Bihar Temple Stampede: बिहार के लखीसराय में अशोकधाम मंदिर में भगदड़! 7 लोगों की मौत, बिजली का तार गिरने से एक दर्जन से ज्यादा श्रद्धालु घायल

Bihar Temple Stampede: बिहार के लखीसराय में स्थित प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर में नाग पंचमी और सावन के तीसरे सोमवार के अवसर पर 17 अगस्त की सुबह बड़ा हादसा हो गया। मंदिर में भारी भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई, जिसमें कम से कम 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। ‘न्यूज 18’ के मुताबिक, इस हादसे में एक दर्जन से ज्यादा श्रद्धालु घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में सभी महिलाएं होने की जानकारी सामने आई है।

हादसे के वक्त मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करने और पूजा-अर्चना के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, करीब 50 हजार श्रद्धालु मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में मौजूद थे।  बताया जा रहा है कि वहां बिजली का एक खंभा गिर गया। इससे लोग बिजली की चपेट में आ गए, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

लखीसराय के DM शैलेंद्र कुमार ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा, “भीड़ बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। सुबह करीब 6.30-6.45 बजे दो ट्रेनें आईं, जिससे भीड़ और बढ़ गई। हमने भीड़ का अंदाजा लगाते हुए इंतजाम किए थे। फिर हमें पता चला कि भीड़ की वजह से एक तरफ की बैरिकेडिंग टूट गई और लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े। हमने तुरंत 10-15 लोगों को यहां भेजा।”

7 लोगों की मौत की पुष्टि

मंदिर में हुए हादसे पर SDPO शिवम कुमार ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया, “सात लोगों की मौत की खबर है। बताया जा रहा है कि वहां बिजली का एक खंभा गिर गया और लोग बिजली की चपेट में आ गए, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। हम पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही सही वजह बता पाएंगे।” घायलों को स्थानीय अस्पताल ले जाया गया है। उनका इलाज जारी है।

बिजली के खंभे की अफवाह से मची भगदड़?

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हादसा अशोक धाम रेलवे स्टेशन से मंदिर की ओर जाने वाली सड़क पर हुआ। बताया जा रहा है कि रात के दौरान इस रास्ते पर एक बिजली का खंभा गिर गया था। सोमवार सुबह भीड़ के बीच अचानक यह अफवाह फैल गई कि गिरे हुए बिजली के खंभे में करंट दौड़ रहा है।

इस खबर से श्रद्धालुओं में घबराहट फैल गई और लोग अचानक इधर-उधर भागने लगे। देखते ही देखते रास्ते पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। भीड़ में कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े और अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और दूसरे श्रद्धालुओं ने भीड़ में फंसे लोगों को बाहर निकालने और घायलों की मदद करने की कोशिश की।

सभी घायल महिलाएं, कई की हालत गंभीर

हादसे में घायल हुए सभी श्रद्धालुओं के महिला होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायलों को इलाज के लिए लखीसराय सदर अस्पताल ले जाया गया है, जहां उनका उपचार किया जा रहा है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर राहत और चिकित्सा व्यवस्था में जुट गईं।

मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। स्वास्थ्य विभाग और राहत-बचाव दलों को भी घटनास्थल पर लगाया गया है। अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

सावन की तीसरी सोमवारी पर उमड़ी थी भारी भीड़

सोमवार को सावन की तीसरी सोमवारी और नागपंचमी होने के कारण अशोक धाम मंदिर में सुबह से ही भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे थे। भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए दूर-दूर से लोग आए थे। भारी भीड़ के बीच बिजली के खंभे को लेकर फैली अफवाह ने अचानक लोगों में डर पैदा कर दिया। इस दौरान देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई। बिहार प्रशासन की ओर से फिलहाल घटना की डिटेल्स जांच की जा रही है। हादसे के सही कारण और मृतकों एवं घायलों की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है।

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Iran-US War Update: ईरान ने अमेरिकी सैनिक को मारने या पकड़ने पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया, महिलाओं को देगा दोगुनी रकम

Iran-US War News Update: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच तेहरान ने एक बड़ा और बेहद चौंकाने वाला ऐलान किया है। ईरान ने अमेरिकी सैनिक को मारने या पकड़कर ईरानी सेना को सौंपने वाले व्यक्ति को 30 हजार अमेरिकी डॉलर (करीब 25 लाख रुपये) का इनाम देने की घोषणा की है। खास बात यह है कि अगर यह कार्रवाई किसी ईरानी महिला द्वारा की जाती है, तो उसे इनाम की रकम दोगुनी दी जाएगी।

ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA के मुताबिक, ईरानी सेना के प्रमुख अमीर हातमी ने इस इनाम की घोषणा की है। हातमी ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों ने इस तरह की कार्रवाई में शामिल होने की इच्छा जताई थी, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिकी सैनिक को पकड़ने या मारने की कार्रवाई कहां और कब की जानी है।

अमेरिकी सैनिक को पकड़ने पर भी मिलेगा इनाम

हातमी ने कहा कि जो भी व्यक्ति किसी आक्रमणकारी अमेरिकी सैन्यकर्मी को मारता है या पकड़कर ईरानी सेना को सौंपता है, उसे 30 हजार डॉलर या 5 अरब तोमान का इनाम दिया जाएगा। ईरान में तोमान एक अनौपचारिक करेंसी है, जिसका इस्तेमाल आम तौर पर रियाल के साथ किया जाता है। ईरानी सेना प्रमुख ने इसके साथ ही महिलाओं के लिए अलग घोषणा करते हुए कहा कि यदि कोई बहादुर ईरानी महिला ऐसी कार्रवाई करती है, तो उसे दोगुना इनाम दिया जाएगा।

