रुबियो ने मोदी-पेजेशकियन की मुलाकात में ट्रेड डील से किया इनकार, देशों को ईरान पर प्रतिबंधों को लेकर चेताया

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को कहा कि उन्हें नहीं लगता कि भारत और ईरान किसी ट्रेड डील पर बातचीत कर रहे हैं। साथ ही, उन्होंने दूसरे देशों को चेतावनी दी कि वे तेहरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद न करें।

रुबियो ने फॉक्स न्यूज रेडियो के ‘द ब्रायन किल्मीड शो’ में एक इंटरव्यू के दौरान ये बातें कहीं। उनसे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट के दौरान बिश्केक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की मुलाकात के बारे में पूछा गया था।

रूबियो ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच कोई ट्रेड डील हुई है। जाहिर है, हर देश अपनी विदेश नीति बनाता है और दुनिया भर के कई देश ईरान की सरकार से बातचीत करते हैं।”

इस बात पर प्रतिक्रिया देते हुए कि पीएम मोदी और पेजेशकियन के बीच ट्रेड डील होने की संभावना दिख रही है, रूबियो ने आगे कहा: “मेरा मतलब है कि हमने भी ईरान की सरकार के कुछ लोगों से मुलाकात की है, क्योंकि कुछ बातचीत हुई है और उनसे संपर्क भी रहा है।”

रूबियो ने US प्रतिबंधों को लेकर चेतावनी दी

रूबियो ने कहा कि US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वॉशिंगटन का रुख साफ कर दिया है: देशों को ईरान की मदद नहीं करनी चाहिए कि वह US प्रतिबंधों से बच सके।

रूबियो ने कहा, “किसी भी देश को ऐसे तरीके बनाने में उनकी मदद नहीं करनी चाहिए जिनसे वे कमाई कर सकें और उस पैसे का इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने और परमाणु हथियार बनाने की कोशिश में कर सकें।”

उन्होंने आगे कहा, “और अगर देश ऐसा करने का फैसला करते हैं, तो हमें उन पर भी प्रतिबंध लगाने होंगे।”

रुबियो का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत ईरान के साथ अपने कूटनीतिक और आर्थिक संबंध बनाए हुए है, और साथ ही पश्चिम एशिया में चल रहे व्यापक युद्ध के बीच अमेरिका के साथ भी बातचीत कर रहा है।

मोदी-पेजेशकियन की मुलाकात में क्या हुआ?

फरवरी में ईरान-अमेरिका के बीच तनाव शुरू होने के बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को बिश्केक में पेजेशकियन से अपनी पहली द्विपक्षीय बातचीत की।

बैठक के दौरान, मोदी ने कहा कि भारत ईरान के साथ अपने व्यापार के दायरे को “बढ़ाना और उसमें विविधता लाना” चाहता है। साथ ही, उन्होंने पश्चिम एशिया में स्थायी शांति के प्रयासों के लिए नई दिल्ली के समर्थन को भी दोहराया।

दोनों नेताओं ने इस टकराव और आम नागरिकों, नागरिक बुनियादी ढांचे और नेविगेशन की आजादी की सुरक्षा की जरूरत पर भी चर्चा की।

पेजेशकियान ने पीएम मोदी से आग्रह किया कि वे बातचीत को बढ़ावा देने और लड़ाई खत्म करने में मदद के लिए, संघर्ष में शामिल देशों के साथ भारत के व्यापक संपर्कों का इस्तेमाल करें।

भारत ने ईरान और अन्य संबंधित पक्षों के साथ चाबहार बंदरगाह के भविष्य पर भी बातचीत जारी रखी है। यह दोनों देशों के बीच एक अहम कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट है, जिस पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण अनिश्चितता बनी हुई है।

नई दिल्ली का मानना ​​है कि इस क्षेत्र में विवादों को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाया जाना चाहिए, साथ ही उसे अपने व्यापार, कनेक्टिविटी और व्यापक रणनीतिक हितों की भी रक्षा करनी चाहिए।

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Iran-US War Update: होर्मुज स्ट्रेट में टैंकर पर हमले में भारतीय नाविक की मौत! भारत सरकार का बड़ा एक्शन, ईरानी राजनयिक तलब

