तेजी से बदल रही है इनवेस्टमेंट की दुनिया, 2034 तक 436 अरब डॉलर का होगा वेल्थ मैनेजमेंट मार्केट

इंडिया का वेल्थ-मैनेजमेंट मार्केट 2034 तक बढ़कर दोगुना तक हो जाने की उम्मीद है। 2025 में यह मार्केट करीब 171 अरब डॉलर का था। इसका मतलब कि इसका आकार 2034 तक 436 अरब डॉलर तक का हो जाएगा। इसकी वजह लोगों की बढ़ती इनकम, फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में सेविंग्स का शिफ्ट होना और कैपिटल मार्केट में बढ़ता पार्टिसिपेशन है। एमके वेल्थ मैनेजमेंट ने अपनी रिपोर्ट में यह कहा है।

वेल्थ-मैनेजमेंट मार्केट 10% सीएजीआर से बढ़ेगा

इस रिपोर्ट के मुताबिक, वेल्थ-मैनेजमेंट मार्केट की ग्रोथ अगले 8 साल में 10.6 फीसदी सीएजीआर रहेगी। इस दौरान इनवेस्टर्स की दिलचस्पी इंडिविजुअल इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट्स से हटकर एसेट ऐलोकेशन, डायवर्सिफिकेशन, टैक्सेशन और सक्सेशन प्लानिंग में बढ़ेगी। पिछले कुछ सालों में म्यूचुअल फंड्स जैसे फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में निवेश में परिवारों की दिलचस्पी बढ़ी है।

म्यूचुअल फंड्स इंडस्ट्री का एयूएम 80 लाख करोड़ पहुंचा

कैपिटल मार्केट्स में लोगों का निवेश बढ़ने में SIP जैसे प्रोडक्ट्स का भी बड़ा हाथ है। बाजार में उपलब्ध कुल फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में म्यूचुअल फंड्स की ज्यादा हिस्सेदारी है। एमके वेल्थ के मुताबिक, FY26 में म्यूचुअल फंड्स का तिमाही एवरेज एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 77.98 लाख करोड़ रुपये रहा। वेल्थ मैनेजमेंट मार्केट में हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) के अलावा अब दूसरे लोग भी निवेश कर रहे हैं।

वेल्थ मैनेजमेंट मार्केट में HNI की हिस्सेदारी 63 फीसदी

एक अनुमान के मुताबिक, अभी वेल्थ मैनेजमेंट मार्केट में HNI की हिस्सेदारी 62.8 फीसदी है। एमके वेल्थ का कहना है कि अब अमीर लोगों, फैमिली ऑफिस और इंस्टीट्यूशनल से भी डिमांड आ रही है। इनवेस्टर बेस बढ़ने से बाजार में ज्यादा कस्टमाइज्ड प्रोडक्ट्स के आने की उम्मीद है। इनवेस्टर्स पीएमएस, AIF सहित कई प्रोडक्ट्स पर विचार कर रहे हैं। वे डायवर्सिफिकेशन में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

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डायवर्सिफिकेशन के लिए विदेश में इनवेस्ट करना चाहते हैं लोग

एमके वेल्थ को उम्मीद है कि इनवेस्टर्स डायवर्सिफिकेशन के लिए विदेश में इनवेस्ट करना चाहते हैं। आने वाले समय में यह ट्रेंड बढ़ेगा और वेल्थ मैनेजमेंट का जरूरी हिस्सा बन जाएगा। इसकी वजह यह है कि ग्लोबल मार्केट्स तक इंडियन इनवेस्टर्स की पहुंच बढ़ रही है। खासकर एचएनआई और फैमिली ऑफिसेज विदेश में निवेश के मौके तलाश रहे हैं। गिफ्ट आईएफएससी विदेश में निवेश के बड़े प्लेटफॉर्म के रूप में उभर रहा है।

धन के देवता कुबेर भी क्यों हार गए? गणपति बप्पा की वह कहानी जिसने सिखाया मनी मैनेजमेंट का पहला नियम!