अमेरिका को क्षेत्र छोड़ने की चेतावनी

इनाम की घोषणा के साथ ही हातमी ने अमेरिका को क्षेत्र से अपनी सेना हटाने की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेनाओं को अब फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एंट्री करने की अनुमति नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य एवं राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है। हालांकि, संघर्ष के दौरान ईरान के भीतर अमेरिकी जमीनी सैनिकों की किसी बड़ी तैनाती की जानकारी सामने नहीं आई है।

ईरान में अमेरिकी जमीनी सैनिकों की तैनाती नहीं

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में एक बड़े बचाव अभियान के दौरान करीब 200 अमेरिकी सैन्यकर्मी और 170 से अधिक विमान शामिल हुए थे। इस अभियान का उद्देश्य हादसे का शिकार हुए F-15 के वेपन सिस्टम ऑफिसर को सुरक्षित निकालना था। इसके अलावा ईरान के अंदर अमेरिकी जमीनी सैनिकों की किसी बड़ी तैनाती की जानकारी नहीं है। ऐसे में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने के लिए इनाम की घोषणा का ऐलान खास तौर पर तनाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

कैसे शुरू हुआ अमेरिका-ईरान संघर्ष?

अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ, जब अमेरिकी और इजरायली सेना ने ईरान के खिलाफ हमले किए। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच लड़ाई जारी रही। बाद में अप्रैल में संघर्ष विराम हुआ। इसके बाद जून में शांति वार्ता के लिए एक संभावित ढांचा तैयार करने की कोशिश की गई। लेकिन बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी और प्रयास विफल हो गया।

इसके बाद भी अमेरिका और ईरान के बीच छिटपुट सैन्य हमले जारी रहे हैं। खासकर दक्षिणी ईरान और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव देखने को मिला है। हालांकि मध्यस्थों के जरिए दोनों पक्षों के बीच अप्रत्यक्ष संपर्क जारी रहने की बात कही गई है, लेकिन अब तक कोई बड़ा कूटनीतिक समाधान सामने नहीं आया है।

संघर्ष में 17 अमेरिकी जवानों की मौत

US मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 17 अमेरिकी सैन्यकर्मी मारे जा चुके हैं। इनमें सबसे हालिया मौतों की जानकारी जुलाई में सामने आई थी। बड़ी बात यह है कि इन सभी अमेरिकी सैन्यकर्मियों की मौत ईरान के बाहर हुई। इनमें जॉर्डन और इराक में मारे गए अमेरिकी सैनिक भी शामिल हैं।

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ईरान की ओर से अमेरिकी सैनिकों को मारने या पकड़ने पर इनाम की घोषणा ऐसे समय हुई है जब दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव के साथ-साथ राजनयिक स्तर पर भी गतिरोध बना हुआ है। ऐसे में इस ऐलान से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल, ईरान के इस घोषणा पर अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पलटवार का इंतजार है।

Iran-US War Update: ईरान और ओमान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ी डील, अब पूरी तरह खुलने के लिए अमेरिका की क्या होगी भूमिका?

Iran-US War News Update: ईरान और ओमान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल रूट में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक अहम समझौता किया है। इस डील के तहत होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरने वाले जहाजों के लिए निर्धारित एंट्री-एग्जिट रूट तय किए गए हैं। इसे लंबे समय से चले आ रहे समुद्री तनाव और अव्यवस्था के बीच एक बड़ी कूटनीतिक प्रगति के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, अभी इस समझौते पर तकनीकी स्तर की बातचीत जारी है। दोनों देशों की ओर से जॉइंट आधिकारिक बयान आना बाकी है। इसके बावजूद, ईरान और ओमान ने सुरक्षित वाणिज्यिक आवाजाही के लिए अलग-अलग समुद्री कॉरिडोर तैयार करने पर सहमति बना ली है।

क्या है समझौते का पूरा प्लान?

समझौते के मुताबिक, ईरान आने वाले यानी इनबाउंड कमर्शियल जहाजों की निगरानी करेगा। जबकि ओमान बाहर जाने वाले जहाजों यानी आउटबाउंड ट्रैफिक को संभालेगा। इसके लिए अलग-अलग निर्धारित शिपिंग लेन बनाई गई हैं। इनका उद्देश्य जहाजों के बीच टक्कर, सुरक्षा संबंधी घटनाओं और समुद्री तनाव को कम करना है। यह व्यवस्था दोनों देशों के बीच स्वतंत्र बातचीत के बाद तैयार हुई है।

इसका मकसद समुद्री ट्रैफिक को व्यवस्थित करना है। लेकिन साथ ही ईरान और ओमान की क्षेत्रीय संप्रभुता से समझौता न करना भी है। फिलहाल दोनों देशों की तकनीकी टीमें ऑपरेशनल प्रोटोकॉल, संचार व्यवस्था और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े नियमों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद संयुक्त औपचारिक घोषणा किए जाने की उम्मीद है।

सिर्फ रास्ते तय होने से नहीं खुलेगा होर्मुज

यह समझौता महत्वपूर्ण है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि होर्मुज जलडमरूमध्य तुरंत पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल ट्रैफिक के लिए खोल दिया जाएगा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि पूर्ण रूप से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही बहाल करने का फैसला व्यापक भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

