Stocks to Watch: एशियाई बाजारों में रौनक के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू स्टॉक मार्केट में लाल शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 83.00 प्वाइंट्स यानी 0.36% की फिसलन के साथ 22,767.50 पर है। एक कारोबारी दिन पहले 13 अक्टूबर को निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स 1109.10 प्वाइंट्स यानी 1.54% की बढ़त के साथ 73,073.88 और निफ्टी भी 358.60 प्वाइंट्स यानी 1.60% की मजबूती के साथ 22,721.95 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।
Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस
Hero Motors Q1 (Consolidated YoY)
जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर हीरो मोटर्स का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 115.3% बढ़कर ₹10.2 करोड़ और रेवेन्यू 24.9% उछलकर ₹319.3 करोड़ पर पहुंच गया।
Tata Elxsi Q2 (YoY)
सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर टाटा एलेक्सी का प्रॉफिट 10% बढ़कर ₹170.3 करोड़ और रेवेन्यू 15% उछलकर ₹1,055.7 करोड़ पर पहुंच गया।
SS Retail Q1 (Consolidated YoY)
जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर एसएस रिटेल का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 59.4% बढ़कर ₹23.7 करोड़ और रेवेन्यू 58.6% उछलकर ₹789 करोड़ पर पहुंच गया।
Anand Rathi Share and Stock Brokers Q2 (Consolidated YoY)
सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 50.3% बढ़कर ₹41.9 करोड़ और रेवेन्यू 20.3% उछलकर ₹273.2 करोड़ पर पहुंच गया।
Transformers and Rectifiers India Q2 (Consolidated YoY)
सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर ट्रांसफॉर्मर्स एंड रेक्टिफायर्स इंडिया का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 135.3% बढ़कर ₹79.8 करोड़ और रेवेन्यू 60.7% उछलकर ₹739.4 करोड़ पर पहुंच गया।
GTPL Hathway Q2 (Consolidated YoY)
सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर जीटीपीएल हाथवे ₹9.2 करोड़ के कंसालिडेटेड प्रॉफिट से ₹90 लाख के घाटे में आ गई तो लेकिन रेवेन्यू 19.2% उछलकर ₹1,143.1 करोड़ पर पहुंच गया।
Den Networks Q2 (Consolidated YoY)
सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर डेन नेटवर्क्स का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 3.7% बढ़कर ₹36.5 करोड़ पर पहुंच गया लेकिन रेवेन्यू 3.7% फिसलकर ₹232.6 करोड़ पर पहुंच गया।
Zydus Lifesciences
अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने जाइडस लाइफसाइंसेज की अहमदाबाद के मोरैया में स्थित मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी की जांच की। 5-13 अक्टूबर तक चली जांच के बाद पांच ऑब्जर्वेशंस जारी हुए हैं।
Hyundai Motor India
हुंडई मोटर ग्रुप ने भारत के लिए एक बड़ी निवेश योजना का ऐलान किया है, जिसके तहत 2026 और 2032 के बीच $1550 करोड़ का निवेश होगा।
Bharat Electronics Ltd (BEL)
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स को 17 सितंबर से ₹533 करोड़ के अतिरिक्त ऑर्डर मिले हैं। ये ऑर्डर्स कम्युनिकेशन इक्विपमेंट, एवियोनिक्स, साइबर सिक्योरिटी सॉल्यूशन, ड्रोन, जैमर, सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन, अपग्रेड, स्पेयर पार्ट्स और सर्विस से जुड़े हैं।
SBI Funds Management
एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के बोर्ड ने आर एस श्रीनिवास जैन को 13 अक्टूबर से ज्वाइंट सीईओ नियुक्त किया है।
Bank of Baroda
यूएई एक्सचेंज और एनएमसी हेल्थकेयर ग्रुप के फाउंडर बीआर शेट्टी ने बैंक ऑफ बड़ौदा समेत 26 से $1500 करोड़ का हर्जाना मांगा है। उनका आरोप है कि सरकारी बैंक और उसके कुछ अधिकारी ग्रुप की कंपनियों से जुड़े फर्जीवाड़े में शामिल थे और उन गारंटी के आधार पर उनके खिलाफ दावे किए, जिन पर उन्होंने कभी साइन नहीं किए थे। उन्होंने मुकदमा दायर करने की तारीख से लेकर पेमेंट या वसूली की तारीख तक हर्जाने पर सालाना 18% की दर से ब्याज भी मांगा है।
Hindustan Oil Exploration Company
हिंदुस्तान ऑयल एक्सप्लोरेशन कंपनी के बोर्ड ने देबब्रत दास को 16 अक्टूबर से सीएफओ नियुक्त किया है। मौजूदा सीएफओ ने निजी कारणों से 15 अक्टूबर से CFO पद छोड़ने का फैसला किया है, लेकिन वह कंपनी के वित्तीय सलाहकार की भूमिका में कंपनी से जुड़े रहेंगे।
Adani Enterprises
अदाणी एंटरप्राइजेज ने देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटर इक्विपमेंट बनाने और एसेंबली को लेकर जैबिल के साथ 50:50 जॉइंट वेंचर बनाएगी, जिसके लिए नॉन-बाइंडिंग एमओयू हुआ है।
Polycab India
NCLAT (नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल), नई दिल्ली ने NCLT (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ), अहमदाबाद के 7 अक्टूबर के उस आदेश पर रोक लगा दी है और उसे फिलहाल टाल दिया है, जिसमें एसियर मेटल्स की IBC (इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड) के तहत पॉलीकैब इंडिया के खिलाफ दायर याचिका को स्वीकार करने और CIRP (कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस) शुरू करने का निर्देश दिया गया था। यह मामला ₹2.79 करोड़ के ऑपरेशनल डेट से जुड़ा है।
Ujjivan Small Finance Bank
उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक के बोर्ड की 16 अक्टूबर को बैठक में कारोबारी नतीजे के साथ-साथ इक्विटी शेयरों के प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए फंड जुटाने पर भी विचार करेगा।
Lemon Tree Hotels
लेमनट्री होटल्स ने अपने होटल पोर्टफोलियो को बढ़ाते हुए ‘कीज सेलेक्ट बाय लेमन ट्री होटल्स’ की साइनिंग का ऐलान किया है। यह प्रॉपर्टी फ्रेंचाइजी एग्रीमेंट के तहत ऑपरेट होगी।
Stocks to Watch: इन पर भी रहेगी नजर
आज इन कंपनियों के आएंगे रिजल्ट: आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी, एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज़, केनरा बैंक, बजाज कंज्यूमर केयर, भेल, आदित्य बिड़ला मनी, सिएट, एलेकॉन इंजीनियरिंग कंपनी, एमवी फोटोवोल्टिक पावर, बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स (ग्रो), सोनासेलेक्शन इंडिया, टाटा टेक्नोलॉजीज, लीला पैलेस होटल्स एंड रिसॉर्ट्स
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Hotel Stocks : शादियों के सीजन में होटल सेक्टर की डिमांड बढ़ सकती है। जेफरीज का कहना है कि अगले साल शादियों के शुभ मुहूर्त के ज्यादा दिन होंगे। इसको ध्यान में रखते हुए जेफरीज होटल स्पेस पर बुलिश है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि वित्त वर्ष 2028 में शादी के 95 शुभ मुहूर्त हैं। सामान्य तौर पर 65-70 के मुकाबले शुभ मुहूर्त 40% ज्यादा हैं। वित्त वर्ष 2027 की चौथी तिमाही से वित्त वर्ष 2028 की तीसरी तिमाही तक शादी के दिनों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। शादी की ज्यादा तारीखों से होटल डिमांड और रेवेन्यू बढ़ेगा। शादियों से कमरे के किराए, बैंक्वेट और F&B कमाई बढ़ेगी। होटल की पूरी कैपेसिटी का बेहतर इस्तेमाल होने की उम्मीद है। डिमांड का बड़ा हिस्सा घरेलू डेस्टिनेशन में हो सकता है। यह होटल सेक्टर के लिए पॉजिटिव फैक्टर है।
