हरियाणा में करनाल के रहने वाले एक युवक की स्पेन में अचानक मौत हो गई। सीने में दर्द होने के बाद उसके साथी उसे अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार को फोन पर उसकी मौत की सूचना मिली। महमल थ्रोटा गांव निवासी रविंद्र (28) इकलौता बेटा था। वह 11 साल पहले स्पेन गया था। वहां उसकी परमानेंट रेजिडेंसी (PR) होने वाली थी। परिवार उसकी शादी के बारे में भी सोच रहा था। रविंद्र के पिता गुरमुख सिंह भी जर्मनी में रहते हैं। बेटे की मौत की सूचना मिलने के बाद वह जर्मनी से स्पेन के लिए रवाना हो गए हैं। 2015 में 12 लाख रुपए खर्च कर विदेश भेजा था गुरमीत सिंह ने बताया कि परिवार ने वर्ष 2015 में करीब 12 लाख रुपए खर्च करके रविंद्र को विदेश भेजा था। वहां कागजी दिक्कतों के कारण उसे पहले पुर्तगाल जाना पड़ा। कुछ दिनों बाद वह स्पेन चला गया। रविंद्र स्पेन में एक रेस्टोरेंट में काम करता था और अपना खर्च चलाता था। उसे वहां किसी तरह की परेशानी नहीं थी। स्पेन में उसके कागज की प्रक्रिया चल रही थी और परिवार को उम्मीद थी कि जल्द ही वह वहां स्थायी हो जाएगा। दोस्तों ने अस्पताल पहुंचाया, डॉक्टरों ने मृत घोषित किया रविंद्र के चाचा गुरमीत सिंह ने बताया कि शुक्रवार को रविंद्र को अचानक सीने में दर्द हुआ था। इसके बाद उसके साथी उसे अस्पताल लेकर गए। वहां डॉक्टरों ने रविंद्र को मृत घोषित कर दिया। शाम करीब 6 बजे रविंद्र के मामा के बेटे का फोन आया। वह भी स्पेन में रविंद्र के पास ही रहता है। उसने परिवार को बताया कि रविंद्र की मौत हार्ट अटैक से हुई। रविंद्र के पिता जर्मनी से स्पेन रवाना चाचा के मुताबिक, रविंद्र के पिता गुरमुख सिंह पिछले कई सालों से जर्मनी में रह रहे हैं। बेटे की मौत की सूचना मिलने के बाद वह जर्मनी से स्पेन के लिए रवाना हो गए। रविंद्र के शव को भारत लाने के लिए कागजी कार्रवाई की जा रही है। गांव में रविंद्र की मां और छोटी बहन रहती हैं। जल्द ही रविंद्र की शादी के लिए लड़की देखने की तैयारी थी। बेटे के भविष्य और शादी को लेकर परिवार ने जो उम्मीदें लगा रखी थीं, उसकी अचानक मौत से वे भी टूट गईं। परिवार ने सरकार से शव भारत लाने में मदद मांगी रविंद्र के चाचा गुरमीत सिंह ने सरकार से शव जल्द भारत लाने में मदद करने की अपील की है, ताकि परिवार उसे अंतिम विदाई दे सके। अचानक हुई मौत से परिवार सदमे में है। ———————————— ये खबर भी पढ़ें :- करनाल के युवक की जर्मनी में संदिग्ध मौत:11 साल पहले रोजगार के लिए गया था; परिजनों को शव भारत आने का इंतजार करनाल के रहने वाले 32 वर्षीय रिंकू की जर्मनी में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। करीब 11 साल पहले बेहतर रोजगार और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना लेकर विदेश गया रिंकू अब कभी घर नहीं लौटेगा। मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। परिजन शव के भारत पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर…

National Voluntary Blood Donation Day : भारत में हर साल 1 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस मनाया जाता है ताकि व्यक्ति के जीवन में रक्त की आवश्यकता और महत्व को साझा किया जा सके। इसकी शुरुआत सबसे पहले 1 अक्टूबर, 1975 को इंडियन सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन एंड इम्यूनोहेमेटोलॉजी द्वारा की गई थी, जिसकी स्थापना 22 अक्टूबर, 1971 को के. स्वरूप कृष्ण और डॉ. जे.जी. जॉली के नेतृत्व में हुई थी। बिना किसी अपेक्षा के रक्तदान करना मानवता का महान कार्य है और जीवन रक्षक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
रक्तदान दिवस का उद्देश्य
स्वेच्छा से रक्त देने वाले दाताओं का आभार जताना और जीवन बचाने के लिए सुरक्षित रक्त की निरंतर जरूरत को समझाना है। जो लोग बिना किसी पैसे या स्वार्थ के, स्वैच्छिक रूप से (voluntarily) अपना खून दान करते हैं, उन्हें धन्यवाद कहना और उनके इस जीवनदायी योगदान की सराहना करना।
रक्तदाताओं के लिए महत्वपूर्ण बात
बहुत से लोग सोचते हैं कि रक्तदान करने से शरीर में कमजोरी आती है, जबकि सच यह है कि एक स्वस्थ व्यक्ति द्वारा दान किया गया खून शरीर में महज 24 से 48 घंटों के भीतर फिर से बन जाता है। आपका किया हुआ एक (1) यूनिट रक्तदान, तीन (3) अलग-अलग लोगों की जान बचा सकता है।
रक्तदान के प्रमुख फायदे
यह सबसे महत्वपूर्ण और प्रत्यक्ष लाभ है। आपका दिया हुआ रक्त किसी दुर्घटना के शिकार, कैंसर के रोगी, सर्जरी वाले व्यक्ति या प्रसव के दौरान रक्त की कमी से जूझ रही महिला की जान बचा सकता है। नियमित रक्तदान शरीर में आयरन के स्तर को संतुलित रखने में मदद करता है। शरीर में अत्यधिक आयरन हृदय रोगों, जैसे हार्ट अटैक और स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकता है। रक्तदान इस अतिरिक्त आयरन को कम करके हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
