रिटायरमेंट के बाद अगर आ जाए ₹40 लाख का मेडिकल खर्च तो क्या करेंगे? शख्स ने शेयर किया अनुभव

एक बुजुर्ग पड़ोसी की हार्ट सर्जरी पर करीब 40 लाख रुपये खर्च होने की बात ने एक शख्स को अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग पर दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया। अब तक उसे लगता था कि उसने भविष्य के लिए पर्याप्त तैयारी कर ली है, लेकिन इस घटना ने उसे अचानक आने वाले मेडिकल खर्च की चिंता से रूबरू करा दिया। उम्र बढ़ने के साथ इलाज और दवाइयों का खर्च कितना बढ़ सकता है, इसका अंदाजा इस मामले से लगा। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर रिटायरमेंट के बाद अचानक लाखों रुपये के इलाज की जरूरत पड़ जाए, तो क्या हमारी बचत उसका बोझ उठा पाएगी?

80 की उम्र में आई बड़ी मेडिकल जरूरत

शख्स ने Reddit पर बताया कि उसके पड़ोसी की उम्र 80 साल से ज्यादा है और उन्हें हार्ट सर्जरी की जरूरत पड़ी। डॉक्टरों ने इलाज के दो विकल्प बताए थे। पहला पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी का था, जिसमें जोखिम ज्यादा था। दूसरा कम इनवेसिव और अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प था, लेकिन इसकी कीमत काफी ज्यादा थी। उम्र को देखते हुए उनके लिए दूसरा विकल्प चुना गया। पड़ोसी का बेटा विदेश में रहता है और आर्थिक रूप से मदद करने की स्थिति में था, इसलिए महंगा इलाज संभव हो पाया।

40 लाख का खर्च देखकर हिल गई अपनी प्लानिंग

इस घटना ने उस व्यक्ति को सबसे ज्यादा इसलिए परेशान किया क्योंकि 40 लाख रुपये उसके अनुमानित सालाना खर्च से करीब दोगुना था। उसने सोचा कि अगर रिटायरमेंट के बाद अचानक इतना बड़ा मेडिकल बिल आ जाए, तो क्या उसकी बचत उसका सामना कर पाएगी? उसके मुताबिक, उसने अब तक अपनी रिटायरमेंट की तैयारी को काफी हद तक व्यवस्थित समझा था, लेकिन इस घटना ने उसे एक नया नजरिया दिया।

क्या सिर्फ सेविंग्स काफी हैं?

इस चर्चा में एक बड़ा सवाल यह उठा कि बुढ़ापे में मेडिकल खर्च के लिए कितनी रकम अलग रखनी चाहिए। कई लोगों ने सुझाव दिया कि रिटायरमेंट फंड के अलावा हेल्थ इंश्योरेंस और अलग मेडिकल इमरजेंसी फंड रखना भी जरूरी हो सकता है। कुछ यूजर्स ने बड़ी हेल्थ इंश्योरेंस कवर की जरूरत पर जोर दिया, जबकि कुछ ने मेडिकल खर्च के लिए अलग से बड़ी रकम बचाने की बात कही।

लोगों ने दी अलग-अलग सलाह

Reddit पर चर्चा के दौरान एक यूजर ने सुझाव दिया कि उम्र बढ़ने के साथ पर्याप्त हेल्थ कवर होना चाहिए। दूसरे ने कहा कि मेडिकल जरूरतों के लिए अलग फंड बनाना समझदारी हो सकती है, ताकि अचानक आने वाला बड़ा खर्च रोजमर्रा की रिटायरमेंट जरूरतों को प्रभावित न करे। वहीं, कुछ लोगों ने इलाज के खर्च को कम करने के लिए अच्छी सेहत बनाए रखने और नियमित शारीरिक गतिविधि पर भी जोर दिया।

My neighbour who is in his 80s just had a heart surgery that cost around 40Lakhs. How do you even plan for something like this?

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रिटायरमेंट प्लानिंग का एक और पहलू सामने आया

इस पूरी चर्चा ने ये सवाल जरूर खड़ा किया कि रिटायरमेंट की तैयारी केवल घर चलाने, यात्रा या रोजमर्रा के खर्च तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें भी बढ़ सकती हैं और उनका खर्च काफी बड़ा हो सकता है।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

Video: 5,700 पौधों से भर दिया पूरा घर, इस पाकिस्तानी शख्स ने आखिर क्यों उठाया ये कदम?