बजेगी शहनाई, बढ़ेगी कमाई
2026 के शुभ मुहूर्त पर नजर डालें तो 21से 26 नवंबर के बीच शादी के शुभ मुहूर्त हैं। उसके बाद 1 से 13 दिसंबर के बीच शादी के शुभ मुहूर्त हैं। जेफरीज का कहना है कि इससे होटल स्टॉक्स खास कर रॉयल ऑर्किड होटल्स, लेमन ट्री होटल्स, शैले होटल्स, द लीला और कामत होटल्स को अच्छा फायदा हो सकता है। जेफरीज का कहना है कि इस बार के शादियों के सीजन में लग्जरी शादियों की बुकिंग बढ़ेगी। Q4FY27- Q3FY28 के बीच लग्जरी शादियों की बुकिंग में तेज इजाफा देखने को मिल सकता है।
होटल कपनियों की बल्ले-बल्ले
गौरतलब है कि शादियों और सर्दियों के सीजन की शुरुआत के करीब आने के साथ ही भारतीय होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में जोरदार डिमांड देखी जा रही है। कई लोकप्रिय होटलों में शादी से जुड़े कारोबार में डबल डिजिट ग्रोथ देखने को मिली है। नवंबर से फरवरी जैसे प्रमुख महीनों के लिए अधिकांश बुकिंग लगभग पूरी हो चुकी हैं। 2027 तक एडवांस बुकिंग हो चुकी लोग अब 4 से 6 महीने पहले ही बुकिंग करा रहे हैं। कई होटलों में साल 2027 के लिए भी एडवांस बुकिंग और पूछताछ आने लगी है।
विभिन्न जगहों पर मांग पर नजर डालें तो उदयपुर, जयपुर, गोवा, गुरुग्राम, करनाल और टियर-2 शहरों में डेस्टिनेशन वेडिंग के कारण कमरों, बैंक्वेट हॉल, भोजन और पेय पदार्थों की मांग काफी बढ़ गई है। इसके चलते होटल कंपनियों के रेवेन्यू ग्रोथ में जोरदार उछाल आया है। Hilton जैसी कंपनियों का वेडिंग रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले 50% से ज्यादा हो गया है। वहीं, Sayaji Hotels ने उदयपुर प्रॉपर्टी में वेडिंग रेवेन्यू में 77% की सालाना ग्रोथ हासिल की की है।
Jefferies के साथ ही होटर शेयरों पर मोतीलाल ओसवाल भी बुलिश
ऐसे में Jefferies और मोतीलाल ओसवाल जैसी ब्रोकरेज फर्म्स का मानना है कि इस वेडिंग सीजन से होटल कंपनियों की ऑक्यूपेंसी, एवरेज रूम रेट्स (ARR) और कुल आय में भारी ग्रोथ देखने को मिल सकती है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है की वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में होटल कंपनियों की प्रति उपलब्ध कमरे से होने वाली कमाई (RevPAR) में 10 से 12% की बढ़ोतरी हो सकती है। इसकी वजह रूम बुकिंग में बढ़ोतरी और किराए की दरों में बढ़त है। इस ग्रोथ का पहला ट्रिगर बड़े इवेंट्स हैं। दूसरा ट्रिगर है शादी-ब्याह का सीज़न। वित्त वर्ष 2028 में शादियों के लिए लगभग 95 शुभ दिन होने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2027 में यह संख्या 69 थी। इसका मतलब है कि शुभ दिनों की संख्या में लगभग 40% की बढ़ोतरी होगी। इससे होटल और रिसॉर्ट बुकिंग बढ़ सकती है, और कंपनियां सिर्फ़ कमरों के किराए के अलावा बैंक्वेट हॉल और कैटरिंग सेवाओं से भी ज़्यादा कमाई करेंगी।
मोतीलाल ओसवाल की टॉप पिक्स
स्टॉक्स की बात करें तो मोतीलाल ओसवाल ने लेमन ट्री होटल्स (Lemon Tree Hotels) को ₹140 के टारगेट प्राइस के साथ ‘खरीदने’ (buy) की रेटिंग दी है। इसमें लगभग 34% की बढ़ोतरी का अनुमान है। वेंटिव हॉस्पिटैलिटी (Ventive Hospitality) के लिए ₹750 का टारगेट तय किया गया है,जो मौजूदा भाव से लगभग 34% की बढ़त दिखाता है। वहीं, इंडियन होटल्स के लिए ₹870 का टारगेट दिया गया है,जो मौजूदा कीमत से लगभग 22% ज़्यादा है। ब्रोकरेज का मानना है कि अच्छी बुकिंग,कमरों की कम उपलब्धता,बड़े इवेंट्स और शादी का सीज़न आगे भी इस सेक्टर की ग्रोथ को सपोर्ट देते रहेंगे।
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तमिलनाडु के असनूर इलाके में एक सामान्य सफर उस वक्त डरावने अनुभव में बदल गया, जब जंगल की तरफ से निकला एक जंगली हाथी अचानक एक कार के सामने आ गया। बेंगलुरु-दिंडीगुल राष्ट्रीय राजमार्ग पर चल रही गाड़ी में बैठे यात्रियों ने शायद सोचा भी नहीं होगा कि अगले कुछ सेकंड में उन्हें इतने करीब से हाथी का सामना करना पड़ेगा।
कार मैसूर से कोयंबटूर की ओर जा रही थी। इसी दौरान हाथी सड़क के पास पहुंचा और वाहन के बेहद नजदीक आ गया। देखते ही देखते उसने कार पर अपना पैर रख दिया। विशाल जानवर को इतने करीब देखकर अंदर बैठे यात्रियों की घबराहट बढ़ गई।
कुछ सेकंड का खौफ
हाथी के वजन से कार का साइड मिरर टूट गया, लेकिन राहत की बात यह रही कि वाहन में सवार किसी भी व्यक्ति को चोट नहीं आई। घटना के बाद यात्रियों के लिए सबसे बड़ी राहत यही थी कि हाथी ने ज्यादा देर तक वाहन के आसपास रुकने के बजाय वहां से दूरी बना ली। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर दिखा दिया कि जंगल से होकर गुजरने वाले हाईवे पर कुछ सेकंड की लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है।
सड़क नहीं, हाथियों का पुराना रास्ता भी है यह इलाका
असनूर का इलाका जंगलों से घिरा हुआ है और यहां से गुजरने वाले रास्तों पर वन्यजीवों की आवाजाही देखी जाती है। आसपास के जंगल चामराजनगर क्षेत्र और बांदीपुर टाइगर रिजर्व से जुड़े वनक्षेत्रों के करीब हैं।
हाथियों के लिए जंगल से जंगल तक आने-जाने के प्राकृतिक रास्ते मौजूद हैं। ऐसे में जब हाईवे इन इलाकों के बीच से गुजरता है, तो कई बार इंसानों और वन्यजीवों का रास्ता एक ही जगह पर आ मिलता है।
Wild Elephant Intercepts Vehicle Along Bengaluru–Dindigul Highway near Asanur
Karnataka-Tamilnadu Border
Motorists traveling along the national highway through the reserve forest area in Asanur, near the #TamilNadu–#Karnataka border, experienced moments of sheer terror after a lone #elephant blocked their path and approached an occupied car within arm’s reach.
The incident occurred during daylight hours along the #Bengaluru–Dindigul National Highway near Asanur. A car was forced to halt in the middle of the road as the pachyderm crossed over from the dense tree line.
Video footage captured by an occupant of a vehicle trailing behind showed the elephant walking directly up to the front passenger door of the stationary car. In a heart-stopping moment, the animal lifted its front leg onto the vehicle’s bodywork and extended its trunk toward the window, closely inspecting the occupants inside.
The driver and passengers remained completely still, resisting the urge to honk or make abrupt movements. After lingering by the door for several seconds, the elephant lowered its leg, brushed past the rear quarter panel, and continued ambling across the road into the adjoining thicket. No injuries or major structural damage were reported.The vehicle was travelling from #Mysuru to #Coimbatore.
Forest officials noted that elephants frequently cross this section of the corridor during seasonal movements.