तेहरान की प्रमुख मांगों में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी जैसी कार्रवाइयों का अंत, सैन्य धमकियों को रोकना और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत शामिल है। जब तक इन बाहरी परिस्थितियों पर सहमति नहीं बनती, तब तक नए निर्धारित समुद्री कॉरिडोर कड़ी निगरानी के तहत संचालित किए जाएंगे।

दुनिया के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है होर्मुज?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम एनर्जी चोकपॉइंट्स में से एक है। दुनिया की करीब 20 प्रतिशत पेट्रोलियम आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है। इसके अलावा बड़ी मात्रा में एलएनजी यानी तरलीकृत प्राकृतिक गैस भी इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचती है।

यही वजह है कि इस जलडमरूमध्य में तनाव या जहाजों की आवाजाही में किसी भी तरह की बड़ी रुकावट का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। पिछले महीनों में बढ़े तनाव और समुद्री ट्रैफिक में आई बाधाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ी। कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा और जहाजों के लिए युद्ध जोखिम बीमा (War-Risk Insurance) की लागत भी काफी बढ़ गई।

क्या वैश्विक तेल बाजार को मिलेगी राहत?

ईरान और ओमान के बीच हुआ यह समझौता वैश्विक बाजारों के लिए अब तक का सबसे स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि होर्मुज संकट का कूटनीतिक समाधान संभव है। हालांकि, अभी इसे पूरी तरह संकट का अंत नहीं माना जा सकता। समुद्री मार्ग की पूर्ण और सामान्य आवाजाही इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान, अमेरिका और अन्य संबंधित पक्षों के बीच व्यापक भू-राजनीतिक मुद्दों पर किस तरह की सहमति बनती है। इसलिए फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उम्मीद जरूर जगी है। लेकिन पूरी तरह सामान्य स्थिति लौटने में अभी कई अड़चनें बाकी हैं।

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ईरान में अब रेयर अर्थ खोजने के लिए अपने वैज्ञानिक भेज रहा चीन! जानिए दुनिया के लिए क्या हैं इसके मायने

Iran rare earths: महत्वपूर्ण खनिजों की ग्लोबल रेस में अब चीन और अमेरिका के बीच का कंपीटिशन और तीखा होता नजर आ रहा है। दुर्लभ खनिजों यानी रेयर अर्थ के प्रोसेसिंग में अपने दबदबे को अमेरिका से चुनौती मिल रही है। इसी बीच चीन अब रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज और एक्सप्लोरेशन के लिए ईरान में अपने वैज्ञानिकों को भेजने की तैयारी कर रहा है। यह कदम दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक संबंधों को और गहरा करने के साथ-साथ जियो पॉलिटिक्स के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।

हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘फर्स्टपोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल नेचुरल साइंस फाउंडेशन ऑफ चाइना (NSFC) ने ईरान नेशनल साइंस फाउंडेशन (INSF) के साथ अपने नए जॉइंट वर्कशॉप प्रोग्राम में रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज और एक्सप्लोरेशन को शामिल किया है।

क्या है चीन और ईरान की योजना और कैसे होगी फंडिंग?

इसके तहत चीन बैठकों, आवास और घरेलू यात्रा को कवर करने के लिए हर कार्यशाला पर 30,000 युआन (लगभग $4,200) देगा। दूसरी ओर ईरान में जाने वाले चीनी रिसर्चर्स के रहने की व्यवस्था और ईरानी प्रतिभागियों की इंटरनेशनल फ्लाइट का खर्च ईरान उठाएगा। यह रेयर अर्थ पहल चीन और ईरान के बीच व्यापक वैज्ञानिक सहयोग के विस्तार का हिस्सा है।

इस वर्कशॉप प्रोग्राम में कुल 5 क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इसमें रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज और एक्सप्लोरेशन, बीमारी का पता लगाने के लिए नैनोमैटेरियल्स, प्रदूषण निगरानी, भूकंप रेजिस्टेंट कंस्ट्रक्शन और ग्रीनर मैन्युफैक्चरिंग शामिल हैं।

इसके अलावा बीते 4 जुलाई को दोनों देशों ने एक डिटेल्ड रिसर्च सेल शुरू किया है। इसके तहत 15 सहयोगी अनुसंधान परियोजनाओं को सहायता दी जाएगी। इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 23 अगस्त रखी गई है और दिसंबर के उत्तरार्ध में अंतिम चयन के बाद स्वीकृत परियोजनाएं जनवरी 2027 से शुरू होंगी। इसमें जल और ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा, हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी, सूखा व जलवायु परिवर्तन के बीच जल प्रबंधन, और कृषि व चिकित्सा बायोटेक्नोलॉजी जैसे विषय शामिल हैं।

दशक भर पुराना है दोनों देशों का वैज्ञानिक संबंध

चीन की NSFC और ईरान के नेशनल साइंस फाउंडेशन ने साल 2017 में बीजिंग में एक MoU पर हस्ताक्षर किए थे। तब से दोनों देशों ने चिकित्सा, नवीकरणीय ऊर्जा, सामग्री विज्ञान, जलवायु परिवर्तन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम किया है।

