ईरान के लिए ‘सीक्रेट हथियार’ बना रहा चीन! रिपोर्ट में हुए खुलासे से अमेरिका में हड़कंप

China Secret Support to Iran: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच चीन एक तरफ तो खुद को शांतिदूत के रूप में पेश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पर्दे के पीछे से ईरान की आर्थिक और सैन्य ताकत बढ़ाने में लगा हुआ है। एक खोजी रिपोर्ट ने इस पूरे मामले से पर्दा उठाया है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन, ईरान के लिए एक खास ‘सीक्रेट हथियार’ भी बना रहा है।

अमेरिकी अखबार ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से ईरान के रक्षा मंत्रालय को भेजे जाने वाले ‘डुअल-यूज’ पार्ट्स यानी दोहरे इस्तेमाल वाले घटकों की डिलीवरी में इस साल रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। ईरानी सीमा शुल्क डेटा, अमेरिकी अधिकारियों और इस गुप्त व्यापार से जुड़े लोगों के हवाले से आई इस रिपोर्ट से कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं। चीन और अमेरिका के शीर्ष नेताओं की मुलाकात के बीच इस खुलासे ने वाशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

चीन से क्या-क्या मिल रहा है ईरान को?

‘डुअल-यूज’ पार्ट्स वे सामान होते हैं जिनका उपयोग आम नागरिक उपकरणों के साथ-साथ खतरनाक हथियारों में भी किया जा सकता है। WSJ रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से ईरान भेजे गए सामान में ये प्रमुख चीजें शामिल हैं:

इलेक्ट्रॉनिक्स और जीपीएस ट्रैकिंग उपकरण: जो मिसाइलों की सटीक निशाना लगाने की क्षमता बढ़ाते हैं।

इलेक्ट्रिक मोटर और एयरक्राफ्ट इंजन पार्ट्स: जिनका सीधा इस्तेमाल सैन्य ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम में होता है।

रासायनिक सामग्री: जिसका इस्तेमाल बैलिस्टिक मिसाइल के फ्यूल बनाने में किया जा सकता है।

उपग्रह तस्वीरें: अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि 17 जुलाई के उस हमले से पहले और बाद में ईरान ने चीनी सैटेलाइट इमेजरी का इस्तेमाल किया, जिसमें तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए थे।

कार्गो फ्लाइट्स में अचानक उछाल: ‘महान एयर’ का संदिग्ध रोल

फ्लाइट ट्रैकिंग साइट ‘FlightRadar24’ के डेटा के मुताबिक, अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित ईरानी एयरलाइन महान एयर ने मार्च के महीने में चीन के बीजिंग, शंघाई और गुआंगझू से तेहरान के लिए हर हफ्ते सिर्फ 4 उड़ानें भरी थीं।

लेकिन अप्रैल के अंत तक यह संख्या बढ़कर 27 उड़ानें प्रति सप्ताह हो गई। सितंबर 2026 के पहले हफ्ते में महान एयर की फ्लाइट्स की संख्या 39 तक पहुंच गई। इन अधिकांश उड़ानों का इस्तेमाल यात्रियों को ले जाने के बजाय गुप्त सैन्य और तकनीकी कार्गो (हथियारों के पुर्जों) की डिलीवरी के लिए किया जा रहा था।

अमेरिकी पाबंदियों को दरकिनार कर खेल कर रहा तेल का ‘मास्टरमाइंड’

अमेरिकी पाबंदियों से पंगु हो चुकी ईरानी अर्थव्यवस्था को चीन संजीवनी दे रहा है। अमेरिकी सांसदों के अनुसार, चीन ईरान के क्रूड ऑयल एक्सपोर्ट का 80% से ज्यादा हिस्सा खुद खरीद रहा है। अमेरिकी वित्तीय पाबंदियों को चकमा देने के लिए चीनी बैंकों और छद्म कंपनियों के नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे तेहरान तक पैसा आसानी से पहुंच रहा है।

16 सितंबर को बीजिंग में हुई बैठक में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने साफ शब्दों में कहा था कि चीन और ईरान ‘व्यापक रणनीतिक भागीदार’ हैं और चीन ईरान के ‘वैध अधिकारों और हितों’ की रक्षा के लिए सहयोग मजबूत करने को तैयार है।

ट्रंप-जिनपिंग की मीटिंग के बीच अमेरिकी सियासत में भूचाल

वाशिंगटन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आगमन पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद एयरपोर्ट जाकर उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, एआई सुरक्षा और ताइवान जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी है, लेकिन अमेरिकी संसद में ईरान का मुद्दा सबसे ऊपर आ गया है।

सीनेटर एलिसा स्लॉटकिन समेत कई डेमोक्रेट नेताओं ने व्हाइट हाउस को पत्र लिखकर मांग की है कि राष्ट्रपति ट्रंप, शी जिनपिंग के सामने चीन की इस ‘सैन्य मदद’ का मुद्दा सख्ती से उठाएं। सीनेटरों ने आरोप लगाया कि चीनी कंपनियां अमेरिकी सैनिकों की हत्या और ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को जिंदा रखने में मदद कर रही हैं।