वन विभाग लंबे समय से वाहन चालकों को आगाह करता रहा है कि जंगल वाले रास्तों पर जानवरों को देखकर रुकना या उन्हें खाना देना भारी पड़ सकता है। खासतौर पर सब्जियों, गन्ने या अन्य खाद्य सामग्री की मौजूदगी हाथियों को वाहनों के करीब ला सकती है।
एक बार अगर किसी हाथी को गाड़ियों से खाना मिलने लगे, तो वह वाहनों के पास आने का आदी हो सकता है। इससे अगली बार सामना होने पर स्थिति और ज्यादा खतरनाक बन सकती है।
ऐसे इलाकों में सफर करने वालों के लिए सबसे जरूरी बात है कि हाथी दिखाई देने पर वाहन से बाहर न निकलें और उसके करीब जाने की कोशिश न करें। हॉर्न बजाकर या रास्ता रोककर उसे परेशान करना भी जोखिम बढ़ा सकता है।
Lemon Tree Share Price: देश की दिग्गज हॉस्पिटैलिटी कंपनियों में शुमार लेमन ट्री होटल्स के शेयर आज कमजोर मार्केट सेंटिमेंट में भी चमक गए। शुरुआती कारोबार में आज सेंसेक्स (Sensex) लाल हो गया तो निफ्टी (Nifty) भी फिसलकर 22500 के करीब आ गया। वहीं दूसरी तरफ लेमन ट्री के शेयर 7% से अधिक उछल पड़े। ऐसा इसलिए क्योंकि कंपनी ने पश्चिम बंगाल में विस्तार करते हुए मशहूर हिल स्टेशन दार्जीलिंग में 65 कमरों वाला अपना पहला होटल खोलने का ऐलान किया है। इस ऐलान पर निवेशक चहक उठे। अभी इसके शेयर बीएसई पर 6.24% की मजबूती के साथ ₹110.75 पर है। इंट्रा-डे में यह 7.05% की बढ़त के साथ ₹111.60 तक पहुंच गया था।
दार्जीलिंग में Lemon Tree के पहले होटल की क्या है खास बात
लेमन ट्री होटल्स ने Keys Prima by Lemon Tree Hotels, Darjeeling की ओपनिंग का ऐलान किया है।
यह दार्जीलिंग में लेमन ट्री ग्रुप का पहला होटल है।
इसे लेमन ट्री होटल्स के पूर्ण मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी कार्नेशन होटल्स मैनेज करेगी।
यह होटल ओल्ड कचहरी रोड पर है।
कंपनी की तरफ से एक्सचेंज फाइलिंग में दी गई डिटेल्स के मुताबिक इसमें 65 कमरे हैं।
इसमें बार और फिटनेस सेंटर की भी सुविधा है।
इस होटल में 100 मेहमानों तक की व्यवस्था के लिए एक आउटडोर लॉन भी है।
यह होटल बागडोगरा एयरपोर्ट से करीब 70 किमी, दार्जीलिंग रेलवे स्टेशन से 2.5 किमी और लोकल बस स्टेशन से 1.7 किमी दूरी पर स्थित है।
दार्जीलिंग में अहम आकर्षण की बात करें तो यहां टाइगर हिल पर सनराइज, जू, हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट, तेनजिंग रॉक, जापानीज टेंपल और पीस पगोडा, रॉक गार्डेन, टी गार्डेन, रोपवे और बतासिया लूप हैं।
एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल
लेमन ट्री होटल्स के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। पिछले साल बीएसई पर 6 अक्टूबर 2025 को यह ₹174.25 पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 5 महीने में यह 42.78% टूटकर 16 मार्च 2026 को ₹99.70 पर आ गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
क्या हमने कभी ठहरकर यह सोचने की कोशिश की है कि हम कौन हैं? हमारा नाम, हमारा परिचय और हमारी व्यक्तिगत पहचान निश्चित ही हमारी अपनी है, लेकिन हमारे अस्तित्व की जड़ें बहुत पीछे तक जाती हैं। हमारे भीतर हमारे माता-पिता का अंश है, उनके भीतर हमारे दादा-दादी का, और उनके पीछे अनगिनत पीढ़ियों का वह इतिहास है जिसने हमारे वर्तमान को आकार दिया है। हमारे शरीर में रक्त के साथ उनकी विरासत प्रवाहित होती है, हमारे संस्कारों में उनकी छाप होती है और हमारे जीवन में उनके संघर्षों की अनुगूंज सुनाई देती है।
लेकिन आज की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि मनुष्य दुनिया को जानने के लिए बेचैन है और अपने भविष्य को लेकर चिंतित है, पर अपनी जड़ों को जानने के लिए उसके पास समय नहीं है। मोबाइल में हजारों तस्वीरें हैं और दुनिया की हर जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध है, मगर अपने ही परदादा की तस्वीर कहाँ है, उनका जीवन कैसा था और उन्होंने परिवार के लिए क्या किया, यह बताने वाला कोई नहीं है। हम भविष्य की दौड़ में इतने आगे निकल आए हैं कि उस अतीत को भूलते जा रहे हैं, जिसकी नींव पर हमारा वर्तमान खड़ा है।
यहीं से श्राद्ध पक्ष की सार्थकता आरंभ होती है। यह केवल पंचांग की कुछ तिथियां नहीं हैं; यह हमारी सामूहिक स्मृति को जगाने वाला वह अवसर है, जब वर्तमान कुछ क्षण के लिए अतीत के सामने खड़ा होता है और स्वीकार करता है कि हम अकेले नहीं हैं—हमारे अस्तित्व के पीछे अनेक पीढ़ियों का योगदान है।
‘श्राद्ध’ का वास्तविक अर्थ और पितृऋण
‘श्राद्ध’ शब्द का सीधा संबंध ‘श्रद्धा’ से है। इसलिए श्राद्ध का मूल अर्थ केवल पिंडदान, तर्पण या ब्राह्मण भोजन कराना ही नहीं है। ये भले ही परंपरागत विधियां हैं, लेकिन इनके केंद्र में जो मूल भाव है, वह है—अपने दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और आत्मीय स्मरण।
भारतीय सनातन परंपरा ने मृत्यु को संबंधों का पूर्ण विराम नहीं माना है। शरीर समाप्त हो जाता है, किंतु स्मृति और संस्कार जीवित रहते हैं। मनुष्य चला जाता है, लेकिन उसके कर्म परिवार की अगली पीढ़ियों पर अपनी छाप छोड़ जाते हैं। यही कारण है कि भारतीय जीवन-दर्शन में पितरों के प्रति दायित्व को विशेष स्थान दिया गया है, जिसे ‘पितृऋण’ कहा जाता है।
हमारे माता-पिता ने हमें जीवन दिया और हमारे दादा-दादी व पूर्वजों ने परिवार को संभाला। किसी ने अभाव में जीवन जिया, किसी ने विपरीत परिस्थितियों का सामना किया, तो किसी ने परिवार के लिए अपने सुख त्याग दिए और उन संस्कारों की परंपरा को सुरक्षित रखा जो आज हमारे हाथों में है। हम जिस जीवन को अपना कहते हैं, उसकी नींव में उन सबका योगदान है। इसलिए पितृऋण कोई ऐसा ऋण नहीं है जिसे धन देकर चुकाया जा सके। इसे चुकाने का सबसे सुंदर मार्ग है—माता-पिता की सेवा, बुजुर्गों का सम्मान, परिवार में प्रेम, समाज के प्रति उत्तरदायित्व का निर्वहन और आने वाली पीढ़ी को श्रेष्ठ संस्कार देना।
तर्पण और परंपराओं के पीछे छिपा भाव
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध पक्ष में पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान, अन्नदान और अन्य धार्मिक कर्म किए जाते हैं। जल, तिल और कुश आदि के माध्यम से दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण करने की परंपरा है। आस्था मानती है कि श्रद्धापूर्वक किए गए इन कर्मों से पितरों को तृप्ति व शांति प्राप्त होती है और उनका आशीर्वाद परिवार को मिलता है। लेकिन तर्पण को केवल एक बाहरी कर्मकांड मानना, उसके भीतर छिपे गहरे भाव से वंचित रहना है।
तर्पण की जलधारा केवल जल नहीं होती; वह स्मृति और कृतज्ञता की धारा होती है। जब कोई व्यक्ति अपने पिता, दादा, परदादा या अन्य पूर्वजों का नाम लेकर जल अर्पित करता है, तो वह अपने अतीत को प्रणाम करता है। वह मानो यह स्वीकार करता है कि उसके वर्तमान में उसका अपना श्रम जितना है, उतना ही योगदान उन लोगों का भी है जो आज उसके साथ नहीं हैं।
श्राद्ध परंपरा में कौवे, गाय और कुत्ते को भोजन कराना तथा ब्राह्मण, अतिथि या किसी जरूरतमंद को भोजन कराने का विधान है। इन परंपराओं में जीव-दया, अन्नदान, सेवा और सह-अस्तित्व की भावना दिखाई देती है। पूर्वजों के नाम पर यदि किसी भूखे का पेट भर जाए या किसी जीव को अन्न मिल जाए, तो श्रद्धा का दायरा और विस्तृत हो जाता है।
भारतीय धार्मिक साहित्य और महाकाव्यों में पितृकर्म का उल्लेख अनेक स्थानों पर मिलता है। चाहे महाभारत में कर्ण से जुड़ी कथा हो या रामायण में भगवान श्रीराम द्वारा पिता राजा दशरथ के निमित्त किया गया श्राद्ध—ये प्रसंग भारतीय समाज में पितरों के प्रति दायित्व की गहरी भावना को दर्शाते हैं।
इसी श्रृंखला में ‘सर्वपितृ अमावस्या’ भी व्यापक स्मरण का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर है। जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो सका, उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए यह तिथि बनी है। यह ज्ञात-अज्ञात सभी पितरों को नमन करने का दिन है।
आधुनिक दौर में श्राद्ध पक्ष की प्रासंगिकता
आज श्राद्ध पक्ष की प्रासंगिकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। परिवार छोटे हो रहे हैं और संयुक्त परिवारों का स्थान एकल परिवार ले रहे हैं। घरों में भौतिक सुविधाएं तो बढ़ी हैं, लेकिन पीढ़ियों के बीच का संवाद घटता जा रहा है। बच्चे अपने दादा-दादी के जीवन-संघर्षों से परिचित नहीं हैं और अनेक बार उन्हें अपने परदादा का नाम तक मालूम नहीं होता। ऐसे समय में श्राद्ध पक्ष केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पारिवारिक स्मृतियों को बचाने का माध्यम बन सकता है:
घर के बुजुर्ग बच्चों को अपने पूर्वजों की कहानियां सुनाएं।
परिवार का एक ‘वंश-वृक्ष’ (Family Tree) तैयार किया जाए।
पुरानी तस्वीरों और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जाए।
पूर्वजों के संघर्षों, उनके व्यवसाय, सामाजिक योगदान और जीवन-मूल्यों की जानकारी नई पीढ़ी को दी जाए।
क्योंकि जिसे अपनी जड़ों का पता नहीं होता, उसकी पहचान की ऊंचाई भी अधूरी रह जाती है।
भय नहीं, कृतज्ञता का नाम है श्राद्ध
पितृदोष जैसी धार्मिक मान्यताएं भी श्राद्ध परंपरा से जुड़ी हुई हैं। अनेक श्रद्धालु पितरों की शांति और परिवार के कल्याण की कामना से तर्पण, पाठ और आध्यात्मिक साधनाएं करते हैं। इन आस्थाओं का सम्मान करते हुए यह समझना भी जरूरी है कि श्राद्ध का व्यापक संदेश भय फैलाना नहीं, बल्कि कृतज्ञता, आत्मचिंतन और सदाचार सिखाना है।
यदि हम पितरों की शांति की कामना करते हैं, तो केवल कर्मकांड पर्याप्त नहीं हो सकता। माता-पिता की सेवा, बुजुर्गों का आदर, परिवार में प्रेम, जरूरतमंदों की सहायता, जीवों के प्रति करुणा और अपने आचरण में सत्य व संयम रखना भी पितृ-सम्मान का ही विस्तार है।
आखिर पूर्वजों को सबसे बड़ा सम्मान क्या है?