दौलत इंसान की जरूरतों को पूरा करने में मदद करते हैं, लेकिन जब इन्हीं चीजों का घमंड होने लगे तो परेशानी खड़ी हो सकती है। हिंदू धर्म की कई कथाओं में देवी-देवताओं के जरिए जीवन से जुड़ी ऐसी सीख बताई गई है, जो आज के समय में भी काम आ सकती है।

कहा जाता है कि कुबेर को अपनी दौलत पर बहुत घमंड हो गया था। अपनी संपत्ति दिखाने के लिए उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती को भोजन पर बुलाया, लेकिन भगवान गणेश उनके घर पहुंचे। गणपति बप्पा ने इतना भोजन किया कि कुबेर के भंडार का खाना भी कम पड़ने लगा। यह देखकर कुबेर को अपनी गलती का एहसास हुआ और उनका घमंड टूट गया। उन्होंने समझा कि धन कितना भी हो, उसका घमंड करना सही नहीं है और विनम्र रहना ही सबसे जरूरी है।

इस कहानी से मिलती है मनी मैनेजमेंट की सीख

1. दिखावे पर ज्यादा खर्च न करें

कुबेर ने अपनी दौलत दिखाने के लिए भगवान गणेश को भोज पर बुलाया था, लेकिन उनका यह तरीका ही उनके लिए सबक बन गया। आज भी कई लोग अपनी कमाई से ज्यादा दूसरों को दिखाने पर खर्च कर देते हैं। महंगे सामान, बड़ी पार्टियां या सिर्फ लोगों को प्रभावित करने के लिए किया गया खर्च हमेशा समझदारी नहीं होता। पैसा वहीं खर्च करना बेहतर है, जहां उसकी सच में जरूरत हो।

2. छोटी बचत ही बड़ी ताकत है

पैसा कमाना अच्छी बात है, लेकिन हर चीज सिर्फ ज्यादा से ज्यादा जमा करने के लिए नहीं होनी चाहिए। हमें अपनी जरूरत और चाहत के बीच का फर्क समझना चाहिए। बिना सोचे खर्च करना या सिर्फ दिखावे के लिए पैसा लगाना आगे चलकर परेशानी बढ़ा सकता है।

3. पैसे का घमंड न करें

कुबेर के पास अपार धन-संपत्ति थी, लेकिन इसी वजह से उनके मन में घमंड आ गया था। यह कथा समझाती है कि पैसा होने पर खुद को दूसरों से बड़ा समझना सही नहीं है। धन आज है तो कल कम भी हो सकता है, इसलिए उसे लेकर हमेशा विनम्र रहना चाहिए। असली बड़प्पन इस बात में है कि इंसान कैसा व्यवहार करता है।

4. पैसों का सही इस्तेमाल करें

धन का मतलब सिर्फ उसे अपने पास जमा करके रखना नहीं है। सही समय पर परिवार की जरूरत पूरी करना, मुश्किल वक्त के लिए बचत करना और जरूरतमंद की मदद करना भी पैसे का अच्छा इस्तेमाल माना जा सकता है। जब पैसा सही जगह लगाया जाता है, तो वह जीवन को आसान बनाने में मदद करता है।

5. विनम्र रहना सीखें

इस कथा की सबसे बड़ी सीख यही है कि धन और सफलता मिलने के बाद भी इंसान को अपने व्यवहार में सादगी रखनी चाहिए। पैसा किसी को बड़ा या छोटा नहीं बनाता, बल्कि उसका व्यवहार उसकी असली पहचान बताता है। सफलता मिलने पर दूसरों को कम समझने के बजाय विनम्र बने रहना जरूरी है।

यह प्लान आपको सुखमय जीवन जीने में मदद कर सकता है। इसलिए अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से खर्च करना बेहतर है। भगवान गणेश और धन के देवता कुबेर से जुड़ी एक कथा भी हमें यही समझाती है कि पैसा कितना भी हो, उसका घमंड करना सही नहीं है, बल्कि रोज की जिंदगी से सबक सीखना चाहिए।

