ट्रंप समेत 13 टॉप लीडर ईरान की लिस्ट में, जानिए कौन-कौन हैं वे नेता

Donald Trump

Iran assassination plot: गत 7 और 8 जुलाई को तुर्किये की राजधानी अंकारा में जब अमेरिका और यूरोप के “उत्तर अटलांटिक संधि संगठन” नाटो (NATO) का शिखर सम्मेलन चल रहा था, तब एक ऐसी महा भयावह घटना होते बाल-बाल रह गई, जो अन्यथा तीसरे विश्वयुद्ध का बिगुल बजा देती।

 

ईरान उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की हत्या की ताक में था। भौगोलिक दूरी की दृष्टि से वे ईरान के जितने निकट उस समय थे, उतने शायद फिर कभी नहीं होते।

 

इसराइली टेलीविज़न चैनल 13 की एक रिपोर्ट में, सीनियर सूत्रों के हवाले से कहा गया कि ट्रंप की हत्या की कोशिश के संकेत मिलने पर, इसराइल द्वारा इसकी गोपनीय जानकारी तुरंत अमेरिका को दे दी गई। जानकारी में एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी का यह उद्धरण भी शामिल था: “यह हमारा मौका है, इससे बेहतर कोई मौका नहीं मिलेगा।” यह कथन साफ़ तौर पर ट्रंप के तुर्की में होने से संबंधित था।

मोसाद ने अमेरिका को सजग किया

चैनल 13 की बताई रिपोर्ट के अनुसार, इस जानकारी में शामिल पश्चिमी गुप्तचर सेवाओं की पहचान इसराइल की गुप्तचर एजेंसी मोसाद के तौर पर हुई है। समझा जाता है कि ईरान के किसी संभावित षड़यंत्र का शिकार बनने से बचने के लिए ही ट्रंप ने अंकारा से अमेरिका वापस जाने के लिए अपना विमान अकस्मात बदल दिया। न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा— ट्रंप अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के समापन के बाद— क़तर से मिले अपने निजी नए विमान के बदले अपने पुराने सरकारी “एयर फ़ोर्स वन” से स्वदेश लौटे। ALSO READ: अमेरिका और ईरान युद्ध दोबारा भड़का तो क्या होगा?

 

न्यूयॉर्क टाइम्स ने जिन स्रोतों का उल्लेख किया है, उनसे पता चलता है कि यह आकस्मिक निर्णय अमेरिकी “सीक्रेट सर्विस” की तरफ़ से सावधानी के तौर पर मिले एक खास “सुरक्षा परामर्श” के बाद लिया गया था; शुरू में इसे किसी खास ख़तरे से नहीं जोड़ा गया था।

 

लेकिन, बाद की रिपोर्टों ने इस निर्णय को “ईरानी षड़यंत्र” के बारे में मिली गुप्तचर जानकारियों से जोड़ा। यह भी कहा गया कि क़तर से ट्रंप को जो विमान उपहार में मिला है, उसमें अभी उनके मूल आधिकारिक विमान “एयर फ़ोर्स वन” जैसी सभी आवश्यक सुरक्षा सुविधाएं और क्षमताएं नहीं हैं।

अंकारा से उड़ान को अजीब बताया गया

कहा जा रहा है कि ट्रंप अपने पुराने विमान में बहुत जल्दी से चढ़ गए, इससे पहले कि उनके साथ के पत्रकार उन्हें सीढ़ियां चढ़ते हुए देख पाते या उनके फ़ोटो ले पाते। उन्होंने जो उतावली दिखाई, वह स्थापित परिपाटी से अलग थी।

 

इसराइल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने अमेरिकी टेलीविज़न चैनल “फॉक्स न्यूज़” को दिए एक इंटरव्यू में इन रिपोर्टों की पुष्टि की और कहा, “इसराइली गुप्तचर सेवा ने ट्रंप और उनके प्रसाशन को एक बहुत ख़ास हत्या की कोशिश के बारे में जानकारी दी थी, जिसे ईरानियों ने राष्ट्रपति के खिलाफ रची थी।”  ALSO READ: ईरान से युद्ध के कारण अमेरिका में अस्त्र-शस्त्र की तंगी

ट्रंप ने कहा, “मैं थोड़ा भाग्यवान रहा हूं”

ट्रंप ने नाटो के शिखर सम्मेलन में भी इस सारे प्रकरण का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए कहा था: “वे (ईरानी) US लीडर को, मुझे, ख़त्म करना चाहते हैं। मैं हर लिस्ट में हूं। मैं उनकी हर एक लिस्ट में हूं, और अब तक मुझे लगता है कि मैं थोड़ा भाग्यवान रहा हूं, लेकिन शायद यह ज़्यादा दिन नहीं चलेगा, क्योंकि ऐसा ही होता है।”

 

इस बीच, ईरान के एक अख़बार “हमशहरी” ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिश मेर्त्स सहित पश्चिमी देशों के कई शीर्ष नेताओं से बदला लेने की धमकी दी है। कुछ जर्मन नेता इस धमकी पर चिंता जताते हुए ईरानी राजनयिक प्रतिनिधियों को देश से बाहर निकाल देने की मांग कर रहे हैं। इस मांग में सत्तरूढ़ गंठबंधन की तीनों पार्टियों सहित, सरकार की अन्यथा मुखर आलोचक, पर्यावरणवादी ग्रीन पार्टी भी शामिल है।