क्या केवल एक दिन जल अर्पित कर देना?
क्या केवल भोजन करा देना और दान दे देना?
या फिर उनके श्रेष्ठ संस्कारों को अपने जीवन में जीवित रखना?
उत्तर स्पष्ट है—यदि उन्होंने परिवार को जोड़कर रखा था, तो हम भी परिवार को जोड़ें। यदि उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में धैर्य रखा था, तो हम भी धैर्य रखें। यदि उन्होंने जरूरतमंदों की सहायता की थी, तो हम भी सेवा करें। और यदि उन्होंने हमें संस्कार दिए थे, तो हम उन संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाएं। यहीं पर श्राद्ध कर्मकांड से ऊपर उठकर ‘जीवन का संस्कार’ बन जाता है।
स्मृति की अंजलि
श्राद्ध पक्ष मृत्यु का शोक नहीं, बल्कि स्मृति का उत्सव है। यह अतीत में लौटने का हठ नहीं, बल्कि अतीत से शक्ति लेकर वर्तमान को बेहतर बनाने का अवसर है। यह हमें याद दिलाता है कि हम किसी शून्य से पैदा नहीं हुए हैं; हमारे पीछे अनेक पीढ़ियों का श्रम, संघर्ष, त्याग और संस्कार खड़े हैं।
इसलिए इस श्राद्ध पक्ष में जब हम पितरों को जल अर्पित करें, तो अपने भीतर भी कृतज्ञता का दीप जलाएं। जब अन्न अर्पित करें, तो सेवा का संकल्प लें। जब पूर्वजों का नाम लें, तो उनके जीवन से कोई एक श्रेष्ठ गुण अपने आचरण में उतारने का प्रयास करें। और जब अपने बच्चों को उनके पूर्वजों की कहानियां सुनाएं, तो उन्हें यह अहसास कराएं कि वे केवल वर्तमान के व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि पीढ़ियों की एक लंबी सांस्कृतिक यात्रा के उत्तराधिकारी हैं।
पूर्वज चले जाते हैं, उनकी स्मृतियां नहीं।
चेहरे मिट जाते हैं, संस्कार नहीं।
पीढ़ियां बदल जाती हैं, विरासत नहीं।
इसीलिए श्राद्ध केवल पितरों को स्मरण करने का पर्व नहीं है, बल्कि स्वयं को पहचानने का पर्व है। अंततः पितरों को सच्ची श्रद्धांजलि केवल जल की एक अंजलि भर नहीं है; सच्ची श्रद्धांजलि है—एक ऐसा जीवन जीना जिसमें हमारे पूर्वजों के श्रेष्ठ संस्कार दिखाई दें, और ऐसा परिवार बनाना जिसे देखकर हमारी आने वाली पीढ़ी भी अपनी जड़ों पर गर्व कर सके।
श्राद्ध की सबसे बड़ी अंजलि जल की नहीं, स्मृति की है। सबसे बड़ा तर्पण कर्मकांड का नहीं, कृतज्ञता का है; और पितरों को सबसे बड़ा सम्मान यह है कि उनके अच्छे संस्कार हमारे जीवन में निरंतर सांस लेते रहें।
Stocks to Watch: एशियाई बाजारों से मिले-जुले रुझानों के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू स्टॉक मार्केट में लाल शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 47.00 प्वाइंट्स यानी 0.20% की गिरावट के साथ 23,353.00 पर है। एक कारोबारी दिन पहले 22 सितंबर को निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स (Sensex) 329.91 प्वाइंट्स यानी 0.44% की गिरावट के साथ 74,529.08 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 85.30 प्वाइंट्स यानी 0.36% की फिसलन के साथ 23,329.00 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।
Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस
Persistent Systems
पर्सिस्टेंट सिस्टम्स ने एक वॉलंटरी पब्लिक टेकओवर ऑफर के ज़रिए नागरो एसई की कुल शेयर कैपिटल का लगभग 61.15% हिस्सा यानी 75.68 लाख इक्विटी शेयर हासिल कर लिए हैं। कंपनी ने पहले ही Lantano Beteiligungen GmbH के साथ शेयर खरीद समझौते के तहत नागरो (Nagarro) में लगभग 22.10% हिस्सेदारी हासिल कर ली थी। ऐसे में 17 सितंबर तक ट्रेजरी शेयरों को छोड़कर नागरो में पर्सिस्टेंट सिस्टम्स की कुल हिस्सेदारी 83.25% हो गई है। पर्सिस्टेंट सिस्टम्स की योजना नागरो को फ्रैंकफर्ट स्टॉक एक्सचेंज से डीलिस्ट करने की है।
IRB Infrastructure Developers
आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स के बोर्ड ने कंपनी को अपने नॉन-कोर एसेट्स से पैसे कमाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इसके तहत यह पुणे जिले के ताजे और पिंपलोली गांवों में आर्यन इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट्स के मालिकाना हक वाली कुल 1,100 एकड़ जमीन में से लगभग 350 एकड़ जमीन को चरणबद्ध तरीके से डेवलप करेगी। इसमें मुंबई के चांदीवली में आइडियल रोड बिल्डर्स के मालिकाना हक वाली लगभग 3,500 स्क्वेयर मीटर जमीन के कुछ हिस्सों के रीडेवलपमेंट और रीहैबिलिटेशन का काम भी शामिल है। कंपनी के कॉरपोरेट सीईओ सतिंदर एस राणा का कहना है कि इससे कंपनी को बिना किसी अतिरिक्त लागत के कैश फ्लो में काफी मदद मिलेगी।
360 ONE WAM
360 वन डब्ल्यूएएम के बोर्ड ने 15 फरवरी 2027 से आशीष अग्रवाल को कंपनी का सीईओ बनाने की मंजूरी दे दी है। वहीं करण भगत कंपनी के एमडी बने रहेंगे और 26 जुलाई 2030 तक उनके मौजूदा कार्यकाल में कोई बदलाव नहीं होगा और इसके बाद उनकी नियुक्ति पर फिर से विचार किया जा सकता है। इसके अलावा बोर्ड ने 15 फरवरी, 2027 से करण भगत को वाइस चेयरमैन और एमडी के तौर पर भी नियुक्त किया है।
Lemon Tree Hotels
लेमन ट्री होटल्स ने नासिक में ‘कीज प्राइमा बाय लेमन ट्री होटल्स’ खोलने का ऐलान किया है। नासिक में यह ग्रुप का पहला होटल है। इसका मैनेजमेंट लेमन ट्री होटल्स के पूर्ण मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी कार्नेशन होटल्स के पास है।
Pine Labs
अमेरिकी कंपनी मास्टरकार्ड इनकॉर्पोरेटेड की सब्सिडियरी मास्टरकार्ड एशिया/पैसिफिक प्राइवेट लिमिटेड ने पाइन लैब्स में अपनी पूरी 4.31% हिस्सेदारी (4.97 करोड़ शेयर) ₹933.57 करोड़ में बेच दी। 13 घरेलू और ग्लोबल इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स- ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, सोसिएट जेनरल, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स सिंगापुर, घिसालो मास्टर फंड, BNP परिबास आर्बिट्रेज, NRSGVCC, गोल्डमैन सैक्स बैंक यूरोप, सस्क्वेहाना पैसिफिक, कोटक महिंद्रा AMC, मॉर्गन स्टेनली एशिया सिंगापुर, एडलवाइस MF, RAMS इक्विटीज पोर्टफोलियो फंड और फ्रैंकलिन टेम्पलटन MF ने इसे प्रति शेयर ₹187.75 के भाव पर खरीदा है।
RHI Magnesita India
डालमिया भारत रिफ्रैक्टरीज ने RHI मैग्नेसाइट इंडिया में अपनी 11.1% हिस्सेदारी (2.29 करोड़ इक्विटी शेयर) ₹825.88 करोड़ में बेच दी। जून 2026 तक कंपनी में इसकी 12.54% हिस्सेदारी थी। यह हिस्सेदारी चार इन्वेस्टर्स – SBI म्यूचुअल फंड, बंधन म्यूचुअल फंड, निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड और क्लारस कैपिटल 1 ने प्रति शेयर ₹360 प्रति शेयर के भाव पर खरीदी है।
Veegaland Developers
प्रमोटर और फाउंडर चिट्टिलापिल्ली थॉमस कोचुओसेफ ने ₹3.7 करोड़ में प्रति शेयर ₹138.46 के भाव पर वीगालैंड डेवलपर्स के अतिरिक्त 2.69 लाख शेयर (0.55% हिस्सेदारी) खरीद ली है।
Mazda
क्रॉल रेनॉल्ड्स इंटरनेशनल इंक ने मजदा में अपनी 1.21% हिस्सेदारी (2.42 लाख शेयर) ₹5.91 करोड़ में प्रति शेयर ₹243.51 के भाव पर बेच दिए। वहीं शर्मिन नासेर ने प्रति शेयर ₹243.23 के भाव पर ₹3.89 करोड़ में 1.6 लाख शेयर खरीदे हैं। जून 2026 तक मजदा में क्राल रेनॉल्ड्ल इंटरनेशनल की 7.23% हिस्सेदारी थी, जिसमें से इसने पिछले तीन सेशन में 2.52% हिस्सेदारी, यानी 5.05 लाख शेयर बेच दिए हैं।
Hero Motors, SS Retail, Jindal Supreme
आज हीरो मोटर्स, एसएस रिटेल और जिंदल सुप्रीम के शेयर बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होंगे।
Stocks to Watch: इन पर भी रहेगी नजर
आज इन कंपनियों के आएंगे रिजल्ट: अन्नू प्रोजेक्ट्स, विनसम यार्न्स
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Seventeen years ago, in the Imperial War Museum on Lambeth Road in London, I stood mesmerised in front of a motorcycle with the number plate GW 2275, enclosed in a glass case. It was a beautiful, brooding machine, low and long, finished in deep black with just enough nickel and chrome to catch the museum lights: twin fishtail exhausts sweeping back in a graceful curve, the big JAP V-twin sitting exposed and unapologetic between the frame rails, cylinders splayed wide, cooling fins stacked like the pages of a book. Thin copper oil lines ran externally along the frame, feeding the total-loss lubrication system of the era, a solution that looked almost primitive next to a modern engine yet was efficient enough to survive being wrung out past 100mph on 1930s public roads.
