Iran-US War: ईरान-अमेरिका युद्ध क्यों नहीं हो रहा खत्म? उप राष्ट्रपति जेडी वेंस का बड़ा आरोप, कहा- इजरायली सरकार के अंदर कुछ खास लोग…

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ कहा है कि इजरायल सरकार के कुछ लोग ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को अनिश्चितकाल तक लंबा खींचना चाहते हैं। उन्होंने यह बात पॉडकास्टर जो रोगन के साथ हुए इंटरव्यू में कही।वेंस ने बताया कि इजरायल के कुछ तत्व अमेरिकी जनता की राय को प्रभावित करने की

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हॉर्मुज में बड़ा सैन्य एक्शन: अमेरिका ने ईरान की ओर बढ़ रहे ऑयल टैंकर को बनाया निशाना, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

US forces attacks ship in hormuz strait

अमेरिका ने लगातार 5वें दिन ईरान पर भीषण हमले किए। अमेरिका ने लगातार पांचवें दिन ईरान पर हमले तेज करते हुए हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की ओर बढ़ रहे एक ऑयल टैंकर को निशाना बनाया। CENTCOM के अनुसार जहाज को हेलफायर मिसाइल से निष्क्रिय किया गया। जवाब में ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए। ALSO READ: कच्चे तेल में उछाल के बीच मोदी सरकार का बड़ा फैसला, डीजल-ATF पर एक्सपोर्ट टैक्स बढ़ाया, पेट्रोल पर दी राहत

अमेरिकी सेना ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के बंदरगाहों पर लगाए गए नौसैनिक ब्लॉकेड को तोड़ने की कोशिश कर रहे एक खाली ऑयल टैंकर पर हमला कर को निष्क्रिय कर दिया। अमेरिकी हमलों से बंदर अब्बास, केशम द्वीप और चाबहार धमाकों से दहल उठे।

 

अमेरिकी सेना का दावा है कि उसने मिसाइल दागकर जहाज को बीच रास्ते में ही रोक दिया। बताया जा रहा है कि ईरान का यह जहाज खाली था। अमेरिकी सेना ने इस पर हेलफायर मिसाइल दागी। ALSO READ: US-Iran Conflict: अमेरिकी हमलों में 30 से ज्यादा लोगों की मौत, ईरान ने लगाए बड़े आरोप, खाड़ी देशों पर मिसाइल हमले जारी

 

CENTCOM के अनुसार, कुराकाओ के झंडे वाला एम/टी बेल्मा नाम का खाली तेल टैंकर ईरानी बंदरगाह की ओर बढ़ रहा था। जहाज को कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन उसने कथित तौर पर नाकाबंदी का उल्लंघन करने की कोशिश जारी रखी। इसके बाद एक अमेरिकी जेट ने हेलफायर मिसाइल दागकर जहाज की चिमनी को निशाना बनाया, जिससे वह आगे बढ़ने में असमर्थ हो गया।

 

सेंटकॉम का यह भी दावा है कि मौजूदा नौसैनिक अभियान के दौरान अब तक तीन जहाजों को रोका जा चुका है, जिन्हें ईरान की ओर जाते हुए पकड़ा गया।

बहरहाल अमेरिकी सेना की इस कार्रवाई से मीडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। हार्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद होने से यहां से तेल की आवाजाही पूरी तरह ठप है।

WhatsApp और Telegram के Username Feature पर सरकार सख्त, 20 दिनों में आ सकता है बड़ा फैसला

whatsapp users name

केंद्र सरकार WhatsApp और Telegram के यूजरनेम-आधारित मैसेजिंग फीचर को लेकर मिली प्रतिक्रियाओं की समीक्षा कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में अगले करीब 20 दिनों के भीतर कोई अधिसूचना या अगला फैसला सामने आ सकता है। सूत्रों के अनुसार, WhatsApp, Telegram और Zoho Bharat Eye ने सरकार द्वारा जारी नोटिस के जवाब मंत्रालय को सौंप दिए हैं।

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कानूनी जांच जारी

मंत्रालय की कानूनी टीम इन जवाबों का विस्तृत परीक्षण कर रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं संबंधित फीचर किसी नियम या कानून का उल्लंघन तो नहीं करता। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि यदि आवश्यक हुआ तो नियामकीय कार्रवाई या अन्य कानूनी प्रावधान लागू किए जा सकते हैं या नहीं।

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WhatsApp के जवाब की हो रही समीक्षा

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सप्ताहांत में WhatsApp का जवाब मिला, जिसकी फिलहाल समीक्षा की जा रही है। मंत्रालय का कहना है कि सभी जवाबों का कानूनी परीक्षण पूरा होने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। सरकार की यह प्रक्रिया ऐसे समय में चल रही है जब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर यूजरनेम-आधारित मैसेजिंग और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज है। फिलहाल मंत्रालय ने अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं की है।

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WhatsApp का 'Username' फीचर क्या है?