साल 2024 में दोनों देशों के बीच संयुक्त कार्यशाला कार्यक्रम शुरू हुआ था जो शुरुआत में जलवायु परिवर्तन, एआई, उन्नत सामग्री और मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित था। हालांकि अब इसमें रेयर अर्थ को शामिल किए जाने से यह साझेदारी रणनीतिक रूप से अत्यधिक महत्वपूर्ण क्षेत्र में प्रवेश कर गई है।

अमेरिका-चीन तनाव के बीच क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

रेयर अर्थ एलिमेंट्स टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील खनिज हैं। अमेरिका-चीन संबंधों में यह एक बड़ा प्रेशर पॉइंट बन चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीन के खिलाफ ट्रेड वॉर शुरू करने के बाद, बीजिंग ने रेयर अर्थ के एक्सपोर्ट पर कड़े नियम लागू कर दिए थे, जिससे कई अमेरिकी निर्माताओं के इंपोर्ट पर असर पड़ा।

इसके जवाब में अमेरिका ने अपने घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने की कोशिश तेज कर दी है। बीते 7 अगस्त को ही ट्रंप प्रशासन ने क्रिटिकल मिनरल्स और बैटरी प्रोजेक्ट्स में 3 बिलियन डॉलर के निवेश का ऐलान किया है ताकि रक्षा भंडार को फिर से भरा जा सके और चीन पर निर्भरता कम की जा सके।

दुनिया के लिए यह खबर क्यों मायने रखती है?

इस घटनाक्रम का तात्कालिक महत्व इस बात पर निर्भर नहीं करता कि ईरान आज कितना रेयर अर्थ उत्पादन कर सकता है बल्कि इस बात पर है कि चीन अपनी विश्व स्तरीय विशेषज्ञता को एक ऐसे देश में ले जा रहा है जिसके पास मूल्यवान लेकिन काफी हद तक अविकसित संसाधन मौजूद हैं। चीन के पास रेयर अर्थ के खनन, सेपरेशन और प्रसंस्करण की दुनिया की सबसे बेहतरीन तकनीक है।

चीनी वैज्ञानिकों के आने से ईरान को अपनी रेयर अर्थ क्षमता को समझने और भविष्य में घरेलू प्रसंस्करण क्षमताएं विकसित करने में मदद मिलेगी। हालांकि ईरान को एक प्रमुख रेयर अर्थ उत्पादक बनने में अभी कई साल लगेंगे, क्योंकि इसके लिए व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक भंडार स्थापित करने के साथ-साथ खनन और प्रसंस्करण इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करना होगा।

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इसके बावजूद, अमेरिका द्वारा चीन की घेराबंदी के प्रयासों के बीच चीन का ईरान जैसे देश के साथ मिलकर रणनीतिक खनिजों पर काम करना वैश्विक राजनीति और आर्थिक संतुलन के लिए एक बड़ा संकेत है।

Asian Market: यूएस CPI आंकड़ों में नरमी से उछले एशिया मार्केट, कोस्पी 4% से ज्यादा चढ़ा

Asian Market: ज्यादातर एशिया बाजारों में तेजी देखने को मिल रही है। अनुमान के मुताबिक जुलाई महंगाई आंकड़ों का भी अमेरिकी बाजारों पर खास असर नहीं पड़ा। डाओ जोंस फ्लैट रहा, लेकिन चिप शेयरों में अच्छी तेजी से नैस्डेक आधे परसेंट से ज्यादा चला। उधर सेमीकंडक्टर शेयरों में खरीदारी से कोस्पी करीब 4 फीसदी ऊपर चढ़। निक्केई भी करीब डेढ़ परसेंट ऊपर बना हुआ।

दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) इस क्षेत्र में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला इंडेक्स रहा, जिसमें 4.48% की बढ़त हुई। जापान के निक्केई 225 (Nikkei 225) में 1.83% की बढ़त हुई, जबकि व्यापक टॉपिक्स (Topix) इंडेक्स 1.01% ऊपर चढ़ा। इसके उलट, हैंग सेंग (Hang Seng) फ्यूचर्स में 0.87% की गिरावट आई, जो व्यापक क्षेत्रीय तेज़ी के बावजूद हांगकांग बाज़ार में कुछ सावधानी का संकेत देता है।

ऑस्ट्रेलिया का बेंचमार्क S&P/ASX 200 उन प्रमुख इंडेक्स में एकमात्र ऐसा इंडेक्स था जिसमें गिरावट देखी गई। यह 0.12% नीचे आया।

वॉल स्ट्रीट (Wall Street)

बुधवार, 12 अगस्त को वॉल स्ट्रीट के बेंचमार्क इंडेक्स मिले-जुले रुख के साथ बंद हुए। जुलाई के महंगाई के आंकड़े उम्मीद के मुताबिक होने के बावजूद निवेशकों ने ज़्यादा उत्साह नहीं दिखाया।

डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज (Dow Jones Industrial Average) 240 अंकों के दायरे में ट्रेड करने के बाद लगभग बिना किसी बदलाव के बंद हुआ। वहीं, S&P 500 और नैस्डैक (Nasdaq) ने 30-स्टॉक वाले इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया और क्रमशः 0.3% और 0.5% की बढ़त दर्ज की।

जुलाई में महंगाई के आंकड़े कम रहने के बावजूद सप्ताह के बीच का ट्रेडिंग सेशन सुस्त रहा। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) महंगाई दर महीने-दर-महीने 0.1% और साल-दर-साल 3.4% बढ़ी।

