सुभाष चंद्रा की मुश्किल बढ़ी, अब CBI ने लोन फ्रॉड मामले में केस दर्ज किया

एस्सेल ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन सुभाष चंद्रा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब सीबीआई ने एक लोन फ्रॉड मामले में उनके और दूसरे लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। यह मामला 1,322 करोड़ रुपये से ज्यादा का है। 31 अगस्त को फाइल एफआईआर के मुताबिक, यह लोन एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने दिया था।

पहले LIC HF ने मामले में की थी शिकायत

इस मामले में पहले LIC Housing Finance ने शिकायत की थी। इसमें उसने आरोप लगाया था कि चंद्रा, लोन लेने वाली कंपनियों और उनके डायरेक्टर्स ने लोन लेने के लिए फर्जी डॉक्युमेंट्स इस्तेमाल किए। इतना ही नहीं उन्होंने ऐसे डॉक्युमेंट्स पेश किए जिनमें चंद्रा का नेटवर्थ बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए थे। अब CBI ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट सहित दूसरे आरोपों में मामला दर्ज किया है।

LIC HF ने चंद्रा की गारंटी पर दिए थे लोन

LIC Housing Finance ने मार्च 2018 में वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड और पैन इंडिया इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को बिजनेस के विस्तार से लिए 500 करोड़ रुपये का लोन दिया था। इस लोन के लिए चंद्रा ने पर्सनल गारंटी दी थी। अगस्त 2018 में LICHF ने और 480 करोड़ रुपये का लोन Digital Subscriber Management and Consultancy Services और Spririt Infrapower and Multiventures को एक रेंटल डिस्काउंटिंग फैसिलिटी के तहत दिया। इस लोन के लिए भी चंद्रा ने अपनी पर्सनल गारंटी दी थी।

नेटवर्थ बढ़ाकर दिखाने के लिए फर्जी डॉक्युमेंट्स का इस्तेमाल

शिकायत में यह कहा गया है कि पहला लोन आंशिक रूप से नेटवर्थ सर्टिफिकेट के आधार पर मंजूर किया गया था। चंद्रा ने यह सर्टिफिकेट पेश किया था, जिसमें उनका नेटवर्थ 31 मार्च, 2017 को 59,113 करोड़ रुपये बताया गया था। दूसरा लोन आंशिक रूप से दूसरे सर्टिफिकेट के आधार पर मंजूर किया गया था। इस सर्टिफिकेट में नेटवर्थ 40,562 करोड़ रुपये बताया गया था।

LIC HF के दोनों लोन पर कंपनियों ने किए डिफॉल्ट

बाद में दोनों ही लोन पर कंपनियों ने डिफॉल्ट किया। वसंत सागर के लोन में 570.50 करोड़ रुपये आउटस्टैंडिंग अमाउंट (बकाया पैसा) है, जबकि दूसरे लोन में आउटस्टैंडिंग अमाउंट 507.25 करोड़ रुपये है। LIC Housing Finance ने अपनी शिकायत में यह कहा है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि चंद्रा ने बाद में पर्सनल इनसॉल्वेंसी प्रोसिडिंग्स के दौरान सर्टिफिकेट में बताए गए अपने नेटवर्थ को मानने से इनकार कर दिया।

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चंद्रा ने खुद अपने नेटवर्थ को मानने से इनकार कर दिया

शिकायत के मुताबिक, चंद्रा ने कहा कि 2024 में उनका नेटवर्थ 31.79 करो़ड़ रुपये था और यहां तक कि 2017-18 में भी यह 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं था। LICHF ने कहा है कि चंद्रा ने लोन लेने वाली कंपनियों, उनके डायरेक्टर्स और अधिकारियों के साथ मिलकर यह फ्रॉड किया। नेटवर्थ बढ़ाकर दिखाने के लिए फर्जी डॉक्युमेंट्स इस्तेमाल किए गए। बाद में लोन लेने वाली कंपनियों ने लोन के पैसे का दुरुपयोग किया।

सुभाष चंद्रा के ₹6.5 करोड़ के रिपेमेंट प्लान को मंजूरी देने वाले आदेश पर रोक, NCLT की 5 सदस्यीय बेंच का फैसला

NCLT ने Zee Entertainment के चेयरमैन एमेरिटस सुभाष चंद्रा के ₹6.5 करोड़ के रिपेमेंट प्लान को मंजूरी देने वाले पिछले आदेश पर रोक लगा दी है। CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 सितंबर को मामले की सुनवाई के लिए बनी पांच सदस्यीय बेंच ने यह फैसला लिया।

