मिडिल ईस्ट में हालात एक बार फिर बिगड़ते जा रहे हैं। अमेरिका ने ईरान पर एक बार फिर हवाई हमले किए हैं। ईरान ने होर्मुज पर एक जहाज पर हमला किया, जिसके जवाब में अमेरिका सेना ने तेहरान के केश्म द्वीप समते कई शहरों में भीषण बमबारी शुरू कर दी। दोनों देशों ने ताजा हमलों की पुष्टि की है।
US Iran Ultimatum Strait of Hormuz: मिडिल ईस्ट में जारी महायुद्ध के बीच एक बाद अपडेट सामने आया है। अमेरिका ने ईरान को 24 घंटे की सख्त डेडलाइन दी है। US ने ईरान को सार्वजनिक रूप से यह घोषणा करने को कहा है कि वह रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के समुद्री रास्ते को खुला रखेगा और कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हमलों को तुरंत रोकेगा।
‘एक्सियोस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वाशिंगटन ने ईरान को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर वह इस अल्टीमेटम को नहीं मानता है, तो उसे इसके ‘गंभीर परिणाम’ भुगतने होंगे और अमेरिकी सेना किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है। आइए जानते हैं अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े इस नए विवाद की पूरी इनसाइड स्टोरी क्या है।
‘कल का दिन उनके लिए अच्छा नहीं होगा’
अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान तक यह कड़ा संदेश सीधे तौर पर और क्षेत्र के मध्यस्थ देशों के जरिए पहुंचा दिया गया है। एक अमेरिकी अधिकारी ने बेहद सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा, ‘अगर कल तक ईरान अपना रुख साफ नहीं करता है, तो कल का दिन उनके लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं रहने वाला है।’ अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि ईरान दुनिया के सामने सार्वजनिक रूप से यह ऐलान करे कि होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाला व्यापार पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।
एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि वे सार्वजनिक रूप से कहें कि वे जहाजों पर गोलीबारी बंद करेंगे और प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से यह स्वीकार करेंगे कि उन्होंने बहुत बड़ी गलती की है।’ इसके साथ ही अमेरिका चाहता है कि ईरान यह भी घोषित करे कि इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले सभी जहाजों के लिए यह चैनल पूरी तरह ‘टोल-फ्री’ रहेगा।
समझौते के उल्लंघन का आरोप: पहले भी हो चुकी है एयरस्ट्राइक
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान ने पिछले महीने हुए आपसी सहमति पत्र का खुलेआम उल्लंघन किया है। ईरान द्वारा लगातार कमर्शियल और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद ही अमेरिका दो बार ईरान पर जवाबी हवाई हमले कर चुका है। अमेरिका का कहना है कि डिप्लोमेसी फेल होने की सूरत में उसके पास प्लान-बी तैयार है।
ओमान में आज होने वाली बैठक पर टिकी दुनिया की नजरें
इस भयंकर तनाव के बीच शनिवार, 11 जुलाई को ओमान की राजधानी मस्कट में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शनिवार को ओमान की यात्रा पर पहुंच रहे हैं। ओमान और ईरान के अधिकारियों के बीच होने वाली इस बातचीत का मुख्य फोकस होर्मुज जलमार्ग और वहां जहाजों की सुरक्षा ही है।
अमेरिका को उम्मीद है कि इस बैठक के दौरान ओमान के दबाव में आकर तेहरान ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के जरिए फ्री नेविगेशन को फिर से बहाल करने पर सहमत हो जाएगा। ईरानी सरकारी मीडिया ने भी इस दौरे की पुष्टि करते हुए इसे पिछले दो महीनों से ओमान के साथ चल रही बातचीत का ही हिस्सा बताया है।
क्यों पूरी दुनिया के लिए आफत है ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का बंद होना?
‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘ऑयल चोकपॉइंट’ कहा जाता है।दुनिया के कुल तेल और गैस सप्लाई का लगभग 20% इसी पतले समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और इराक जैसे देश इसी रास्ते से दुनिया को कच्चा तेल भेजते हैं।
LPG Price Today: अगर आप आज (10 जुलाई) गैस सिलेंडर बुक कराने की योजना बना रहे हैं, तो पहले ताजा एलपीजी (LPG) रेट जरूर देख लें। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 10 जुलाई 2026 के लिए नई कीमतें जारी कर दी हैं। आज भी 14 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर और 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ शांति समझौते को खत्म बताने और अमेरिका द्वारा नए हमले शुरू करने के बाद LPG, CNG और PNG की कीमतों को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं।
इससे एनर्जी सप्लाई के लिए अहम रास्ते, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर भी चिंता पैदा हो गई है। ट्रंप ने कहा है कि US-ईरान युद्ध को खत्म करने का अंतरिम समझौता खत्म हो गया है। 17 जून के समझौते को खत्म करने के कुछ घंटों बाद, अमेरिका ने बुधवार को ईरान के खिलाफ नए और बड़े सैन्य हमले किए। इन हमलों में देश के दक्षिणी तट पर मौजूद ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसका मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य से कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा करना बताया गया। अमेरिकी सेना ने कहा कि शुरुआती शांति समझौते और चल रही बातचीत के बावजूद उसने फिर से हमले शुरू कर दिए हैं।
भारत में इंडियन ऑयल ने 1 जुलाई से 19-kg वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत कम की, जो 2026 में पहली कटौती थी। अलग-अलग शहरों में यह कटौती ₹173 से ₹183.50 के बीच थी। सरकार ने कहा कि देश भर में घरेलू LPG, PNG और CNG की सप्लाई पूरी तरह से बनाए रखी जा रही है। सरकार ने यह भी कहा कि सप्लाई को लेकर चिंताएं कम होने के बाद होटलों, रेस्तरां और दूसरे व्यवसायों को कमर्शियल LPG की सप्लाई संकट से पहले के स्तर पर बहाल कर दी गई है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, कमर्शियल LPG की कीमतों में कटौती पिछले हफ्ते कमर्शियल ग्राहकों को सप्लाई बहाल होने के बाद की गई। घरेलू उत्पादन में सुधार और इंपोर्टेड LPG कार्गो के आने की उम्मीद के कारण कमर्शियल LPG सप्लाई पर लगी पाबंदियां हटा ली गई थीं। इसके अलावा, बुधवार को एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में ₹5 प्रति लीटर की कटौती की गई, जिससे दिल्ली में इसकी कीमत घटकर ₹110 प्रति लीटर हो गई। ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण जेट फ्यूल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद यह पहली कटौती थी। इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रूट पर एयरलाइंस के ऑपरेटिंग खर्च में कमी आने की उम्मीद है।
14 किलो घरेलू LPG सिलेंडर के दाम (रुपये में)
दिल्ली: ₹942
नोएडा: ₹939.50
मुंबई: ₹941.50
कोलकाता: ₹968
पटना: ₹1,031.50
लखनऊ: ₹979.50
चेन्नई: ₹957.50
चंडीगढ़: ₹951.50
जयपुर: ₹945.50
हरियाणा: ₹943.50
असम: ₹991
19 किलो कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम (रुपये में)
दिल्ली: ₹2,930
नोएडा: ₹2,930
मुंबई: ₹2,885.50
कोलकाता: ₹3,081.50
पटना: ₹3,227
लखनऊ: ₹3,052.50
चेन्नई: ₹3,106
चंडीगढ़: ₹2,954.50
जयपुर: ₹2,957.50
हरियाणा: ₹2,932
असम: ₹3,173.50
कब बदलती हैं LPG की कीमतें?