शरीर में आयरन का उच्च स्तर कैंसर के कुछ प्रकारों, जैसे लिवर, फेफड़े, बड़ी आंत और गले के कैंसर, के बढ़ते जोखिम से जुड़ा हो सकता है। रक्तदान से आयरन का स्तर कम होकर कैंसर के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है। रक्तदान के बाद शरीर रक्त की कमी को पूरा करने के लिए तेजी से नए रक्त कोशिकाओं (विशेषकर लाल रक्त कोशिकाओं) का उत्पादन शुरू कर देता है।
रक्तदान एक बार में लगभग 650 कैलोरी तक बर्न करने में मदद कर सकता है। यह वजन प्रबंधन में प्रत्यक्ष रूप से सहायक नहीं है, लेकिन यह शरीर को सक्रिय रखने में एक छोटी भूमिका निभा सकता है। रक्तदान करने से पहले, रक्तदाता का शारीरिक परीक्षण, जैसे- ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन स्तर, नब्ज और शरीर का तापमान आदि किया जाता है। साथ ही, रक्त की एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और सी, सिफलिस और मलेरिया जैसे गंभीर संक्रमणों के लिए जांच की जाती है।
अत्यधिक आयरन लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है और हेमोक्रोमैटोसिस जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। रक्तदान आयरन के स्तर को कम करके लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। नियमित रक्तदान उच्च रक्तचाप/ हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है, जिससे हृदय रोगों का जोखिम कम होता है।
देश में जागरूकता फैलाना
लोगों को यह समझाना कि सुरक्षित रक्त और रक्त उत्पादों- जैसे प्लाज्मा, प्लेटलेट्स की आवश्यकता हर समय बनी रहती है, चाहे वह सर्जरी हो, प्रसव/ चाइल्ड बर्थ हो के दौरान होने वाला रक्तस्राव हो या कोई बड़ा हादसा। जरूरतमंद व्यक्ति को रक्त या उसके घटकों का आधान या दान करना आधुनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में मानवता का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
नियमित रक्तदान के लिए प्रेरित करना
समाज में खासकर युवाओं में नियमित रूप से रक्तदान करने की आदत को बढ़ावा देना ताकि अस्पतालों में खून की कमी से किसी की जान न जाए।
बिना किसी अपेक्षा के रक्तदान करना मानवता का महान कार्य है और जीवन रक्षक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। केवल अपने रिश्तेदारों या दोस्तों को ही रक्तदान न करें, बल्कि स्वेच्छा से किसी भी व्यक्ति को रक्तदान करें। इससे कई जानें बच सकती हैं। रक्त से फैलने वाली बीमारियों को रोकने के लिए भी यह आवश्यक है।

विश्व हृदय दिवस हर साल 29 सितंबर को मनाया जाता है। इस बार की थीम है- “दिल की धड़कन को न चूकें,”। 2022 में हृदय रोग से 19.8 मिलियन लोगों की मृत्यु हुई थी। वर्तमाान में कोरोना काल के बाद अचानक से हृदय गति रुक जाने के मामले भी बढ़े हैं। ऐसे में जानिए कि किस तरह लाइफ स्टाइल बदलकर प्राकृतिक तरीके से हार्ट अटैक से खुद को बचा सकते हैं।
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हदय रोग के कारण:
- उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन)
- उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर
- मधुमेह
- धूम्रपान या तंबाकू का सेवन
- मोटापा या शरीर का अतिरिक्त वजन
- शारीरिक निष्क्रियता
- अत्यधिक कफ बना रहना
- अत्यधिक शराब का सेवन
- दीर्घकालिक तनाव
- हृदय रोग का पारिवारिक इतिहास
- बड़ी हुई उम्र
- नींद की खराब गुणवत्ता या अनुपचारित स्लीप एपनिया
- नमक, चीनी और संतृप्त या ट्रांस वसा से भरपूर अस्वास्थ्यकर आहार
- दीर्घकालिक गुर्दे की बीमारी और कुछ सूजन संबंधी स्थितियाँ
हृदय रोग के लक्षण
- सीने में दर्द , दबाव, जकड़न या बेचैनी
- सांस फूलना, खासकर गतिविधि के दौरान या आराम करते समय
- सांस फूलने या सीने में तकलीफ के कारण व्यायाम करने में कठिनाई होना।
- अस्पष्ट थकान या कमजोरी
- दर्द जो हाथ, कंधे, गर्दन, जबड़े या पीठ तक फैलता है
- दिल की धड़कन तेज, धीमी या अनियमित होना ( धड़कन का अनियमित होना)
- चक्कर आना, सिर हल्का महसूस होना या बेहोशी
- पैरों, टखनों या पंजों में सूजन
- ठंडे पसीने आना, मतली या उल्टी होना, खासकर सीने में तकलीफ के साथ
हृदय रोग का प्राकृतिक इलाज:
- शराब, तंबाकू, सिगरेट, नमक, चीनी और तेल का त्याग करना।
- हर रात 7-9 घंटे की अच्छी नींद लें।
- उपवास नहीं कर सकते हैं तो भोजन के बीच कम से कम 10 घंटे काअंतराल रखें।
- नियमित योगासन करें या अनुलोम विलोम प्राणायाम करें।
- डॉक्टर की सलाह पर रोज एक अखरोट खाएं।
- शुद्ध सात्विक और प्राकृतिक भोजन ही करें। सलाद का सेवन करें।
कौन सी सब्जियां कम करती हैं कोलेस्ट्रॉल?
