लेऑफ के बाद ऑफिस की आखिरी विजिट बनी दर्दनाक याद! सोशल मीडिया पर वायरल हुई इमोशनल कहानी

नौकरी से निकाले जाने के बाद एक कर्मचारी कंपनी को लैपटॉप वापस करने के लिए ऑफिस गया। व्यक्ति के साथ वहां पर हैरान कर देने वाली घटना हुई। व्यक्ति ने ये घटना शेयर करते हुए बताया कि, ऑफिस की यह आखिरी यात्रा उसके 2 साल के बेटे के लिए भी एक मुश्किल और समझ से परे अनुभव बन गई। उसकी पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच इस घटना को लेकर चर्चा शुरू हो गई। लोग इस पोस्ट पर तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं। Reddit पर शेयर पोस्ट में कर्मचारी ने बताया कि, वह ब्लैकरॉक की कंपनी प्रीक्विन में काम करता था। हाल ही में उसकी नौकरी चली गई थी और वह ऑफिस में अपनी आखिरी दिन की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए पहुंचा था।

बेटा अंदर नहीं जा सकता

उस समय उसकी पत्नी भी काम पर थी और उनके 2 साल के बच्चे की देखभाल के लिए घर पर कोई और नहीं था। ऐसे में कर्मचारी को अपने बच्चे को ऑफिस साथ ले जाना पड़ा। उसने बताया, “घर पर उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था, इसलिए मेरे पास उसे अपने साथ ले जाने के अलावा कोई चारा नहीं था।” लेकिन, ऑफिस पहुंचने के बाद कर्मचारी को बताया गया कि उसका बेटा अंदर नहीं आ सकता। उसने अपनी स्थिति समझाने की कोशिश की और बताया कि यह उसका आखिरी दिन था और उसे सिर्फ कंपनी का लैपटॉप जमा करके वापस जाना था। इसके बावजूद उसकी रिक्वेस्ट को मंजूरी नहीं दी गई और बच्चे को ऑफिस के अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

इसके बाद कर्मचारी को मजबूर होकर एक कलीग को फोन करना पड़ा और जब तक वह लैपटॉप जमा करने की प्रक्रिया पूरी करता, तब तक अपने बेटे की देखभाल करने के लिए कहा। उसे लगा था कि यह काम महज पांच मिनट में पूरा हो जाएगा, लेकिन पूरी प्रक्रिया में करीब 15 मिनट लग गए। कर्मचारी ने कहा कि इस पूरी स्थिति की वजह से उसे काफी बुरा महसूस हुआ। लेकिन, इस अनुभव से परेशान होने के बावजूद उसने साफ किया कि वह कंपनी पर किसी नियम को तोड़ने का आरोप नहीं लगा रहा है। उसका कहना था कि वह समझता है कि ऑफिस में विजिटर्स और बच्चों को लेकर कंपनी की अपनी पॉलिसी हो सकती है।

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बन गई एक दर्दनाक याद

नौकरी जाने के बाद इस अनुभव ने कर्मचारी को एहसास कराया कि कंपनी के लिए उसकी निजी परिस्थितियां उतनी मायने नहीं रखतीं, जितनी उसके लिए खुद रखती हैं। उन्होंने लिखा, “आप अपना सालों का समय दे सकते हैं, देर तक काम कर सकते हैं, जिम्मेदारी ले सकते हैं और कंपनी को अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा मान सकते हैं। लेकिन जब नौकरी का रिश्ता खत्म होता है, तो आखिर में यह एक बिजनेस फैसला ही होता है।” उन्होंने लिखा, “मेरे लिए, यह चीजों को सही नजरिए से देखने की एक दर्दनाक याद दिलाने वाली बात थी।”

लोगों ने किया पोस्ट

व्यक्ति का ये पोस्ट कुछ ही समय में Reddit पर चर्चा का विषय बन गई। एक यूजर ने कहा, “कंपनी से पहले ही लेबल लगा हुआ बॉक्स मंगवा लेना चाहिए, ताकि लैपटॉप आसानी से वापस भेजा जा सके। उन्होंने कहा कि कंपनी का समय या पैसा बचाने के लिए कर्मचारी को खुद अपना समय और मेहनत खर्च करने की जरूरत नहीं है।” वहीं दूसरे ने कहा, “वह अगली बार खुद ऑफिस जाने के बजाय लैपटॉप रिसेप्शन पर छोड़ सकता है, किसी पुराने कलीग से मदद मांग सकता है या कंपनी से डिवाइस वापस भेजने के लिए बॉक्स मंगवा सकता है।”

वहीं, एक और यूजर ने कहा कि, “कई लोग कॉर्पोरेट नौकरी, अच्छी सैलरी और ऑफिस की सुविधाओं वाली जिंदगी को पसंद करते हैं, लेकिन नौकरी जाने के बाद कंपनी के रवैये से उन्हें निराशा होती है”। यूजर ने यह भी कहा कि कुछ कर्मचारियों को नौकरी से निकालने के दौरान उनके साथ खराब व्यवहार किया जाता है और ऐसी स्थिति में उनके लिए सहानुभूति महसूस करना जरूरी नहीं है।

14 महीने तक किसी को नहीं हुआ शक, दो कंपनियों में चुपचाप करता रहा नौकरी; लेकिन मर्जर ने ऐसा फंसाया कि अब समझ नहीं आ रहा क्या करे!

एक टेक प्रोफेशनल करीब 14 महीने से दो कंपनियों में एक साथ रिमोट जॉब कर रहा था और अब तक उसकी यह ‘डबल जॉब’ वाली व्यवस्था बिना किसी बड़ी परेशानी के चल रही थी। दोनों कंपनियां अलग थीं, काम का तरीका और टेक्नोलॉजी स्टैक भी अलग था, इसलिए उसे लगता था कि दोनों नौकरियों का राज आसानी से छिपा रहेगा। लेकिन अचानक एक ऐसा मोड़ आया, जिसने उसकी पूरी प्लानिंग हिला दी। उसे पता चला कि उसकी दोनों कंपनियां अब मर्ज होने जा रही हैं।

इसके बाद सबसे बड़ा डर यह है कि कंपनियों के सिस्टम और कर्मचारी रिकॉर्ड आपस में जुड़ते ही उसकी पहचान दोनों जगह सामने आ सकती है। खास बात यह है कि वह दोनों संस्थानों के कर्मचारियों के संपर्क में भी रहता है और दोनों कंपनियों की Slack डायरेक्टरी में उसका नाम मौजूद है। अब वह सोच रहा है कि नौकरी छोड़े या जोखिम लेकर इंतजार करे।

