायदे

यह सबसे महत्वपूर्ण और प्रत्यक्ष लाभ है। आपका दिया हुआ रक्त किसी दुर्घटना के शिकार, कैंसर के रोगी, सर्जरी वाले व्यक्ति या प्रसव के दौरान रक्त की कमी से जूझ रही महिला की जान बचा सकता है। नियमित रक्तदान शरीर में आयरन के स्तर को संतुलित रखने में मदद करता है। शरीर में अत्यधिक आयरन हृदय रोगों, जैसे हार्ट अटैक और स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकता है। रक्तदान इस अतिरिक्त आयरन को कम करके हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

 

शरीर में आयरन का उच्च स्तर कैंसर के कुछ प्रकारों, जैसे लिवर, फेफड़े, बड़ी आंत और गले के कैंसर, के बढ़ते जोखिम से जुड़ा हो सकता है। रक्तदान से आयरन का स्तर कम होकर कैंसर के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है। रक्तदान के बाद शरीर रक्त की कमी को पूरा करने के लिए तेजी से नए रक्त कोशिकाओं (विशेषकर लाल रक्त कोशिकाओं) का उत्पादन शुरू कर देता है।

 

रक्तदान एक बार में लगभग 650 कैलोरी तक बर्न करने में मदद कर सकता है। यह वजन प्रबंधन में प्रत्यक्ष रूप से सहायक नहीं है, लेकिन यह शरीर को सक्रिय रखने में एक छोटी भूमिका निभा सकता है। रक्तदान करने से पहले, रक्तदाता का शारीरिक परीक्षण, जैसे- ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन स्तर, नब्ज और शरीर का तापमान आदि किया जाता है। साथ ही, रक्त की एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और सी, सिफलिस और मलेरिया जैसे गंभीर संक्रमणों के लिए जांच की जाती है।

 

अत्यधिक आयरन लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है और हेमोक्रोमैटोसिस जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। रक्तदान आयरन के स्तर को कम करके लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। नियमित रक्तदान उच्च रक्तचाप/ हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है, जिससे हृदय रोगों का जोखिम कम होता है।

 

देश में जागरूकता फैलाना

लोगों को यह समझाना कि सुरक्षित रक्त और रक्त उत्पादों- जैसे प्लाज्मा, प्लेटलेट्स की आवश्यकता हर समय बनी रहती है, चाहे वह सर्जरी हो, प्रसव/ चाइल्ड बर्थ हो के दौरान होने वाला रक्तस्राव हो या कोई बड़ा हादसा। जरूरतमंद व्यक्ति को रक्त या उसके घटकों का आधान या दान करना आधुनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में मानवता का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

 

नियमित रक्तदान के लिए प्रेरित करना

समाज में खासकर युवाओं में नियमित रूप से रक्तदान करने की आदत को बढ़ावा देना ताकि अस्पतालों में खून की कमी से किसी की जान न जाए।

 

बिना किसी अपेक्षा के रक्तदान करना मानवता का महान कार्य है और जीवन रक्षक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। केवल अपने रिश्तेदारों या दोस्तों को ही रक्तदान न करें, बल्कि स्वेच्छा से किसी भी व्यक्ति को रक्तदान करें। इससे कई जानें बच सकती हैं। रक्त से फैलने वाली बीमारियों को रोकने के लिए भी यह आवश्यक है।

विश्व हृदय दिवस 2026: हार्ट अटैक से बचाव के 6 आसान उपाय, आज से अपनाएं ये आदतें

विश्व हृदय दिवस 2026: हार्ट अटैक से बचाव के 6 आसान उपाय, आज से अपनाएं ये आदतें

World Heart Day 2026

विश्व हृदय दिवस हर साल 29 सितंबर को मनाया जाता है। इस बार की थीम है-  “दिल की धड़कन को न चूकें,”। 2022 में हृदय रोग से 19.8 मिलियन लोगों की मृत्यु हुई थी। वर्तमाान में कोरोना काल के बाद अचानक से हृदय गति रुक जाने के मामले भी बढ़े हैं। ऐसे में  जानिए कि किस तरह लाइफ स्टाइल बदलकर प्राकृतिक तरीके से हार्ट अटैक  से खुद को बचा सकते हैं।

