कार्नी को बुलाने का क्या अर्थ

भारत सरकार कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को अगले साल गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित करने पर विचार कर रही है। जानकार सूत्रों के हवाले से यह खबर आई है कि अगले साल 26 जनवरी को कार्नी को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया जा सकता है। कहा जा रहा है कि वे कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हो सकते हैं। अगर भारत यह फैसला करता है और कार्नी तैयार होते हैं तो यह एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हो जाएगा।

ध्यान रहे मार्क कार्नी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ अभियान छेड़ा है। उन्होंने ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ अमेरिका पर टैरिफ लगाया है। कार्नी ने डॉलर टू डॉलर टैरिफ लगाने का ऐलान किया। यानी जितना अमेरिका टैरिफ लगाएगा उतना ही कनाडा भी लगाएगा। इससे पहले ट्रंप ने कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य कहना शुरू कर दिया था। जस्टिन ट्रूडो के साथ ट्रंप का विवाद शुरू हुआ था जो अभी तक चल रहा है। ट्रंप का विरोध करके ही कार्नी चुनाव जीते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप का रवैया देखने के बाद कार्नी ने यूरोपीय देशों के साथ अपने व्यापारिक व कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने का प्रयास शुरू किया है। वे नई संधियां कर रहे हैं। भारत का उनको बुलाना अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के लिए बड़ा संदेश होगा।

Market Outlook : भारी गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 29 सितंबर को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

Market Outlook : 28 सितंबर को भारतीय इक्विटी इंडेक्स कमजोरी के साथ बंद हुए और निफ्टी 22,800 के नीचे चला गया। ट्रेडिंग सेशन के अंत में सेंसेक्स 1,124.02 अंक या 1.52 प्रतिशत गिरकर 72,771.72 पर और निफ्टी 360.25 अंक या 1.56 प्रतिशत गिरकर 22,780.25 पर बंद हुआ। आज लगभग 1214 शेयरों में बढ़त हुई, 2905 शेयरों में गिरावट आई और 166 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज़्यादा गिरावट वाले शेयरों में जियो फाइनेंशियल,टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स,टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स,अदाणी एंटरप्राइजेज और अदाणी पोर्ट्स शामिल रहे। जबकि बढ़त वाले शेयरों में डॉ.रेड्डीज लैब्स और इंफोसिस शामिल रहे।

सभी सेक्टर इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। PSU बैंक इंडेक्स 3% और टेलीकॉम इंडेक्स 2% नीचे बंद हुआ। जबकि एनर्जी,इंफ्रा,FMCG,रियल्टी,प्राइवेट बैंक, मेटल और ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 1% से ज़्यादा की गिरावट आई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.7 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 1.8 प्रतिशत गिरा।

बोनान्ज़ा के रिसर्च एनालिस्ट बालाजी राव मुदिली ने कहा कि आज बाजार में भारी गिरावट देखी गई। निफ़्टी 22,780.25 (1.56% नीचे) पर और सेंसेक्स 72,771.21 (1.52% नीचे) पर बंद हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के ईरान के प्रस्ताव को ठुकरा दिया,जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उछाल आया। इससे बाजार पर दबाव बना। साथ ही,बाजार को उम्मीद है कि अक्टूबर की बैठक में अमेरिका में ब्याज दरों में फिर से बढ़ोतरी हो सकती है। ब्याज दरें बढ़ने की संभावना के चलते सोने और चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावट आई है। ये लगभग 3.36% और 5.29% नीचे आए हैं। इंडेक्स के नजरिए से देखें तो सभी इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए,जिनमें बैंक,मेटल,रियल्टी और ऑयल एंड गैस सेक्टर में सबसे ज़्यादा गिरावट देखी गई।

बॉन्ड यील्ड में तेजी, रुपये में कमज़ोरी, RBI द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की बढ़ती संभावना और बैंकिंग सेक्टर में नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) घटने की उम्मीद के कारण बड़े बैंकों के शेयरों पर भारी दबाव बना हुआ है। आज बैंक-निफ्टी में 1.99% की गिरावट दर्ज की गई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ़ रिसर्च,विनोद नायर ने कहा कि बाजार के एक अहम साइकोलॉजिकल सपोर्ट लेवल को तोड़ने के साथ ही मंदड़ियों का दबदबा बना रहा। यह ग्लोबल मैक्रो हालात बिगड़ने के साथ ही निवेशकों में बढ़ती सावधानी की भावना को दिखाता है। अमेरिका द्वारा सीज़फायर के प्रस्ताव को ठुकराने से चिंताएं बढ़ गई हैं। पश्चिम एशिया में तनाव उम्मीद से ज़्यादा समय तक बना रह सकता है। इससे निकट भविष्य में कूटनीतिक समाधान की संभावना कम हो गई है और लंबे समय तक सप्लाई में रुकावट और कमोडिटी की कीमतें बढ़ने का जोखिम बढ़ गया है।