कुछ खास सब्जियों में घुलनशील फाइबर पाया जाता है जो खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाने में मदद करता है। आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ सब्जियों के बारे में:
लहसुन: लहसुन में एलिसिन नामक एक यौगिक पाया जाता है जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है।
प्याज: प्याज में भी एलिसिन पाया जाता है जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है।
बैंगन: बैंगन में नियासिन नामक विटामिन होता है जो अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ावा देता है।
पालक: पालक में विटामिन K और फोलेट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो दिल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
ब्रोकली: ब्रोकली में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं।
कोलेस्ट्रॉल कम करने के अन्य उपाय
स्वस्थ आहार: फाइबर से भरपूर आहार लें, जैसे कि फल, सब्जियां, और साबुत अनाज।
व्यायाम: नियमित रूप से व्यायाम करें।
मोटापे को कम करें: अगर आप मोटे हैं तो अपना वजन कम करें।
धूम्रपान छोड़ें: धूम्रपान कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा सकता है।
तनाव कम करें: तनाव को कम करने के लिए योग, ध्यान या अन्य आराम करने की तकनीक का अभ्यास करें।
कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बहुत जरूरी है। अपनी डाइट में उपरोक्त बताई गई सब्जियों को शामिल करके आप कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर सकते हैं और दिल की बीमारियों से खुद को बचा सकते हैं।
ध्यान रखें
- आप अपने डॉक्टर से पूछकर अपनी डाइट में बदलाव कर सकते हैं।
- नियमित रूप से ब्लड टेस्ट करवाते रहें।
- स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर आप कई बीमारियों से बच सकते हैं।
‘द अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन’ में प्रकाशित एक नए अध्ययन और मेटा-एनालिसिस के अनुसार, लाल, नीले और बैंगनी रंग के खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले प्राकृतिक बायोएक्टिव तत्व ‘एंथोसायनिन’ का अधिक सेवन स्वस्थ व्यक्तियों में हृदय और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है।
एंथोसायनिन पौधों में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले ऐसे यौगिक हैं, जो कई फलों और सब्जियों को लाल, बैंगनी और नीला रंग प्रदान करते हैं। बेरीज़ (Berries) को इसका सबसे समृद्ध स्रोत माना जाता है। विशेष रूप से अमेरिका में उगाई जाने वाली ब्लूबेरी एंथोसायनिन का बेहतरीन स्रोत है, जो हृदय स्वास्थ्य को मजबूत करने में सहायक होती है।
एटा (UP), 21 सितंबर (PTI): एटा कोर्ट परिसर में सोमवार को उस समय अचानक हलचल बढ़ गई, जब कोर्ट में कामकाज के दौरान एडिशनल सिविल जज आरती मौर्य की तबीयत बिगड़ गई। घटना के बाद कोर्ट परिसर में मौजूद कर्मचारियों और अन्य लोगों का ध्यान उनकी ओर गया। सिचुएशन को देखते हुए उन्हें तुरंत मेडिकल सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और संबंधित अधिकारी भी मामले पर नजर रखने लगे।
अप्रैल में आई थीं एटा
आरती मौर्य एटा की कोर्ट नंबर 23 में एडिशनल सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के पद पर तैनात हैं। उनकी एटा में पोस्टिंग इसी साल अप्रैल में हुई थी। उन्होंने 2019 में न्यायिक सेवा में कदम रखा था। 32 वर्षीय आरती मौर्य मूल रूप से मैनपुरी की रहने वाली हैं। न्यायिक सेवा में आने के बाद उन्होंने अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाली हैं और फिलहाल एटा कोर्ट में अपनी सेवाएं दे रही हैं।
अस्पताल में कराया गया भर्ती
तबीयत बिगड़ने के बाद आरती मौर्य को वीरांगना अवंतीबाई लोधी ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी विभाग में ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने उनकी जांच की और स्थिति का आकलन किया। डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें हार्ट अटैक आया था। इसके बाद मेडिकल टीम ने तुरंत शुरुआती इलाज शुरू किया। उनकी कंडीशन को देखते हुए डॉक्टरों ने आगे बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए उन्हें दूसरे मेडिकल सेंटर रेफर करने का फैसला लिया।
पुलिस को मिली घटना की सूचना
कोतवाली नगर के स्टेशन हाउस ऑफिसर धर्मेंद्र पवार ने बताया कि पुलिस को कोर्ट परिसर में जज की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिली थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस को अस्पताल में उनके भर्ती होने की जानकारी मिली। बाद में डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए दूसरे सेंटर भेजे जाने की बात सामने आई। उनकी स्थिति को देखते हुए आगे का इलाज स्पेसलिस्ट की निगरानी में कराया जा रहा है।