14 महीने तक आराम से चल रही थी दोहरी नौकरी

रेडिट पर शेयर की गई पोस्ट के मुताबिक, टेक कर्मचारी करीब 14 महीने से दो कंपनियों में एक साथ काम कर रहा था। दोनों नौकरियां पूरी तरह रिमोट थीं और दोनों में अलग-अलग टेक्नोलॉजी स्टैक इस्तेमाल होते थे।

उसका मानना था कि दोनों कंपनियों के कामकाज और टीमों के बीच इतना अंतर है कि किसी को उसके दूसरे रोजगार के बारे में पता चलने की संभावना बेहद कम है। इसी भरोसे के साथ वह दोनों नौकरियां संभालता रहा।

छोटी कंपनी को चुना था, ताकि न हो कोई टकराव

कर्मचारी के मुताबिक, उसकी एक कंपनी मिड-साइज SaaS कंपनी थी, जबकि दूसरी उसी सेक्टर में काम करने वाली अपेक्षाकृत छोटी कंपनी थी। उसने दूसरी कंपनी को इसलिए चुना था क्योंकि उसे लगता था कि छोटी कंपनी होने के कारण दोनों संस्थानों के बीच भविष्य में किसी तरह का कारोबारी संपर्क होने की संभावना काफी कम है। लेकिन जिस चीज को उसने सबसे कम संभावित माना था, वही आखिरकार उसके सामने आ गई।

CEO का एक ईमेल और बदल गया पूरा खेल

मुश्किल तब शुरू हुई जब उसे पहली कंपनी के CEO की ओर से ईमेल मिला। ईमेल में बताया गया था कि उसकी कंपनी दूसरी कंपनी का अधिग्रहण करने जा रही है। यानी जिस कंपनी में वह दूसरी नौकरी कर रहा था, अब वही उसकी पहली कंपनी के कॉरपोरेट दायरे में आने वाली थी। इसके बाद कर्मचारी को सबसे बड़ा डर अपने दोनों रोजगार रिकॉर्ड के आपस में जुड़ने का सताने लगा।

Slack डायरेक्टरी बनी सबसे बड़ी चिंता

टेक प्रोफेशनल ने बताया कि वह दोनों कंपनियों के कर्मचारियों के साथ नियमित रूप से बातचीत करता है। ऐसे में मर्जर के बाद उसके लिए छिपे रहना और मुश्किल हो सकता है। दोनों कंपनियों की Slack डायरेक्टरी में उसका नाम मौजूद है। हालांकि दूसरी कंपनी में उसने अपने नाम का थोड़ा अलग फॉर्मेट इस्तेमाल किया था, लेकिन उसे खुद भी शक है कि सिस्टम और कर्मचारी डेटाबेस के एकीकरण के बाद यह अंतर उसे बचाने के लिए काफी नहीं होगा।

असली डर

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि दोनों कंपनियों का इंटीग्रेशन कितनी जल्दी शुरू होगा। कर्मचारी को अंदाजा नहीं था कि पूरी प्रक्रिया में कई महीने लगेंगे या सिस्टम और कर्मचारी रिकॉर्ड का एकीकरण शुरुआत में ही शुरू हो जाएगा। अगर दोनों कंपनियों के HR सिस्टम, डायरेक्टरी और डेटाबेस जल्दी आपस में जुड़ गए, तो एक ही व्यक्ति का दो जगह कर्मचारी के तौर पर मौजूद होना आसानी से सामने आ सकता है।

नौकरी छोड़ दे या जोखिम लेकर इंतजार करे?

यहीं से कर्मचारी की सबसे बड़ी दुविधा शुरू हुई। उसके सामने दो रास्ते थे दूसरी नौकरी से खुद इस्तीफा दे दे या फिर कुछ समय तक दोनों नौकरियां जारी रखकर हालात पर नजर रखे। पहला विकल्प उसे तुरंत संभावित जोखिम से बाहर निकाल सकता था। वहीं दूसरा विकल्प ज्यादा अनिश्चित था, लेकिन इसमें वह मर्जर की दिशा देखकर आगे फैसला लेने की उम्मीद कर रहा था।

Layoff हुआ तो Severance का भी सवाल

कर्मचारी के दिमाग में एक और संभावना आई। मर्जर के दौरान कंपनियां अक्सर restructuring करती हैं और कुछ पदों को खत्म भी किया जा सकते हैं। ऐसे में उसे लगा कि अगर वह इंतजार करता है और उसकी नौकरी restructuring में चली जाती है, तो शायद उसे severance मिल सके। हालांकि वह यह भी समझ रहा था कि इस रणनीति में बड़ा जोखिम है। अगर उससे पहले ही दोनों कंपनियों को उसके डबल एम्प्लॉयमेंट का पता चल गया, तो स्थिति उसके खिलाफ जा सकती है।

तनाव इतना बढ़ा कि सुबह 10 बजे ही खाने लगा Goldfish

अपनी पोस्ट के आखिर में टेक कर्मचारी ने अपनी स्थिति को मजाकिया अंदाज में बताते हुए कहा कि वह सुबह 10 बजे ही अपनी डेस्क पर बैठकर “stress eating goldfish” कर रहा था। उसने Reddit यूजर्स से पूछा कि ऐसी स्थिति में उसे क्या करना चाहिए। पोस्ट सामने आते ही लोगों ने इसे गंभीर सलाह के साथ-साथ मजाकिया नजरिए से भी लेना शुरू कर दिया।

इंटरनेट ने कहा

पोस्ट पर कई यूजर्स ने उसकी स्थिति पर मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने इसे “suffering from success” वाला मामला बताया। दूसरे ने मजाक करते हुए कहा कि वह दोनों कंपनियों की टीमों का परिचय कराने वाला व्यक्ति बन सकता है। किसी ने तो यहां तक सुझाव दे दिया कि वह अपना कानूनी नाम ही बदल ले। एक अन्य यूजर ने बेहद सीधे अंदाज में सलाह दी दूसरी नौकरी से इस्तीफा देकर भगवान से प्रार्थना करो। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि वे भी ऐसी ही “समस्या” झेलना चाहेंगे।

मर्जर ने खोल दिया Overemployment का सबसे बड़ा जोखिम

इस पूरे मामले की दिलचस्प बात यही है कि करीब 14 महीने तक दो रिमोट नौकरियां करने वाले इस कर्मचारी के लिए सबसे बड़ा खतरा काम का दबाव नहीं, बल्कि कंपनियों का आपस में जुड़ना बन गया। जब तक दोनों संस्थान अलग थे, अलग टेक स्टैक, अलग टीम और अलग सिस्टम ने उसकी दोहरी नौकरी को छिपाए रखा। लेकिन मर्जर के बाद वही अलग-अलग सिस्टम एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं। अब उसकी पूरी चिंता इसी बात पर टिकी है कि यह इंटीग्रेशन कितनी जल्दी होता है और दोनों कंपनियों के रिकॉर्ड कब एक-दूसरे के सामने आते हैं।