वहीं,अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से भारत और अमेरिका के बीच यील्ड का अंतर कम हो रहा है,जिससे विदेशी फंडों की निकासी हो सकती है और बाज़ार का मूड सतर्क बना रह सकता है। फेड द्वारा ब्याज दरें और बढ़ाने की बढ़ती आशंका के कारण सभी सेक्टर में बिकवाली का दबाव देखा गया। इसके अलावा, RBI के आगामी पॉलिसी से पहले बाजार सतर्क रह सकते हैं। निकट भविष्य में ग्लोबल लिक्विडिटी की स्थिति,बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव,तेल की कीमतें और पॉलिसी से जुड़े संकेत बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।

कोटक सिक्योरिटीज में हेड इक्विटी रिसर्च, श्रीकांत चौहान का कहना है कि आज बेंचमार्क इंडेक्स में बड़ी गिरावट आई। निफ्टी 360 अंक नीचे बंद हुआ,जबकि सेंसेक्स 1124 अंक गिर गया। सभी अहम सेक्टर इंडेक्स नेगेटिव दायरे में रहे,जिसमें PSU बैंक इंडेक्स में सबसे ज़्यादा 3.15 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।

टेक्निकल तौर पर कमजोर शुरुआत के बाद निफ्टी 23,000 के स्तर से नीचे फिसल गया और इस गिरावट के बाद बिकवाली का दबाव बढ़ गया। इसके अलावा, डेली चार्ट पर’बेयरिश कैंडल’और इंट्राडे चार्ट पर’लोअर-टॉप फॉर्मेशन’मौजूदा स्तरों से और कमजोरी आने का संकेत दे रहे हैं।

श्रीकांत चौहान का मानना ​​है कि मार्केट का शॉर्ट-टर्म ट्रेंड कमज़ोर बना हुआ है। हालांकि,कुछ समय के लिए’ओवरसोल्ड’पोजीशन के कारण,हम मौजूदा स्तरों से एक तेज’पुलबैक रैली’देख सकते हैं। डे ट्रेडर्स के लिए 22,800 का स्तर अहम है। इस स्तर से नीचे सेंटीमेंट कमजोर बने रहने की संभावना है,जिसमें 22,650–22,550 पर सपोर्ट मिलेगा। ऊपर की तरफ,22,800 के स्तर से ऊपर जाने पर निफ्टी 23,000–23,050 की ओर उछाल दिखा सकता है।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि निफ्टी हल्की गिरावट (गैप-डाउन) के साथ खुला और उस पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया,जिससे यह 23,300 के अहम साइकोलॉजिकल लेवल से नीचे आ गया। कमजोर शुरुआत से पता चलता है कि ऊपरी लेवल पर सेलर अभी भी एक्टिव हैं,जिससे निकट भविष्य का टेक्निकल स्ट्रक्चर खराब है। ऊपर की तरफ,23,100–23,200 का दायरा तत्काल रेजिस्टेंस बैंड का काम कर सकता है। अगर निफ्टी लगातार 23,200 के ऊपर बना रहता है,तो इससे कुछ राहत मिल सकती है और 23,300–23,400 के लेवल तक रिकवरी में मदद मिल सकती है। हालांकि,अगर यह इस रेजिस्टेंस बैंड के नीचे ही ट्रेड करता रहा तो इंडेक्स पर और बिकवाली का दबाव बन सकता है।

नीचे की तरफ 22,800 का लेवल अहम सपोर्ट बना हुआ है,जिस पर नज़र रखनी होगी। अगर यह 22,800–22,700 के दायरे से नीचे जाता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और इंडेक्स और निचले स्तरों पर जा सकता है। मोमेंटम इंडिकेटर और कमज़ोर हुए हैं। RSI 30 के आसपास है,जो बताता है कि मोमेंटम काफी कमजोर है और यह’ओवरसोल्ड’जोन के करीब है। बाजार का बड़ा तकनीकी ढांचा भी कमजोर बना हुआ है और इंडेक्स अहम मूविंग एवरेज से नीचे कारोबार कर रहा है। कुल मिलाकर,तकनीकी आउटलुक अधिक मंदी वाला हो गया है।

 

Market Mayhem : जियोपॉलिटकल संकट के बाद अब महाराष्ट्र के सूखे ने बढ़ाई टेंशन, निफ्टी करीब 5 महीने से ज्यादा के निचले स्तर पर

 

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ईरानी राष्ट्रपति और ट्रंप की होगी सीधी मुलाकात! बैकफुट पर क्यों आ रहे अमेरिका और तेहरान?