A flamboyant form, every component left exposed, hinting at George Brough’s intention to let you see exactly what you were paying for. This was, in its day, the pinnacle of what was once the finest motorcycle industry in the world, the British motorcycle industry. Standing there, it was easy to understand why a certain kind of Englishman, restless, brilliant, and a little broken, would have fallen entirely in love with a machine like this.
The very Brough Superior SS100 Lawrence died on, photographed at the Imperial War Museum in 2008. Its last known owner, reclusive collector John Weekly, kept it in his lounge for over 45 years before his death in 2024. After which the Brough’s whereabouts are unknown.
It took me straight back to being a teenager watching Lawrence of Arabia for the first time. The film famously opens with this motorcycle: the frantic braking, the fatal swerve to avoid two boys on bicycles, before flashing back to how a restless desk officer became a legendary guerrilla leader in the Arab Revolt, and how that legend curdled into cynicism once Britain betrayed the cause he’d fought for. This was the actual Brough Superior SS100 that TE Lawrence was ripping home on from Bovington on May 13, 1935, when he went over the handlebars, struck his head, and died six days later without regaining consciousness.
Motorcycle or camel, Lawrence rode with consummate ease.
I have always felt a pull towards places where history happened, where the past has left something tangible behind, and this anniversary issue gave me the excuse I needed to follow Lawrence’s last ride. For this quest, I got behind the wheel of the new Mini Countryman John Cooper Works. A slightly contradictory choice of car for a story about a restless man who spent his last years trying to shrink his own reputation by changing his name twice to get away from the legend he’d unwillingly become. Because the new Countryman is going through much the same thing but in reverse.
By the very virtue of its name, the Mini has a reputation of being a compact and cheeky car that seems to occupy hardly any road at all, but this Mini is large and an SUV, accentuated by beefy curves with all-wheel drive as standard and sporty vivid red disc calipers. Under the bonnet sits a potent 2.0-litre turbo four-cylinder engine with 300 horsepower of shove and 400Nm of tug.
The irony was not lost on me: I was driving a car that had outgrown its own name, setting off to chase a man who’d spent his final years trying to shrink his. I pointed the car west out of London on the M3, then the A303, pulling over near Stonehenge for a quick photograph before pressing on toward another English icon further down the road.
The road to Clouds Hill
Stonehenge bursts into view without warning as the A303 tops a crest, the ancient stones suddenly filling the windscreen against the Salisbury Plain.
Beyond Stonehenge, the Countryman ate the tarmac in complete comfort, cabin hushed, adaptive cruise doing most of the thinking. The road eventually dropped south onto narrower country lanes for the final approach into Dorset, and it was here, as the hedgerows closed in, that the JCW visibly changed character. All-wheel drive dug in through the bends, the exhaust note sharpened, and for a few minutes on the approach to Clouds Hill, this bulked-up, grown-up Mini showed me that the nimbleness of its ancestors still lived somewhere in its genes.
Inside Clouds Hill: Lawrence’s daybed and bookshelves, preserved almost as he left them.
Clouds Hill itself is almost comically modest for a man who became one of the most famous people in England. It’s a four-room labourer’s cottage with no electricity, which Lawrence first rented in 1923 while stationed at nearby Bovington, then painstakingly rebuilt with his own hands before buying it outright in 1929. Inside, the leather-topped daybed, bookshelves crammed with correspondence and photographs, and framed portraits of Bedouin faces and RAF colleagues remain much as he left them, preserved by the National Trust.
What hints at the pull of Lawrence’s personality is who came all the way here to visit him. George Bernard Shaw, EM Forster, Thomas Hardy and Robert Graves all found their way to this tiny, electricity-less retreat, which was slightly ironic, because Lawrence was doing his best to disappear. The world knew him as Lawrence of Arabia, the flamboyant soldier in Arab robes who’d become one of the most recognisable figures of the First World War, and he wanted none of the celebrity that came with it.
Prince Faisal’s delegation at the 1919 Paris Peace Conference. Lawrence (third from left) stood among men Britain would soon betray.
He’d already tried once: in 1922, he joined the RAF under the name John Hume Ross, but the press uncovered him within months. The following year, he joined the Tank Corps as TE Shaw, a name he kept for the rest of his life. Clouds Hill became his refuge, a place to read, write, listen to music, work on his boats and motorcycles, and retreat from a world determined to keep finding him.
He did make forays out. Winston Churchill was a genuine friend, and Lawrence would occasionally turn up unannounced at Chartwell, Churchill’s home about 130 miles away. He liked to boast that his long-distance visits to friends like Churchill and Lady Astor were made in “record time” thanks to the Brough’s speed, calling the machine “the silkiest thing I have ever ridden.”
Churchill’s daughter Mary remembered him arriving as “a short, nondescript, sandy-haired airman riding a motorcycle,” only to reappear at dinner transformed, “presenting himself in the flowing robes of a Prince of Arabia.” She also recalled the “pin-drop silence” that fell over the room whenever Lawrence spoke, a silence that apparently included her father, who himself considered Seven Pillars of Wisdom “unsurpassable” as a war narrative. It was an odd, quietly moving thing to stand in a room with no electricity and realise the man who once sat there could hold some of the loudest reputations in England spellbound.
The road that killed him
This road has widened over the decades, much like the Mini brand, which now includes an SUV.
From Clouds Hill, the road towards Bovington Camp is the one Lawrence rode almost daily, and it’s easy to see why he loved it: well cambered, with quick, confident curves that seem made for two wheels rather than four. The road has changed considerably since 1935, widened, realigned and smoothed out, the dips Lawrence knew long gone, but the bends remain, and the JCW flowed through them on silky modern tarmac with barely a shudder.
The plaque marking the tree planted by T.E. Lawrence’s former Vickers gunner, Tom Beaumont, in 1983.