टाई-ब्रेकर जज की राय अंतिम फैसला नहीं

पांच सदस्यीय बेंच ने कहा कि टाई-ब्रेकर जज की राय बहुमत का फैसला नहीं है। इसलिए इसे मामले का अंतिम आदेश नहीं माना जा सकता।

दरअसल, इस मामले की सुनवाई दिल्ली NCLT की तीन सदस्यीय बेंच कर रही थी। सुभाष चंद्रा के रिपेमेंट प्लान को मंजूरी देने पर बेंच के सदस्यों के बीच सहमति नहीं बन सकी। ऐसे में टाई-ब्रेकर जज की राय के आधार पर प्लान को मंजूरी देने की बात सामने आई थी।

₹22,007 करोड़ के दावों के बदले ₹6.5 करोड़ का प्लान

सुभाष चंद्रा ने ₹22,007 करोड़ के मंजूर दावों के मुकाबले सिर्फ ₹6.5 करोड़ का रिपेमेंट प्लान पेश किया था। इस पर कुछ बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने कड़ी आपत्ति जताई थी।

Canara Bank, Axis Bank, HDFC Bank और LIC Housing Finance ने इस प्लान के खिलाफ वोट किया था। इन सभी ने NCLT से प्लान को खारिज करने की मांग की।

बैंकों ने क्यों किया विरोध?

बैंकों और वित्तीय संस्थानों का कहना था कि ₹6.5 करोड़ की रकम बेहद कम है। उनके मुताबिक, यह सुभाष चंद्रा की कुल संपत्तियों की वैल्यू का सिर्फ 0.028% है।

इसलिए उनका मानना था कि इतनी कम रकम वाला रिपेमेंट प्लान मंजूर नहीं किया जाना चाहिए।

पांच सदस्यीय बेंच करेगी मामले की सुनवाई

अब मामले की सुनवाई NCLT की पांच सदस्यीय बेंच करेगी। इसमें न्यायिक सदस्य अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल, बाचू वेंकट बलराम दास और महेंद्र खंडेलवाल शामिल हैं।

तकनीकी सदस्यों में अतुल चतुर्वेदी और रविंद्र चतुर्वेदी शामिल हैं। अब इस मामले में आगे का फैसला इस बड़ी बेंच की सुनवाई के बाद होगा।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

सुभाष चंद्रा के खिलाफ ₹22006 करोड़ के लोन पर 99.97% हेयरकट? सरकारी सूत्रों ने कहा- ये सही तस्वीर नहीं

एस्सेल ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा से जुड़े एक मामले में खबर चल रही कि बैंकों ने ₹22,000 करोड़ से ज्यादा के कर्ज पर 99.97% का हेयरकट ले लिया। यानी लगभग पूरा पैसा डूब गया। लेकिन सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह तस्वीर पूरी तरह सही नहीं है।

असल में ₹22,006 करोड़ की रकम उन दावों की है, जो सुभाष चंद्रा के खिलाफ एक पर्सनल गारंटर के रूप में स्वीकार किए गए हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि उन्होंने खुद ₹22,006 करोड़ का कर्ज लिया था।

₹22,006 करोड़ का आंकड़ा कहां से आया?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, ₹22,006 करोड़ की रकम अलग-अलग Essel और Zee समूह से जुड़ी कंपनियों के कर्ज से संबंधित दावों की है। इन मामलों में सुभाष चंद्रा पर्सनल गारंटर थे।

यानी कर्ज कंपनियों ने लिया था। सुभाष चंद्रा मुख्य उधारकर्ता नहीं थे। इसलिए यह कहना कि बैंकों ने सुभाष चंद्रा को सीधे ₹22,006 करोड़ उधार दिए थे, सही नहीं होगा।

हर कर्ज पर शुरुआत से गारंटी नहीं थी

सूत्रों का कहना है कि करीब ₹2,574 करोड़ के कर्ज ऐसे थे, जिनमें शुरुआत से ही सुभाष चंद्रा की पर्सनल गारंटी दी गई थी।

बाकी मामलों में उनकी गारंटी बाद में अतिरिक्त सुरक्षा के तौर पर जोड़ी गई थी। इसलिए ₹22,006 करोड़ की पूरी रकम को ऐसा कर्ज मान लेना, जो सिर्फ उनकी गारंटी के भरोसे दिया गया था, सही तस्वीर पेश नहीं करता।

मामला शुरू कैसे हुआ?

यह इंसॉल्वेंसी मामला कंपनियों के खिलाफ नहीं, बल्कि सुभाष चंद्रा के खिलाफ एक पर्सनल गारंटर के रूप में शुरू हुआ।

मामला तब सामने आया जब Vivek Infracon ने Indiabulls से कर्ज लिया। उस कर्ज के लिए सुभाष चंद्रा ने पर्सनल गारंटी दी थी। बाद में कर्ज डिफॉल्ट हो गया और मामला इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया तक पहुंच गया।

NCLT ने क्या मंजूर किया?