ऑयल मार्केटिंग कंपनियां आमतौर पर हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं। हालांकि, जरूरत पड़ने पर महीने के बीच में भी घरेलू या कमर्शियल सिलेंडर के दाम बदले जा सकते हैं।
घर बैठे ऐसे करें अपने शहर का LPG रेट चेक
अगर आप अपने शहर में एलपीजी सिलेंडर की सटीक कीमत जानना चाहते हैं, तो इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ताजा रेट देख सकते हैं। वहां हर शहर के अनुसार अपडेटेड कीमतें उपलब्ध रहती हैं। फिलहाल 10 जुलाई 2026 को एलपीजी उपभोक्ताओं को कीमतों में किसी तरह की राहत नहीं मिली है। घरेलू एवं कमर्शियल दोनों कैटेगरी के सिलेंडरों के दाम स्थिर बने हुए हैं।
अमेरिका और ईरान ने एक दूसरे पर फिर से हमले शुरू कर दिया। होर्मुज में जहाजों पर हमले के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर भारी तबाही मचा दी। ईरान ने भी अमेरिका को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि अब मुंहतोड़ जवाब मिलेगा। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान
Sensex-Nifty closes deep red: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ सीजफायर खत्म होने का ऐलान किया तो घरेलू मार्केट में कोहराम मच गया। इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज- सेंसेक्स और निफ्टी 50 धड़ाम हो गए। सेंसेक्स इंट्रा-डे में 1900 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी 24800 के एकदम करीब आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी मार्केट में बिकवाली का तेज दबाव दिखा। निफ्टी मिडकैप 100 में डेढ़ फीसदी से अधिक तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 2% से अधिक की गिरावट आई।
सेक्टरवाइज आज सभी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स लाल रहे। हालांकि सबसे अधिक दबाव बैंकिंग और एफएमसीजी स्टॉक्स ने डाला। पीएसयू और प्राइवेट बैंकों के निफ्टी इंडेक्स ढाई फीसदी से अधिक टूट गए तो निफ्टी एफएमसीजी भी करीब ढाई फीसदी नीचे आ गया। ऑटो सेक्टर का निफ्टी इंडेक्स 2% से अधिक टूटा तो निफ्टी आईटी भी 1% से अधिक कमजोर हुआ है। बिकवाली के इस माहौल में ओवरऑल आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹7 लाख करोड़ से अधिक घट गया यानी निवेशकों की दौलत में ₹7 लाख करोड़ से अधिक की गिरावट आई है।
इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज सेंसेक्स (Sensex) 1677.12 प्वाइंट्स यानी 2.15% की फिसलन के साथ 76,503.60 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 516.65 प्वाइंट्स यानी 2.12% की गिरावट के साथ 23,882.04 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 1921.69 प्वाइंट्स टूटकर 76,259.03 तक और निफ्टी 593.55 प्वाइंट्स गिरकर 23,805.20 तक आ गया था।
निवेशकों के ₹7.89 लाख करोड़ स्वाहा
एक कारोबारी दिन पहले यानी 07 जुलाई 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,79,67,747.45 करोड़ था। आज यानी 08 जुलाई 2026 को यह घटकर ₹4,71,78,619.13 करोड़ रह गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹7,89,128.32 करोड़ की गिरावट आई है।
Sensex के सभी शेयर लाल
सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें आज कोई भी ग्रीन जोन में नहीं बंद हुआ है। सबसे अधिक गिरावट इंडिगो,मारुति और एचयूएल में रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

116 शेयर एक साल के हाई पर
बीएसई पर आज 4454 शेयरों की ट्रेडिंग हुई। इसमें 1093 शेयर आज मजबूत हुए तो 3186 में गिरावट रही जबकि 175 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा 116 शेयर एक साल के हाई और 104 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए।
(यह स्टोरी अभी अपडेट हो रही है)
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US-Iran Tension: ‘ईरान के साथ सीजफायर खत्म…’ ट्रंप का बड़ा ऐलान
ईरान ने बहरीन-कुवैत में मचाई तबाही! 85 अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन से भीषण हमला
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Donald Trump on Iran Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य टकराव अब पूरी तरह से कूटनीतिक युद्ध में बदल चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज एक बेहद चौंकाने वाला ऐलान करते हुए कहा है कि ईरान के साथ हुआ समझौता और सीजफायर अब पूरी तरह से ‘खत्म’ हो चुका है।
अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान नाटो के महासचिव मार्क रुटे के साथ मौजूद ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर जमकर गुस्सा निकाला। उन्होंने साफ कहा कि अब ईरान के साथ किसी भी तरह की बातचीत करना सिर्फ और सिर्फ समय की बर्बादी है।
‘मेरे लिए अब समझौता खत्म’: डोनाल्ड ट्रंप
मिडिल ईस्ट में दोनों देशों के बीच जारी मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच राष्ट्रपति ट्रंप का यह बयान आग में घी का काम कर रहा है। ट्रंप ने दोटूक शब्दों में कहा, ‘जहां तक मेरा सवाल है, ईरान के साथ हुआ समझौता और सीजफायर अब खत्म हो चुका है।’ ट्रंप ने अपने आक्रामक अंदाज में ईरानी लीडरशिप को आड़े हाथों लिया। उन्होंने ईरानी नेताओं को ‘झूठा’, ‘नीच’ और ‘सनकी/बीमार लोग’ तक कह डाला।
बातचीत के सारे रास्ते बंद?
