Tata Sons AGM: टाटा संस में चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल की असली लड़ाई अभी बाकी, शेयरहोल्डर्स के वोट पर टिकी नजर

Tata Sons AGM: एन चंद्रशेखरन ने 17 सितंबर को टाटा संस के बोर्डरूम में वोट जीत लिया था। लेकिन उनका बतौर CEO तीसरा कार्यकाल अभी पक्का नहीं है। अब असली फैसला टाटा संस की सालाना आम बैठक यानी AGM में होगा। यहां शेयरहोल्डर्स वोट करेंगे।

बोर्ड के वोट और शेयरहोल्डर्स के वोट में बड़ा फर्क है। बोर्डरूम में चंद्रशेखरन के पक्ष में फैसला हो चुका है। लेकिन AGM का वोट अभी खुला है। अगले कुछ हफ्ते इस पूरे मामले में काफी अहम रहने वाले हैं।

महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर भी टाटा ट्रस्ट्स के विवाद पर कोई फैसला या रुख अपना सकता है। कुछ ट्रस्टियों का कार्यकाल खत्म होने वाला है। वहीं टाटा संस में करीब 13% हिस्सेदारी रखने वाली टाटा ग्रुप की कंपनियों को भी अपना वोट तय करना होगा।

टाटा ट्रस्ट्स के वोट सबसे अहम

इस पूरी लड़ाई के बीच टाटा ट्रस्ट्स सबसे बड़ा खिलाड़ी है। उसके पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है। लेकिन यह हिस्सेदारी सात अलग-अलग ट्रस्ट्स में बंटी है। इसलिए यह मान लेना ठीक नहीं होगा कि सभी ट्रस्ट एक साथ एक ही तरफ वोट करेंगे।

SDTT और SRTT सबसे अहम ट्रस्ट हैं। दोनों के पास मिलकर टाटा संस की 51.54% हिस्सेदारी है। ऐसे में इन दोनों ट्रस्ट्स के भीतर चल रहा विवाद सीधे AGM की वोटिंग को प्रभावित कर सकता है।

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9 नवंबर को बदल सकता है पहला समीकरण

9 नवंबर एक अहम तारीख है। इसी दिन वरिष्ठ वकील दारियस खंबाटा का सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट यानी SDTT में तीन साल का कार्यकाल खत्म होगा। SDTT के पास टाटा संस की 27.98% हिस्सेदारी है।

SDTT में छह ट्रस्टी हैं। इनमें नोएल टाटा, दारियस खंबाटा, भास्कर भट्ट, नेविल टाटा, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह शामिल हैं। ट्रस्ट के भीतर मतभेद अब खुलकर सामने आ चुके हैं।

खंबाटा, भट्ट और नेविल टाटा मौजूदा विवाद में मोटे तौर पर नोएल टाटा के साथ हैं। 5 अक्टूबर को इन चारों ने श्रीनिवासन और विजय सिंह के रुख का विरोध किया था। मामला टाटा संस के प्रस्तावित पुनर्गठन और ट्रस्ट्स के अधिकारों से जुड़ा है।

खंबाटा का कार्यकाल 9 नवंबर को खत्म हो रहा है। खबर से जुड़े लोगों के मुताबिक, वह शायद दूसरा कार्यकाल न मांगें। अगर वह दोबारा ट्रस्टी बनना चाहते हैं तो सभी ट्रस्टियों की सहमति जरूरी होगी।

SRTT में दिसंबर में बड़ा बदलाव संभव

सर रतन टाटा ट्रस्ट यानी SRTT के पास टाटा संस की 23.56% हिस्सेदारी है। यहां किसी नए ट्रस्टी को शामिल करने के लिए सभी मौजूदा ट्रस्टियों की सहमति जरूरी है। इसलिए यहां साधारण बहुमत से काम नहीं चलता।

यह नियम पहले भी परेशानी पैदा कर चुका है। नेविल टाटा को SRTT में शामिल करने की कोशिश हुई थी। लेकिन 2024 के आखिर में प्रस्तावित बैठक टाल दी गई थी। श्रीनिवासन ने इस पर आपत्ति जताई थी।

अब श्रीनिवासन का SRTT में कार्यकाल दिसंबर में खत्म हो रहा है। अगर उनका कार्यकाल आगे नहीं बढ़ता है तो ट्रस्ट के भीतर समीकरण बदल सकते हैं। इससे SRTT का रुख नोएल टाटा के करीब जा सकता है।

हालांकि, इसके लिए ट्रस्ट को अपना कामकाज ठीक से चलाने और AGM में वोट करने की स्थिति में होना जरूरी होगा। SRTT पर महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की तरफ से कुछ पाबंदियां भी लागू हैं।

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SRTT की वजह से टाटा संस की AGM टली थी

SRTT की स्थिति का असर पहले ही टाटा संस की AGM पर पड़ चुका है। 18 अगस्त की AGM टालनी पड़ी थी। वजह यह थी कि SRTT SDTT के साथ मिलकर AGM के लिए प्रतिनिधि नामित करने की जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका था।

इसके बाद रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज ने टाटा संस को AGM कराने के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया। अब AGM की तारीख खुद इस पूरे विवाद में काफी अहम हो गई है।

वहीं श्रीनिवासन और विजय सिंह ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के सामने SDTT के कामकाज को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने टाटा संस के मामलों में टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका को लेकर चिंता जताई है।

नोएल टाटा गुट का क्या कहना है?

नोएल टाटा, खंबाटा, भट्ट और नेविल टाटा ने इस रुख का विरोध किया है। उनका कहना है कि ट्रस्ट्स टाटा संस का मैनेजमेंट अपने हाथ में लेने की कोशिश नहीं कर रहे हैं।

उनके मुताबिक, ट्रस्ट्स सिर्फ उन अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं जो उन्हें टाटा संस के कंट्रोलिंग शेयरहोल्डर होने के नाते मिले हैं। इस विवाद पर चैरिटी कमिश्नर ने SDTT से जवाब भी मांगा है।

66% हिस्सेदारी दिखती एकजुट, लेकिन है नहीं

टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है। लेकिन यह सात अलग-अलग चैरिटेबल ट्रस्ट्स में बंटी हुई है। हर ट्रस्ट में ट्रस्टियों की संरचना भी अलग है।

नोएल टाटा और उनके तीन बच्चे नेविल, लिया और माया इन सात ट्रस्ट्स में कुल 36 में से 17 ट्रस्टी पदों पर हैं। लेकिन इस ताकत का बड़ा हिस्सा छोटे ट्रस्ट्स में है। असली वजन SDTT और SRTT के पास है।

