ईरान के लिए ‘सीक्रेट हथियार’ बना रहा चीन! रिपोर्ट में हुए खुलासे से अमेरिका में हड़कंप

China Secret Support to Iran: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच चीन एक तरफ तो खुद को शांतिदूत के रूप में पेश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पर्दे के पीछे से ईरान की आर्थिक और सैन्य ताकत बढ़ाने में लगा हुआ है। एक खोजी रिपोर्ट ने इस पूरे मामले से पर्दा उठाया है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन, ईरान के लिए एक खास ‘सीक्रेट हथियार’ भी बना रहा है।

अमेरिकी अखबार ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से ईरान के रक्षा मंत्रालय को भेजे जाने वाले ‘डुअल-यूज’ पार्ट्स यानी दोहरे इस्तेमाल वाले घटकों की डिलीवरी में इस साल रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। ईरानी सीमा शुल्क डेटा, अमेरिकी अधिकारियों और इस गुप्त व्यापार से जुड़े लोगों के हवाले से आई इस रिपोर्ट से कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं। चीन और अमेरिका के शीर्ष नेताओं की मुलाकात के बीच इस खुलासे ने वाशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

चीन से क्या-क्या मिल रहा है ईरान को?

‘डुअल-यूज’ पार्ट्स वे सामान होते हैं जिनका उपयोग आम नागरिक उपकरणों के साथ-साथ खतरनाक हथियारों में भी किया जा सकता है। WSJ रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से ईरान भेजे गए सामान में ये प्रमुख चीजें शामिल हैं:

इलेक्ट्रॉनिक्स और जीपीएस ट्रैकिंग उपकरण: जो मिसाइलों की सटीक निशाना लगाने की क्षमता बढ़ाते हैं।

इलेक्ट्रिक मोटर और एयरक्राफ्ट इंजन पार्ट्स: जिनका सीधा इस्तेमाल सैन्य ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम में होता है।

रासायनिक सामग्री: जिसका इस्तेमाल बैलिस्टिक मिसाइल के फ्यूल बनाने में किया जा सकता है।

उपग्रह तस्वीरें: अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि 17 जुलाई के उस हमले से पहले और बाद में ईरान ने चीनी सैटेलाइट इमेजरी का इस्तेमाल किया, जिसमें तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए थे।

कार्गो फ्लाइट्स में अचानक उछाल: ‘महान एयर’ का संदिग्ध रोल

फ्लाइट ट्रैकिंग साइट ‘FlightRadar24’ के डेटा के मुताबिक, अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित ईरानी एयरलाइन महान एयर ने मार्च के महीने में चीन के बीजिंग, शंघाई और गुआंगझू से तेहरान के लिए हर हफ्ते सिर्फ 4 उड़ानें भरी थीं।

लेकिन अप्रैल के अंत तक यह संख्या बढ़कर 27 उड़ानें प्रति सप्ताह हो गई। सितंबर 2026 के पहले हफ्ते में महान एयर की फ्लाइट्स की संख्या 39 तक पहुंच गई। इन अधिकांश उड़ानों का इस्तेमाल यात्रियों को ले जाने के बजाय गुप्त सैन्य और तकनीकी कार्गो (हथियारों के पुर्जों) की डिलीवरी के लिए किया जा रहा था।

अमेरिकी पाबंदियों को दरकिनार कर खेल कर रहा तेल का ‘मास्टरमाइंड’

अमेरिकी पाबंदियों से पंगु हो चुकी ईरानी अर्थव्यवस्था को चीन संजीवनी दे रहा है। अमेरिकी सांसदों के अनुसार, चीन ईरान के क्रूड ऑयल एक्सपोर्ट का 80% से ज्यादा हिस्सा खुद खरीद रहा है। अमेरिकी वित्तीय पाबंदियों को चकमा देने के लिए चीनी बैंकों और छद्म कंपनियों के नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे तेहरान तक पैसा आसानी से पहुंच रहा है।