NCLT ने जिस रिपेमेंट प्लान को मंजूरी दी है, उसके तहत सुभाष चंद्रा की तरफ से करीब ₹6.25 करोड़ का भुगतान होगा।

यह रकम उनकी वर्तमान और वसूली योग्य व्यक्तिगत संपत्तियों के आधार पर तय की गई है। यानी अदालत ने उनकी मौजूदा उपलब्ध संपत्ति को देखते हुए यह योजना मंजूर की है।

क्या सिर्फ ₹6.25 करोड़ ही मिलेंगे?

नहीं। यही सबसे बड़ा भ्रम है। रिपेमेंट प्लान में मुख्य उधारकर्ता कंपनियों से भी करीब ₹1,494 करोड़ की रिकवरी का प्रावधान है।

इसके अलावा बैंकों और दूसरे कर्जदाताओं के पास उन कंपनियों, गिरवी रखी गई संपत्तियों और दूसरी सिक्योरिटीज से वसूली के रास्ते खुले रहेंगे। यानी यह मामला सिर्फ सुभाष चंद्रा की निजी संपत्ति से होने वाली रिकवरी तक सीमित नहीं है।

99.97% हेयरकट का मतलब क्या है?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, 99.97% का आंकड़ा सिर्फ उस रकम से जुड़ा है जो सुभाष चंद्रा से एक पर्सनल गारंटर के तौर पर वसूल की जा सकती थी। इसे ₹22,000 करोड़ के पूरे बैंक कर्ज पर अंतिम नुकसान बताना सही नहीं है।

दूसरे शब्दों में कहें तो यह पर्सनल गारंटर की क्षमता से जुड़ी रिकवरी का आंकड़ा है, न कि पूरे कर्ज के डूबने का।

कर्जदाताओं ने क्यों किया विरोध?

कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने इस प्लान का विरोध किया था। इनमें LIC Housing Finance, HDFC Bank, Axis Bank, Canara Bank, RBL Bank और Union Bank जैसे नाम शामिल हैं।

कर्जदाताओं का कहना था कि सुभाष चंद्रा की पुरानी घोषित नेटवर्थ और मौजूदा नेटवर्थ में बड़ा अंतर दिखाई देता है। इसलिए उनकी संपत्तियों की और गहराई से जांच होनी चाहिए।

नेटवर्थ को लेकर क्या सवाल उठे?

क्रेडिटर्स ने पुराने नेटवर्थ सर्टिफिकेट का हवाला दिया। इन दस्तावेजों के मुताबिक, सुभाष चंद्रा की नेटवर्थ 2017 में करीब ₹45,888 करोड़ थी। 2018 में यह करीब ₹40,562 करोड़ बताई गई थी।

वहीं मौजूदा इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया में उनकी घोषित नेटवर्थ करीब ₹31.79 करोड़ बताई गई। इसी अंतर को लेकर कई सवाल उठे।

फिर भी प्लान कैसे पास हुआ?

विरोध के बावजूद इस रिपेमेंट प्लान को कर्जदाताओं के 80.81% वोट मिले। इसके बाद NCLT ने कहा कि उठाई गई आपत्तियां इतनी मजबूत नहीं हैं कि क्रेडिटर्स द्वारा मंजूर किए गए प्लान को पलटा जा सके।

इसलिए ट्रिब्यूनल ने योजना को मंजूरी दे दी।

सुभाष चंद्रा का क्या कहना है?

सुभाष चंद्रा का कहना है कि Essel समूह से जुड़ी कंपनियां अब तक कर्जदाताओं को करीब ₹43,000 करोड़ का भुगतान कर चुकी हैं। हालांकि, यह आंकड़ा अलग-अलग कंपनियों द्वारा समय-समय पर किए गए भुगतानों को शामिल करता है।

पूरे मामले का सार यह है कि 99.97% का आंकड़ा सुनने में जितना बड़ा लगता है, मामला उतना सीधा नहीं है। यह ₹22,006 करोड़ के पूरे बैंक कर्ज के डूबने की कहानी नहीं है। यह एक पर्सनल गारंटर से होने वाली सीमित रिकवरी का मामला है। वहीं मुख्य कर्जदार कंपनियों, सिक्योरिटीज और दूसरी संपत्तियों से वसूली के रास्ते अभी भी मौजूद हैं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: 28 अगस्त को इन 10 शेयरों पर रहेगी नजर, दिख सकती है बड़ी हलचल

