Sonali Kulkarni: ‘लड़किया आज भी मर रही हैं शादी करने के लिए’, आमिर खान पर दिया सोनाली कुलकर्णी का बयान वायरल

Sonali Kulkarni: सोनाली कुलकर्णी ने ‘भारत’ फिल्म में सलमान खान की मां का रोल निभाया था, जबकि असल जिंदगी में वह बॉलीवुड के ‘भाईजान’ से उम्र में छोटी हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि महिलाओं को जल्दी ही उम्रदराज रोल मिलने लगते हैं, जबकि पुरुष लंबे समय तक युवा हीरो का रोल करते रहते हैं तो उन्होंने News18 Showsha को बताया कि अब समय बदल गया है और कई पुरुष एक्टर अपनी ‘बड़े-से-बड़े हीरो’ वाली इमेज से बाहर निकल रहे हैं। उन्होंने आमिर खान और सैफ अली खान का उदाहरण दिया।

उस दौर को याद करते हुए जब शादी के बाद महिलाओं को हीरोइन के रोल मिलना बंद हो जाते थे, कुलकर्णी ने कहा, “एक समय था जब हम इस बात पर चर्चा करते थे कि शादी के बाद महिलाओं को हीरोइन के रोल नहीं मिलते। क्या आजकल आप ऐसा सुनते हैं? नहीं। क्योंकि मुझे लगता है कि दर्शकों ने यह साबित कर दिया है कि जैसे हीरो शादी कर सकते हैं, वैसे ही हीरोइनें भी शादी कर सकती हैं। उनके भी बच्चे हो सकते हैं। उनकी भी अपनी फैमिली हो सकती है।”

उन्होंने आगे कहा कि जिस तरह से दुनिया भर का कंटेंट देश में देखा जा रहा है और टैलेंट दिखाने के लिए अलग-अलग माध्यम मौजूद हैं उसे देखते हुए, “मुझे नहीं लगता कि हमारे पास यह शिकायत करने की कोई वजह है कि लड़कियों को अलग तरह के रोल मिल रहे हैं। मुझे उन लोगों पर तरस आता है जो कहते हैं कि वे सिर्फ हीरो बनना चाहते हैं। मुझे नहीं लगता कि आज कोई भी एक्टर इतनी छोटी सोच रखता है। चाहे मेल एक्टर हो या फीमेल एक्टर वे अपने टैलेंट को आजमाना चाहते हैं।”

इसके बाद उन्होंने ‘दिल चाहता है’ के अपने को-स्टार्स, सैफ अली खान और आमिर खान का जिक्र किया और बताया कि कैसे वे चैलेंजिंग रोल कर रहे हैं। सोनाली ने कहा, “हमारे पास ऐसे वर्सेटाइल एक्टर्स हैं। मुझे नहीं लगता कि कोई भी एक्टर यह कहेगा कि वह जवान दिखना चाहता है। अगर हम सैफ अली खान की बात करें तो वे उम्र के साथ और बेहतर होते जा रहे हैं। उन्हें एक ऐसे जवान पिता का रोल करने में कोई डर नहीं लगता जो प्यार में है।”

एक्ट्रेस ने आगे कहा, “आमिर खान एक्सपेरिमेंट करने की मिसाल हैं। मुझे नहीं लगता कि किसी में भी वह करने की हिम्मत है जो उन्होंने ‘दंगल’ में किया है। आमिर खान, जिनके पोस्टर हर जगह लगते हैं, लड़कियां उनके लिए दीवानी हैं, उनसे शादी करने के लिए बेताब हैं। वे बिना किसी प्रोस्थेटिक के खुद को 3-4 बेटियों के पिता के तौर पर पेश कर रहे हैं तो वे मेरे हीरो हैं। वे निडर होकर खुद को तराश रहे हैं।”

सोनाली ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, “मुझे नहीं लगता कि कोई भी अच्छा एक्टर इस होड़ में फंसा है कि उसे जवान दिखना है। वे अपने टैलेंट का प्रदर्शन कर रहे हैं। वे एक्टिंग पर अपनी पकड़ दिखा रहे हैं। जाहिर है उन्हें अपनी उम्र से कोई डर नहीं है।”

Hormuz Strait में अमेरिकी पनडुब्बी पकड़ने का ईरान का दावा, ट्रंप के सामने बढ़ी चुनौती

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donald trump

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट से बड़ी खबर सामने आई है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के प्रवेश द्वार के पास एक अमेरिकी बिना क्रू वाले अंडरवाटर व्हीकल को पकड़ लिया है। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, यह डिवाइस कैलिफोर्निया की डिफेंस कंपनी एंडुरिल का बनाया हुआ DIVE-LD ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (AUV) है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि होर्मुज स्ट्रेट में हुए इस घटनाक्रम के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव किस दिशा में जाता है।

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हालांकि, अमेरिका ने इस घटना को अलग तरीके से पेश किया है। पेंटागन के एक प्रवक्ता के मुताबिक, एक अंडरवाटर ड्रोन एक दिन से ज्यादा पहले खराब हो गया था। अमेरिकी पक्ष ने कहा कि यह ड्रोन चल रहे ऑपरेशन के समर्थन में इलाके के पानी का सर्वे कर रहा था।

ईरान ने क्या दावा किया?

 

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की नेवी ने दावा किया कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के एंट्री पॉइंट पर अमेरिकी सेना के एक आधुनिक मानवरहित सबमर्सिबल को अपने कब्जे में ले लिया। ईरानी सरकारी मीडिया ने इसे DIVE-LD बताया है। यह एक बड़े आकार का ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल है, जिसे समुद्र के भीतर बिना चालक के अलग-अलग मिशन को अंजाम देने के लिए डिजाइन किया गया है। ईरानी पक्ष ने दावा किया कि यह सिस्टम अत्याधुनिक तकनीक से लैस था।

क्या है DIVE-LD और इसका इस्तेमाल किस काम में होता है?

