IIFL Finance Q2 Results: NBFC कंपनी का मुनाफा 103% बढ़ा, फोकस में रहेगा स्टॉक

IIFL Finance Q2 Results: NBFC कंपनी IIFL Finance ने वित्त वर्ष 2027 की सितंबर तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 103.7% बढ़कर 766.4 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने 376.3 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था।

कंपनी की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी 50.2% बढ़कर 2,161 करोड़ रुपये पहुंच गई। ये वो कमाई है, जो कर्ज पर मिलने वाले ब्याज और उधार पर चुकाए जाने वाले ब्याज के अंतर से होती है। कंपनी का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) सालाना आधार पर 38% बढ़कर 1.24 लाख करोड़ रुपये हो गया।

गोल्ड लोन कारोबार में 90% की ग्रोथ

IIFL Finance की ग्रोथ में गोल्ड लोन कारोबार की बड़ी भूमिका रही। इस सेगमेंट का AUM सालाना आधार पर 90% बढ़कर 65,729 करोड़ रुपये हो गया। पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 13% की बढ़ोतरी हुई। गोल्ड लोन में ग्रॉस NPA 0.90% रहा।

होम लोन का AUM पिछली तिमाही के मुकाबले 4% बढ़कर 43,070 करोड़ रुपये पहुंच गया। इस सेगमेंट में ग्रॉस NPA घटकर 1.38% रह गया। वहीं, छोटे कारोबारियों को दिए जाने वाले सिक्योर्ड MSME लोन का AUM 11% बढ़कर 11,948 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी बिना गारंटी वाले लोन में अपना जोखिम घटा रही है।

बैड लोन की स्थिति में सुधार

सितंबर तिमाही में IIFL Finance का ग्रॉस NPA 1.5% रहा। यह पिछली तिमाही से 0.07 प्रतिशत अंक कम है। हालांकि, नेट NPA 0.05 प्रतिशत अंक बढ़कर 0.9% हो गया। कंपनी का प्रोविजन कवरेज रेशियो 91% रहा। मतलब कंपनी ने खराब कर्ज से होने वाले संभावित नुकसान के लिए पर्याप्त रकम अलग रखी है।

कंपनी की वित्तीय स्थिति भी मजबूत बनी हुई है। इसका कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 23.5% और लिक्विडिटी 13,805 करोड़ रुपये रही। वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 20.1% रहा।

AI के इस्तेमाल पर जोर

IIFL Finance लोन की जांच, कलेक्शन और ग्राहकों से बातचीत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल बढ़ा रही है। कंपनी के मुताबिक, प्रॉपर्टी के बदले छोटे और मझोले कारोबारियों को दिए जाने वाले लोन के 85% से ज्यादा आवेदनों के क्रेडिट असेसमेंट में AI का इस्तेमाल हो रहा है।

कंपनी ने गोल्ड लोन ब्रांचों में भी AI बेस्ड फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम लगाया है। यह सिस्टम अब तक सोने के गहनों की 11 लाख से ज्यादा तस्वीरों का एनालिसिस कर चुका है। कंपनी बैंकिंग पार्टनरशिप बढ़ाकर भी अपना कारोबार मजबूत करना चाहती है।

शेयर में हल्की तेजी

IIFL Finance का शेयर 15 अक्टूबर को NSE पर 0.53% बढ़कर 598 रुपये पर बंद हुआ। आगे कंपनी का फोकस सिक्योर्ड लोन बढ़ाने, खराब कर्ज पर नियंत्रण रखने और बैंकों के साथ साझेदारी मजबूत करने पर रहेगा।

कंपनी इक्विटी के जरिए नया फंड जुटाने की योजना पर भी काम कर रही है। इसके लिए जुलाई 2026 में शेयरधारकों से जरूरी मंजूरी मिल चुकी है।

Yes Bank News: यस बैंक ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर तोड़ी चुप्पी, शेयर 14% क्रैश होने के बाद कही ये बात

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

IDBI Bank की 60% हिस्सेदारी खरीदेगी Fairfax, लेकिन डील का इस शेयर पर भी दिखेगा असर

CSB Bank Share Price: केरलम के थ्रिसूर की प्राइवेट लेंडर सीएसबी बैंक के शेयरों पर आज इसलिए नजर रहेगी क्योंकि इसके प्रमोटर ने एक और बैंक पर दांव लगाया है। एक कारोबारी दिन पहले सामने आया कि आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) की कंट्रोलिंग हिस्सेदारी फेयरफैक्स (Fairfax) खरीदने जा रही है, जोकि सीएसबी बैंक की प्रमोटर है। अभी सीएसबी बैंक के शेयरों की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले 14 अक्टूबर को बीएसई पर यह 4.07% की बढ़त के साथ ₹320.95 पर बंद हुआ था। आईडीबीआई बैंक का भी शेयर बीएसई पर 9.07% के उछाल के साथ ₹90.44 पर बंद हुआ।