हालांकि, ट्रंप प्रशासन चीन से सीधे टकराने में थोड़ा हिचकिचा रहा है। ट्रंप पहले कह चुके हैं कि शी जिनपिंग ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वे ईरान को सीधे हथियार नहीं देंगे और वे शी पर भरोसा करते हैं।

चीन की सफाई: ‘हमारी छवि खराब करने की कोशिश’

इन गंभीर आरोपों पर चीन के विदेश मंत्रालय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजिंग ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह ‘चीन को बदनाम करने की साजिश’ है। चीन का तर्क है कि वह दोहरे उपयोग वाले सामानों के निर्यात पर सख्त नियम लागू करता है और अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले एकतरफा प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हैं।

Asian Games में भारतीय पुरुष और महिला कबड्डी टीमों ने जीते शुरुआती मुकाबले

भारतीय पुरुष कबड्डी टीम ने सोमवार को एशियाई खेल 2026 में ग्रुप ए के मुकाबले में मेजबान जापान को 49-24 से हराकर अपने खिताब को बचाने की शुरुआत की। टोकाई सिटिजन जिम्नेजियम में खेले गये इस मैच में भारत के लिए आशु मलिक और देवांक दलाल शानदार खिलाड़ी रहे।

आशु मलिक की शुरुआती सुपर रेड ने पहले हाफ का माहौल बना दिया; भारत ने इस दौरान दबदबा बनाए रखा और ब्रेक तक 31-9 की बढ़त बना ली। जापान, जो इस हाफ में दो बार ऑल-आउट हुआ, ने अपने चार पॉइंट बोनस से हासिल किए।

भारत ने दूसरे हाफ में बड़े बदलाव किए और मैच शुरू करने वाले सात खिलाड़ियों में से पांच को बदल दिया। अनुभवी पवन सहरावत, अर्जुन देशवाल और असलम इनामदार उन खिलाड़ियों में शामिल थे जिन्हें कुछ समय खेलने के लिए मैट पर उतारा गया। इस दौरान मेजबान टीम ने अधिक आक्रामक रुख अपनाया और एक समय तो भारत के केवल दो खिलाड़ी ही मैट पर बचे थे।

खेल दोबारा शुरू होने के कुछ ही देर बाद, भारत ने जापान को मैच में तीसरी बार ऑल-आउट करके 40-12 की बढ़त बना ली। हालांकि, जापान ने वापसी की और उस पॉइंट के बाद भारत से अधिक पॉइंट हासिल करके हार के अंतर को कम किया। भारत मंगलवार को इसी जगह अपने अगले ग्रुप ए मैच में दक्षिण कोरिया का सामना करेगा। आइची-नागोया 2026 एशियाई खेलों में पुरुषों का कबड्डी टूर्नामेंट 10 टीमों के बीच खेला जा रहा है, जिसमें टीमों को दो बराबर ग्रुप में बांटा गया है। भारत को ग्रुप ए में बंगलादेश, दक्षिण कोरिया, चीनी ताइपे और जापान के साथ रखा गया है।

इसके अलावा भारत की महिला टीम ने भी बांग्लादेश पर एकतरफा जीत अर्जित की।भारतीय महिला टीम ने लगभग एकतरफा अंदाज में बांग्लादेश को 42-21 से हरा दिया।

ईरानी राष्ट्रपति और ट्रंप की होगी सीधी मुलाकात! बैकफुट पर क्यों आ रहे अमेरिका और तेहरान?

Trump Iran President Meeting: करीब 7 महीनों से जारी भीषण युद्ध और तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्तों में एक नया मोड़ देखने को मिलने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे इस हफ्ते न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात करने के लिए ‘तैयार’ हैं।

यह संभावित मुलाकात ऐसे समय में होने की बात कही जा रही है, जब एक तरफ ईरान ने अमेरिका के सामने बातचीत की 7 शर्तें रखी हैं, तो दूसरी तरफ ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि किसी भी नए अमेरिकी हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। आइए आपको बताते हैं इस संभावित मुलाकात के पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी।

न्यूयॉर्क में कैसे हो सकती है हाई-प्रोफाइल मुलाकात?

संयुक्त राष्ट्र (UN) की महासभा में 22 से 28 सितंबर तक चलने वाली बैठकों के सिलसिले में दुनिया भर के नेता न्यूयॉर्क पहुंच रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने राष्ट्रपति मासूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची समेत पूरे ईरानी प्रतिनिधिमंडल को अमेरिका आने की अनुमति दे दी है। क्योंकि दोनों नेता एक ही छत के नीचे मौजूद होंगे, इसलिए बिना किसी अलग से बड़े शिखर सम्मेलन के भी साइडलाइन्स पर सीधी बातचीत का रास्ता खुल सकता है।

ईरान ने मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया मैसेज

ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रजाई के मुताबिक, ईरान ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के सामने बातचीत की 7 प्रमुख शर्तें रखी हैं:

  • सभी मोर्चों पर जारी युद्ध को तुरंत रोका जाए।
  • अमेरिका द्वारा फ्रीज किए गए ईरानी फंड और संपत्तियों को तुरंत बहाल किया जाए।
  • ईरान पर लगी अमेरिकी समुद्री/नौसैनिक नाकाबंदी को खत्म किया जाए।
  • कतर, तुर्की और कई अन्य मध्यपूर्वी देश इस बीच बिचौलिये की भूमिका निभा रहे हैं और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संदेश पहुंचा रहे हैं।

‘फैसले के मोड़ पर हूं’: ट्रंप की चेतावनी और 3 विकल्प

फॉक्स न्यूज से बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वे इस समय ‘डिसाइडिंग मोड’ में हैं और आने वाले दिनों में ‘बहुत कुछ बड़ा’ होने वाला है। ट्रंप के पास इस समय 3 मुख्य रास्ते मौजूद हैं:

आर्थिक दबाव: ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध जारी रखना।

सैन्य कार्रवाई: अमेरिका की ओर से सीधा हमला करना।

डिप्लोमैटिक डील: बातचीत के जरिए किसी समझौते पर पहुंचना।

अपनी सख्त बयानबाजी के लिए मशहूर ट्रंप ने ये तक कह दिया कि, ‘मेरा सवाल यह है कि मुझे पूरे देश को कब और कैसे तबाह करना है? बेहतर होगा कि वे सही व्यवहार करें।’

गल्फ देशों के साथ ट्रंप की बड़ी मीटिंग

ट्रंप न्यूयॉर्क में सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान के नेताओं से भी अलग से मुलाकात करने वाले हैं। माना जा रहा है कि जंग के अगले चरण पर कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले ट्रंप अपने खाड़ी सहयोगियों की राय सीधे तौर पर सुनना चाहते हैं।

वहीं, ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान का कहना है कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता, लेकिन वे किसी की धौंस या ताकत के आगे झुकेंगे नहीं। इसके साथ ही ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए कच्चे तेल की सप्लाई रोकने को अपने सबसे बड़े हथियार के रूप में देख रहा है।

वैसे ट्रंप की इस मुलाकात की रजामंदी का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि दोनों देशों के बीच डील पक्की हो गई है। ट्रंप की यह पुरानी कूटनीतिक रणनीति रही है। एक तरफ भारी सैन्य दबाव और सख्त जुबानी हमले, तो दूसरी तरफ टेबल पर बातचीत की खिड़की खुली रखना। अगर यह मुलाकात होती है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की कीमतों के लिहाज से इस साल का सबसे बड़ा घटनाक्रम साबित हो सकता है।

Iran-US War Update: ईरान पर घातक हमले की तैयारी में अमेरिका? ट्रंप बोले- जल्द हो सकता है बहुत बड़ा फैसला, तेहरान ने युद्ध खत्म करने के लिए रखीं 7 शर्तें

Iran-US War Update: सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका जल्द ही ईरान पर घातक हमला करने पर विचार कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वॉशिंगटन तेहरान के खिलाफ अपने अगले बड़े कदम पर गंभीरता से विचार कर रहा है। ट्रंप ने कहा कि वह फिलहाल निर्णय लेने की स्थिति में हैं। ट्रंप ने कहा कि आने वाले समय में ‘बहुत बड़ी चीजें’ हो सकती हैं। ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब ईरान ने अमेरिका के सामने युद्ध खत्म करने और बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए अपनी शर्तें रखी हैं।

ईरान ने ये मांगें मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे कतर के जरिए अमेरिका तक पहुंचाई हैं। तेहरान का कहना है कि नई बातचीत तभी संभव होगी जब लड़ाई खत्म हो और उस पर लगाए गए नौसैनिक प्रतिबंध हटाए जाएं।

ईरान के खिलाफ तीन विकल्पों का जिक्र

‘फॉक्स न्यूज’ के साथ कथित बातचीत में ट्रंप ने ईरान को लेकर अमेरिका के सामने मौजूद कई विकल्पों का जिक्र किया। उन्होंने तीन संभावित रास्ते बताए। ईरान को पूरी तरह तबाह करना, उसकी अर्थव्यवस्था को कमजोर होने देना या फिर बातचीत के जरिए समझौते तक पहुंचना। ट्रंप ने तेहरान को कड़ी चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा, “मेरा सवाल है कि मैं पूरे देश को कब और अगर जरूरत पड़ी तो कब उड़ा दूं? उन्हें बेहतर होगा कि वे सही व्यवहार करें।” ट्रंप की इस टिप्पणी से संकेत मिलता है कि अमेरिका ईरान के साथ जारी संघर्ष में सैन्य और कूटनीतिक, दोनों विकल्पों पर विचार कर रहा है।

ईरान के राष्ट्रपति से मुलाकात को तैयार ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की संभावित न्यूयॉर्क यात्रा पर भी प्रतिक्रिया दी। पेजेशकियन संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका जाने वाले हैं। जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान पेजेशकियन से मुलाकात करेंगे, तो उन्होंने कहा कि वह संभवतः इसके लिए तैयार होंगे। ईरान की अर्ध-सरकारी न्यूज एजेंसी ‘तस्नीम’ के मुताबिक, पेजेशकियन वरिष्ठ ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ अमेरिका जाने और संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अन्य देशों के नेताओं से भी मुलाकात करने की तैयारी में हैं।