कच्चे तेल की कीमतें

गुरुवार को तेल की कीमतों में $1 से ज़्यादा की गिरावट आई। विश्लेषकों ने 2026 में वैश्विक तेल मांग के अपने अनुमानों में कटौती की, जिसका कारण ईरान के साथ US-इजरायल संघर्ष से पैदा हुई रुकावटें थीं। हालांकि, संघर्ष के कारण सप्लाई में रुकावट की चिंताओं ने कीमतों में और गिरावट को सीमित रखा।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स $1.29 या 1.5% गिरकर $87.69 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड $1.30 या 1.6% गिरकर $81.97 प्रति बैरल पर आ गया। एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) के अनुसार, पिछले हफ़्ते US में कमर्शियल क्रूड ऑयल का स्टॉक उम्मीद से ज़्यादा बढ़ गया, जो जनवरी 2023 के बाद से सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़ोतरी थी। इस बढ़ोतरी की एक वजह एक्सपोर्ट में भारी गिरावट थी।

US-Iran युद्ध

इस जलमार्ग को फिर से खोलने की दिशा में प्रगति के बहुत कम संकेत मिले हैं, जबकि US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि इस रणनीतिक रास्ते पर वॉशिंगटन का “पूरा नियंत्रण” है।

US-Iran बातचीत में गतिरोध पैदा होता दिख रहा है क्योंकि दोनों पक्ष अपने कड़े रुख पर अड़े हुए हैं। वॉशिंगटन, तेहरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखे हुए है। मध्यस्थता की कोशिशों में मदद कर रहे पाकिस्तान ने कहा कि व्यापक शांति प्रक्रिया रुक गई है, हालांकि US-Iran के बीच समझौते (MOU) की समय-सीमा अभी भी बढ़ाई जा सकती है।

मध्य पूर्व में युद्ध, रूस-यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष और बंदरगाहों व रिफाइनरियों समेत एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर बार-बार हो रहे हमलों ने ग्लोबल क्रूड और रिफाइंड-प्रोडक्ट मार्केट में स्थिति को और मुश्किल बना दिया है।

आज सोने की कीमत

US में महंगाई के आंकड़े उम्मीद से कम रहने के बाद फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने को लेकर तत्काल चिंताएं कम हुईं, जिससे सोने की कीमतें $4,400 प्रति औंस के आसपास काफी हद तक स्थिर रहीं।

बुधवार को 0.9% की बढ़त के बाद शुरुआती कारोबार में सोने की कीमतों में बहुत कम बदलाव हुआ। जुलाई में US कंज्यूमर कीमतों में महीने-दर-महीने सिर्फ़ 0.1% की बढ़ोतरी के आंकड़े सामने आए थे। स्पॉट गोल्ड 0.1% गिरकर $4,403.02 प्रति औंस पर आ गया।

Stock Market Live: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

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Crude Oil Price: पश्चिम एशिया में तनाव कायम, छठे दिन भी जारी तेजी, $90 के करीब पहुंचा भाव

Crude Oil Price Today:  बुधवार को तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। US-Iran के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर अनिश्चितता और दो जहाजों पर हमलों के कारण मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावट की आशंका बढ़ गई। इंडस्ट्री के डेटा में US में कच्चे तेल के स्टॉक में बढ़ोतरी के संकेत मिलने के बावजूद कीमतों में यह उछाल आया।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 72 सेंट या 0.81% बढ़कर $89.63 प्रति बैरल हो गया, जिससे लगातार छठे दिन इसमें तेज़ी बनी रही, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 71 सेंट या 0.85% बढ़कर $83.91 पर पहुंच गया, समें पिछले चार ट्रेडिंग सेशन में 11% की बढ़त हुई है।

पिछले सेशन में दोनों बेंचमार्क $1 से ज़्यादा की बढ़त के साथ बंद हुए थे और 31 जुलाई के बाद अपने सबसे ऊंचे क्लोजिंग लेवल पर पहुंच गए थे। सोमवार को कीमतों में लगभग 5% का उछाल आया था, क्योंकि US-Iran के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर उम्मीदें कम हो गई थीं।

आज कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी की क्या वजह है?

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा कि US और ईरान ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ (Strait of Hormuz) को लेकर किसी तरह के समझौते के करीब हैं। अल जज़ीरा ने कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से बताया कि इस अहम समुद्री रास्ते को लेकर ईरान और ओमान के बीच अलग-अलग बातचीत में भी काफी प्रगति हुई है।

इस अहम शिपिंग रूट को फिर से खोलने की कोशिशों से जुड़ी घटनाओं का तेल की कीमतों पर गहरा असर पड़ रहा है। फ्यूचर्स की कीमतें बार-बार बदल रही हैं – कभी जल्द समझौते की उम्मीद तो कभी बातचीत की गति धीमी पड़ने की चिंता। क्षेत्रीय तनाव अभी भी बना हुआ है, खासकर तब से जब US नेवी के एक हेलीकॉप्टर ने पनामा के झंडे वाले एक कार्गो जहाज पर दो हेलफायर मिसाइलें दागीं; बताया जा रहा है कि यह जहाज ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था।

स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से होने वाली शिपिंग एक्टिविटी में भारी गिरावट आई है, हालांकि कुछ कच्चा तेल अभी भी फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से बाहर जा रहा है और कई टैंकर अपने ट्रांसपोंडर बंद करके चल रहे हैं। US के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि US सेना की मदद से इस जलडमरूमध्य (strait) से हर दिन लगभग 9 मिलियन बैरल तेल आ-जा रहा है।