IDBI Bank में कितनी हिस्सेदारी खरीदेगी Fairfax और क्या है CSB Bank से कनेक्शन

केंद्रीय कैबिनेट ने आईडीबीआई बैंक की रीस्ट्रक्चरिंग को मंजूरी दे दी है। फेयरफैक्स सरकार और एलआईसी से आईडीबीआई बैंक में 60.72% हिस्सेदारी ₹52,878 करोड़ में खरीदेगी। इसमें से 30.48% हिस्सेदारी सरकार और 30.24% हिस्सेदारी एलआईसी बेचेगी, जिसे कनाडा इंक खरीदेगी। इसकी पेरेंट कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स है। इस डील के पूरा होने के बाद यह फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में अब तक की सबसे बड़ी एफडीआई डील होगी।

अब सवाल उठता है कि आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बिक्री का सीएसबी बैंक से क्या लेना-देना है। सितंबर तिमाही के आखिरी में एफआईएच मॉरीशस इंवेस्टमेंट्स की इसमें 40% हिस्सेदारी है, जोकि फेयरफैक्स की एक एंटिटी है।

क्या दो बैंक में हो सकती है होल्डिंग?

बैंक ओनरशिप और कंट्रोल को लेकर आरबीआई के नियमों के मुताबिक कोई प्रमोटर एंटिटी एक समय में दो प्रतिस्पर्धी बैंक नहीं चला सकती है। ऐसे में अगर आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी खरीदने के लिए फेयरफैक्स को मंजूरी मिलती है तो इसे या तो सीएसबी बैंक में हिस्सा बेचना होगा या आईडीबीआई बैंक के साथ विलय का रास्ता निकालना होगा यानी कि इंटीग्रेशन प्रोसेस और अधिक कॉम्प्लेक्स हो सकता है। सीएसबी बैंक बात करें तो इसमें फेयरफैक्स इकलौती प्रमोटर एंटिटी है और बाकी 60% पब्लिक शेयरहोल्डर्स हैं। सितंबर तिमाही के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के हिसाब से इसमें म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी 13.15% है। साथ ही ₹2 लाख तक के निवेश वाले करीब 63 हजार खुदरा निवेशकों की इसमें 12.56% हिस्सेदारी है।

कैसी है सेहत

सीएसबी बैंक ने हाल ही में सितंबर तिमाही का बिजनेस अपडेट जारी किया है, जिसमें सामने आया कि बैंक का ग्रास एडवांसेज सालाना 22% और डिपॉजिट्स 18% की रफ्तार से बढ़ा। इस दौरान टर्म डिपॉजिट्स भी 22% बढ़ा तो गोल्ड लोन बिजनेस की ग्रोथ 36% रही। अब एक साल में शेयरों के चाल की बात करें इसने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। 5 जनवरी 2026 को बीएसई पर यह एक साल के रिकॉर्ड हाई लेवल ₹574.70 पर था, जिससे आठ महीने में यह 48.65% टूटकर 15 सितंबर 2026 को एक साल के निचले स्तर पर आ गया। हालांकि अभी भी यह ₹197 के आईपीओ प्राइस से ऊपर है।

IDBI Bank की रीस्ट्रक्चरिंग को कैबिनेट की मंजूरी, फेयरफैक्स खरीदेगी सरकार और LIC से हिस्सेदारी

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Market View: अगले 6 महीने तेजी में मुनाफावसूली की रणनीति करेगी काम, पावर और एक्सपोर्ट सेगमेंट में कमाई के मौके

Stock Market View : 13 अक्टूबर के शानदार सेशन के बाद मार्केट पर आज फिर दबाव देखने को मिल रहा है। निफ्टी 22,700 के लेवल से नीचे आ गया है। बुल्स मोमेंटम बनाए रखने के लिए संघर्ष रहे हैं। सेंसेक्स भी थोड़ा नीचे है और 73,000 के लेवल से नीचे फिसल गया है। निफ्टी बैंक इंडेक्स भी मंदडियों की पकड़ से जूझ रहा है और लगभग 100 अंक नीचे है। बाजार जानकारों का कहना है कि निफ्टी के लिए निचले स्तर पर 22,700 का लेवल बचाए रखना अहम होगा। वहीं, फिर से तेजी पकड़ने के लिए 23,000 के लेवल तक पहुंचना भी जरूरी होगा।

ऐसे माहौल में मार्केट आउटलुक पर चर्चा करते हुए डाइमेंशन्स कॉर्पोरेट फाइनेंस सर्विसेज़ ( Dimensions Corporate Finance Services) के मैनेजिंग डायरेक्टर अजय श्रीवास्तव ने कहा कि रुपए में गिरावट और महंगाई बढ़ने के चलते बाजार पर दबाव देखने को मिल रहा है। बाजार की गिरावट से कोई सरप्राइज नहीं है। अगले 6 महीने तक बाजार में मुनाफावूसली की रणनीति काम करती दिखेगी।