मुल्ला शासन की कट्टरपंथी विचारधारा और आतंक

जर्मनी के सत्तरूढ़ गबंधन की मुख्य पार्टी “क्रिश्चन डेमोक्रैटिक यूनियन” के एक नेता रोडेरिश कीज़वेटर ने अख़बार “हांडेल्सब्लाट” से कहा, “मेरा मानना है कि यह आतंकी शासन काफी समय से पश्चिम में—और विशेषकर जर्मनी में—लक्ष्यबद्ध हत्याओं और आतंकी हमलों की योजना बना रहा है और उनकी तैयारी कर रहा है।…यह मुल्ला शासन देश और विदेश, दोनों जगहों पर कट्टरपंथी विचारधारा और आतंक के ज़रिए खुद को मज़बूत करने की कोशिश कर रहा है।…यह और भी हैरानी की बात है कि हमने ईरानी “राजनयिकों” को बहुत पहले ही देश से बाहर नहीं निकाल दिया, बल्कि इसके बजाय तुष्टीकरण का रास्ता चुना।”

 

ईरान में काफ़ी अधिक बिक्री वाले “हमशहरी” नाम के इस दैनिक ने एक ग्राफ़िक छापा है, जिसमें जर्मनी के चांसलर मेर्त्स समेत कई पश्चिमी नेताओं से बदला लेने की बात कही गई है। अख़बार ने अपने लेख को शीर्षक दिया है: “उन लोगों की सूची, जिन्हें ईरानी लोगों के बदले का सामना करना होगा।”

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13 शीर्ष पश्चिमी नेता ईरान के निशाने पर

इस सूची में 13 शीर्ष पश्चिमी नेताओं के नाम हैं, जिन्हें अब ईरान के सर्वोच्च मज़हबी और राजनीतिक नेता रहे अली खामेनेई की मौत का “हर्जाना” भुगतना पड़ सकता है। जर्मन चांसलर के अलावा, इस सूची में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप, इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों, इतालवी प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी और ब्रिटेन के निवर्तमान प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के नाम शामिल हैं।

 

“इस तरह की कोई सूची लगभग निश्चित रूप से मुल्ला शासन की मंज़ूरी— या सीधे निर्देश के बिना नहीं बन सकती”— कहना है जर्मनी की ग्रीन पार्टी के संसदीय दल के उपप्रमुख कोंस्तातिन फॉन नोज़ का। वे मानते हैं कि जान से मारने की ये धमकियाँ दूसरे देशों से जुड़े मामलों की तुलना में तनाव का एक नया स्तर दिखाती हैं।

प्रतिशोध की मांग मोजतबा खामेनेई कर रहे हैं

यह सारी बयानबाज़ी तब शुरू हुई, जब अयातोल्ला खामेनेई के घायल बेटे, मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता की हत्या का बदला लेने की कसम खाई। कहा जा रहा है कि यह बात उन्होंने अपने पिता के अंतिम संस्कार के दौरान जारी एक बयान में कही है। इसके अलावा, ईरानी गुप्तचर सूत्रों ने भी अमेरिकी नेतृत्व के विरुद्ध ठोस और नए ख़तरों की ओर ख़ास तौर पर इशारा किया है।

 

पर, प्रतिशोध की आग से धधक रहे ईरान के धर्मांध सत्ताधारी यह सोचने में असमर्थ हैं कि यदि इन सभी 13 देशों के सर्वोच्च नेता एकजुट हो गए, तो उनकी सम्मिलित सैन्य शक्ति ईरान का वही हाल कर सकती है, जो अमेरिका ने अकेल ही 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी पर दो परमाणु बम गिराकर जापान का कर दिया था।

Middle East War: बहरीन में US नेवी बेस पर ईरान का भीषण हमला! अमेरिका से दो-दो हाथ करने को तैयार, तेल सप्लाई रोकने का दिया अल्टीमेटम

Iran US Conflict Middle East Oil Gas Crisis: मिडिल ईस्ट में तनाव एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बहरीन में मौजूद अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े पर बड़े हमले का दावा किया है। इस हमले के तुरंत बाद ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि इस क्षेत्र से तेल और गैस का निर्यात या तो सभी के लिए होगा या फिर किसी के लिए भी नहीं।

दूसरी तरफ, अमेरिका ने भी इस हमले का करारा जवाब देते हुए ईरान के तटीय इलाकों में भारी बमबारी की है। आइए इस पूरे घटनाक्रम और इसके पीछे की बड़ी वजहों को समझते हैं।

ईरान ने अमेरिकी नेवी बेस पर कैसे किया हमला?

