भारत के इन 5 राज्यों में बढ़ रहा इंसान और हाथी टकराव! WII ने मैप किए 5 राज्यों के बड़े हॉटस्पॉट्स

भारत में इंसानों और हाथियों के बीच बढ़ता टकराव एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और प्रोजेक्ट एलिफेंट डिवीजन ने देश के 5 प्रमुख राज्यों कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में मानव-हाथी संघर्ष के प्रमुख हॉटस्पॉट्स को मैप किया है। WII की इस रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य उन इलाकों की पहचान करना है जहां जोखिम सबसे अधिक है, ताकि संरक्षण और सुरक्षा प्रयासों को सही दिशा में फोकस किया जा सके।

रिसर्चर्स ने इन राज्यों के लंबे समय के डेटा की स्टडी की है। इनमें से कुछ आंकड़े साल 2000 तक पुराने हैं। इस पूरी सीरीज में ओडिशा की रिपोर्ट सबसे डिटेल है। 128 पन्नों की इस रिपोर्ट में कई सालों के डेटा का इस्तेमाल किया गया है। रिपोर्ट का लक्ष्य उन स्थानों और दोहराए जाने वाले पैटर्न की पहचान करना है जहां हाथियों और इंसानों का आमना-सामना सबसे ज्यादा होता है।

इंसानी बस्तियों में क्यों आ रहे हैं हाथी?

रिपोर्ट के मुताबिक इंसानों और हाथियों के बीच संघर्ष की मुख्य वजह उनके प्राकृतिक आवासों (हाथी पर्यावास) और इंसानी गतिविधियों के बीच बढ़ता ओवरलैप है। जंगल लगातार छोटे-छोटे हिस्सों में बंटते जा रहे हैं। जंगलों के बीच से गुजरने वाली सड़कें और रेलवे लाइनें हाथियों के पारंपरिक रास्तों को काटती हैं। इसके अलावा बिजली की बाड़ और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर भी हाथियों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रहे हैं। जंगलों के करीब गांवों और इंसानी बस्तियों के विस्तार ने लोगों और हाथियों को एक-दूसरे के बेहद करीब ला दिया है।

एलिफेंट कॉरिडोर के आसपास भी मुश्किलें

हाथियों को भोजन और पानी की तलाश के साथ-साथ एक जंगल से दूसरे जंगल तक सुरक्षित आवाजाही के लिए बड़े क्षेत्र की जरूरत होती है। जब हाथियों के ये पारंपरिक कॉरिडोर या रास्ते ब्लॉक हो जाते हैं, तो वे वैकल्पिक रास्तों की तलाश करते हैं। ये वैकल्पिक रास्ते अक्सर खेतों, गांवों या बस्तियों से होकर गुजरते हैं। हाथियों के इस मूवमेंट से फसलों को भारी नुकसान पहुंचता है। इंसानों से मुठभेड़ का खतरा बढ़ जाता है और कई बार इंसानों व हाथियों दोनों को अपनी जान गंवानी पड़ती है या गंभीर चोटों का सामना करना पड़ता है।

वैज्ञानिकों ने हॉटस्पॉट आधारित समाधान की उठाई मांग

WII की यह रिपोर्ट अधिकारियों को उन संवेदनशील क्षेत्रों की तुरंत पहचान करने में मदद करेगी जहां तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि इन हॉटस्पॉट्स में बेहतर अर्ली-वार्निंग सिस्टम (पूर्व चेतावनी प्रणाली) लागू की जानी चाहिए। सुरक्षित रेलवे और सड़क योजनाएं बनाना, वन विभागों द्वारा हॉटस्पॉट क्षेत्रों में रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम को मजबूत करना और हाथियों के गलियारों को सुरक्षा प्रदान करना अत्यंत महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।

संकट से निपटने के लिए बचाव रणनीति की जरूरत

यह रिपोर्ट सिर्फ अतीत में हुए संघर्षों का रिकॉर्ड भर नहीं है बल्कि यह दिखाती है कि संघर्ष कहां, कब और किन कारणों से हो रहे हैं। यह डेटा अधिकारियों को घटनाओं के होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय, उन्हें पहले से रोकने में मदद कर सकता है। भारत के लिए यह चुनौती बिल्कुल स्पष्ट है कि हाथियों की रक्षा करने का सीधा मतलब उन प्राकृतिक भू-भागों और रास्तों की सुरक्षा करना है, जिनका उपयोग हाथी अपनी आवाजाही के लिए करते हैं।

