‘मुझे हर दिन मनहूस कहा जाता था’… सरकारी टीचर की मौत से पहले का वीडियो वायरल, पति गिरफ्तार

उत्तराखंड के श्रीनगर गढ़वाल की रहने वाली 30 वर्षीय सरकारी स्कूल की शिक्षिका सृष्टि कंडारी की 29 जुलाई को देहरादून के डोईवाला क्षेत्र के हर्रावाला स्थित ससुराल में मौत हो गई। उनकी शादी पिछले साल नवंबर में सरकारी कर्मचारी सौरभ खत्री से हुई थी। शादी के केवल आठ महीने बाद ही उनकी मौत हो गई। मौत से पहले सृष्टि ने अपनी मां को एक भावुक वीडियो संदेश भेजा था। इस वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया कि उनके ससुराल वाले उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। सृष्टि की मां की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, परिवार का आरोप है कि सृष्टि को लंबे समय से मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जा रहा था। उन्होंने उनकी मौत की परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए हैं।

सुबह 7 बजे मां को भेजा था आखिरी वीडियो

सृष्टि के भाई रितांशु कंडारी ने बताया कि 29 जुलाई की सुबह करीब 7 बजे सृष्टि ने अपनी मां को 56 सेकंड का एक वीडियो भेजा था। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। वीडियो में सृष्टि काफी भावुक नजर आ रही हैं। उन्होंने अपनी मां से माफी मांगी और आरोप लगाया कि ससुराल वाले उन्हें बार-बार “मनहूस” कहकर अपमानित करते थे। रितांशु के अनुसार, उनकी मां ने सुबह करीब 7:20 बजे वीडियो देखा। इसके बाद उन्होंने तुरंत सृष्टि, उनके पति, सास और परिवार के अन्य लोगों को कई बार फोन किया, लेकिन किसी ने भी कॉल का जवाब नहीं दिया।

करीब एक घंटे बाद परिवार को फोन कर देहरादून के एक अस्पताल बुलाया गया। जब परिवार अस्पताल पहुंचने के लिए रास्ते में था, तभी उन्हें बताया गया कि सृष्टि की मौत हो चुकी है। रितांशु का कहना है कि बाद में अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि सृष्टि को सुबह करीब 8:15 बजे ही मृत घोषित कर दिया गया था। परिवार का आरोप है कि उन्हें सृष्टि की हालत की जानकारी समय पर नहीं दी गई।

“वह उस दिन घर आने वाली थी”

सृष्टि के परिवार ने उनकी मौत की परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। भाई रितांशु कंडारी के अनुसार, 28 जुलाई की रात करीब 11 बजे सृष्टि ने अपनी मां से फोन पर बात की थी। उस दौरान उन्होंने बताया था कि वह अगली सुबह मायके आने वाली हैं। रितांशु का कहना है कि घटना वाले दिन सृष्टि नहा-धोकर मायके जाने के लिए पूरी तरह तैयार थीं। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब वह घर आने की तैयारी कर चुकी थीं, तो फिर अचानक ऐसा कदम कैसे उठा सकती हैं।

रिवार ने लगाया प्रताड़ना का आरोप

सृष्टि के परिवार का आरोप है कि शादी के करीब दो महीने बाद ही उन्हें ससुराल में परेशान किया जाने लगा था। रितांशु के मुताबिक, उनकी बहन को बार-बार यह कहकर अपमानित किया जाता था कि वह इस परिवार के स्तर की नहीं हैं और शादी उनकी उम्मीदों के मुताबिक नहीं हुई थी।

ससुर की मौत के बाद बढ़ा प्रताड़ना का आरोप

परिवार की शिकायत के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में सृष्टि के ससुर की मौत के बाद उनके साथ कथित तौर पर और ज्यादा दुर्व्यवहार किया जाने लगा। परिवार का आरोप है कि ससुर की मौत का जिम्मेदार भी सृष्टि को ठहराया गया। उन्हें बार-बार “मनहूस” कहकर अपमानित किया जाता था। परिजनों का कहना है कि रिश्तेदार भी यह कहते थे कि शादी के बाद घर में दुर्भाग्य आ गया है। मौत से पहले रिकॉर्ड किए गए वीडियो में सृष्टि ने कहा कि उन्होंने काफी समय तक उम्मीद की कि हालात बदल जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वीडियो में वह कहती हैं कि उन्हें हर दिन “मनहूस” कहकर ताने दिए जाते थे और अब उन्हें नहीं लगता कि ससुराल वालों का व्यवहार कभी बदलेगा।