Gurugram Couple Monthly Expenses: 1.2 लाख रुपये का खर्च, जानें किराए से लेकर खाने तक कहां-कहां जाता है पैसा

गुरुग्राम में रहने वाले एक शादीशुदा कपल ने अगस्त महीने के अपने खर्च का हिसाब सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद यह पोस्ट चर्चा में आ गई। इस कपल ने बताया कि दो लोगों पर एक महीने में करीब 1.2 लाख रुपये खर्च हुए। उनकी शेयर की गई जानकारी में घर का किराया, राशन, घरेलू मदद, ट्रांसपोर्ट, बाहर खाना और ऑनलाइन ऑर्डर जैसी रोजमर्रा की जरूरतें शामिल हैं। हालांकि, लोगों की दिलचस्पी सिर्फ 1.2 लाख रुपये के आंकड़े में नहीं रही। सोशल मीडिया यूजर्स यह जानने को उत्सुक दिखे कि गुरुग्राम जैसे महंगे शहर में आखिर एक कपल का सामान्य जीवन जीने का मासिक बजट कितना हो सकता है।

खास तौर पर 3 BHK का किराया और घरेलू मदद के खर्च ने लोगों का ध्यान खींचा। कुछ यूजर्स ने बजट को अच्छी तरह मैनेज किया हुआ बताया, जबकि कुछ ने खर्च के अलग-अलग हिस्सों पर सवाल भी उठाए।

सबसे बड़ा खर्च घर का किराया

कपल के बजट में सबसे बड़ा हिस्सा घर का है। मोह‍ित और ज्योत्सना ने बताया कि वो गुरुग्राम में 3 BHK फ्लैट के लिए किराए और मेंटेनेंस पर करीब 36 हजार रुपये खर्च करते हैं। इसके अलावा घर के कामों में मदद करने वाली मेड को हर महीने 6 हजार रुपये दिए जाते हैं।

राशन पर 25 हजार, यानी रसोई भी नहीं है सस्ती

महीने के खर्च में अगली बड़ी रकम राशन और घर की जरूरतों पर जाती है। कपल के मुताबिक, किराने और घरेलू सामान पर करीब 25 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं। यानी घर चलाने का खर्च ही उनके बजट का बड़ा हिस्सा खा जाता है।

इंटरनेट से लेकर OTT तक, छोटे खर्च मिलकर बड़ा बिल

मोबाइल और वाई-फाई के बिल पर करीब 3,500 रुपये खर्च होते हैं। वहीं OTT और म्यूजिक सब्सक्रिप्शन के लिए लगभग 2 हजार रुपये अलग से जाते हैं। देखने में ये रकम छोटी लग सकती है, लेकिन महीने के अंत तक ऐसे कई छोटे खर्च बजट को काफी बढ़ा देते हैं।

कार नहीं फिर भी 5 हजार रुपये ट्रांसपोर्ट पर

कपल के पास अपनी कार नहीं है। इसके बावजूद दिल्ली-गुरुग्राम आने-जाने और दूसरे कामों के लिए बाइक के पेट्रोल और कैब पर करीब 5 हजार रुपये खर्च होते हैं। कार न होने से खर्च कुछ हद तक नियंत्रित रहता है, लेकिन रोजमर्रा की आवाजाही का बिल फिर भी जुड़ता रहता है।

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वीकेंड का खाना भी बजट में बड़ा हिस्सा

इस कपल के लिए वीकेंड का मतलब घर से बाहर कॉफी और खाना भी है। इसके लिए करीब 15 हजार रुपये महीने खर्च होते हैं। वहीं ऑनलाइन खाना मंगाने पर लगभग 3 हजार रुपये और चले जाते हैं।

असली सवाल रकम नहीं, लोगों की अपनी जिंदगी है

कपल ने अपना खर्च साझा करते हुए पूछा कि गुरुग्राम में दो लोगों के लिए 1.2 लाख रुपये का मासिक खर्च ज्यादा है या उचित? इसके बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। किसी ने बजट को अच्छी तरह मैनेज किया हुआ बताया, तो कुछ लोग 3 BHK के 36 हजार रुपये किराए को लेकर हैरान दिखे।

मेड की 6 हजार रुपये की फीस भी चर्चा का विषय बनी। एक यूजर ने सवाल किया कि खाना बनाने, सफाई और किचन के काम के लिए इतनी कम रकम में घरेलू मदद कैसे मिल रही है। वहीं कुछ लोगों ने कपल से उनके रहने वाले सेक्टर के बारे में भी पूछा, क्योंकि उन्हें 3 BHK का किराया काफी कम लगा।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

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अमेरिकी कंपनी ने 5 मिनट की Google Meet में पूरी भारतीय टीम को जॉब से निकाला? 80 कर्मचारियों की नौकरी जाने का दावा