गुरुग्राम में बाढ़ जैसे हालात इस बीच कंपनी के मैनेजर ने पूछा- टाइम पर ऑफिस कौन आया? तो भड़के लोग कहने लगे ये बातें

गुरुग्राम में गुरुवार को हर तरफ पानी भरा हुआ रहा। इस बीच एक मैनेजर का अटेंडेंस अपडेट मांगने वाला स्क्रीनशॉट, जिसमें पूछा गया था कि “कौन समय पर ऑफिस पहुंचा है” — Reddit पर लोगों के गुस्से का कारण बन गया है। यह नाराजगी तब सामने आई है, जब अधिकारियों ने शुक्रवार तक ‘वर्क-फ्रॉम-होम’ को बढ़ा दिया है, क्योंकि IMD ने उस दिन और बारिश का अनुमान लगाया है।

Reddit पर एक कर्मचारी द्वारा शेयर किए गए इस वायरल स्क्रीनशॉट में मैनेजर स्टाफ से न सिर्फ यह कन्फर्म करने के लिए कह रहा है कि वे समय पर ऑफिस पहुंचे हैं या नहीं, बल्कि खास तौर पर यह भी पूछ रहा है कि क्या वे DLF ऑफिस या सिग्नेचर टावर्स समय पर पहुंचे हैं। साथ ही उसने यह भी लिखा है कि “समय की पाबंदी ही प्रोफेशनलिज्म को दिखाती है।”

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इस पोस्ट पर कैप्शन था “क्या बारिश के बावजूद आज किसी और को भी ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा?” हर किसी की तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं। हालांकि स्क्रीनशॉट की सच्चाई और मैनेजर की पहचान की पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।

रेडिट पर लोग क्या कह रहे हैं?

लोगों की प्रतिक्रियाएं व्यंग्य से लेकर गुस्से तक थीं। एक टॉप कमेंट में मैनेजर की ही बात उन्हीं पर लागू करते हुए लिखा गया- “समय की पाबंदी प्रोफेशनलिज्म दिखाती है… और सहानुभूति अच्छे मैनेजमेंट की निशानी है!!”कुछ लोगों ने बताया कि उन्होंने मंजूरी मिलने पर घर से काम (WFH) करने का विकल्प चुना, क्योंकि बहुत जल-जमाव था, भले ही उस समय बारिश नहीं हो रही थी।

एक जवाब में लिखा था कि उन्होंने बीमारी की छुट्टी ली थी और यह पूछने की “हिम्मत” पर सवाल उठाया गया कि कौन समय पर नहीं आया। एक अन्य यूजर ने लिखा कि “इंसानियत खत्म हो गई है,” और सवाल किया कि ऐसे मौसम में आने-जाने वाले कर्मचारियों के लिए कैब का इंतजाम क्यों नहीं किया गया।

एक और कमेंट करने वाले ने इस बात पर हैरानी जताई कि 2026 में भी ऐसा हो रहा है, “जबकि WFH के लिए पुलिस की एडवाइजरी जारी की गई है,” वहीं एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि वे लगातार तीन दिनों से घर से काम कर रहे थे, और पिछले साल घर पहुंचने में लगे 4.5 घंटे के सफर को याद किया।

‘मैं बहुत स्ट्रगल कर रहा हूं…’, आर्ट साइट से पढ़कर आए IIM के छात्र के लिए एडवांस स्टैटिक्स और मैथ बनी चुनौती

मैनेजमेंट की पढ़ाई करने के इच्छुक कई लोगों के लिए, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) में एडमिशन मिलना सालों की कड़ी मेहनत का नतीजा होता है। लेकिन एक स्टूडेंट के लिए, क्लासरूम के अंदर की असलियत उम्मीद से कहीं ज़्यादा मुश्किल साबित हुई है।

MBAIndia सबरेडिट पर शेयर की गई एक पोस्ट में, स्टूडेंट ने बताया कि वह अपने IIM प्रोग्राम को छोड़ने के बारे में गंभीरता से सोच रहा है क्योंकि उसे कोर्स के क्वांटिटेटिव (गणित-आधारित) हिस्सों को समझने में मुश्किल हो रही है।

स्टूडेंट ने बताया कि उसका बैकग्राउंड आर्ट्स का है और उसे गणित या स्टैटिस्टिक्स (सांख्यिकी) में कभी भी आसानी महसूस नहीं हुई। उसके अनुसार, क्लास में पढ़ाए जाने वाले एडवांस्ड स्टैटिस्टिक्स कॉन्सेप्ट्स को समझना बहुत मुश्किल हो गया है, और कई दूसरे सब्जेक्ट्स भी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहे हैं।

“मेरा बैकग्राउंड आर्ट्स का है और मैं गणित या स्टैटिस्टिक्स में कभी अच्छा नहीं रहा। वे एडवांस्ड स्टैटिस्टिक्स पढ़ा रहे हैं और मेरे लिए इसे समझना बहुत मुश्किल है। इतना ही नहीं, मुझे दूसरे सब्जेक्ट्स में भी दिक्कत हो रही है और इससे मेरा कॉन्फिडेंस बहुत कम हो रहा है। मेरी एंग्जायटी (चिंता) बढ़ गई है और मुझे लगता है कि मैं कुछ भी समझ या सीख नहीं पा रहा हूँ।”

जैसे-जैसे कोर्सवर्क मुश्किल होता गया, स्टूडेंट ने कहा कि उसे यह सोचने पर मजबूर होना पड़ा कि क्या उसे यह प्रोग्राम जारी रखना चाहिए या नहीं। उसने बताया कि वह टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) में ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट में मास्टर्स के लिए अप्लाई करने पर विचार कर रहा है। उसका मानना ​​है कि यह उसके लिए बेहतर रहेगा क्योंकि इसमें क्वांटिटेटिव सब्जेक्ट्स पर कम ज़ोर दिया जाता है और यह HR में उसके लंबे समय के करियर लक्ष्यों के ज़्यादा करीब है।

I am struggling at IIM academically

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MBAIndia

“मैं यहां से जाने और शायद TISS में HRM में MA के लिए फिर से कोशिश करने के बारे में सोच रहा हूं। वहां क्वांट्स (मैथ्स) कम है और मैं HRM में जाना चाहता हूं। लेकिन सच कहूं तो मैं यहां जारी नहीं रखना चाहता। मुझे सच में बहुत मुश्किल हो रही है और सच कहूं तो मुझे समझ नहीं आ रहा कि क्या करूं।”