DIVE-LD एक ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल है। कंपनी के मुताबिक करीब 19 फीट यानी 5.8 मीटर लंबा यह सबमर्सिबल कई तरह के समुद्री मिशन में इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

इसके संभावित मिशनों में—

 

समुद्र के भीतर माइंस की पहचान और उनसे निपटने से जुड़े ऑपरेशन

सीबेड मैपिंग

समुद्र के भीतर जानकारी जुटाना

केबल और पाइपलाइन जैसे अंडरवाटर इंफ्रास्ट्रक्चर का निरीक्षण शामिल हैं।

 

अमेरिका ने क्या कहा?

 

ईरान के दावे के बाद अमेरिकी रक्षा विभाग ने घटना को लेकर अलग बयान दिया। पेंटागन के प्रवक्ता ने कहा कि एक अंडरवाटर ड्रोन एक दिन से अधिक समय पहले खराब हो गया था। उनके मुताबिक यह ड्रोन चल रहे ऑपरेशन के समर्थन में इलाके के पानी का सर्वे कर रहा था। अमेरिकी पक्ष ने यह भी कहा कि खराब हुआ ड्रोन पुराना मॉडल था और उसमें संवेदनशील डेटा इकट्ठा करने की क्षमता या क्लासिफाइड सोनार अथवा रडार उपकरण नहीं था। इस तरह ईरान और अमेरिका के बयानों में घटना की अहमियत को लेकर स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है।

 

एंडुरिल ने भी की अपने सिस्टम के नुकसान की पुष्टि

 

DIVE-LD बनाने वाली अमेरिकी कंपनी एंडुरिल ने अपने एक सिस्टम के नुकसान की पुष्टि की है, लेकिन कंपनी ने घटना को लेकर इसकी अहमियत कम करके बताई। कंपनी के अनुसार DIVE-LD एक ऐसा ऑटोनॉमस सिस्टम है जिसे खतरनाक वातावरण में काम करने के लिए तैयार किया गया है और ऐसे मिशनों में वाहन के नुकसान की संभावना को डिजाइन का हिस्सा माना जाता है।

 

समुद्र में मानवरहित सिस्टम पर अमेरिका का बढ़ता जोर

 

अमेरिकी सेना पिछले कुछ समय से मानवरहित नेवल सिस्टम में निवेश बढ़ा रही है। इनमें समुद्र की सतह पर और पानी के भीतर काम करने वाले ऑटोनॉमस सिस्टम शामिल हैं। इन तकनीकों का इस्तेमाल बड़े समुद्री इलाकों की निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और दुश्मन के जहाजों या पनडुब्बियों पर नजर रखने जैसे अभियानों में किया जा सकता है। इसका एक बड़ा फायदा यह है कि ऐसे मिशनों में मानव सैनिकों को सीधे खतरे में डालने की जरूरत कम हो सकती है।

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ईरान पर अमेरिका ने लगाए नए प्रतिबंध

 

होर्मुज स्ट्रेट की घटना के बीच अमेरिका ने ईरान के विमानन क्षेत्र पर भी नए प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी परिसंपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के विमानन नेटवर्क, हथियारों के हस्तांतरण और कथित अवैध खरीद योजनाओं से जुड़े 36 संस्थाओं और व्यक्तियों को प्रतिबंधों के दायरे में रखा है।

 

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक इन प्रतिबंधों का निशाना ईरान की सक्रिय एयरलाइंस के साथ-साथ वे विदेशी बिचौलिए, मुखौटा कंपनियां और अन्य संस्थाएं हैं, जिन पर ईरान को विमान, विमान के कलपुर्जे और विमानन तकनीक हासिल करने में मदद करने का आरोप है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान के विमानन क्षेत्र का इस्तेमाल उसके शासन की गतिविधियों और कथित आतंकवादी नेटवर्क को समर्थन देने के लिए किया जाता रहा है।

 

होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

 

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। यही वजह है कि यहां किसी अमेरिकी सैन्य सिस्टम के पकड़े जाने या क्षतिग्रस्त होने की घटना को लेकर तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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ईरान और अमेरिका के बीच पहले से जारी तनाव के बीच यह घटनाक्रम ट्रंप प्रशासन के लिए नई चुनौती पैदा कर सकता है। हालांकि, अमेरिका की ओर से ड्रोन को लेकर दिया गया बयान यह संकेत देता है कि वॉशिंगटन इस घटना को ईरानी दावे के मुताबिक बड़ा सैन्य झटका नहीं मान रहा है।

Gold Investment: आज सोने में लगाए ₹50,000 तो 2036 में कितने हो जाएंगे? समझिए 10 साल के रिटर्न का पूरा गणित

Gold Price Return Projection 2026 to 2036: भारतीय परिवारों में सोना हमेशा से सिर्फ गहने के तौर पर ही नहीं, बल्कि सबसे भरोसेमंद वेल्थ के रूप में पसंद किया जाता रहा है। रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छूने के बाद आज हर निवेशक के मन में एक ही सवाल है अगर आज सोने में ₹50,000 लगाए जाएं, तो अगले 10 साल में यानी 2036 तक इसकी वैल्यू कितनी हो सकती है?

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों और ऐतिहासिक रिटर्न को आधार बनाकर आइए आसान भाषा में समझते हैं कि अलग-अलग सालाना रिटर्न (CAGR) के हिसाब से आपका ₹50,000 का निवेश 2036 तक कितना बन सकता है।

पिछले 10 सालों में सोने ने दिया बंपर रिटर्न

भविष्य के अनुमान से पहले यह देखना जरूरी है कि पिछले एक दशक में सोने की कीमतें कितनी तेजी से बढ़ी हैं। साल 2016 में कीमत 10 ग्राम (24 कैरेट) सोने का औसत भाव करीब ₹28,623 था। 2026 में यह बढ़कर लगभग ₹1,53,250 प्रति 10 ग्राम हो चुका है।

पिछले 10 सालों में सोने की कीमतें करीब 5.35 गुना बढ़ी हैं, यानी लगभग 18.6% का सालाना रिटर्न दर्ज किया गया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक अकेले 2025 में ही सोने ने 60% से ज्यादा का रिटर्न दिया था। आपको बता दें कि मौजूदा दरों पर ₹50,000 में करीब 3.26 ग्राम सोना मिलेगा।

आज सोने में लगाया गया ₹50,000 साल 2036 में कितने का होगा?