मिडकैप में अच्छी तेजी रही है। प्राइमरी मार्केट पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि IPO का सबसे ज्यादा फायदा एंकर निवेशकों ने उठाया है। IPO से रिटेल निवेशकों को खास फायदा नहीं हुआ है। बाजार की तेजी में मुनाफावसूली की रणनीति रखें। मिडकैप में प्रॉफिट बुकिंग की रणनीति बेहतर काम करेगी।

उन्होंने आगे कहा कि इस समय इंजीनियरिंग में पावर और एक्सपोर्ट सेगमेंट में कमाई के मौके हैं। इन सेगमेंट में क्वालिटी शेयरों पर फोकस करें। नॉन-फेरस मेटल की थीम भी बेहतर है। NBFCs में गोल्ड लोन कंपनियां बेहतर लग रही हैं।

फार्मा शेयरों पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि CDMO शेयर लंबी अवधि के नजरिए से अच्छे लग रहे हैं। इनमें एंट्री पर ध्यान दें। इसके अलावा इंडिया का होटल सेक्टर अच्छा कर सकता है। न्यू ऐज शेयर भी लंबी अवधि के लिहाज से अच्छे लग रहे हैं। आईटी शेयरों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि IT काफी ओवरसोल्ड है। इस सेक्टर को रुपए की गिरावट से फायदा होगा। फिर भी IT सेक्टर में अभी दम नहीं नजर आ रहा है। उनका यह भी मानना है कि स्टारलिंक से टेलीकॉम की तस्वीर बदलती नजर आएगी।

 

Market Insight : भारत का बाजार खराब नहीं है, सिर्फ टॉप 10 शेयर में हो रही है दिक्कत

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Banks vs NBFCs: 5 वजहों से बैंकिंग शेयरों की चमक फीकी, एनबीएफसी ने मारी बाजी

Banks vs NBFCs: लोन बुक में बढ़ोतरी, एसेट क्वालिटी की मजबूती बने रहने और बैड लोन के रिकॉर्ड निचले स्तर के आस-पास होने के बावजूद बड़े बैकों के शेयर निवेशकों को लुभा नहीं पा रहे। वहीं नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनीज (NBFC) को लेकर निवेशकों की काफी दिलचस्पी दिख रही है। सैमको सिक्योरिटीज के सीईओ और फाउंडर जिमीत मोदी का कहना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि बैंकों का मैनेजमेंट खराब है बल्कि बैंकिंग सेक्टर के हालात बदल गए हैं। उन्होंने इसके पीछे की पांच अहम वजह बताई है, जिसके बारे में नीचे दिया जा रहा है।

घट रहे बैंकों के रिटर्न

बड़े प्राइवेट बैंकों के शेयरहोल्डर्स का रिटर्न अब कम हो रहा तो दिग्गज एनबीएफसी में RoE (रिटर्न ऑन इक्विटी) बढ़ रहा है। लंबे समय तक बैंकों का RoE मजबूत बना रहा क्योंकि उनके पसा बड़ा डिपॉजिट बेस था, जिसके दम पर वे शेयरहोल्डर्स के निवेश की तुलना में अधिक लोन बांट पाते थे तो दूसरी तरफ एनबीएफसी को यह सुविधा नहीं थी और उन्हें अपनी पूंजी पर निर्भर रहना पड़ता था। हालांकि अब लेंडिंग मार्जिन कम होने से अधिक लेवरेज का असर बैंकों के RoE पर निगेटिव दिखने लगा तो बेहतर मार्जिन और कम लेवरेज वाली NBFCs का रिटर्न बेहतर बना हुआ है।

रेपो-लिंक्ड लोन ने बढ़ाई बैंकों की दिक्कत

फरवरी 2025 से आरबीआई ने रेपो रेट में 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है। बैंकों के लगभग 60% लोन इसी रेट से जुड़े होते हैं तो रेपो रेट कम होने से इनकी ब्याज दर लगभग तुरंत कम हो गईं। वहीं डिपॉजिट के मामले में स्थिति थोड़ी अलग है क्योंकि इनकी दरें तभी बदलती हैं, जब वे मैच्योर होते हैं, जिसमें आमतौर पर छह से बारह महीने लगते हैं। ऐसे में बैंकों की इनकम पहले घटी, जबकि लागत बाद में कम हुई। वहीं नॉन-बैंक लेंडर्स यानी NBFCs के मामले में स्थिति बिल्कुल उल्टी रही। उनके अधिकतर लोन फिक्स्ड रेट वाले होते हैं, जैसे- ऑटो, गोल्ड और SME लोन। ऐसे में उनकी इनकम कम नहीं हुई और लोन के लिए फंड जुटाने की लागत कम हो गई। इस तरह रेपो रेट में कटौती का असर बिल्कुल अलग-अलग दिखा और इसने मार्जिन में फर्क डाल दिया।