इसलिए AGM में सभी ट्रस्ट्स का एक ही लाइन पर आना जरूरी नहीं है। हर ट्रस्ट को अपनी बैठक करके अपने वोट पर फैसला करना पड़ सकता है।

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टाटा ग्रुप की कंपनियों के वोट भी अहम

टाटा ट्रस्ट्स के अलावा टाटा ग्रुप की नौ कंपनियों के पास टाटा संस की कुल 12.83% हिस्सेदारी है। इनमें सात लिस्टेड कंपनियां हैं। इन सात की कुल हिस्सेदारी 11.92% है। टाटा स्टील और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के पास 3.06-3.06% हिस्सेदारी है। टाटा केमिकल्स के पास 2.53% और टाटा पावर के पास 1.65% हिस्सेदारी है।

इंडियन होटल्स के पास 1.11%, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के पास 0.43% और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन के पास 0.08% हिस्सेदारी है। इन कंपनियों के वोट को अभी किसी एक पक्ष के साथ जोड़ना मुश्किल है। हर कंपनी का अपना बोर्ड है। उसे अपनी हिस्सेदारी को लेकर अलग फैसला करना होगा।

चंद्रशेखरन और नोएल टाटा दोनों का असर

चंद्रशेखरन कई ऐसी टाटा कंपनियों के चेयरमैन हैं, जिनके पास टाटा संस में हिस्सेदारी है। इनमें टाटा स्टील, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, टाटा पावर, इंडियन होटल्स और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स शामिल हैं। वहीं नोएल टाटा टाटा स्टील के वाइस चेयरमैन हैं। वह टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन और टाटा इंटरनेशनल के चेयरमैन भी हैं।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ये कंपनियां किसी एक व्यक्ति के पक्ष में वोट करेंगी। इन कंपनियों के बोर्ड को अपनी-अपनी हिस्सेदारी को लेकर फैसला करना होगा।

शापूरजी पलोनजी ग्रुप भी बड़ा शेयरहोल्डर

टाटा ट्रस्ट्स के अलावा शापूरजी पलोनजी ग्रुप के पास भी टाटा संस की 18% से ज्यादा हिस्सेदारी है। इसलिए AGM में उसके वोट भी काफी अहम हो सकते हैं।

खासकर तब, जब टाटा ट्रस्ट्स के भीतर किसी एक रुख पर सहमति नहीं बनती है। ऐसी स्थिति में दूसरे बड़े शेयरहोल्डर्स की भूमिका बढ़ सकती है।

अब AGM की तारीख सबसे अहम

जब AGM होगी, तब तक टाटा ट्रस्ट्स की स्थिति कुछ बदल सकती है। खंबाटा का SDTT में कार्यकाल खत्म हो चुका होगा। वहीं दिसंबर में श्रीनिवासन का SRTT में कार्यकाल भी खत्म होना है।

चैरिटी कमिश्नर की कार्रवाई भी दोनों बड़े ट्रस्ट्स की स्थिति पर असर डाल सकती है। दूसरी तरफ टाटा ग्रुप की कंपनियों के बोर्ड को अपनी हिस्सेदारी के वोट पर फैसला करना होगा।

इसलिए मामला अब सिर्फ चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल का नहीं है। असली सवाल यह है कि AGM से पहले टाटा संस के शेयरहोल्डर्स के बीच ताकत का संतुलन किस तरफ जाता है।

यही वजह है कि AGM की तारीख बेहद अहम होगी। उस समय तक ट्रस्ट्स की संरचना, नियामकीय स्थिति और टाटा ग्रुप की कंपनियों के रुख में बदलाव इस वोट को पूरी तरह बदल सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market Outlook : बाजार ने लगातार 4 दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा, जानिए 6 अक्टूबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : 5 अक्टूबर को भारतीय इक्विटी इंडेक्स ने लगातार 4 दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा और निफ्टी 22,500 के ऊपर बंद होने में कामयाब रहा। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 472.77 अंक या 0.66 प्रतिशत बढ़कर 72,382.47 पर और निफ्टी 133.80 अंक या 0.60 प्रतिशत बढ़कर 22,555.75 पर बंद हुआ। आज लगभग 1991 शेयरों में बढ़त हुई, 2297 शेयरों में गिरावट आई और 216 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

आज बाजार की शुरुआत अच्छी रही,लेकिन बाद में वित्त मंत्री सीतारमण के इस बयान के बाद कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की बातचीत अटक गई है, बाजार में गिरावट आई। भारत के साथ व्यापार संबंधों में अमेरिका ट्रेड डेफिसिट का सामना कर रहा है, इसलिए वह इस असंतुलन को कम करने और पिछले कई सालों के असंतुलन की भरपाई करने की पूरी कोशिश कर रहा है।

आज RBI की बैठक शुरू होने और फरवरी 2023 के बाद पहली बार ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद के कारण VIX ऊंचे स्तर पर रहा। VIX आज 1.73% ऊपर बंद हुआ।

बैंक निफ्टी पर सबकी नजर रही क्योंकि HDFC बैंक, यस बैंक, RBL बैंक और AU बैंक समेत लगभग 11 बैंकों ने अपने Q2FY27 के प्रोविज़नल नतीजे जारी किए हैं। यह इंडेक्स 0.48% ऊपर बंद हुआ। इस तेजी में AU बैंक, फेडरल बैंक और PNB का योगदान सबसे ज़्यादा रहा। जबकि HDFC बैंक और कोटक बैंक में गिरावट रही।

Bizom के डेटा से पता चलता है कि भारत के FMCG बाज़ार में Q2FY27 के दौरान वैल्यू में 8.6% की बढ़ोतरी हुई,जो पिछले छह क्वार्टर में सबसे ज्यादा ग्रोथ रेट है (Q1 में यह 6.8% थी)। इसी वजह से आज FMCG इंडेक्स में तेजी रही। यह इंडेक्स 1.8% ऊपर बंद हुआ।

निफ्टी में सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयरों में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, आईटीसी, बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस और एनटीपीसी शामिल रहे, जबकि गिरावट वाले शेयरों में एचसीएल टेक्नोलॉजीज, मैक्स हेल्थकेयर, एचडीएफसी बैंक, एशियन पेंट्स और अपोलो हॉस्पिटल्स शामिल रहे।