WhatsApp एक नया फीचर लाने की तैयारी कर रहा है, जिसके जरिए लोग अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। यह फीचर Telegram और Signal की तरह काम करेगा। इस फीचर में यूजर अपने लिए एक यूनिक यूजरनेम (Username) चुन सकेंगे और मोबाइल नंबर की जगह उसी यूजरनेम को दूसरे लोगों के साथ साझा करेंगे।

 

Meta का दावा है कि इससे यूजर्स की निजता (Privacy) बेहतर होगी, क्योंकि उन्हें अपनी व्यक्तिगत जानकारी पर अधिक नियंत्रण मिलेगा। हालांकि, भारत सरकार इस फीचर को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। सरकार का मानना है कि यदि मोबाइल नंबर छिप जाएंगे तो ऑनलाइन ठगों और साइबर अपराधियों की पहचान करना और उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो सकता है।

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सरकार को किस बात की चिंता है?

सरकार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि साइबर अपराधी यूजरनेम फीचर का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। आशंका जताई जा रही है कि इस फीचर का उपयोग करके अपराधी- 

 

  • फिशिंग (Phishing) हमले,
  • फर्जी पहचान (Impersonation) बनाकर ठगी,
  • डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) जैसे साइबर फ्रॉड,
  • और अन्य ऑनलाइन अपराधों को अंजाम दे सकते हैं।

 

इसी वजह से 1 जुलाई को केंद्र सरकार ने Meta से कहा था कि जब तक वह इस फीचर के दुरुपयोग को रोकने की ठोस व्यवस्था नहीं बताता, तब तक इसका रोलआउट आगे न बढ़ाया जाए।

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Meta ने क्या कहा?

Meta ने सरकार को बताया है कि WhatsApp के Username फीचर में सुरक्षा से जुड़े कई उपाय शामिल किए जाएंगे। हालांकि मामला सिर्फ WhatsApp की लोकप्रियता का नहीं है। भारत के आईटी अधिनियम (IT Act) और आईटी नियमों (IT Rules) के तहत एक बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म होने के कारण WhatsApp पर यूजर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कानूनी जिम्मेदारी भी है। सरकार यह भी जांच रही है कि यदि भविष्य में इस फीचर के कारण साइबर अपराध बढ़ते हैं, तो क्या ऐसी स्थिति में Meta की जवाबदेही तय की जा सकती है।

 

US-Iran Conflict: अमेरिकी हमलों में 30 से ज्यादा लोगों की मौत, ईरान ने लगाए बड़े आरोप, खाड़ी देशों पर मिसाइल हमले जारी

iran us war

अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव और बढ़ता जा रहा है। ईरानी सरकार की प्रवक्ता फातेमेह मोहाजेरानी ने बुधवार को दावा किया कि हाल के दिनों में अमेरिकी हवाई हमलों में 30 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। वहीं ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि रातभर हुए हमलों में 260 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। हालांकि, ईरानी प्रवक्ता ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस समय अवधि के हमलों का जिक्र कर रही थीं।

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अमेरिका ने फिर किए हवाई हमले

 

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने बुधवार को ईरान के खिलाफ एक और दौर के हवाई हमले किए। सात घंटे तक चले ऑपरेशन में दर्जनों ठिकानों को निशाना बनाया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब अमेरिका ने दोबारा नाकाबंदी लागू कर दी।

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बहरीन और कुवैत में मिसाइल अलर्ट

 

अमेरिकी कार्रवाई के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। बहरीन और कुवैत में मिसाइल अलर्ट जारी किए गए, क्योंकि दोनों देशों की ओर ईरानी मिसाइलें आने की सूचना मिली। लगातार हो रहे हमलों ने पहले से कमजोर युद्धविराम को और खतरे में डाल दिया है।

 

अमेरिका का ईरान पर हमला जारी रखने का आरोप

 

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने बयान जारी कर कहा कि ईरान ने पड़ोसी खाड़ी देशों पर दर्जनों मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ईरान को “बिना उकसावे की आक्रामकता” के लिए जिम्मेदार ठहरा रही है, जिससे निर्दोष लोगों की जान खतरे में पड़ रही है।

अरब सागर में अमेरिकी युद्धपोत तैनात

अमेरिका ने अरब सागर में कम से कम 19 युद्धपोत तैनात किए हैं, जिनमें दो एयरक्राफ्ट कैरियर और एक एम्फीबियस असॉल्ट शिप शामिल हैं। इस जहाज पर 1,000 से ज्यादा अमेरिकी मरीन तैनात हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने यह भी कहा कि मध्य पूर्व क्षेत्र में “सैकड़ों सैन्य विमान” सक्रिय हैं।

 

होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा तनाव

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किए जाने के बाद तेहरान ने वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाकर और धमकियां देकर होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही प्रभावित की थी। इसका असर वैश्विक बाजार पर पड़ा और तेल, खाद और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई। हाल के हफ्तों में ईरान ने ओमान के पास से गुजरने वाले कुछ जहाजों को भी निशाना बनाया है। यह क्षेत्र अमेरिकी सैन्य निगरानी में आता है और इस घटनाक्रम ने तनाव को और बढ़ा दिया है।