Job loss News: पिछले कुछ समय से अचानक होने वाली छंटनी (Layoffs) के मामले लगातार कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा रहे हैं। इसी बीच Reddit पर एक कर्मचारी की पोस्ट चर्चा में है। इसमें कर्मचारी ने दावा किया है कि अमेरिका की एक फाइनेंशियल कंपनी ने महज 5 मिनट की Google Meet कॉल के दौरान अपनी पूरी भारतीय कस्टमर सर्विस टीम को नौकरी से निकाल दिया। उन्होंने बताया कि 80 कर्मचारियों के लिए एक आम शिफ्ट की तरह शुरू हुआ दिन एक पांच मिनट की कॉल के साथ खत्म हुआ, जिसने सब कुछ बदल दिया।

आरोप है कि फाइनेंशियल कंपनी के लिए काम करने वाली भारतीय कस्टमर सर्विस टीम को उनकी शिफ्ट के दौरान बताया गया कि उनकी नौकरी खत्म की जा रही है। इससे कर्मचारी हैरान और परेशान हो गए कि अब आगे क्या होगा। यह घटना ओरेकल और एडिडास जैसी जानी-मानी कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर की जा रही छंटनी के बीच हुई है।

कर्मचारी ने Reddit के r/IndianWorkplace फोरम पर अपना अनुभव शेयर किया है। पोस्ट का शीर्षक ‘Laid off over a Google Meet’ था। पोस्ट में कर्मचारी ने बताया कि एक दिन पहले तक वह अमेरिकी बैंक की कस्टमर सपोर्ट टीम का हिस्सा था, लेकिन अचानक पूरी टीम को नौकरी से निकाल दिया गया।

शाम की शिफ्ट के दौरान आया Google Meet का बुलावा

Reddit पोस्ट के मुताबिक, कंपनी ने ऑपरेशनल कारणों का हवाला देते हुए कर्मचारियों को उस दिन घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करने के लिए कहा था। कर्मचारी शाम 6:30 बजे की शिफ्ट में काम कर रहा था। उसके मुताबिक, रात करीब 9:30 बजे अचानक सभी कर्मचारियों को Google Meet पर बुलाया गया। कर्मचारी का दावा है कि मीटिंग में बताया गया कि ‘पूरी भारतीय कस्टमर सर्विस टीम’ को नौकरी से हटा दिया गया है।

’80 कर्मचारी, सभी चले गए… 80 परिवार प्रभावित’

कर्मचारी ने छंटनी के पैमाने को बताते हुए लिखा कि टीम में कुल 80 कर्मचारी थे। सभी की नौकरी एक झटके में चली गई। उसने पोस्ट में कहा कि महज पांच मिनट की कॉल से 80 परिवार प्रभावित हुए हैं। कर्मचारी ने नौकरी जाने के बाद नई नौकरी मिलने को लेकर भी चिंता जताई। उसने कहा कि इस घटना ने उसे कॉरपोरेट नौकरियों की अस्थिरता का एहसास कराया है।

कंपनी ने क्या वजह बताई?

पोस्ट पर एक Reddit यूजर ने पूछा कि कंपनी ने इतने बड़े फैसले के पीछे क्या कारण बताया? इसके जवाब में कर्मचारी ने दावा किया कि कंपनी का कहना था कि भारतीय टीम से अपेक्षित आउटपुट नहीं मिल रहा था। हालांकि, कर्मचारी ने इस कारण पर असहमति जताई। उसका आरोप था कि अमेरिकी टीम में भी एट्रिशन और अन्य समस्याएं थीं। जबकि भारतीय कर्मचारी नौकरी की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त मेहनत करते थे।

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सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

पोस्ट सामने आने के बाद कई यूजर्स ने कर्मचारी के प्रति सहानुभूति जताई। एक यूजर ने लिखा, “यह बेहद दुखद है और दिल तोड़ने वाला है।” वहीं, कुछ लोगों ने कंपनी की छंटनी प्रक्रिया, कर्मचारियों को मिलने वाले सेवरेंस और अचानक नौकरी जाने की स्थिति में सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब कॉरपोरेट सेक्टर में अचानक होने वाली छंटनी को लेकर कर्मचारियों के बीच नौकरी की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है।

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(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर शेयर किए गए यूजर-जनरेटेड कंटेंट पर आधारित है। Moneycontrol हिंदी ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही इन दावों का समर्थन किया है।)