Iran-US War Update: भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों की मंगलवार (14 जुलाई) को कड़ी निंदा की। इन हमलों में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई और 10 अन्य घायल हो गए। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार सुबह ईरान दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी को तलब किया और इन हमलों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत ने कहा कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के दौरान ‘एमटी अल बहियाह’ और ‘एमटी मोम्बासा’ नाम के दो पोत पर हुए हमलों को लेकर बेहद चिंतित है।

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “दोनों जहाजों के कुल 46 चालक दल के सदस्यों में से 30 भारतीय नाविक थे। ‘एमटी अल बहियाह’ पर सवार 12 भारतीयों में से एक की मृत्यु हो गई है और एक अन्य घायल हो गया है।” मंत्रालय के अनुसार, “एमटी मोम्बासा पर सवार 18 भारतीयों में से नौ घायल हुए हैं जिनमें से दो के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है।”

मंत्रालय ने कहा कि भारत इन हमलों और नाविकों को निशाना बनाने वाली हिंसा की घटनाओं तथा होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से मुक्त एवं सुरक्षित आवाजाही में बाधा डालने वाले कृत्यों की कड़ी निंदा करता है। विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम पश्चिम एशियाई क्षेत्र में हमलों के फिर से शुरू होने और तनाव बढ़ने पर अपनी गहरी चिंता भी दोहराते हैं। साथ ही शांति के हित में हिंसा को तुरंत रोकने और बातचीत एवं कूटनीति का रास्ता अपनाने की अपील करते हैं।”

मृतक के परिवार के प्रति जताई संवेदना

विदेश मंत्रालय ने मृतक भारतीय नाविक के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़ी है। साथ ही घायल भारतीयों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की गई।

ईरान के राजनयिक को किया तलब

घटना के बाद भारत सरकार ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के उप मिशन प्रमुख (Deputy Chief of Mission) को विदेश मंत्रालय में तलब किया। इस दौरान भारत ने इन हमलों पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। साथ ही स्पष्ट कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रूट्स पर चल रहे कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ऐसे सभी हिंसक हमलों की कड़ी निंदा करता है, जो नाविकों की जान को खतरे में डालते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुद्री रूट्स पर सुरक्षित एवं निर्बाध आवाजाही को बाधित करते हैं।

UAE में भारतीय मिशन लगातार संपर्क में है

विदेश मंत्रालय ने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में स्थित भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास स्थानीय प्रशासन के लगातार संपर्क में हैं। सरकार प्रभावित भारतीय नाविकों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर जताई चिंता

भारत ने पश्चिम एशिया में फिर से बढ़ती हिंसा और सैन्य तनाव पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से तत्काल हिंसा रोकने और बातचीत तथा कूटनीति के रास्ते पर लौटने की अपील की। मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए संवाद ही सबसे प्रभावी समाधान है।

कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना गंभीर खतरा

भारत ने अपने बयान में दोहराया कि कमर्शियल जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं। सरकार ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।

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इस रूट्स पर होने वाले हमले न केवल नाविकों की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। बल्कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल भारत सरकार पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। घायल भारतीयों को सुरक्षित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ इस मामले को राजनयिक स्तर पर भी मजबूती से उठा रही है।

ईरान के सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार में नितिन नबीन और खड़गे को न्योता, भारत के कई नेताओं को भी मिला आमंत्रण

ईरान ने अपने सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार से पहले भारत की सत्ताधारी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी पार्टी कांग्रेस दोनों से संपर्क किया है। CNN-News18 के सूत्रों के अनुसार, ईरान ने भारत के सभी राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं को निमंत्रण भेजा है।

सूत्रों ने बताया कि, यह निमंत्रण BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद, जो वर्तमान में कांग्रेस के विदेश मामलों के विभाग प्रमुख हैं, को भेजा गया है।

सूत्रों के मुताबिक, खड़गे ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि वे निमंत्रण स्वीकार करेंगे या नहीं। साथ ही, वे कांग्रेस के उस प्रतिनिधिमंडल के गठन पर भी फैसला लेंगे जो अंतिम संस्कार के लिए तेहरान जा सकता है।

इसके अलावा, ईरान ने BJP और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती को भी इस राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है।

