Varanasi Airport Firing: वाराणसी एयरपोर्ट पर हथियारों की जांच के दौरान अचानक पिस्तौल से चली गोली! Air India Express के 2 कर्मचारी घायल

Varanasi Airport Firing: उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन में रविवार (16 अगस्त) सुबह जांच के दौरान एक यात्री के लाइसेंसी पिस्तौल से अचानक गोली चल जाने से हड़कंप मच गया। गोली की चपेट में आने से एयरपोर्ट पर तैनात एक महिला कर्मचारी और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गए। पुलिस ने बताया कि मुंबई जाने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस से यात्रा करने के लिए आजमगढ़ निवासी कमलेश राय पत्नी के साथ एयरपोर्ट पहुंचे थे। उनके पास लाइसेंसी पिस्तौल थी।

उन्होने बताया कि जांच के दौरान पिस्टल की जांच और उसमें मौजूद गोलियों की गिनती की जा रही थी, तभी अचानक फायरिंग हो गई। उन्होंने बताया कि इस घटना में जांच कर रही महिला कर्मचारी के पैर में और पास खड़े एक अन्य व्यक्ति घायल हो गए। दोनों घायलों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना की सूचना पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने बताया कि मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

पत्नी के साथ जा रहा था मुंबई

‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यात्री अपनी पत्नी के साथ एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट नंबर IX-1810 से मुंबई जा रहा था। उसके पास एक पिस्तौल और मैगजीन थी। उसने फ्लाइट में चढ़ने से पहले अधिकारियों को हथियारों की जानकारी दी। वाराणसी एयरपोर्ट के डायरेक्टर पुनीत गुप्ता के मुताबिक, जब हथियार और उसके कागजात की जांच हो रही थी, तभी बंदूक अचानक से चल गई। उन्होंने बताया कि हथियार और उसके कागजात की जांच के समय हथियार का मालिक और एयरपोर्ट का स्टाफ दोनों मौजूद थे।

फायरिंग में दो कर्मचारी घायल

गोली पहले जमीन पर लगी और फिर पास खड़े दो स्टाफ सदस्यों को जा लगी। एक महिला स्टाफ सदस्य की जांघ में गोली लगी। जबकि एक पुरुष स्टाफ सदस्य के हाथ में चोट आई। वाराणसी एयरपोर्ट के डायरेक्टर के मुताबिक, यह घटना 16 अगस्त, 2026 को सुबह करीब 9:30 बजे हुई। गुप्ता ने बताया कि घायल दोनों स्टाफ सदस्यों की हालत स्थिर है। फिलहाल, उनका इलाज चल रहा है। ANI के मुताबिक, एयरपोर्ट डायरेक्टर ने कहा कि स्थानीय पुलिस को सूचित कर दिया गया है। जांच चल रही है।

वाराणसी एयरपोर्ट के डायरेक्टर ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा, “आज सुबह करीब 9:30 बजे, मुंबई जाने वाली फ्लाइट IX-1810 में अपनी पत्नी के साथ यात्रा कर रहे एक यात्री ने फ्लाइट में हथियार ले जाने की जानकारी दी। हथियारों की जांच के दौरान यात्री ने एक राउंड गोली चलाई, जिससे दो AAICLAS स्क्रीनर घायल हो गए। दोनों को इलाज के लिए न्यू लक्ष्मी ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया है। स्थानीय पुलिस को सूचित कर दिया गया है। जांच चल रही है।” पुलिस और एयरपोर्ट अधिकारी अब इस घटना की विस्तार से जांच कर रहे हैं।

क्या आप भी अपने डर, ट्रॉमा… असुरक्षाओं पर नहीं कर पा रहे काबू, ‘एटॉमिक हैबिट्स’ के राइटर जेम्स क्लियर का ये कोट आपकी भी कर सकता है मदद

जेम्स क्लियर ‘एटॉमिक हैबिट्स’ जैसी बेस्टसेलर किताब के लेखक हैं। वे एक जाने-माने लेखक, स्पीकर और प्रोडक्टिविटी एक्सपर्ट हैं। उन्हें हमेशा से रोज़ाना की छोटी-छोटी आदतें, इंसानी व्यवहार और लगातार खुद को बेहतर बनाने जैसे विषयों में गहरी दिलचस्पी रही है। अपनी रिसर्च और प्रैक्टिकल जानकारी के ज़रिए, उन्होंने दुनिया भर के लाखों पाठकों की रोज़मर्रा की दिनचर्या और सोच को बदलने में मदद की है।

