बॉन्ड भरने के आदेश को नेहा ने चुनौती दी

नई दिल्ली। सीपीआई एमएल के छात्र संगठन आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा ने जमानत देने के लिए बॉन्ड भरने के पुलिस के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। नेहा बोरा शुक्रवार, 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क के तिरंगा मार्च में शामिल होने गई थीं, जहां उनको हिरासत में ले लिया गया था। शनिवार की सुबह पांच बजे उनको छोड़ा गया लेकिन उससे पहले उनसे शांति बनाए रखने का एक बॉन्ड भरवाया गया।

गौरतलब है कि इसी तरह के बॉन्ड भर कर 11 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका हिरासत से छूटे थे। इन तीनों को 10 अक्टूबर को इंदिरा गांधी अतंरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से हिरासत में लिया गया था। बाद में बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका फिर से हिरासत में लिए गए। दोनों छह दिन से जेल में बंद हैं।

बहरहाल, नेहा बोरा ने बॉन्ड भरवाने की पुलिस की कार्रवाई को चुनौती दी है। बताया जा रहा है कि वे हाई कोर्ट में इस मामले में जल्दी सुनवाई की अपील कर सकती हैं। परंतु दशहरा की वजह से इस हफ्ते हाई कोर्ट में छुट्टी है। पुलिस के बॉन्ड को चुनौती देने के लिए वे सोमवार को अदालत पहुंचीं।

दीपके को महाराष्ट्र में राजनीति करनी है

दिल्ली में सीजेपी के लोगों के साथ साथ कांग्रेस, लेफ्ट और दूसरी पार्टियों के लोग भी यह सवाल पूछ रहे हैं कि जब राहुल गांधी के घर पर हुई चाय पार्टी में यह तय कर लिया गया कि अब त्योहारों की बीच में कोई विरोध प्रदर्शन नहीं होगा तो फिर सीजेपी ने क्यों कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च का ऐलान किया? य़ह सवाल इसलिए पूछा जा रहा है क्योंकि राजनीतिक दलों को यह फीडबैक मिली थी कि आम लोग इससे परेशान हो रहे हैं। कारोबारियों का धंधा ठप्प है। हजारों करोड़ रुपए के बिजनेस का नुकसान हो रहा है। ध्यान रहे दिल्ली में दिवाली सबसे बड़ा त्योहार है, जिसमें सबसे ज्यादा कारोबार होता है। इसी वजह से विपक्ष ने दिवाली के बाद ही प्रदर्शन आगे बढ़ाने का फैसला किया।

ऐसा लग रहा है कि अभिजीत दीपके को इसकी परवाह नहीं है। कांग्रेस के एक नेता ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि दीपके को दिल्ली या उत्तर भारत में कहीं राजनीति नहीं करनी है। इसलिए उनको इस बात की कोई चिंता नहीं है कि दिल्ली के कारोबारी क्या सोचते हैं और प्रदर्शन को लेकर नोएडा और दिल्ली में क्या सोचा जा रहा है। उन्होंने दिल्ली को लॉन्च पैड बनाया है महाराष्ट्र में और वहां भी संभाजीनगर में राजनीति करने के लिए। इसका किसी को अंदाजा नहीं है कि वे कब पार्टी बनाएंगे। लेकिन राजनीति संभाजीनगर में करेंगे। वहां उनको लोकसभा का चुनाव लड़ना है। उनके करीबी जानकारों का कहना है कि वे चाहते हैं कि कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां उनके लिए यह सीट छोड़ दें। इस सीट पर 2019 में ओवैसी की पार्टी के इम्तियाज जलील जीते थे। विपक्ष इसको अपने लिए बहुत मुफीद नहीं मानता है। इसलिए उनके लिए सीट छोड़ी जा सकती है। लेकिन अगर वे विपक्ष के साथ जाने की बजाय अपनी पार्टी भी बनाते हैं तब भी उनको और अजिंक्य शिंदे को महाराष्ट्र में ही राजनीति करनी है।

बेल बॉन्ड भर कर छूटे दीपके

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को शनिवार को जमानत मिल गई। उनको शुक्रवार की शाम को राजधानी दिल्ली के कनॉट प्लेस में बिना अनुमति तिरंगा मार्च निकालने के प्रयास में हिरासत में लिया गया था। शनिवार को उनको सब डिवीजनल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। मजिस्ट्रेट ने उनको जमानत दे दी। जमानत की शर्तों के मुताबिक उनको 50 हजार रुपए का बेल बॉन्ड भी भरना पड़ा। उसके बाद वे रिहा हुए।