इस साल कच्चे तेल की कीमतों में 40% से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जबकि कुछ रिफाइंड प्रोडक्ट्स की कीमतों में और भी तेज़ी से उछाल आया है। रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण आई रुकावटों का असर डीजल की कीमतों पर भी पड़ा है। US एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन की ‘शॉर्ट-टर्म एनर्जी आउटलुक’ रिपोर्ट के अनुसार, US को उम्मीद है कि ईरान के साथ चल रहे टकराव की वजह से 2027 के आखिर तक तेल की सप्लाई में हर दिन औसतन 6,00,000 बैरल की रुकावट आएगी।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा कि “हालात शांति की ओर बढ़ रहे हैं,” हालांकि उन्होंने इस बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दी। पाकिस्तान इस टकराव को खत्म करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें कर रहा है। उनके ये बयान US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के प्रति सख़्त रुख अपनाने के बाद आए हैं।

 

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क्या ईरान युद्ध में आएगा बड़ा ट्विस्ट, न्यूक्लियर डील से पीछे हटेंगे ट्रंप? होर्मुज खोलने के लिए अमेरिका की क्या है नई स्ट्रैटेजी

Donald Trump Iran News: अमेरिका-ईरान पर दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। जब से युद्ध की शुरुआत हुई है, पूरी दुनिया में गैस और ईंधन की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है। तेल की चढ़ती कीमत ने दुनिया भर में महंगाई बढ़ा दी है और इसका सबसे बड़ा कारण है होर्मुज से जहाजों का नियमित रूप से नहीं

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‘किसी भी पल उनकी मौत हो सकती है’: इजरायली मीडिया का दावा, मोजतबा खामेनेई की हालत बेहद गंभीर

फरवरी के आखिर में अमेरिकी-इजरायली हमलों में अपने पिता की मौत के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर का पद संभालने के बाद से ही मोजतबा खामेनेई की सेहत पर कड़ी नजर रखी जा रही है। उनकी हालत और यहां तक कि उनके ठिकाने को लेकर भी बार-बार सवाल उठाए जाते रहे हैं। हालांकि, ईरान ने उनकी स्थिति पर सवाल उठाने वाली खबरों का खंडन किया है, लेकिन एक बार फिर नए दावे सामने आए हैं। इजरायली मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उनकी हालत गंभीर है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

इजरायली चैनल ‘चैनल 14’ ने ईरान के अंदरूनी सूत्रों का हवाला देते हुए दावा किया कि खामेनेई की हालत “बेहद गंभीर” है। इन रिपोर्टों में ‘ईरानवायर’ के दावों का भी जिक्र किया गया, जिसने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के प्रशासन के करीबी सूत्रों का हवाला दिया था।

IranWire के सूत्रों ने खामेनेई की सेहत को लेकर चिंता जताई

IranWire की रिपोर्ट के मुताबिक, पेजेशकियन प्रशासन के करीबी दो सूत्रों ने बताया कि 28 फरवरी को सुप्रीम लीडर के परिसर पर हुए अमेरिकी हमले में अपने पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के मारे जाने के बाद से मुजतबा खामेनेई कैबिनेट के किसी भी सदस्य से नहीं मिले हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि, ईरान के शीर्ष नेतृत्व के बीच ऐसी अफवाहें फैल रही हैं कि उनकी हालत बेहद गंभीर है और किसी भी पल उनकी मौत हो सकती है।

पेजेशकियन की कैबिनेट के करीबी एक सूत्र के अनुसार, उनकी शारीरिक हालत खराब है। सूत्र ने कहा, “अगर हमें जल्द ही उनके शहीद होने की खबर सुनने को मिले, तो हमें हैरानी नहीं होगी।”

बता दें कि ईरान के सुप्रीम लीडर का नेतृत्व संभालने के बाद से ही खामेनेई न तो सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं और न ही उन्होंने कोई भाषण दिया है। ईरान के सरकारी मीडिया के जरिए सिर्फ़ उनके नाम से लिखित बयान जारी किए गए हैं, जिससे उनकी सेहत को लेकर अटकलें और बढ़ गई हैं।

सवाल उठने के बीच ईरान ने रिपोर्टों को खारिज किया

ईरानी अधिकारियों ने पहले उन दावों को खारिज कर दिया था कि खामेनेई काम करने की हालत में नहीं हैं। उनका कहना था कि फरवरी में हुए हमले में उन्हें लगी चोटें गंभीर नहीं थीं। हालांकि, पेजेशकियन ने हाल ही में माना कि इस समय सुप्रीम लीडर से बातचीत करना “बहुत मुश्किल” है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि खामेनेई सरकार के लिए ताकत का स्रोत बने हुए हैं।

ईरानी सरकारी मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में पेजेशकियन ने कहा, “इस समय उनसे बातचीत करना बहुत मुश्किल है, लेकिन किसी भी हाल में, उनकी मौजूदगी हमारे लिए ताकत का बहुत बड़ा स्रोत है ताकि हम अपना काम जारी रख सकें।”

उन्होंने खामेनेई का बचाव भी किया और कहा कि उन्होंने उनके साथ सार्थक बैठकें की हैं। उन्होंने खामेनेई की सोच को “बहुत ठोस तर्क” वाली बताया।