 

अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसके लिए बड़ी नौसैनिक ताकत और संभवतः बड़ी संख्या में जमीनी सैनिकों की जरूरत पड़ सकती है।अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव और बढ़ता जा रहा है।

ईरानी सरकार की प्रवक्ता फातेमेह मोहाजेरानी ने बुधवार को दावा किया कि हाल के दिनों में अमेरिकी हवाई हमलों में 30 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। वहीं ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि रातभर हुए हमलों में 260 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। हालांकि, ईरानी प्रवक्ता ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस समय अवधि के हमलों का जिक्र कर रही थीं।

 

अमेरिका ने फिर किए हवाई हमले

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने बुधवार को ईरान के खिलाफ एक और दौर के हवाई हमले किए। सात घंटे तक चले ऑपरेशन में दर्जनों ठिकानों को निशाना बनाया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब अमेरिका ने दोबारा नाकाबंदी लागू कर दी।

 

बहरीन और कुवैत में मिसाइल अलर्ट

 

अमेरिकी कार्रवाई के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। बहरीन और कुवैत में मिसाइल अलर्ट जारी किए गए, क्योंकि दोनों देशों की ओर ईरानी मिसाइलें आने की सूचना मिली। लगातार हो रहे हमलों ने पहले से कमजोर युद्धविराम को और खतरे में डाल दिया है।

अमेरिका का ईरान पर हमला जारी रखने का आरोप

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने बयान जारी कर कहा कि ईरान ने पड़ोसी खाड़ी देशों पर दर्जनों मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ईरान को “बिना उकसावे की आक्रामकता” के लिए जिम्मेदार ठहरा रही है, जिससे निर्दोष लोगों की जान खतरे में पड़ रही है।

अरब सागर में अमेरिकी युद्धपोत तैनात

अमेरिका ने अरब सागर में कम से कम 19 युद्धपोत तैनात किए हैं, जिनमें दो एयरक्राफ्ट कैरियर और एक एम्फीबियस असॉल्ट शिप शामिल हैं। इस जहाज पर 1,000 से ज्यादा अमेरिकी मरीन तैनात हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने यह भी कहा कि मध्य पूर्व क्षेत्र में “सैकड़ों सैन्य विमान” सक्रिय हैं। 

US Iran War: ईरान पर ट्रंप के तेवर कड़े! तेहरान पर अमेरिका ने पहली बार दिन के उजाले में बरसाए बम, बेहद खतरनाक फेज में पहुंचा युद्ध

US Launches First Daylight Airstrikes On Iran: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य टकराव अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख के बीच, अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ अपनी रणनीति बदलते हुए पहली बार दिन के उजाले में हवाई हमले (Daylight Airstrikes) शुरू कर दिए हैं। इसके साथ ही यह युद्ध अब एक बिल्कुल नए फेज में प्रवेश कर चुका है।

पिछले कई दिनों से ट्रंप प्रशासन के निर्देश पर अमेरिकी वायुसेना सिर्फ रात के अंधेरे में ईरान पर बमबारी कर रही थी, लेकिन बुधवार को अचानक दिन में हुए हमलों ने सबको चौंका दिया है। दोनों देशों के बीच हुआ अंतरिम समझौता (Interim Deal) पूरी तरह टूट चुका है, जिसके बाद दोनों महाशक्तियां आमने-सामने आ गई हैं। आइए जानते हैं क्या है मिडिल ईस्ट में भड़के इस महायुद्ध की मौजूदा स्थिति।

CENTCOM ने की दिन में हवाई हमलों की पुष्टि

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बुधवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर इस नए सैन्य ऑपरेशन की पुष्टि की है:

सुबह 6 बजे शुरू हुए हमले: सेंटकॉम के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईस्टर्न टाइम (ET) के मुताबिक सुबह 6 बजे ईरान पर हवाई हमलों की नई लहर शुरू की।

रणनीति में बड़ा बदलाव: रात के बजाय दिन के उजाले में हमला करना अमेरिकी सेना की आक्रामक रणनीति और बढ़ते सैन्य दबाव को साफ दर्शाता है।

आखिर क्यों ईरान पर बम बरसा रहा है अमेरिका?