पेट पर नहीं रहा कंट्रोल, कपड़े हुए गंदे… फिर भी रेस जीत गईं एथलीट, स्वच्छता पर उठे सवाल

ऑस्ट्रेलिया की मशहूर HYROX एथलीट Joanna Wietrzyk ने बीजिंग में महिलाओं की प्रोफेशनल कैटेगरी जीतकर शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 1 घंटे 1 मिनट 23 सेकंड में रेस पूरी की और पहला स्थान हासिल किया। लेकिन उनकी जीत की चर्चा उनकी परफॉर्मेंस से ज्यादा एक ऐसी घटना को लेकर होने लगी, जिसने खेल जगत और सोशल मीडिया दोनों में बहस छेड़ दी। रेस के दौरान Joanna को अचानक पेट से जुड़ी परेशानी हुई और वह अपने शरीर पर नियंत्रण नहीं रख पाईं। इसके बावजूद उन्होंने रेस नहीं छोड़ी और मुश्किल एक्सरसाइज पूरी करते हुए फिनिश लाइन तक पहुंचीं। बाद में सामने आए वीडियो और तस्वीरों में उनके कपड़ों और पैरों पर गंदगी दिखाई दी।

आखिर क्यों उठे सवाल?

HYROX सिर्फ दौड़ने की प्रतियोगिता नहीं है। इसमें रनिंग के साथ स्लेज पुश, रोइंग, बर्पीज, लंजेस और वॉल बॉल जैसी कठिन एक्सरसाइज करनी होती हैं। कई जगह प्रतियोगियों को एक ही रास्ते और उपकरणों का इस्तेमाल करना पड़ता है। यही वजह है कि Joanna के रेस जारी रखने पर सवाल उठने लगे। आलोचकों का कहना था कि जैसे ही घटना सामने आई, आयोजकों को उन्हें रोक देना चाहिए था। उनका तर्क था कि इससे दूसरे खिलाड़ियों की स्वच्छता और स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता था।

सोशल मीडिया पर बंटी लोगों की राय

घटना की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कुछ लोगों ने इसे साफ-सफाई के लिहाज से बेहद गंभीर मामला बताया। उनका कहना था कि प्रतियोगिता में दूसरे एथलीट भी उसी जगह और उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे थे। हालांकि, कई लोगों ने Joanna का बचाव भी किया। उनका कहना था कि यह कोई जानबूझकर किया गया काम नहीं था, बल्कि बेहद कठिन शारीरिक मेहनत के दौरान हुई एक मेडिकल समस्या थी। ऐसे में एथलीट को शर्मिंदा करने के बजाय उसकी स्थिति को समझना चाहिए।

आयोजकों ने बताया कैसे की गई सफाई

विवाद बढ़ने के बाद HYROX China ने बताया कि प्रभावित इलाकों को तुरंत बंद और अलग कर दिया गया था। दूषित उपकरणों को हटा दिया गया और कचरे को स्थानीय नियमों के मुताबिक निपटाया गया। इसके अलावा पूरे इलाके में डिसइंफेक्शन किया गया। आयोजकों ने यह भी कहा कि इवेंट खत्म होने के बाद संबंधित फर्श को बदल दिया जाएगा। हालांकि, आलोचकों का सवाल बना रहा कि अगर समस्या रेस के दौरान ही सामने आ गई थी तो उसी समय प्रतियोगिता को रोकने या एथलीट को हटाने की कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

HYROX ने माना, नियमों में सामने आई कमी

मामले पर HYROX World ने भी बयान जारी किया। संगठन ने कहा कि मेडिकल इमरजेंसी और बायोकंटामिनेंट से जुड़ी प्रक्रियाएं पहले से मौजूद हैं, लेकिन बीजिंग की घटना में एलीट प्रतियोगिता और आम प्रतिभागियों वाली रेस के नियमों को लागू करने को लेकर कुछ अस्पष्टता सामने आई। संगठन ने माना कि खेल के बढ़ने के साथ नई और जटिल परिस्थितियां सामने आ रही हैं और नियमों को लगातार बेहतर करने की जरूरत है।

Joanna ने अस्पताल से दिया जवाब

विवाद के बीच Joanna ने अस्पताल के बिस्तर से सोशल मीडिया पर लिखा, “Go hard or go home… a win is a win.” उनके इस बयान पर भी मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं। समर्थकों ने उनके जज्बे की तारीफ की, जबकि आलोचकों ने कहा कि किसी भी जीत से पहले एथलीट और बाकी खिलाड़ियों की सुरक्षा व स्वच्छता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

