ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी के शेयरों में सोमवार, 6 सितंबर को बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसकी वजह है बड़ी संख्या में हुई शेयरों की खरीद-फरोख्त। शुक्रवार, 4 सितंबर को BNP पारिबा और गोल्डमैन सैक्स ने स्विगी में 1,041 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर खरीदे। ट्रांजेक्शन ओपन मार्केट के जरिए हुए। शेयरों को 276.10 रुपये प्रति शेयर के भाव पर खरीदा गया।
BNP पारिबा फाइनेंशियल मार्केट्स ने 491.99 करोड़ रुपये में 1.78 करोड़ शेयर खरीदे, जबकि गोल्डमैन सैक्स इनवेस्टमेंट्स मॉरीशस I ने 549.01 करोड़ रुपये में 1.98 करोड़ शेयर खरीदे। दोनों की ओर से स्विगी में कुल मिलाकर 1.36 प्रतिशत हिस्सेदारी की खरीद की गई। स्विगी के शेयर की कीमत शुक्रवार को BSE पर 276.20 रुपये पर बंद हुई।
कंपनी का मार्केट कैप 76200 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपये है। यह BSE 200 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर साल 2026 में अब तक 29 प्रतिशत नीचे आया है। एक साल में कीमत लगभग 35 प्रतिशत गिरी है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास 94.92 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।
Swiggy पर ब्रोकरेज की राय
ब्रोकरेज CLSA ने स्विगी के स्टॉक के लिए रेटिंग को “एक्युमुलेट” से घटाकर “होल्ड” कर दिया है। टारगेट प्राइस 357 रुपये से घटाकर 318 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। JM फाइनेंशियल ने भी रेटिंग को “रिड्यूस” से घटाकर “सेल” कर दिया है। प्राइस टारगेट 250 रुपये रखा है। मैक्वेरी ने शेयर के लिए 230 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ “अंडरपरफॉर्म” रेटिंग बरकरार रखी है। मोतीलाल ओसवाल ने ‘बाय’ रेटिंग के साथ 350 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है।
HSBC ने स्विगी के शेयर के लिए “होल्ड” रेटिंग और 300 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मॉर्गन स्टेनली ने “इक्वलवेट” रेटिंग दी है। टारगेट 322 रुपये सेट किया है। नोमुरा ने स्विगी के लिए “बाय” रेटिंग दी है और प्राइस टारगेट 435 रुपये प्रति शेयर है।
जून तिमाही में घाटे में 34 प्रतिशत की कमी
स्विगी का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंसोलिडेटेड बेसिस पर शुद्ध घाटा सालाना आधार पर 34 प्रतिशत घटकर 791 करोड़ रुपये रहा। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 37 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 6,812 करोड़ रुपये हो गया। खर्च बढ़कर 7,813 करोड़ रुपये के हो गए। फूड डिलीवरी बिजनेस की ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू पिछले साल के मुकाबले 17.4 प्रतिशत बढ़ी। इंस्टामार्ट की नेट ऑर्डर वैल्यू साल-दर-साल 38.9 प्रतिशत बढ़ी।
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