उनकी गैर-मौजूदगी से लीडरशिप को लेकर अटकलें तेज

खामेनेई के लंबे समय से सार्वजनिक रूप से दिखाई न देने के कारण क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय जानकारों के बीच अटकलें तेज हो गई हैं, खासकर ऐसे समय में जब ईरान अमेरिका और इजराइल के साथ तनावपूर्ण स्थिति में है।

बता दें कि पहले आई रिपोर्टों में दावा किया गया था कि हमलों के दौरान उन्हें गंभीर चोटें आई थीं, जबकि ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वे अब भी देश के कामकाज की देखरेख कर रहे हैं।

वहीं, पश्चिमी और विपक्षी खुफिया सूत्रों ने भी अक्सर यह संकेत दिया है कि हमलों के दौरान उन्हें गंभीर या ऐसी चोटें आईं जिनसे उनका चेहरा या शरीर बुरी तरह प्रभावित हुआ।

गौरतलब है कि ईरानी नेता के सार्वजनिक रूप से सामने न आने और लिखित बातचीत पर निर्भरता के कारण, उनकी सेहत और शासन चलाने की क्षमता को लेकर सवाल क्षेत्रीय चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं।

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Donald Trump: ‘हमारे पास हथियारों की कमी नहीं’ ट्रंप ने अमेरिकी मिसाइलों की कमी की खबरों को किया खारिज, कहा- ईरान के साथ जल्द होगा समझौता

Donald Trump Statement: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को उन खबरों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि ईरान के साथ महीनों के टकराव के बाद अमेरिका के पास अहम मिसाइलों का स्टॉक कम हो गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सेना के पास हथियारों की पर्याप्त आपूर्ति है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि कुछ हथियारों का स्टॉक “थोड़ा कम” हो गया है।

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि पेंटागन (अमेरिकी रक्षा विभाग) के पास अभी भी हथियारों का पर्याप्त भंडार है। उन्होंने उन मीडिया रिपोर्टों को भी खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि ईरान के साथ पांच महीने के संघर्ष के दौरान देश ने अपनी सटीक मारक क्षमता वाली लंबी दूरी की मिसाइलों का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है।

ट्रंप ने हथियारों की कमी के दावों को किया खारिज

हथियारों की व्यापक कमी के दावों को खारिज करते हुए, उन्होंने माना कि कुछ तरह के हथियारों की सप्लाई दूसरों की तुलना में कम थी। उन्होंने कहा, “कुछ मामलों में सप्लाई थोड़ी कम है।”

हालांकि, उन्होंने बड़े स्तर पर हथियारों की कमी की खबरों को खारिज करते हुए माना कि हथियारों की सप्लाई दूसरों की तुलना में कम थी। उन्होंने कहा, कुछ मामलों में सप्लाई थोड़ी कम है।”

उन्होंने कहा कि अमेरिका “बहुत अच्छी स्थिति” में है और जaर देकर कहा, “हमारे पास सचमुच भारी मात्रा में गोला-बारूद है।”

रक्षा कंपनियां प्रोडक्शन बढ़ा रही हैं

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि रक्षा कंपनियां अपना प्रोडक्शन बढ़ा रही हैं, जिसमें पैट्रियट और टॉमहॉक मिसाइलें बनाने के लिए नई सुविधाएं तैयार करना भी शामिल है। उन्होंने कहा, “हम हमेशा और ज्यादा चाहते हैं। हमारे पास और ज्याद होना चाहिए।”

वहीं, कई अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान के साथ चले युद्ध के दौरान पेंटागन ने अपनी वैश्विक मिसाइल भंडार का एक बड़ा हिस्सा इस्तेमाल किया है। इनमें बेहद सटीक मारक क्षमता वाली लंबी दूरी की मिसाइलें भी शामिल हैं।

ट्रंप का कहना है कि ईरान के साथ युद्ध जल्द ही खत्म हो जाएगा

ट्रंप ने भरोसा जताया कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध जल्द ही खत्म हो जाएगा।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह बहुत जल्द खत्म हो जाएगा। मुझे नहीं लगता कि वे इसे ज़्यादा देर तक खींच पाएंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि वे तेहरान के साथ बातचीत में शामिल हैं। “सब ठीक चल रहा है। जल्द ही कोई समझौता हो सकता है।”

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Gift Nifty Indicator: बाजार के लिए क्या आज मंगल होगा दिन, जानें गिफ्ट निफ्टी से क्या मिल रहे है संकेत

Gift Nifty Indicator: मंगलवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में बहुत कम बदलाव के साथ शुरुआत होने की संभावना है। सोमवार को Nifty के ऑफिशियल क्लोजिंग लेवल में CAS (क्लोजिंग ऑक्शन सेशन) की वजह से आई तेजी के बाद GIFT Nifty सुस्त शुरुआत का संकेत दे रहा है। नए शुरू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के पहले दिन बेंचमार्क इंडेक्स में ज़बरदस्त तेजी देखी गई थी, लेकिन GIFT Nifty से मिल रहे संकेत बताते हैं कि ग्लोबल मार्केट से सपोर्ट मिलने के बावजूद, मार्केट की शुरुआत उस ऑक्शन से तय क्लोजिंग लेवल से नीचे हो सकती है। निवेशक इस हफ़्ते के आखिर में आने वाले रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के मॉनेटरी पॉलिसी फ़ैसले और जून तिमाही के जारी नतीजों (अर्निंग्स सीज़न) पर भी कड़ी नज़र रखेंगे।