वैसे इतिहास का 18.6% वाला रिटर्न हर साल मिले, यह जरूरी नहीं है। इसलिए अलग-अलग सालाना रिटर्न के हिसाब से 2036 की संभावित वैल्यू नीचे दी गई है:

2036 में कितना होगा ₹50,000? अलग-अलग सिनेरियो का गणित

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के GLTER मॉडल के मुताबिक 2025 से 2040 के बीच सोने का औसत अनुमानित रिटर्न 5.2% प्रति वर्ष रहने का अनुमान है।

किन वजहों से घटती-बढ़ती हैं सोने की कीमतें?

सोने के दाम कभी भी एक सीधी रेखा में नहीं बढ़ते। इसमें उतार-चढ़ाव बना रहता है। सोने की चाल को मुख्य रूप से ये कारक तय करते हैं:

  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) के ब्याज दर संबंधी फैसले।
  • अमेरिकी डॉलर (USD) की मजबूती या कमजोरी।
  • वैश्विक स्तर पर महंगाई और जियोपॉलिटिकल तनाव (युद्ध/विवाद)।
  • दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीदारी।

फिजिकल गोल्ड खरीदने से पहले रखें इन खर्चों का ध्यान

अगर आप केवल निवेश के मकसद से फिजिकल सोना (गहने या सिक्के) खरीद रहे हैं, तो वास्तविक रिटर्न कम हो सकता है। क्योंकि इसमें:

  • 3% GST लागू होता है।
  • मेकिंग चार्ज और वेस्टेज का खर्च जुड़ता है।
  • बाय-सेल स्प्रेड यानी खरीदते और बेचते वक्त की कीमतों में अंतर होता है।

स्मार्ट इनवेस्टमेंट टिप: अगर आपका उद्देश्य केवल निवेश से रिटर्न कमाना है, तो फिजिकल गोल्ड के बजाय Gold ETF, डिजिटल गोल्ड या गोल्ड म्युचुअल फंड्स जैसे पेपर/डिजिटल विकल्पों पर विचार करना अधिक फायदेमंद हो सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

ब्रांडेड गोल्ड ज्वेलरी खरीदना हुआ आसान, यहां जानिए थोड़ी-थोड़ी सेविंग्स से कैसे कर सकते हैं सोने में बड़ा निवेश

ब्रांडेड गोल्ड ज्वेलरी खरीदना पहले कभी इतना आसान नहीं था। आप थोड़ी-थोड़ी बचत से भी गोल्ड में अब बड़ा निवेश कर सकते हैं। कई बड़ी गोल्ड ज्वेलरी कंपनियों ने फिनटेक से समझौते किए हैं। इससे कम इनकम वाले परिवारों के लिए भी ब्रांडेड गोल्ड ज्वेलरी खरीदना आसान हो गया है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

पेटीएम ने कैरेटलेन से मिलाया है हाथ

कैरेटलेन ने Paytm से हाथ मिलाया है। इससे पेटीएम के यूजर्स डिजिटल गोल्ड में अपने छोटे-छोटे निवेश का इस्तेमाल कैरेटलेन से ज्वेलरी खरीदने के लिए कर सकते हैं। इसे एक उदाहरण की मदद से आसानी से समझा जा सकता है। मान लीजिए आपने पेटीएम के जरिए डिजिटल गोल्ड में धीरे-धीरे करके कुल 6,000 रुपये का निवेश किया है। आपको कैरेटलेन की कोई 8,000 रुपये की ज्वेलरी पसंद है तो 6,000 रुपये का पेमेंट आपके डिजिटल गोल्ड में निवेश से हो जाएगा। बाकी 2,000 रुपये का पेमेंट आप यूपीआई, क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिए कर सकते हैं।

कैरेटलोन गोल्ड ज्वेलरी की होम डिलीवरी भी करेगी

अगर आप कैरेटलेन से गोल्ड ज्वेलरी की होम डिलीवरी चाहते हैं तो यह सुविधा भी उपलब्ध है। कई शहरों में कैरेटलेन की यह सुविधा उपलब्ध है। कंपनी आपकी गोल्ड ज्वेलरी की पैकिंग और शिपमेंट करेगी। आप पेटीएम ऐप पर ऑर्डर कनफर्मेशन, ट्रैकिंग और पर्चेज डिटेल्स देख सकते हैं। इसका मतलब है कि यह पूरा प्रोसेस ट्रांसपेरेंट है। पेटीएम के यूजर्स इस तरह अपनी छोटी-छोटी सेविंग्स का इस्तेमाल अपनी पसंद की ब्रांडेड ज्वेलरी खरीदने के लिए कर सकते हैं।

जेन डायमंड की यह स्कीम सोने में निवेश को आसान बनाती है

Zen Diamond India ने My Gold Multiplier Plan शुरू किया है। इसके जरिए ग्राहक हर महीने के कंट्रिब्यूशन से 999 फाइन हॉलमार्किंग गोल्ड ज्वेलरी खरीद सकते हैं। कंपनी के एमडी नील सोनावाला ने बताया कि इस स्कीम की मैच्योरिटी पर ग्राहक अपने निवेश का इस्तेमाल गोल्ड ज्वेलरी खरीदने के लिए कर सकते हैं। कंपनी की तरफ से उन्हें सोने का 30 फीसदी रिवॉर्ड के रूप में भी मिलेगा। इतना ही नहीं ग्राहक अपने खुद के 24-कैरेट गोल्ड का इस्तेमाल भी रिडेम्प्शन के समय कर सकते हैं।