कोर्ट में काम के दौरान अचानक सामने आई इस मेडिकल इमरजेंसी के बाद वहां मौजूद लोगों के बीच काफी चिंता देखी गई। इस तरह की सिचुएशन में मेडिकल इमरजेंसी बहुत जरुरी मानी जाती है। फिलहाल आरती मौर्य को बेहतर इलाज कराने पर ध्यान दिया जा रहा है और मेडिकल टीम उनकी कंडीशन के हिसाब से आगे का ट्रीटमेंट कर रही है।
‘काठमांडू से निकलते ही हमें अंदाजा हो गया था कि हालात बेहद खतरनाक हो चुके हैं। पानी का फ्लो अचानक तेजी से बढ़ गया था। हमारी गाड़ी से करीब 500 मीटर की दूरी पर देखते ही देखते एक कार पानी के तेज बहाव में बह गई। उस मंजर को देखकर हम लोग घबरा गए थे।’ उस वक्त लगा कि अब हम लोगों की बारी है। हमारी गाड़ी भी पानी में बह सकती है। हमें उम्मीद नहीं थी कि हम जिंदा बचकर यहां तक पहुंच पाएंगे। भगवान और बिहार सरकार ने ही हमारी जान बचाई है।’ नेपाल से रेस्क्यू किए गए भारतीयों ने ये बातें बताईं। 106 लोगों को शुक्रवार शाम बिहार सरकार की मदद से सुरक्षित सीतामढ़ी लाया गया। इसके बाद इन्हें बस की मदद से देर रात पटना भेजा गया। वहां से ट्रेन की मदद से सुरक्षित उनके राज्य महाराष्ट्र भेजा गया। नेपाल में भीषण बाढ़ से अब तक 600 से ज्यादा लोगों की मौत और 2500 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर है। इनमें बिहार के भी कई लोग शामिल हैं। नेपाल से बिहार लौटे भारतीयों ने क्या बताया? दो दिन उन्होंने किन हालात में गुजारे? अपनी आंखों के सामने उन्होंने क्या-क्या देखा? अब भी उनके मन में किस बात का डर है? पढ़िए नेपाल की आंखों देखी… नेपाल से सही सलामत लोग सीतामढ़ी पहुंचे, 3 फोटोज… ‘बचने की उम्मीद छोड़ चुके थे’ नेपाल घूमने और पशुपतिनाथ के दर्शन के लिए गए महाराष्ट्र के करीब 106 यात्रियों का ग्रुप काठमांडू से भारत लौट आया। उन्हें अंदाजा नहीं था कि ये दो दिन उनकी जिंदगी के सबसे खौफनाक पलों में बदल जाएंगे। जब वे काठमांडू से बिहार आ रहे थे तो रास्ते में अचानक पानी का बहाव तेज हो गया था। सड़कें टूट चुकी थीं। नदियां उफान पर थीं। जिस पुल को पार कर वे बिहार की सीमा में दाखिल हुए, उसका आधे से ज्यादा हिस्सा पानी में डूबा हुआ था। हालांकि, बिहार प्रशासन की मदद से सभी लोग सुरक्षित बचाए लिए गए। इस बीच दैनिक भास्कर की टीम ने सभी सुरक्षित भारतीयों से बात की। नागपुर के रहने वाले योगेश गावंडे ने बताया, ‘नेपाल से बिहार में प्रवेश करने के लिए जिस पुल को हमने पार किया, उस समय उसका आधे से ज्यादा हिस्सा पानी में डूबा हुआ था। पानी लगातार बढ़ रहा था और बहाव बेहद तेज था। डर के बीच हम लोगों ने किसी तरह पुल पार किया, लेकिन इसके करीब आधे घंटे बाद हमें खबर मिली की पानी का लेवल और बढ़ गया है। जिस पुल को हमने क्रॉस किया, वो पूरी तरह डूब चुका है।’ योगेश ने ये भी कहा कि जब हम नेपाल में फंसे थे, तब सच में लग रहा था कि हम बचेंगे भी या नहीं। सुरक्षित निकल पाएंगे, इसकी कोई उम्मीद नहीं थी। अगर कुछ देर वहां और रुकते तो शायद ही आज जिंदा होते। भारत सरकार ने हमारा बहुत साथ दिया। सरकार ने हमें वहां से सुरक्षित निकाला, इंडिया लाए और फिर हमारे घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की। इसके लिए बिहार के CM सम्राट चौधरी का बहुत-बहुत धन्यवाद। ‘महाराष्ट्र और बिहार अलग-अलग नहीं, हम सब भारतीय हैं’ योगेश ने कहा, बिहार प्रशासन और यहां के लोगों के व्यवहार से हमें बहुत अच्छा लगा। हम सभी भारतीय हैं। ऐसा नहीं है कि महाराष्ट्र अलग है और बिहार अलग। हम सब एक ही देश के हैं। आज यहां आकर यह बात और ज्यादा महसूस हो रही है कि मुश्किल वक्त में पूरा भारत एक साथ खड़ा होता है। हम लोगों का ग्रुप 19 अगस्त को महाराष्ट्र से नेपाल पहुंचा था। सबसे पहले हम लोग पोखरा गए, वहां से मुक्तिनाथ और फिर काठमांडू पहुंचे थे। इसी दौरान ग्लेशियर से आई तबाही और बाढ़ के कारण कई रास्ते पूरी तरह टूट गए और बंद हो गए। इसके चलते हमलोग भारत वापस नहीं आ पा रहे थे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से तत्काल मदद की गई और नेपाल से भारत तक पहुंचाने के लिए आवश्यक व्यवस्था कराई गई। ’50 सीटर बस पहाड़ में फंसी, छोटी गाड़ियों से निकाला’ पुणे निवासी नारायण रेशमा बाजपेयी ने बताया, हम लोगों का ग्रुप करीब 50 सीटर बस से नेपाल गया था। शुरुआत के 7-8 दिन यात्रा सामान्य रही, लेकिन वापसी के समय रास्ते बंद होने लगे। 50 सीटर बस के लिए पहाड़ी और टूटे हुए रास्तों से आगे बढ़ना संभव नहीं था। इसके बाद स्थानीय स्तर पर मदद मांगी गई। छोटी गाड़ियों की व्यवस्था की गई। इन्हीं छोटी गाड़ियों से यात्रियों को आगे निकाला गया। जिस जगह बाद में सबसे ज्यादा तबाही हुई, उसी जगह से हम लोग एक दिन पहले ही निकल चुके थे। इस वजह से हमने तबाही का सबसे भयानक रूप सामने से नहीं देखा, लेकिन वापसी के दौरान रास्तों की हालत देखकर हमें खतरे का अंदाजा हो गया था। काठमांडू में दो दिनों तक बिना खाए रहे लोग आशा पांडे ने बताया, हमलोग 2 दिनों से बहुत ही मुश्किल में थे। भूखे-प्यासे सिर्फ जान की परवाह कर रहे थे। समझ में नहीं आ रहा था कि कब और कैसे इस भयानक तबाही से निकल पाएंगे।’ एक अन्य यात्री सरला ने बताया, ‘नेपाल से निकलकर जब हम लोग भारतीय सीमा तक पहुंचे तो यहां प्रशासन और स्थानीय लोगों ने हमारी काफी मदद की। हमें बॉर्डर से आगे लाने, गाड़ी तक पहुंचाने और खाने-पीने की पूरी व्यवस्था की गई। प्रशासन की ओर से पहले नाश्ता और भोजन कराया गया। रहने की भी व्यवस्था की गई। उन्होंने भावुक होकर कहा, ‘आज राखी का दिन है और ऐसा लग रहा है कि हमें यहां भाई मिल गए। हमारी बहुत बड़ी मदद हुई है। जिस तरह से प्रशासन और लोगों ने हमारा साथ दिया, वह हम कभी नहीं भूलेंगे।’ सरला की मौसेरी बहन निर्मला पांडे ने बताया, हम लोग नेपाल घूमने गए थे, लेकिन अचानक आई बाढ़ के कारण वहां फंस गए। इस बीच मेरी मां की तबीयत बिगड़ गई। नेपाल के हालात को देखकर वे घबरा गईं और उन्हें हार्ट अटैक आ गया। फिलहाल, उनका इलाज नेपाल के काठमांडू के एक अस्पताल में चल रहा है। वहां की सरकार और मेरा भाई उनका ध्यान रख रहे हैं।’ ये सभी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, लेकिन महाराष्ट्र के पुणे में नौकरी करते हैं। ‘नेपाल बॉर्डर पर यात्रियों को रिसीव किया, खाना दिया, आगे की व्यवस्था की’ आपदा के ADM बृज किशोर पांडेय ने कहा, भारत से नेपाल घूमने गए ये यात्री बाढ़ की तबाही में फंस गए थे। 28 अगस्त को करीब 3 बजे दोपहर में मुख्यमंत्री सचिवालय और आपदा प्रबंधन विभाग से सूचना मिली कि नेपाल से कुछ भारतीय बिहार बॉर्डर पर आ रहे हैं। जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन ने बॉर्डर पर पहुंचकर यात्रियों को रिसीव किया। गाड़ी नहीं होने पर प्रशासन ने अपने साधनों से उन्हें थाने तक पहुंचाया। थाने पहुंचने पर यात्रियों को नाश्ता, फल, पानी और भोजन उपलब्ध कराया गया। एक-दो यात्रियों ने कमजोरी और चक्कर की शिकायत की, जिनकी डॉक्टरों ने जांच की। किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। प्रशासन के अनुसार करीब 110 यात्री लौट रहे थे, जिनमें कुछ निजी साधनों से आगे निकल गए। फिलहाल 106 यात्रियों का ग्रुप प्रशासन के पास पहुंचा है। सभी को उनकी जरूरत के मुताबिक मदद देने के साथ पटना आने-जाने की व्यवस्था भी की गई। महाराष्ट्र के CM ने सीतामढ़ी सांसद से किया कॉन्टैक्ट सभी यात्रियों ने गुरुवार, 27 अगस्त को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से संपर्क साधा था। इसके बाद फडणवीस ने तुरंत सीतामढ़ी सांसद देवेश चंद्र ठाकुर को पूरी स्थिति बताई। सांसद देवेश ठाकुर ने गुरुवार रात काठमांडू सांसद संदीप राणा से कॉन्टैक्ट किया, जिसके बाद शुक्रवार सुबह विशेष बसों की व्यवस्था कर सभी को वहां से रवाना किया गया। रास्ते में दो बसें बदलकर तीर्थयात्री किसी तरह सीतामढ़ी के भिट्ठामोड़ सीमा पहुंचे। यहां सीतामढ़ी जिला प्रशासन की टीम पहले से मुस्तैद थी। सीमा पर पुपरी एसडीओ गौरव कुमार, सीओ सतीश कुमार, बीडीओ कर्मवीर कुमार प्रभाकर, आरओ ब्रजेश मिश्र और भिट्ठा थानाध्यक्ष दीपक पटेल सहित अधिकारियों ने सभी का स्वागत किया। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. लालू कुमार की देखरेख में सभी का हेल्थ चेकअप कराया गया। सभी को खाना खिलाया और आराम करने की व्यवस्था की। महाराष्ट्र की महिलाओं ने सीतामढ़ी SDM के साथ मनाई राखी ——————– ये खबर भी पढ़ें… नेपाल में तबाही के बीच बचा रहा घर:कई फीट तक पानी और मलबे से घिरा; बालकनी में खड़े 3 लोगों की जान बची, VIDEO नेपाल में आई अचानक बाढ़ के बीच एक घर पानी के तेज बहाव के बावजूद खड़ा रहा। आसपास का इलाका उफनते पानी में डूब गया और कई इमारतें व मलबा बहते दिखे। इस घर का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पूरी खबर पढ़ें…
Kuku kohli Aruna Irani Relationship: अरुणा ईरानी और दिवंगत फिल्म निर्माता कुकू कोहली की प्रेम कहानी और उनकी शादी उन दिनों अक्सर सुर्खियों में रहती थी। कुकू कोहली की पहली पत्नी के जिंदा रहते अरुणा ईरानी इस हादसे के बारे में ज्यादा बात नहीं करती थीं। चार साल पहले, अरुणा ईरानी ने एक इंटरव्यू में बताया कि कैसे उनकी मुलाकात कुकू कोहली से एक फिल्म सेट पर हुई और कैसे उनका रिश्ता पनपा।
अरुणा ईरानी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया- हमारी मुलाकात एक फिल्म के दौरान हुई, जिसमें हम दोनों साथ काम कर रहे थे। उस फिल्म के दौरान वह सभी अन्य अभिनेताओं को तब तक इंतजार करवाते थे, जब तक धर्मेंद्र जी सेट पर नहीं आ जाते। तभी शूटिंग शुरू होती थी।
मुझे उन पर बहुत गुस्सा आता था क्योंकि मैं उस समय कुछ अन्य फिल्मों में भी काम कर रही थी। इसलिए हमारा रिश्ता प्यार और नफरत से भरा हुआ था। मैं उन पर बहुत गुस्सा होती थी और वह मुझे दिलासा देते थे। उस चक्कर में कैसे लफड़ा हो गया समझ नहीं आया ।