ईरानी सेना IRGC के आधिकारिक बयान के मुताबिक, उन्होंने ‘ऑपरेशन नसर 2’ के तहत पांचवें चरण के हमलों को अंजाम दिया है। इस ऑपरेशन को ‘मुबारक या अली इब्न अबी तालिब (AS)’ कोडनेम दिया गया था।

ईरान का दावा है कि बहरीन में अमेरिकी पांचवें बेड़े के बेस पर किए गए इस हमले में वहां के एनएसआई मैनेजमेंट सेंटर, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, सैन्य उपकरणों और पुर्जों से भरे बड़े गोदामों और ईंधन टैंकों को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है।

ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि उसने हिंद महासागर में अपने नौसैनिक बल तैनात कर दिए हैं और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण का दावा करके दुनिया के लिए तेल-गैस का रास्ता बंद कर दिया है। ईरान का कहना है कि यह हमला अमेरिका की इसी ‘गुंडागर्दी’ का जवाब है।

अमेरिका की जवाबी कार्रवाई: 7 घंटे तक बरसे बम

बहरीन में अपने बेस पर हुए हमले के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने भी ईरान के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। अमेरिकी सेना ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान के तटीय इलाकों के पास मौजूद ईरानी सैन्य ठिकानों पर लगातार 7 घंटे तक हवाई हमले किए।

इस कार्रवाई में अमेरिकी लड़ाकू विमानों, ड्रोनों और युद्धपोतों ने सटीक मार करने वाले हथियारों से ईरान की मिसाइल और ड्रोन साइटों, नौसैनिक क्षमताओं और तटीय रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया। अमेरिका ने घोषणा की है कि उसने ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों से आने-जाने वाले जहाजों के खिलाफ फिर से समुद्री नाकेबंदी शुरू कर दी है।

क्या रुक जाएगी मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई?

ईरान की इस नई धमकी ने दुनिया भर के बाजारों में खलबली मचा दी है। ईरान के सैन्य संगठन IRGC ने साफ तौर पर कहा है कि अगर अमेरिका हिंद महासागर के रास्ते तेल और गैस के निर्यात को बाधित कर उसके आर्थिक प्रतिद्वंद्वियों के हितों को नुकसान पहुंचाएगा, तो अमेरिका और उसके सहयोगियों के तेल निर्यात वाले रास्तों को भी बंद कर दिया जाएगा।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ईरान और अमेरिका के बीच यह जंग और खिंचती है, तो हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली तेल सप्लाई पूरी तरह ठप हो सकती है, जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और एक नया ऊर्जा संकट खड़ा हो सकता है।

Crude Oil News: फिर $100 के पार जाएगा कच्चा तेल? इन बातों से तय होगी चाल

Crude Oil News: कच्चे तेल में एक बार फिर उबाल आ रहा है। एमएसटी मार्की (MST Marquee) के एनर्जी रिसर्च हेड सॉल कावोनिक (Saul Kavonic) का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नई दिक्कतों ने वैश्विक ऑयल मार्केट की तस्वीर बदल दी और सप्लाई से जुड़ा रिस्क फिर से बढ़ने के चलते इसकी कीमतें हाई लेवल पर बनी रह सकती है। सॉल का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच जंग जारी रहती है या इसकी आंच ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंचती है तो कच्चे तेल के भाव एक बार फिर से प्रति बैरल $100 से ऊपर जा सकती है और मार्च-अप्रैल के लेवल पर फिर पहुंच सकती है।

इन बातों से तय होगी कच्चे तेल की चाल

सॉल का कहना है कि नियर टर्म में तेल की कीमतें किस तरफ बढ़ेगी, यह इस पर निर्भर करेगा कि अमेरिका और ईरान के बीच की लड़ाई किस तरह आगे बढ़ती है। अगर तनाव हल्का होता है, तो हाल में कच्चे तेल की कीमतों में आई करीब 10% की बढ़ोतरी घट सकती है लेकिन अगर लड़ाई लंबी खिंचती है या एनर्जी इंफ्रा पर हमले होते हैं, तो कीमतें तेजी से बढ़ सकती है। पश्चिमी एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई एक बार शुरू होने पर ब्रेंट क्रूड उबल पड़ा और प्रति बैरल $85 के करीब पहुंच गया। इससे पहले सीजफायर की उम्मीदों और होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने की संभावना के चलते तेल की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद की जा रही थी।

होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही फिर से सामान्य होने की उम्मीद पर माना जा रहा था कि होर्मुज स्ट्रेट से तेल की सप्लाई होगी तो सप्लाई सरप्लस हो जाएगी लेकिन पश्चिमी एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ा तो माहौल बदल गया। इस रास्ते से गुजरने वाला तेल अब युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में सिर्फ 15% ही रह गया है। मार्केट में सप्लाई की कमी बनी हुई है और मांग पूरी करने के लिए इन्वेंट्री पर निर्भरता बनी हुई है। सॉल का कहना है कि तेल की कीमतों में तब तक कोई खास कमी आने की संभावना नहीं है, जब तक कि होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग युद्ध से पहले के लेवल से लगभग 30-50% तक वापस नहीं आ जाता जिससे ज़्यादा कच्चा तेल इंटरनेशनल मार्केट तक पहुँच सके।

Iran-US War से कितनी बदल पाएगी स्ट्रैटेजी?