हूती विद्रोहियों से भी संपर्क में अमेरिका

ट्रंप ने यमन के हूती विद्रोहियों को लेकर भी बड़ी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका की हूती समूह के साथ बातचीत जारी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल में सऊदी अरब को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए गए थे। ट्रंप के मुताबिक, हूती लड़ाकों ने अमेरिकी कर्मियों को निशाना नहीं बनाने पर सहमति जताई है।

ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं 7 शर्तें

दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए 7 शर्तें रखी हैं। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, ये शर्तें कतर के जरिए अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाई गई हैं। ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ ने रविवार को इसकी पुष्टि की। इससे एक दिन पहले ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख मोहसिन रेजाई ने भी कहा था कि कतर ने तेहरान की मांगें अमेरिका तक पहुंचा दी हैं। रेजाई ने अल जजीरा से बातचीत में बताया कि ईरान की मांगों में सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना, ईरान के फ्रीज किए गए धन को वापस करना और नौसैनिक नाकाबंदी हटाना शामिल है।

अमेरिका के सहयोगी देशों को ईरान की चेतावनी

इस बीच ईरान के केंद्रीय सैन्य कमान ने दावा किया है कि उसे ऐसी खुफिया जानकारी मिली है, जिसके मुताबिक अमेरिका तेहरान के खिलाफ एक और सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है। ईरान का आरोप है कि इस संभावित कार्रवाई में क्षेत्र के कई देश अमेरिका का समर्थन कर सकते हैं। ईरानी सेना ने अमेरिका का समर्थन करने वाले देशों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें इस मामले में ईरान की ओर से किसी तरह की नरमी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। ईरानी सैन्य कमान ने ऐसे देशों को उस गतिविधि में शामिल पक्ष माना, जिसे उसने शरारत करार दिया।

बातचीत या सैन्य कार्रवाई…अमेरिका का अगला कदम क्या होगा?

ट्रंप के बयानों और ईरान की ओर से भेजी गई शर्तों से साफ है कि दोनों देशों के बीच तनाव के बीच कूटनीतिक रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। हालांकि, तेहरान ने बातचीत के लिए कई पूर्व शर्तें रखी हैं। जबकि ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई समेत कई विकल्प खुले रखने के संकेत दिए हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि अमेरिका ईरान की सात शर्तों पर क्या प्रतिक्रिया देता है। क्या दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर लौटने के लिए कोई साझा आधार तलाश पाते हैं।

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‘मुझे लगा करियर खत्म हो गया…’; NSA अजीत डोभाल ने सुनाया वो किस्सा, जब चीनी सेना ने भारतीय एजेंटों को पकड़ लिया था

NSA Ajit Doval: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने शनिवार (19 सितंबर) को भारतीय प्रोद्यौगिकी संस्थान (IIT) रुड़की के छात्रों को संबोधित करते हुए अपने शुरुआती दिनों का एक किस्सा शेयर किया जब उन्हें लगा था कि उनका करियर समाप्त हो जाएगा। डोभाल ने बताया कि करियर के शुरुआती दिनों में उन्हें सिक्किम में तैनाती मिली जहां सीमा क्षेत्र में निगरानी के लिए भेजी गई उनकी एक टीम को चीनी सेना ने पकड़ लिया था। बाद में जांच में इसकी वजह सीमा के गलत नक्शे और स्केच होना पता चला।

उन्होंने बताया कि यह तब की बात है जब सिक्किम का भारत में विलय होने वाला था। डोभाल ने कहा कि एक युवा आईपीएस अधिकारी के रूप में वह सिक्किम में खुफिया तंत्र से जुड़े थे। उनकी जिम्मेदारी सीमा पर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखना भी थी। डोभाल ने बताया कि सीमा पार की स्थिति पर नजर रखने के लिए एक टीम को पांच-छह दिनों के मिशन पर भेजा गया था। लेकिन 10-11 दिन बीतने के बाद भी टीम वापस नहीं लौटी। इसके बाद मुख्यालय से उन्हें फोन आया और टीम के चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की हिरासत में होने की जानकारी दी गई।

‘लगा था कि उनका करियर लगभग समाप्त हो गया’

एनएसए के अनुसार, उन्हें तब लगा था कि उनका करियर लगभग समाप्त हो गया। हालांकि, उन्होंने कहा कि टीम के सदस्यों को बाद में बिना किसी नुकसान के रिहा कर दिया गया। उन्होंने बताया कि घटना की जांच कराई गई, जिसमें पाया गया कि टीम को उपलब्ध कराए गए स्केच और नक्शों में गलतियां थीं, जिसके कारण सीमा की पहचान को लेकर भ्रम पैदा हुआ। जांच में डोभाल को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया।