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वर्क फ्रॉम होम ने कर्मचारियों को सुविधा और आजादी जरूर दी, लेकिन अब यही व्यवस्था निगरानी और प्राइवेसी को लेकर नई बहस खड़ी कर रही है। अमेरिकी अरबपति वकील जॉन मॉर्गन के एक बयान ने इस बहस को और गर्म कर दिया है। उनका दावा है कि कंपनी ने कर्मचारियों के लैपटॉप में कैमरा मॉनिटरिंग शुरू की तो महज सात दिनों में 23 कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ दी।

मॉर्गन ने यह बात ‘The Iced Coffee Hour’ पॉडकास्ट में कही, जहां उन्होंने रिमोट वर्क, कर्मचारियों की जवाबदेही और ऑफिस लौटने को लेकर अपने अनुभव साझा किए।

ऑफिस आने से इनकार किया तो मिला दूसरा विकल्प

मॉर्गन के मुताबिक, कोरोना महामारी के बाद जब कर्मचारियों को वापस ऑफिस बुलाने की कोशिश की गई, तो कई लोगों ने इसका विरोध किया। ऐसे कर्मचारियों को घर से काम जारी रखने का विकल्प दिया गया। लेकिन इस सुविधा के साथ एक शर्त भी रखी गई कर्मचारियों के काम की कड़ी निगरानी की जाएगी। मॉर्गन ने दावा किया कि इसके लिए कर्मचारियों के वर्क लैपटॉप में कैमरे लगाए गए थे।

उनका कहना था कि कंपनी कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दे रही थी, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहती थी कि काम के दौरान कर्मचारी वास्तव में अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं।

7 दिन में 23 इस्तीफे, मालिक ने निकाला अलग मतलब

मॉर्गन ने दावा किया कि निगरानी की व्यवस्था लागू होने के बाद पहले ही हफ्ते में 23 कर्मचारियों ने इस्तीफा दे दिया। उनके मुताबिक, इन इस्तीफों को सिर्फ वर्क फ्रॉम होम की इच्छा के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इसे कर्मचारियों की निगरानी और जवाबदेही से बचने की इच्छा से जोड़ते हुए कहा कि कुछ लोग घर से काम नहीं, बल्कि बिना निगरानी के काम करना चाहते थे। यहीं से उनकी टिप्पणी पर विवाद शुरू हो गया।

क्या कर्मचारी को हर वक्त निगरानी में रखना सही है?

मॉर्गन के बयान ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है अगर कोई कर्मचारी घर से अपना काम समय पर और अच्छी तरह पूरा कर रहा है, तो क्या कंपनी को उसके लैपटॉप कैमरे के जरिए उस पर नजर रखने का अधिकार होना चाहिए?कर्मचारियों के लिए मामला सिर्फ काम का नहीं, बल्कि निजी जिंदगी और व्यक्तिगत स्पेस का भी है। घर में काम करने वाला व्यक्ति यह नहीं चाहेगा कि ऑफिस की निगरानी उसके निजी जीवन की सीमा तक पहुंच जाए।

सोशल मीडिया पर लोगों ने लगाई क्लास

मॉर्गन की बात सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने जमकर प्रतिक्रिया दी। एक यूजर ने कहा कि अगर किसी को यह डर हो कि कंपनी काम के घंटों के बाद भी कैमरे के जरिए उसे देख सकती है, तो वह ऐसी नौकरी छोड़ना पसंद करेगा। एक अन्य यूजर ने कॉरपोरेट अधिकारियों पर तंज कसते हुए कहा कि वह बोर्ड और सी-सूट अधिकारियों के साथ काम करता है और उन्हें कई बार ‘ना’ कहना पड़ता है। वहीं एक यूजर ने सवाल किया कि अगर अरबपति को भी उसी तरह कैमरे के सामने रखा जाए और हर वक्त मॉनिटर किया जाए, तो उन्हें कैसा लगेगा?

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असली बहस नौकरी की नहीं, भरोसे की है

जॉन मॉर्गन की टिप्पणी ने रिमोट वर्क की उस बहस को फिर सामने ला दिया है, जिसमें एक तरफ कंपनियां उत्पादकता और जवाबदेही चाहती हैं, वहीं कर्मचारी भरोसा और प्राइवेसी। आखिर कर्मचारी काम कर रहा है या नहीं, इसे मापने का बेहतर तरीका उसकी स्क्रीन पर नजर रखना है या उसके काम के नतीजे देखना बहस अब इसी सवाल पर आकर टिक गई है।

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30 की उम्र में 50 लाख की नेटवर्थ, फिर भी खुद को मानता है गरीब! Reddit पर शख्स ने बताई पूरी कहानी