सॉल का अनुमान है कि अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई खाड़ी देशों में एनर्जी सिक्योरिटीज से जुड़ी रणनीतियों को हमेशा के लिए बदल देगा। उन्होंने कहा कि तेल निकालने वाले देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए एक्सपोर्ट के वैकल्पिक इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ा सकते हैं। हालांकि यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों ने पहले ही ऐसी पाइपलाइन की क्षमता बढ़ाने की योजना का ऐलान किया जो होर्मुज से होकर नहीं गुजरती लेकिन सॉल के मुताबिक जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में कई साल लगेंगे। इराक और कुवैत जैसे देशों के लिए एक्सपोर्ट रूट के मामले में बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय सहयोग की जरूरत होगी, यानी कि आने वाले समय में भी होर्मुज स्ट्रेट के एक अहम ग्लोबल एनर्जी चोकपॉइंट बने रहने की उम्मीद है।

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US-Iran War News: होर्मुज को लेकर ट्रंप का बड़ा ऐलान! ईरानी जहाजों पर पूरी नाकाबंदी, शुल्क लगाने की धमकी से पीछे हटे

US-Iran War News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ईरान और खाड़ी क्षेत्र को लेकर कई बड़े ऐलान किए हैं। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना की वजह से वैश्विक तेल आपूर्ति रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान को छोड़कर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सभी देशों के लिए खुला रहेगा। जबकि ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों पर पूरी नाकाबंदी लागू की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।

इन हमलों में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई। जबकि 10 अन्य घायल हो गए। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार सुबह ईरान दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी को तलब किया और इन हमलों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत ने कहा कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के दौरान ‘ए अल बहियाह’ और ‘एमटी मोम्बासा’ नाम के दो पोत पर हुए हमलों को लेकर बेहद चिंतित है।

टैरिफ वाले बयान से पीछे हटे

डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले माल पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने की अपनी योजना से एक दिन बाद ही पीछे हटते हुए कहा कि इसके बजाय पश्चिम एशियाई देश अमेरिका के साथ निवेश और व्यापार समझौते करेंगे।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा. “पश्चिम एशिया के नेताओं के साथ अत्यंत सकारात्मक बातचीत के आधार पर मैंने 20 प्रतिशत अमेरिकी प्रतिपूर्ति शुल्क को उन व्यापार और निवेश समझौतों से बदलने का फैसला किया है। उन्हें विभिन्न खाड़ी देश अमेरिका में करेंगे।”

राष्ट्रपति ने कहा कि ये निवेश बहुत बड़े पैमाने पर होंगे। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ये उन नई प्रतिबद्धताओं से अलग होंगे या नहीं, जिनकी घोषणा ट्रंप ने पिछले साल पश्चिम एशिया यात्रा के बाद की थी।

ईरान का हिंसक दौर अब खत्म होगा?

ट्रंप ने दुनिया को भरोसा दिलाते हुए संकल्प लिया है कि अमेरिका, ईरान को कभी भी परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) हासिल नहीं करने देगा। ट्रंप ने दावा किया है कि इन कड़े कदमों के बाद अब क्षेत्र में ईरान का हिंसक और आक्रामक दौर हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।

होर्मुज में हमले में एक भारतीय की मौत

भारत ने कमर्शियल पोत ‘एमटी अल बहिया’ और ‘एमटी मोम्बासा’ पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है। उन पर कुल 30 भारतीय नाविक सवार थे। भारत ने पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता लाने के लिए हिंसा को तुरंत रोकने और बातचीत व कूटनीति का रास्ता अपनाने की अपनी अपील दोहराई।

संयुक्त अरब अमीरात के दो तेल टैंकरों पर हमले अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हुए। ईरान पर 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद शुरू हुए संघर्ष में पश्चिम एशिया में 14 भारतीयों की मौत हो चुकी है।

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विदेश मंत्रालय ने मारे गए भारतीय नागरिक के परिवार के प्रति गहरी संवेदना जताई और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की। मंत्रालय ने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भारतीय मिशन हालात पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। साथ ही प्रभावित भारतीय नाविकों को हर संभव मदद दिलाने के लिए खाड़ी देश के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हैं।

Nitin Gadkari VIDEO: ‘अब हवा में उड़ने वाली बस लाऊंगा…’; केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का बड़ा ऐलान, जानें- किन शहरों में होगी शुरुआत

Nitin Gadkari VIDEO: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वह भविष्य में ऐसी बस लाने जा रहे हैं, जो हवा में उड़ेगी। जी हां, उन्होंने कहा कि देश में बढ़ते ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए आधुनिक परिवहन तकनीकों को अपनाना जरूरी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के लोकार्पण कार्यक्रम में गडकरी ने कहा कि वह जल्द ही हवा में उड़ने वाली बस लेकर आएंगे।

उन्होंने कहा कि जैसे वह पानी में उतरने वाला हवाई जहाज लेकर आए थे, वैसे ही जो भी वादा करेंगे, उसे पूरा करके दिखाएंगे। नितिन गडकरी ने कहा, “अब मैं ऐसी बस लाने जा रहा हूं जो हवा में उड़ती हुई चलेगी।” उनका यह बयान भविष्य की एरियल पब्लिक ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी की ओर इशारा माना जा रहा है। उनका इशारा रोपवे आधारित सार्वजनिक परिवहन, स्काई बस, पॉड टैक्सी और अन्य एरियल मोबिलिटी सिस्टम जैसी परियोजनाओं की ओर माना जा रहा है, जिन पर केंद्र सरकार लंबे समय से काम कर रही है।