इसके बावजूद, उन्होंने कहा कि घटना ने उन्हें बेहद निराश और दुखी कर दिया था। डोभाल ने कहा, “मैं बहुत दुखी था। यह जीवन का वह दौर था जब आप खुद को बहुत निराश महसूस करते हैं।” NSA ने कहा कि इसी मुश्किल दौर में खुफिया ब्यूरो में उनके साथ काम करने वाले एक तिब्बती शेरपा ने उन्हें सलाह दी जिसे उन्होंने जीवनभर याद रखा। उन्होंने कहा कि शेरपा ने कहा, “ये सब मैप-रीडिंग का चक्कर है। कुछ लोग नक्शा सही पढ़ते हैं और कुछ गलत।”

24 साल बर्फ की चोटियों पर गुजारे

उन्होंने कहा कि इस शेरपा ने माउंट एवरेस्ट को आठ बार फतेह किया। 24 साल उन्होंने बर्फ की चोटियों पर गुजारे थे।डोभाल ने कहा कि शेरपा ने उन्हें जीवन के तीन मंत्र बताए। पहला-तुम कहां खड़े हो। दूसरा- तुम्हें कहां जाना है।और तीसरा- वहां जाने और वहां से आने का रास्ता क्या है। एनएसए ने कहा कि समय के साथ यह सलाह उनके लिए सिर्फ पहाड़ों में रास्ता तलाशने का तरीका नहीं रही। बल्कि जीवन को देखने का एक नजरिया बन गई।

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Saudi Arabia के ‘स्काईवास्प’ अटैक के आगे बेदम हुए हूती लड़ाके, जानें कैसे सऊदी अरब के इस सस्ते और टिकाऊ उपाय ने बदली जंग की तस्वीर

अब तक सऊदी अरब के महंगे और हाईटेक हथियार हूती लड़ाकों के गोरिल्ला अटैक के आगे बौने साबित हो रहे थे। लेकिन जब से सऊदी अरब ने जंग की पुरानी रणनीति को छोड़ कर नई रणनीति अपनाई है, तब से खाड़ी देशों के बीच जारी जंग की सूरत बदलती नजर आ रही है। हाल ही में यमन की राजधानी सना पर सऊदी अरब ने जो हमला किया, उससे हूती विद्रोहियों के पांव उखड़ गए और भागने के लिए उनके पास जमीन कम पड़ गई।

इस हमले में सऊदी अरब की मिसाइलें नहीं गरजीं, बल्कि ‘स्काईवास्प’ अटैक किया गया। इस हमले ने अटैक ने रातों-रात मध्य पूर्व के युद्ध के समीकरण को बदल कर रख दिया है। हूती विद्रोहियों के हथियार अब काम नहीं आ रहे हैं। सऊदी अरब का यह हथियार त्रिकोणीय आकार के खौफनाक ड्रोन्स हैं, जो हूतियों के ठिकानों पर तबाही मचा रहे हैं। हूती लड़ाकों की एंटी-एयरक्राफ्ट गन से ड्रोन को मार गिराने की कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं। इस हमले के बाद पूरे साना शहर में हड़कंप मच गया और हूती विद्रोहियों के कई अहम ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचने का दावा किया जा रहा है।

सऊदी अरब ने जंग में उतारे कामिकेज ड्रोन स्काईवास्प

खाड़ी देशों के बीच जारी जंग में सऊदी अरब ने बेहद विनाशकारी कामिकेज यानी ‘सुसाइड’ ड्रोन उतार दिए हैं। इनका नाम ‘स्काईवास्प’ है, जो एक तरह के कीड़े के लिए अंग्रेज में इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द वॉस्प से लिया गया है। हिंदी में इसे ततैया कहते हैं। ये सऊदी अरब का पहला स्वदेशी लंबी दूरी का सुसाइड ड्रोन है। सुसाइड ड्रोन उन हथियारों को कहा जाता है, जो मिसाइल की तरह सीधे अपने टारगेट से टकराकर खुद को भी खत्म कर लेते हैं।

ईरान के ‘शाहिद-136’ ड्रोन पर आधारित स्काईवास्प

स्काईवास्प का डिजाइन काफी हद तक ईरान के मशहूर ‘शाहिद-136’ ड्रोन से मिलता-जुलता है। शाहिद-136 का इस्तेमाल रूस-यूक्रेन युद्ध में बड़े पैमाने पर हुआ है। इसे हूती विद्रोही भी अक्सर सऊदी अरब और लाल सागर में जहाजों पर हमले के लिए इस्तेमाल करते रहे हैं। अब सऊदी अरब ने इसी से प्रेरित खुद का कामिकेज ड्रोन तैयार कर लिया है, जो दुश्मन के घर में घुसकर सटीक हमला करने में माहिर है।

सस्ता और टिकाऊ हथियार बना स्काईवास्प

एक ‘स्काईवास्प’ ड्रोन की कीमत महज करीब 35,000 डॉलर यानी लगभग 29 से 30 लाख रुपए आती है। जहां एक मिसाइल की कीमत लाखों डॉलर होती है। इस ड्रोन की मारक क्षमता करीब 1,500 किलोमीटर है। यानी सऊदी अरब अपनी सीमा से यमन के हूतियों के ठिकानों पर सटीक निशाना लगा सकता है। ये ड्रोन जीपीएस और नेविगेशन सिस्टम से पूरी तरह लैस होता है, जिससे ये दुश्मन की लोकेशन पर सटीक वार करता है और एयर डिफेंस सिस्टम को आसानी से चकमा दे सकता है।