इंस्टाओन ईएमआई प्रोग्राम का भी उठा सकते हैं फायदा

जेन डायमंड ने इंस्टाओन ईएमआई प्रोग्राम भी शुरू किया है। कंपनी का कहना है कि यह जीरो-कॉस्ट, जीरो-डाउनपेमेंट और जीरो इंटरेस्ट ईएमआई ऑप्शन है। ग्राहक को कंपनी के स्टोर पर हर 90,000 के खर् पर 1 ग्राम गोल्ड कॉइन भी मिलता है। कैरेटलेन और जेन डायमंड की ईजी गोल्ड ज्वेलरी पर्चेज स्कीम ग्राहक को छोटी सेविंग्स से ब्रांडेड गोल्ड ज्वेलरी में निवेश का मौका देती हैं।

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स्कीम का फायदा उठाने से पहले ये बातें जरूर जान लें

एक बात ग्राहक को ध्यान में रखने की जरूरत है कि ऐसी स्कीमें आरबीआई के रेगुलेशन के तहत नहीं आती हैं। इसका मतलब है कि अगर कंपनी से आपका किसी तरह का विवाद होता है तो आप उसकी शिकायत आरबीआई में नहीं कर सकते। हालांकि, आम तौर पर ऐसा नहीं होता है।

Gold Jewellery Price: 18, 14 या 9 कैरेट की ज्वेलरी कितने में बनेगी? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Gold Jewellery Price: सोने का भाव लगातार ऊंचे स्तर पर बना है। ऐसे में जाहिर तौर पर नए गहने खरीदना काफी महंगा हो गया है। हालांकि, हर कैरेट के सोने की कीमत एक जैसी नहीं होती। सबसे महंगा 24 कैरेट का सोना होता है। लेकिन, इससे गहने नहीं बनते। गहने बनने की शुरुआत अधिकतम 22 कैरेट गोल्ड से होती है। महंगाई के चलते अब कम कैरेट गोल्ड की तरफ भी ग्राहकों की दिलचस्पी बढ़ रही है।

खुराना ज्वैलरी हाउस की सौम्या खुराना के मुताबिक, अब ज्वेलर्स ग्राहकों के लिए हल्के आभूषण पेश कर रहे हैं, जो सस्ते होते हैं। 18 कैरेट, 14 कैरेट और यहां तक ​​कि 9 कैरेट की ज्वेलरी भी मार्केट में आ रही हैं। इन्हें लोग खूब पसंद भी कर रहे हैं।

आइए जानते हैं कि 18, 14 और 9 कैरेट की गोल्ड ज्वेलरी बनवाने पर कितना खर्च होगा। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन यानी IBJA के मुताबिक, 3 सितंबर को 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत ₹2,549 बढ़कर ₹1.54 लाख हो गई। इसी भाव के आधार पर 18 कैरेट, 14 कैरेट और 9 कैरेट की 10 ग्राम ज्वेलरी का कैलकुलेशन किया गया है।

18K, 14K और 9K में कितना सोना

18 कैरेट की 10 ग्राम ज्वेलरी में 75% यानी 7.5 ग्राम शुद्ध सोना होता है। 14 कैरेट में यह मात्रा 58.5% यानी 5.85 ग्राम रहती है। वहीं 9 कैरेट की 10 ग्राम ज्वेलरी में 37.5% यानी 3.75 ग्राम शुद्ध सोना होता है।

बची हुई मात्रा में दूसरी धातुएं मिलाई जाती हैं। इससे ज्वेलरी मजबूत बनती है। कम कैरेट का मतलब है कि गहने में सोने की मात्रा कम है। यही वजह है कि उसकी कीमत भी कम पड़ती है।

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18 कैरेट की 10 ग्राम ज्वेलरी का खर्च

18 कैरेट की 10 ग्राम ज्वेलरी में 7.5 ग्राम शुद्ध सोना होता है। ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम के भाव पर इस सोने की कीमत ₹1,15,500 बैठती है।

बाकी 2.5 ग्राम में दूसरी धातुएं होती हैं। चांदी और तांबे की कीमत जोड़ने पर ज्वेलरी की कुल धातु लागत ₹1,18,502 हो जाती है। 10% मेकिंग चार्ज और 3% GST के बाद कुल कीमत करीब ₹1,34,262 बैठती है।

14 कैरेट की 10 ग्राम ज्वेलरी का खर्च

14 कैरेट की ज्वेलरी में सोने की मात्रा घटकर 5.85 ग्राम रह जाती है। इसकी कीमत ₹90,090 होती है। हालांकि, बचे हुए 4.15 ग्राम में चांदी और तांबा मिलाया जाता है। इनकी कीमत भी ग्राहक को चुकानी होती है।

इन धातुओं की कीमत जोड़ने पर कुल धातु लागत ₹95,073 बैठती है। मेकिंग चार्ज और GST मिलाने के बाद 10 ग्राम 14 कैरेट ज्वेलरी की कीमत करीब ₹1,07,718 हो जाती है। यानी 18 कैरेट के मुकाबले करीब ₹26,500 की बचत।

9 कैरेट की 10 ग्राम ज्वेलरी का खर्च

9 कैरेट में सिर्फ 3.75 ग्राम शुद्ध सोना होता है। मौजूदा भाव पर इस सोने की कीमत ₹57,750 बैठती है। बाकी 6.25 ग्राम में दूसरी धातुएं होती हैं। चांदी और तांबे की कीमत मिलाकर कुल धातु लागत ₹65,254 हो जाती है।

इसके बाद ₹6,525 मेकिंग चार्ज और 3% GST जुड़ता है। इस तरह 10 ग्राम 9 कैरेट ज्वेलरी करीब ₹73,933 में तैयार होती है। यानी 18 कैरेट के मुकाबले करीब ₹60,000 कम खर्च आता है।