ट्रांजिट सिस्टम को बढ़ावा देने की वकालत

केंद्रीय मंत्री लंबे समय से देश में रोपवे, स्काई बस, पॉड टैक्सी और अन्य एरियल ट्रांजिट सिस्टम को बढ़ावा देने की वकालत करते रहे हैं। उनका मानना है कि जमीन के ऊपर चलने वाली सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था से बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम कम होगा। साथ ही यात्रा का समय घटेगा और प्रदूषण पर भी कंट्रोल पाया जा सकेगा।

गडकरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य लोगों को सस्ता, सुरक्षित, तेज और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है। इसके लिए नई तकनीकों पर लगातार काम किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने जिस ‘हवा में उड़ने वाली बस’ का जिक्र किया, उसके बारे में अभी कोई डिटेल्स प्लान, प्रोजेक्ट या लॉन्च की तारीख घोषित नहीं की गई है। फिलहाल इसे भविष्य की आधुनिक परिवहन सिस्टम के रूप में देखा जा रहा है।

क्या है उड़ने वाली बस का मतलब?

गडकरी ने पहले भी कई बार कहा है कि भारत के शहरों में बढ़ते ट्रैफिक को कम करने के लिए जमीन के ऊपर चलने वाली आधुनिक परिवहन सिस्टम विकसित की जाएंगी। इनमें शामिल हैं:-

रोपवे आधारित बस सिस्टम

स्काई बस

पॉड टैक्सी

एरियल इलेक्ट्रिक ट्रांजिट

केबल-कार आधारित शहरी परिवहन

इन सिस्टम में वाहन सड़क पर नहीं बल्कि ऊंचे ट्रैक, केबल या सस्पेंडेड सिस्टम पर चलते हैं। इससे ऐसा लगता है मानो बस हवा में उड़ रही हो।

किन शहरों में हो सकता है प्रयोग?

परिवहन मंत्रालय पहले से कई शहरों में वैकल्पिक एरियल ट्रांजिट सिस्टम की संभावनाएं तलाश रहा है। इनमें शामिल हो सकते हैं: नागपुर, वाराणसी, मुंबई, दिल्ली और देहरादून।

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पहले भी दे चुके हैं ऐसे बयान

नितिन गडकरी अक्सर नई तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए चर्चित बयान देते रहे हैं। वे इलेक्ट्रिक वाहन, हाइड्रोजन ईंधन, फ्लेक्स-फ्यूल, रोपवे और जल परिवहन जैसी परियोजनाओं के बड़े समर्थक माने जाते हैं। हालांकि, उन्होंने जिस ‘हवा में उड़ने वाली बस’ की बात कही, उसके लिए अभी कोई विस्तृत सरकारी परियोजना या लॉन्चिंग डेट घोषित नहीं की गई है।

Iran-US War Update: होर्मुज स्ट्रेट में टैंकर पर हमले में भारतीय नाविक की मौत! भारत सरकार का बड़ा एक्शन, ईरानी राजनयिक तलब

Iran-US War Update: भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों की मंगलवार (14 जुलाई) को कड़ी निंदा की। इन हमलों में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई और 10 अन्य घायल हो गए। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार सुबह ईरान दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी को तलब किया और इन हमलों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत ने कहा कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के दौरान ‘एमटी अल बहियाह’ और ‘एमटी मोम्बासा’ नाम के दो पोत पर हुए हमलों को लेकर बेहद चिंतित है।

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “दोनों जहाजों के कुल 46 चालक दल के सदस्यों में से 30 भारतीय नाविक थे। ‘एमटी अल बहियाह’ पर सवार 12 भारतीयों में से एक की मृत्यु हो गई है और एक अन्य घायल हो गया है।” मंत्रालय के अनुसार, “एमटी मोम्बासा पर सवार 18 भारतीयों में से नौ घायल हुए हैं जिनमें से दो के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है।”

मंत्रालय ने कहा कि भारत इन हमलों और नाविकों को निशाना बनाने वाली हिंसा की घटनाओं तथा होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से मुक्त एवं सुरक्षित आवाजाही में बाधा डालने वाले कृत्यों की कड़ी निंदा करता है। विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम पश्चिम एशियाई क्षेत्र में हमलों के फिर से शुरू होने और तनाव बढ़ने पर अपनी गहरी चिंता भी दोहराते हैं। साथ ही शांति के हित में हिंसा को तुरंत रोकने और बातचीत एवं कूटनीति का रास्ता अपनाने की अपील करते हैं।”

मृतक के परिवार के प्रति जताई संवेदना

विदेश मंत्रालय ने मृतक भारतीय नाविक के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़ी है। साथ ही घायल भारतीयों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की गई।

ईरान के राजनयिक को किया तलब

घटना के बाद भारत सरकार ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के उप मिशन प्रमुख (Deputy Chief of Mission) को विदेश मंत्रालय में तलब किया। इस दौरान भारत ने इन हमलों पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। साथ ही स्पष्ट कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रूट्स पर चल रहे कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ऐसे सभी हिंसक हमलों की कड़ी निंदा करता है, जो नाविकों की जान को खतरे में डालते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुद्री रूट्स पर सुरक्षित एवं निर्बाध आवाजाही को बाधित करते हैं।