1.6 करोड़ रुपये की नेटवर्थ देखकर आप भी होंगे हैरान, लेकिन 25 साल के इस युवा की असली टेंशन कुछ और है

25 साल की उम्र में जहां ज्यादातर युवा करियर की शुरुआत और कमाई बढ़ाने की कोशिश में जुटे होते हैं, वहीं एक टियर-2 शहर के युवा उद्यमी ने करीब ₹1.6 करोड़ की नेटवर्थ बना ली है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इतनी संपत्ति बनाने के बाद भी उसकी चिंता खत्म नहीं हुई। अब उसका सवाल है- पैसा कमाने के बाद उसे सही जगह कैसे लगाया जाए और अगला लक्ष्य क्या हो?

18 की उम्र में शुरू हुई कमाई की कहानी

इस युवा की आर्थिक यात्रा 18 साल की उम्र में freelancing से शुरू हुई थी। धीरे-धीरे उसने Instagram पर theme pages बनाए और इन्हीं पेजों को आगे चलकर अपने डिजिटल मीडिया बिजनेस में बदल दिया। आज उसकी कमाई का मुख्य जरिया यही बिजनेस है। हालांकि, बिजनेस से होने वाली आय तय नहीं रहती और समय के साथ इसमें उतार-चढ़ाव आता रहता है।

करोड़ों की संपत्ति, कई जगह फैला निवेश

Reddit के r/personalfinanceindia पर अपनी कहानी शेयर करते हुए 25 वर्षीय उद्यमी ने अपने निवेश का पूरा ब्योरा बताया। उसके पोर्टफोलियो में सबसे बड़ा हिस्सा भारतीय शेयरों का है। उसके मुताबिक, करीब ₹85 लाख भारतीय इक्विटी, ₹7.5 लाख अमेरिकी शेयरों और ₹5 लाख म्यूचुअल फंड्स में लगे हैं। इसके अलावा ₹5 लाख Sovereign Gold Bonds और ₹2 लाख Gold ETFs में निवेश किए गए हैं। रियल एस्टेट में करीब ₹15 लाख और क्रिप्टोकरेंसी में ₹3 लाख लगाए गए हैं।

₹40-45 लाख कैश में, लेकिन निवेश को लेकर उलझन

सबसे दिलचस्प हिस्सा उसके पास मौजूद नकदी है। करीब ₹40-45 लाख लंबे समय से बैंक अकाउंट में पड़े हैं। वह खुद भी मानता है कि इतनी बड़ी रकम को सिर्फ सेविंग अकाउंट में रखना शायद पैसे का सबसे बेहतर इस्तेमाल नहीं है। लेकिन समस्या यह है कि वह सिर्फ इसलिए निवेश नहीं करना चाहता कि पैसा कहीं लगा हुआ दिखे। वह ऐसी जगह तलाश रहा है, जहां जोखिम और संभावित रिटर्न उसके हिसाब से संतुलित हों।

अब लक्ष्य सिर्फ पैसा कमाना नहीं

युवा उद्यमी के मुताबिक, उसका अगला लक्ष्य बिजनेस को आगे बढ़ाने के साथ अपनी संपत्ति को अलग-अलग जगहों पर फैलाना है। वह किसी एक बिजनेस या एसेट पर जरूरत से ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहता। आखिरकार उसकी नजर FIRE यानी Financial Independence, Retire Early पर है। यानी वह ऐसी आर्थिक स्थिति बनाना चाहता है, जहां भविष्य में रोजी-रोटी के लिए काम करना मजबूरी न रहे।