Lawrence was known to push his Brough to 100mph on roads like this despite the rougher surfaces and primitive brakes of the time. It takes a particular sort of nerve to do that. Sadly, this is also the road on which he died. A small, weathered stone marker stands by the roadside near the crash site, its inscription barely legible: Near this spot Lawrence of Arabia crashed on his motorcycle and was fatally injured, 13th May 1935.
A signpost for the Lawrence of Arabia Trail.
Below it, a plaque records that the tree beside the marker was planted in 1983 by Tom Beaumont, who had served as Lawrence’s Vickers machine gunner in Arabia, one old comrade returning nearly half a century later to mark where another had died. It’s a small, unshowy memorial for a man who became the subject of an Oscar-winning film. Bovington Camp is also the start and finish point of the circular 10.8km Lawrence of Arabia Trail, which strings together the cottage, the crash site, and the church at Moreton in one walkable loop.
Lawrence’s effigy at St Martin’s Church, Wareham, carved by his friend Eric Kennington.
A short drive away in Wareham is one more stop worth making: the Saxon church of St Martin’s, home to a life-size effigy of Lawrence carved by his friend Eric Kennington, originally intended for St Paul’s Cathedral before being rejected there and finding its way to this small parish church instead.
Moreton and the memory of him
Moreton itself is a proper Dorset postcard, a signpost outside St Nicholas’ Church pointing the way to “Walled Garden” beside directions to Wool and Weymouth, as if history and horticulture share equal billing. Lawrence’s small and very private funeral and burial were held here on May 21, 1935, and the mourners included Churchill, Lady Astor, General Wavell (who flew in by autogiro), and author Henry Williamson.
Left: T.E. Lawrence’s grave at St Nicholas’ Church, Moreton. Simple white stone, flowers left fresh by visitors. Right: The weathered marker near Bovington, barely legible, recording the spot of Lawrence’s crash.
His grave sits a short walk from the church, simple white stone, flowers laid fresh by visitors, the inscription noting he was a Fellow of All Souls College, Oxford, and making no mention at all of Arabia.
The coast, and letting the car breathe
Durdle Door, the natural limestone arch that draws crowds to this stretch of coastline.
I couldn’t leave Dorset without giving the JCW a proper stretch, so I pushed south to the Jurassic Coast, Durdle Door and Lulworth Cove, a slight detour from Lawrence’s own story, but too good to leave out of a day like this. Every mile of the drive validated it being classed as an SUV. The properly deep boot held picnic mats, beach gear, including chairs and an umbrella, without the need of the rear seats being dropped.
Lulworth Cove’s chalk cliffs and turquoise water, a world away from Lawrence’s Dorset lanes.
The cabin felt roomy, and the ride height shrugged off potholed coastal car parks without a second thought. There’s real engine grunt for those urgent overtakes on narrow country lanes when stuck behind agonizingly slow motorhomes that make you feel like tearing your hair out.
West Lulworth, all thatched roofs and honey-coloured stone, is about as quintessentially Dorset as a village gets.
The all-wheel-drive system quietly sorts out grip on the tighter, greasier lanes, especially with the left wheels on a shoulder slick with wet grass. Flick it into its sportiest mode, and the exhaust note gets a synthesised boost through the speakers. It may be all theatre, but it certainly made me grin, and that’s a win because sound plays such a large part in defining how a car makes me feel.
A compass and live pitch-and-roll readout flaunts SUV identity; instrumentation no traditional Mini has ever needed.
By the time I rolled back into London, it was quite clear to me that at the wheel of a Mini Countryman, what you get is a car that is actually larger and roomier than the Jeep Compass. It has the space, the grunt and the ground clearance, and from the smooth roads of Dorset to the Jeep-only trails of Zanskar, this Mini is genuinely man enough for whatever the country throws at it.
The Helmet He Never Wore
Lawrence’s fatal crash had one consequence far beyond Dorset. Among the doctors treating him at Bovington Camp Military Hospital was a young Australian neurosurgeon named Hugh Cairns, who had himself served in the Middle East during the First World War. Watching Lawrence die of head injuries that a helmet might have prevented left a deep impression on him, and he began studying motorcycle head trauma as a direct consequence.
Sir Hugh Cairns
Crash helmets already existed, invented back in 1914 for racing at Brooklands, but nobody wore them on the road. It took the Second World War, and Cairns’s appointment as a head injuries adviser to the Ministry of Health, for that to change. Researching fatalities among military despatch riders, he found that head injuries were the single biggest killer among motorcyclists and that, of the few riders wearing helmets when they crashed, not one had died.
His 1941 paper was damning enough that helmets became compulsory for all military motorcyclists within a month, and a 1946 follow-up showed the death rate had fallen sharply as a result. Cairns argued the same logic should extend to every civilian rider. It took another 27 years, and Cairns didn’t live to see it, for that to become UK law in 1973. But the chain runs in a straight, almost eerie line from one Dorset lane to millions of ordinary commutes: the man who died avoiding two boys on bicycles ended up, through the doctor who treated him, saving countless lives on two wheels after his own.
“The Rolls-Royce of Motorcycles”
Every Brough Superior was hand-built at George Brough’s works on Haydn Road, Nottingham, and Brough himself was as singular as his machines. Rarely seen without his trademark tailored flat cap, he carried himself more like landed gentry than a factory owner, and his standards bordered on obsessive. Born to motorcycle pioneer William Edward Brough, George forged his own path in 1919 after a rift with his father over how grand and expensive motorcycles ought to be.
Left: George Brough, Right: T.E. Lawrence
A friend suggested adding “Superior” to the name, which Brough senior took as a personal insult. That pursuit of excellence defined the marque: each machine was assembled once to fit every component together, then stripped down for painting and plating, then reassembled for delivery. Brough tested every SS100 himself on public roads past 100mph, and each one left the factory with George Brough’s personal approval and a written certificate guaranteeing it had been timed at the ton over a flying quarter mile.
‘SS’ stood for Super Sports, ‘100’ for that guaranteed top speed of a 100mph, and Brough pushed the idea further still in 1928, setting a 130.6mph record at Arpajon in France. The “Rolls-Royce of Motorcycles” nickname was coined by journalist HD Teague of The Motor Cycle, and Brough liked it enough to use it in his own advertising, reportedly with the real Rolls-Royce’s blessing.
War ended civilian production in 1940, when the factory turned to munitions and aircraft parts, and the specialised J.A. Prestwich (JAP) 998cc, air-cooled, 50-degree OHV V-twin engines Brough relied on were never commercially viable again. Around 3,100 machines were made across 19 models in the marque’s 21-year run, and roughly a third survive today, making every survivor a priceless piece of automotive art.
Lawrence’s relationship with the marque ran deeper than most customers’. Writing to Brough in 1926, he said he’d ridden five Broughs and covered 1,00,000 miles in four years, calling them the greatest delight of his life, two of them possessing “a speed and reliability that reminded me of an express train.” Between 1922 and 1935, he owned eight. The first, bought in 1922, was nicknamed “Boa,” short for Boanerges, meaning “son of thunder.”
The seven that followed were named George I through George VII, with a ninth, George VIII, still being built when he died. At around £200 apiece, enough to buy a modest cottage, this was extraordinary indulgence for a man on an RAF aircraftman’s pay, though royalties from Seven Pillars of Wisdom helped fund it. The Brough he crashed on May 13, 1935, registration GW 2275, was George VII, his last completed machine.
The photographs here are of George Brough and Lawrence on the Brough nicknamed George VI. They were taken during one of Lawrence’s frequent, unassuming visits to the Haydn Road factory by Jack Hallsworth, a Nottingham Journal photographer who knew George Brough and had been tipped off to bring his camera one afternoon.
It’s a rare glimpse of a man famously camera-shy and almost never photographed candidly, hinting at the genuine warmth behind the machines: two very different Englishmen, one a self-effacing war hero trying to vanish into rural obscurity, the other a flamboyant engineer-showman happy to let Rolls-Royce’s name do some of his advertising for him, bound by a friendship that outlasted their differences.