इस पूरे सैन्य टकराव के केंद्र में दुनिया का सबसे व्यस्त समुद्री ऊर्जा गलियारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है:

कमर्शियल जहाजों पर हमला: अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के मुताबिक, पिछले सात दिनों में ईरान ने जानबूझकर सात कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाया है, जिसमें लगभग एक दर्जन नागरिक क्रू मेंबर्स की मौत हुई है या वे लापता/घायल हैं।

पड़ोसी देशों पर मिसाइल दागना: ईरान ने अपने पड़ोसी खाड़ी देशों की तरफ भी दर्जनों मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का मकसद अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा करना और ईरान की आक्रामकता का करारा जवाब देना है।

समझौता टूटने के बाद बिगड़े हालात

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए जो राजनयिक प्रयास चल रहे थे, वे अब पूरी तरह ठप हो चुके हैं:

इंटरिम डील हुई तबाह: दोनों देशों के बीच हुआ अंतरिम समझौता पूरी तरह से बिखर चुका है, जिससे कूटनीति के रास्ते बंद हो गए हैं और दोनों देश सीधे सैन्य टकराव के रास्ते पर लौट आए हैं।

बढ़ेगा ग्लोबल एनर्जी संकट: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर दुनिया का एक बड़ा तेल और गैस का कारोबार गुजरता है। यहां लगातार हो रहे हमलों और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति ठप होने और क्रूड ऑयल की कीमतें आसमान छूने का खतरा मंडराने लगा है।

कुल मिलाकर अमेरिकी सेना के इस कदम से साफ है कि वाशिंगटन अब तेहरान पर किसी भी तरह का सैन्य दबाव कम करने के मूड में नहीं है। रात के बाद अब दिन में भी शुरू हुई इस बमबारी ने मिडिल ईस्ट में एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आहट को और तेज कर दिया है।

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ट्रंप समेत 13 टॉप लीडर ईरान की लिस्ट में, जानिए कौन-कौन हैं वे नेता

Donald Trump

Iran assassination plot: गत 7 और 8 जुलाई को तुर्किये की राजधानी अंकारा में जब अमेरिका और यूरोप के “उत्तर अटलांटिक संधि संगठन” नाटो (NATO) का शिखर सम्मेलन चल रहा था, तब एक ऐसी महा भयावह घटना होते बाल-बाल रह गई, जो अन्यथा तीसरे विश्वयुद्ध का बिगुल बजा देती।

 

ईरान उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की हत्या की ताक में था। भौगोलिक दूरी की दृष्टि से वे ईरान के जितने निकट उस समय थे, उतने शायद फिर कभी नहीं होते।

 

इसराइली टेलीविज़न चैनल 13 की एक रिपोर्ट में, सीनियर सूत्रों के हवाले से कहा गया कि ट्रंप की हत्या की कोशिश के संकेत मिलने पर, इसराइल द्वारा इसकी गोपनीय जानकारी तुरंत अमेरिका को दे दी गई। जानकारी में एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी का यह उद्धरण भी शामिल था: “यह हमारा मौका है, इससे बेहतर कोई मौका नहीं मिलेगा।” यह कथन साफ़ तौर पर ट्रंप के तुर्की में होने से संबंधित था।

मोसाद ने अमेरिका को सजग किया

चैनल 13 की बताई रिपोर्ट के अनुसार, इस जानकारी में शामिल पश्चिमी गुप्तचर सेवाओं की पहचान इसराइल की गुप्तचर एजेंसी मोसाद के तौर पर हुई है। समझा जाता है कि ईरान के किसी संभावित षड़यंत्र का शिकार बनने से बचने के लिए ही ट्रंप ने अंकारा से अमेरिका वापस जाने के लिए अपना विमान अकस्मात बदल दिया। न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा— ट्रंप अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के समापन के बाद— क़तर से मिले अपने निजी नए विमान के बदले अपने पुराने सरकारी “एयर फ़ोर्स वन” से स्वदेश लौटे। ALSO READ: अमेरिका और ईरान युद्ध दोबारा भड़का तो क्या होगा?

 

न्यूयॉर्क टाइम्स ने जिन स्रोतों का उल्लेख किया है, उनसे पता चलता है कि यह आकस्मिक निर्णय अमेरिकी “सीक्रेट सर्विस” की तरफ़ से सावधानी के तौर पर मिले एक खास “सुरक्षा परामर्श” के बाद लिया गया था; शुरू में इसे किसी खास ख़तरे से नहीं जोड़ा गया था।

 

लेकिन, बाद की रिपोर्टों ने इस निर्णय को “ईरानी षड़यंत्र” के बारे में मिली गुप्तचर जानकारियों से जोड़ा। यह भी कहा गया कि क़तर से ट्रंप को जो विमान उपहार में मिला है, उसमें अभी उनके मूल आधिकारिक विमान “एयर फ़ोर्स वन” जैसी सभी आवश्यक सुरक्षा सुविधाएं और क्षमताएं नहीं हैं।

अंकारा से उड़ान को अजीब बताया गया

कहा जा रहा है कि ट्रंप अपने पुराने विमान में बहुत जल्दी से चढ़ गए, इससे पहले कि उनके साथ के पत्रकार उन्हें सीढ़ियां चढ़ते हुए देख पाते या उनके फ़ोटो ले पाते। उन्होंने जो उतावली दिखाई, वह स्थापित परिपाटी से अलग थी।

 