हालांकि उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता उनके किसी भी फैसले का समर्थन करेंगे, लेकिन उन्होंने माना कि उन्हें इस बात की चिंता है कि इतने प्रतिष्ठित संस्थान में एडमिशन लेने के तुरंत बाद इसे छोड़ने पर वे उन्हें निराश करेंगे और रिश्तेदारों व समुदाय के लोगों के सवालों का सामना करना पड़ेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि अभी छोड़ने से आर्थिक नुकसान होगा क्योंकि ट्यूशन फीस अब वापस नहीं मिलेगी।

“अगर मैं वापस जाना चाहता हूं तो मेरे माता-पिता मेरा साथ देंगे, लेकिन मैं उन्हें निराश नहीं करना चाहता और मुझे समुदाय के उन सभी लोगों को भी जवाब देना होगा कि मैंने इसे क्यों छोड़ा जबकि मैंने अभी-अभी ज्वाइन किया था। वे सवाल पूछेंगे और इससे मेरे माता-पिता की प्रतिष्ठा पर असर पड़ेगा, लेकिन मैं सच में यहां जारी नहीं रखना चाहता। मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं है। साथ ही, अब कोई रिफंड मिलना भी संभव नहीं है, इसलिए यह आर्थिक नुकसान भी है।”

Reddit यूज़र्स ने उन्हें जल्दबाजी में कोई फैसला न लेने की सलाह दी

इस पोस्ट पर Reddit यूज़र्स की कई प्रतिक्रियाएं आईं, जिनमें से कई ने छात्र को छोड़ने का फैसला करने से पहले खुद को और समय देने के लिए प्रोत्साहित किया। एक कमेंट करने वाले ने, जो खुद नॉन-इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से थे, छात्र को याद दिलाया कि IIMs आमतौर पर छात्रों का मूल्यांकन केवल एब्सोल्यूट मार्क्स के आधार पर करने के बजाय रिलेटिव ग्रेडिंग सिस्टम का उपयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि विषयों का मूल्यांकन कई मूल्यांकन घटकों के माध्यम से किया जाता है, जिससे खराब प्रदर्शन से उबरना आसान हो जाता है।

“IIMs में रिलेटिव ग्रेडिंग होती है और हर विषय में कई घटक होते हैं। यह आपके लिए वरदान है। नॉन-इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से होने और चिंतित महसूस करने वाले व्यक्ति के तौर पर, मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि यह कोई बड़ी बात नहीं है। आप आसानी से मैनेज कर सकते हैं। अभी ड्रॉप आउट न करें।”

8वीं के छात्र ने पढ़ाई के बहाने लिया फोन और उड़ा दिए 42K, कहानी जानकर हर कोई रह गया हैरान

पढ़ाई के लिए बच्चों का माता-पिता का मोबाइल इस्तेमाल करना आम बात है। लेकिन एक परिवार के साथ ऐसा मामला सामने आया जिसने सभी को हैरान कर दिया। आठवीं कक्षा के छात्र ने पढ़ाई करने की बजाय Roblox गेम में 42 हजार रुपये से ज्यादा खर्च कर दिए। जब परिवार को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने सोशल मीडिया पर लोगों से मदद मांगी। सोशल मीडिया पर अब ये मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल व ऑनलाइन पेमेंट की सुरक्षा को लेकर अपनी राय दे रहे हैं। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला

सोशल मीडिया पर शेयर किया पोस्ट

ये मामला Reddit पर सामने आने के बाद तेजी से वायरल हो गया। इस घटना ने बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल, सेव किए गए पेमेंट विकल्प और इन-ऐप खरीदारी की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी। लड़के के भाई ने Reddit के r/RobloxSupport कम्युनिटी में “Brother spent ₹42K on Roblox without permission” टाइटल से पोस्ट शेयर किया। उसके अनुसार, छात्र ने पढ़ाई करने के बहाने अपने पिता का फोन लिया था। लेकिन पढ़ाई की जगह उसने Roblox गेम में लॉग इन कर Robux खरीदने पर हजारों रुपये खर्च कर दिए। परिवार को इस बात की जानकारी तब हुई, जब सभी ट्रांजैक्शन पूरे हो चुके थे।

खर्च कर दिए 42,000 रुपये

पोस्ट में यूजर ने लिखा, “मैं इस समय एक बड़ी परेशानी में हूं। कल मेरा छोटा भाई, जो आठवीं कक्षा में पढ़ता है, पढ़ाई के लिए पापा का फोन लेकर गया था। लेकिन उसने Roblox खेलना शुरू कर दिया और गलती से Robux खरीदने में करीब 42,000 रुपये खर्च कर दिए। अब वह लगभग सभी Robux इस्तेमाल कर चुका है और उसके अकाउंट में सिर्फ करीब 100 Robux ही बचे हैं।” परिवार के लिए ये सिर्फ गेम पर पैसे खर्च होने का मामला नहीं था, क्योंकि उस समय उन्हें पैसों की सख्त जरूरत थी।

भाई ने मांगी सलाह

इसी वजह से ये घटना उनके लिए और भी बड़ी परेशानी बन गई। इसके बाद छात्र के भाई ने सोशल मीडिया पर लोगों से सलाह मांगी कि क्या इन खरीदारी को रद्द कराया जा सकता है या खर्च हुए पैसे वापस मिलने की कोई संभावना है। अपनी पोस्ट में यूजर ने लिखा, “कृपया कोई मेरी मदद करें। क्या ऐसा कोई तरीका है, जिससे हमारे पैसे वापस मिल सकें? हमारे परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही अच्छी नहीं है। मेरे पापा के पास लोन चुकाने और मेरे भाई की स्कूल फीस भरने तक के पैसे नहीं हैं।” यूजर ने बताया कि इस अचानक हुए खर्च ने परिवार की आर्थिक परेशानी और बढ़ा दी है।

अपने दावे के समर्थन में यूजर ने खरीदारी का एक स्क्रीनशॉट भी शेयर किया। इसमें करीब 2,000 रुपये के कई ट्रांजैक्शन दिखाई दे रहे थे, जिनका कुल खर्च 42,647 रुपये बताया गया।