Stocks to Watch: एशियाई बाजारों से मिले-जुल रुझानों से घरेलू मार्केट में लाल शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 48.50 प्वाइंट्स यानी 0.20% की गिरावट के साथ 23,961.50 पर है। एक कारोबारी दिन पहले 4 सितंबर को सेंसेक्स (Sensex) 362.57 प्वाइंट्स यानी 0.48% की बढ़त के साथ 76,515.43 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 24.25 प्वाइंट्स यानी 0.10% की मजबूती के साथ 23,897.70 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।
Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस
Molbio Diagnostics Q1 (Consolidated YoY)
जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर मोल्बियो डाइग्नॉस्टिक्स ₹23.7 करोड़ के घाटे से ₹58.7 करोड़ के कंसालिडेटेड प्रॉफिट में आ गई तो रेवेन्यू 4 गुना बढ़कर ₹99.7 करोड़ से ₹408.4 करोड़ पर पहुंच गया।
Cohance Lifesciences
अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने 27 अगस्त से 4 सितंबर के बीच तेलंगाना के शमशाबाद में स्थित कोहेंस लाइफसाइंसेज के फॉर्मूलेशन प्लांट का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद चार ऑब्जर्वेशन के साथ फॉर्म 483 जारी हुआ।
Tata Motors Commercial Vehicles
टाटा मोटर्स की सब्सिडियरी टीएमएल होल्डिंग्स बीवी ने इवेको ग्रुप के सभी मौजूदा कॉमन शेयरों को खरीदने के लिए वालंटरी टेंडर ऑफर दिया है। इसके लिए कंपनी हर शेयर पर 14.10 यूरो ऑफर कर रही है और इस भाव पर इवेको ग्रुप की वैल्यू 382 करोड़ यूरो है। इस खरीदारी के लिए टाटा मोटर्स की सब्सिडियरी ने मॉर्गन स्टैनले और एमयूएफजी बैंक से फंडिंग का इंतजाम किया है। टेंडर ऑफर 7 सितंबर को खुलेगा और 26 अक्टूबर, 2026 तक खुला रहेगा।
Mazagon Dock Shipbuilders
महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी (MSETCL) ने मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स को ₹118 करोड़ का परचेज ऑर्डर दिया है। यह ऑर्डर पांच सब-स्टेशनों के लिए AI-बेस्ड कॉम्प्रिहेंसिव इन्फ्रा-सिक्योर प्रोजेक्ट की सप्लाई, इंस्टॉलेशन और कमीशनिंग के लिए है।
Rail Vikas Nigam Ltd (RVNL)
रेल विकास को SJVN थर्मल से ₹903 करोड़ का एक ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर 1,320 MW बक्सर थर्मल पावर प्रोजेक्ट (BTPP) के फेज III के तहत है। इसमें प्लांट की बाउंड्री से लेकर बिहार के बक्सर में चौसा और पावनी कामरपुर तक ट्रैक के जरिए एरियल कनेक्शन के साथ एक परमानेंट साइडिंग बनाना है यानी कि पावर प्लांट तक कोयला या सामान की आवाजाही के लिए रेलवे कनेक्टिविटी तैयार करनी है।
Prime Focus
प्राइम फोकस के बोर्ड ने इक्विटी शेयर या डेट सिक्योरिटीज जारी करके ₹3,000 करोड़ तक फंड जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
Lemon Tree Hotels
लेमन ट्री होटल्स ने लेमन ट्री होटल, बोधगया और कीज सेलेक्ट बाय लेमन ट्री होटल्स, बोधगया को लेकर दो लाइसेंस एग्रीमेंट किए हैं। दोनों प्रॉपर्टीज का मैनेजमेंट कंपनी की सब्सिडियरी कार्नेशन होटल्स संभालेगी। लेमन ट्री होटल, बोधगया में 75 कमरे होंगे, तो कीज सेलेक्ट बाय लेमन ट्री होटल्स, बोधगया में 70 कमरे होंगे।
Lupin
अमेरिका दवा नियामक एफडीए से लुपिन को मोडाफिनिल टैबलेट यूएसपी (100 एमजी और 200 एमजी) के लिए मंजूरी मिल गई है। ये टैबलेट नुवो फार्मा (आयरलैंड) डीएसी की RLD (रेफरेंस लिस्टेड ड्र) प्रोविजिल (Provigil) के बायो-इक्विवेलेंट हैं। यह दवा वयस्कों में नार्कोलेप्सी, ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) या शिफ्ट वर्क डिसऑर्डर (SWD) के कारण बहुत अधिक नींद के इलाज के लिए है। IQVIA MAT के जुलाई 2026 डेटा के अनुसार अमेरिका में मोडाफिनिल टैबलेट की अनुमानित सालाना बिक्री $7.07 करोड़ थी।
Brigade Enterprises
ब्रिगेड ग्रुप ने हैदराबाद के नियोपोलिस में ब्रिगेड बार्सिलोना लॉन्च करने का ऐलान किया है। यह प्रीमियम रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट कुल 4.04 एकड़ जमीन पर फैला है और इससे ₹2,700 करोड़ से अधिक का रेवेन्यू मिलने का अनुमान है।
Nava
नावा ने रूटीन इंस्पेक्शन, मेंटेनेंस और ओवरहॉलिंग के काम के लिए अपनी दो 60 MW IPP यूनिट्स में से एक को 6 सितंबर से कुछ समय के लिए बंद करने की योजना बनाई है। यह शटडाउन लगभग 55-60 दिनों तक चल सकता है और कंपनी को उम्मीद है कि इस शटडाउन से उसके कारोबार को खास झटका नहीं लगेगा।
Urban Enviro Waste Management
अर्बन एनवायरो वेस्ट मैनेजमेंट को अकोला म्युनिसिपल कॉरपोरेशन से ₹219 करोड़ का ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर पांच साल के लिए म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट को घर-घर से इकट्ठा करने और उसे भोड (Bhod) में तय प्रोसेसिंग/डिस्पोडजल साइट तक ले जाने के लिए है। इसे दो साल तक और बढ़ाया जा सकता है।
Swiggy
बीएनपी परिबास फाइनेंशियल मार्केट्स ने ₹491.99 करोड़ में स्विगी के 1.78 करोड़ शेयर खरीदे तो गोल्डमैन सैक्स इन्वेस्टमेंट्स मॉरीशस I ने ₹549.01 करोड़ में 1.98 करोड़ शेयर खरीदे। इन दोनों ट्रांजैक्शन से कुल 1.36% हिस्सेदारी का लेन-देन प्रति शेयर ₹276.10 के भाव पर हुआ।
Shankara Buildpro
ओहाना इंडिया ग्रोथ फंड ने दो ट्रांजैक्शंस के जरिए शंकर बिल्डप्रो में ₹51.88 करोड़ में अतिरिक्त 1.64% हिस्सेदारी खरीदी है। कैपिटलके (CapitalK) के मालिकाना हक वाले कैटेगरी III अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) ओहाना इंडिया ग्रोथ फंड ने शंकर बिल्डप्रो के 2 लाख शेयर ₹1,296.99 के भाव पर और 2 लाख शेयर ₹1,297 के भाव पर खरीदे हैं। जून 2026 तक शंकर बिल्डप्रो में इस फंड की 1.6% हिस्सेदारी थी।
Unified Data Tech Solutions
कार्नेलियन एसेट मैनेजमेंट एंड एडवाइजर्स के फाउंडर विकास विजयकुमार खेमानी ने यूनिफाइड डेटा टेक सॉल्यूशंस में अपनी पर्सनल होल्डिंग से 1.07 लाख शेयर (0.53% हिस्सेदारी) ₹4.17 करोड़ में प्रति शेयर ₹387.61 के भाव पर बेच दिए। जून 2026 तक कंपनी में उनकी 1.05% हिस्सेदारी थी।
CARE Ratings
टेनकोर पार्टनर्स मास्टर ने प्रति शेयर ₹1,725 के भाव पर ₹73.57 करोड़ में केयर रेटिंग्स के 4.26 लाख शेयर (1.41% हिस्सेदारी) बेच दिए। जून 2026 तक इसकी कंपनी में 1.56% हिस्सेदारी थी।
ESDS Software Solution
एंकरेज कैपिटल फंड की एंकरेज कैपिटल स्कीम I ने ईएसडीएस सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन के 10.03 लाख शेयर (0.85% हिस्सेदारी) ₹76.01 करोड़ में ₹757.44 के भाव पर बेच दिए। शुक्रवार को कंपनी के शेयर लिस्ट होने से पहले एंकरेज कैपिटल के पास ईएसडीएस सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन में 1.13% हिस्सेदारी थी।
Priority Jewels
केआईएफएस एंटरप्राइज ने प्रायोरिटी ज्वेल्स के 1.25 लाख शेयर ₹2.90 करोड़ में ₹232.30 के भाव पर तो मुंबई की एनबीएफसी आगम कैपिटल की सहयोगी कंपनी आगम इन्वेस्टमेंट्स ने 1.98 लाख शेयर ₹4.67 करोड़ में ₹235.92 के भाव पर खरीदे हैं। इन दोनों ने कुल मिलाकर 1.79% हिस्सेदारी के बराबर शेयर खरीदे हैं।
Gland Pharma
शंघाई फोसुन फार्मा की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी प्रमोटर फोसुन फार्मा इंडस्ट्रियल ने ग्लैंड फार्मा के 75.05 लाख शेयर (4.5% हिस्सेदारी) ₹2,121.5 करोड़ में बेच दिए। हर शेयर ₹2,826.6 के भाव पर 11 इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स – कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड, एक्सिस म्यूचुअल फंड, ICICI प्रूडेंशियल एएमसी, आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी, SBI लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, HDFC स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस, मिरे एसेट म्यूचुअल फंड, सोसिएट जेनरल, कोटक महिंद्रा लाइफ इंश्योरेंस, सुंदरम म्यूचुअल फंड ने खरीदे हैं। जून 2026 तक इस फार्मा कंपनी में मिरे एसेट की 5.69%, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी की हिस्सेदारी 1.79% थी तो फोसुन फार्मा की हिस्सेदारी 51.77% थी।
Tata Technologies
टाटा टेक्नोलॉजीज के पूर्व सीईओ और एमडी पैट्रिक रेमन मैकगोल्ड्रिक ने 0.51% हिस्सेदारी के बराबर 21 लाख शेयर ₹164.85 करोड़ में प्रति शेयर ₹785 के भाव पर बेच दिए। ये शेयर ICICI प्रूडेंशियल एएमसी, कोटक महिंद्रा एएमसी, 360 ONE एसेट मैनेजमेंट और कार्नेलियन एसेट मैनेजमेंट एंड एडवाइजर्स ने खरीदे हैं।
