ईरान की अमेरिका को कड़ी चेतावनी! फिर हमला हुआ तो पहले से ज्यादा मजबूत जवाब देंगे, बातचीत का रास्ता भी खुला

Iran-US War Update: ईरान ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए एक बार फिर साफ किया है कि वह अपनी रक्षा के साथ-साथ कूटनीतिक समाधान की कोशिश भी जारी रखेगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार (4 अक्टूबर) को चेतावनी दी कि अगर उनके देश के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई की गई तो इसका जवाब पहले से ज्यादा ताकतवर होगा। हालांकि, उन्होंने साथ ही बातचीत के जरिए न्यायपूर्ण और सम्मानजनक समाधान की संभावना भी खुली रखी है।

तेहरान में विदेशी राजदूतों और राजनयिक मिशनों के प्रमुखों को संबोधित करते हुए अराघची ने कहा कि अगर दुश्मन फिर से सैन्य टकराव का रास्ता चुनते हैं तो उन्हें पहले से अधिक मजबूत प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ईरान कूटनीति के जरिए समाधान तलाशने के लिए तैयार है।

ईरान-अमेरिका बातचीत पर फिर अड़चन

यह बयान ऐसे समय आया है जब युद्ध खत्म करने की कोशिशें फिलहाल गतिरोध में नजर आ रही हैं। अमेरिका और इजरायल की ओर से फरवरी के अंत में शुरू किए गए सैन्य अभियान के बाद भारी बमबारी हुई। लेकिन संघर्ष का निर्णायक अंत नहीं हो सका। हाल के हफ्तों में अमेरिका ने सैन्य अभियानों को कम करते हुए आर्थिक दबाव बढ़ाने पर जोर दिया है। जून में ईरान और अमेरिका ने स्थायी समाधान की दिशा में एक रूपरेखा तैयार करने के लिए समझौता ज्ञापन पर सहमति जताई थी। हालांकि, बाद में यह प्रक्रिया टूट गई। इसका एक प्रमुख विवादित मुद्दा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज रहा।

होर्मुज बना बड़ा मुद्दा

युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर कंट्रोल कायम करने की कोशिश की है। ईरान ने उन जहाजों पर भी हमले किए हैं जो उसकी अनुमति के बिना इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहे थे। पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरान और अमेरिका के अधिकारियों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत भी हुई। तेहरान के मुताबिक, उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए सात शर्तें रखीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन प्रस्तावों को खारिज कर दिया। लेकिन आगे बातचीत की संभावना के साथ-साथ सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू करने का विकल्प भी खुला रखा।

अमेरिका ने 1 सितंबर के बाद नहीं किया हमला

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने 1 सितंबर के बाद ईरान पर कोई नया हमला नहीं किया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को ईरान में युद्ध और यमन के संघर्ष को लेकर बैठक की। इस बीच, ईरान समर्थित हूती संगठन यमन में सरकारी बलों के खिलाफ लड़ाई जारी रखे हुए है। हूती अब खुलकर सऊदी अरब को भी निशाना बना रहा है। ऐसे में ईरान-अमेरिका तनाव के साथ क्षेत्रीय संघर्ष को लेकर भी स्थिति पर नजर बनी हुई है।

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ईरान में एक डॉलर की कीमत 25 लाख रियाल के बराबर पहुंची! युद्ध के असर के बाद ये हाल आया सामने

पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध का सबसे गंभीर और विनाशकारी असर ईरान की इकॉनमी पर देखने को मिल रहा है। मंगलवार को ईरानी मुद्रा रियाल में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। तेहरान के मुद्रा बाजार में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 25 लाख (2.5 मिलियन) रियाल के आंकड़े को पार कर गई। यह अब तक के इतिहास में ईरानी रियाल का सबसे निचला स्तर है। यह साफ इशारा कर रहा है कि युद्ध ने ईरान के आर्थिक संतुलन को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी मुद्रा में यह बड़ी गिरावट सिर्फ 27 दिनों के भीतर आई है। इससे पहले 2 सितंबर को रियाल ने 22 लाख (2.2 मिलियन) प्रति डॉलर का निचला स्तर छुआ था। फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद से ही ईरानी मुद्रा लगातार नए निचले रिकॉर्ड बना रही है।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खोलने के लिए मध्यस्थता वार्ता में तेजी

एक तरफ जहां ईरान की इकॉनमी चरमरा रही है, वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक मोर्चे पर हलचल तेज हो गई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिर से खोलने के उद्देश्य से संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत अब और अधिक गंभीर मोड़ में पहुंच गई है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के बाद और पाकिस्तानी व कतर के मध्यस्थों से मुलाकात के बाद ईरानी मीडिया को बताया कि मौजूदा समय में पूरा ध्यान सिर्फ युद्ध के मुख्य केंद्र यानी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर फोकस्ड है। कतर के मध्यस्थ जल्द ही अमेरिकी पक्ष से इस मुद्दे पर दोबारा चर्चा करेंगे। अमेरिका का अंतिम रुख सामने आने के बाद तेहरान में इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। अमेरिकी ने भी इस बात की पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच लड़ाई रोकने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुजे को खोलने के लिए एक समझौते पर काम किया जा रहा है।

हालांकि, यह मध्यस्थता प्रयास ऐसे समय में जारी हैं जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था जिसमें ईरान ने अमेरिकी बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाने, ईरानी संपत्ति को बहाल करने और तेल बिक्री पर प्रतिबंध हटाने की शर्त पर 7 दिनों में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खोलने की बात कही थी।

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी जनता को दिया सीधा संदेश

ईरान की इकॉनमी पर बढ़ते दबाव के बीच ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के मुख्य प्रवक्ता जनरल हुसैन मोहेबी ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीधे अमेरिकी नागरिकों से अपील की। उन्होंने एक पत्र पढ़कर सुनाया और अमेरिकी जनता से आह्वान किया कि वे अपनी सरकार पर दबाव बनाएं ताकि अमेरिका मिडिल ईस्ट में जारी इस युद्ध को समाप्त करे। जनरल मोहेबी ने कहा कि इस युद्ध को खत्म करने का एकमात्र रास्ता यह है कि वाशिंगटन अपनी हार स्वीकार करे और ये इलाका छोड़कर चला जाए। उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम का बहाना बनाकर देश की संपत्ति को लूटने और उसे फिर से एक उपनिवेश बनाने की कोशिश कर रहा है।

अमेरिका में मिड टर्म इलेक्शन और आर्थिक संकट

ईरान का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में 3 नवंबर को महत्वपूर्ण मिडटर्म इलेक्शन होने जा रहे हैं। युद्ध की वजह से अमेरिका में भी ईंधन और गैसोलीन की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। इसका सीधा असर वहां की राजनीति और लोगों पर पड़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके वरिष्ठ सलाहकारों का मानना है कि ईरान की इकॉनमी अब इस लंबे संघर्ष को झेलने में सक्षम नहीं है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि नई पाबंदियों और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की वजह से ईरान का तेल व्यापार रुक गया है जिससे तेहरान एक बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है। अमेरिका का दावा है कि तेल की कमाई रोकने से ईरान को उन संसाधनों के इस्तेमाल से रोका जा रहा है, जिनका प्रयोग वह सैन्य गतिविधियों के लिए करता है।

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