लोगों ने दी ये सलाह

पोस्ट वायरल होने के बाद Reddit पर लोगों ने कई तरह की सलाह दी। कुछ यूजर्स ने परिवार की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताई, जबकि कई लोगों ने कहा कि बच्चों की पहुंच वाले फोन में पेमेंट डिटेल्स सेव रखना जोखिम भरा हो सकता है। एक यूजर ने लिखा, “अपने बैंक से संपर्क करें और इन ट्रांजैक्शन के लिए चार्जबैक की मांग करें। हो सकता है आपके भाई का Roblox अकाउंट बंद हो जाए, लेकिन इससे उसे बिना अनुमति किसी और के पैसे इस्तेमाल न करने की सीख मिलेगी।”

एक अन्य यूज़र ने लिखा, “यह घटना बच्चों को पैसों की अहमियत समझाने का मौका है। साथ ही माता-पिता को भी अपने कार्ड या पेमेंट डिटेल्स ऐसे डिवाइस में सेव नहीं रखनी चाहिए, जिन्हें बच्चे आसानी से इस्तेमाल कर सकें।” वहीं एक और यूजर ने सलाह दी, “Roblox सपोर्ट से संपर्क करें। हालांकि, ऐसा करने पर आपके भाई का अकाउंट बैन भी हो सकता है।”

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

Viral Post: कंपनी हर क्लिक और कीबोर्ड के हर बटन दबाने पर रखती है नजर, सीक्रेट एक्सेल शीट में सब हो रहा रिकॉर्ड? कर्मचारी के दावे ने मचाया बवाल

सोशल मीडिया पर एक कंपनी की कथित कर्मचारी निगरानी से जुड़ी एक्सेल शीट तेजी से वायरल हो रही है। सोशल मीडिया पर किए पोस्ट में व्यक्ति ने दावा किया कि, इस शीट के जरिए कर्मचारियों के काम करने के घंटे, कंप्यूटर गतिविधि और माउस जिगलर जैसे टूल के इस्तेमाल तक पर नजर रखी जा रही थी। एक्स (पहले ट्विटर) पर एक यूजर ने इसका स्क्रीनशॉट शेयर किया। स्क्रीनशॉट सामने आने के बाद से वर्कप्लेस प्राइवेसी और कर्मचारियों की निगरानी को लेकर इंटरनेट पर नई बहस शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर ये तेजी से वायरल हो रहा है।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

X यूजर lolhith07 एक्स पर यूजर ने इस स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए लिखा, “किसी ने रेडिट पर बताया कि उसकी कंपनी इस तरह कर्मचारियों पर नजर रख रही है।” लेकिन, स्प्रेडशीट के असली होने की इंडिपेंडेंटली पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा, जिसके बाद कई लोगों ने कंपनियों की कर्मचारी निगरानी प्रणाली और वर्कप्लेस प्राइवेसी को लेकर सवाल उठाए।

शेयर किया स्क्रीनशॉट

वायरल स्क्रीनशॉट में “June 2026″ नाम की एक एक्सेल शीट दिखाई दे रही है। इसमें दावा किया गया है कि एक कर्मचारी की रोजाना की कामकाजी गतिविधियों को अलग-अलग मानकों के आधार पर रिकॉर्ड किया जा रहा था। शीट में प्रोडक्टिव घंटे, सिस्टम से दूर रहने का समय (AAFS), लंबे समय तक कीबोर्ड इस्तेमाल, जिगलर डिटेक्शन, संदिग्ध माउस मूवमेंट और MS Teams कॉल के गलत इस्तेमाल जैसे कई कॉलम शामिल दिखाई दे रहे हैं।”

प्रोडक्टिविटी की करते हैं निगरानी

वायरल स्प्रेडशीट में कर्मचारी की रोजाना की प्रोडक्टिविटी का भी रिकॉर्ड दिखाई दे रहा था। स्क्रीनशॉट के अनुसार, 10 जून को 7.93 घंटे, 11 जून को 7.01 घंटे और 12 जून को 7.32 घंटे की प्रोडक्टिव एक्टिविटी दर्ज की गई थी। इसके अलावा भी कई दिनों के आंकड़े शीट में मौजूद थे। इस पोस्ट पर चर्चा तब और बढ़ गई, जब रेडिट पर इसे शेयर करने वाले व्यक्ति ने बताया कि उनके मुताबिक यह डैशबोर्ड कर्मचारियों की किन-किन गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।

रेडिट पर शेयर किया पोस्ट

रेडिट पर पोस्ट शेयर करने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि, “जो लोग ऐसे डैशबोर्ड बनाते हैं, वे भी जानते हैं कि ये किसी कर्मचारी के असली काम का सही आकलन नहीं करते। मैनेजमेंट ज्ञान और सोच पर आधारित काम को नहीं माप सकता, इसलिए वह केवल कीबोर्ड की गतिविधि जैसी चीजों को ही मापता है। यहां ‘प्रोडक्टिव घंटे’ का मतलब सिर्फ अलग-अलग विंडो में होने वाले इनपुट इवेंट्स से है। अगर कोई अनुभवी कर्मचारी दो घंटे तक किसी बड़े आर्किटेक्चर या समाधान के बारे में सोच रहा हो, तो सिस्टम उसे भी निष्क्रिय मान लेता है। यह तरीका पूरी तरह गलत है।”

लोगों ने किया कमेंट

इस पोस्ट के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की खूब प्रतिक्रियाएं सामने आईं। एक यूजर ने लिखा, “कंपनियां ऐसे निगरानी वाले टूल्स पर करोड़ों-अरबों रुपये खर्च कर रही हैं, लेकिन कर्मचारियों की खुशी और उनका मनोबल बढ़ाने पर ध्यान नहीं देतीं। साल में कुछ बार पिज्जा खिलाकर उन्हें खुश करने की कोशिश की जाती है, जबकि असली जरूरत बेहतर कार्य माहौल बनाने की है।”

एक अन्य यूजर ने दावा किया कि वायरल स्प्रेडशीट में दिखाई गई निगरानी सिर्फ शुरुआती स्तर की है। उसने लिखा कि, “कई कंपनियों में इससे कहीं ज्यादा एडवांस मॉनिटरिंग की जाती है, जिसमें स्क्रीन रिकॉर्डिंग, ऑडियो रिकॉर्डिंग, कीस्ट्रोक लॉगिंग, लोकेशन हिस्ट्री, आईपी और नेटवर्क की जानकारी, इस्तेमाल किए गए एप्लिकेशन और देखी गई वेबसाइटों तक का रिकॉर्ड रखा जा सकता है।” वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, “कुछ डॉक्टर माउस जिगलर का इस्तेमाल इसलिए करते थे, ताकि मरीजों के रिकॉर्ड बार-बार लॉक न हों और सिस्टम उन्हें अपने आप लॉग आउट न कर दे। साथ ही उसने हैरानी जताई कि आखिर यह कैसे पता लगाया गया कि माउस जिगलर का इस्तेमाल किया जा रहा था।”