कमजोर हो रही बैंकों की डिपॉजिट

दशकों तक बैंकों को कम लागत वाली सेविंग्स डिपॉजिट मिल जा रही थी लेकिन अब स्टॉक्स और म्यूचुअल फंड जैसे मार्केट से जुड़े प्रोडक्ट्स में पैसा जाने लगा तो बैंकों का डिपॉजिट्स बेस कमजोर पड़ा। इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के मुताबिक परिवारों की बचत का बैंकों में जमा हिस्सा FY12 में 57.9% से घटकर FY25 में 35.2% रह गया। ऐसे में बैंकों के लिए बॉन्ड्स और CD (सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट) इत्यादि की जरूरत बढ़ने लगी जिनकी फंडिंग लागत मार्केट से जुड़ी है। एनबीएफसी भी इसी तरीके से पैसे जुटाते हैं।

कुछ एरिया में बैंकों से आगे NBFC

पिछले कुछ महीनों में बैंकों की लोन ग्रोथ एनबीएफसी की तुलना में अधिक रफ्तार से बढ़ी लेकिन इस ग्रोथ का एक बड़ा हिस्सा बड़े कॉरपोरेट से जुड़ा है, जहां मार्जिन कम है और कीमत बॉन्ड मार्केट से तय होती है। इसके अलावा एनबीएफसी को भी बैंकों का लोन तेजी से बढ़ रहा है। एनबीएफसी की बात करें तो गोल्ड लोन, पुरानी गाड़ियों से जुड़े लोन, अफोर्डेबल हाउसिंग से जुड़े लोन और छोटे बिजनेसेज के लोन के मामले में यह आगे है। इन सेगमेंट में सही फैसला लेने, स्थानीय जानकारी और लोन वसूली की क्षमता की जरूरत होती है, और NBFC ने इन मामलों में बढ़त हासिल कर ली है।

लीडरशिप में बदलाव

प्राइवेट बैंकों के चीफ एग्जीक्यूटिव का एक कार्यकाल तय होता है, जिस पर आरबीआई मंजूरी लेनी होती है। चूंकि कई लीडरशिप कार्यकाल एक ही समय के आसपास तय किए गए थे, इसलिए अब उनमें से कई लगभग एक साथ खत्म हो रहे हैं। इस वजह से 2026 में प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर के बैंकों में बड़ी संख्या में लीडरशिप में बदलाव हो रहे हैं। लीडरशिप में बदलाव से बड़े फैसलों में देरी हो सकती है। नए सीईओ के पद संभालने तक बैंक कई अहम फैसलों को टाल सकते हैं तो नए सीईओ भी आते ही तुरंत आक्रामक तौर पर काम करने लगें, ऐसा जरूरी भी नहीं। बैंकिंग स्टेबिलिटी के लिए ये नियम जरूरी हैं, लेकिन लीडरशिप में बदलाव के समय बैंकों को लेकर निवेशक अधिक सतर्क होने लगते हैं।

क्या करना चाहिए निवेशकों को

निवेशकों की पसंद में बदलाव स्टॉक मार्केट में भी दिखने लगा है। एक साल में निफ्टी बैंक 3.51% मजबूत हुआ है लेकिन निफ्टी फाइनेंशिल सर्विसेज 2.5% कमजोर हुआ है। हालांकि अगर निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में से बैंकों को निकाल दें तो यह एक साल में 6.77% मजबूत हुआ। जिमीत मोदी के मुताबिक जहां बैंकों का क्रेडिट मॉडल काम नहीं कर पा रहा, वहां एनबीएफसी की मौजूदगी इसकी कमाई को सपोर्ट दे रही। हालांकि उनका यह भी मानना है कि इसमें अधिकतर फायदा साइक्लिकल है और इसमें बदलाव हो सकता है। बैंकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती स्ट्रक्चरल है। अब आम लोग अपनी बचत बैंकों की बजाय मार्केट-लिंक्ड प्रोडक्ट्स में डाल रहे हैं। जिमीत के मुताबिक ऐसे समय में निवेशकों को सिर्फ लोन ग्रोथ की बजाय बैंकों के लोन यील्ड और कम लागत वाले डिपॉजिट के हिस्से पर ध्यान देना चाहिए।

Railway Stocks: इस रेलवे पीएसयू को मिला ₹405 करोड़ का काम, अब 21 सितंबर को शेयरों पर रहेगी नजर

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stocks To Buy: ये 5 शेयर करेंगे मालामाल, जेफरीज हुआ इनका दीवाना, क्या करना चाहेंगे निवेश