पिछले आठ दिन में दीपके के खिलाफ यह दूसरी बार कार्रवाई है। इससे पहले 10 अक्टूबर को उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान से हिरासत में लिया गया था। अगले दिन वे बॉन्ड भर कर रिहा हो गए थे। उस समय उनके साथ हिरासत में लिए गए पार्टी के दो अन्य नेता आशुतोष रांका और सौरव दास को भी छोड़ दिया गया था। लेकिन 13 अक्टूबर को दोनों को फिर गिरफ्तार किया गया और उसके बाद से वे तिहाड़ जेल में बंद हैं। उनके ऊपर बेल बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन का आरोप है।

बहरहाल, शनिवार को अभिजीत दीपके को लेकर सुबह में कई घंटे तक ड्रामा चलता रहा। सीजेपी की कानूनी टीम की प्रमुख रत्ना सिंह ने दावा किया कि पुलिस दीपके की लोकेशन नहीं बता रही है। हालांकि बाद में वे दीपके के वकील पुष्प शर्मा के साथ मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचीं। वहां एसईएम कोर्ट में दीपके को पेश किया गया। इससे पहले शुक्रवार को दीपके के साथ ही हिरासत में ली गईं छात्र नेता नेहा बोरा को पुलिस ने देर रात रिहा कर दिया था। बहरहाल, शनिवार को किसी भी संगठन की ओर से दिल्ली में प्रदर्शन का आयोजन नहीं किया गया था। फिर भी कई हिस्से में छोटी छोटी रैलियां हुईं और सेंट्रल दिल्ली में कई जगह पहले से की गई बैरिकेडिंग लगी रही।

CJP नेता अभिजीत दिपके को सशर्त जमानत, बॉन्ड की शर्त के बाद अब आंदोलन का क्या होगा?

CJP नेता अभिजीत दिपके को सशर्त जमानत, बॉन्ड की शर्त के बाद अब आंदोलन का क्या होगा?

Abhijit Dipke Cockroach Janata Party

Abhijeet Dipke Conditional Bail: कनॉट प्लेस में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SME) कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। दिल्ली पुलिस द्वारा शांति भंग करने के आरोप में की गई कार्रवाई के बाद कोर्ट ने उन्हें शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरने की शर्त पर जमानत दे दी। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दिपके द्वारा बॉन्ड भरने के बाद सीजेपी का आंदोलन ठंडा पड़ जाएगा। 

 

शर्त के मुताबिक, दिपके को एक बॉन्ड भरना होगा जिसमें उल्लेख है कि वे ऐसी कोई गतिविधि नहीं करेंगे जिससे शांति भंग होने की आशंका हो। दिपके को 50 हजार रुपए का मुचलका भी भरना होगा। जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें रिहा कर दिया जाएगा। इससे पहले सीजेपी ने दिपके की गिरफ्तारी पर भी सवाल उठाए थे। दिपके की हिरासत से पहले सीजेपी के दो सह-संयोजकों सौरव दास और आशुतोष रांका को भी गिरफ्तार किया गया था।  ALSO READ: Abhijeet Dipke : दिल्ली में तिरंगा यात्रा पर अड़े CJP प्रमुख अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया

कानूनी प्रक्रिया और गिरफ्तारी का आधार

दिल्ली पुलिस के अनुसार, दिपके को पहले कनॉट प्लेस में मार्च से पूर्व एहतियातन हिरासत में लिया गया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत प्राथमिक औपचारिकताएं पूरी की गईं। तत्पश्चात, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 170 के तहत शांति भंग करने का नया मामला दर्ज कर उन्हें आधिकारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। शनिवार को एसईएम कोर्ट में पेशी के बाद अदालत ने उन्हें सशर्त जमानत पर रिहा करने का फैसला सुनाया। ALSO READ: CJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हंगामा, अभिजीत दीपके बोले- 50-100 रुपए देकर बाहर कीजिए, लहरा दो तिरंगा को लेकर बताया प्लान

पहले भी लिया गया था हिरासत में

उल्लेखनीय है कि 10 अक्टूबर को भी दिल्ली एयरपोर्ट पर दिपके को हिरासत में लिया गया था और शांति भंग करने का मामला दर्ज किया गया था। उस दौरान उनसे एक साल की अवधि तक शांति बनाए रखने के मुचलके (Bond) पर हस्ताक्षर कराए गए थे। शुक्रवार को पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अभिजीत दीपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा समेत करीब 150 प्रदर्शनकारियों को एहतियातन हिरासत में लिया था। दीपके को जाफरपुर कलां थाने ले जाया गया था।

कनॉट प्लेस और मंडी हाउस में भारी विरोध-प्रदर्शन

पुलिस की कार्रवाई के बावजूद कनॉट प्लेस के इनर सर्कल और मंडी हाउस में छात्रों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं का भारी जमावड़ा देखा गया। प्रदर्शनकारियों ने कनॉट प्लेस में मार्च निकाला, बीच-बीच में ‘जय हिंद’ के नारे लगाए और राष्ट्रगान गाया। आइसा (AISA) और एसएफआई (SFI) के सदस्यों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने तथा निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित नए अधिनियम को वापस लेने की मांग की।

सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके को मिली जमानत

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) संस्थापक अभिजीत दिपके को शनिवार शाम विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने कुछ शर्तों पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

उन्हें यहां कनॉट प्लेस में आयोजित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च के आह्वान के दौरान शुक्रवार को निवारक धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया था। इस मार्च से पहले हिरासत में लिए गए श्री दीपके के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126/170 के तहत कार्रवाई शुरू की गई थी। श्री दिपके के अलावा ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा को भी शनिवार तड़के रिहा कर दिया गया।

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पुलिस के अनुसार सुश्री बोरा को दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत औपचारिक प्रक्रियाओं के बाद रिहा किया गया। इससे पहले शुक्रवार को सीजेपी ने दावा किया था कि श्री दीपके को किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया था। संगठन के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे ने शुक्रवार देर रात कहा था कि उन्हें हिरासत में लिए जाने के आठ घंटे से अधिक समय बाद भी उनके ठिकाने की जानकारी नहीं दी गई और उन्हें वकील या पार्टी टीम से बात करने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। पुलिस ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और यातायात का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए शुक्रवार को लगभग 150 लोगों को हिरासत में लिया गया था।

सीजेपी के सह-संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका पहले से पांच दिन की न्यायिक हिरासत में हैं। सर्वश्री दास, रांका और 12 अन्य लोगों को मंगलवार (13 अक्टूबर) की सुबह जंतर-मंतर के बंद द्वार पर चढ़कर परिसर में प्रवेश करने के बाद हिरासत में लिया गया था। जंतर मंतर को हाल ही में विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित स्थल सूची से बाहर कर दिया गया था। बाद में सीजेपी के अजिंक्य शिंदे और 11 अन्य लोगों को रिहा कर दिया गया था।

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दिल्ली में तिरंगा मार्च से पहले CJP संस्थापक अभिजीत दिपके हिरासत में, नेहा बोरा ने सरकार पर उठाए सवाल

Abhijeet Dipke: दिल्ली में तिरंगा फहराने को लेकर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को हिरासत में लिया गया था। अब उन्हें एहतियातन हिरासत में रखा गया है। पार्टी ने कनॉट प्लेस में ‘लहरा दो तिरंगा’ नाम से प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी।

वहीं, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की प्रमुख नेहा बोरा को रविवार को रिहा कर दिया गया। दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 65 के तहत जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें छोड़ा गया।

पुलिस के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत दिपके के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। उन्हें आज, 17 अक्टूबर को एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया जाएगा।

पुलिस ने बताया कि CJP के संस्थापक को दो नोटिस भेजे गए थे, जिनमें उन्हें प्रस्तावित आंदोलन के लिए कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में न जाने का निर्देश दिया गया था, लेकिन कथित तौर पर उन्होंने इन निर्देशों का पालन नहीं किया।

पुलिस के मुताबिक, उन्होंने 50,000 रुपये का एक बॉन्ड भी भरा था और उन्हें एक साल तक सार्वजनिक शांति भंग न करने का निर्देश दिया गया था।

‘कानून-व्यवस्था की हर तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं’

अपनी रिहाई के बाद ANI से बात करते हुए, AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

बोरा ने सवाल किया, “कानून-व्यवस्था की हर तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आम नागरिकों के साथ ऐसा बर्ताव किया जाता है जैसे वे कोई खूंखार अपराधी हों; हमारे देश में लंबे समय से यही चलन चला आ रहा है। मौजूदा आंदोलन ने साफ कर दिया है कि लोगों को किस तरह हिरासत में लिया जा रहा है—चाहे दिन हो या शाम, उन्हें पूरी रात हिरासत में रखा जाता है और अगले दिन सुबह या शाम को ही छोड़ा जाता है। आखिर किस अधिकार के तहत इसे सही ठहराया जा सकता है? किस कानून या आदेश के तहत हिरासत में लिए गए लोगों को पूरी रात कैद में रखना जायज है?”

उन्होंने विवादित ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया को लेकर, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाने की CJP की मांग को फिर से दोहराया।

बोरा ने कहा, “कानूनी तौर पर, लोगों को-खासकर महिलाओं को सूर्यास्त के बाद रिहा कर दिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। इसके अलावा, एक नया नैरेटिव (विमर्श) फैलाया जा रहा है-अराजकता और अव्यवस्था का। कैसी अराजकता और अव्यवस्था? वैसी ही, जैसी आपने सेंट्रल दिल्ली में फैलाई थी? दिल्ली के लोग चैन की सांस भी नहीं ले पा रहे हैं; वे काम पर जाने के लिए जो भी रास्ता चुनते हैं, वह बंद मिलता है। आप पूरे देश में अराजकता और अव्यवस्था फैला रहे हैं। कृपया, भारत के लोगों को बख्श दें। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग (impeachment) चलाएं और SIR को रोकें, ताकि इस देश के आम नागरिक चैन की सांस ले सकें, सुकून महसूस कर सकें और उनके मतदान के अधिकार सुरक्षित रह सकें।”