फार्मा को छोड़कर अन्य सभी सेक्टर इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। इनमें कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, एफएमसीजी, मीडिया, इंफ्रा, ऑयल एंड गैस, पीएसयू बैंक, टेलीकॉम और रियल्टी में 0.5-2 प्रतिशत की बढ़त देखी गई। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 0.5 प्रतिशत की बढ़त हुई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च,विनोद नायर का कहना है कि अमेरिका में उम्मीद से कमजोर जॉब डेटा और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के कारण बाजार में रिकवरी देखी गई। इससे उन निवेशकों को कुछ राहत मिली जो निकट भविष्य में ब्याज दरों में बढ़त के डर से ग्रस्त थे। हालांकि,असल आर्थिक विकास और बाजार के प्रदर्शन के बीच अंतर के कारण निवेशक अब कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और करेंसी से जुड़े जोखिमों को भी ध्यान में रख रहे हैं।

अब सबकी नज़रें RBI के पॉलिसी और आने वाले अर्निंग्स सीजन पर टिकी हैं। बाजार को पहले से ही 25-bps की दर बढ़ोतरी की उम्मीद है। बाजार एक अहम मोड़ पर है। रिवर्सल की संभावना है। हालांकि,मौजूदा जोखिम से बचने का सेंटीमेंट निवेशकों को तब तक मुनाफा वसूलने के लिए प्रेरित कर सकता है जब तक कि कोई नया ट्रिगर सामने न आए।

SBI सिक्योरिटीज में वाइस प्रेसिडेंट टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च सुदीप शाह का कहना है कि सोमवार को निफ्टी मामूली गैप-अप के साथ खुला और लगभग 223 पॉइंट्स के दायरे में उतार-चढ़ाव के साथ ट्रेड किया। इससे पता चलता है कि पिछले सेशन में आई भारी गिरावट के बाद भी वोलैटिलिटी बनी हुई है। इंडेक्स हाल के दायरे के निचले स्तर के पास ही ट्रेड करता रहा। डेली चार्ट पर निफ्टी ने ऊपर और नीचे की विक्स (wicks) वाली एक छोटी बॉडी वाली कैंडल बनाई। यह बाजार में अनिश्चितता और जारी मंदी के दौर में ठहराव को दिखाती है। इंडेक्स 0.60% ऊपर बंद हुआ जो शुरुआती खरीदारी में भागीदारी का संकेत है। हालांकि,बाजार की दिशा में किसी बड़े बदलाव के लिए लगातार खरीदारी के साथ जोरदार रिकवरी की जरूरत है।

टेक्निकल नज़रिए से देखें तो निफ्टी अभी भी अपने 20-दिन और 50-दिन के EMA के नीचे ट्रेड कर रहा है। RSI 30 से नीचे बना हुआ है, जबकि MACD ज़ीरो लाइन के नीचे लगातार नीचे की ओर झुका हुआ है जो बताता है कि पुलबैक में कोई खास तेजी नहीं है। ADX लगातार बढ़ रहा है,जिससे संकेत मिलता है कि मंदी का ट्रेंड अभी भी मजबूत बना हुआ है।

आगे 22400–22380 का जोन सबसे नजदीकी सपोर्ट का काम कर सकता है। अगर यह जोन निर्णायक रूप से टूटता है,तो 22220 की तरफ बिकवाली का दबाव फिर से बढ़ सकता है। यह स्तर 1 अक्टूबर के निचले स्तर के आसपास है। ऊपर की तरफ़,22700–22720 तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है। अगर इस जोन के ऊपर लगातार बढ़त बनी रहती है तो 22850 की तरफ एक रिलीफ रैली आ सकती है। हालांकि,जब तक लगातार खरीदारी का जोर नहीं दिखता तब तक बाजार का ओवरऑल स्ट्रक्चर कमजोर ही रहेगा।

बैंक निफ्टी व्यू

सुदीप शाह का कहना है कि बैंक निफ्टी 0.48% ऊपर बंद हुआ और पिछले चार ट्रेडिंग सेशन में इसने लगभग 975 अंकों की रिकवरी की है,जो निचले स्तरों पर खरीदारी आने का संकेत है। हालांकि,जब तक लगातार खरीदारी नहीं होती, तब तक बड़ा ट्रेंड सतर्क रहने का है। इंडेक्स ने डेली चार्ट पर लगातार दो न्यूट्रल कैंडल बनाई हैं। लेटेस्ट कैंडल की बॉडी छोटी है और उसमें ऊपर और नीचे विक्स (wicks) हैं,जो अनिश्चितता और जारी बिकवाली के ट्रेंड में ठहराव का संकेत हैं। आगे चलकर,54200–54100 का जोन सपोर्ट का काम कर सकता है। अगर यह जोन टूटता है तो 53600 की ओर फिर से बिकवाली शुरू हो सकती है। ऊपर की तरफ, 55200–55300 एक तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है अगर इस जोन के ऊपर लगातार मूवमेंट बना रहता है तो पुलबैक 55800 तक बढ़ सकता है।

 

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Outlook : भारी गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 29 सितंबर को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

Market Outlook : 28 सितंबर को भारतीय इक्विटी इंडेक्स कमजोरी के साथ बंद हुए और निफ्टी 22,800 के नीचे चला गया। ट्रेडिंग सेशन के अंत में सेंसेक्स 1,124.02 अंक या 1.52 प्रतिशत गिरकर 72,771.72 पर और निफ्टी 360.25 अंक या 1.56 प्रतिशत गिरकर 22,780.25 पर बंद हुआ। आज लगभग 1214 शेयरों में बढ़त हुई, 2905 शेयरों में गिरावट आई और 166 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज़्यादा गिरावट वाले शेयरों में जियो फाइनेंशियल,टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स,टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स,अदाणी एंटरप्राइजेज और अदाणी पोर्ट्स शामिल रहे। जबकि बढ़त वाले शेयरों में डॉ.रेड्डीज लैब्स और इंफोसिस शामिल रहे।

सभी सेक्टर इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। PSU बैंक इंडेक्स 3% और टेलीकॉम इंडेक्स 2% नीचे बंद हुआ। जबकि एनर्जी,इंफ्रा,FMCG,रियल्टी,प्राइवेट बैंक, मेटल और ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 1% से ज़्यादा की गिरावट आई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.7 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 1.8 प्रतिशत गिरा।