डोनाल्ड ट्रंप के इस कड़े रुख से यह साफ हो गया है कि अमेरिका अब ईरान के साथ किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं है। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि इन लोगों (ईरानी नेताओं) के साथ डील करने का अब कोई मतलब नहीं रह गया है, यह सिर्फ वक्त जाया करना है। उन्होंने संकेत दिए कि अमेरिका अब ईरान के खिलाफ और ज्यादा सख्त और सीधी सैन्य कार्रवाई का रुख अपना सकता है।
क्यों बढ़ा अचानक इतना तनाव?
यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर भीषण बमबारी की है। इसके पहले ईरान ने दावा किया था कि उसने बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य सुविधाओं से जुड़े 85 ठिकानों पर जवाबी हमला किया है। यह हमला अमेरिका द्वारा ईरान के भीतर घुसकर 80 से ज्यादा ठिकानों को तबाह करने के विरोध में किया गया था।
Crude Oil Price: होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर तेहरान के हमलों के जवाब में अमेरिका के ईरान पर नए हमले करने के बाद बुधवार को तेल की कीमतें बढ़ गई। अगस्त डिलीवरी के लिए US बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 2.1% बढ़कर $71.87 प्रति बैरल हो गया, जबकि सितंबर डिलीवरी के लिए ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1.9% बढ़कर $75.53 प्रति बैरल हो गया।
आज कच्चे तेल की कीमतों में क्या तेज़ी है?
US सेंट्रल कमांड के अनुसार, US ने कमर्शियल शिपिंग पर हमलों के लिए बड़ी कीमत लगाने के मकसद से “ताकतवर हमले” किए। ईरान की मेहर न्यूज़ एजेंसी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक द्वीप पर धमाकों की खबर है, जबकि डिप्टी विदेश मंत्री काज़म ग़रीबाबादी ने चेतावनी दी कि तेहरान जवाबी कार्रवाई करेगा।
एक अलग कदम में, US ट्रेजरी ने ईरान को तेल एक्सपोर्ट करने की इजाज़त देने वाले सेंक्शन में मिली छूट को रद्द कर दिया, जिससे तेहरान के साथ अंतरिम शांति समझौते का एक अहम नियम पलट गया। यह बढ़ोतरी स्ट्रेटेजिक वॉटरवे में तीन जहाजों पर हमलों के बाद हुई, जिसमें एक गैस कैरियर और एक सऊदी ऑयल टैंकर शामिल थे, जिससे पिछले महीने डील लागू होने के बाद से मंगलवार ऐसी घटनाओं के लिए सबसे बिज़ी दिन बन गया।
बढ़े हुए तनाव ने यूरोपियन नेचुरल गैस की कीमतों को भी बढ़ा दिया, फ्यूचर्स 4.9% तक बढ़ गए।
दूसरी तिमाही में गिरावट के बाद तेल की कीमतों में उछाल आया, जब क्षेत्रीय तनाव कम होने से क्रूड पर असर पड़ा था। कमर्शियल जहाजों पर हुए नए हमलों और US मिलिट्री एक्शन से उम्मीद है कि शिपिंग कंपनियां और क्षेत्रीय तेल प्रोड्यूसर होर्मुज स्ट्रेट का इस्तेमाल करने से डिसकरेज होंगे, जो फारस की खाड़ी के एक्सपोर्टर्स को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने वाला एक ज़रूरी रास्ता है।
नए डेवलपमेंट से पहले, गोल्डमैन सैक्स जैसे बैंकों ने चेतावनी दी थी कि क्रूड मार्केट सरप्लस में वापस आ सकता है क्योंकि क्षेत्रीय प्रोड्यूसर प्रोडक्शन बढ़ा रहे हैं और स्ट्रेट के ज़रिए शिपिंग एक्टिविटी ठीक हो रही है। उसी समय, OPEC+ ने प्रोडक्शन में कटौती को वापस लेने की अपनी योजना जारी रखी।
होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल वॉशिंगटन और तेहरान के बीच झगड़े का एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। मंगलवार को, ईरान ने यूनाइटेड नेशंस की शिपिंग एजेंसी को बताया कि वह वॉटरवे के कुछ हिस्सों पर अधिकार रखता है, जो शांति के समय में दुनिया के रोज़ाना के तेल ट्रेड का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता था।
इस बीच, ब्रेंट क्रूड का प्रॉम्प्ट स्प्रेड वापस बैकवर्डेशन में चला गया—एक बुलिश मार्केट स्ट्रक्चर जहां कम समय के कॉन्ट्रैक्ट बाद के कॉन्ट्रैक्ट के मुकाबले प्रीमियम पर ट्रेड होते हैं। बुधवार को स्प्रेड 23 सेंट प्रति बैरल था, जो हफ्ते की शुरुआत में देखे गए 25-सेंट के कॉन्टैंगो, जो कि उल्टा प्राइसिंग स्ट्रक्चर था, से उलटा था।