16 सितंबर को बीजिंग में हुई बैठक में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने साफ शब्दों में कहा था कि चीन और ईरान ‘व्यापक रणनीतिक भागीदार’ हैं और चीन ईरान के ‘वैध अधिकारों और हितों’ की रक्षा के लिए सहयोग मजबूत करने को तैयार है।

ट्रंप-जिनपिंग की मीटिंग के बीच अमेरिकी सियासत में भूचाल

वाशिंगटन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आगमन पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद एयरपोर्ट जाकर उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, एआई सुरक्षा और ताइवान जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी है, लेकिन अमेरिकी संसद में ईरान का मुद्दा सबसे ऊपर आ गया है।

सीनेटर एलिसा स्लॉटकिन समेत कई डेमोक्रेट नेताओं ने व्हाइट हाउस को पत्र लिखकर मांग की है कि राष्ट्रपति ट्रंप, शी जिनपिंग के सामने चीन की इस ‘सैन्य मदद’ का मुद्दा सख्ती से उठाएं। सीनेटरों ने आरोप लगाया कि चीनी कंपनियां अमेरिकी सैनिकों की हत्या और ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को जिंदा रखने में मदद कर रही हैं।

हालांकि, ट्रंप प्रशासन चीन से सीधे टकराने में थोड़ा हिचकिचा रहा है। ट्रंप पहले कह चुके हैं कि शी जिनपिंग ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वे ईरान को सीधे हथियार नहीं देंगे और वे शी पर भरोसा करते हैं।

चीन की सफाई: ‘हमारी छवि खराब करने की कोशिश’

इन गंभीर आरोपों पर चीन के विदेश मंत्रालय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजिंग ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह ‘चीन को बदनाम करने की साजिश’ है। चीन का तर्क है कि वह दोहरे उपयोग वाले सामानों के निर्यात पर सख्त नियम लागू करता है और अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले एकतरफा प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हैं।

Asian Games में यह होगी भारतीय पुरुष और महिला स्क्वैश टीम

 
आइची-नागोया में होने वाले 20वें एशियाई खेलों के लिए भारत की पुरुष स्क्वैश टीम को टॉप सीड (सबसे ऊपर) रखा गया है, जबकि टीम, सिंगल्स और मिक्स्ड डबल्स इवेंट्स के ड्रॉ की घोषणा के बाद महिला टीम को तीसरी सीडिंग मिली है।स्क्वैश प्रतियोगिता नागोया किंजो-फुटो एरिना में होगी। सिंगल्स और मिक्स्ड डबल्स इवेंट्स 23 से 27 सितंबर तक होंगे, और उसके बाद 28 सितंबर से 2 अक्टूबर तक टीम प्रतियोगिताएं होंगी।

भारत की टॉप-सीडेड पुरुष टीम, जिसमें अभय सिंह, वीर छोटरानी, वेलवन सेंथिलकुमार और सूरज चंद शामिल हैं, को कोरिया और चीन के साथ पूल ए में रखा गया है। अनाहत सिंह, तन्वी खन्ना, जोशना चिनप्पा और शमीना रियाज़ की महिला टीम पूल सी में खेलेगी, जिसमें मेज़बान जापान, चीन और ईरान भी शामिल हैं।

पुरुष सिंगल्स ड्रॉ में, अभय को दूसरी सीडिंग मिली है और वह एशियाई खेलों में भारत के पहले व्यक्तिगत स्क्वैश गोल्ड मेडलिस्ट बनने की कोशिश करेंगे। वीर छोटरानी चौथी सीड हैं, और दोनों भारतीयों को पहले राउंड में ‘बाई’ (सीधे अगले राउंड में प्रवेश) मिला है।

अनाहत, जिन्होंने हांगझाऊ में 2022 एशियाई खेलों में महिला टीम और मिक्स्ड टीम इवेंट्स में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था, महिला सिंगल्स में तीसरी सीड हैं। तन्वी सातवीं सीड हैं और अपने अभियान की शुरुआत कोरिया की दामी किम के खिलाफ करेंगी, जबकि अनाहत को दूसरे राउंड में सीधे प्रवेश (बाई) मिला है।