बोनान्ज़ा के रिसर्च एनालिस्ट बालाजी राव मुदिली ने कहा कि आज बाजार में भारी गिरावट देखी गई। निफ़्टी 22,780.25 (1.56% नीचे) पर और सेंसेक्स 72,771.21 (1.52% नीचे) पर बंद हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के ईरान के प्रस्ताव को ठुकरा दिया,जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उछाल आया। इससे बाजार पर दबाव बना। साथ ही,बाजार को उम्मीद है कि अक्टूबर की बैठक में अमेरिका में ब्याज दरों में फिर से बढ़ोतरी हो सकती है। ब्याज दरें बढ़ने की संभावना के चलते सोने और चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावट आई है। ये लगभग 3.36% और 5.29% नीचे आए हैं। इंडेक्स के नजरिए से देखें तो सभी इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए,जिनमें बैंक,मेटल,रियल्टी और ऑयल एंड गैस सेक्टर में सबसे ज़्यादा गिरावट देखी गई।

बॉन्ड यील्ड में तेजी, रुपये में कमज़ोरी, RBI द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की बढ़ती संभावना और बैंकिंग सेक्टर में नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) घटने की उम्मीद के कारण बड़े बैंकों के शेयरों पर भारी दबाव बना हुआ है। आज बैंक-निफ्टी में 1.99% की गिरावट दर्ज की गई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ़ रिसर्च,विनोद नायर ने कहा कि बाजार के एक अहम साइकोलॉजिकल सपोर्ट लेवल को तोड़ने के साथ ही मंदड़ियों का दबदबा बना रहा। यह ग्लोबल मैक्रो हालात बिगड़ने के साथ ही निवेशकों में बढ़ती सावधानी की भावना को दिखाता है। अमेरिका द्वारा सीज़फायर के प्रस्ताव को ठुकराने से चिंताएं बढ़ गई हैं। पश्चिम एशिया में तनाव उम्मीद से ज़्यादा समय तक बना रह सकता है। इससे निकट भविष्य में कूटनीतिक समाधान की संभावना कम हो गई है और लंबे समय तक सप्लाई में रुकावट और कमोडिटी की कीमतें बढ़ने का जोखिम बढ़ गया है।

वहीं,अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से भारत और अमेरिका के बीच यील्ड का अंतर कम हो रहा है,जिससे विदेशी फंडों की निकासी हो सकती है और बाज़ार का मूड सतर्क बना रह सकता है। फेड द्वारा ब्याज दरें और बढ़ाने की बढ़ती आशंका के कारण सभी सेक्टर में बिकवाली का दबाव देखा गया। इसके अलावा, RBI के आगामी पॉलिसी से पहले बाजार सतर्क रह सकते हैं। निकट भविष्य में ग्लोबल लिक्विडिटी की स्थिति,बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव,तेल की कीमतें और पॉलिसी से जुड़े संकेत बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।

कोटक सिक्योरिटीज में हेड इक्विटी रिसर्च, श्रीकांत चौहान का कहना है कि आज बेंचमार्क इंडेक्स में बड़ी गिरावट आई। निफ्टी 360 अंक नीचे बंद हुआ,जबकि सेंसेक्स 1124 अंक गिर गया। सभी अहम सेक्टर इंडेक्स नेगेटिव दायरे में रहे,जिसमें PSU बैंक इंडेक्स में सबसे ज़्यादा 3.15 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।

टेक्निकल तौर पर कमजोर शुरुआत के बाद निफ्टी 23,000 के स्तर से नीचे फिसल गया और इस गिरावट के बाद बिकवाली का दबाव बढ़ गया। इसके अलावा, डेली चार्ट पर’बेयरिश कैंडल’और इंट्राडे चार्ट पर’लोअर-टॉप फॉर्मेशन’मौजूदा स्तरों से और कमजोरी आने का संकेत दे रहे हैं।

श्रीकांत चौहान का मानना ​​है कि मार्केट का शॉर्ट-टर्म ट्रेंड कमज़ोर बना हुआ है। हालांकि,कुछ समय के लिए’ओवरसोल्ड’पोजीशन के कारण,हम मौजूदा स्तरों से एक तेज’पुलबैक रैली’देख सकते हैं। डे ट्रेडर्स के लिए 22,800 का स्तर अहम है। इस स्तर से नीचे सेंटीमेंट कमजोर बने रहने की संभावना है,जिसमें 22,650–22,550 पर सपोर्ट मिलेगा। ऊपर की तरफ,22,800 के स्तर से ऊपर जाने पर निफ्टी 23,000–23,050 की ओर उछाल दिखा सकता है।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि निफ्टी हल्की गिरावट (गैप-डाउन) के साथ खुला और उस पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया,जिससे यह 23,300 के अहम साइकोलॉजिकल लेवल से नीचे आ गया। कमजोर शुरुआत से पता चलता है कि ऊपरी लेवल पर सेलर अभी भी एक्टिव हैं,जिससे निकट भविष्य का टेक्निकल स्ट्रक्चर खराब है। ऊपर की तरफ,23,100–23,200 का दायरा तत्काल रेजिस्टेंस बैंड का काम कर सकता है। अगर निफ्टी लगातार 23,200 के ऊपर बना रहता है,तो इससे कुछ राहत मिल सकती है और 23,300–23,400 के लेवल तक रिकवरी में मदद मिल सकती है। हालांकि,अगर यह इस रेजिस्टेंस बैंड के नीचे ही ट्रेड करता रहा तो इंडेक्स पर और बिकवाली का दबाव बन सकता है।

नीचे की तरफ 22,800 का लेवल अहम सपोर्ट बना हुआ है,जिस पर नज़र रखनी होगी। अगर यह 22,800–22,700 के दायरे से नीचे जाता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और इंडेक्स और निचले स्तरों पर जा सकता है। मोमेंटम इंडिकेटर और कमज़ोर हुए हैं। RSI 30 के आसपास है,जो बताता है कि मोमेंटम काफी कमजोर है और यह’ओवरसोल्ड’जोन के करीब है। बाजार का बड़ा तकनीकी ढांचा भी कमजोर बना हुआ है और इंडेक्स अहम मूविंग एवरेज से नीचे कारोबार कर रहा है। कुल मिलाकर,तकनीकी आउटलुक अधिक मंदी वाला हो गया है।

 

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Tata Motors की गाड़ियां हो सकती हैं और महंगी, कमोडिटी की बढ़ती लागत मार्जिन पर डाल रही दबाव