इसराइल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने अमेरिकी टेलीविज़न चैनल “फॉक्स न्यूज़” को दिए एक इंटरव्यू में इन रिपोर्टों की पुष्टि की और कहा, “इसराइली गुप्तचर सेवा ने ट्रंप और उनके प्रसाशन को एक बहुत ख़ास हत्या की कोशिश के बारे में जानकारी दी थी, जिसे ईरानियों ने राष्ट्रपति के खिलाफ रची थी।”  ALSO READ: ईरान से युद्ध के कारण अमेरिका में अस्त्र-शस्त्र की तंगी

ट्रंप ने कहा, “मैं थोड़ा भाग्यवान रहा हूं”

ट्रंप ने नाटो के शिखर सम्मेलन में भी इस सारे प्रकरण का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए कहा था: “वे (ईरानी) US लीडर को, मुझे, ख़त्म करना चाहते हैं। मैं हर लिस्ट में हूं। मैं उनकी हर एक लिस्ट में हूं, और अब तक मुझे लगता है कि मैं थोड़ा भाग्यवान रहा हूं, लेकिन शायद यह ज़्यादा दिन नहीं चलेगा, क्योंकि ऐसा ही होता है।”

 

इस बीच, ईरान के एक अख़बार “हमशहरी” ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिश मेर्त्स सहित पश्चिमी देशों के कई शीर्ष नेताओं से बदला लेने की धमकी दी है। कुछ जर्मन नेता इस धमकी पर चिंता जताते हुए ईरानी राजनयिक प्रतिनिधियों को देश से बाहर निकाल देने की मांग कर रहे हैं। इस मांग में सत्तरूढ़ गंठबंधन की तीनों पार्टियों सहित, सरकार की अन्यथा मुखर आलोचक, पर्यावरणवादी ग्रीन पार्टी भी शामिल है।

मुल्ला शासन की कट्टरपंथी विचारधारा और आतंक

जर्मनी के सत्तरूढ़ गबंधन की मुख्य पार्टी “क्रिश्चन डेमोक्रैटिक यूनियन” के एक नेता रोडेरिश कीज़वेटर ने अख़बार “हांडेल्सब्लाट” से कहा, “मेरा मानना है कि यह आतंकी शासन काफी समय से पश्चिम में—और विशेषकर जर्मनी में—लक्ष्यबद्ध हत्याओं और आतंकी हमलों की योजना बना रहा है और उनकी तैयारी कर रहा है।…यह मुल्ला शासन देश और विदेश, दोनों जगहों पर कट्टरपंथी विचारधारा और आतंक के ज़रिए खुद को मज़बूत करने की कोशिश कर रहा है।…यह और भी हैरानी की बात है कि हमने ईरानी “राजनयिकों” को बहुत पहले ही देश से बाहर नहीं निकाल दिया, बल्कि इसके बजाय तुष्टीकरण का रास्ता चुना।”

 

ईरान में काफ़ी अधिक बिक्री वाले “हमशहरी” नाम के इस दैनिक ने एक ग्राफ़िक छापा है, जिसमें जर्मनी के चांसलर मेर्त्स समेत कई पश्चिमी नेताओं से बदला लेने की बात कही गई है। अख़बार ने अपने लेख को शीर्षक दिया है: “उन लोगों की सूची, जिन्हें ईरानी लोगों के बदले का सामना करना होगा।”

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13 शीर्ष पश्चिमी नेता ईरान के निशाने पर

इस सूची में 13 शीर्ष पश्चिमी नेताओं के नाम हैं, जिन्हें अब ईरान के सर्वोच्च मज़हबी और राजनीतिक नेता रहे अली खामेनेई की मौत का “हर्जाना” भुगतना पड़ सकता है। जर्मन चांसलर के अलावा, इस सूची में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप, इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों, इतालवी प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी और ब्रिटेन के निवर्तमान प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के नाम शामिल हैं।

 

“इस तरह की कोई सूची लगभग निश्चित रूप से मुल्ला शासन की मंज़ूरी— या सीधे निर्देश के बिना नहीं बन सकती”— कहना है जर्मनी की ग्रीन पार्टी के संसदीय दल के उपप्रमुख कोंस्तातिन फॉन नोज़ का। वे मानते हैं कि जान से मारने की ये धमकियाँ दूसरे देशों से जुड़े मामलों की तुलना में तनाव का एक नया स्तर दिखाती हैं।

प्रतिशोध की मांग मोजतबा खामेनेई कर रहे हैं

यह सारी बयानबाज़ी तब शुरू हुई, जब अयातोल्ला खामेनेई के घायल बेटे, मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता की हत्या का बदला लेने की कसम खाई। कहा जा रहा है कि यह बात उन्होंने अपने पिता के अंतिम संस्कार के दौरान जारी एक बयान में कही है। इसके अलावा, ईरानी गुप्तचर सूत्रों ने भी अमेरिकी नेतृत्व के विरुद्ध ठोस और नए ख़तरों की ओर ख़ास तौर पर इशारा किया है।

 