Crude Oil Price: 60 डॉलर से नीचे जा सकता है कच्चा तेल! एक्सपर्ट बोले- चीन बदलेगा पूरा खेल
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Stock Market Crash: निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन आज मार्केट में शुरुआती कारोबार में अच्छी रौनक दिखी। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज उछल पड़े। सेंसेक्स 350 प्वाइंट्स से अधिक उछल पड़ा था तो निफ्टी भी 24500 के पार चला गया लेकिन फिर इंट्रा-डे हाई से सेंसेक्स 350 प्वाइंट्स टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 24450 के नीचे तक आ गया। हालांकि ब्रोडर लेवल पर मार्केट में आज शुरुआती कारोबार से ही दबाव बना रहा। निफ्टी मिडकैप 100 में आधे फीसदी के करीब गिरावट है तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे फीसदी से अधिक गिरावट है। अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो 01:39 PM पर सेंसेक्स 31.33 यानी 0.04% की गिरावट के साथ 78,253.74 और निफ्टी 8.70 यानी 0.04% की फिसलन के साथ 24,421.65 पर है।
Stock Market Crash: ये है वजह
मुनाफावसूली
निवेशकों ने लगातार पांचवे दिन मार्केट में रौनक का फायदा उठाया और ऊपरी स्तर पर मुनाफावसूली की जिससे मार्केट नीचे आया। चार दिनों में सेंसेक्स और निफ्टी 2.4% मजबूत हुआ और यह करीब 10 हफ्ते के हाई लेवल पर बंद हुआ था।
Nifty की वीकली एक्सपायरी
आज निफ्टी के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की वीकली एक्सपायरी है तो इसका भी असर आज मार्केट पर दिखा।
मेटल और रियल्टी शेयरों में गिरावट
मार्केट पर आज मेटल और रियल्टी शेयरों ने काफी दबाव बनाया। मेटल शेयरों के निफ्टी इंडेक्स निफ्टी में 1% से अधिक तो निफ्टी रियल्टी में डेढ़ फीसदी से अधिक की गिरावट आई। इसके अलावा हल्की ही सही लेकिन सरकारी और प्राइवेट बैंकों के शेयरों ने भी मार्केट पर दबाव बनाया है जिनके निफ्टी इंडेक्स लाल हैं। हालांकि आईटी सेक्टर मार्केट को ऊपर लाने की पूरी कोशिश कर रहा जिससे मार्केट की गिरावट सीमित हो जा रही है। निफ्टी आईटी में ढाई फीसदी से अधिक तेजी है।
अमेरिका-ईरान तनाव
होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ओमान के तट पर एक तेल टैंकर पर मिसाइल हमला हुआ। इसे लेकर ईरानी स्टेट मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक यह टैंकर अमेरिकी नौसेना के सपोर्ट से ओमान के समुद्री रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहा था, जिसने ईरानी अधिकारियों की बार-बार दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज किया था जिसके बाद इसे निशाना बनाया गया।
टेक्निकल आउटलुक
जियोजीत इंवेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स का कहना है कि एक कारोबारी दिन पहले 24400 के ऊपर निफ्टी के क्लोज होने से 24800-25250 की तरफ इसके बढ़ने का माहौल और सुधरा। हालांकि उन्होंने इस बात को लेकर भी सतर्क किया है कि 24600 के लेवल पर मार्केट को कुछ रिजेक्शन भी झेलना पड़ सकता है। आनंद के मुताबिक 24360 के सपोर्ट पर मार्केट 24600 की तरफ बढ़ सकता है।
Iran US Conflict Near Strait of Hormuz: वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री रास्ते ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ के पास सोमवार को एक बड़े तेल टैंकर पर मिसाइल हमला हुआ है। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के मुताबिक, ओमान के तट से करीब 8 समुद्री मील दूर एक अज्ञात मिसाइल या ड्रोन टकराने के बाद तेल टैंकर में भीषण आग लग गई।
इस घटना के तुरंत बाद अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया है कि ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने जानबूझकर दो कमर्शियल जहाजों पर मिसाइलें दागी हैं। इस हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुआ एक हफ्ते का संघर्ष विराम समझौता खत्म हो गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने का खतरा फिर से बढ़ गया है।
UKMTO और अमेरिका का क्या है दावा?