Stock To Buy: ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने Groww, Paytm, PB Fintech, AU Small Finance Bank और Poonawalla Fincorp को उन पांच स्टॉक्स के तौर पर चुना है जिनका मार्केट कैपिटलाइज़ेशन $5 बिलियन या उससे ज़्यादा है और जो अगले तीन सालों में अच्छे रेवेन्यू ग्रोथ के साथ अपने ऑपरेटिंग प्रॉफिट को 25% की कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ा सकते हैं।

जेफरीज ने ऊपर बताए गए सभी पांच स्टॉक्स को “खरीदने” (buy) की रेटिंग दी है और उम्मीद है कि वे निवेशकों को अच्छा रिटर्न देंगे, क्योंकि ग्रोथ कंपाउंडिंग के साथ, ज़्यादा वैल्यूएशन के बावजूद निवेशकों को रिटर्न मिलेगा। आइए इन स्टॉक्स पर अलग-अलग नजर डालते हैं।

Groww | ब्रोकरेज का मानना ​​है कि Groww की पैरेंट कंपनी, Billionbrains Garage Ventures का शेयर प्राइस ₹240 तक पहुंच सकता है, जिसका मतलब है कि मौजूदा लेवल से इसमें 24% की बढ़ोतरी की संभावना है। जेफरीज का कहना है कि Groww के पास फाइनेंशियल ईयर 2026-2029 के दौरान 30% प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) CAGR हासिल करने के कई तरीके हैं। इनमें क्लाइंट विंटेज और मार्केट शेयर में बढ़ोतरी से ब्रोकिंग बिज़नेस में 18% की ग्रोथ, MTF और वेल्थ मैनेजमेंट जैसी नई पहल और मार्जिन में 10 प्रतिशत पॉइंट का विस्तार शामिल है।

Groww फाइनेंशियल ईयर 2027 में अपने प्लेटफ़ॉर्म पर US स्टॉक्स भी जोड़ रहा है, जिससे जेफरीज का मानना ​​है कि फाइनेंशियल ईयर 2028 की कमाई में 5% से 9% की और बढ़ोतरी हो सकती है।

Paytm | जेफरीज ने इस स्टॉक के लिए अपना प्राइस टारगेट पहले के ₹1,600 से बढ़ाकर ₹2,100 कर दिया है। नया प्राइस टारगेट इसके IPO प्राइस ₹2,150 के लगभग बराबर है। जेफरीज ने कहा कि Paytm लगभग ज़ीरो MDR वाले माहौल में भी अपने क्लाइंट बेस से कमाई करने में आगे है, और अब यह स्थिति बेहतर हो रही है।

जेफरीज का कहना है कि Paytm का 49 मिलियन मर्चेंट बेस और मजबूत लोन-ओरिजिनेशन मॉडल कंपनी को फाइनेंशियल ईयर 2026-2029 के दौरान 25% रेवेन्यू CAGR हासिल करने में मदद करेगा। इसके साथ ही, ऑपरेशनल तालमेल से इसके EBITDA और प्रॉफ़िट में ज़बरदस्त बढ़ोतरी होगी। ब्रोकरेज ने UPI पर 25 बेसिस पॉइंट्स के MDR को ध्यान में रखते हुए, फाइनेंशियल ईयर 2028-2029 के लिए Paytm की कमाई के अनुमानों को 20% और 25% तक बढ़ा दिया है।

PB Fintech | ब्रोकरेज ने PB Fintech के लिए ₹2,050 का प्राइस टारगेट तय किया है, जिसका मतलब है कि मौजूदा लेवल से इसमें 15% की बढ़त की गुंजाइश है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि फाइनेंशियल ईयर 2026-2029 के दौरान PB Fintech के प्रीमियम में 35% CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) देखने को मिलेगा।

ब्रोकरेज ने कहा कि मजबूत ऑपरेटिंग लेवरेज और बढ़ते रिन्यूअल बुक से कंपनी के एडजस्टेड EBITDA को इसी समय में चार गुना बढ़ने में मदद मिलनी चाहिए। साथ ही, कमीशन से जुड़े कड़े नियमों का जोखिम तो है, लेकिन कंबाइंड ऑपरेटिंग मॉडल और क्लेम सपोर्ट/सेल्स पहल जैसे तरीके भी मौजूद हैं।

AU Small Finance Bank | ब्रोकरेज ने इस स्टॉक के लिए ₹1,270 का टारगेट तय किया है, जिसका मतलब है कि मौजूदा लेवल से इसमें 21% की बढ़त की गुंजाइश है। Jefferies का कहना है कि यूनिवर्सल बैंक बनने से फंडिंग कॉस्ट कम हो सकती है, फीस बढ़ सकती है और ब्रांड मजबूत हो सकता है, जिससे ग्रोथ में मदद मिलेगी।

Jefferies का अनुमान है कि अगले तीन सालों में मजबूत डिपॉजिट ग्रोथ से 22% CAGR की क्रेडिट ग्रोथ में मदद मिलेगी और फाइनेंशियल ईयर 2028 तक RoA (रिटर्न ऑन एसेट्स) बढ़कर 1.8% हो जाएगा। Jefferies ने आगे कहा कि लीडरशिप में निरंतरता से भी ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी बनी रहेगी और वैल्यूएशन प्रीमियम में मदद मिलेगी।