एक नजर में 10 ग्राम ज्वेलरी का पूरा हिसाब

खर्च का हिसाब18 कैरेट14 कैरेट9 कैरेट
शुद्ध सोना7.5 ग्राम5.85 ग्राम3.75 ग्राम
सोने की कीमत₹1,15,500₹90,090₹57,750
दूसरी धातुओं की कीमत₹3,002₹4,983₹7,504
कुल धातु लागत₹1,18,502₹95,073₹65,254
मेकिंग चार्ज₹11,850₹9,507₹6,525
GST₹3,910₹3,137₹2,153
कुल कीमत₹1,34,262₹1,07,718₹73,933

9 कैरेट ज्वेलरी का बढ़ता चलन

बाजार में 9 कैरेट ज्वेलरी का चलन बढ़ रहा है। खासकर युवा ग्राहक हल्के और रोज पहनने वाले गहनों के लिए इसे देख रहे हैं। 14 कैरेट और 18 कैरेट ज्वेलरी भी हीरे और दूसरे रत्नों वाले डिजाइन में खूब इस्तेमाल होती है।

हालांकि, शादी-ब्याह के पारंपरिक गहनों के लिए भारत में 22 कैरेट गोल्ड की मांग अभी भी सबसे ज्यादा रहती है। लेकिन सोने के रिकॉर्ड भाव के बीच कम कैरेट की ज्वेलरी अब ग्राहकों के लिए सस्ता विकल्प बन रही है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Janmashtami 2026: ‘बड़ा नटखट है रे कृष्ण कन्हैया का करें यशोदा मैया…’, इन हिंदी गानों के साथ मनाए जन्माष्टमी

Janmashtami 2026: पूरे देश में जन्माष्टमी धूम धाम से मनाई जा रही है। इस खास मौके पर देशभर के मंदिरों को और घरों को झाकी के साथ सजाया जाता है। दही हांडी आयोजित होती है। इस दौरान बॉलीवुड के कई मशहूर सुनने को मिलते हैं। ऐसे में हम आपके लिए बॉलीवुड गानों की लिस्ट लाए हैं, जो भगवान कृष्ण के इस त्योहार का मजा बढ़ा देंगे।

बड़ा नटखट है रे कृष्ण कन्हैया…

फिल्म ‘अमर प्रेम’ का गाना ‘बड़ा नटखट है रे कृष्ण कन्हैया..’ दिल को छूता है। इस गाने को लता मंगेशकर ने गाया है, आनंद बक्शी से इसके बोल लिखे हैं। जबकि आर.डी. बर्मन का संगीत है। जन्माष्टमी के खास मौके पर सोशल मीडिया पर भी ये खूब ट्रेंड होता है।

गो गो गोविंदा

जबरदस्त बीट्स और जोश भरी कोरियोग्राफ़ी वाला यह सुपरहिट गाना, जिसमें प्रभु देवा और सोनाक्षी सिन्हा हैं, पारंपरिक दही-हंडी सेलिब्रेशन के कॉम्पिटिशन वाले जोश, खुशी और असली उत्साह को बखूबी दिखाता है।

राधा कैसे न जले

ए.आर. रहमान का ये गाना यह सदाबहार गाना राधा और भगवान कृष्ण के बीच की चंचल, रोमांटिक नोक-झोंक और हल्की-फुल्की जलन को बहुत खूबसूरती से दिखाता है, जो इसे किसी भी त्योहार की शाम के लिए एक ज़रूरी और शानदार गाना बनाता है।

‘वो किसना है’

बांसुरी की दिल को छू लेने वाली धुन और सुखविंदर सिंह की दमदार आवाज़ से सजी यह शानदार गाना भगवान कृष्ण के बारे में बताता है। यह आपकी प्लेलिस्ट में एक गहरा और उत्साह बढ़ाने वाला आध्यात्मिक एहसास जोड़ता है।

राधे-राधे

तेज लोक संगीत की धुनों और जोश भरे आधुनिक रिदम वाला यह एनर्जेटिक गाना मथुरा और गोकुल की जीवंत गलियों से प्रेरित है। यह गाना घर पर होने वाले जश्न में हर किसी को थिरकने पर मजबूर कर देगा।

मच गया शोर

अमिताभ बच्चन अभिनीत यह सदाबहार रेट्रो गाना, त्योहारों के दौरान होने वाले मेल-जोल, खुशी-खुशी गाए जाने वाले गीतों और सड़कों पर होने वाले उत्सव के उस जादुई माहौल को दर्शाता है, जिसने पीढ़ियों से भारतीय त्योहारों की पहचान बनाई है।

मैया यशोदा

यह प्यारा ग्रुप डांस गाना मैया यशोदा से नटखट शिकायतों के ज़रिए छोटे कान्हा की शरारतों भरी बचपन की हरकतों को खूबसूरती से दिखाता है। यह आपके त्योहार के माहौल में अपनापन, परिवार का जुड़ाव और भारतीय संस्कृति की क्लासिक खूबसूरती लाता है।

चांदी की दाल पर

90 के दशक के जोशीले डांस म्यूज़िक वाले इस मज़ेदार और चंचल गाने से प्लेलिस्ट में एक हल्की-फुल्की और शरारती रौनक आ जाती है। यह गाना कृष्ण के मशहूर शरारती अंदाज़ को बॉलीवुड के मज़ेदार और एंटरटेनिंग रूप में पेश करता है।

कान्हा सो जा ज़रा

ज़बरदस्त एनर्जी वाले डांस गानों के बीच एक सुकून देने वाला बदलाव पेश करने वाला यह शानदार और बेहतरीन ढंग से रचा गया लोरी-नुमा गीत, एक शांत और सुकून भरा माहौल बनाता है। यह देर रात मंदिर की प्रार्थनाओं और आधी रात की दिव्य आरती की रस्मों के लिए एकदम सही है।