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हदय रोग के कारण:

  • उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन)
  • उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर
  • मधुमेह
  • धूम्रपान या तंबाकू का सेवन
  • मोटापा या शरीर का अतिरिक्त वजन
  • शारीरिक निष्क्रियता
  • अत्यधिक कफ बना रहना
  • अत्यधिक शराब का सेवन
  • दीर्घकालिक तनाव
  • हृदय रोग का पारिवारिक इतिहास
  • बड़ी हुई उम्र
  • नींद की खराब गुणवत्ता या अनुपचारित स्लीप एपनिया
  • नमक, चीनी और संतृप्त या ट्रांस वसा से भरपूर अस्वास्थ्यकर आहार
  • दीर्घकालिक गुर्दे की बीमारी और कुछ सूजन संबंधी स्थितियाँ

 

हृदय रोग के लक्षण

  • सीने में दर्द , दबाव, जकड़न या बेचैनी
  • सांस फूलना, खासकर गतिविधि के दौरान या आराम करते समय
  • सांस फूलने या सीने में तकलीफ के कारण व्यायाम करने में कठिनाई होना।
  • अस्पष्ट थकान या कमजोरी
  • दर्द जो हाथ, कंधे, गर्दन, जबड़े या पीठ तक फैलता है
  • दिल की धड़कन तेज, धीमी या अनियमित होना ( धड़कन का अनियमित होना)
  • चक्कर आना, सिर हल्का महसूस होना या बेहोशी
  • पैरों, टखनों या पंजों में सूजन
  • ठंडे पसीने आना, मतली या उल्टी होना, खासकर सीने में तकलीफ के साथ

 

हृदय रोग का प्राकृतिक इलाज:

  1. शराब, तंबाकू, सिगरेट, नमक, चीनी और तेल का त्याग करना।
  2. हर रात 7-9 घंटे की अच्छी नींद लें।
  3. उपवास नहीं कर सकते हैं तो भोजन के बीच कम से कम 10 घंटे काअंतराल रखें।
  4. नियमित योगासन करें या अनुलोम विलोम प्राणायाम करें।
  5. डॉक्टर की सलाह पर रोज एक अखरोट खाएं।
  6. शुद्ध सात्विक और प्राकृतिक भोजन ही करें। सलाद का सेवन करें। 

 

कौन सी सब्जियां कम करती हैं कोलेस्ट्रॉल?

कुछ खास सब्जियों में घुलनशील फाइबर पाया जाता है जो खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाने में मदद करता है। आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ सब्जियों के बारे में:

 

लहसुन: लहसुन में एलिसिन नामक एक यौगिक पाया जाता है जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है।

प्याज: प्याज में भी एलिसिन पाया जाता है जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है।

बैंगन: बैंगन में नियासिन नामक विटामिन होता है जो अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ावा देता है।

पालक: पालक में विटामिन K और फोलेट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो दिल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

ब्रोकली: ब्रोकली में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं।
 

कोलेस्ट्रॉल कम करने के अन्य उपाय

स्वस्थ आहार: फाइबर से भरपूर आहार लें, जैसे कि फल, सब्जियां, और साबुत अनाज।

व्यायाम: नियमित रूप से व्यायाम करें।

मोटापे को कम करें: अगर आप मोटे हैं तो अपना वजन कम करें।

धूम्रपान छोड़ें: धूम्रपान कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा सकता है।

तनाव कम करें: तनाव को कम करने के लिए योग, ध्यान या अन्य आराम करने की तकनीक का अभ्यास करें।

 

कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बहुत जरूरी है। अपनी डाइट में उपरोक्त बताई गई सब्जियों को शामिल करके आप कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर सकते हैं और दिल की बीमारियों से खुद को बचा सकते हैं।

 

ध्यान रखें

  • आप अपने डॉक्टर से पूछकर अपनी डाइट में बदलाव कर सकते हैं।
  • नियमित रूप से ब्लड टेस्ट करवाते रहें।
  • स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर आप कई बीमारियों से बच सकते हैं।

 

‘द अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन’ में प्रकाशित एक नए अध्ययन और मेटा-एनालिसिस के अनुसार, लाल, नीले और बैंगनी रंग के खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले प्राकृतिक बायोएक्टिव तत्व ‘एंथोसायनिन’ का अधिक सेवन स्वस्थ व्यक्तियों में हृदय और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है।

 

एंथोसायनिन पौधों में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले ऐसे यौगिक हैं, जो कई फलों और सब्जियों को लाल, बैंगनी और नीला रंग प्रदान करते हैं। बेरीज़ (Berries) को इसका सबसे समृद्ध स्रोत माना जाता है। विशेष रूप से अमेरिका में उगाई जाने वाली ब्लूबेरी एंथोसायनिन का बेहतरीन स्रोत है, जो हृदय स्वास्थ्य को मजबूत करने में सहायक होती है।

 

इमरान के बेटे का दावा-पाकिस्तान तानाशाही की ओर बढ़ रहा:पिता के साथ जेल में बुरे बर्ताव का आरोप लगाया, कहा- सेना का इसमें बड़ा रोल

पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बेटे सुलैमान ईसा खान ने दावा किया है कि पाकिस्तान तानाशाही की तरफ बढ़ रहा है। उन्होंने अपने पिता के लंबे समय से जेल में होने को इसका उदाहरण बताया। न्यूज एजेंसी ANI के साथ वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुलैमान ने कहा कि पिछले कई साल से उनके पिता के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है और इसमें सेना की बड़ी भूमिका है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चर्चा की गई। सुलैमान के साथ उनके भाई कासिम खान, अंतरराष्ट्रीय वकील जेरेड जेनसर और अंतरराष्ट्रीय मामलों तथा मीडिया के सलाहकार सैयद बुखारी भी शामिल हुए। इमरान के बेटे बोले- पिता से नहीं मिल पा रहे इमरान के बेटों ने कहा कि वे जेल में बंद अपने पिता से मिलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी कोशिशें लगातार नाकाम हो रही हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने उनके वीजा आवेदन को बार-बार टाला या खारिज किया है। कासिम खान ने कहा, “उन्हें देखने का कोई भी मौका मिले तो हम तुरंत जाना चाहेंगे। हम पाकिस्तान आना चाहते हैं, लेकिन अब हालात और निराशाजनक होते जा रहे हैं। हमारे वीजा आवेदन खारिज किए गए, टाले गए और बार-बार अटकाए गए।” कासिम ने कहा, “मेरे पिता को लगातार एकांत कारावास में रखा जा रहा है। उन्हें 6×8 फुट की एक ऐसी कोठरी में 23 घंटे तक बंद रखा जाता है, जिसमें न खिड़की है और न ही रोशनी। उनकी उम्र 73 साल है और उनकी एक आंख की 85 फीसदी नजर जा चुकी है। वह आज भी अपने सिद्धांतों पर मजबूती से कायम हैं, लेकिन अब इसकी कीमत उनका शरीर चुका रहा है।” वकील का आरोप- जनरल मुनीर मनमाना शासन चला रहे इमरान खान के अंतरराष्ट्रीय वकील जेरेड जेनसर ने पाकिस्तान में लोकतंत्र की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने देश के सैन्य नेतृत्व को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और सेना प्रमुख असीम मुनीर पर ‘ऑथॉरिटेरियनिज्म’ यानी दमनकारी शासन का आरोप लगाया। जेनसर ने कहा, इमरान खान और उनकी पत्नी के खिलाफ जिस तरह कार्रवाई हो रही है, वह किसी लोकतांत्रिक सरकार के तरीके जैसी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इमरान खान के खिलाफ सैकड़ों मामले मनगढ़ंत आरोपों के आधार पर दर्ज किए गए हैं। यह मामला अब सिर्फ उनकी जेल तक सीमित नहीं है। जेनसर के मुताबिक, उनकी गिरफ्तारी उन लोगों के लिए भी एक चेतावनी है, जो पाकिस्तान में सत्ता को चुनौती देने की कोशिश कर सकते हैं। जेनसर ने आगे कहा, उन्हें जेल में रखकर शासन पाकिस्तान के लोगों को साफ संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि उन्हें सत्ता के खिलाफ खड़ा होने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। जेनसर ने कहा, “कल्पना कीजिए कि अगर हम इमरान खान के साथ ऐसा कर सकते हैं, जिन्हें पूरी दुनिया जानती है, तो उस व्यक्ति के साथ क्या किया जा सकता है, जिसे दुनिया नहीं जानती?” इमरान खान के इलाज को लेकर भी विवाद इमरान खान की सेहत और जेल में उनके इलाज को लेकर भी विवाद बना हुआ है। 18 अगस्त को पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि इमरान खान को इलाज के लिए 48 घंटे के भीतर अदियाला जेल से इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाया जाए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि इमरान खान की जांच एक स्वतंत्र मेडिकल पैनल करे। इसमें हृदय रोग विशेषज्ञ, आंखों के डॉक्टर, सामान्य चिकित्सक और उनके निजी डॉक्टर डॉ. फैसल सुल्तान को शामिल किया जाना था। हालांकि, 20 अगस्त को अधिकारियों ने इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाने के बजाय पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) पहुंचाया। वहां कई घंटों तक उनकी मेडिकल जांच की गई। इसके बाद उन्हें चिकित्सकीय रूप से फिट घोषित कर वापस अदियाला जेल भेज दिया गया। इमरान खान की टीम का आरोप है कि जेल से शिफा अस्पताल की दिशा में एक ‘डमी काफिला’ भेजा गया, ताकि ऐसा लगे कि इमरान खान को वहां ले जाया जा रहा है। टीम ने यह भी दावा किया कि उनके निजी डॉक्टर डॉ. फैसल सुल्तान शिफा अस्पताल में उनका इंतजार कर रहे थे, लेकिन उन्हें इमरान खान की जांच करने का मौका नहीं दिया गया। इमरान से फिर मिलीं बहन नूरीन नियाजी इमरान खान की बहन नूरीन नियाजी ने मंगलवार को अदियाला जेल में उनसे मुलाकात की। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद यह लगातार दूसरे हफ्ते है, जब नूरीन ने अपने भाई से मुलाकात की है। सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को आदेश दिया था कि कैदी इमरान खान की उनके परिवार के सदस्यों से सप्ताह में एक बार मुलाकात कराई जाए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि सरकार उनके बेटों से सप्ताह में दो बार फोन पर बात कराने की व्यवस्था करे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इमरान खान के परिवार ने अदालत को भरोसा दिलाया था कि वे मीडिया से बात नहीं करेंगे। PTI के वकील अवैस यूनुस चौधरी के मुताबिक, मंगलवार को नूरीन नियाजी की इमरान खान से मुलाकात करीब 45 मिनट चली। उन्होंने कहा कि इमरान की दो और बहनें भी जेल के बाहर गाड़ी में इंतजार कर रही थीं। नूरीन नियाजी के जेल से बाहर आने के बाद तीनों बहनें बिना मीडिया से बात किए वहां से चली गईं। ———————————- यह खबर भी पढ़ें… इमरान खान अस्पताल से फिर जेल भेजे गए:डॉक्टर बोले- पूर्व पीएम को जेल में रखना सुरक्षित; देर रात हॉस्पिटल में भर्ती किया था
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को मेडिकल जांच के बाद शुक्रवार को इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल से वापस अडियाला जेल भेज दिया गया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