₹1.6 करोड़ के बाद भी Reddit पर मांगी सलाह

अपनी स्थिति बताते हुए उसने Reddit यूजर्स से पूछा कि अगर कोई 25 साल की उम्र में करीब ₹1.5-2 करोड़ की नेटवर्थ और ₹40-45 लाख कैश के साथ हो, तो उसे आगे किस दिशा में ध्यान देना चाहिए। पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी दिलचस्प रहीं। कई यूजर्स ने उसकी उपलब्धि की तारीफ की और कहा कि वह अपनी उम्र के ज्यादातर लोगों से काफी आगे है। एक यूजर ने उसके काम के बारे में पूछा तो उसने बताया कि वह Instagram पर कई theme pages का मालिक है, जिनमें meme pages भी शामिल हैं।

लोगों ने दी निवेश से ज्यादा सुरक्षा की सलाह

कुछ Reddit यूजर्स का ध्यान उसके निवेश से ज्यादा insurance पर गया। एक यूजर ने term insurance बढ़ाने और पर्याप्त health insurance लेने की सलाह दी। साथ ही emergency fund तैयार रखने की बात भी कही गई। एक अन्य यूजर ने real estate में धीरे-धीरे कदम रखने और rental income बनाने का सुझाव दिया।

असली कहानी ₹1.6 करोड़ की नहीं, अगले फैसले की है

इस पूरी कहानी का दिलचस्प पहलू सिर्फ यह नहीं है कि 25 साल की उम्र में किसी ने कितनी संपत्ति बना ली। असली सवाल यह है कि जब कमाई एक मुकाम तक पहुंच जाए, तो उसके बाद सही फैसले कैसे लिए जाएं?

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कमाई अच्छी फिर भी सेविंग नहीं! इन मूलांक वालों की ये आदत पड़ती है भारी

पैसा कमाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी उसे संभालकर रखना भी है। कई बार अच्छी कमाई होने के बावजूद महीने के आखिर में सेविंग नहीं हो पाती और पता ही नहीं चलता कि पैसा कहां खर्च हो गया। अंक ज्योतिष के अनुसार, जन्म तारीख से निकलने वाला मूलांक व्यक्ति के स्वभाव और पैसों से जुड़ी आदतों के बारे में भी कुछ संकेत दे सकता है। कुछ मूलांक वाले लोग कमाई अच्छी होने के बाद भी ज्यादा खर्च करने, शौक पूरे करने या बिना सोचे पैसे लगाने की वजह से आर्थिक परेशानी में पड़ सकते हैं।

 

मूलांक 3

जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 3, 12 या 21 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 3 माना जाता है। अंक ज्योतिष में इसके स्वामी ग्रह गुरु माने जाते हैं।

ये लोग लोग आमतौर पर आगे बढ़ने और पैसा कमाने की सोच रखते हैं। इन्हें नई चीजें सीखना और खुद को बेहतर बनाना पसंद होता है। इसी वजह से कई बार ये अपनी पढ़ाई, ग्रूमिंग, शौक और पसंद की चीजों पर जरूरत से ज्यादा खर्च कर देते हैं। कभी-कभी भावनाओं में आकर भी पैसा खर्च करने की आदत बन सकती है, जिससे अच्छी कमाई के बावजूद बचत कम रह जाती है।

 

मूलांक 5

5, 14 या 23 तारीख को जन्म लेने वाले लोगों का मूलांक 5 माना जाता है। अंक ज्योतिष में इस मूलांक का स्वामी बुध ग्रह माना जाता है।

ये लोग लोग तेज दिमाग और नई चीजें आजमाने वाले माने जाते हैं। इन्हें एक ही तरह की जिंदगी या काम ज्यादा समय तक पसंद नहीं आता। इसी वजह से ये कई बार नौकरी, काम या अपनी पसंद की चीजें जल्दी-जल्दी बदल लेते हैं। नई चीजों और अनुभवों पर खर्च करने की आदत भी इनके लिए परेशानी बन सकती है। कमाई अच्छी होने के बावजूद अगर खर्च पर ध्यान न दिया जाए, तो भविष्य के लिए पैसा बचाना मुश्किल हो सकता है।