सिंगल्स प्रतियोगिता का महत्व इसलिए भी ज़्यादा है क्योंकि यह 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक के लिए क्वालिफिकेशन का रास्ता बनेगा। एशियाई खेलों के विजेता लॉस एंजेलिस में ओलंपिक में इस खेल की शुरुआत के लिए क्वालिफाई करने वाले पहले स्क्वैश खिलाड़ी बनेंगे।

मिक्स्ड डबल्स में, मलेशिया के आइफ़ा अज़मान और मोहम्मद शफ़ीक़ कमाल टॉप सीड हैं, जबकि भारत के वेलवन सेंथिलकुमार और जोशना चिनप्पा को तीसरी सीडिंग मिली है। सूरज कुमार चंद और शमीना रियाज़ की दूसरी भारतीय जोड़ी नौवीं सीड है। दोनों भारतीय जोड़ियों को पहले राउंड में ‘बाई’ मिली है और वे दूसरे राउंड में एक-दूसरे का सामना करेंगी।

भारत 2022 एशियाई खेलों में किए गए अपने शानदार प्रदर्शन को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा, जहाँ स्क्वैश में देश को पाँच मेडल मिले थे। पुरुष टीम और मिक्स्ड डबल्स जोड़ी ने गोल्ड मेडल जीता, जबकि सौरव घोषाल ने पुरुष सिंगल्स में सिल्वर मेडल हासिल किया। भारत ने महिला टीम और मिक्स्ड टीम इवेंट में भी ब्रॉन्ज़ मेडल जीते।हांगझाऊ में पुरुष टीम के साथ गोल्ड मेडल जीतने वाले हरिंदर पाल संधू कोच होंगे।

भारतीय टीम

पुरुष: अभय सिंह, वीर छोटरानी, वेलवन सेंथिलकुमार, सूरज चंद

महिला: अनाहत सिंह, तन्वी खन्ना, जोशना चिनप्पा, शमीना रियाज़

ईरान में अब रेयर अर्थ खोजने के लिए अपने वैज्ञानिक भेज रहा चीन! जानिए दुनिया के लिए क्या हैं इसके मायने

Iran rare earths: महत्वपूर्ण खनिजों की ग्लोबल रेस में अब चीन और अमेरिका के बीच का कंपीटिशन और तीखा होता नजर आ रहा है। दुर्लभ खनिजों यानी रेयर अर्थ के प्रोसेसिंग में अपने दबदबे को अमेरिका से चुनौती मिल रही है। इसी बीच चीन अब रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज और एक्सप्लोरेशन के लिए ईरान में अपने वैज्ञानिकों को भेजने की तैयारी कर रहा है। यह कदम दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक संबंधों को और गहरा करने के साथ-साथ जियो पॉलिटिक्स के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।

हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘फर्स्टपोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल नेचुरल साइंस फाउंडेशन ऑफ चाइना (NSFC) ने ईरान नेशनल साइंस फाउंडेशन (INSF) के साथ अपने नए जॉइंट वर्कशॉप प्रोग्राम में रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज और एक्सप्लोरेशन को शामिल किया है।

क्या है चीन और ईरान की योजना और कैसे होगी फंडिंग?

इसके तहत चीन बैठकों, आवास और घरेलू यात्रा को कवर करने के लिए हर कार्यशाला पर 30,000 युआन (लगभग $4,200) देगा। दूसरी ओर ईरान में जाने वाले चीनी रिसर्चर्स के रहने की व्यवस्था और ईरानी प्रतिभागियों की इंटरनेशनल फ्लाइट का खर्च ईरान उठाएगा। यह रेयर अर्थ पहल चीन और ईरान के बीच व्यापक वैज्ञानिक सहयोग के विस्तार का हिस्सा है।

इस वर्कशॉप प्रोग्राम में कुल 5 क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इसमें रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज और एक्सप्लोरेशन, बीमारी का पता लगाने के लिए नैनोमैटेरियल्स, प्रदूषण निगरानी, भूकंप रेजिस्टेंट कंस्ट्रक्शन और ग्रीनर मैन्युफैक्चरिंग शामिल हैं।