ब्रिटिश नौसेना की विंग UKMTO के अनुसार, यह तेल टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से होते हुए दक्षिण की तरफ बढ़ रहा था, तभी इसके पोर्ट साइड पर एक मिसाइल आकर लगी। राहत की बात यह है कि इस हमले में किसी भी क्रू मेंबर के हताहत होने या किसी तरह के बड़े पर्यावरणीय नुकसान की खबर नहीं है।
अमेरिका की जवाबी कार्रवाई की तैयारी
अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘एक्सियोस’ से बात करते हुए दो यूएस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि ईरान ने दो व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया है, जिससे जहाजों को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके जवाब में अमेरिका अब ईरानी ठिकानों पर जवाबी सैन्य हमले करने की तैयारी कर रहा है।
क्यों टूटा अमेरिका-ईरान का शांति समझौता?
यह हमला ठीक उस समय हुआ है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में हमलों को रोकने के लिए हुआ एक हफ्ते का समझौता समाप्त हो गया। केवल तीन हफ्ते पहले ही दोनों देशों ने एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, जो अब पूरी तरह टूटता नजर आ रहा है। पिछले हफ्ते कतर की राजधानी दोहा में दोनों पक्षों के बीच हुई अप्रत्यक्ष बातचीत भी इस रणनीतिक समुद्री रास्ते के भविष्य को लेकर बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई थी।
इससे पहले भी ईरान ने इस रास्ते की घेराबंदी कर दी थी और कई कमर्शियल जहाजों पर हमले किए थे, जिसके जवाब में अमेरिका ने नौसैनिक नाकेबंदी की थी। पिछले महीने हुए समझौते के बाद जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हुई थी, जो अब दोबारा खतरे में है।
ईरान अब जहाजों से वसूलेगा ‘टोल’
ईरान ने साफ कर दिया है कि वह युद्ध से पहले वाली स्थिति में वापस नहीं जाएगा, जहां जहाजों को इस रास्ते से मुफ्त में गुजरने की आजादी थी। ईरान ने चेतावनी दी है कि कोई भी जहाज उसके तय किए गए समुद्री कॉरिडोर से बाहर नहीं जाएगा।
बीजिंग में वर्ल्ड पीस फोरम के दौरान ईरानी राजदूत अब्दोलरेज़ा रहमानी फजली ने बड़ा बयान देते हुए कहा, ‘चूंकि होर्मुज का एक बड़ा हिस्सा ईरान के प्रादेशिक जल क्षेत्र में आता है, इसलिए ईरान अब यहां से गुजरने वाले जहाजों से ‘सर्विस फीस’ वसूलेगा। हालांकि उन्होंने इसे टैक्स या टोल टैक्स कहने से इनकार किया’।
ईरानी राजदूत ने यह भी साफ किया कि जो देश मुश्किल वक्त में ईरान के साथ खड़े रहे जैसे- भारत और अन्य मित्र देश, उन्हें इस सर्विस फीस में ‘विशेष छूट’ दी जाएगी।
दुनिया के लिए क्यों इतना महत्वपूर्ण है ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’?
