सोना सस्ता होने वाला है! 15% से घटकर 6% हो सकती है इंपोर्ट ड्यूटी, जानिए कितनी गिरेंगी कीमतें

Gold Import Duty Cut Impact: भारतीय सर्राफा बाजार और सोना खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर है। सरकार सोने पर लगने वाली कस्टम इंपोर्ट ड्यूटी को 15% से घटाकर 6% करने पर विचार कर रही है। अगर यह फैसला लागू होता है, तो देश में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।

गौरतलब है कि मई 2026 में सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को देखते हुए सोने पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15% कर दिया था। स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के विश्लेषकों के अनुसार, इस ड्यूटी में कटौती का सीधा असर घरेलू बाजार में सोने के भाव, तस्करी और आगामी त्योहारी-शादियों के सीजन में ज्वेलरी की मांग पर पड़ेगा।

15% से 6% ड्यूटी हुई तो कितनी गिरेंगी कीमतें?

भारत अपनी सोने की जरूरतों को पूरा करने के लिए सालाना 700 से 800 टन सोना विदेशों से आयात करता है। जब इंपोर्ट ड्यूटी 15% होती है, तो यह घरेलू बाजार में सोने के लिए एक न्यूनतम मूल्य तय कर देती है।

अगर ड्यूटी 9% घटकर 6% पर आती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार और भारतीय बाजार के बीच का अंतर काफी कम हो जाएगा। इससे स्थानीय सर्राफा बाजारों में सोने के लैंडेड कॉस्ट में सीधी कमी आएगी, जिसका फायदा सीधे रिटेल खरीदारों को मिलेगा।

दिल्ली में 24 कैरेट सोने की मौजूदा कीमत ₹1,63,890 प्रति 10 ग्राम पर अगर इंपोर्ट ड्यूटी 15% से घटकर 6% यानी 9% की सीधी कटौती होती है, तो इसके भाव में सीधे ₹14,750 की बड़ी गिरावट आएगी और यह घटकर लगभग ₹1,49,140 प्रति 10 ग्राम पर आ जाएगा। वहीं 22 कैरेट सोने का भाव ₹1,50,240 प्रति 10 ग्राम से ₹13,522 सस्ता होकर करीब ₹1,36,718 प्रति 10 ग्राम हो जाएगा।

(नोट: यह कटौती केवल सोने की बेस कीमत पर आधारित है, ज्वैलरी के कुल बिल में 3% जीएसटी और मेकिंग चार्ज के हिसाब से अतिरिक्त राहत भी मिलेगी।)

तस्करी पर लगेगी लगाम, वैध मार्केट को बढ़ावा

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट की रिपोर्ट के अनुसार, हाई इंपोर्ट ड्यूटी (15%) का सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि इससे सोने की तस्करी और अवैध रास्तों से आने वाले सोने को बढ़ावा मिलता है। ड्यूटी 6% होने से वैध तरीके से आयात किए गए सोने और अवैध सोने के बीच का रेट गैप खत्म हो जाएगा। इससे बुलियन ट्रेडर्स और ज्वेलर्स औपचारिक चैनलों के जरिए सोना खरीदने के लिए प्रोत्साहित होंगे, जिससे सरकार के राजस्व संग्रह में भी सुधार होगा।

शादियों के सीजन में ज्वेलरी डिमांड में आएगा उछाल

भारतीय संस्कृति में शादी-ब्याह और त्योहारों के दौरान सोने की खरीदारी सबसे ज्यादा होती है। सोने के दाम घटने से मध्यम वर्गीय परिवारों और रिटेल खरीदारों का बजट सुधरेगा, जिससे ज्वेलरी की मांग में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।

सर्राफा कारोबारी और रिटेल ज्वेलर्स नई आयात लागत के हिसाब से अपने मेकिंग चार्जेस और फाइनल रिटेल प्राइस में तेजी से बदलाव करेंगे। विशेषकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में इसका असर सबसे तेज दिखेगा।

निवेशकों के लिए क्या है सलाह?