अरुणा ईरानी को यह जानकर काफी हैरानी हुई कि कुकू पहले से शादीशुदा थे और उनके बच्चे भी थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, “जब हम मिले थे, तो उन्होंने मुझे यह भी नहीं बताया था कि वह शादीशुदा हैं, और इसी वजह से मुझे उनसे प्यार हो गया। इसलिए हमारे रिश्ते के बारे में बात करना सही नहीं लगा, क्योंकि वह पहले से ही शादीशुदा थे और उनकी पत्नी और बेटियां थीं। अब मैं इस बारे में इसलिए बात कर रही हूं, क्योंकि उनकी पहली पत्नी का कुछ महीने पहले निधन हो गया है।”
अरुणा और कुकू की शादी 1990 में हुई थी, जब वह 40 साल की थीं
फिल्मफेयर के साथ एक पुराने इंटरव्यू में, अरुणा ने यह भी बताया था कि उनके और कुकू कोहली के बच्चे क्यों नहीं हुए। “आज जब मैं अपने भतीजे-भतीजियों और भांजे-भांजियों को देखती हूं, तो मुझे खुशी होती है कि मेरे बच्चे नहीं हैं। अगर कोई मेहमान घर आता और मेरा बच्चा उनका स्वागत न करता या सोफे पर बेपरवाह पड़ा रहता – जैसा कि आजकल के बच्चे करते हैं – तो मुझे बुरा लगता।
उनका ऐसा रवैया होता है, ‘तो क्या हुआ?’ भगवान का शुक्र है। मेरे एक करीबी दोस्त, डॉ. अजय कोठारी ने मुझे सही बात समझने और फैसला लेने में मदद की। उन्होंने कहा, ‘शादी करना ठीक है, आपको साथ की जरूरत है, लेकिन बच्चे और आपके बीच उम्र का फ़ासला इतना ज़्यादा होगा कि उसे संभालना मुश्किल होगा।’ मुझे लगता है कि वह सही थे। मैं और मेरा बच्चा एक-दूसरे के साथ घुटन महसूस करते।
1991 की फ़िल्म ‘फूल और कांटे’ के लिए मशहूर अनुभवी फ़िल्म निर्माता कुकू कोहली का 77 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके दोस्त अशोक पंडित ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अशोक पंडित ने PTI को बताया, “उन्हें बेचैनी महसूस हो रही थी, इसलिए कल उन्हें कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शाम करीब 4:30 बजे हार्ट अटैक के कारण उनका निधन हो गया।” कोहली के परिवार में उनकी पत्नी अभिनेत्री अरुणा ईरानी और उनकी पहली पत्नी रीटा कोहली से हुई दो बेटियां, पूजा और करिश्मा हैं।
बॉलीवुड के भाईजान सलमान खान अपनी एक्टिंग के साथ-साथ अपनी दरियादिली के लिए भी जाने जाते हैं। सलमान खान ने अपने लंबे समय से साथ काम कर रहे बॉडी डबल परवेज काजी की तबीयत खराब होने पर उनकी मदद की है। रिपोर्ट के मुताबिक, परवेज की हाल ही में दिल से जुड़ी एक छोटी सर्जरी हुई है। इस दौरान सलमान ने बड़े भाई की तरह बॉडी डबल परवेज काजी की मदद की है। इस दौरान सलमान ने उनकी मेडिकल जरूरतों का ध्यान रखा और इलाज से जुड़ी व्यवस्थाओं में मदद की। परवेज लंबे समय से सलमान के साथ उनके कई प्रोजेक्ट्स में काम कर चुके हैं।
सलमान खान ने की मदद
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बॉडी डबल परवेज 6 अगस्त को अपने घर पर बीमार पड़ गए थे। शुरुआत में ऐसी खबरें सामने आई थीं कि उन्हें शूटिंग के दौरान हार्ट अटैक आया था, लेकिन उनके मैनेजर पीयूष ने बाद में साफ किया कि यह हेल्थ स्केयर फिल्म के सेट पर नहीं हुआ था। तबीयत बिगड़ने के बाद परवेज काजी ने डॉक्टर से संपर्क किया और जरूरी जांच कराई। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां उनकी दिल से जुड़ी छोटी सर्जरी की गई। काजी की हालत की जानकारी मिलने पर सलमान खान ने भी उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई और इलाज से जुड़ी जरूरी मेडिकल व्यवस्था का ध्यान रखा।
छोटे भाई की तरह की मदद
रिपोर्ट के मुताबिक, सलमान ने ये सुनिश्चित करने की कोशिश की कि काजी को समय पर सही इलाज और जरूरी देखभाल मिलती रहे। काजी के मैनेजर पीयूष के मुताबिक, सलमान खान ने खुद यह सुनिश्चित किया कि उनके इलाज के लिए जरूरी इंतजाम किए जाएं। उन्होंने कहा, “सलमान सर परवेज सर को छोटे भाई की तरह मानते हैं और उन्होंने तुरंत मदद की।” मैनेजर पीयूष ने बताया कि इलाज से जुड़े जरूरी इंतजाम किए जा रहे थे, उस दौरान सलमान खान भी उनके साथ मौजूद थे। फिलहाल परवेज काजी की सेहत में सुधार हो रहा है। डॉक्टरों की सलाह के अनुसार कुछ समय आराम करने के बाद वह दोबारा काम शुरू कर सकते हैं।
‘मॉन्स्टर’ की शूटिंग पर पड़ा असर
परवेज काजी की तबीयत खराब होने का असर सलमान खान की आने वाली फिल्म ‘मॉन्स्टर’ की शूटिंग पर भी पड़ा है। सलमान खान की फिल्म ‘मॉन्स्टर’ को वामशी पैडिपल्ली डायरेक्ट कर रहे हैं और दिल राजू इसे प्रोड्यूस कर रहे हैं। फिल्म की शूटिंग फिलहाल मुंबई में चल रही है और काजी के आराम करने की वजह से कुछ एक्शन सीन के शेड्यूल में बदलाव करना पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, काजी के पूरी तरह ठीक होने तक सलमान खान को फिल्म के कुछ एक्शन सीन खुद करने पड़ सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘मॉन्स्टर’ ईद 2027 के आसपास रिलीज हो सकती है।
इस फिल्म में आएंगे नजर
सलमान खान आने वाले समय में कई बड़े प्रोजेक्ट्स में नजर आने वाले हैं। उनकी फिल्मों की लिस्ट में एक्शन फिल्म ‘मॉन्स्टर’ के साथ ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ भी शामिल है। अपूर्व लाखिया के निर्देशन में बनी यह फिल्म 2020 में भारत-चीन के बीच हुए गलवान घाटी संघर्ष की कहानी पर आधारित है। इसे 2026 में रिलीज करने की योजना थी, लेकिन सर्टिफिकेशन और अन्य कारणों से इसकी रिलीज टल गई। अब दर्शकों को फिल्म की नई रिलीज डेट की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