सृष्टि की मां सीमा कंडारी की शिकायत पर डोईवाला पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 80(2) के तहत मामला दर्ज किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दहेज और अन्य बातों को लेकर सृष्टि को उनके पति और ससुराल वाले लंबे समय से मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। परिवार का कहना है कि इसी वजह से वह बेहद परेशान थीं। पुलिस ने जांच के दौरान सबूत जुटाने के बाद शनिवार को सृष्टि के पति सौरभ खत्री और उनकी बहन चारू खत्री को गिरफ्तार कर लिया। देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) प्रमेंद्र डोभाल ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले ने तूल पकड़ने और निष्पक्ष जांच की मांग उठने के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सृष्टि कंडारी की मौत की जांच सीबी-सीआईडी से कराने के आदेश दिए हैं। राज्य सरकार का कहना है कि इस जांच के जरिए मौत से जुड़ी सभी परिस्थितियों और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष और गहराई से जांच की जाएगी।

जेल जाने पर PM-CM को हटाने नहीं, सिर्फ सस्पेंड करने की सिफारिश! संसदीय पैनल ने दिया बड़ा सुझाव

PM-CM suspended news: विपक्षी दलों की चिंताओं के बीच संसद की एक समिति ने सिफारिश की है कि अगर प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को गंभीर अपराधों के आरोप में लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रखा जाता है, तो उन्हें उनके पदों से हटाने के बजाय निलंबित किया जाना चाहिए।समिति ने एक ऐसी व्यवस्था का भी प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत अगर ऐसे लोगों को बरी कर दिया जाता है या मुकदमे की कार्यवाही निर्धारित समय के भीतर आगे नहीं बढ़ती है, तो निलंबन अपने आप खत्म हो जाएगा।

130वें संविधान संशोधन विधेयक की समीक्षा कर रही संसद की संयुक्त समिति ने दो खास और तीन सामान्य सिफारिशें कीं। पिछले साल अगस्त में पेश किए गए इस विधेयक में यह प्रावधान है कि अगर प्रधानमंत्री, मंत्री या मुख्यमंत्री हिरासत में रहने के 31वें दिन तक खुद इस्तीफा नहीं देते हैं, तो उन्हें स्वत: पद से हटा दिया जाएगा।

विपक्ष ने किया था विरोध

विपक्ष ने इस विधेयक को विरोधी दलों की सरकारों को अस्थिर करने का एक जरिया बताया था। विपक्ष के अधिकतर दलों ने विधेयक की समीक्षा करने वाली संयुक्त समिति से दूरी बना ली थी। इस रिपोर्ट के इस सप्ताह स्वीकृत किए जाने की संभावना है।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में प्रस्ताव दिया है कि पद से हटाना शब्द को निलंबन किया जाए। यानी जिन मंत्रियों पर गंभीर आपराधिक आरोप हैं, उन्हें कानूनी कार्यवाही के परिणाम आने तक स्थायी रूप से पद से हटाने के बजाय निलंबित किया जाना चाहिए।

‘ऑटोमैटिक रिवर्सल क्लॉज’ की सिफारिश

पैन ने एक ऑटोमैटिक रिवर्सल क्लॉज (अपने-आप बहाल होने का नियम) का भी प्रस्ताव दिया है। ताकि अगर ऐसे लोगों को बरी कर दिया जाए या तय समय के भीतर मुकदमा आगे न बढ़े, तो वे अपने पद पर वापस आ सकें। इसमें गंभीर अपराधों को भी परिभाषित किया गया है। इसमें कहा गया है कि इस शब्द का तात्पर्य उन अपराधों से होना चाहिए, जिनके लिए पांच साल या उससे अधिक के कारावास की सजा हो सकती है।

निलंबन खुद समाप्त होने का एक प्रावधान प्रस्तावित करते हुए इसमें कहा गया है कि यदि मंत्री बरी हो जाते हैं या मुकदमे की कार्यवाही निर्धारित समय के भीतर आगे नहीं बढ़ती है, तो निलंबन स्वतः समाप्त हो जाना चाहिए। संसदीय समिति ने कहा कि यह सुरक्षा उपाय दोबारा नियुक्ति सुनिश्चित करता है और यह भी ध्यान रखता है कि जिन लोगों को अदालतें दोषी नहीं पातीं, उनका निलंबन स्थायी न होने पाए।

विशेष अदालत में होगी सुनवाई

संयुक्त समिति ने यह भी सुझाव दिया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों से जुड़े मामलों की सुनवाई त्वरित या विशेष अदालतों में होनी चाहिए। समिति ने कहा कि प्रस्तावित कानून में एक अलग अनुसूची होनी चाहिए जिसमें पांच साल या उससे अधिक की सजा वाले अपराध शामिल हों। ताकि उन अपराधों की साफ पहचान हो सके, जिनके कारण निलंबन हो सकता है।

अब आगे क्या होगा?

यह विधेयक यह सुनिश्चित करने के मकसद से पेश किया गया था कि सरकारें जेल से न चलाई जाएं। अगर सिफारिशें मान ली जाती हैं, तो गृह मंत्रालय प्रस्तावित संशोधनों के साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल के पास जाएगा और बाद में लोकसभा में आधिकारिक तौर पर संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा।

क्या था विधेयक का प्रावधान?