Poonawalla Fincorp | ब्रोकरेज को उम्मीद है कि यह स्टॉक ₹560 के लेवल तक जा सकता है, जिसका मतलब है कि मौजूदा लेवल से इसमें 27% की बढ़त की गुंजाइश है। Poonawalla Fincorp अगले तीन सालों में 34% का AUM CAGR हासिल कर सकती है, जिसकी वजह नए प्रोडक्ट्स का विस्तार होगा (जो अभी कुल AUM का 16% है, वह बढ़कर 34% हो जाएगा)। ज़्यादा डिस्बर्समेंट यील्ड और प्राइम PL (पर्सनल लोन) व गोल्ड लोन में तेज़ी से ग्रोथ के कारण मार्जिन भी बढ़ेंगे।

अनसिक्योर्ड सेगमेंट में एसेट क्वालिटी अच्छी रहने से क्रेडिट कॉस्ट भी कम होनी चाहिए। बुक वैल्यू के 2.6 गुना पर, यह स्टॉक दूसरी NBFC कंपनियों के मुकाबले प्रीमियम वैल्यूएशन पर है, हालांकि इसका ग्रोथ आउटलुक कहीं ज़्यादा मजबूत है।

Stock Market Live Update: सेंसेक्स 380 अंक टूटा, निफ्टी 23,350 के नीचे, मेटल, रियल्टी शेयरों में दबाव

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price : जेफरीज ने कहा भारत की ताकत उसके सोने में ही छिपी, गोल्ड पर लगाया बड़ा दांव

Gold Price : शुक्रवार,28 अगस्त को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। निवेशक US फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के जैक्सन होल में होने वाले भाषण से पहले मुनाफावसूली कर रहे है। फिलहाल 12 बजे के आसपास MCX पर सोने का अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट 716 रुपए यानी 0.45 फीसदी की गिरावट के साथ 158,282 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं, चांदी का सितंबर फ्यूचर्स 101 रुपए यानी 0.04 फीसदी गिरकर 240,550 रुपए प्रति किलोग्राम पर दिख रहा था।

इंटरनेशनल मार्केट में भी सोने की कीमतों में गिरावट आई है। निवेशक वॉर्श के भाषण पर नजरें बनाए हुए है। US गोल्ड फ्यूचर्स के दिसंबर कॉन्ट्रैक्ट 0.40% गिरकर 4,627.95 डॉलर प्रति औंस पर आ गए हैं।

गोल्ड पर जेफरीज की राय

इस बीच गोल्ड पर जारी अपनी रिपोर्ट में ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज में कहा है कि भारत में आज भी सबसे बड़ा भरोसा सोने पर ही है। भारत की ताकत उसके सोने में ही छिपी है। उसके मुताबिक देश में करीब 4 लाख करोड़ डॉलर का सोना है,जो आगे चलकर इकोनॉमी और मार्केट दोनों को चमका सकता है। गोल्ड ही भारत का सुपर पावर है। भारत के गोल्ड की वैल्यू 4 लाख करोड़ डॉलर है जो कुल इक्विटी निवेश का 4 गुना है। देश में गोल्ड का भाव 10 फीसदी बढ़ने पर जीडीपी में 0.80 फीसदी का उछाल देखने को मिलता है।

जेफरीज का कहना है कि सोने के दाम बढ़ने से इकोनॉमी और मार्केट दोनों को फायदा होता है। देश में सोना बढ़ेगा तो खर्च बढ़ेगा। गोल्ड लोन के बढ़ते क्रेज से भी फायदा होगा। लोग घर में सोना रखने के बजाय गोल्ड लोन लेकर पैसे का इस्तेमाल कर रहे हैं। गोल्ड लोन के पैसे से इकोनॉमी को बूस्ट मिलेगा।

जेफरीज का गोल्डन पोर्टफोलियो

जेफरीज के गोल्ड थीम में मणप्पुरम और सिल्वर थीम में हिंदुस्तान जिंक शामिल है। इसके अलावा उसके मॉडल पोर्टफोलियो में कंजम्पशन थीम से मीशो और केमिकल थीम से नवीन फ्लोरीन शामिल है। वहीं, इसने अपने मॉडल पोर्टफोलियो से जिंदल स्टेनलेस और अंबुजा सीमेंट को बाहर कर दिया है। जेफरीज की राय है कि सोना चढ़ा तो टाइटन, कल्याण ज्वैलर्स, MCX, IIFL फाइनेंस और मुथूट फाइनेंस की बल्ले-बल्ले होगी।

 

IT Stocks : Nvidia में आई रैली ने IT शेयरों में भरा जोश, निफ्टी के टॉप गेनरों में आईटी शेयरों का दबदबा