इसके अलावा बीते 4 जुलाई को दोनों देशों ने एक डिटेल्ड रिसर्च सेल शुरू किया है। इसके तहत 15 सहयोगी अनुसंधान परियोजनाओं को सहायता दी जाएगी। इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 23 अगस्त रखी गई है और दिसंबर के उत्तरार्ध में अंतिम चयन के बाद स्वीकृत परियोजनाएं जनवरी 2027 से शुरू होंगी। इसमें जल और ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा, हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी, सूखा व जलवायु परिवर्तन के बीच जल प्रबंधन, और कृषि व चिकित्सा बायोटेक्नोलॉजी जैसे विषय शामिल हैं।

दशक भर पुराना है दोनों देशों का वैज्ञानिक संबंध

चीन की NSFC और ईरान के नेशनल साइंस फाउंडेशन ने साल 2017 में बीजिंग में एक MoU पर हस्ताक्षर किए थे। तब से दोनों देशों ने चिकित्सा, नवीकरणीय ऊर्जा, सामग्री विज्ञान, जलवायु परिवर्तन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम किया है।

साल 2024 में दोनों देशों के बीच संयुक्त कार्यशाला कार्यक्रम शुरू हुआ था जो शुरुआत में जलवायु परिवर्तन, एआई, उन्नत सामग्री और मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित था। हालांकि अब इसमें रेयर अर्थ को शामिल किए जाने से यह साझेदारी रणनीतिक रूप से अत्यधिक महत्वपूर्ण क्षेत्र में प्रवेश कर गई है।

अमेरिका-चीन तनाव के बीच क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

रेयर अर्थ एलिमेंट्स टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील खनिज हैं। अमेरिका-चीन संबंधों में यह एक बड़ा प्रेशर पॉइंट बन चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीन के खिलाफ ट्रेड वॉर शुरू करने के बाद, बीजिंग ने रेयर अर्थ के एक्सपोर्ट पर कड़े नियम लागू कर दिए थे, जिससे कई अमेरिकी निर्माताओं के इंपोर्ट पर असर पड़ा।

इसके जवाब में अमेरिका ने अपने घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने की कोशिश तेज कर दी है। बीते 7 अगस्त को ही ट्रंप प्रशासन ने क्रिटिकल मिनरल्स और बैटरी प्रोजेक्ट्स में 3 बिलियन डॉलर के निवेश का ऐलान किया है ताकि रक्षा भंडार को फिर से भरा जा सके और चीन पर निर्भरता कम की जा सके।

दुनिया के लिए यह खबर क्यों मायने रखती है?

इस घटनाक्रम का तात्कालिक महत्व इस बात पर निर्भर नहीं करता कि ईरान आज कितना रेयर अर्थ उत्पादन कर सकता है बल्कि इस बात पर है कि चीन अपनी विश्व स्तरीय विशेषज्ञता को एक ऐसे देश में ले जा रहा है जिसके पास मूल्यवान लेकिन काफी हद तक अविकसित संसाधन मौजूद हैं। चीन के पास रेयर अर्थ के खनन, सेपरेशन और प्रसंस्करण की दुनिया की सबसे बेहतरीन तकनीक है।

चीनी वैज्ञानिकों के आने से ईरान को अपनी रेयर अर्थ क्षमता को समझने और भविष्य में घरेलू प्रसंस्करण क्षमताएं विकसित करने में मदद मिलेगी। हालांकि ईरान को एक प्रमुख रेयर अर्थ उत्पादक बनने में अभी कई साल लगेंगे, क्योंकि इसके लिए व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक भंडार स्थापित करने के साथ-साथ खनन और प्रसंस्करण इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करना होगा।

ये भी पढ़ें- हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ विवाद पर संसद में सियासी बवाल! खड़गे ने BJP पर लगाया ‘छुआछूत’ का आरोप, नड्डा ने किया पलटवार

इसके बावजूद, अमेरिका द्वारा चीन की घेराबंदी के प्रयासों के बीच चीन का ईरान जैसे देश के साथ मिलकर रणनीतिक खनिजों पर काम करना वैश्विक राजनीति और आर्थिक संतुलन के लिए एक बड़ा संकेत है।