30 साल की उम्र में अगर किसी कपल की संयुक्त नेटवर्थ 50 लाख रुपये हो जाए, तो इसे आमतौर पर बड़ी आर्थिक उपलब्धि माना जाएगा। लेकिन एक Reddit यूजर के लिए यह मुकाम खुशी के साथ-साथ उलझन भी लेकर आया है। करीब सात साल से नौकरी कर रहे इस शख्स ने बताया कि अच्छी कमाई और बचत के बावजूद उसे लगता है कि वह अपने दोस्तों से आर्थिक रूप से पीछे रह गया है।

पति-पत्नी की कमाई 32 लाख

इस शख्स के मुताबिक, उसकी सालाना कमाई करीब 20 लाख रुपये है, जबकि उसकी पत्नी लगभग 12 लाख रुपये कमाती हैं। दोनों की कुल मासिक इन-हैंड इनकम करीब 2.2 लाख रुपये है। इसके बावजूद उनकी लाइफस्टाइल काफी साधारण है। दोनों अभी किराये के घर में रहते हैं और उनके पास अपनी कार भी नहीं है। रोजमर्रा के काम के लिए वह अब भी करीब आठ साल पुरानी बाइक चलाते हैं। इतना ही नहीं, शादी को लगभग दो साल हो चुके हैं, लेकिन दोनों अभी तक ठीक से हनीमून पर भी नहीं जा पाए हैं।

दोस्तों को देखकर होने लगा खुद पर शक

Reddit पर अपनी कहानी शेयर करते हुए इस शख्स ने लिखा कि उसके कई कॉलेज फ्रेंड्स उससे काफी आगे नजर आते हैं। किसी ने दो फ्लैट खरीद लिए हैं, जिनमें से एक किराये पर दिया हुआ है। कई दोस्तों के पास कार है और वे बाली तथा मालदीव जैसी जगहों पर घूमने भी जा चुके हैं।

दूसरों की जिंदगी देखकर उसे अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। उसे समझ नहीं आ रहा कि 50 लाख रुपये की नेटवर्थ होने के बावजूद आखिर उसे खुद को ‘पीछे’ क्यों महसूस हो रहा है।

पत्नी के खर्च से भी होती है परेशानी

उसने यह भी स्वीकार किया कि कभी-कभी पत्नी के खर्च को लेकर उसे चिढ़ होती है। सोशल मीडिया से प्रभावित होकर पत्नी महंगे मेकअप और दूसरी फैंसी चीजों पर पैसे खर्च करती हैं। यही अंतर उसे और ज्यादा सोचने पर मजबूर करता है। वह खुद बचत और आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता देता है, जबकि उसे लगता है कि पत्नी वर्तमान जिंदगी को थोड़ा ज्यादा खुलकर जीना चाहती हैं।

‘क्या मैं बहुत ज्यादा बचत कर रहा हूं?’

इस पूरे मामले में उसका सबसे बड़ा सवाल यही है कि कहीं वह पैसे बचाने के चक्कर में जिंदगी जीना तो नहीं भूल रहा। उसने लिखा कि वह गर्व महसूस करता है कि दोनों ने मिलकर 50 लाख रुपये की नेटवर्थ हासिल की है। लेकिन साथ ही वह एक बेहतर घर खरीदना, पत्नी के साथ घूमना और जिंदगी का आनंद लेना भी चाहता है। दूसरी तरफ उसे डर है कि ऐसा करने से कहीं उसकी आर्थिक स्थिरता खतरे में न पड़ जाए। वह यह भी सोचता है कि क्या वह दूसरों से अपनी तुलना बहुत ज्यादा कर रहा है या फिर वास्तव में उसकी वित्तीय योजना में कोई कमी है।

Reddit पर लोगों ने दी ‘रियलिटी चेक’ की सलाह

उसकी पोस्ट पर कई Reddit यूजर्स ने उसे दोस्तों की जिंदगी से अपनी तुलना बंद करने की सलाह दी। एक यूजर ने कहा कि तुलना खुशी छीन लेती है और उसे अपने लिए अगले 5-10 साल का लक्ष्य तय करना चाहिए, न कि दूसरों की जिंदगी देखकर अपनी सफलता मापनी चाहिए। एक अन्य यूजर ने उसकी स्थिति पर सहमति जताते हुए बताया कि वह भी किराये के घर में रहता है और उसके पास कार नहीं है। वह अब भी आठ साल पुरानी बाइक चलाता है, जिसका सेल्फ-स्टार्ट तक काम नहीं करता और एक इंडिकेटर भी खराब है। एक अन्य व्यक्ति ने इस सलाह को सही बताते हुए कहा कि जिंदगी में कभी-कभी किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत होती है, जो हमें रियलिटी चेक दे सके।