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Loan कंपनियों के शेयरों में तूफानी तेजी, आपको आगे भी मालामाल कर सकते हैं ये शेयर

गोल्ड लोन देने वाली कंपनियों के शेयरों में 21 अगस्त को तूफानी तेजी दिखी। इसकी वजह यह है कि विदेशी ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन ने आईआईएफएल फाइनेंस, मुथूट फाइनेंस और मण्णपुरम फाइनेंस के शेयरों को कवर करना शुरू किया है। उसने इन शेयरों को ‘ओवरवेट’ रेटिंग दी है।

IIFL Finance के शेयर के लिए 750 रुपये का टारगेट प्राइस

IIFL Finance, Muthoot Finance और Manappuram Finance के शेयरों में 2 से 8 फीसदी की तेजी दिखी। सबसे ज्यादा 7.26 फीसदी की तेजी IIFL Finance के शेयर में दिखी। इससे शेयर का भाव 682.90 रुपये पर पहुंच गया। जेपी मॉर्गन ने आईआईएफएल के शेयर के लिए 750 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि यह शेयर करीब 18 फीसदी चढ़ सकता है।

IIFL Finance का शेयर बीते एक साल में 48 फीसदी चढ़ा है

सीएनबीसी-टीवी18 की खबर के मुताबिक, जेपी मॉर्गन का मानना है कि आईआईएफएल फाइनेंस टर्नअराउंड की शुरुआती अवस्था में है। प्रॉफिट बनाने की बढ़ती क्षमता को देखते हुए इसके शेयरों की रिरेटिंग हो सकती है। बीते एक साल में आईआईएफएल फाइनेंस का शेयर 48 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है।

मुथूट फाइनेंस के शेयरों में भा सकती है तेजी

मुथूट फाइनेंस के शेयरों के बारे में भी जेपी मॉर्गन की राय पॉजिटिव है। उसने इस शेयर के लिए 3,400 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि यह शेयर 14 फीसदी चढ़ सकता है। ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि इस शेयर का प्रदर्शन इस साल दूसरी गोल्ड लोन कंपनियों के शेयरों से कमजोर रहा है। ऐसे में अभी निवेश करने से आगे अच्छी कमाई हो सकती है। Muthoot Finance का शेयर 21 अगस्त को 2.29 फीसदी चढ़कर 3,038 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में यह 13.54 फीसदी चढ़ा है।

Manappuram Finance के शेयरों में भी निवेश से भी होगी कमाई

Manappuram Finance के शेयरों में भी निवेश करने पर अच्छी कमाई हो सकती है। जेपी मॉर्गन ने इस शेयर के लिए 395 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि इस शेयर में 13 फीसदी तेजी आ सकती है। उसने कहा है कि कंपनी के जून तिमाही के नतीजों से इसके टर्नअराउंड के संकेत मिले हैं। मण्णपुरम फाइनेंस का शेयर 21 अगस्त को 2.35 फीसदी चढ़कर 357.45 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में यह शेयर करीब 35 फीसदी उछला है।

यह भी पढ़ें: Waterways Leisure Tourism Stock Split: 10 टुकड़ों में टूटेगा यह शेयर, एक सप्ताह में 16% चढ़ा; रिकॉर्ड डेट 25 अगस्त

शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में नाममात्र की तेजी 

गोल्ड लोन कंपनियों के शेयरों में तब जोरदार तेजी दिखी, जब बाजार के प्रमुख सूचकांक सीमित दायरे में बने रहे। 21 अगस्त को निफ्टी 0.08 फीसदी यानी 20 अंक चढ़कर 24,252 पर बंद हुआ। सेंसेक्स सिर्फ 3 अंक चढ़कर 77,540 पर क्लोज हुआ। हालांकि, बैंक निफ्टी में 0.46 फीसदी की मजबूती दिखी।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Muthoot FinCorp IPO: ₹3000 करोड़ के इश्यू का ड्राफ्ट जमा, रहेंगे केवल नए शेयर

नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) मुथूट फिनकॉर्प ने अपने 30 अरब रुपये (3000 करोड़ रुपये) के IPO के लिए कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI के पास ड्राफ्ट पेपर जमा कर दिए हैं। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में मुताबिक, ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में कहा गया है कि IPO में केवल नए शेयर जारी किए जाएंगे। कंपनी 6 अरब रुपये तक का प्री-IPO प्लेसमेंट ला सकती है। अगर ऐसा हुआ तो IPO में नए शेयरों के इश्यू का साइज घट जाएगा।

मुथूट फिनकॉर्प के IPO में 50 प्रतिशत तक हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) के लिए, 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NIIs) के लिए और 35 प्रतिशत रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व रहेगा। IPO के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल, मॉर्गन स्टेनली इंडिया, जेएम फाइनेंशियल और SBI कैपिटल मार्केट्स बुक-रनिंग लीड मैनेजर हैं।