UAE में भारतीय मिशन लगातार संपर्क में है

विदेश मंत्रालय ने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में स्थित भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास स्थानीय प्रशासन के लगातार संपर्क में हैं। सरकार प्रभावित भारतीय नाविकों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर जताई चिंता

भारत ने पश्चिम एशिया में फिर से बढ़ती हिंसा और सैन्य तनाव पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से तत्काल हिंसा रोकने और बातचीत तथा कूटनीति के रास्ते पर लौटने की अपील की। मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए संवाद ही सबसे प्रभावी समाधान है।

कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना गंभीर खतरा

भारत ने अपने बयान में दोहराया कि कमर्शियल जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं। सरकार ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।

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इस रूट्स पर होने वाले हमले न केवल नाविकों की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। बल्कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल भारत सरकार पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। घायल भारतीयों को सुरक्षित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ इस मामले को राजनयिक स्तर पर भी मजबूती से उठा रही है।

US-Iran War: ईरान ने अमेरिका को दिया बड़ा झटका! मार गिराया 40 लाख डॉलर की कीमत वाला ये ड्रोन

Iran-US War: पश्चिम एशिया में तनाव फिर बढ़ गया है। कुछ दिनों से शांत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फिर से हाहाकार मच गया है। ईरान और अमेरिका में एक बार फिर तन गई है। अमेरिका ने सोमवार रात को फिर से ईरान पर सैन्य कार्रवाई की। वहीं अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने भी बड़ा एक्शन लिया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने सोमवार को दावा किया कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर उड़ रहे अमेरिका के एमक्यू-1 ड्रोन को मार गिराया है।

ईरान ने अमेरिका को दिया बड़ा झटका 

ईरान के सरकारी टीवी नेटवर्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “कुछ मिनट पहले ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर एक अमेरिकी एमक्यू-1 ड्रोन को मार गिराया है।” ईरान के कई सरकारी मीडिया संस्थानों ने भी इस खबर की जानकारी दी है। हालांकि, इस घटना से जुड़ी ज्यादा जानकारी अभी सामने नहीं आई है। वहीं, अमेरिका की सेना और व्हाइट हाउस की ओर से भी इस दावे पर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

होर्मुज में लगातार बढ़ रहा है तनाव

अमेरिकी ड्रोन गिराए जाने का यह दावा ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका ने लगातार तीसरी रात ईरान के ठिकानों पर हमला किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर करना और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों के लिए पैदा हो रहे खतरे को कम करना है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी दोबारा लागू करने का ऐलान किया है, जो मंगलवार से शुरू होगी। इसके अलावा, उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 20 प्रतिशत फीस लगाने का प्लान बना रही है। इन फैसलों के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। इसका असर दुनिया भर के तेल बाजार पर भी पड़ा है और कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है।

ईरानी हमले में एक भारतीय की मौत

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने मंगलवार को बताया कि ओमान के समुद्री क्षेत्र के पास ईरानी क्रूज़ मिसाइलों के हमले में यूएई के दो टैंकर क्षतिग्रस्त हो गए। इस हमले में एक भारतीय चालक दल (क्रू) के सदस्य की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य लोग घायल हुए हैं। वहीं, एमक्यू-1 प्रीडेटर अमेरिका का एक मानवरहित विमान (ड्रोन) है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी करने और सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाता है। यह एजीएम-114 हेलफायर मिसाइलें दागने में भी सक्षम है। एक एमक्यू-1 ड्रोन की कीमत करीब 40 लाख डॉलर (लगभग 4 मिलियन डॉलर) बताई जाती है, जबकि इसके पूरे ऑपरेशनल सिस्टम की लागत करीब 2 करोड़ डॉलर (लगभग 20 मिलियन डॉलर) होती है।

‘हॉर्मुज स्ट्रेट कब्जे में लेगा अमेरिका’, ट्रंप बोले- जहाजों से वसूलेंगे पेट्रोलिंग चार्ज; ईरान पर समझौता तोड़ने का आरोप लगाया

Trump Iran Conflict: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) का नियंत्रण अपने हाथ में लेगा। उन्होंने ईरान पर दोनों देशों के बीच हुए अंतरिम समझौते को तोड़ने का आरोप भी लगाया। यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान लगातार दूसरे दिन एक-दूसरे पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहे हैं।

ट्रंप ने ईरान पर क्या कहा?

Fox News से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका हॉर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा करेगा। उन्होंने कहा, “हम हॉर्मुज का नियंत्रण अपने हाथ में ले रहे हैं। हम इसकी रक्षा करेंगे। हो सकता है कि भविष्य में यहां से गुजरने वाले जहाजों से सुरक्षा के बदले शुल्क भी लिया जाए।”

ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि हालिया समझौते को ईरान ने तोड़ा। उनके मुताबिक, समझौता होने के बेहद करीब था, लेकिन ईरान ने बाद में ड्रोन हमला कर दिया।

दोनों देशों के बीच फिर हमले

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया। ईरान ने ओमान में रडार सिस्टम और जॉर्डन के प्रिंस हसन एयर बेस के ईंधन भंडार और गोला-बारूद डिपो को भी निशाना बनाने का दावा किया। वहीं, बहरीन, कुवैत और जॉर्डन ने कहा कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही मार गिराया।

दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय रडार, मिसाइल और ड्रोन ठिकानों के साथ-साथ छोटी नौकाओं को भी निशाना बनाया। इन हमलों में लड़ाकू विमान, नौसैनिक जहाज और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।

हॉर्मुज स्ट्रेट पर तनाव बढ़ा

दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल की सप्लाई हॉर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है। ऐसे में यहां बढ़ा तनाव पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय बन गया है।

ईरान के सरकारी मीडिया का दावा है कि उसकी नौसेना ने हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे दो जहाजों पर चेतावनी के तौर पर फायरिंग की और उन्हें रोक दिया। वहीं, अमेरिका का कहना है कि उसकी सुरक्षा में इस रास्ते से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही जारी है।

तेल की कीमतों में उछाल

तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। ब्रेंट क्रूड एक समय 5% तक चढ़ गया, जबकि बाद में इसकी बढ़त करीब 3.5% रह गई। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। निवेशकों को डर है कि अगर हॉर्मुज में संकट और गहराया, तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

बातचीत के दरवाजे अभी खुले

सैन्य तनाव के बीच ईरान ने कहा है कि वह कतर, पाकिस्तान और ओमान के मध्यस्थों के संपर्क में है और संघर्ष को और बढ़ने से रोकने की कोशिश जारी है। हालांकि, ईरान ने अमेरिका पर कूटनीतिक प्रयासों को कमजोर करने का आरोप लगाया है। वहीं, ट्रंप अब भी दावा कर रहे हैं कि समझौता लगभग हो चुका था, लेकिन ईरान ने उसे तोड़ दिया।

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US-Iran War: अमेरिका-ईरान जंग के बीच रूस ने क्यों भेजा ‘तबाही वाला प्लेन’? जानिए इसके पीछे की बड़ी वजह

अमेरिका और ईरान के बीच हुआ सीजफायर ज्यादा समय तक नहीं टिक सका। एक बार फिर दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है और लगातार सैन्य हमले किए जा रहे हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि पूरे पश्चिम एशिया में संघर्ष और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी बीच रूस की गतिविधियों ने भी दुनिया का ध्यान खींचा है। रूस ने अपना स्पेशल कमांड प्लेन ईरान भेजा है।

रूस ने भेजा ये खतरनाक विमान

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, रूस ने अपना स्पेशल कमांड प्लेन टीयू-214पीयू (Tu-214PU) ईरान की सीमा के पास भेजा है। यह विमान किसी भी बड़े संकट या युद्ध जैसी स्थिति में सरकार के शीर्ष नेतृत्व के लिए कमांड और नियंत्रण केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। टीयू-214पीयू को अक्सर अमेरिका के उन स्पेशल प्लेन जैसा माना जाता है, जिनका इस्तेमाल आपातकालीन हालात में सरकार और सेना के संचालन के लिए किया जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव के दौरान यह विमान तेहरान पहुंचा।

रिपोर्ट के मुताबिक, जून में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर के ऐलान के बाद भी अमेरिका ने ईरान से जुड़े कुछ ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई जारी रखी। वहीं, होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हुए हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव एक बार फिर बढ़ गया। बताया जा रहा है कि युद्धविराम ज्यादा समय तक नहीं टिक सका और पिछले सप्ताह इस अहम समुद्री मार्ग पर हुए हमलों के बाद हालात फिर बिगड़ गए। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि रूसी कमांड विमान की यह तैनाती रूस और ईरान के बीच मजबूत रणनीतिक संबंधों का संकेत है। उनके अनुसार, ईरान में इस विमान की मौजूदगी दिखाती है कि क्षेत्र में तनावपूर्ण हालात के बावजूद दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग जारी है।

Tu-214PU की खासियतें

टीयू-214पीयू (Tu-214PU) रूस के टुपोलेव Tu-214 यात्री विमान का विशेष सैन्य और कमांड संस्करण है। इसे अनौपचारिक तौर पर “डूम्सडे प्लेन” यानी संकट या युद्ध जैसी आपात स्थिति में इस्तेमाल होने वाला विमान भी कहा जाता है। यह विमान रूस के राष्ट्रपति और देश के शीर्ष अधिकारियों के लिए तैयार किया गया है। इसमें अत्याधुनिक संचार (कम्युनिकेशन) और कमांड सिस्टम लगाए गए हैं, जिनकी मदद से बड़े अधिकारी हवा में रहते हुए भी सरकारी और सैन्य कामकाज का संचालन कर सकते हैं।

इस विमान के नाम में “पीयू (PU)” का मतलब रूसी भाषा में उड़ता हुआ कमांड पोस्ट होता है। दिखने में यह सामान्य यात्री विमान जैसा लगता है, लेकिन इसके अंदर पूरी तरह अलग और सुरक्षित कमांड सेंटर बनाया गया है। इसमें आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और विशेष उपकरण लगाए गए हैं, जिससे किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित तरीके से कमांड और नियंत्रण किया जा सके।