सऊदी और अमेरिका मिलकर बनाया

स्काईवास्प सऊदी अरब का पहला स्वदेशी प्रोजेक्ट है। इसे ‘SR2Vector’ नाम की कंपनी ने बनाया है, जो सऊदी अरब और अमेरिका का एक ज्वाइंट वेंचर है।

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रूस पर ट्रंप का शिकंजा, 100% टैरिफ वाले बिल पर किया साइन, जानें भारत और चीन पर कैसे पड़ेगा असर

Russia Sanctions Bill: भारत और चीन जैसे देशों के लिए एक बड़ी और चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले नए कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस बिल से उन्हें उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं।

Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 के तहत रूस के एनर्जी सेक्टर, सीनियर अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और उन टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जिन्हें पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इन टैंकरों को आमतौर पर ‘शैडो फ्लीट’ कहा जाता है।

भारत-चीन पर कैसे पड़ेगा असर?

बुधवार को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने यह कानून 262-159 के अंतर से पास कर दिया। इससे पहले इस बिल को सीनेट से मंजूरी मिल चुकी थी। नए कानून के तहत रूस से तेल या गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े खरीदार देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत या चीन पर तुरंत 100% टैरिफ लगा दिया जाएगा। टैरिफ लगाना है या नहीं और अगर लगाना है तो किस दर पर, इसका फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे।

जानकारी के मुताबिक, इस कानून का मकसद एनर्जी एक्सपोर्ट से मॉस्को की कमाई कम करना और यूक्रेन युद्ध को लेकर उस पर दबाव बढ़ाना है।

कब लागू हो सकता है टैरिफ?

यह कानून राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के 30 दिनों के भीतर लागू हो जाएगा। इसके तहत, उन देशों से आयातित सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाना जरूरी है, जो कानून बनने से पहले के 12 महीनों में कुल मात्रा के हिसाब से रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के शीर्ष पांच खरीदार रहे हों। अगर किसी देश का रूसी गैस आयात, लागू अवधि के दौरान रूस के कुल निर्यात का 15 प्रतिशत से कम रहा हो और उसने उस आयात को कम करने के लिए “महत्वपूर्ण कदम” उठाए हों, तो उसे गैस से जुड़े शुल्कों से छूट मिलती है।

भारत ने रिश्तों पर असर पड़ने की चेतावनी दी

भारत ने वॉशिंगटन को पहले ही चेतावनी दे दी है कि नए कदमों से दोनों देशों के रिश्तों पर असर पड़ सकता है। नई दिल्ली ने कहा है कि वह एनर्जी सिक्योरिटी के लिए प्रतिबद्ध है और मार्केट की स्थितियों के आधार पर अलग-अलग सप्लायर्स से तेल खरीदना जारी रखेगी।

बता दें कि भारत, रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले दुनिया के सबसे बड़े देशों में से एक है। जबकि चीन भी एक बड़ा खरीदार है, इसलिए नए कानून के तहत दोनों देशों पर असर पड़ सकता है।

वहीं, इस कानून से ट्रंप को टैरिफ के बारे में बड़े फैसले लेने की छूट मिलती है और कुछ खास स्थितियों में छूट देने का भी प्रावधान है।

भारत के लिए यह कानून ऐसे समय में आया है, जब नई दिल्ली, रूस से तेल खरीदने को लेकर वॉशिंगटन के बढ़ते दबाव और अपनी एनर्जी की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।

शी जिनपिंग के दौरे से बढ़ सकती है टेंशन

सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप के इस कदम से ठीक पहले, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 24 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति से बातचीत के लिए वॉशिंगटन आने वाले हैं।

यह बैठक एक दशक में शी की पहली व्हाइट हाउस यात्रा होगी और इस साल दोनों नेताओं के बीच आमने-सामने की दूसरी मुलाकात होगी। इससे पहले उनकी मुलाकात मई में बीजिंग में हुई थी।

इस बैठक में व्यापार एक अहम मुद्दा हो सकता है। इसके अलावा ताइवान को लेकर तनाव, ईरान युद्ध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अमेरिका-चीन के बीच टैरिफ (आयात शुल्क) को लेकर बनी अस्थायी शांति को आगे बढ़ाने की कोशिशों पर भी चर्चा हो सकती है।

गौरतलब है कि रूस पर लगाए गए नए प्रतिबंधों वाला कानून दोनों देशों के बीच दबाव का एक और मुद्दा बन सकता है, क्योंकि चीन रूस से ऊर्जा खरीदने वाले दुनिया के सबसे बड़े देशों में शामिल है।

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रूस पर नए प्रतिबंधों वाले बिल पर ट्रंप जल्द लगाएंगे मुहर, जानें भारत पर क्या होगा इसका असर?