मुथूट फिनकॉर्प, मुथूट पप्पाचन ग्रुप की कंपनी है। यह मुख्य रूप से गोल्ड लोन देने का काम करती है। साथ ही यह बिजनेस, हाउसिंग, सप्लाई चेन फाइनेंसिंग और प्रॉपर्टी के बदले लोन जैसी सुविधाएं भी देती है। कंपनी की पूरे भारत में 3,800 से ज्यादा ब्रांच हैं।

कैसे इस्तेमाल होंगे IPO के पैसे

कंपनी अपने IPO से हासिल फंड का इस्तेमाल भविष्य में लोन देने की जरूरतों के लिए टियर-1 कैपिटल बेस को मजबूत करने, बिजनेस बढ़ाने और डिजिटल प्लेटफॉर्म का विस्तार करने में करेगी। एक छोटा हिस्सा इश्यू से जुड़े खर्चों के लिए रखा जाएगा। वित्त वर्ष 2025-26 में मुथूट फिनकॉर्प ने शुद्ध मुनाफे में 3 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी देखी। ऑपरेशंस से रेवेन्यू में 31.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। कंपनी के कंसोलिडेटेड एसेट्स अंडर मैनेजमेंट का आंकड़ा 73,448.82 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

Gaja Capital IPO के लिए ₹152-₹160 प्रति शेयर रहेगा प्राइस बैंड, 19 अगस्त को खुलेगा ₹550 करोड़ का इश्यू

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

क्रिस्टल इंटीग्रेटेड सर्विसेज के कंसोर्टियम को ₹740 करोड़ के प्रोजेक्ट मिले, सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का है काम

इंटीग्रेटेड फैसिलिटीज मैनेजमेंट कंपनी Crystal Integrated Services के कंसोर्टियम को महाराष्ट्र सरकार से दो बड़े वर्क ऑर्डर मिले हैं। इनकी कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू 740.06 करोड़ रुपये है। कंपनी की कंसोर्टियम में 40% हिस्सेदारी है। इस हिसाब से कंपनी के हिस्से की वैल्यू करीब 296.03 करोड़ रुपये है।

पुणे और नागपुर में होंगे प्रोजेक्ट

ये दोनों ऑर्डर LC Infra Crystal Consortium को मिले हैं। इसमें LC Infra Projects Private Limited लीड मेंबर है। वहीं Crystal Integrated Services टेक्निकल मेंबर है।

प्रोजेक्ट के तहत पुणे और नागपुर डिवीजन के शहरी निकायों में सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इसमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), सीवर नेटवर्क और इंटरसेप्शन एंड डायवर्जन सिस्टम शामिल हैं। 5 MLD या उससे ज्यादा क्षमता वाले STP भी बनाए जाएंगे। इन प्रोजेक्ट्स को दो साल में पूरा करना है।

कंपनी की ऑर्डर बुक को मिलेगा सहारा

कंपनी के लिए ये ऑर्डर काफी अहम हैं। इससे सरकारी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में उसकी मौजूदगी बढ़ेगी। कंपनी टेक्निकल मेंबर के तौर पर सीवेज ट्रीटमेंट और सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करेगी।

इन प्रोजेक्ट्स से वेस्टवॉटर मैनेजमेंट और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार में भी कंपनी की पकड़ मजबूत होने की उम्मीद है।

Q1 में रेवेन्यू और मुनाफा बढ़ा

Crystal Integrated Services ने FY27 की पहली तिमाही में भी ग्रोथ दर्ज की। कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 11.65% बढ़कर 360.71 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले यह 323.08 करोड़ रुपये था।

EBITDA 6.76% बढ़कर 22.80 करोड़ रुपये रहा। वहीं, टैक्स के बाद मुनाफा 6.30% बढ़कर 17.36 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन 6.32% रहा। बेसिक EPS भी 5.95% बढ़कर 12.46 रुपये पहुंच गया।

मैनेजमेंट ने क्या कहा?

कंपनी की चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर नीता प्रसाद लाड ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार से मिले ये दोनों कॉन्ट्रैक्ट कंपनी के लिए अहम पड़ाव हैं। उनके मुताबिक, 740 करोड़ रुपये के कुल कॉन्ट्रैक्ट और कंपनी की 40% हिस्सेदारी से प्रोजेक्ट पाइपलाइन मजबूत होगी।

उन्होंने कहा कि कंपनी सरकारी, हेल्थकेयर, इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरे संस्थागत क्षेत्रों में कारोबार बढ़ाने पर फोकस कर रही है। कंपनी का लक्ष्य लंबे समय में टिकाऊ ग्रोथ हासिल करना है।

Manappuram Finance Q1 Results: गोल्ड लोन कंपनी का प्रॉफिट 322% बढ़ा, डिविडेंड का भी ऐलान

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।