परवेज काजी लंबे समय से सलमान खान के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने सलमान की कई चर्चित फिल्मों में उनके बॉडी डबल की भूमिका निभाई है। इनमें प्रेम रतन धन पायो, सुल्तान, टाइगर जिंदा है, रेस 3, भारत, दबंग 3 और राधे: योर मोस्ट वांटेड भाई जैसी फिल्में शामिल हैं।
कनाडा में रह रहे हरियाणा के करनाल के एक 27 वर्षीय युवक की अचानक हार्ट फेल होने से मौत हो गई। युवक अपनी गर्भवती पत्नी के साथ सैर पर निकला था। इसी दौरान उसने एक दुकान से लेकर नमकीन खाई, जिसके बाद अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने डेड डिक्लेयर कर दिया। परिवार के मुताबिक, युवक को कनाडा की नागरिकता (PR) मिल चुकी थी। उसकी पत्नी 7 माह की गर्भवती है। दोनों की करीब दो साल पहले शादी हुई थी। दोनों अपने आने वाले बच्चे को लेकर बेहद खुश था, अचानक खुशियां गम में बदल गईं। बेटे की मौत की खबर के बाद से दोनों परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अब शव को भारत लाने के प्रयास शुरू हो गए हैं। बताया गया कि गुरुवार को कनाडा में पोस्टमॉर्टम हुआ। कपल के कई रिश्तेदार कनाडा और अमेरिका से मौके पर पहुंचे हैं। 9 साल पहले स्टडी वीजा पर गया कनाडा करनाल के गांव नरूखेड़ी के गुरमेल नरवाल का बेटा रजत वर्ष 2017-18 में स्टडी वीजा पर कनाडा गया था। परिजन दिलबाग ने बताया कि रजत वहां पढ़ाई के साथ प्लंबरिंग का काम भी करता था। वह काफी मेहनती थी और उसे स्थाई नागरिकता (PR) मिल गई थी। फिलहाल वह कनाडा के ब्रैम्पटन, ओंटारियो में रह रहा था। रजत का भाई पम्मी भी वर्ष 2017-18 में अमेरिका गया था और वहां काम करता है। शादी के 2 माह बाद पत्नी को कनाडा ले गया रजत की शादी 4 जनवरी 2025 को पानीपत के मॉडल टाउन निवासी अक्षिता के साथ हुई थी। शादी के करीब दो महीने बाद ही वह पत्नी को लेकर कनाडा चला गया। अक्षिता अभी सात महीने की गर्भवती है। रजत और अक्षिता अपने होने वाले बच्चे को लेकर बेहद उत्साहित थे। अकसर परिवार के साथ होने वाले बच्चे की परवरिश को लेकर चर्चा करते थे। परिजनों के अनुसार, रजत ने मौत से एक दिन पहले ही अपनी मां सुनीता से फोन पर बात की थी। उसने परिवार को बताया था कि सब ठीक-ठाक है। सैर पर निकले थे कपल, तबीयत खराब हुई परिजनों ने बताया कि 18 अगस्त की शाम दोनों रोजाना की तरह सैर पर निकले थे। इस दौरान नमकीन खाने का मन हुआ तो एक दुकान से नमकीन ली। रजत ने जैसे ही नमकीन खाई, अचानक उसकी तबीयत खराब होने लगी। पत्नी घबरा गई। उसकी हालत बिगड़ती देखकर आसपास के लोग मौके पर जुटे और अस्पताल पहुंचाने में मदद की। परिजन दिलबाग के अनुसार, अस्पताल पहुंचने तक रजत का शरीर नीला पड़ चुका था। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार का कहना है कि मौत का कारण हार्ट फेल्योर बताया गया है। बहन ने फोन पर दी परिवार को खबर रजत की चचेरी बहन अंशुल भी कनाडा में रहती है। उसने फोन कर परिवार को घटना की जानकारी दी। अचानक उसकी मौत की खबर आने से माता-पिता गुरमेल और सुनीता का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। रजत का भाई पम्मी भी मौत की सूचना मिलने के बाद वह अपने साथियों के साथ अमेरिका से कनाडा पहुंचा है। परिवार ने अब रजत का शव भारत लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। माता-पिता भी जाने वाले थे कनाडा परिजनों ने बताया कि अक्षिता सात महीने की गर्भवती होने के कारण रजत के माता-पिता को भी कनाडा जाना था, ताकि वे उसकी देखभाल में साथ रह सकें। दोनों के पासपोर्ट रिन्यू होने के लिए गए हुए थे। पासपोर्ट मिलते ही उन्हें कनाडा रवाना होना था, लेकिन इससे पहले ही रजत की मौत हो गई। परिवार के लोग अब शव भारत लाने की तैयारी में जुटे हैं। इस दुखद घटना से पूरे गांव में शोक का माहौल है। —————— ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में करनाल के युवक की मौत:5 साल पहले काम करने गया था, परिजन कर रहे शव को भारत लाने का प्रयास करनाल के चोरकारसा गांव के एक युवक की अमेरिका में हार्ट अटैक से मौत हो गई। युवक पांच साल पहले बेहतर भविष्य के लिए अमेरिका गया था और वहीं ग्रीन कार्ड होल्डर बनकर काम कर रहा था। अचानक तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। (पूरी खबर पढ़ें)
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में काम का दबाव, घंटों बैठे रहना, बाहर का खाना और लगातार तनाव हमारी रोजमर्रा की लाइफस्टाइल का हिस्सा बनते जा रहे हैं। इन आदतों का असर धीरे-धीरे दिल की सेहत पर भी पड़ सकता है। हालांकि, दिल को स्वस्थ रखने के लिए अपनी पूरी लाइफस्टाइल बदलने की जरूरत नहीं है। छोटी-छोटी अच्छी आदतें भी बड़ा फर्क डाल सकती हैं। कार्डियोवस्कुलर सर्जन डॉ. जेरेमी लंदन ने 8,000 से ज्यादा हार्ट ऑपरेशन किए हैं। उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर ऐसी 5 चीजों के बारे में बताया है, जिनसे वह खुद दूरी बनाए रखते हैं।