मूलांक 6

जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 6, 15 या 24 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 6 माना जाता है। अंक ज्योतिष में इस मूलांक का स्वामी शुक्र ग्रह माना जाता है।

इन लोगों को आराम, खूबसूरत चीजें और अच्छी लाइफस्टाइल पसंद मानी जाती है। ये अपने कपड़े, लुक, ग्रूमिंग और घर की सजावट पर दिल खोलकर खर्च कर सकते हैं। कई बार दूसरों को प्रभावित करने के लिए भी ज्यादा खर्च हो जाता है। यही आदत अगर कंट्रोल में न रहे, तो अच्छी आमदनी के बाद भी सेविंग कम हो सकती है और आर्थिक परेशानी बढ़ सकती है।

 

बचत जरूरी

इन मूलांकों से जुड़ी बातें अंक ज्योतिष की मान्यताओं पर आधारित हैं। ऐसा जरूरी नहीं है कि इन तारीखों को जन्म लेने वाले हर व्यक्ति को आर्थिक परेशानी हो। असल जिंदगी में पैसे की स्थिति कमाई, खर्च करने की आदत, बचत और सही वित्तीय योजना पर भी निर्भर करती है। इसलिए कमाई अच्छी हो तो खर्च के साथ भविष्य के लिए बचत पर भी ध्यान देना जरूरी है।

99.9% निवेशक यहां करते हैं गलती! 2 करोड़ से 10 करोड़ का सफर कैसे होगा आसान, जानें एक्सपर्ट की रणनीति

हर निवेशक चाहता है कि उसका पैसा समय के साथ तेजी से बढ़े। आम धारणा है कि नियमित निवेश करते रहें, बाजार में टिके रहें और कंपाउंडिंग को अपना काम करने दें। लेकिन जैसे-जैसे पोर्टफोलियो बड़ा होता है, कहानी बदलने लगती है। फाइनेंशियल एडवाइजर कपिल जैन ने 45 साल के एक ऐसे निवेशक का उदाहरण दिया, जिसके पास 2 करोड़ रुपये हैं और वह 10 साल में इसे 10 करोड़ करना चाहता है। उनके मुताबिक, लक्ष्य हासिल करना संभव है, लेकिन रास्ते में निवेश की रणनीति बदलना बेहद जरूरी है।

शुरुआत में SIP बनाती है रफ्तार

जैन के अनुसार, शुरुआती दौर में नियमित निवेश और बाजार की ग्रोथ से पोर्टफोलियो तेजी से बढ़ सकता है। लेकिन जब रकम करोड़ों में पहुंचने लगती है, तब बाजार की छोटी गिरावट भी बड़ा नुकसान दिखाने लगती है। यही वजह है कि शुरुआत में काम करने वाली रणनीति को पूरी यात्रा में जारी रखना समझदारी नहीं हो सकती।

5 करोड़ पर 25% गिरावट का मतलब?

मान लीजिए पोर्टफोलियो 5 करोड़ रुपये का है और बाजार 25 फीसदी गिर जाता है। रकम के हिसाब से करीब 1.25 करोड़ रुपये की गिरावट आ सकती है। यानी अब नुकसान की भरपाई सिर्फ कुछ महीनों की SIP से नहीं होगी। बड़े कॉर्पस के साथ बाजार का हर उतार-चढ़ाव ज्यादा बड़ा असर डालता है।

10 करोड़ के करीब पहुंचते ही असली चुनौती

अगर पोर्टफोलियो 10 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और बाजार 25 फीसदी गिरा, तो करीब 2.5 करोड़ रुपये की वैल्यू कम हो सकती है। इसीलिए जैन का कहना है कि बड़े पोर्टफोलियो के साथ सिर्फ रिटर्न के पीछे भागना सही रणनीति नहीं है। इस चरण में कमाए हुए पैसे को बचाना भी उतना ही जरूरी है।

‘एक ही रणनीति हमेशा काम नहीं करती’