बोरा ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस उन्हें अपने वकीलों से बात नहीं करने दे रही थी।

उन्होंने कहा, “उन्होंने (पुलिस ने) मेरा नाम, पता और अन्य विवरण मांगे। काफी देर तक, उन्होंने मुझे किसी कानूनी सलाहकार (वकील) से बात करने या सलाह लेने भी नहीं दिया। हमारे वकील 5-6 घंटे तक मुझसे संपर्क करने की कोशिश करते रहे; जब हमने किसी तरह उन्हें फोन किया, तब जाकर उन्हें मुझसे मिलने की अनुमति मिली। ये लोग लंबे समय से इसी तरह की हरकतें करते आ रहे हैं।”

CJP ने दिपके के ठिकाने के बारे में जानकारी मांगी

CJP ने आरोप लगाया है कि दिपके को किसी अज्ञात जगह पर ले जाया गया है और उनके वकीलों को उनसे बात नहीं करने दी जा रही है।

X पर एक पोस्ट में, CJP ने लिखा, “अभिजीत दिपके को दिल्ली पुलिस ने अगवा कर लिया है। उन्हें उठाए हुए 10 घंटे से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन अभी तक उनके माता-पिता, वकीलों या CJP की टीम को उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।”

यह घटनाक्रम CJP के अन्य सदस्यों, जिनमें सौरव दास और आशुतोष रांका शामिल हैं, को हिरासत में लिए जाने के बाद हुआ है। इन दोनों नेताओं को जंतर-मंतर में घुसने के आरोप में हिरासत में लिया गया था, जिसे अब विरोध-प्रदर्शन की जगह के रूप में मान्यता नहीं दी गई है।

बता दें कि CJP, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को वापस लेने और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रही है।

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सुप्रीम कोर्ट का मार्च रोकने से इनकार

नई दिल्ली। शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के तिरंगा मार्च को रोकने से इनकार किया। कनॉट प्लेस के व्यापारियों के कई समूहों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी और शुक्रवार की शाम को पांच बजे के तिरंगा मार्च को रोकने का आदेश देने की मांग की थी। लेकिन सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली के व्यापारियों की याचिका पर तत्काल आदेश देने से इनकार कर दिया। एक दिन पहले गुरुवार को भी सुप्रीम कोर्ट ने मार्च रोकने का आदेश नहीं दिया था। लेकिन पुलिस को सुरक्षा के पर्याप्त बंदोबस्त करने का निर्देश दिया था।

दिल्ली के व्यापारियों की इस याचिका में कॉकरोच जनता पार्टी के सेंट्रल पार्क में प्रदर्शन से कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने प्रदर्शन से जुड़ी अन्य याचिकाओं का जिक्र करते हुए कहा, ‘कोई प्रदर्शन करना चाहता है, कोई मूंगफली बेचना चाहता है, कोई कानून व्यवस्था चाहता है, ये सभी बातें आपस में जुड़ी हैं’। गौरतलब है कि प्रदर्शन के कारण एनडीएमसी ने पहले ही सेंट्रल पार्क को दिन तक बंद करने का आदेश दे दिया था।

बहरहाल, कनॉट प्लेस के व्यापारियों का दावा है प्रदर्शन और उसे रोकने के बंदोबस्तों से कनॉट प्लेस में हर दिन दो सौ करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित हो सकता है। व्यापारियों ने यह भी कहा है कि 10 अक्टूबर को प्रदर्शन शुरू होने के बाद से दो हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है।शुक्रवार को जो याचिका सुप्रीम कोर्ट के सामने लाई थी वह दिल्ली किराना कमेटी और दिल्ली आयरन एंड हार्डवेयर मर्चेंट एसोसिएशन ने दायर की थी। शुक्रवार सुबह चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस पर सुनवाई की।

अदालत ने कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि सभी लोग बेहतर समझदारी दिखाएंगे। हम जानते हैं कि सभी छोटे दुकानदार इन दिनों अपनी रोजी रोटी कमाते हैं। हम जानते हैं कि पूरे परिवारों को किन मुश्किलों और परेशानियों का सामना करना पड़ेगा’। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि सेंट्रल पार्क बंद होने से ठेले वालों और छोटे व्यापारियों का कारोबार भी प्रभावित हो सकता है। प्रदर्शन के कारण उन्हें नुकसान होने का खतरा है। व्यापारी संगठनों ने त्योहार और शादी के सीजन में मध्य दिल्ली में प्रदर्शन के कारण संभावित कारोबार नुकसान का मुद्दा उठाया है।