Gold Price: 2026 के अंत तक कहां पहुंच सकता है सोना? Goldman Sachs ने $4900 का टारगेट दिया

Gold Price: सोने की कीमत में हाल के दिनों में काफी उतार-चढ़ाव आया है। इस हफ्ते की शुरुआत में गोल्ड तीन महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंच गया था। लेकिन इसके बाद तेज बिकवाली हुई। शुक्रवार को कीमत 3% से ज्यादा टूट गई।

अब सवाल है कि आगे सोना किस दिशा में जाएगा। Goldman Sachs का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोने की कीमत 4,900 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस तक पहुंच सकती है। यह मौजूदा करीब 4,550 डॉलर के स्तर से लगभग 8% ज्यादा है।

भारत में कितना महंगा हो सकता है सोना

भारत में सोने की मौजूदा कीमत ₹1.56 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास है। अंतरराष्ट्रीय कीमत में Goldman Sachs के अनुमान के मुताबिक करीब 8% बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में घरेलू कीमत भी मोटे तौर पर ₹1.69 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती है।

हालांकि, भारत में सोने की कीमत सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय नहीं होती। डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल, आयात शुल्क और टैक्स भी भाव को प्रभावित करेंगे।

केंद्रीय बैंकों की खरीद बड़ा सपोर्ट

Goldman Sachs को सोने की कीमत में आगे भी मजबूती की उम्मीद है। इसकी सबसे बड़ी वजह केंद्रीय बैंकों की खरीदारी है। कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। Goldman Sachs Research के मुताबिक, केंद्रीय बैंक इस साल हर महीने औसतन 50 टन सोना खरीद सकते हैं। 2022 से पहले यह औसत सिर्फ 17 टन प्रति माह था।

जून 2026 में खरीदारी और तेज हुई। तीन महीने के सीजनली एडजस्टेड आधार पर यह आंकड़ा 100 टन प्रति माह तक पहुंच गया। इससे पहले यह 66 टन था। जून में चीन का केंद्रीय बैंक सबसे बड़ा पहचाना जा सकने वाला खरीदार रहा।

2026 में काफी उतार-चढ़ाव आया

इस साल सोने की चाल काफी उतार-चढ़ाव वाली रही है। 29 जनवरी को गोल्ड 5,600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। जुलाई के मध्य में यह 4,000 डॉलर से नीचे फिसल गया।

हालांकि, जुलाई के निचले स्तर से सोना करीब 15% चढ़ चुका है। Goldman Sachs को बाकी बचे साल में भी तेजी की उम्मीद है।

ब्याज दरें तय करेंगी आगे की चाल

सोने की कीमत पर ब्याज दरों का बड़ा असर पड़ता है। ब्याज दरें बढ़ने की आशंका से सोने पर दबाव बनता है। यही वजह है कि अमेरिकी फेड प्रमुख केविन वॉर्श के बयान के बाद गोल्ड में तेज गिरावट आई।

Goldman Sachs का मानना है कि आगे फेड से जुड़ा दबाव कम हो सकता है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि महंगाई में नरमी आने पर फेड इस साल ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। ऐसा हुआ तो सोने को सपोर्ट मिल सकता है।

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Gold Outlook: क्या सोना और चांदी खरीदने का यह सही समय है? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

Gold Outlook: सोने की कीमत में $4,600 प्रति औंस से ऊपर की तेजी ने निवेशकों के मन में फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है। क्या हालिया गिरावट (करेक्शन) के बाद सोना और चांदी में दोबारा निवेश करने का यह सही समय है? ऐसा करने के पक्ष में राय मजबूत हो रही है। वैलम कैपिटल की अगस्त मैक्रो ग्रिड चार्टबुक के अनुसार, अगस्त में सोने से 9% रिटर्न मिला, जो व्यापक इक्विटी मार्केट के रिटर्न का लगभग 5 गुना है, जबकि गोल्ड माइनर्स (सोना निकालने वाली कंपनियों) को 21% का फ़ायदा हुआ। वैलम कैपिटल ने अपनी हालिया रिपोर्ट में निवेशकों को सोना और चांदी “फिर से खरीदने” (reload) का सुझाव दिया है। उनका तर्क है कि कीमतों में आई गिरावट से कीमती धातुओं के प्रति सकारात्मक नजरिए (थीसिस) पर कोई असर नहीं पड़ा है।

इस हालिया तेजी में US ट्रेज़री यील्ड में गिरावट और डॉलर के कमजोर होने से मदद मिली है। ऐसा तब हुआ जब US ट्रेज़री ने लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की ज़्यादा खरीद की घोषणा की। कम यील्ड से सोना रखने की ‘अपॉर्च्यूनिटी कॉस्ट’ (वैकल्पिक लागत) कम हो जाती है, जबकि राजकोषीय चिंताओं के कारण करेंसी की वैल्यू घटने (करेंसी-डिबेसमेंट) की बहस फिर से शुरू हो गई है।

वैलम कैपिटल का नजरिया सकारात्मक क्यों है?

फर्म ने अपनी हालिया रिपोर्ट में सेंट्रल बैंकों की मांग में भारी बढ़ोतरी की ओर इशारा किया है। सेंट्रल बैंकों ने 2026 की दूसरी तिमाही में 288.9 टन सोना खरीदा, जो तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 411% ज़्यादा है। यह तब हुआ जब वेस्टर्न ETF से 44.8 टन सोने की निकासी हुई और ज्वेलरी की मांग में 17% की गिरावट आई।

वहीं, कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद सप्लाई में कोई खास बदलाव नहीं दिखा। वैलम के अनुसार, माइन प्रोडक्शन (खदानों से उत्पादन) में सिर्फ़ 2% की बढ़ोतरी हुई, रीसाइकल किए गए सोने में 6% की गिरावट आई और कुल सप्लाई स्थिर रही।