घर ढूंढ़ने निकला शख्स रह गया हैरान, गुरुग्राम में 3BHK का किराया जान उड़ जाएंगे होश

गुरुग्राम में घर किराए पर लेना अब पहले जितना आसान या किफायती नहीं रह गया है। शहर के कई इलाकों में किराए लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए मनपसंद बजट में घर ढूंढ़ना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। हाल ही में इसी मुद्दे ने तब लोगों का ध्यान खींचा, जब एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर अपना अनुभव साझा किया। घर की तलाश के दौरान उसे बार-बार एक ही सलाह मिली बजट बढ़ाइए। इसके बाद उसने सवाल उठाया कि क्या अब शहर में महंगा किराया ही नई सामान्य स्थिति बन चुका है। उसकी पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई और सैकड़ों लोगों ने अपने अनुभव साझा किए।

किसी ने बढ़ते किराए को जिम्मेदार ठहराया तो किसी ने ब्रोकरों के रवैये पर सवाल उठाए। यह चर्चा अब सिर्फ एक व्यक्ति की परेशानी नहीं, बल्कि गुरुग्राम में तेजी से बदलते रेंटल मार्केट और बढ़ती महंगाई पर बड़ी बहस का रूप ले चुकी है।

पोस्ट ने छेड़ दी बड़ी बहस

Reddit के r/gurgaon समुदाय में शेयर की गई पोस्ट ने देखते ही देखते लोगों का ध्यान खींच लिया। कई यूजर्स ने माना कि वे भी घर खोजते समय इसी तरह के अनुभव से गुजर चुके हैं। चर्चा धीरे-धीरे केवल किराए तक सीमित नहीं रही, बल्कि गुरुग्राम में तेजी से बढ़ती महंगाई और रहने की लागत पर भी सवाल उठने लगे।

हर घर के साथ जुड़ जाता है ‘बस ₹5,000 और’

पोस्ट लिखने वाले यूजर ने बताया कि गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड पर करीब 1,700 वर्गफुट का 3BHK फ्लैट ₹50,000 से अधिक में मिल रहा है, जबकि शहर के कई प्रमुख सेक्टरों में ₹60,000 या उससे ज्यादा किराया सामान्य हो चुका है। उनका कहना था कि हर बार ब्रोकर सिर्फ इतना कहते हैं, “बस ₹5,000 और बढ़ा दीजिए।”

किराया ही नहीं, सालाना खर्च भी बढ़ रहा

यूजर ने हिसाब लगाते हुए बताया कि ₹50,000 मासिक किराए का मतलब सालभर में ₹6 लाख से ज्यादा खर्च है। यदि मेंटेनेंस, बिजली और अन्य शुल्क जोड़ दिए जाएं, तो यह रकम आसानी से ₹7 लाख के पार पहुंच जाती है। ऐसे में मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।

क्या सैलरी इतनी तेजी से बढ़ी है?

यूजर ने सवाल उठाया कि जब वेतन में इतनी तेजी से बढ़ोतरी नहीं हुई, तो आखिर आम परिवार इतने महंगे किराए को कैसे वहन करें? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या लोग वास्तव में इतनी रकम चुका रहे हैं, या फिर मकान मालिकों और ब्रोकरों ने हर समस्या का समाधान सिर्फ “बजट बढ़ाइए” बना दिया है।

दूसरे यूजर्स ने भी साझा किए अपने अनुभव

पोस्ट पर कई लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। एक यूजर ने लिखा कि 2BHK की तलाश में जब उसने ₹45,000 का बजट बताया, तो ब्रोकर ने साफ कह दिया कि उसकी जरूरतें और बजट मेल नहीं खाते। वहीं एक अन्य यूजर ने बताया कि ऑनलाइन कई 3BHK फ्लैट ₹90,000 से लेकर ₹1.5 लाख प्रति माह तक में सूचीबद्ध हैं।

लोगों ने सुझाए दूसरे विकल्प

कई Reddit यूजर्स ने सलाह दी कि अगर बजट सीमित है, तो गुरुग्राम के प्रीमियम इलाकों से बाहर घर तलाशना बेहतर रहेगा। कुछ लोगों ने नोएडा जैसे एनसीआर शहरों का भी सुझाव दिया, जहां समान सुविधाओं वाले फ्लैट अपेक्षाकृत कम किराए में मिल सकते हैं।

बदलती सोच या बढ़ता दबाव?

यह चर्चा सिर्फ एक व्यक्ति के घर खोजने की कहानी नहीं रही, बल्कि इसने यह सवाल भी खड़ा कर दिया कि क्या गुरुग्राम में “अफोर्डेबल रेंट” की परिभाषा बदल चुकी है। बढ़ते किराए और स्थिर आय के बीच यह बहस अब शहर के हजारों किरायेदारों की साझा चिंता बनती दिखाई दे रही है।

एआई के आते ही लगी चपत! ₹2 लाख कमाने वाले कॉपीराइटर की इनकम पहुंची 40 हजार पर

आज के बदलते दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करना आम बात हो गई है। AI के बढ़ते इस्तेमाल से काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। वहीं एआई के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से कुछ लोगों को अपनी जॉब से भी निकाला जा रहा है। वहीं इसकी वजह से कई लोगों को अपने करियर को लेकर चिंतित हैं। कुछ लोग AI को नए मौके मानते हैं, जबकि कई लोगों के मुताबिक इससे उनके करियर पर बड़ा असर पड़ा है। वहीं इन दिनों सोशल मीडिया पर एक कॉपीराइटर का एआई की वजह से कम हुई सैलरी को लेकर किया गया पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

एक वायरल Reddit पोस्ट में एक कॉपीराइटर ने अपनी नौकरी और कमाई में आए बड़े बदलाव का अनुभव शेयर किया। कॉपीराइटर के मुताबिक, पहले वह हर महीने करीब 2 लाख रुपये कमाते थे, लेकिन अब उनकी आय घटकर लगभग 40 हजार रुपये रह गई है। उन्होंने दावा किया कि AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने उनके काम और करियर पर गहरा असर डाला।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