कपिल जैन के मुताबिक निवेशक अक्सर सबसे बड़ी गलती यही करते हैं कि पोर्टफोलियो छोटा हो या बड़ा, रणनीति वही रखते हैं। उनका सुझाव है कि समय-समय पर पोर्टफोलियो की समीक्षा, रीबैलेंसिंग और सही एसेट एलोकेशन पर ध्यान देना चाहिए। आखिरकार, 2 करोड़ से 10 करोड़ तक पहुंचना सिर्फ कंपाउंडिंग का खेल नहीं है; जैसे-जैसे पैसा बढ़ता है, उसे संभालने का तरीका भी बदलना पड़ता है।

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PMS के नए नियमों से जुड़े सेबी के प्रस्ताव में क्या है, इसके लागू होने के बाद क्या बदलाव आएगा?

सेबी पोर्टफोलियो मैनेजर्स रेगुलेशंस, 2020 में बदलाव की तैयारी में है। रेगुलेटर पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (पीएमएस) इंडस्ट्री की तेज ग्रोथ को देखते हुए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को आज की जरूरतों को ध्यान में रख बदलना चाहता है। इस बारे में सेबी ने कंसल्टेशन पेपर इश्यू किया है। इस पर 13 अगस्त तक राय मांगी गई है।

पीएमएस के एयूएम में तेज उछाल

पिछले कुछ सालों में पीएमएस इंडस्ट्री की ग्रोथ तेज रही है। 31 मई, 2026 को पीएमएस का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर 42.61 लाख करोड़ रुपये हो गया। अप्रैल 2019 में यह 18.07 लाख करोड़ रुपये था। पोर्टफोलियो मैनेजर्स की संख्या दोगुनी से ज्यादा हो गई है। 2020 में यह संख्या 226 थी, जो अब बढ़कर 515 हो गई है। पीएमएस क्लाइंट्स की संख्या बढ़कर 2.19 लाख हो गई है।

एसेट्स के  निवेश के विकल्प बढ़ेंगे

सेबी ने कहा है कि पीएमएस इंडस्ट्री की ग्रोथ और इस प्रोडक्ट में इनवेस्टर्स की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए इससे जुड़े नियमों पर पुनर्विचार जरूर हो गया है। सबसे बड़ा प्रस्ताव पोर्टफोलियो मैनेजर्स के लिए निवेश के विकल्पों का विस्तार है। सेबी ने पोर्टफोलियो मैनेजर्स को ‘लिस्ट होने वाले’ सिक्योरिटीज में निवेश की इजाजत देने का प्रस्ताव दिया है।

विदेशी सिक्योरिटीज में निवेश की इजाजत

सेबी के प्रस्ताव में कहा गया है कि पोर्टफोलियो मैनेजर्स को क्लाइंट्स के एसेट का 10 फीसदी इनवेस्टमेंट-ग्रेड अनलिस्टेड डेट सिक्योरिटीज में निवेश की इजाजत मिलनी चाहिए। इसके अलावा पोर्टफोलियो मैनेजर्स क्लाइंट्स के एसेट्स को विदेशी सिक्योरिटीज में निवेश कर सकेंगे। विदेशी सिक्योरिटीज में विदेश में लिस्टेड शेयर्स, लिस्टेड डेट सिक्योरिटीज, ओवरसीज म्यूचुअल फंड्स आदि शामिल होंगे।

विदेश में निवेश FEMA के नियमों के तहत 

पीएमएस के फंड मैनेजर्स को FEMA के नियमों के तहत विदेश में निवेश की इजाजत होगी। फंड मैनेजर्स को विदेश में निवेश से पहले क्लाइंट्स की सहमति हासिल करनी होगी। सेबी का मानना है कि पीएमएस के नए नियमों के लागू होने के बाद निवेश के लिहाज से म्यूचुअल फंड्स और उसके बीच का फर्क कम हो जाएगा।

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मिनिमम निवेश 50 लाख से घटकर 25 लाख होगा