पिछले साल अगस्त में पेश किए गए इस विधेयक में प्रावधान था कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री गंभीर आपराधिक मामले में लगातार 30 दिन तक हिरासत में रहता है और स्वयं इस्तीफा नहीं देता, तो 31वें दिन उसे स्वतः पद से हटा दिया जाएगा।

इस प्रस्ताव का विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया था। विपक्ष का आरोप था कि इस कानून का इस्तेमाल विपक्षी सरकारों को अस्थिर करने के लिए किया जा सकता है। इसी कारण अधिकांश विपक्षी दलों ने इस विधेयक की समीक्षा कर रही संयुक्त समिति से दूरी बना ली थी।

समिति की प्रमुख सिफारिशें

  • ‘Removal’ (हटाना) की जगह ‘Suspension’ (निलंबन) शब्द का इस्तेमाल किया जाए।
  • केवल गंभीर आपराधिक मामलों में ही यह प्रावधान लागू हो।
  • गंभीर अपराधों की परिभाषा में ऐसे अपराध शामिल हों, जिनमें पांच साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है।
  • यदि आरोपी बरी हो जाए या तय अवधि में अभियोजन आगे न बढ़े, तो निलंबन स्वतः समाप्त हो जाए।
  • ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक या विशेष अदालतों में कराई जाए।
  • कानून में गंभीर अपराधों की अलग सूची (शेड्यूल) जोड़ी जाए, ताकि स्पष्ट हो सके कि किन अपराधों में निलंबन लागू होगा।

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Mussoorie woman death case: उत्तराखंड के देहरादून जिले में मसूरी-धनौल्टी मार्ग स्थित एक होमस्टे में पिछले महीने संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिली महिला के पति को पुलिस ने नई दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी सोमयाजुला चरण को मसूरी न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय से गैर-जमानती वारंट हासिल करने के बाद पूर्वी दिल्ली के मधु विहार इलाके से गिरफ्तार किया गया। यह घटना 15 जून को मसूरी क्षेत्र के ‘कियाना होमस्टे’ में हुई थी।

पुलिस ने बताया कि मृतका की पहचान पारुपुडी राधा गायत्री (27) के रूप में हुई थी। वह दिल्ली के किदवई नगर निवासी अपने पति के साथ ‘होमस्टे’ में ठहरी हुई थी। पुलिस के मुताबिक, घटना के बाद मृतका के परिजनों ने उसके पति पर संदेह जताते हुए मसूरी कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी।

इसके बाद पुलिस ने आरोपी पति के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान मिले साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर आरोपी की संलिप्तता सामने आने के बाद उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट प्राप्त किया गया। फिर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

14 दिन की न्यायिक हिरासत

गिरफ्तारी के बाद आरोपी पति को मसूरी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है। अधिकारियों ने बताया कि तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जन्मदिन मनाने गए थे मसूरी

मसूरी में जन्मदिन मनाने पहुंचे कपल की यात्रा दर्दनाक हादसे में बदल गई। दिल्ली की 27 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल पी. राधा गायत्री की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के लगभग एक महीने बाद पुलिस ने उनके पति को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का दावा है कि जांच में पति की कथित संलिप्तता के संकेत मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई।

पुलिस के अनुसार, पी. राधा गायत्री अपने पति के साथ मसूरी-धनोल्टी रोड स्थित एक होमस्टे में ठहरी थीं। दोनों पति के जन्मदिन का जश्न मनाने के लिए मसूरी आए थे। 15 जून को होमस्टे के कमरे में गायत्री मृत अवस्था में मिली थीं।

आरोपी पति आईटी सेक्टर में ही कार्यरत है। उसको दिल्ली के पूर्वी इलाके मधु विहार से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी से पहले मसूरी की न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत से उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कराया गया था।

कमरे में मिले खून के निशान और शराब की खाली बोतलें

पुलिस जांच में सामने आया कि गायत्री का शव कमरे के फर्श पर निर्वस्त्र अवस्था में पड़ा मिला। कमरे की बेडशीट पर खून के धब्बे मिले। जबकि मौके से शराब की दो खाली बोतलें और खाने-पीने का सामान भी बरामद किया गया।

पुलिस के मुताबिक, प्रारंभिक जांच के दौरान पति ने बताया कि 15 जून की तड़के करीब 3:30 बजे तक दोनों ने शराब पी थी। इसके बाद सो गए। उसका दावा था कि सुबह उठने पर उसने पत्नी को मृत पाया।

पिता की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

गायत्री की मौत पर उसके पिता पी. सुधाकर ने संदेह जताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बेटी की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग की। साथ ही परिवार ने भी पति की भूमिका पर सवाल उठाए। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

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जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर पुलिस ने पति की कथित संलिप्तता की आशंका जताई। इसके बाद गैर-जमानती वारंट हासिल कर दिल्ली से उसकी गिरफ्तारी की गई। पुलिस के अनुसार, गायत्री और उनके पति की शादी 8 नवंबर 2025 को हुई थी। फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।