फर्म का यह भी तर्क है कि जैसे-जैसे ग्लोबल डेट (वैश्विक कर्ज) बढ़ रहा है, करेंसी की वैल्यू घटने के खिलाफ बचाव (हेज) के तौर पर सोने की भूमिका और महत्वपूर्ण होती जा रही है। उनका अनुमान है कि जमीन के ऊपर मौजूद सोने की कुल कीमत लगभग $31 ट्रिलियन है, जबकि प्रमुख सेंट्रल बैंकों की मनी सप्लाई $102 ट्रिलियन और ग्लोबल डेट लगभग $350 ट्रिलियन है।

फर्म का कहना है कि चांदी भी इस सकारात्मक नजरिए को और मजबूत करती है। 2021 से 2026 के बीच, चांदी में 263% और सोने में 164% की की बढ़ोतरी हुई। फिर भी, गोल्ड-सिल्वर रेश्यो लगभग 69 गुना बना हुआ है, जो इसके लंबे समय के औसत (मीडियन) 45-50 गुना से ज़्यादा है।

सोने-चांदी के तेजी के पीछे आंख बंद कर ना करें भरोसा

लेकिन हर कोई इस स्थिति को एक ही नजरिए से नहीं देखता। YES सिक्योरिटीज में इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज़ रिसर्च के स्ट्रैटेजिस्ट हितेश जैन ने हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा है कि वे इस नए कदम को अलग नजरिए से देखते हैं। वे इसे सोने के लिए स्ट्रक्चरल बदलाव के बजाय एक टैक्टिकल राहत मानते हैं।

US ट्रेजरी के लॉन्ग-एंड बायबैक को प्रति ऑपरेशन कम से कम दोगुना करके $4 बिलियन करने के फैसले से लॉन्ग-टर्म यील्ड कम हुई है, जिससे सोने को थोड़े समय के लिए बढ़ावा मिला है। लेकिन जैन का तर्क है कि इस दखल से US की मूल फिस्कल समस्या हल नहीं होती क्योंकि बायबैक की गई सिक्योरिटीज की जगह नए इश्यू ले लेंगे।

उनकी बड़ी चिंता ग्लोबल कैपेक्स (कैपिटल एक्सपेंडिचर) साइकिल है। सरकारें और कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस, सेमीकंडक्टर, एनर्जी और रीशोरिंग के लिए कैपिटल जुटाने की होड़ में हैं, जिससे कैपिटल की लागत स्ट्रक्चरल रूप से ज़्यादा बनी रह सकती है। जैन ने कहा, “अगले तीन से पांच वर्षों में , हमें उम्मीद है कि सोना इक्विटी और इंडस्ट्रियल मेटल्स के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन करेगा।”

सतर्क हैं भारतीय निवेशक

घरेलू निवेश का ट्रेंड भी बताता है कि निवेशक आंख बंद करके सोने की तेजी के पीछे नहीं भाग रहे हैं। वैलम (Vallum) के अनुसार, जुलाई में प्रेशियस-मेटल फंड में निवेश घटकर ₹4,084 करोड़ रह गया, जो जून में ₹8,680 करोड़ था। वहीं, जून में ₹65,530 करोड़ की निकासी के बाद जुलाई में मनी-मार्केट फंड में ₹1.40 लाख करोड़ का निवेश हुआ। जनवरी 2025 और जनवरी 2026 के बीच, भारतीय रिटेल निवेशकों ने गोल्ड फंड और ETF में लगभग ₹93,000 करोड़ का निवेश किया, जिसमें अकेले जनवरी में रिकॉर्ड ₹33,837 करोड़ का निवेश हुआ।

जो निवेशक फिर से निवेश करना चाहते हैं। उनके लिए एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि रियल यील्ड, डॉलर, फिस्कल पॉलिसी और सेंट्रल बैंक की खरीदारी मुख्य संकेतक बने रहेंगे।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में लगातार दूसरे दिन गिरा सोना, चांदी की कीमतों में बदलाव नहीं

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने में लगातार दूसरे गिरावट आई। इसकी कीमत 800 रुपये गिरकर 1,65,700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। चांदी की कीमतों में बदलाव नहीं हुआ। इसकी कीमत 2,50,500 रुपये प्रति किलग्राम पर बनी रही। हालांकि, 28 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार है। इस मौके पर गोल्ड और सिल्वर ज्वेलरी की खरीदारी बढ़ती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेतों का पड़ा असर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेतों का असर घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा। अमेरिकी डॉलर में मजबूती और बॉन्ड यील्ड बढ़ने का असर भी सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा। बीते दो दिनों में सोने की कीमतें 1,400 रुपये गिर चुकी है। 25 अगस्त को सोने का भाव 1,67,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था।

बुलियन मार्केट की नजरें फेड चेयरमैन की स्पीच पर

बुलियन मार्केट की नजरें अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श की स्पीच पर लगी हैं। वह जैक्सन होल में 28 अगस्त को यह स्पीच देने वाले हैं। इससे फेड की मॉनेटरी पॉलिसी के बारे में कुछ संकेत मिल सकते हैं। एनालिस्ट्स का कहना है कि इनफ्लेशन और इंटरेस्ट रेट्स को लेकर फेड की पॉलिसी का असर पहले डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर पड़ेगा। फिर सोने कीमतों पर पड़ेगा।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में गिरावट 

27 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड और स्पॉट सिल्वर में गिरावट दिखी। स्पॉट गोल्ड 0.12 फीसदी गिरकर 4,588 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। सिल्वर 0.11 फीसदी की कमजोरी के साथ 67 डॉलर प्रति औंस पर था। हालांकि, क्रूड ऑयल की कीमतें अब भी 87 डॉलर प्रति बैरल पर बनी हुई हैं। ईरान और ओमान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने को लेकर बातचीत के बावजूद ब्रेंट क्रूड में ज्यादा गिरावट नहीं आई है।