सबसे बड़े राजकीय अंतिम संस्कार की तैयारी

यह निमंत्रण भारत के सभी राजनीतिक दलों तक तेहरान की पहुंच को दर्शाता है। बता दें कि ईरान अपने इतिहास के सबसे बड़े राजकीय अंतिम संस्कारों में से एक की तैयारी कर रहा है, जो इस साल की शुरुआत में अमेरिकी-इजरायली सैन्य अभियान के दौरान खामेनेई की मौत के बाद आयोजित किया जा रहा है।

वहीं, भारत सरकार पहले ही तय कर चुकी है कि वह तेहरान में होने वाले अंतिम संस्कार समारोह में अपना आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भेजेगी। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के गवर्नर लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (रिटायर्ड) करेंगे। उम्मीद है कि वे कई दिनों तक चलने वाले राजकीय अंतिम संस्कार के दौरान भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करेंगे। उनकी यह यात्रा ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिए गए निमंत्रण के बाद हो रही है।

सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी और कांग्रेस नेताओं को निमंत्रण देने के अलावा, ईरान ने शिया समुदाय के कई भारतीय सांसदों को भी अंतिम संस्कार की रस्मों में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है, जिनमें रुहुल्लाह मेहदी, हाजी हनीफा, इमरान मसूद और अफजल अंसारी शामिल हैं।

बता दें कि ईरान ने इस हफ्ते के आखिर से कई अंतिम संस्कार समारोहों की योजना बनाई है। खमेनेई का पार्थिव शरीर तेहरान की ग्रैंड मोसाल्ला में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा और उसके बाद दूसरे शहरों में भी समारोह आयोजित किए जाएंगे।

वहीं, ईरान के अधिकारियों का अनुमान है कि सार्वजनिक अंतिम संस्कार में 1.5 करोड़ से 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं, जिससे यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा राजकीय अंतिम संस्कार बन सकता है।

ईरान में अंतिम संस्कार को लेकर तैयारियां तेज

फिलहाल, ईरान की राजधानी में तैयारियां तेज हो गई हैं, समारोह से पहले ग्रैंड मोसाला कॉम्प्लेक्स के आस-पास खामेनेई की बड़ी-बड़ी तस्वीरें लगाई गई हैं, सड़कों को कुछ हद तक बंद कर दिया गया है और सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सरकारी टेलीविजन ने अंतिम संस्कार में आने से पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने की अपील की है और अंतिम संस्कार के दौरान तापमान बढ़ने की संभावना को देखते हुए लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की है।

सार्वजनिक समारोहों के अलावा, तेहरान शुक्रवार को विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के लिए एक अलग कार्यक्रम भी आयोजित कर रहा है। ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि इसमें लगभग 30 देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।

ईरान ने नहीं दिया यूरोपीय देशों को निमंत्रण 

हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि उसने यूरोपीय देशों को आधिकारिक तौर पर कोई निमंत्रण नहीं भेजा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने हालिया संघर्ष के दौरान यूरोपीय सरकारों पर “इतिहास के गलत पक्ष” में खड़े होने का आरोप लगाया और अमेरिका-इजराइल सैन्य अभियान पर उनके रुख की आलोचना की।

गौरतलब है कि यह अंतिम संस्कार पहले युद्ध की वजह से टाल दिया गया था। अब यह ऐसे समय में हो रहा है, जब ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में संघर्ष रोकने के लिए एक शुरुआती समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding – MoU) पर सहमति बनी है। हालांकि, इस समझौते को लागू करने को लेकर दोनों देश अब भी एक-दूसरे को चेतावनी दे रहे हैं।

अधिकारियों ने अंतिम संस्कार के दौरान तेहरान के साथ-साथ पवित्र शहर कोम और मशहद में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है। राजधानी में होने वाले कार्यक्रमों के बाद, खमेनेई के पार्थिव शरीर को इराक के पवित्र शहर नजफ और कर्बला ले जाए जाने की उम्मीद है। इसके बाद, 9 जुलाई को मशहद में स्थित इमाम रजा के मकबरे में उन्हें दफनाया जाएगा, जो उनका जन्मस्थान भी है।

फिलहाल यह अभी स्पष्ट नहीं है कि खमेनेई के बेटे और उत्तराधिकारी, मोजतबा खमेनेई, अंतिम संस्कार के दौरान सार्वजनिक रूप से सामने आएंगे या नहीं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की कोई भी घोषणा ‘सर्वोच्च नेता’ के कार्यालय से की जाएगी।

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