पर, प्रतिशोध की आग से धधक रहे ईरान के धर्मांध सत्ताधारी यह सोचने में असमर्थ हैं कि यदि इन सभी 13 देशों के सर्वोच्च नेता एकजुट हो गए, तो उनकी सम्मिलित सैन्य शक्ति ईरान का वही हाल कर सकती है, जो अमेरिका ने अकेल ही 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी पर दो परमाणु बम गिराकर जापान का कर दिया था।

Middle East War: बहरीन में US नेवी बेस पर ईरान का भीषण हमला! अमेरिका से दो-दो हाथ करने को तैयार, तेल सप्लाई रोकने का दिया अल्टीमेटम

Iran US Conflict Middle East Oil Gas Crisis: मिडिल ईस्ट में तनाव एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बहरीन में मौजूद अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े पर बड़े हमले का दावा किया है। इस हमले के तुरंत बाद ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि इस क्षेत्र से तेल और गैस का निर्यात या तो सभी के लिए होगा या फिर किसी के लिए भी नहीं।

दूसरी तरफ, अमेरिका ने भी इस हमले का करारा जवाब देते हुए ईरान के तटीय इलाकों में भारी बमबारी की है। आइए इस पूरे घटनाक्रम और इसके पीछे की बड़ी वजहों को समझते हैं।

ईरान ने अमेरिकी नेवी बेस पर कैसे किया हमला?

ईरानी सेना IRGC के आधिकारिक बयान के मुताबिक, उन्होंने ‘ऑपरेशन नसर 2’ के तहत पांचवें चरण के हमलों को अंजाम दिया है। इस ऑपरेशन को ‘मुबारक या अली इब्न अबी तालिब (AS)’ कोडनेम दिया गया था।

ईरान का दावा है कि बहरीन में अमेरिकी पांचवें बेड़े के बेस पर किए गए इस हमले में वहां के एनएसआई मैनेजमेंट सेंटर, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, सैन्य उपकरणों और पुर्जों से भरे बड़े गोदामों और ईंधन टैंकों को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है।

ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि उसने हिंद महासागर में अपने नौसैनिक बल तैनात कर दिए हैं और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण का दावा करके दुनिया के लिए तेल-गैस का रास्ता बंद कर दिया है। ईरान का कहना है कि यह हमला अमेरिका की इसी ‘गुंडागर्दी’ का जवाब है।

अमेरिका की जवाबी कार्रवाई: 7 घंटे तक बरसे बम

बहरीन में अपने बेस पर हुए हमले के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने भी ईरान के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। अमेरिकी सेना ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान के तटीय इलाकों के पास मौजूद ईरानी सैन्य ठिकानों पर लगातार 7 घंटे तक हवाई हमले किए।

इस कार्रवाई में अमेरिकी लड़ाकू विमानों, ड्रोनों और युद्धपोतों ने सटीक मार करने वाले हथियारों से ईरान की मिसाइल और ड्रोन साइटों, नौसैनिक क्षमताओं और तटीय रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया। अमेरिका ने घोषणा की है कि उसने ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों से आने-जाने वाले जहाजों के खिलाफ फिर से समुद्री नाकेबंदी शुरू कर दी है।

क्या रुक जाएगी मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई?

ईरान की इस नई धमकी ने दुनिया भर के बाजारों में खलबली मचा दी है। ईरान के सैन्य संगठन IRGC ने साफ तौर पर कहा है कि अगर अमेरिका हिंद महासागर के रास्ते तेल और गैस के निर्यात को बाधित कर उसके आर्थिक प्रतिद्वंद्वियों के हितों को नुकसान पहुंचाएगा, तो अमेरिका और उसके सहयोगियों के तेल निर्यात वाले रास्तों को भी बंद कर दिया जाएगा।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ईरान और अमेरिका के बीच यह जंग और खिंचती है, तो हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली तेल सप्लाई पूरी तरह ठप हो सकती है, जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और एक नया ऊर्जा संकट खड़ा हो सकता है।

Crude Oil News: फिर $100 के पार जाएगा कच्चा तेल? इन बातों से तय होगी चाल

Crude Oil News: कच्चे तेल में एक बार फिर उबाल आ रहा है। एमएसटी मार्की (MST Marquee) के एनर्जी रिसर्च हेड सॉल कावोनिक (Saul Kavonic) का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नई दिक्कतों ने वैश्विक ऑयल मार्केट की तस्वीर बदल दी और सप्लाई से जुड़ा रिस्क फिर से बढ़ने के चलते इसकी कीमतें हाई लेवल पर बनी रह सकती है। सॉल का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच जंग जारी रहती है या इसकी आंच ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंचती है तो कच्चे तेल के भाव एक बार फिर से प्रति बैरल $100 से ऊपर जा सकती है और मार्च-अप्रैल के लेवल पर फिर पहुंच सकती है।