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इस हफ्ते की शुरुआत में तीन महीने की ऊंचाई पर पहुंचा था सोना

इस हफ्ते की शुरुआत में सोने की कीमतें तीन महीने के सबसे लेवल पर पहुंच गई थीं। इस तेजी में डॉलर डिबेसमेंट ट्रेड का हाथ था। पिछले हफ्ते अमेरिकी सरकार ने बॉन्ड बायबैक प्रोग्राम का ऐलान किया था। लेकिन, इससे बॉन्ड यील्ड में तेजी पर थोड़े समय के लिए लगाम लगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि फेड चेयरमैन वॉर्श शुक्रवार को अपने भाषण में फिर से इनफ्लेशन कंट्रोल पर फोकस बढ़ा सकते हैं।

सोना सस्ता होने वाला है! 15% से घटकर 6% हो सकती है इंपोर्ट ड्यूटी, जानिए कितनी गिरेंगी कीमतें

Gold Import Duty Cut Impact: भारतीय सर्राफा बाजार और सोना खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर है। सरकार सोने पर लगने वाली कस्टम इंपोर्ट ड्यूटी को 15% से घटाकर 6% करने पर विचार कर रही है। अगर यह फैसला लागू होता है, तो देश में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।

गौरतलब है कि मई 2026 में सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को देखते हुए सोने पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15% कर दिया था। स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के विश्लेषकों के अनुसार, इस ड्यूटी में कटौती का सीधा असर घरेलू बाजार में सोने के भाव, तस्करी और आगामी त्योहारी-शादियों के सीजन में ज्वेलरी की मांग पर पड़ेगा।

15% से 6% ड्यूटी हुई तो कितनी गिरेंगी कीमतें?

भारत अपनी सोने की जरूरतों को पूरा करने के लिए सालाना 700 से 800 टन सोना विदेशों से आयात करता है। जब इंपोर्ट ड्यूटी 15% होती है, तो यह घरेलू बाजार में सोने के लिए एक न्यूनतम मूल्य तय कर देती है।

अगर ड्यूटी 9% घटकर 6% पर आती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार और भारतीय बाजार के बीच का अंतर काफी कम हो जाएगा। इससे स्थानीय सर्राफा बाजारों में सोने के लैंडेड कॉस्ट में सीधी कमी आएगी, जिसका फायदा सीधे रिटेल खरीदारों को मिलेगा।

दिल्ली में 24 कैरेट सोने की मौजूदा कीमत ₹1,63,890 प्रति 10 ग्राम पर अगर इंपोर्ट ड्यूटी 15% से घटकर 6% यानी 9% की सीधी कटौती होती है, तो इसके भाव में सीधे ₹14,750 की बड़ी गिरावट आएगी और यह घटकर लगभग ₹1,49,140 प्रति 10 ग्राम पर आ जाएगा। वहीं 22 कैरेट सोने का भाव ₹1,50,240 प्रति 10 ग्राम से ₹13,522 सस्ता होकर करीब ₹1,36,718 प्रति 10 ग्राम हो जाएगा।

(नोट: यह कटौती केवल सोने की बेस कीमत पर आधारित है, ज्वैलरी के कुल बिल में 3% जीएसटी और मेकिंग चार्ज के हिसाब से अतिरिक्त राहत भी मिलेगी।)

तस्करी पर लगेगी लगाम, वैध मार्केट को बढ़ावा

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट की रिपोर्ट के अनुसार, हाई इंपोर्ट ड्यूटी (15%) का सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि इससे सोने की तस्करी और अवैध रास्तों से आने वाले सोने को बढ़ावा मिलता है। ड्यूटी 6% होने से वैध तरीके से आयात किए गए सोने और अवैध सोने के बीच का रेट गैप खत्म हो जाएगा। इससे बुलियन ट्रेडर्स और ज्वेलर्स औपचारिक चैनलों के जरिए सोना खरीदने के लिए प्रोत्साहित होंगे, जिससे सरकार के राजस्व संग्रह में भी सुधार होगा।

शादियों के सीजन में ज्वेलरी डिमांड में आएगा उछाल

भारतीय संस्कृति में शादी-ब्याह और त्योहारों के दौरान सोने की खरीदारी सबसे ज्यादा होती है। सोने के दाम घटने से मध्यम वर्गीय परिवारों और रिटेल खरीदारों का बजट सुधरेगा, जिससे ज्वेलरी की मांग में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।

सर्राफा कारोबारी और रिटेल ज्वेलर्स नई आयात लागत के हिसाब से अपने मेकिंग चार्जेस और फाइनल रिटेल प्राइस में तेजी से बदलाव करेंगे। विशेषकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में इसका असर सबसे तेज दिखेगा।

निवेशकों के लिए क्या है सलाह?

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के अनुसार, सोने में निवेश करने वाले रिटेल निवेशकों और ट्रेडर्स को इस नीतिगत बदलाव पर नजर रखनी चाहिए:

फिजिकल गोल्ड बनाम Gold ETF: ड्यूटी घटने से फिजिकल गोल्ड के प्रीमियम में कमी आएगी, जिससे Gold ETFs और गोल्ड फंड्स में निवेश करना अधिक फायदेमंद और सुरक्षित विकल्प बन सकता है।

ज्वेलरी और माइंडिंग स्टॉक्स: सोने के दाम घटने और बिक्री बढ़ने से प्रमुख ज्वेलरी कंपनियों और गोल्ड-लिंक्ड शेयरों के मार्जिन और प्रदर्शन में सुधार हो सकता है।

सरकार की ओर से आधिकारिक ऐलान होते ही सर्राफा बाजार में सोने की नई दरें लागू हो जाएंगी। अगर आप त्योहारी सीजन या शादियों के लिए सोने की खरीदारी या गोल्ड ETF में निवेश की योजना बना रहे हैं, तो ड्यूटी में संभावित कटौती के इस फैसले पर करीबी नजर बनाए रखना समझदारी होगी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।