आसमान में उड़ता कमांड सेंटर

इस विमान को रूस के शीर्ष नेतृत्व के लिए एक चलता-फिरता कमांड सेंटर बनाया गया है। इसमें ऐसे आधुनिक रेडियो और कम्युनिकेशन सिस्टम लगे हैं, जिनकी मदद से राष्ट्रपति और वरिष्ठ अधिकारी यात्रा के दौरान भी सरकारी और सैन्य कामकाज संभाल सकते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस विमान की अधिकतम क्रूज़िंग स्पीड करीब 850 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसकी उड़ान क्षमता लगभग 6,500 किलोमीटर तक बताई जाती है, जिससे यह बिना रुके लंबी दूरी तय कर सकता है। इसी वजह से इसे दुनिया के दूसरे वीआईपी कमांड विमानों की श्रेणी में रखा जाता है। इसका एक और उन्नत सैन्य संस्करण Tu-214PU-SBUS भी है, जिसमें और बेहतर तथा सुरक्षित संचार प्रणाली लगी होने की बात कही जाती है।

पश्चिम एशिया में फिर बढ़ा तनाव

रूस के इस विशेष विमान के पहुंचने के बीच पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने सोमवार, 13 जुलाई को दावा किया कि उसने कुवैत में मौजूद अली अल-सलेम एयर बेस पर ईंधन भंडारण टैंक और पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया। इसके अलावा अहमद अल-जाबेर एयर बेस पर लगे एक रडार सिस्टम पर भी हमला करने का दावा किया गया। कुवैत को अमेरिका का करीबी सहयोगी देश माना जाता है।

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, आईआरजीसी ने कहा कि ये हमले अमेरिका के खिलाफ चलाए जा रहे उसके “आंख के बदले आंख” अभियान के तीसरे चरण का हिस्सा हैं। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिका की पिछली सैन्य कार्रवाई के जवाब में की गई है। साथ ही उसने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर आगे भी ऐसे अभियान जारी रह सकते हैं।

मसूरी होमस्टे में नग्न अवस्था में मिला दिल्ली की महिला का शव, एक महीने बाद पति गिरफ्तार

Mussoorie woman death case: उत्तराखंड के देहरादून जिले में मसूरी-धनौल्टी मार्ग स्थित एक होमस्टे में पिछले महीने संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिली महिला के पति को पुलिस ने नई दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी सोमयाजुला चरण को मसूरी न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय से गैर-जमानती वारंट हासिल करने के बाद पूर्वी दिल्ली के मधु विहार इलाके से गिरफ्तार किया गया। यह घटना 15 जून को मसूरी क्षेत्र के ‘कियाना होमस्टे’ में हुई थी।

पुलिस ने बताया कि मृतका की पहचान पारुपुडी राधा गायत्री (27) के रूप में हुई थी। वह दिल्ली के किदवई नगर निवासी अपने पति के साथ ‘होमस्टे’ में ठहरी हुई थी। पुलिस के मुताबिक, घटना के बाद मृतका के परिजनों ने उसके पति पर संदेह जताते हुए मसूरी कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी।

इसके बाद पुलिस ने आरोपी पति के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान मिले साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर आरोपी की संलिप्तता सामने आने के बाद उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट प्राप्त किया गया। फिर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

14 दिन की न्यायिक हिरासत

गिरफ्तारी के बाद आरोपी पति को मसूरी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है। अधिकारियों ने बताया कि तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जन्मदिन मनाने गए थे मसूरी

मसूरी में जन्मदिन मनाने पहुंचे कपल की यात्रा दर्दनाक हादसे में बदल गई। दिल्ली की 27 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल पी. राधा गायत्री की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के लगभग एक महीने बाद पुलिस ने उनके पति को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का दावा है कि जांच में पति की कथित संलिप्तता के संकेत मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई।

पुलिस के अनुसार, पी. राधा गायत्री अपने पति के साथ मसूरी-धनोल्टी रोड स्थित एक होमस्टे में ठहरी थीं। दोनों पति के जन्मदिन का जश्न मनाने के लिए मसूरी आए थे। 15 जून को होमस्टे के कमरे में गायत्री मृत अवस्था में मिली थीं।

आरोपी पति आईटी सेक्टर में ही कार्यरत है। उसको दिल्ली के पूर्वी इलाके मधु विहार से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी से पहले मसूरी की न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत से उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कराया गया था।

कमरे में मिले खून के निशान और शराब की खाली बोतलें

पुलिस जांच में सामने आया कि गायत्री का शव कमरे के फर्श पर निर्वस्त्र अवस्था में पड़ा मिला। कमरे की बेडशीट पर खून के धब्बे मिले। जबकि मौके से शराब की दो खाली बोतलें और खाने-पीने का सामान भी बरामद किया गया।

पुलिस के मुताबिक, प्रारंभिक जांच के दौरान पति ने बताया कि 15 जून की तड़के करीब 3:30 बजे तक दोनों ने शराब पी थी। इसके बाद सो गए। उसका दावा था कि सुबह उठने पर उसने पत्नी को मृत पाया।

पिता की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

गायत्री की मौत पर उसके पिता पी. सुधाकर ने संदेह जताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बेटी की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग की। साथ ही परिवार ने भी पति की भूमिका पर सवाल उठाए। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

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जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर पुलिस ने पति की कथित संलिप्तता की आशंका जताई। इसके बाद गैर-जमानती वारंट हासिल कर दिल्ली से उसकी गिरफ्तारी की गई। पुलिस के अनुसार, गायत्री और उनके पति की शादी 8 नवंबर 2025 को हुई थी। फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।