इन बातों से तय होगी कच्चे तेल की चाल

सॉल का कहना है कि नियर टर्म में तेल की कीमतें किस तरफ बढ़ेगी, यह इस पर निर्भर करेगा कि अमेरिका और ईरान के बीच की लड़ाई किस तरह आगे बढ़ती है। अगर तनाव हल्का होता है, तो हाल में कच्चे तेल की कीमतों में आई करीब 10% की बढ़ोतरी घट सकती है लेकिन अगर लड़ाई लंबी खिंचती है या एनर्जी इंफ्रा पर हमले होते हैं, तो कीमतें तेजी से बढ़ सकती है। पश्चिमी एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई एक बार शुरू होने पर ब्रेंट क्रूड उबल पड़ा और प्रति बैरल $85 के करीब पहुंच गया। इससे पहले सीजफायर की उम्मीदों और होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने की संभावना के चलते तेल की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद की जा रही थी।

होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही फिर से सामान्य होने की उम्मीद पर माना जा रहा था कि होर्मुज स्ट्रेट से तेल की सप्लाई होगी तो सप्लाई सरप्लस हो जाएगी लेकिन पश्चिमी एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ा तो माहौल बदल गया। इस रास्ते से गुजरने वाला तेल अब युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में सिर्फ 15% ही रह गया है। मार्केट में सप्लाई की कमी बनी हुई है और मांग पूरी करने के लिए इन्वेंट्री पर निर्भरता बनी हुई है। सॉल का कहना है कि तेल की कीमतों में तब तक कोई खास कमी आने की संभावना नहीं है, जब तक कि होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग युद्ध से पहले के लेवल से लगभग 30-50% तक वापस नहीं आ जाता जिससे ज़्यादा कच्चा तेल इंटरनेशनल मार्केट तक पहुँच सके।

Iran-US War से कितनी बदल पाएगी स्ट्रैटेजी?

सॉल का अनुमान है कि अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई खाड़ी देशों में एनर्जी सिक्योरिटीज से जुड़ी रणनीतियों को हमेशा के लिए बदल देगा। उन्होंने कहा कि तेल निकालने वाले देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए एक्सपोर्ट के वैकल्पिक इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ा सकते हैं। हालांकि यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों ने पहले ही ऐसी पाइपलाइन की क्षमता बढ़ाने की योजना का ऐलान किया जो होर्मुज से होकर नहीं गुजरती लेकिन सॉल के मुताबिक जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में कई साल लगेंगे। इराक और कुवैत जैसे देशों के लिए एक्सपोर्ट रूट के मामले में बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय सहयोग की जरूरत होगी, यानी कि आने वाले समय में भी होर्मुज स्ट्रेट के एक अहम ग्लोबल एनर्जी चोकपॉइंट बने रहने की उम्मीद है।

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US-Iran War News: होर्मुज को लेकर ट्रंप का बड़ा ऐलान! ईरानी जहाजों पर पूरी नाकाबंदी, शुल्क लगाने की धमकी से पीछे हटे

US-Iran War News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ईरान और खाड़ी क्षेत्र को लेकर कई बड़े ऐलान किए हैं। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना की वजह से वैश्विक तेल आपूर्ति रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान को छोड़कर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सभी देशों के लिए खुला रहेगा। जबकि ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों पर पूरी नाकाबंदी लागू की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।

इन हमलों में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई। जबकि 10 अन्य घायल हो गए। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार सुबह ईरान दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी को तलब किया और इन हमलों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत ने कहा कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के दौरान ‘ए अल बहियाह’ और ‘एमटी मोम्बासा’ नाम के दो पोत पर हुए हमलों को लेकर बेहद चिंतित है।

टैरिफ वाले बयान से पीछे हटे

डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले माल पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने की अपनी योजना से एक दिन बाद ही पीछे हटते हुए कहा कि इसके बजाय पश्चिम एशियाई देश अमेरिका के साथ निवेश और व्यापार समझौते करेंगे।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा. “पश्चिम एशिया के नेताओं के साथ अत्यंत सकारात्मक बातचीत के आधार पर मैंने 20 प्रतिशत अमेरिकी प्रतिपूर्ति शुल्क को उन व्यापार और निवेश समझौतों से बदलने का फैसला किया है। उन्हें विभिन्न खाड़ी देश अमेरिका में करेंगे।”

राष्ट्रपति ने कहा कि ये निवेश बहुत बड़े पैमाने पर होंगे। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ये उन नई प्रतिबद्धताओं से अलग होंगे या नहीं, जिनकी घोषणा ट्रंप ने पिछले साल पश्चिम एशिया यात्रा के बाद की थी।

ईरान का हिंसक दौर अब खत्म होगा?