Trump Iran President Meeting: करीब 7 महीनों से जारी भीषण युद्ध और तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्तों में एक नया मोड़ देखने को मिलने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे इस हफ्ते न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात करने के लिए ‘तैयार’ हैं।

यह संभावित मुलाकात ऐसे समय में होने की बात कही जा रही है, जब एक तरफ ईरान ने अमेरिका के सामने बातचीत की 7 शर्तें रखी हैं, तो दूसरी तरफ ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि किसी भी नए अमेरिकी हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। आइए आपको बताते हैं इस संभावित मुलाकात के पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी।

न्यूयॉर्क में कैसे हो सकती है हाई-प्रोफाइल मुलाकात?

संयुक्त राष्ट्र (UN) की महासभा में 22 से 28 सितंबर तक चलने वाली बैठकों के सिलसिले में दुनिया भर के नेता न्यूयॉर्क पहुंच रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने राष्ट्रपति मासूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची समेत पूरे ईरानी प्रतिनिधिमंडल को अमेरिका आने की अनुमति दे दी है। क्योंकि दोनों नेता एक ही छत के नीचे मौजूद होंगे, इसलिए बिना किसी अलग से बड़े शिखर सम्मेलन के भी साइडलाइन्स पर सीधी बातचीत का रास्ता खुल सकता है।

ईरान ने मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया मैसेज

ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रजाई के मुताबिक, ईरान ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के सामने बातचीत की 7 प्रमुख शर्तें रखी हैं:

  • सभी मोर्चों पर जारी युद्ध को तुरंत रोका जाए।
  • अमेरिका द्वारा फ्रीज किए गए ईरानी फंड और संपत्तियों को तुरंत बहाल किया जाए।
  • ईरान पर लगी अमेरिकी समुद्री/नौसैनिक नाकाबंदी को खत्म किया जाए।
  • कतर, तुर्की और कई अन्य मध्यपूर्वी देश इस बीच बिचौलिये की भूमिका निभा रहे हैं और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संदेश पहुंचा रहे हैं।

‘फैसले के मोड़ पर हूं’: ट्रंप की चेतावनी और 3 विकल्प

फॉक्स न्यूज से बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वे इस समय ‘डिसाइडिंग मोड’ में हैं और आने वाले दिनों में ‘बहुत कुछ बड़ा’ होने वाला है। ट्रंप के पास इस समय 3 मुख्य रास्ते मौजूद हैं:

आर्थिक दबाव: ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध जारी रखना।

सैन्य कार्रवाई: अमेरिका की ओर से सीधा हमला करना।

डिप्लोमैटिक डील: बातचीत के जरिए किसी समझौते पर पहुंचना।

अपनी सख्त बयानबाजी के लिए मशहूर ट्रंप ने ये तक कह दिया कि, ‘मेरा सवाल यह है कि मुझे पूरे देश को कब और कैसे तबाह करना है? बेहतर होगा कि वे सही व्यवहार करें।’

गल्फ देशों के साथ ट्रंप की बड़ी मीटिंग

ट्रंप न्यूयॉर्क में सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान के नेताओं से भी अलग से मुलाकात करने वाले हैं। माना जा रहा है कि जंग के अगले चरण पर कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले ट्रंप अपने खाड़ी सहयोगियों की राय सीधे तौर पर सुनना चाहते हैं।

वहीं, ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान का कहना है कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता, लेकिन वे किसी की धौंस या ताकत के आगे झुकेंगे नहीं। इसके साथ ही ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए कच्चे तेल की सप्लाई रोकने को अपने सबसे बड़े हथियार के रूप में देख रहा है।

वैसे ट्रंप की इस मुलाकात की रजामंदी का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि दोनों देशों के बीच डील पक्की हो गई है। ट्रंप की यह पुरानी कूटनीतिक रणनीति रही है। एक तरफ भारी सैन्य दबाव और सख्त जुबानी हमले, तो दूसरी तरफ टेबल पर बातचीत की खिड़की खुली रखना। अगर यह मुलाकात होती है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की कीमतों के लिहाज से इस साल का सबसे बड़ा घटनाक्रम साबित हो सकता है।

Jensen Huang: ट्रंप ने लाइव पैनल में Nvidia CEO को लगाया फोन, बोले- ‘अगले 25 साल का तेल हैं डेटा सेंटर’

Jensen Huang News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार (14 सितंबर) को उस वक्त सबको चौंका दिया, जब उन्होंने एक लाइव पैनल चर्चा के दौरान अमेरिका की दिग्गज सेमीकंडक्टर कंपनी Nvidia के CEO जेन्सेन हुआंग को फोन कर दिया। लॉस एंजिल्स में आयोजित All-In समिट में हुआ यह फोन कॉल चर्चा का प्रमुख आकर्षण बन गया। बातचीत के दौरान ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बढ़ती चिंताओं को खारिज करते हुए इसे एक तरह का ‘होक्स’ यानी झूठा डर बताया।