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Video: शेर के कब्जे में 30 मिनट तक जिंदगी और मौत से लड़ता रहा शख्स, आखिर कैसे बची जान? खुद सुनाई रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी

गुजरात के एक छोटे से गांव में एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। यहां एक आम चरवाहे का सामना अचानक जंगल के सबसे खतरनाक शिकारी से हो गया। हालात ऐसे थे कि एक छोटी सी गलती उसकी जान ले सकती थी, लेकिन उसने डर और घबराहट के बजाय धैर्य और हिम्मत का सहारा लिया। कई मिनट तक चले इस खौफनाक आमने-सामने में उसकी नजरें शेर से मिली रहीं और हर पल जिंदगी और मौत के बीच की लड़ाई जैसा महसूस हुआ। इस घटना ने लोगों को हैरान कर दिया कि आखिर कैसे एक इंसान ने इतने खतरनाक हालात में खुद पर काबू रखा। अब इस अनोखे मुकाबले की कहानी सोशल मीडिया से लेकर हर जगह चर्चा का विषय बन गई है।

अचानक हुआ शेर से आमना-सामना

कालू परमार ने बताया कि घटना सोमवार सुबह की है। वह अपने घर के आंगन में गाय बांधने के बाद अंदर जाने वाले थे। तभी पीछे से किसी जानवर ने उन पर हमला कर दिया।

उन्होंने कहा, “मुझे समझ ही नहीं आया कि क्या हुआ। कुछ सेकंड बाद पता चला कि वह शेर था और मैं जमीन पर गिर चुका था।”

हमले के बाद शेर ने उनका हाथ अपने मुंह में पकड़ लिया। उस समय उनके पास बचने के लिए कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था।

शेर को शांत करने के लिए अपनाई अनोखी रणनीति

परमार ने बताया कि उस खतरनाक पल में उन्होंने शेर से लड़ने के बजाय खुद को शांत रखने का फैसला किया। उन्होंने धीरे-धीरे शेर के सिर और गर्दन पर हाथ फेरना शुरू किया।

उनका मानना था कि इससे शेर को महसूस होगा कि वह उसे नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते। उन्होंने लगातार शेर की आंखों में देखते हुए खुद को शांत रखा।

करीब 30 मिनट तक दोनों के बीच एक अजीब सा सामना चलता रहा और आखिरकार शेर ने उनका हाथ छोड़ दिया।

आंखों के सामने घूम रहा था परिवार का चेहरा

परमार ने बताया कि उन 30 मिनटों में उन्हें अपनी पत्नी, पांच बेटियों और बेटे की याद आ रही थी। उन्हें लग रहा था कि शायद उनकी जिंदगी का यह आखिरी पल हो सकता है।

उन्होंने कहा कि भगवान की कृपा से शेर ने उन्हें छोड़ दिया और वह सिर्फ पंजों की चोट के साथ बच गए।

विशेषज्ञों ने दी सावधानी की सलाह

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि शेर के हमले के दौरान कोई एक तरीका हमेशा काम करेगा, ऐसा नहीं कहा जा सकता। जानवर का व्यवहार, परिस्थिति और आसपास का माहौल नतीजे को प्रभावित करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, शेर को छूना या उसके करीब जाना आमतौर पर जोखिम भरा हो सकता है। हालांकि परमार के मामले में उनका शांत रहना और घबराहट से बचना मददगार साबित हुआ।

बीमारी से उबरने के बाद हुआ हमला

दिलचस्प बात यह है कि परमार हाल ही में बीमारी से ठीक हुए थे। घटना से सिर्फ 10 दिन पहले ही वह फ्लू के इलाज के बाद अस्पताल से घर लौटे थे।

उन्होंने बताया कि गांव के लोग आसपास के जंगल में शेरों की आवाज सुनते रहते हैं, लेकिन गांव के अंदर किसी शेर को देखना उनके लिए पहली बार था।

वन विभाग ने शुरू किया शेर की तलाश अभियान

वन विभाग ने साफ किया है कि परमार पर हमला करने वाला जानवर शेर था, न कि शेरनी जैसा पहले बताया जा रहा था।

शेर को ढूंढने और सुरक्षित पकड़ने के लिए 32 सदस्यीय टीम को लगाया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, भारी बारिश के कारण शेर आसपास के जंगल क्षेत्र में चला गया है।

वन विभाग के अधिकारी चिराग अमीन ने बताया कि टीम शेर की पहचान करने के साथ यह भी जांच रही है कि क्या उसे पहले कभी पकड़ा गया था। जरूरत पड़ने पर उसे दूसरे स्थान पर भी शिफ्ट किया जा सकता है।

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