ऑटोमोबाइल कंपनी टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (PV) की गाड़ियों की कीमतें और बढ़ सकती हैं। कच्चे माल की लागत में काफी बढ़ोतरी के कारण कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन को और झटका लगने की आशंका है। लिहाजा हो सकता है कि कंपनी को कीमतें बढ़ानी पड़ें। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा, माल ढुलाई और कच्चे माल की लागत बढ़ गई है। इसके चलते कंपनियों को या तो बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा खुद सहना पड़ रहा है या बोझ ग्राहकों पर डालना पड़ रहा है।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, टाटा मोटर्स पीवी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ शैलेश चंद्रा का कहना है कि कंपनी पैसेंजर व्हीकल्स की कीमतों में आगे चरणबद्ध ढंग से और बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही है। कंपनी कमोडिटी की लागत में हुई बढ़ोतरी के एक बड़े हिस्से का बोझ अभी खुद ही उठा रही है और लागत घटाने की कोशिशें भी कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम हर महीने इसकी समीक्षा कर रहे हैं कि गाड़ियों की कीमतों में एक निश्चित स्तर की बढ़ोतरी करने का अवसर कब मिलेगा। हालांकि, कीमतों में बढ़ोतरी छोटी-छोटी किश्तों में की जाएगी ताकि मांग पर तुरंत असर न पड़े।’’ चंद्रा के मुताबिक, “जिस तेजी से लागत बढ़ी है, उसी तेजी से इन बढ़ी हुई कीमतों का बोझ बाजार पर डालना संभव नहीं है…जिसके कारण मार्जिन पर भारी दबाव पड़ रहा है और लागत घटाने के प्रयासों पर अधिक ध्यान देना पड़ रहा है।”

पैसेंजर व्हीकल्स के बाद अब कमर्शियल व्हीकल्स भी होने वाले हैं महंगे

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड (TMPV) ने 1 सितंबर से अपनी सभी गाड़ियों की कीमतें 25,000 रुपये तक बढ़ा दी हैं। कंपनी ने बयान में कहा था कि बढ़ोतरी के तहत सभी सेगमेंट्स के इंटर्नल कंबंशन इंजन (ICE) व्हीकल्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) आएंगे। कीमतों में बढ़ोतरी मॉडल और वेरिएंट्स के आधार पर अलग-अलग होगी। इसके अलावा टाटा मोटर्स अपने कमर्शियल व्हीकल्स की कीमतें 1 अक्टूबर से 1 प्रतिशत तक बढ़ाने वाली है।

Moneycontrol Startup Conclave: और 10 करोड़ यूजर्स तक पहुंचना चाहती है रैपिडो, फूड डिलीवरी में देख रही बड़े मौके

सबसे बड़ी चिंता अनिश्चितता

रॉयटर्स के मुताबिक, चंद्रा का कहना है कि सबसे बड़ी चिंता अनिश्चितता है। लागत इतनी ही बढ़नी थी, या कमोडिटी के मामले में आगे और दबाव आना बाकी है, इसे लेकर अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं है। चंद्रा का यह भी कहना है कि टाटा मोटर्स पीवी ने अपनी इलेक्ट्रिक कार उत्पादन क्षमता को दोगुना करके प्रति माह 16,000 यूनिट से अधिक कर दिया है। कंपनी बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बढ़ोतरी जारी रखे हुए है। भारत में टाटा मोटर्स पीवी की कुल कार बिक्री में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत है।

JLR Layoffs: टाटा मोटर्स की जगुआर लैंड रोवर में जाएंगी 4000 नौकरियां

टाटा मोटर्स की जगुआर लैंड रोवर ऑटोमोटिव पीएलसी (JLR) अगले दो सालों में 4,000 नौकरियां कम करने जा रही है। कंपनी बढ़ती लागत, गिरती बिक्री और अमेरिकी टैरिफ के असर जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। JLR ब्रिटेन की सबसे बड़ी कार कंपनी है। ‘द टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार देर रात कर्मचारियों को चेतावनी दी गई कि सोमवार को रिडंडेंसी प्रोग्राम (छंटनी) की घोषणा हो सकती है।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, एक बयान में कंपनी ने कहा है कि वह एक स्वैच्छिक छंटनी कार्यक्रम (वॉलंटरी रिडंडेंसी प्रोग्राम) शुरू कर रही है। कंपनी दो सालों में लगभग 2.3 अरब डॉलर की बचत करना चाहती है। बयान के अनुसार, JLR वैश्विक बाजार की स्थितियों को देखते हुए अपने ब्रेक-ईवन पॉइंट को घटाकर 300,000 गाड़ियां करना चाहती है। साथ ही अपने कारोबार को आसान बनाना चाहती है।

JLR दिए हुए है 33000 लोगों को रोजगार

JLR ब्रिटेन में लगभग 33,000 लोगों को रोजगार दिए हुए है। कंपनी की मालिक भारत की टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड है। हाल की तिमाही में JLR का रेवेन्यू लगभग 10 प्रतिशत गिर गया। प्रॉफिट बिफोर टैक्स 69 प्रतिशत घटकर 10.9 करोड़ पाउंड रह गया। कंपनी की पहली इलेक्ट्रिक रेंज रोवर इस महीने की शुरुआत में बिक्री के लिए आई। यह बाजार की सबसे महंगी इलेक्ट्रिक SUV में से एक है।

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Volkswagen में और 50000 लोगों की छंटनी को मंजूरी

जर्मनी की फॉक्सवैगन में जल्द ही और 50000 नौकरियां जा सकती हैं। कंपनी के सुपरवाइजरी बोर्ड ने एक बदलाव योजना ‘फ्यूचर प्लान 2030’ को मंजूरी दी है। इसमें 50,000 और नौकरियां खत्म करना, 2035 तक अपने व्हीकल मॉडल लाइनअप को आधा करना और 2027-2031 के दौरान कैपिटल खर्च को 16 प्रतिशत तक कम करना जैसी 12 पहलें शामिल हैं। 50,000 नौकरियां कम करने पर सहमति पहले ही बन चुकी थी और प्रक्रिया चल रही है। अब दुनियाभर में लगभग और 50,000 नौकरियां कम करने के प्लान को मंजूरी मिल गई है।

इसके अलावा फॉक्सवैगन ग्रुप की भारतीय यूनिट अपने 3 साल के रीस्ट्रक्चरिंग प्लान को तेज कर रही है। इसके कारण कंपनी की लगभग 12 प्रतिशत वर्कफोर्स कम हो जाएगी। स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 2025 में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की थी। अब 2027 तक तेजी से छंटनी करने की तैयारी है।

सुभाष चंद्रा के खिलाफ ₹22006 करोड़ के लोन पर 99.97% हेयरकट? सरकारी सूत्रों ने कहा- ये सही तस्वीर नहीं

एस्सेल ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा से जुड़े एक मामले में खबर चल रही कि बैंकों ने ₹22,000 करोड़ से ज्यादा के कर्ज पर 99.97% का हेयरकट ले लिया। यानी लगभग पूरा पैसा डूब गया। लेकिन सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह तस्वीर पूरी तरह सही नहीं है।