Russia Sanctions Bill: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस पर नए और कड़े प्रतिबंध लगाने वाले बिल पर जल्द हस्ताक्षर करने वाले हैं। इस बिल के तहत ट्रंप को भारत समेत उन देशों पर 100% तक टैरिफ (शुल्क) लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं।

अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स द्वारा इस कानून को मंजूरी दिए जाने के बाद, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने गुरुवार को ANI को बताया, “राष्ट्रपति इस बिल पर दस्तखत करने की योजना बना रहे हैं।”

बता दें कि Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 नाम के इस बिल को अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने 262-159 वोटों से पास कर दिया है। यह बिल पहले ही अमेरिकी सीनेट से मंजूर हो चुका है और अब इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर का इंतजार है।

भारत ने द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ने की चेतावनी दी

यह घटनाक्रम तब हुआ जब विदेश मंत्रालय ने कहा कि वॉशिंगटन को बता दिया गया है कि रूसी तेल की खरीद से जुड़े टैरिफ का असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है।

नई दिल्ली ने कहा कि वह ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए “पूरी तरह प्रतिबद्ध” है और बाजार की स्थितियों के आधार पर अलग-अलग विक्रेताओं से सप्लाई लेना जारी रखेगी।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “भारत ने भी अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का अपना इरादा साफ कर दिया है।”

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है और सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए रूसी कच्चा तेल खरीदता रहा है।

बता दें कि प्रस्तावित बिल के तहत ट्रंप को रूस से ऊर्जा खरीदने वाले बड़े देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की बड़ी शक्ति मिल सकती है। भारत और चीन ऐसे देशों में शामिल हैं, जिन पर यह टैरिफ लगाया जा सकता है। हालांकि, इस बिल में भारत पर 100% टैरिफ अपने आप लगाने का प्रावधान नहीं है।

ट्रेड बातचीत पर नया दबाव

इस कदम से भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड बातचीत भी मुश्किल में पड़ सकती है। अमेरिका, भारतीय सामान के एक्सपोर्ट के लिए सबसे बड़ी जगह है। अप्रैल-अगस्त के दौरान अमेरिका को होने वाला भारतीय सामान का एक्सपोर्ट बढ़कर 42.79 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 40.39 अरब डॉलर था।

रॉयटर्स के सूत्रों के मुताबिक, भारतीय रिफाइनरियों ने सितंबर और अक्टूबर के लिए रूसी क्रूड का इंतजाम पहले ही कर लिया है।

भारतीय रिफाइनरियां वॉशिंगटन के साथ बातचीत करना चाहते हैं, जिसमें संभावित छूट या कोटा शामिल हो सकता है। उनका कहना है कि रूसी सप्लाई में कटौती से लागत बढ़ सकती है, खासकर ऐसे समय में जब ग्लोबल ऑयल मार्केट पहले से ही दबाव में है।

वहीं, भारत-अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता अभी भी बिना किसी नतीजे के चल रही है और दोनों पक्ष समझौते तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

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BRICS Summit: 11 से 13 सितंबर तक पीएम मोदी की ‘डिप्लोमैटिक मैराथन’! पुतिन से शी जिनपिंग तक इस खास लिस्ट के सारे ताकतवर नाम जानिए

Brics Summit: भारत की मेजबानी में 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान जबर्दस्त कूटनीतिक हलचल दिखने वाली है। इस ऐतिहासिक सम्मेलन में भाग लेने के लिए दुनियाभर से 11 सदस्य देशों, 10 पार्टनर देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के शीर्ष नई दिल्ली पहुंच चुके हैं या पहुंच रहे हैं।

इस सम्मेलन के ग्लोबल एजेंडे के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 11 से 13 सितंबर के दौरान वैश्विक नेताओं के साथ बड़े पैमाने पर द्विपक्षीय मुलाकातें करेंगे। इस बीच पीएम मोदी ने X पर पोस्ट करते हुए इस सम्मेलन में दुनिया भर की भलाई को ध्यान में रखते हुए सार्थक चर्चा होने की उम्मीद भी जताई है।

आइए जानते हैं ब्रिक्स सम्मेलन के संदर्भ में 11 से 13 सितंबर के बीच पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू की द्विपक्षीय बैठकों का पूरा शेड्यूल क्या है और किन दिग्गज नेताओं से मुलाकात होने वाली है-

11 सितंबर: बैठकों के पहले दिन का शेड्यूल

सम्मेलन के औपचारिक आगाज से एक दिन पहले ही 11 सितंबर से उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकों का दौर शुरू हो रहा है

पुतिन के साथ बैठक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता।

पेजशिकियान के साथ बैठक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच मुलाकात।

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख से मुलाकात: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस की बैठक।

12 सितंबर: शी जिनपिंग समेत दिग्गज नेताओं से मुलाकात

12 सितंबर को ब्रिक्स सम्मेलन के मेन सेशन के साथ-साथ पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू कई राष्ट्रप्रमुखों से महत्वपूर्ण द्विपक्षीय चर्चा करेंगे-

इथियोपिया: पीएम नरेंद्र मोदी की इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के साथ बैठक।

मलेशिया: पीएम मोदी की मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ बातचीत।