Reddit पर ये पोस्ट r/IndianWorkplace शेयर की गई थी। इस पोस्ट का टाइटल “2 लाख रुपये महीने से 40 हजार रुपये महीने की सैलरी पर पहुंचना” था। जिंदगी की सबसे बड़ी गिरावट।” पोस्ट में यूजर ने बताया कि फ्रीलांसिंग से शुरुआत करने के बाद उनकी कमाई 2 लाख रुपये महीने तक पहुंच गई थी, लेकिन कुछ ही हफ्तों में उनका करियर पूरी तरह बदल गया। यूजर ने लिखा, “करीब 8 साल पहले मैंने फ्रीलांसिंग शुरू की थी। 18 साल की उम्र में मुझे पहला फुल-टाइम रिमोट कॉन्ट्रैक्ट मिला और 22 साल की उम्र तक मैं घर से काम करते हुए हर महीने 2 लाख रुपये कमा रहा था।”

कम हो गई सैलरी

लेकिन,ये सफलता ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी। यूजर ने बताया कि साल 2026 उनके करियर के लिए सबसे मुश्किल दौर साबित हुआ। उन्होंने लिखा, “2026 मेरे लिए किसी बुरे सपने जैसा रहा। मेरी सभी नौकरियां और प्रोजेक्ट चले गए और सिर्फ दो हफ्तों के भीतर मेरी छह अंकों की मासिक कमाई घटकर लगभग शून्य हो गई।” यूजर के अनुसार, वर्कप्लेस पर AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने उनके करियर पर सबसे ज्यादा असर डाला। उन्होंने दावा किया कि इसी बदलाव की वजह से उनकी नौकरी भी चली गई।

एआई की वजह से गई नौकरी

पोस्ट में उन्होंने लिखा, “मैं एक लीड कॉपीराइटर था। मैंने बिल्कुल शुरुआत से अपना करियर बनाया। कॉलेज बीच में छोड़ दिया था और अपनी पूरी जिंदगी अपनी स्किल्स को बेहतर बनाने में लगा दी। लेकिन फिर AI का दौर आ गया। मेरा मानना है कि मुझे इसलिए नौकरी से निकाल दिया गया क्योंकि कंपनी ने AI को ट्रेन करने और अपने स्थायी कर्मचारियों को बनाए रखने का फैसला किया।”

2 लाख से 40 हजार हुई सैलरी

इनकम के एक रेगुलर सोर्स के लिए यूजर ने हैदराबाद की एक मार्केटिंग एजेंसी जॉइन की। जो तेलंगाना टूरिज्म के प्रचार से जुड़े काम संभालती है। उन्होंने बताया कि ज्यादा जिम्मेदारियां संभालने के बावजूद उनकी सैलरी पहले की तुलना में काफी कम है। यूजर ने बताया कि नई नौकरी में सबसे बड़ा झटका उन्हें सैलरी को लेकर लगा। उन्होंने लिखा, “मुझे सबसे ज्यादा हैरानी सैलरी देखकर हुई। ऐसा लगता है कि कई कंपनियां यहां लोगों के टैलेंट का पूरा फायदा उठाना चाहती हैं। पहले जिस काम के लिए मुझे 2 लाख रुपये महीने मिलते थे, अब उससे भी बड़ी जिम्मेदारी के लिए सिर्फ 40 हजार रुपये मिल रहे हैं। यह बात मुझे हर दिन परेशान करती है।”

लोगों में नहीं है उत्साह

यूजर ने कहा कि कम सैलरी के साथ-साथ दफ्तर का माहौल भी उन्हें निराश करता है, क्योंकि वहां लोगों में काम के प्रति जुनून और रचनात्मक सोच की कमी है। उन्होंने लिखा, “पैसों की समस्या के अलावा मुझे सबसे ज्यादा इस बात का दुख है कि मेरे आसपास क्रिएटिव माहौल नहीं है। ज्यादातर लोग सिर्फ काम पूरा करने के लिए काम करते हैं। उनमें न उत्साह दिखता है और न ही जुनून। इससे मेरा भी काम करने का मन कम हो जाता है, जबकि मैं अकेले कई लोगों का काम संभाल रहा हूं।”

लोगों ने किया कमेंट

यूजर ने Reddit पर लोगों से सलाह मांगी, जिसके बाद कई यूजर्स ने उनका हौसला बढ़ाया और नई स्किल्स सीखने व बेहतर अवसर तलाशने की सलाह दी। एक यूजर ने लिखा, “हममें से ज्यादातर लोग सुरक्षित रास्ता चुनते हैं और जोखिम लेने से बचते हैं। आपने जोखिम लिया, सही समय पर सफलता भी मिली, लेकिन हर दौर हमेशा एक जैसा नहीं रहता। हर पीढ़ी में बड़े बदलाव आते हैं और इस बार AI ऐसा ही बदलाव लेकर आया है।” वहीं एक और यूजर ने सलाह दी, “अपनी स्किल्स को लगातार बेहतर बनाइए, नए लोगों से जुड़िए और दोबारा फ्रीलांसिंग शुरू कीजिए। इससे आपको बेहतर मौके मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।”

पहली डेट पर लड़की ने मंगाया इतना सब कि 20,500 रुपये का बिल आया, फिर जो हुआ उसने युवक का दिल तोड़ दिया

दिल्ली के एक 23 वर्षीय युवक की पहली डेट का अनुभव इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। डेटिंग ऐप के जरिए हुई इस मुलाकात को लेकर युवक ने Reddit पर अपनी आपबीती साझा की, जिसके बाद इंटरनेट पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कई यूजर्स ने इसे एक महंगा सबक बताया, जबकि कुछ ने डेटिंग एटीकेट और बिल शेयर करने की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए। युवक का कहना है कि उसे सबसे ज्यादा अफसोस पैसों का नहीं, बल्कि पूरी स्थिति के तरीके का हुआ। देखते ही देखते यह पोस्ट वायरल हो गई और ऑनलाइन डेटिंग, पहली मुलाकात और खर्च को लेकर नई बहस शुरू हो गई।

कैफे समझकर गया, पहुंच गया पब

युवक के मुताबिक, वह पहले कभी किसी रिलेशनशिप में नहीं रहा था और लड़कियों से भी ज्यादा बातचीत नहीं हुई थी। उसे लगा था कि मुलाकात किसी कैफे में होगी, लेकिन उसकी डेट उसे सीधे एक पब ले गई। उसने बताया कि वह न शराब पीता है और न ही स्मोकिंग करता है।

ऑर्डर पर ऑर्डर, बिल पहुंचा ₹20,500

पोस्ट के अनुसार, लड़की ने कई बोतल शैंपेन, दो हुक्के और खाने का ऑर्डर दिया। शाम खत्म होने पर बिल ₹20,500 आया। युवक ने बताया कि यह रकम उसकी मासिक सैलरी का लगभग आधा हिस्सा थी, जिसे देखकर वह हैरान रह गया।