इनमें स्मोकिंग, ज्यादा प्रोसेस्ड खाना, लंबे समय तक बैठे रहना, अकेलापन और लगातार तनाव जैसी रोज की आदतें शामिल हैं। खास बात यह है कि इनसे बचने के लिए किसी कठिन रूटीन की जरूरत नहीं है। बस अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में थोड़े बदलाव करके दिल की सेहत का बेहतर ख्याल रखा जा सकता है।
- धूम्रपान से रहें दूर
डॉ. Jeremy लंदन सिगरेट, वेप और गांजा पीने से बचने की सलाह देते हैं। धुएं में मौजूद हानिकारक पदार्थ दिल और रक्त वाहिकाओं पर बुरा असर डाल सकते हैं। इसलिए दिल की सेहत के लिए धूम्रपान छोड़ना सबसे जरूरी कदमों में से एक है।
- ज्यादा पैकेट वाला खाना न खाएं
चिप्स, पैकेज्ड स्नैक्स, फास्ट फूड और दूसरे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड में अक्सर ज्यादा नमक, चीनी और खराब फैट होता है। डॉक्टर की सलाह है कि खाने में ताजे फल, सब्जियां, दाल, साबुत अनाज और घर का बना खाना ज्यादा शामिल करें।
- घंटों बैठे न रहें
आजकल काम के दौरान कई लोग लंबे समय तक कुर्सी पर बैठे रहते हैं। डॉ. लंदन के मुताबिक, हमारा शरीर लगातार बैठे रहने के लिए नहीं बना है। रोज थोड़ा चलना भी अच्छी शुरुआत है। खाने के बाद 10 मिनट की वॉक जैसी छोटी आदत भी फायदेमंद हो सकती है।
- अकेलेपन को नजरअंदाज न करें
दिल की सेहत का संबंध सिर्फ खान-पान और एक्सरसाइज से नहीं है। लंबे समय तक अकेलापन भी शरीर और दिमाग पर असर डाल सकता है। परिवार, दोस्तों और करीबी लोगों के साथ समय बिताना और उनसे जुड़े रहना जरूरी है।
- लंबे समय तक तनाव न पालें
लगातार तनाव रहने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और दिल पर दबाव पड़ सकता है। इसलिए तनाव को नजरअंदाज करने के बजाय उसे कम करने की कोशिश करनी चाहिए। अच्छी नींद, एक्सरसाइज, आराम और अपनों के साथ समय बिताना इसमें मदद कर सकता है।
खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता
डॉ. लंदन का कहना है कि इन आदतों को अपनाने से हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता। लेकिन स्वस्थ जीवनशैली और जोखिम कारकों पर नियंत्रण दिल को बेहतर स्थिति में रखने में मदद कर सकता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य स्वास्थ्य सुझावों पर आधारित है। इसे किसी योग्य चिकित्सा राय का विकल्प न मानें। किसी भी नए व्यायाम को शुरू करने से पहले विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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हरियाणा के जींद से यूरोप गए 22 वर्षीय युवक की डूबने से मौत हो गई। वो मॉल्डोवा में दोस्तों के साथ वीकएंड पर समुद्र घूमने गया था। जिस बोट में वो बैठा अचानक से थे, वह डूबने लगी। समुद्र में डूबने से युवक की मौत हो गई। युवक 9 महीने पहले यूरोप स्टडी वीजा पर गया था। पढ़ाई के साथ-साथ वहां पर एक होटल में पार्ट टाइम डिलीवरी बॉय का काम करता था। युवक के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इसी कारण उसे विदेश भेजा गया था ताकि वो पढ़ाई के साथ वहां जॉब कर पैसे भेज सके। युवक के पिता की 7 साल पहले मौत हो चुकी है। मां ने रिश्तेदारों से पैसे उधार लेकर इकलौते बेटे को भेजा था। अब 10 लाख रुपए खर्च कर युवक का शव गांव लाया गया। शव गांव पहुंचने पर आज बड़ी बहन ने भाई का अंतिम संस्कार किया और मुखाग्नि दी। 9 महीने पहले विदेश भेजा था चचेरे भाई प्रवीन कुमार ने बताया कि गांव चांदपुर के रहने वाले परिवार ने करीब 9 महीने पहले निहाल सिंह (22) को स्टडी वीजा पर विदेश भेजा था। परिवार को उम्मीद थी कि वह वहां पढ़ाई के साथ कमाई करके आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद करेगा। विदेश भेजने में 15 लाख रुपए खर्च किए प्रवीन के मुताबिक, निहाल को विदेश भेजने में परिवार ने करीब 15 लाख रुपए खर्च किए थे। मां के पास इतने पैसे नहीं थे, इसलिए रिश्तेदारों और जानकारों से रकम जुटाई गई थी। अब शव भारत लाने में भी करीब 10 लाख रुपए खर्च हुए हैं, जिसमें कुछ राशि परिवार और कुछ भाईचारे से जुटाई गई। पिता की मौत के बाद निहाल था सहारा प्रवीन ने बताया कि निहाल के पिता कृष्ण कुमार की 7 साल पहले ही हार्ट अटैक से मौत हो चुकी थी। इसके बाद मां सुनीता देवी ने दोनों बच्चों का पालन-पोषण किया। घर के पास उनकी करियाना की दुकान है और निहाल परिवार में अकेला कमाने वाला था। निहाल से परिवार को बड़ी उम्मीदें थीं परिवार को उम्मीद थी कि निहाल विदेश में पढ़ाई पूरी करने के साथ कमाई कर मां और बहन का सहारा बनेगा। उसकी मौत के बाद परिवार की उम्मीदें टूट गईं। गांव में शव पहुंचने के बाद परिवार में मातम छा गया। दोपहल 2 बजे निहाल का अंतिम संस्कार किया गया।
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