यूएई (अबू धाबी): पीएम मोदी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नहयान की मुलाकात।

वियतनाम: पीएम मोदी की वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग के साथ बैठक।

ईरान: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की औपचारिक मुलाकात।

चीन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय बैठक।

13 सितंबर: आखिरी दिन की कूटनीतिक मैराथन

सम्मेलन के अंतिम दिन यानी 13 सितंबर को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक नेताओं के साथ बैक-टू-बैक बैठकों का दौर जारी रहेगा-

कजाकिस्तान: पीएम मोदी की कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव के साथ बैठक।

फिलिपिंस: पीएम मोदी और फिलिपिंस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर की मुलाकात।

मिस्र: पीएम मोदी की मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी के साथ चर्चा।

दक्षिण अफ्रीका: पीएम मोदी और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति मातामेला सिरिल रामाफोसा की बैठक।

बुरुंडी: पीएम मोदी की बुरुंडी के राष्ट्रपति एवरिस्ट नदाहिशिमिये के साथ बातचीत।

नाइजीरिया: पीएम मोदी और नाइजीरिया के उपराष्ट्रपति सेनेटर कासिम शेट्टिमा की मुलाकात।

युगांडा: पीएम मोदी की युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो के साथ द्विपक्षीय बैठक।

11 से 13 सितंबर तक चलने वाली इन मैराथन मुलाकातों के जरिए भारत फूड और एनर्जी सिक्योरिटी, सप्लाई चेन को मजबूत बनाने, व्यापार, प्रौद्योगिकी और ग्लोबल गवर्नेंस में सुधार जैसे मुद्दों पर दुनिया के प्रमुख देशों के साथ आपसी सहयोग को नई दिशा देने की तैयारी में है।

अमेरिका कर रहा है DMK के वादे की नकल! श्रीधर वेम्बू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कैश स्कीम पर क्या बोले?

Share Market Crash: US-Iran War की आंच में 354 प्वाइंट्स झुलसा Sensex, इन 5 वजहों से Nifty आया 23800 के नीचे

Share Market Crash: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की आंच में एक बार फिर स्टॉक मार्केट झुलस गया। इसकी आंच में फिसलकर सेंसेक्स 354 प्वाइंट्स टूट गया तो निफ्टी भी टूटकर 23800 के नीचे आ गया। हालांकि ब्रोडर लेवल पर मिला-जुला रुझान है और स्मॉलकैप स्पेस में थोड़ी रौनक है। फिलहाल निफ्टी मिडकैप 100 में गिरावट है तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 में मजबूती दिख रही है। अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 10:43 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 330.92 प्वाइंट्स यानी 0.43% की गिरावट के साथ 76,184.51 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 102.65 प्वाइंट्स यानी 0.43% की फिसलन के साथ 23,795.05 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 354.00 प्वाइंट्स टूटकर 76,161.43 और निफ्टी 109.70 प्वाइंट्स गिरकर 23,788.00 तक आ गया था।

Share Market Crash: ये है वजह

कच्चे तेल में उबाल

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की बढ़ती आंच में कच्चा तेल फिर उबल पड़ा। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स उछलकर प्रति बैरल $97 के करीब पहुंचा तो मार्केट पर दबाव पड़ा। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की बात करें तो अमेरिकी नौसेना के दो जहाजों पर ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलें दागी तो अमेरिका ने भी शनिवार को ईरान के तीन टैंकरों पर हमला किया। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली

शुक्रवार 4 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने लगातार दूसरे कारोबारी दिन नेट बिकवाली की तो मार्केट पर दबाव पड़ा। FIIs यानी विदेशी निवेशकों ने शुक्रवार को ₹3111.94 करोड़ और गुरुवार को ₹2345.87 करोड़ के शेयरों की नेट बिक्री की।

India VIX में उछाल

मार्केट की घबराहट को मापने वाले वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया विक्स में उछाल से मार्केट पर दबाव पड़ा। फिलहाल यह 5.22% की बढ़त के साथ 11.24 पर है। इसके अधिक होने का मतलब शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी बढ़ने की आशंका और कम होने का मतलब शॉर्ट टर्म में उठा-पटक कम होने की संभावना है।

आईटी, मेटल और सरकारी बैंकिंग स्टॉक्स का भारी दबाव

मार्केट पर आज आईटी और मेटल कंपनियों के साथ-साथ सरकारी बैंकों ने भारी दबाव बनाया है। निफ्टी आईटी फिलहाल करीब 2% कमजोर है तो निफ्टी मेटल में भी 1% से अधिक कमजोरी है और निफ्टी पीएसयू बैंक भी करीब 1% टूट गया है।

टेक्निकल आउटलुक

जियोजीत इंवेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स का कहना है कि 23800 के ऊपर निफ्टी फिर संभलने की कोशिश कर सकता है, लेकिन ऊपर की तरफ 24,150-24215 का जोन बड़ी रुकावट बना हुआ है। आनंद के मुताबिक नीचे की तरफ अगर 23800 का लेवल कायम नहीं रह पाता है तो इसमें और गिरावट देखने को मिल सकती है और पहला टारगेट 23570 हो सकता है।

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