होर्मुज जलडमरूमध्य खाड़ी देशों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों, विशेष रूप से एशिया तक कच्चे तेल के निर्यात का सबसे बड़ा लाइफलाइन रूट है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के आंकड़ों के मुताबिक, इस समुद्री रास्ते से हर दिन लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरता है। यह मात्रा पूरी दुनिया की कुल कच्चे तेल की सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) है। यही कारण है कि यहां होने वाली मामूली हलचल भी दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा देती है।
ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों अंतिम विदाई की रस्में उनकी मौत के करीब चार महीने बाद शुक्रवार को शुरू हुईं हैं। अंतिम विदाई की रस्में तीन जुलाई से 9 जुलाई तक चलेगा। वहीं मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के अधिकारी पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के प्रस्तावित एक सप्ताह लंबे अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी भीड़ को संभालने की तैयारी कर रहे हैं। अधिकारियों को आशंका है कि भगदड़ या भीड़ से जुड़ी घटनाओं में 1,500 से 3,000 लोगों की जान जा सकती है या कई लोग घायल हो सकते हैं।
3000 लोगों के मरने की जताई आशंका
जर्मन अखबार वेल्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी रेड क्रिसेंट और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संगठन ने पहले उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा अरेफ को एक गोपनीय पत्र भेजा था। इसमें चेतावनी दी गई थी कि अंतिम यात्रा के दौरान सबसे खराब स्थिति में 1,500 से 3,000 लोगों की मौत हो सकती है।
अधिकारियों ने दिए गए ये निर्देश
रिपोर्ट के मुताबिक, आपातकालीन सेवाओं से जुड़े अधिकारियों ने किसी भी बड़ी दुर्घटना से निपटने के लिए विस्तृत तैयारी की है। उन्हें आशंका है कि अंतिम संस्कार में लाखों लोगों की भीड़ और तेज गर्मी के कारण भगदड़ मच सकती है या भीड़ से जुड़े गंभीर हादसे हो सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तेहरान नगर निगम के एक कर्मचारी ने बताया कि बेहश्त-ए ज़हरा कब्रिस्तान में पहले से ही हजारों अतिरिक्त कब्रें तैयार कर ली गई हैं। कर्मचारी के अनुसार, अधिकारियों को 3,000 तक शवों के अंतिम संस्कार की तैयारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। उनका कहना था कि इतनी बड़ी भीड़ और भीषण गर्मी में क्या स्थिति बनेगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।
मौत के करीब चार महीने बाद हो रहा अंतिम संस्कार
रिपोर्ट के अनुसार, किसी बड़े हादसे की स्थिति से निपटने के लिए अधिकारियों ने शवों की पहचान और लापता लोगों की तलाश के लिए एक विशेष टीम भी बनाई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की 28 फरवरी को ईरान-इजराइल युद्ध के पहले दिन हुए एक इजराइली हमले में मौत हो गई थी। इस हमले में उनके परिवार के कई सदस्य और कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी मारे गए थे। उस समय उनकी उम्र 86 वर्ष थी। रिपोर्ट के मुताबिक, अंतिम संस्कार का कार्यक्रम एक सप्ताह तक चलेगा। खामेनेई का ताबूत तीन दिन तक तेहरान में रखा जाएगा। इसके बाद मंगलवार को उसे पवित्र शहर कोम ले जाया जाएगा। बुधवार को इराक में अंतिम यात्रा निकाली जाएगी और गुरुवार को उन्हें उत्तर-पूर्वी ईरान के उनके पैतृक शहर मशहद में दफनाया जाएगा।
पहले भी हुआ है ये हादसा
साल 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में कासिम सुलेमानी की मौत के बाद उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए पूरे ईरान में लाखों लोग सड़कों पर उतर आए थे। 7 जनवरी 2020 को उनके गृहनगर केरमान में अंतिम यात्रा के दौरान भारी भीड़ के बीच भगदड़ मच गई, जिसमें कम से कम 56 लोगों की मौत हो गई और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इस हादसे के बाद अधिकारियों को अंतिम संस्कार की प्रक्रिया कुछ घंटों के लिए रोकनी पड़ी, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और इलाके को सुरक्षित बनाया जा सके। WELT की रिपोर्ट के मुताबिक, अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भी लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना है। इसी वजह से ईरानी अधिकारी पहले से पूरी तैयारी कर रहे हैं, ताकि 2020 जैसी कोई दुखद घटना दोबारा न हो।