सेबी के कंसल्टेशन पेपर में म्यूचुअल फंड-ओनली पीएमएस (MF-PMS) कैटेगरी शुरू करने का भी प्रस्ताव है। इससे अमीर निवेशकों की पहुंच प्रोफेशनली मैनेज्ड पोर्टफोलियो तक बढ़ेगी। प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत फंड मैनेजर्स को म्यूचुअल फंड्स, ईटीएफ और स्पेशियलाइज्ड इनवेस्टमेंट फंड में निवेश की इजाजत होगी। सेबी ने इस कैटेगरी के लिए मिनिमम निवेश को 50 लाख रुपये से घटाकर 25 लाख करने का प्रस्ताव पेश किया है।

Angel One Q1 Results: एंजल वन का मुनाफा 102% बढ़ा, डिविडेंड का भी ऐलान

Angel One Q1 Results: फिनटेक और ब्रोकिंग कंपनी Angel One ने जून तिमाही (Q1FY27) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 102% यानी दोगुने से ज्यादा बढ़कर ₹231 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने ₹114 करोड़ का मुनाफा कमाया था।

रेवेन्यू और ऑपरेटिंग मुनाफा दोनों बढ़े

जून तिमाही में एंजल वन का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 25.3% बढ़कर ₹1,430 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹1,141 करोड़ था।

वहीं, EBITDA 76.5% बढ़कर ₹485 करोड़ हो गया। EBITDA मार्जिन भी 24% से बढ़कर 34% पहुंच गया। यानी कंपनी पहले के मुकाबले ज्यादा मुनाफे के साथ कारोबार कर रही है।

लोन कारोबार में रिकॉर्ड ग्रोथ

इस तिमाही में एंजल वन का क्लाइंट फंडिंग बुक रिकॉर्ड ₹6,140 करोड़ पर पहुंच गया। यह पिछले साल के मुकाबले 45.9% ज्यादा है।

वहीं, क्रेडिट डिस्ट्रीब्यूशन 129.7% बढ़कर ₹530 करोड़ हो गया। यानी कंपनी ने पहले से कहीं ज्यादा लोन बांटे।

वेल्थ मैनेजमेंट बिजनेस भी तेजी से बढ़ा

एंजल वन का वेल्थ मैनेजमेंट AUM 165.3% बढ़कर ₹13,440 करोड़ हो गया। जून 2026 तक इस कारोबार से 2,400 से ज्यादा ग्राहक जुड़े थे। वहीं, एसेट मैनेजमेंट AUM 81.4% बढ़कर ₹620 करोड़ पहुंच गया।

SIP में थोड़ी कमजोरी दिखी। जून तिमाही में कंपनी के जरिए 17 लाख यूनिक SIP रजिस्टर हुए। यह पिछले साल के मुकाबले 10.3% कम है।

एंजल वन ने क्या कहा?

Angel One के चेयरमैन और एमडी दिनेश ठक्कर ने कहा कि भारत में तेजी से बढ़ रहे निवेश और डिजिटल फाइनेंस का फायदा कंपनी को मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि कंपनी का लक्ष्य लोगों की हर वित्तीय जरूरत के लिए सबसे भरोसेमंद फिनटेक प्लेटफॉर्म बनना है। कंपनी यूजर्स की भागीदारी बढ़ाने और लंबे समय में बेहतर वैल्यू देने पर फोकस कर रही है।

₹1 का अंतरिम डिविडेंड

एंजल वन के बोर्ड ने FY27 के लिए ₹1 प्रति शेयर का पहला अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है।

  • रिकॉर्ड डेट: 21 जुलाई 2026
  • भुगतान: 14 अगस्त 2026 या उससे पहले

Angel One का शेयर बुधवार को नतीजों से पहले 3.13% चढ़कर ₹344 पर बंद हुआ। इस साल यानी 2026 में स्टॉक अब तक 45.59% का रिटर्न दे चुका है।

Groww Q1 Results: जून तिमाही में 94% बढ़ा मुनाफा, रेवेन्यू में 60% का उछाल, शेयर रॉकेट

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।