ट्रंप ने दुनिया को भरोसा दिलाते हुए संकल्प लिया है कि अमेरिका, ईरान को कभी भी परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) हासिल नहीं करने देगा। ट्रंप ने दावा किया है कि इन कड़े कदमों के बाद अब क्षेत्र में ईरान का हिंसक और आक्रामक दौर हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।

होर्मुज में हमले में एक भारतीय की मौत

भारत ने कमर्शियल पोत ‘एमटी अल बहिया’ और ‘एमटी मोम्बासा’ पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है। उन पर कुल 30 भारतीय नाविक सवार थे। भारत ने पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता लाने के लिए हिंसा को तुरंत रोकने और बातचीत व कूटनीति का रास्ता अपनाने की अपनी अपील दोहराई।

संयुक्त अरब अमीरात के दो तेल टैंकरों पर हमले अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हुए। ईरान पर 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद शुरू हुए संघर्ष में पश्चिम एशिया में 14 भारतीयों की मौत हो चुकी है।

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विदेश मंत्रालय ने मारे गए भारतीय नागरिक के परिवार के प्रति गहरी संवेदना जताई और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की। मंत्रालय ने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भारतीय मिशन हालात पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। साथ ही प्रभावित भारतीय नाविकों को हर संभव मदद दिलाने के लिए खाड़ी देश के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हैं।

Nitin Gadkari VIDEO: ‘अब हवा में उड़ने वाली बस लाऊंगा…’; केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का बड़ा ऐलान, जानें- किन शहरों में होगी शुरुआत

Nitin Gadkari VIDEO: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वह भविष्य में ऐसी बस लाने जा रहे हैं, जो हवा में उड़ेगी। जी हां, उन्होंने कहा कि देश में बढ़ते ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए आधुनिक परिवहन तकनीकों को अपनाना जरूरी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के लोकार्पण कार्यक्रम में गडकरी ने कहा कि वह जल्द ही हवा में उड़ने वाली बस लेकर आएंगे।

उन्होंने कहा कि जैसे वह पानी में उतरने वाला हवाई जहाज लेकर आए थे, वैसे ही जो भी वादा करेंगे, उसे पूरा करके दिखाएंगे। नितिन गडकरी ने कहा, “अब मैं ऐसी बस लाने जा रहा हूं जो हवा में उड़ती हुई चलेगी।” उनका यह बयान भविष्य की एरियल पब्लिक ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी की ओर इशारा माना जा रहा है। उनका इशारा रोपवे आधारित सार्वजनिक परिवहन, स्काई बस, पॉड टैक्सी और अन्य एरियल मोबिलिटी सिस्टम जैसी परियोजनाओं की ओर माना जा रहा है, जिन पर केंद्र सरकार लंबे समय से काम कर रही है।

ट्रांजिट सिस्टम को बढ़ावा देने की वकालत

केंद्रीय मंत्री लंबे समय से देश में रोपवे, स्काई बस, पॉड टैक्सी और अन्य एरियल ट्रांजिट सिस्टम को बढ़ावा देने की वकालत करते रहे हैं। उनका मानना है कि जमीन के ऊपर चलने वाली सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था से बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम कम होगा। साथ ही यात्रा का समय घटेगा और प्रदूषण पर भी कंट्रोल पाया जा सकेगा।

गडकरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य लोगों को सस्ता, सुरक्षित, तेज और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है। इसके लिए नई तकनीकों पर लगातार काम किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने जिस ‘हवा में उड़ने वाली बस’ का जिक्र किया, उसके बारे में अभी कोई डिटेल्स प्लान, प्रोजेक्ट या लॉन्च की तारीख घोषित नहीं की गई है। फिलहाल इसे भविष्य की आधुनिक परिवहन सिस्टम के रूप में देखा जा रहा है।

क्या है उड़ने वाली बस का मतलब?

गडकरी ने पहले भी कई बार कहा है कि भारत के शहरों में बढ़ते ट्रैफिक को कम करने के लिए जमीन के ऊपर चलने वाली आधुनिक परिवहन सिस्टम विकसित की जाएंगी। इनमें शामिल हैं:-

रोपवे आधारित बस सिस्टम

स्काई बस

पॉड टैक्सी

एरियल इलेक्ट्रिक ट्रांजिट

केबल-कार आधारित शहरी परिवहन

इन सिस्टम में वाहन सड़क पर नहीं बल्कि ऊंचे ट्रैक, केबल या सस्पेंडेड सिस्टम पर चलते हैं। इससे ऐसा लगता है मानो बस हवा में उड़ रही हो।

किन शहरों में हो सकता है प्रयोग?

परिवहन मंत्रालय पहले से कई शहरों में वैकल्पिक एरियल ट्रांजिट सिस्टम की संभावनाएं तलाश रहा है। इनमें शामिल हो सकते हैं: नागपुर, वाराणसी, मुंबई, दिल्ली और देहरादून।

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पहले भी दे चुके हैं ऐसे बयान

नितिन गडकरी अक्सर नई तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए चर्चित बयान देते रहे हैं। वे इलेक्ट्रिक वाहन, हाइड्रोजन ईंधन, फ्लेक्स-फ्यूल, रोपवे और जल परिवहन जैसी परियोजनाओं के बड़े समर्थक माने जाते हैं। हालांकि, उन्होंने जिस ‘हवा में उड़ने वाली बस’ की बात कही, उसके लिए अभी कोई विस्तृत सरकारी परियोजना या लॉन्चिंग डेट घोषित नहीं की गई है।