‘पैसे नहीं, इस बात का ज्यादा अफसोस हुआ’

युवक ने लिखा कि उसे सबसे ज्यादा दुख पैसों का नहीं हुआ। असली निराशा इस बात से हुई कि उसकी डेट ने बिल शेयर करने की कोई बात नहीं की और न ही खर्च को लेकर कोई सवाल पूछा। उसने यह भी बताया कि बिल आने के समय लड़की वॉशरूम चली गई थी, लेकिन उसने उसके इरादों पर कोई आरोप नहीं लगाया।

‘शायद इत्तेफाक था, शायद नहीं’

युवक ने अपनी पोस्ट में साफ लिखा कि वह किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहता। उसके मुताबिक, लड़की का बिल आने के समय वॉशरूम जाना महज संयोग भी हो सकता है, इसलिए वह बिना सबूत उसके इरादों पर सवाल नहीं उठाना चाहता।

Reddit पर लोगों ने कहा- ‘महंगा सबक मिला’

पोस्ट वायरल होने के बाद Reddit यूजर्स ने युवक के अनुभव पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने इसे धोखाधड़ी जैसा मामला बताया, जबकि कई यूजर्स ने कहा कि यह उसके लिए एक महंगा लेकिन जरूरी सबक था। वहीं कुछ ने उसकी मासूमियत पर भी मजाकिया टिप्पणियां कीं।

डेटिंग एटीकेट पर फिर शुरू हुई बहस

इस घटना ने सोशल मीडिया पर पहली डेट में बिल कौन चुकाए, खर्च पहले तय होना चाहिए या नहीं और ऑनलाइन डेटिंग के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे मुद्दों पर नई चर्चा शुरू कर दी।

इंटरव्यू में पूछा गया एक सवाल, उम्मीदवार तुरंत उठा और छोड़ दी नौकरी; इंटरनेट पर छिड़ी बहस

इंटरव्यू में पूछा गया एक सवाल, उम्मीदवार तुरंत उठा और छोड़ दी नौकरी; इंटरनेट पर छिड़ी बहस

एक नौकरी इंटरव्यू के दौरान उम्मीदवार के अचानक उठाए गए कदम ने सोशल मीडिया पर नई बहस शुरू कर दी है। मामला तब चर्चा में आया, जब एक उम्मीदवार ने कंपनी के हायरिंग मैनेजर द्वारा अनपेड ओवरटाइम को लेकर पूछे गए सवाल के बाद इंटरव्यू छोड़ने का फैसला किया। उम्मीदवार का कहना था कि वह इस अवसर को लेकर काफी उत्साहित था, लेकिन बातचीत के दौरान सामने आई कुछ बातें उसकी उम्मीदों से अलग थीं। इस घटना के बाद लोगों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या उम्मीदवार ने सही फैसला लिया या उसे पहले पूरी जानकारी जुटानी चाहिए थी।

सोशल मीडिया यूजर्स ने वर्क कल्चर, कर्मचारियों के अधिकार और ऑफिस में अतिरिक्त काम को लेकर अपने अनुभव और राय साझा की। देखते ही देखते यह मामला ऑनलाइन बहस का विषय बन गया।

Reddit से शुरू हुई कहानी, X पर हुई वायरल

यह मामला सबसे पहले Reddit पर सामने आया, जहां कर्मचारी ने अपने अनुभव को विस्तार से साझा किया। बाद में इसे X अकाउंट @ConsoomerLs ने शेयर किया, जिसके बाद पोस्ट तेजी से वायरल हो गई। हजारों यूजर्स ने इस पर अपनी राय रखी और वर्क कल्चर को लेकर बहस शुरू हो गई।

अच्छी नौकरी की उम्मीद लेकर पहुंचा था उम्मीदवार

उम्मीदवार के मुताबिक, वह इस जॉब अवसर को लेकर काफी उत्साहित था। कंपनी की ऑनलाइन रेटिंग अच्छी थी, पद आकर्षक लग रहा था और सैलरी भी बेहतर थी। लेकिन इंटरव्यू शुरू होते ही बातचीत ने ऐसा मोड़ लिया जिसकी उसने उम्मीद नहीं की थी।

‘आप अनपेड ओवरटाइम कैसे संभालेंगे?’ सवाल ने चौंकाया

उम्मीदवार ने बताया कि हायरिंग मैनेजर ने शुरुआत में ही पूछा, “आप बिना भुगतान वाले ओवरटाइम को कैसे संभालेंगे?” पहले उसे लगा कि शायद यह मजाक है, लेकिन जब सवाल गंभीर निकला तो उसने कंपनी की नीति के बारे में जानकारी मांगी।

कंपनी के जवाब से हुआ असहमत

उम्मीदवार के अनुसार, मैनेजर ने कहा कि कर्मचारियों से जरूरत के हिसाब से काम पूरा होने तक रुकने की उम्मीद की जाती है। कंपनी अतिरिक्त घंटों का हिसाब नहीं रखती क्योंकि सभी कर्मचारी अपने काम को लेकर “जुनूनी” हैं। यह सुनकर उम्मीदवार को लगा कि यह नौकरी उसकी उम्मीदों से मेल नहीं खाती।

इंटरव्यू छोड़ा और बाहर निकल गया

उम्मीदवार ने बिना ज्यादा समय गंवाए इंटरव्यू खत्म करने का फैसला लिया। उसने इंटरव्यू लेने वाले को धन्यवाद दिया और कहा कि यह भूमिका उसके लिए सही नहीं है। इसके बाद वह वहां से चला गया। बाद में उसने खुद भी सवाल उठाया कि क्या उसका फैसला सही था या उसे और जानकारी लेनी चाहिए थी।

सोशल मीडिया पर बंटे यूजर्स के विचार

पोस्ट वायरल होने के बाद कई लोगों ने उम्मीदवार के फैसले का समर्थन किया। कुछ यूजर्स ने कहा कि बिना भुगतान के काम लेना गलत है और ऐसी कंपनी से दूरी बनाना बेहतर है। वहीं कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि उम्मीदवार को पहले पूरा इंटरव्यू देना चाहिए था और बाद में फैसला लेना चाहिए था।

वर्क-लाइफ बैलेंस और कॉर्पोरेट कल्चर पर बहस

इस घटना ने एक बार फिर वर्क-लाइफ बैलेंस, कर्मचारियों के अधिकार और कंपनियों की कार्य संस्कृति पर चर्चा तेज कर दी है। कई यूजर्स का मानना है कि नौकरी सिर्फ सैलरी नहीं, बल्कि सम्मान और उचित कार्य परिस्थितियों से भी जुड़ी होती है।

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