Stocks to Watch: शुक्रवार, 28 अगस्त के कारोबार में कई शेयर खबरों के चलते फोकस में रह सकते हैं। कहीं AI से जुड़ा बड़ा अपडेट है। कहीं ब्लॉक डील और ऑर्डर की खबर है। वहीं कुछ कंपनियों में निवेश और मैनेजमेंट से जुड़े अहम अपडेट आए हैं।

Adani Power

पावर कंपनी Adani Power ने अपनी सब्सिडियरी कंपनी Chandenvalle Infra Park में पूरी हिस्सेदारी बेचने का समझौता किया है। यह हिस्सेदारी AdaniConneX Private Limited को बेची जाएगी। डील की वैल्यू करीब ₹535.69 करोड़ है। अंतिम रकम क्लोजिंग डेट के बदलावों पर निर्भर करेगी।

New India Assurance Company

सरकारी इंश्योरेंस कंपनी New India Assurance Company को ₹781.39 करोड़ का इनकम टैक्स रिफंड मिला है। इसमें ₹59.63 करोड़ का ब्याज भी शामिल है। यह रिफंड असेसमेंट ईयर 2022-23 से जुड़ा है। इनकम टैक्स विभाग ने शिकायत के समाधान के बाद यह रकम जारी की है।

Lenskart

आईवियर रिटेल कंपनी Lenskart में बड़ी ब्लॉक डील हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक Alphawave करीब 1.2% हिस्सेदारी बेच सकता है। डील का आकार करीब ₹1,313 करोड़ है। फ्लोर प्राइस ₹630 प्रति शेयर रखा गया है, जो मौजूदा भाव से करीब 1.7% कम है।

NBCC (India)

सरकारी कंस्ट्रक्शन कंपनी NBCC को पांच नए वर्क ऑर्डर मिले हैं। इनकी कुल वैल्यू ₹134.27 करोड़ है। इसमें स्कूल कैंपस, एजुकेशन सेंटर और Canara Bank की बिल्डिंग से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। ऑर्डर में तीन केंद्रीय विद्यालयों के प्रोजेक्ट भी हैं।

Wipro

आईटी सर्विसेज कंपनी Wipro ने Google Cloud के साथ अपनी पार्टनरशिप बढ़ाई है। इसका मकसद Gemini Enterprise और AI को बड़े स्तर पर अपनाना है। Wipro अपने कारोबार में भी Gemini Enterprise का इस्तेमाल करेगी। साथ ही 10,000 से ज्यादा AI सर्टिफाइड विशेषज्ञों को इस टेक्नोलॉजी के लिए तैयार किया जाएगा।

Life Insurance Corporation of India

सरकारी इंश्योरेंस कंपनी LIC ने Bajaj Finance के NCD में ₹5,000 करोड़ का निवेश किया है। LIC ने ₹1 लाख फेस वैल्यू वाले 5 लाख NCD खरीदे हैं। यह निवेश कंपनी ने रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया है। NCD यानी नॉन कन्वर्टिबल डिबेंचर एक तरह का डेट इंस्ट्रूमेंट है।

RPP Infra Projects

इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी RPP Infra Projects को बड़ा झटका लगा है। तमिलनाडु सरकार ने चेन्नई में प्रस्तावित Global Sports City प्रोजेक्ट को नए सिरे से तैयार करने का फैसला किया है। इसके चलते कंपनी का ₹205.89 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गया है।

Bharat Petroleum Corporation

सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनी Bharat Petroleum Corporation (BPCL) के चेयरमैन और MD संजय खन्ना ने कहा कि एनर्जी सेक्टर में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। उन्होंने कहा कि ग्राहकों को E10 पेट्रोल का विकल्प दिया जा सकता है। लेकिन, E20 को बंद नहीं किया जाएगा।

Zee Entertainment Enterprises

मीडिया कंपनी Zee Entertainment Enterprises से जुड़ा अहम अपडेट आया है। NCLT ने सुभाष चंद्रा की पर्सनल इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रक्रिया में प्रस्तावित रिपेमेंट प्लान को मंजूरी दे दी है। HDFC Bank इस आदेश के खिलाफ NCLAT में अपील करने के विकल्प पर विचार कर रहा है।

RVNL

सरकारी रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी RVNL ने राकेश भल्ला को दोबारा Additional Director नियुक्त किया है। उन्हें इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की जिम्मेदारी दी गई है। उनकी दोबारा नियुक्ति 25 अगस्त 2026 से प्रभावी है। इससे पहले उन्हें 13 अगस्त को इस पद पर नियुक्त किया गया था।

पुरानी गाड़ियों के लिए E10 पेट्रोल देने पर विचार, E20 को हटाने का कोई प्लान नहीं: BPCL

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।