असल में ₹22,006 करोड़ की रकम उन दावों की है, जो सुभाष चंद्रा के खिलाफ एक पर्सनल गारंटर के रूप में स्वीकार किए गए हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि उन्होंने खुद ₹22,006 करोड़ का कर्ज लिया था।

₹22,006 करोड़ का आंकड़ा कहां से आया?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, ₹22,006 करोड़ की रकम अलग-अलग Essel और Zee समूह से जुड़ी कंपनियों के कर्ज से संबंधित दावों की है। इन मामलों में सुभाष चंद्रा पर्सनल गारंटर थे।

यानी कर्ज कंपनियों ने लिया था। सुभाष चंद्रा मुख्य उधारकर्ता नहीं थे। इसलिए यह कहना कि बैंकों ने सुभाष चंद्रा को सीधे ₹22,006 करोड़ उधार दिए थे, सही नहीं होगा।

हर कर्ज पर शुरुआत से गारंटी नहीं थी

सूत्रों का कहना है कि करीब ₹2,574 करोड़ के कर्ज ऐसे थे, जिनमें शुरुआत से ही सुभाष चंद्रा की पर्सनल गारंटी दी गई थी।

बाकी मामलों में उनकी गारंटी बाद में अतिरिक्त सुरक्षा के तौर पर जोड़ी गई थी। इसलिए ₹22,006 करोड़ की पूरी रकम को ऐसा कर्ज मान लेना, जो सिर्फ उनकी गारंटी के भरोसे दिया गया था, सही तस्वीर पेश नहीं करता।

मामला शुरू कैसे हुआ?

यह इंसॉल्वेंसी मामला कंपनियों के खिलाफ नहीं, बल्कि सुभाष चंद्रा के खिलाफ एक पर्सनल गारंटर के रूप में शुरू हुआ।

मामला तब सामने आया जब Vivek Infracon ने Indiabulls से कर्ज लिया। उस कर्ज के लिए सुभाष चंद्रा ने पर्सनल गारंटी दी थी। बाद में कर्ज डिफॉल्ट हो गया और मामला इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया तक पहुंच गया।

NCLT ने क्या मंजूर किया?

NCLT ने जिस रिपेमेंट प्लान को मंजूरी दी है, उसके तहत सुभाष चंद्रा की तरफ से करीब ₹6.25 करोड़ का भुगतान होगा।

यह रकम उनकी वर्तमान और वसूली योग्य व्यक्तिगत संपत्तियों के आधार पर तय की गई है। यानी अदालत ने उनकी मौजूदा उपलब्ध संपत्ति को देखते हुए यह योजना मंजूर की है।

क्या सिर्फ ₹6.25 करोड़ ही मिलेंगे?

नहीं। यही सबसे बड़ा भ्रम है। रिपेमेंट प्लान में मुख्य उधारकर्ता कंपनियों से भी करीब ₹1,494 करोड़ की रिकवरी का प्रावधान है।

इसके अलावा बैंकों और दूसरे कर्जदाताओं के पास उन कंपनियों, गिरवी रखी गई संपत्तियों और दूसरी सिक्योरिटीज से वसूली के रास्ते खुले रहेंगे। यानी यह मामला सिर्फ सुभाष चंद्रा की निजी संपत्ति से होने वाली रिकवरी तक सीमित नहीं है।

99.97% हेयरकट का मतलब क्या है?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, 99.97% का आंकड़ा सिर्फ उस रकम से जुड़ा है जो सुभाष चंद्रा से एक पर्सनल गारंटर के तौर पर वसूल की जा सकती थी। इसे ₹22,000 करोड़ के पूरे बैंक कर्ज पर अंतिम नुकसान बताना सही नहीं है।

दूसरे शब्दों में कहें तो यह पर्सनल गारंटर की क्षमता से जुड़ी रिकवरी का आंकड़ा है, न कि पूरे कर्ज के डूबने का।

कर्जदाताओं ने क्यों किया विरोध?

कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने इस प्लान का विरोध किया था। इनमें LIC Housing Finance, HDFC Bank, Axis Bank, Canara Bank, RBL Bank और Union Bank जैसे नाम शामिल हैं।

कर्जदाताओं का कहना था कि सुभाष चंद्रा की पुरानी घोषित नेटवर्थ और मौजूदा नेटवर्थ में बड़ा अंतर दिखाई देता है। इसलिए उनकी संपत्तियों की और गहराई से जांच होनी चाहिए।

नेटवर्थ को लेकर क्या सवाल उठे?

क्रेडिटर्स ने पुराने नेटवर्थ सर्टिफिकेट का हवाला दिया। इन दस्तावेजों के मुताबिक, सुभाष चंद्रा की नेटवर्थ 2017 में करीब ₹45,888 करोड़ थी। 2018 में यह करीब ₹40,562 करोड़ बताई गई थी।

वहीं मौजूदा इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया में उनकी घोषित नेटवर्थ करीब ₹31.79 करोड़ बताई गई। इसी अंतर को लेकर कई सवाल उठे।

फिर भी प्लान कैसे पास हुआ?

विरोध के बावजूद इस रिपेमेंट प्लान को कर्जदाताओं के 80.81% वोट मिले। इसके बाद NCLT ने कहा कि उठाई गई आपत्तियां इतनी मजबूत नहीं हैं कि क्रेडिटर्स द्वारा मंजूर किए गए प्लान को पलटा जा सके।

इसलिए ट्रिब्यूनल ने योजना को मंजूरी दे दी।

सुभाष चंद्रा का क्या कहना है?

सुभाष चंद्रा का कहना है कि Essel समूह से जुड़ी कंपनियां अब तक कर्जदाताओं को करीब ₹43,000 करोड़ का भुगतान कर चुकी हैं। हालांकि, यह आंकड़ा अलग-अलग कंपनियों द्वारा समय-समय पर किए गए भुगतानों को शामिल करता है।

पूरे मामले का सार यह है कि 99.97% का आंकड़ा सुनने में जितना बड़ा लगता है, मामला उतना सीधा नहीं है। यह ₹22,006 करोड़ के पूरे बैंक कर्ज के डूबने की कहानी नहीं है। यह एक पर्सनल गारंटर से होने वाली सीमित रिकवरी का मामला है। वहीं मुख्य कर्जदार कंपनियों, सिक्योरिटीज और दूसरी संपत्तियों से वसूली के रास्ते अभी भी मौजूद हैं।

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स ने बदली पहचान, अब Tata.Cars नाम से दिखेगी कंपनी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स ने बदली पहचान, अब Tata.Cars नाम से दिखेगी कंपनी

टाटा ग्रुप की पैसेंजर गाड़ी बनाने वाली कंपनी Tata Motors Passenger Vehicles (TMPV) अब ग्राहकों के सामने Tata.Cars नाम से नजर आएगी। कंपनी के MD और CEO शैलेश चंद्रा ने यह जानकारी दी। अब डीलरशिप, शोरूम और मार्केटिंग में Tata.Cars नाम ज्यादा दिखेगा।

हालांकि, कंपनी का कानूनी नाम नहीं बदला है। Tata Motors Passenger Vehicles ही कंपनी की रजिस्टर्ड कॉरपोरेट एंटिटी रहेगी। यह बदलाव सिर्फ ग्राहकों के सामने कंपनी की पहचान को लेकर है।

Tata.Cars नाम क्यों अपनाया?