उनकी बातों ने कई लोगों को ज़िंदगी में बेहतर रास्ता चुनने में मदद की है। एक बार उन्होंने कहा था- “खुद पर काबू पाओ। अपने डर, अपने ट्रॉमा, अपनी असुरक्षाओं और अपनी बुरी आदतों पर। तुम्हें मोटिवेशन, इंस्पिरेशन या ऐसी किसी बकवास चीज की जरूरत नहीं है। तुम्हें बस खुद के साथ बैठकर यह पूछना है कि ‘आखिर वो क्या चीज है, जो मुझे वो काम करने से रोक रही है, जो मुझे पता है कि मुझे करना चाहिए?’” सच में, यह एक ज़बरदस्त और बेबाक बात है। आइए समझते हैं कि इसका असल मतलब क्या है।

इस कोट (quote) का क्या मतलब है?

हममें से कई लोग कोई बड़ा कदम उठाने से पहले “सही समय,” बाहरी मदद, या सब कुछ एकदम सही होने का इंतज़ार करते हैं। लोगों में अक्सर बाहरी हालात को दोष देने की आदत होती है जब वे अपनी कमियों से पार नहीं पा पाते। जेम्स क्लियर का यह कोट लोगों को अपने डर, पुराने सदमे (trauma), अपनी सीमाओं और बुरी आदतों से उबरकर और मज़बूत बनने के लिए प्रेरित करता है। रास्ते में रुकावटें आने पर, क्लियर लोगों को सलाह देते हैं कि वे खुद के साथ समय बिताएं और ईमानदारी से सोचें कि आखिर कौन सी चीज़ उन्हें अपनी मुश्किलों से उबरने से रोक रही है।

संसाधनों या मौकों की कमी के मुकाबले, असफलता का डर, पुराना सदमा, खुद पर शक और आराम-पसंद आदतें हमें ज़्यादा रोकती हैं। मोटिवेशन (प्रेरणा) कुछ समय के लिए ही होता है और उस पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता। असली तरक्की तब होती है जब आप बाहरी प्रेरणा की तलाश छोड़कर खुद के साथ शांति से बैठते हैं, अपनी अंदरूनी रुकावटों को पहचानते हैं और अपने कामों की ज़िम्मेदारी खुद लेते हैं।

आज के समय में यह बात कितनी ज़रूरी है?

लोग अपने लक्ष्यों की ओर असल कदम उठाने के बजाय, लगातार ‘सेल्फ़-हेल्प’ कंटेंट, वीडियो और कोट्स देखते रहते हैं।

काम टालने का कारण अक्सर आलस नहीं होता; इसके पीछे आमतौर पर लोगों की राय का डर, परफेक्शन की चाहत या असफलता का डर होता है।

आज की डिजिटल ज़िंदगी में ध्यान भटकाने वाली चीज़ें बहुत हैं, जिससे मुश्किल भावनाओं का सामना करने के बजाय उनसे भागना आसान हो जाता है।

अनसुलझी असुरक्षाएं और पुराने अनुभव अक्सर काम और रिश्तों में ऐसी सोच के रूप में सामने आते हैं जो हमें आगे बढ़ने से रोकती है।

बहुत से लोग असली जोखिम लेने से बचने के लिए महीनों तक “प्लानिंग” करते रहते हैं या “सही पल” का इंतज़ार करते हैं।

इस बात से मिलने वाली सीख

किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए सबसे पहला कदम अपने ही मन के साथ चल रही लड़ाई को जीतना है।

काम करने से गति (मोमेंटम) बनती है; सिर्फ़ प्रेरणा पर निर्भर रहने से काम में निरंतरता नहीं रहती।

जब तक आप यह मानने को तैयार नहीं होते कि असल में आपको क्या चीज़ रोक रही है, तब तक आप समस्या को ठीक नहीं कर सकते।

बिना किसी रुकावट के अकेले बैठकर अपने विचारों पर सोचने से आपको अपनी असली रुकावटों का पता चलता है।

चाहे आपको कैसा भी महसूस हो, जो काम ज़रूरी है उसे करना ही तरक्की का सबसे अच्छा तरीका है।