असली सवाल 50 लाख नहीं, संतुष्टि का है

इस कहानी ने एक दिलचस्प सवाल खड़ा किया है क्या आर्थिक रूप से सफल होने का मतलब सिर्फ घर, कार और विदेश यात्राएं हैं? या फिर अपनी जरूरतों के मुताबिक बचत करना और भविष्य को सुरक्षित रखना भी सफलता है? शायद इस कपल के लिए सबसे जरूरी यह तय करना है कि उन्हें वास्तव में कैसी जिंदगी चाहिए। क्योंकि दूसरों की उपलब्धियों से अपनी खुशी और आर्थिक सफलता की तुलना करने पर 50 लाख भी कम लग सकते हैं।

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4 करोड़ की सेविंग के बाद भी नहीं खुश! ऑफिस पॉलिटिक्स से परेशान शख्स लेना चाहता है अर्ली रिटायरमेंट

पिछले कुछ समय से लोगों में जल्दी रिटायरमेंट लेने का फैसला तेजी से वायरल हो रहा है। कम उम्र में कई लोग चाहते हैं कि वह इतना पैसा जमा कर लें कि उन्हें नौकरी करने की जरूरत न पड़े। खासकर नौकरीपेशा लोगों के बीच कम उम्र में आर्थिक रूप से मजबूत होकर काम छोड़ने का सपना तेजी से बढ़ रहा है। कई लोग आर्थिक रूप से मजबूत होने के बाद तो कुछ ऑफिस की होने वाली पॉलिटिक्स की वजह से भी रिटायरमेंट का फैसला कर लेते हैं। हाल ही में जल्दी रिटायरमेंट को लेकर किया गया पोस्ट काफी वायरल हो रहा हैं।

4 करोड़ की कर ली सेविंग

35 वर्षीय यह व्यक्ति अब सिर्फ ज्यादा पैसे कमाने के बारे में नहीं सोच रहा क्योंकि वह अपनी नौकरी से भी परेशान हो चुका है। व्यक्ति ने बताया कि उसने करीब 4 करोड़ रुपये की संपत्ति बना चुका है। अब वह आगे की जिंदगी नौकरी के बिना बिताने की योजना बना रहा है। व्यक्ति ने बताया कि फिलहाल वह सिंगल है और शादी करने का भी कोई प्लान नहीं है। वह अपनी बचत और निवेश के जरिए आर्थिक रूप से मजबूत बने रहना चाहता है, ताकि भविष्य में उसे किसी पर निर्भर न रहना पड़े। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वारयल हो रहा है।

क्या रिटायर होने के लिए सही 4 करोड़ की बचत

व्यक्ति ने अपने पोस्ट में कहा कि वह अब ज्यादा पैसे कमाने के बजाय अपनी नौकरी छोड़ने के बारे में सोच रहा है। कॉर्पोरेट लाइफ छोड़ने की वजह बताते हुए उन्होंने लिखा, “मैं मानसिक रूप से थक चुका हूं क्योंकि मैं ऑफिस की पॉलिटिक्स और एक-दूसरे से आगे निकलने वाली संस्कृति का हिस्सा नहीं बनना चाहता। मेरा कोई करीबी नहीं है और मैं इतना अकेलापन महसूस करता हूं कि मुझे नहीं लगता कि मैं किसी के साथ रह सकता हूं। निजी मतभेदों के कारण मैं अपने माता-पिता के भी संपर्क में नहीं हूं। मेरे कुछ अच्छे दोस्त जरूर हैं, लेकिन वे अलग-अलग शहरों में रहते हैं और अपनी-अपनी जिंदगी और परिवार में व्यस्त हैं।” उसके पास करीब 4 करोड़ रुपये की नेट वर्थ है, लेकिन वह जानना चाहता है कि क्या इतनी रकम नौकरी छोड़ने के लिए पर्याप्त होगी। इसी को लेकर उसने Reddit पर लोगों से सलाह मांगी।