पैसेंजर गाड़ी कंपनी Tata Motors अपने इस कारोबार की अलग पहचान मजबूत करना चाहती है। कंपनी पेट्रोल और डीजल के साथ इलेक्ट्रिक गाड़ियां भी बेचती है। ऐसे में Tata.Cars नाम के जरिए पैसेंजर गाड़ी कारोबार को एक साफ ब्रांड पहचान देने की कोशिश है।

EV पर Tata ने कब लगाया था दांव?

Tata Motors Passenger Vehicles ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर उस समय दांव लगाया था, जब भारत में EV का बाजार काफी शुरुआती दौर में था। उस समय लोगों को इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर ज्यादा भरोसा नहीं था। चार्जिंग स्टेशन भी बहुत कम थे।

यानी समस्या दोनों तरफ थी। ग्राहक चार्जिंग की कमी के कारण EV नहीं खरीद रहे थे। कंपनियां कम EV होने की वजह से चार्जिंग नेटवर्क पर बड़ा निवेश नहीं कर रही थीं। Tata Motors ने इस चक्र को तोड़ने की कोशिश की।

Tata Group की कंपनियों ने दिया साथ

EV का पूरा इकोसिस्टम बनाने में Tata Group की कई कंपनियों ने मदद की। Tata Power ने चार्जिंग नेटवर्क में सहयोग किया। Tata AutoComp ने कंपोनेंट्स में मदद की। Tata Technologies, Tata Elxsi और TCS ने इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी से जुड़ा सपोर्ट दिया।

कंपनी का मानना था कि EV से प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। इससे इंपोर्टेड फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता भी घट सकती है। बाद में Tata Motors भारत के इलेक्ट्रिक पैसेंजर गाड़ी बाजार की प्रमुख कंपनियों में शामिल हो गई।

Tata Motors Passenger Vehicles शेयर

Tata Motors Passenger Vehicles का शेयर गुरुवार, 27 अगस्त को 0.86% बढ़कर ₹315.80 पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 17.47% गिरा है। वहीं, 1 साल में यह 22.77% टूटा है। कंपनी का मार्केट कैप 1.15 लाख करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

मारुति, हुंडई के बाद अब Tata Motors PV का ऐलान, 1 सितंबर से ₹25000 तक बढ़ाएगी कारों की कीमतें

मारुति सुजुकी इंडिया और हुंडई मोटर्स इंडिया के बाद अब टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड (TMPV) ने अपनी गाड़ियों की कीमतें बढ़ाने की घोषणा की है। कंपनी 1 सितंबर से अपनी सभी गाड़ियों की कीमतों में 25,000 रुपये तक की बढ़ोतरी करेगी। कंपनी ने इसकी वजह बढ़ती लागत और महंगाई के दबाव को बताया है। टाटा ग्रुप की कंपनी TMPV ने शुक्रवार को बयान में कहा कि बढ़ोतरी के तहत सभी सेगमेंट्स के इंटर्नल कंबंशन इंजन (ICE) व्हीकल्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) आएंगे। कीमतों में बढ़ोतरी मॉडल और वेरिएंट्स के आधार पर अलग-अलग होगी।

टाटा मोटर्स पीवी के मुताबिक, ‘‘बढ़ती लागत और महंगाई के प्रभाव को आंशिक रूप से संतुलित करने के लिए कीमतों में यह बदलाव किया जा रहा है।’’ बयान में कहा गया कि TMPV अब भी इस बढ़ोतरी का एक बड़ा हिस्सा खुद वहन कर रही है लेकिन कीमतों में बदलाव के जरिए इसका कुछ बोझ ग्राहकों पर डाला जा रहा है। TMPV की गाड़ियों में छोटी कार टियागो से लेकर प्रीमियम SUV सफारी और हैरियर EV तक शामिल है। इन वाहनों की कीमत लगभग 4.7 लाख रुपये से लेकर 31 लाख रुपये के बीच है।

शेयर में गिरावट

कंपनी के शेयरों में 21 अगस्त को गिरावट है। शेयर BSE पर 318.95 रुपये के लो तक गया। 1.17 लाख करोड़ रुपये है। शेयर की फेस वैल्यू 2 रुपये है। शेयर BSE 100 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर 6 महीनों में 15 प्रतिशत, एक साल में 24 प्रतिशत और 2 साल में 52 प्रतिशत नीचे आया है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 42.51 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

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मारुति और हुंडई ने कितना बढ़ाया प्राइस

मारुति सुजुकी इंडिया ने अपनी सभी गाड़ियों की कीमतों में औसतन लगभग 0.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। यह 18 अगस्त 2026 से लागू हो गई है। अगस्त की प्राइस हाइक के तहत मारुति सुज़ुकी की कारें अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट के हिसाब से 2,500 से 30,000 रुपये तक महंगी हो रही हैं। इनपुट कॉस्ट में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण कंपनी ऐसा कर रही है। हुंडई मोटर इंडिया भी 1 सितंबर, 2026 से सभी कारों के दाम 1 प्रतिशत तक बढ़ाएगी। किस कार का दाम कितना बढ़ेगा, यह मॉडल और वेरिएंट पर निर्भर करेगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks To Watch: रेलटेल, एचएएल से मणिपाल हेल्थ तक, 21 अगस्त को इन 13 शेयरों पर रहेगी मार्केट की नजर

Stocks to Watch 21 August: हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार 21 अगस्त को भारतीय शेयर बाजार में कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है। कॉर्पोरेट नतीजों, बड़े ऑर्डर्स, लीडरशिप बदलाव और ब्लॉक डील्स के चलते कई दिग्गज शेयर निवेशकों के रडार पर रहेंगे।