सुबह करीब 8:10 बजे GIFT Nifty, NSE IFSC पर पिछले सेशन की क्लोजिंग से लगभग 10 अंक नीचे 24,655 पर ट्रेड कर रहा था। इससे सोमवार की जबरदस्त रैली के बाद Nifty 50 की शुरुआत के ज़्यादातर फ़्लैट रहने का संकेत मिलता है। यह शुरुआती स्तर Nifty के 24,774.30 के ऑफिशियल क्लोजिंग लेवल से भी नीचे था, जो क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के पहले दिन से प्रभावित था।

सोमवार को भारतीय इक्विटी मार्केट में लगातार चौथे सेशन में तेज़ी जारी रही। अलग-अलग सेक्टर में बड़े पैमाने पर हुई खरीदारी के सपोर्ट से Sensex 544.39 अंक या 0.70 प्रतिशत बढ़कर 78,639.03 पर पहुंच गया, जबकि Nifty 390.70 अंक या 1.60 प्रतिशत बढ़कर 24,774.30 पर बंद हुआ।

Wall Street में तेजी, एशियाई बाजारों में गिरावट

मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने से ऑयल की कीमतें तेज़ी से गिरीं और रिस्क लेने की क्षमता में सुधार हुआ, जिससे US इक्विटी मार्केट ने अगस्त की शुरुआत मज़बूती के साथ की और ग्लोबल संकेत सपोर्टिव बने रहे। Dow Jones Industrial Average 1.32 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड क्लोजिंग हाई पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 में 1.48 प्रतिशत और Nasdaq Composite में 2.13 प्रतिशत की बढ़त हुई।

यह रैली US-Iran संघर्ष में तनाव कम होने के संकेतों के बाद आई। इससे ट्रेज़री यील्ड में भी गिरावट आई और अर्निंग्स व इकोनॉमिक डेटा के लिहाज़ से व्यस्त हफ़्ते से पहले निवेशकों का भरोसा बढ़ा। मंगलवार को ग्लोबल रैली के बाद एशियाई बाज़ारों में पॉज़िटिव लेकिन सतर्क रुख देखा गया। जापान को छोड़कर एशिया-पैसिफिक शेयरों के MSCI के सबसे बड़े इंडेक्स में 0.1 प्रतिशत की मामूली बढ़त हुई, जिसमें दक्षिण कोरिया में 2.1 प्रतिशत तक की तेज़ी का अहम योगदान रहा। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 0.3 प्रतिशत गिर गया, जबकि S&P 500 फ्यूचर्स में मामूली बढ़त देखी गई।

तेज गिरावट के बाद तेल की कीमतों में सुधार

पिछले सेशन में भारी गिरावट के बाद कच्चे तेल की कीमतों में मामूली सुधार हुआ। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.7 प्रतिशत बढ़कर 84.39 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 0.7 प्रतिशत बढ़कर 80.95 डॉलर पर पहुंच गया। यह सुधार सोमवार को ब्रेंट क्रूड में 7 प्रतिशत की गिरावट के बाद आया है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच डिप्लोमैटिक प्रोग्रेस की उम्मीदों ने लंबे समय तक सप्लाई में रुकावट की चिंताओं को कम कर दिया है। हालांकि कीमतों में थोड़ी रिकवरी हुई है, लेकिन ये अभी भी पिछले हफ़्ते के हाई लेवल से काफी नीचे हैं।

इंडेक्स पर क्या होनी चाहिए रणनीति 

आज निफ्टी 50 के आउटलुक पर बात करते हुए, रेलिगेयर ब्रोकिंग में रिसर्च के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अजीत मिश्रा ने कहा कि निफ्टी 50 ने 24,400 के अहम रेजिस्टेंस ज़ोन (जो 200-दिन के DEMA के बराबर है) को साफ़ तौर पर पार करके अपने तेज़ी वाले स्ट्रक्चर को मज़बूत किया है। यह ब्रेकआउट जारी रिकवरी को और मज़बूत करता है और जल्द ही 25,000–25,200 ज़ोन की ओर बढ़ने का रास्ता खोलता है। नीचे की तरफ़, अगर प्रॉफ़िट-बुकिंग होती है, तो 24,350–24,500 का इलाका तुरंत सपोर्ट का काम कर सकता है।

आज बैंक निफ्टी के आउटलुक पर, एनरिच मनी के CEO पोनमुडी R का मानना ​​है कि बैंक निफ्टी अपनी रिकवरी को आगे बढ़ा रहा है और अपने 20, 50, 100 और 200-दिन के EMA से ऊपर आराम से ट्रेड कर रहा है, जो बैंकिंग सेक्टर में लगातार मज़बूती दिखाता है। टेक्निकली, 58,000 ज़ोन से ऊपर लगातार बने रहने से खरीदारी की रफ़्तार बढ़ सकती है और इंडेक्स 58,300–58,500 के इलाके की ओर बढ़ सकता है।

नीचे की तरफ़, 57,300–57,400 का स्तर शॉर्ट-टर्म सपोर्ट का काम करता है, जिसे ठीक नीचे 57,000 के राउंड नंबर का सहारा मिलता है। इंडेक्स को इस दायरे से ऊपर बनाए रखने से तेज़ी का मौजूदा ट्रेंड बना रहता है, जबकि 57,000 से नीचे जाने पर शॉर्ट-टर्म में प्रॉफ़िट-बुकिंग हो सकती है। कुल मिलाकर, शॉर्ट-टर्म टेक्निकल आउटलुक पॉज़िटिव बना हुआ है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।