नॉर्मल ECG के बाद भी हो सकती है दिल की बीमारी! इन 5 संकेतों को न करें नजरअंदाज

सिर्फ नॉर्मल ECG रिपोर्ट देखकर यह मान लेना सही नहीं है कि आपका दिल पूरी तरह हेल्दी है। ECG दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी और धड़कन से जुड़ी कई जरूरी जानकारी देता है, लेकिन इससे दिल की हर बीमारी का पता नहीं चलता। डॉक्टरों के अनुसार, हार्ट डिजीज के कई संकेत शुरुआत में काफी हल्के होते हैं, जिन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसे में नॉर्मल ECG होने के बावजूद डॉक्टर से सलाह लेकर टेस्ट करवाना जरूरी है।

 

 कौन से टेस्ट करवाएं?

ECG दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को रिकॉर्ड करता है और डॉक्टरों को दिल की धड़कन और उसके काम करने के तरीके के बारे में जानकारी देता है। लेकिन सामान्य ECG का मतलब यह नहीं है कि दिल में कोई बीमारी या समस्या नहीं है। कोरोनरी आर्टरी में ब्लॉकेज है या नहीं, इसका पता केवल ECG से नहीं लगाया जा सकता। इसलिए लक्षण होने पर दूसरे जरूरी टेस्ट भी डॉक्टर की सलाह से करानी चाहिए।

 

दिल की बीमारी के लक्षण

दिल की बीमारी हमेशा तेज सीने के दर्द के साथ ही सामने आए, यह जरूरी नहीं है। कई बार शरीर पहले से छोटे-छोटे संकेत देने लगता है। सीढ़ियां चढ़ने पर पहले से ज्यादा सांस फूलना, बिना ज्यादा काम के थकान महसूस होना या आराम करते समय अचानक दिल की धड़कन बढ़ना ऐसे संकेत हो सकते हैं। इन्हें सिर्फ कमजोरी, तनाव या कम फिटनेस समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

 

ECG की नॉर्मल रिपोर्ट

कई लोग नॉर्मल ECG रिपोर्ट आने के बाद यह मान लेते हैं कि उनका दिल पूरी तरह स्वस्थ है। इसी वजह से वे शरीर में दिखने वाले दूसरे लक्षणों पर ध्यान नहीं देते। डॉक्टर के मुताबिक, अगर कोई परेशानी बार-बार हो रही है और आराम करने के बाद भी ठीक नहीं हो रही, तो टेस्ट करवाना जरूरी है। नॉर्मल रिपोर्ट के बावजूद लगातार बने रहने वाले लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

 

जरुरी चेकअप

डॉ. चंदोला के अनुसार, दिल की बीमारी के शक में ECG और लिपिड प्रोफाइल शुरुआती जांच हो सकती हैं, लेकिन हर व्यक्ति के लिए सिर्फ ये टेस्ट काफी नहीं होते। डॉक्टर मरीज की उम्र, लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और हार्ट डिजीज के रिस्क को देखकर दूसरी टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। इनमें कोरोनरी कैल्शियम स्कोर, कोरोनरी आर्टरी की जांच, नींद की क्वालिटी और परिवार में पहले की दिल की बीमारी को भी देखा जा सकता है।

 

समय पर ध्यान दें

दिल से जुड़े लक्षणों को गंभीर होने का इंतजार करके नहीं छोड़ना चाहिए। अगर बार-बार सांस फूल रही है, लगातार थकान रहती है, धड़कन अचानक तेज होती है या शरीर के किसी हिस्से में असामान्य बेचैनी महसूस होती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। समय पर परेशानी की पहचान होने से सही इलाज शुरू किया जा सकता है और गंभीर स्थिति का रिस्क कम करने में मदद मिल सकती है।