Nexus Select Trust
प्रशांत खेमका के व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड ने ब्लैकस्टोन की कंपनी बीआरईपी एशिया एसजी फोरम होल्डिंग (NQ) से नेक्सस सेलेक्ट ट्रस्ट के 74.95 लाख यूनिट ₹122.92 करोड़ में प्रति यूनिट ₹164 के भाव पर खरीदे हैं।
Purple Style Labs
आज पर्पल स्टाइल लैब्स के शेयरों की बीएसई और एनएसई पर एंट्री होगी।
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Stocks to Watch: सोमवार, 7 सितंबर को बाजार में कई शेयर अहम कारोबारी अपडेट्स की वजह से फोकस में रहेंगे। कुछ कंपनियों को नए ऑर्डर मिले हैं, तो कुछ ने कारोबार विस्तार से जुड़े फैसले लिए हैं। जानिए किन 14 शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रहेगी।
Mazagon Dock Shipbuilders
सरकारी शिपबिल्डिंग कंपनी Mazagon Dock Shipbuilders को महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी से ₹118 करोड़ का ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर पांच सब-स्टेशनों के लिए AI बेस्ड कॉम्प्रेहेंसिव इन्फ्रासिक्योर प्रोजेक्ट का है। इसमें सप्लाई, इंस्टॉलेशन और कमीशनिंग का काम शामिल है।
JSW Steel
स्टील कंपनी JSW Steel का अगस्त में कंसोलिडेटेड क्रूड स्टील उत्पादन 3% बढ़कर 24.65 लाख टन रहा। घरेलू उत्पादन 4% बढ़कर 23.87 लाख टन हो गया। वहीं, अमेरिका में उत्पादन 11% घटा है।
NLC India
सरकारी माइनिंग और पावर कंपनी NLC India की सब्सिडियरी NLC India Renewables गुजरात में 275 MW/550 MWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम प्रोजेक्ट के लिए सफल बोलीदाता बनी है। यह प्रोजेक्ट गुजरात ऊर्जा विकास निगम की टेंडर प्रक्रिया के तहत मिला है।
NMDC
सरकारी माइनिंग कंपनी NMDC अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में थर्मल कोयले का कमर्शियल उत्पादन शुरू करने की तैयारी में है। कंपनी FY27 में करीब 10 लाख टन थर्मल कोयला बेचने का लक्ष्य रखती है। इसके साथ कंपनी माइनिंग कारोबार में डायवर्सिफिकेशन पर भी फोकस कर रही है।
SBI
सरकारी बैंक State Bank of India वित्त वर्ष 2027 में 11,000 से 12,000 कर्मचारियों की भर्ती कर सकता है। इनमें क्लर्क और अधिकारी स्तर की नियुक्तियां शामिल होंगी। बैंक इस दौरान 200 से 250 नई शाखाएं भी खोलने की योजना बना रहा है।
RVNL
सरकारी रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी RVNL को SJVN Thermal से ₹903 करोड़ का प्रोजेक्ट मिला है। यह ऑर्डर बिहार के 1,320 MW बक्सर थर्मल पावर प्रोजेक्ट से जुड़ा है। SJVN Thermal, SJVN की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी है।
Lupin
फार्मा कंपनी Lupin को अमेरिकी FDA से Modafinil Tablets USP की मंजूरी मिली है। यह दवा 100 mg और 200 mg की क्षमता में है। अमेरिकी बाजार में इस मंजूरी से कंपनी के कारोबार को फायदा मिल सकता है।
Tata Motors
ऑटो कंपनी Tata Motors की कमर्शियल व्हीकल यूनिट ने इटली की Iveco Group के शेयरों के लिए ओपन ऑफर लॉन्च किया है। ऑफर कीमत €14.1 प्रति शेयर है। इससे Iveco Group का वैल्यूएशन करीब €3.82 अरब बैठता है।
Eicher Motors
ऑटो कंपनी Eicher Motors ने Royal Enfield Himalayan 440 लॉन्च की है। इसकी एक्स-शोरूम कीमत ₹2.29 लाख रखी गई है। बाइक की बुकिंग 4 सितंबर से शुरू हो गई है।
Brigade Enterprises
रियल एस्टेट कंपनी Brigade Enterprises ने हैदराबाद के Neopolis में Brigade Barcelona लॉन्च किया है। इस प्रोजेक्ट से ₹2,700 करोड़ से ज्यादा की रेवेन्यू क्षमता है। यह शहर में कंपनी के विस्तार का नया कदम है।
Prime Focus
मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी Prime Focus ने ₹3,000 करोड़ तक जुटाने की योजना को मंजूरी दी है। कंपनी इक्विटी शेयर, डेट सिक्योरिटीज, NCDs, शेयर वारंट और अन्य इक्विटी लिंक्ड सिक्योरिटीज के जरिए रकम जुटा सकती है।
CIE Automotive India
ऑटो कंपोनेंट कंपनी CIE Automotive India ने अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी CIE Hosur में ₹120.76 करोड़ का निवेश किया है। यह निवेश राइट्स इश्यू के जरिए 69.4 लाख पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयर खरीदकर किया गया है।
Lemon Tree Hotels
होटल कंपनी Lemon Tree Hotels ने बिहार के बोधगया में दो प्रॉपर्टीज के लिए लाइसेंस एग्रीमेंट किए हैं। इन दोनों प्रॉपर्टीज से कंपनी के पोर्टफोलियो में 145 कमरे जुड़ेंगे। इससे बिहार में कंपनी की मौजूदगी बढ़ेगी।
Cohance Lifescience
फार्मा कंपनी Cohance Lifescience के तेलंगाना स्थित FDF प्लांट का अमेरिकी FDA ने निरीक्षण किया है। कंपनी को निरीक्षण के बाद Form 483 मिला है। इसमें FDA ने चार ऑब्जर्वेशन दर्ज किए हैं।
OMCs
सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां यानी OMCs सोमवार को फोकस में रह सकती हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के बाद कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई पर नजर रहेगी। इसका असर पेट्रोलियम कंपनियों की लागत और मार्जिन पर पड़ सकता है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Going by the amount of social media chatter around any NCAP test, you’d think India is one safety-obsessed nation. Awareness is rising, but safety is far from ingrained in our ethos like it is in, say, Japan. We all know the current state of road safety is appalling, but I’m not talking about driving manners or vehicle collisions or crash ratings. Of late, there’s another aspect of road safety that’s really been bothering me; the road itself and everything around it.
During the rains in Mumbai last month, two girls were electrocuted in a water-logged street. Luckily, timely intervention from a passer-by and medical treatment at a hospital saved them. Last year, an auto-rickshaw driver had his head
pierced by a falling iron rod from metro construction; thankfully emergency neurosurgery saved him too. Not everyone is so lucky though, if you can even call these accidents lucky. A concrete slab from an under-construction girder bridge fell onto a moving auto-rickshaw and car and resulted in one death and multiple injuries.
You would have read the horrific news of a 25-year-old biker in Delhi who died after his motorcycle plunged into an unbarricaded, 14-foot-deep construction pit dug up and left open. And it’s not just bikes; people have fallen into open manholes, flooded over with water, and lost their lives, and recently a 20-year-old student died after his car plunged into an open drain. Two years ago, a massive illegal billboard blew over and killed 17 people and injured over 75 others during heavy winds in Mumbai. This monsoon season, a tree collapsed onto a school bus and took the life of an 11-year-old child.
This is the aspect of road safety that has been bothering me recently, not because car crashes and other accidents do not, but because these are all too often termed ‘freak accidents’ or ‘random happenings’. Nonsense! These are not freak incidents, but accidents caused by negligence and unaccountability. So many folks say, ‘oh, his/her time had come’. Again, nonsense. Would you say all those poor kids who died in Africa due to starvation died because their time had come? No. They died because of human action, or inaction.
So, really, I write this column only to highlight this fact; to remind us all that it isn’t random. As the saying goes, ‘everything happens for a reason’. Here it’s callousness, from those in charge and from us. So, the next time you express outrage over a non-5-star NCAP-rated car, spare some words of outrage for these incidents too.