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के अनुसार, सोने में निवेश करने वाले रिटेल निवेशकों और ट्रेडर्स को इस नीतिगत बदलाव पर नजर रखनी चाहिए:

फिजिकल गोल्ड बनाम Gold ETF: ड्यूटी घटने से फिजिकल गोल्ड के प्रीमियम में कमी आएगी, जिससे Gold ETFs और गोल्ड फंड्स में निवेश करना अधिक फायदेमंद और सुरक्षित विकल्प बन सकता है।

ज्वेलरी और माइंडिंग स्टॉक्स: सोने के दाम घटने और बिक्री बढ़ने से प्रमुख ज्वेलरी कंपनियों और गोल्ड-लिंक्ड शेयरों के मार्जिन और प्रदर्शन में सुधार हो सकता है।

सरकार की ओर से आधिकारिक ऐलान होते ही सर्राफा बाजार में सोने की नई दरें लागू हो जाएंगी। अगर आप त्योहारी सीजन या शादियों के लिए सोने की खरीदारी या गोल्ड ETF में निवेश की योजना बना रहे हैं, तो ड्यूटी में संभावित कटौती के इस फैसले पर करीबी नजर बनाए रखना समझदारी होगी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

पीएम मोदी की अपील के बाद से सस्ते हुए सोना-चांदी, ₹46000 तक घट गए दाम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने जनता से खास अपील की थी। उन्होंने कहा था कि एक साल तक सोना खरीदने से बचे, ताकि विदेशी मुद्रा बचाया जा सके। पीएम मोदी की अपील के बाद सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।

कितना सस्ता हुए सोना-चांदी?

इंडियन बुलियन एसोसिएशन (IBA) के आंकड़ों के मुताबिक, 10 मई को जब प्रधानमंत्री ने यह अपील की थी, तब 24 कैरेट सोना 1,53,140 रुपये प्रति 10 ग्राम था। वहीं, चांदी 2,62,350 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बिक रही थी।

अब 28 जून तक सोना 13,267 रुपये सस्ता होकर 1,39,873 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। वहीं, चांदी 45,809 रुपये टूटकर 2,16,541 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई है।

इस दौरान सरकार के कुछ फैसलों और वैश्विक बाजार में कीमती धातुओं में बिकवाली का असर भी कीमतों पर देखने को मिला।

पीएम मोदी ने क्या अपील की थी?

10 मई को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और भारत के बढ़ते आयात बिल का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से गैर-जरूरी खरीदारी टालने की अपील की थी।

उन्होंने कहा था कि एक साल तक सोना खरीदने और विदेश यात्रा जैसी गैर-जरूरी चीजों पर खर्च टालें, ताकि देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचाया जा सके।

प्रधानमंत्री का कहना था कि अगर सोना, ईंधन और दूसरी गैर-जरूरी वस्तुओं का आयात कम होगा, तो विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटेगा और रुपये को भी मजबूती मिलेगी।

भारत में इसका असर क्यों ज्यादा पड़ता है?

भारत दुनिया में सबसे ज्यादा सोना खरीदने और आयात करने वाले देशों में शामिल है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है।

जब सोने का आयात बढ़ता है, तो डॉलर में ज्यादा भुगतान करना पड़ता है। इससे ट्रेड डेफिसिट और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ सकता है।

इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से भी बढ़ा दबाव

प्रधानमंत्री की अपील के कुछ दिन बाद सरकार ने सोना और चांदी पर प्रभावी इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी। इसके लिए कस्टम ड्यूटी और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) में बढ़ोतरी की गई।

Senco Gold के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO सुवंकर सेन ने पहले Moneycontrol से कहा था कि इस फैसले का सबसे ज्यादा असर कीमत को लेकर संवेदनशील ग्राहकों पर पड़ेगा। उनके मुताबिक, इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से निकट भविष्य में सोने की मांग कम हो सकती है। साथ ही सोने का आयात 10% से 15% तक घटने का अनुमान है।

हालांकि, सरकार का मकसद कीमतें घटाना नहीं, बल्कि सोने के आयात पर लगाम लगाना था। लेकिन ऊंची ड्यूटी और कमजोर मांग की वजह से आने वाले समय में आयात पर असर पड़ सकता है।

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