हमारी सहयोगी वेबसाइट CNBC TV18 की रिपोर्ट के अनुसार, 21 अगस्त के ट्रेडिंग सेशन के दौरान इन 13 प्रमुख शेयरों पर बाजार की नजर रहेगी:

1- मणिपाल हेल्थ (Manipal Health Enterprises)

मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं। पहली तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिर साल-दर-साल आधार पर 7.7% घटकर 231 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले समान अवधि में 250 करोड़ रुपये था। वैसे कंपनी का रेवेन्यू 38.1% बढ़कर 3091 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। EBITDA 25.6% बढ़कर 736.5 करोड़ रुपये रहा जबकि EBITDA मार्जिन घटकर 23.8% रह गई। ये पिछले साल 26.2 फीसदी थी।

2- सात्विक ग्रीन एनर्जी (Saatvik Green Energy)

सात्विक सोलर इंडस्ट्रीज को एक घरेलू स्वतंत्र बिजली उत्पादक/EPC प्लेयर से सोलर पीवी मॉडल्स की सप्लाई के लिए 190 करोड़ रुपये का कॉमर्शियल ऑर्डर मिला है। इस ऑर्डर को मार्च 2027 तक पूरा किया जाना है।

3- केआईएमएस (KIMS – Krishna Institute of Medical Sciences)

कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने हैदराबाद के गचीबोवली में 250 बिस्तरों वाले अरेते अस्पताल के विशेष संचालन और प्रबंधन (O&M) के लिए औरेविया हॉस्पिटल्स के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह शुरुआती समझौता 5 साल के लिए है, जिसे आगे 5 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। केआईएमएस को अस्पताल के नेट रेवेन्यू का 9% शुल्क के रूप में मिलेगा।

4- रेलटेल (RailTel Corporation of India)

नवरत्न पीएसयू रेलटेल को वेस्टर्न कोलफील्ड्स से 164.79 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है। कंपनी को 60 महीनों के लिए किराए के आधार पर एमपीएलएस वीपीएन नेटवर्क स्थापित करना है। इस प्रोजेक्ट को सितंबर 2031 तक पूरा करना है।

5- टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (Tata Motors PV)

कंपनी ने जानकारी दी है कि भारी बारिश और बाढ़ की वजह से गुजरात के साणंद प्लांट और आसपास के सप्लायर फैसिलिटीज में आई मुश्किलें खत्म हो गई हैं और कामकाज चालू हो गया है। कंपनी का अनुमान है कि इस प्राकृतिक आपदा से 35-40 करोड़ रुपये का नॉन मैटेरियरल नुकसान हुआ है, जबकि बीमा दावा 30 करोड़ रुपये से कम रहने की उम्मीद है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इससे उत्पादन, संचालन या वित्तीय स्थिति पर कोई गंभीर प्रभाव नहीं पड़ा है।

6- लेमन ट्री होटल्स (Lemon Tree Hotels)

हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की इस प्रमुख कंपनी ने गुजरात के भरूच में नया होटल खोलकर अपनी मौजूदगी को और मजबूत किया है। ये गुजराज में कंपनी का 12वां एक्टिव होटल है। कंपनी के 20 और होटल पाइपलाइन में हैं। नए होटल का प्रबंधन कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी कार्नेशन होटल्स करेगी।

7- हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL)

NCLT की बेंगलुरु पीठ ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स और साइएंट (Cyient) के 50:50 हिस्सेदारी वाले डॉरमेंट जॉइंट वेंचर इन्फोटेक एचएएल लिमिटेड को बंद करने का आदेश दिया है। इसके लिक्विडेशन की प्रक्रिया मार्च 2024 में शुरू हुई थी और इस वेंचर के क्लोजर होने की वजह से एचएएल के रक्षा कार्यक्रमों या बैलेंस शीट पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

8- टॉरेंट पावर (Torrent Power)

टॉरेंट पावर के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) सौरभ मशरूवाला ने 20 अगस्त 2026 से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी ने 21 अगस्त 2026 से विकास पोद्दार को नया सीएफओ नियुक्त किया है।

9- रैलिस इंडिया (Rallis India)

कंपनी ने बताया है कि उसके सीएफओ भास्कर स्वामीनाथन टाटा समूह की दूसरी कंपनी में शामिल होने के लिए 4 नवंबर 2026 से अपने पद से इस्तीफा देंगे। कंपनी उसी तारीख से श्रीधर राधाकृष्णन को नया सीएफओ नियुक्त करेगी।

10- एफएमसीजी शेयर (Adani Wilmar, Patanjali, Marico, Agro Tech)

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा उपभोक्ताओं को खुला खाद्य तेल न खरीदने की सलाह देने के बाद अडानी विल्मर, पतंजलि फूड्स, मैरिको और एग्रो टेक फूड्स के शेयर फोकस में रहेंगे। एफडीए ने मिलावट सहित दूसरे उल्लंघनों को देखते हुए खाद्य तेल क्षेत्र के लिए कंप्लायंस ऑर्डर भी जारी किया है।

11- निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस (Niva Bupa Health Insurance)

हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी ने बताया है कि बीमा नियामक IRDAI ने FY25 के लिए लागू एक्सपेंस ऑफ मैनेजमेंट (EoM) सीमाओं का उल्लंघन करने के लिए उसे चेतावनी दी है। इसके साथ ही 19 अगस्त 2026 से 6 महीने की अवधि के लिए कंपनी के नए व्यावसायिक स्थान खोलने पर रोक लगा दी है।

12- अमागी मीडिया लैब्स (Amagi Media Labs)

क्लाउड-आधारित SaaS कंपनी अमागी मीडिया लैब्स के शेयर फोकस में रहेंगे क्योंकि कंपनी ने गुरुवार को 600 करोड़ रुपये का ब्लॉक डील लॉन्च किया है। यह डील कंपनी की कुल इक्विटी का 5% रिप्रेजेंट करती है।

13- केफिन टेक्नोलॉजीज (KFin Technologies)

केफिन टेक में एक बड़ी ब्लॉक डील देखने को मिली, जहां जनरल अटलांटिक सिंगापुर ने 925 रुपये प्रति शेयर के औसत मूल्य पर 1400 करोड़ रुपये में 1.51 करोड़ शेयर (8.8% हिस्सेदारी) बेचे। इस डील में इंवेस्को म्यूचुअल फंड ने 400 करोड़ रुपये में 2.5% हिस्सेदारी खरीदी, जबकि मिराए एसेट MF (1.5%), कोटक महिंद्रा MF (1.2%) और एचएसबीसी MF (1%) ने भी खरीदारी की।

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