पैनल चर्चा के दौरान हुआ यह फोन कॉल ऐसे समय में आया है, जब AI के तेजी से विकास और इससे जुड़े संभावित खतरों को लेकर टेक इंडस्ट्री में बहस तेज है। कुछ एक्सपर्ट और AI कंपनियों के कर्मचारी विकास की रफ्तार धीमी करने की मांग कर रहे हैं।

AI की रफ्तार धीमी करने की मांग पर ट्रंप ने उठाए सवाल

फोन पर ट्रंप ने AI के विकास की रफ्तार कम करने की कोशिशों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि AI को धीमा करने की कोशिश के पीछे राजनीतिक हित हो सकते हैं या फिर यह चीन के हित में जा सकता है। ट्रंप ने इस बहस को लेकर कहा कि AI के विकास को रोकने की कोशिश उन लोगों के हाथ मजबूत कर रही है, जो इसे आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहते। Nvidia CEO ने भी ट्रंप की बात से सहमति जताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने इस जटिल मुद्दे को सही तरीके से समझा है।

AI सुरक्षा को लेकर चिंता जताने वाले रिसर्चर की भी तारीफ

दिलचस्प बात यह रही कि AI के खतरों को लेकर चिंता जताने वाले लोगों की आलोचना के बावजूद Huang ने Anthropic के उस रिसर्चर की तारीफ की, जिसने इन चिंताओं के कारण कंपनी से इस्तीफा दिया। Anthropic के रिसर्चर जेकब कॉक्सन ने AI के संभावित खतरों को लेकर चिंता जताते हुए कंपनी छोड़ दी थी। Huang ने उन्हें अपनी चिंताओं को सामने रखने के लिए साहसी बताया। उन्होंने कहा कि कंपनियों के भीतर व्हिसलब्लोअर्स यानी गंभीर मुद्दों की जानकारी सामने लाने वाले कर्मचारियों की बात को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

हालांकि Huang ने यह भी कहा कि मौजूदा बहस ने AI को लेकर एक गलत विकल्प खड़ा कर दिया है। जैसे या तो तेजी से AI का विकास किया जाए या फिर AI की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उनके मुताबिक दोनों के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।

AI को लेकर टेक इंडस्ट्री में बढ़ी बहस

AI के मानवता के लिए संभावित खतरे को लेकर हाल के दिनों में चर्चा काफी तेज हुई है। जेकब कॉक्सन के इस्तीफे के बाद यह बहस और बढ़ गई। Coxon ने आरोप लगाया था कि Anthropic और OpenAI AI को लेकर ऐसे प्रयोग कर रहे हैं, जिनके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

इसके बाद Anthropic के CEO डारियो अमोदेई ने शनिवार को करीब 3,800 शब्दों का एक लेख प्रकाशित किया, जिसमें AI के विकास की गति को नियंत्रित करने का प्रस्ताव रखा गया। इस विचार का समर्थन OpenAI CEO सैम ऑल्टमैन और SpaceX CEO एलॉन मस्क ने भी किया।

AI खर्च धीमा होने की आशंका से टेक शेयरों में गिरावट

AI को लेकर बढ़ती चिंताओं का असर अमेरिकी शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। सोमवार को टेक कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई, क्योंकि निवेशकों को आशंका है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाला खर्च भविष्य में धीमा पड़ सकता है। दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल Nvidia के शेयरों में सोमवार को 3.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Nvidia के चिप्स का इस्तेमाल AI मॉडल को चलाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है। AI इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से कंपनी को जबरदस्त फायदा मिला है।

डेटा सेंटर निर्माण के बड़े समर्थक हैं ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार अमेरिका में नए डेटा सेंटर बनाने की वकालत करते रहे हैं। हालांकि कई अमेरिकी राज्यों में डेटा सेंटर परियोजनाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध और परमिट से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही हैं। ट्रंप ने उन अमेरिकी राज्यों की आलोचना की, जो नए डेटा सेंटर बनाने के लिए परमिट देने से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि डेटा सेंटर लोगों और राज्यों के लिए बड़ी संपत्ति और कमाई का जरिया बन सकते हैं।

‘अगले 20-25 साल का तेल हैं डेटा सेंटर’

ट्रंप ने डेटा सेंटर की अहमियत बताते हुए कहा कि ये आने वाले दशकों में अमेरिका की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने डेटा सेंटर को अगले 20 से 25 वर्षों का तेल करारा देते हुए कहा कि इसका महत्व इंटरनेट से भी बड़ा हो सकता है। AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सेंटर की मांग तेजी से बढ़ रही है। AI मॉडल को चलाने के लिए बड़ी मात्रा में कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है, जिसके लिए बड़े और अत्याधुनिक डेटा सेंटर जरूरी हैं।

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