Reddit पर किया पोस्ट

इस व्यक्ति ने r/personalfinanceindia सबरेडिट पर एक पोस्ट के जरिए अपनी स्थिति के बारे में बताया। पोस्ट का टाइटल था, “35 साल की उम्र में 4Cr. FIRE करना अच्छा है? जिंदगी से थक गया हूं!” उसने बताया कि रिटायरमेंट के बाद उसका सालाना खर्च करीब 12 लाख रुपये रहने का अनुमान है। इसके लिए वह एक टियर-2 शहर में शिफ्ट होने की योजना बना रहा है। पोस्ट में दी गई जानकारी के अनुसार, 35 वर्षीय व्यक्ति की कुल संपत्ति करीब 4 करोड़ रुपये है। उसने अपनी रकम को अलग-अलग जगहों पर निवेश कर रखा है। उसके निवेश में भारतीय म्यूचुअल फंड, शेयर, अमेरिकी टेक कंपनियों के RSU, रिटायरमेंट फंड, कीमती धातुएं और कैश शामिल हैं। इनमें भारतीय म्यूचुअल फंड में करीब 1.20 करोड़ रुपये और भारतीय शेयरों में लगभग 25 लाख रुपये निवेश किए गए हैं।

कहां किया कितना निवेश

उस व्यक्ति ने अपनी बाकी रकम भी कई तरह के निवेश और बचत में लगा रखी है। उसके पास अमेरिकी टेक कंपनियों के RSU करीब 1 करोड़ रुपये के हैं, जबकि अमेरिकी शेयरों में उसने लगभग 20 लाख रुपये लगाए हैं। PF और NPS में उसकी करीब 40 लाख रुपये की बचत है। इसके अलावा गोल्ड ETF में 15 लाख और सिल्वर ETF में करीब 5 लाख रुपये निवेश किए गए हैं। उसके पास लगभग 10 लाख रुपये भारतीय मुद्रा में कैश भी है। वहीं, उसके पास करीब 70,000 अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 65 लाख रुपये की US कैश होल्डिंग है। उसने बताया कि कुछ अमेरिकी शेयर और RSU वह पहले ही बेच चुका है और आगे इस रकम को US आधारित ETF में निवेश करने की योजना बना रहा है।Screenshot 2026-09-13 170317

 

अभी सालाना खर्च करीब 14.4 लाख रुपये

पोस्ट में इस व्यक्ति ने बताया कि उसके नाम पर फिलहाल न तो कोई घर है और न ही कार। साथ ही, उसे भविष्य में परिवार से किसी तरह की विरासत मिलने की भी उम्मीद नहीं है। वह अभी सिंगल है और उसने शादी करने की कोई योजना नहीं बनाई है। ऐसे में वह अपनी मौजूदा बचत और निवेश के सहारे आगे की जिंदगी की योजना बना रहा है। फिलहाल इस व्यक्ति का सालाना खर्च करीब 14.4 लाख रुपये है। इसमें लगभग 8.4 लाख रुपये घर का किराया, राशन और रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च होते हैं, जबकि करीब 6 लाख रुपये घूमने और अपने शौक पूरे करने में खर्च करता है।

लोगों ने दी सलाह

उसने Reddit पर पूछा कि क्या वह अपनी बचत के दम पर नौकरी छोड़ सकता है। कई यूजर्स ने सलाह दी कि तुरंत रिटायर होने के बजाय पहले लंबा ब्रेक लेकर सोच-विचार करना बेहतर होगा। एक यूजर ने लिखा, “सालाना 12 लाख रुपये के खर्च के मुकाबले 4 करोड़ रुपये की रकम कागज पर काफी मजबूत नजर आती है। लेकिन आपकी बातों को देखते हुए, मैं हमेशा के लिए FIRE लेने से पहले लंबे करियर ब्रेक के बारे में सोचूंगा। कई बार इंसान को नौकरी से कुछ समय की दूरी चाहिए होती है, न कि काम से हमेशा के लिए रिटायर होने की।”

एक अन्य Reddit यूजर ने सलाह दी, “कुछ समय का ब्रेक लो और घूमने निकलो। हो सकता है कि इससे तुम्हें जिंदगी को एक अलग नजरिए से देखने में मदद मिले।” एक यूजर ने लिखा, “मेरे हिसाब से यह एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन पहले थोड़ा ब्रेक जरूर लो और कम तनाव वाली नौकरी करने के विकल्प पर विचार करो। महंगाई और दूसरे बढ़ते खर्चों को देखते हुए अपनी संपत्ति बढ़ाते रहना बेहतर होगा। इसके अलावा, नौकरी छोड़ने के बाद आप लोगों से काफी दूर हो सकते हैं और अकेलापन बढ़ सकता है। ऑफिस में साथ काम करने वाले लोग भी आपके लिए एक अच्छे साथी साबित हो सकते हैं।”

Video: ‘कभी भी कूल बॉस मत बनो’, उद्यमी की सलाह वायरल; बताया कर्मचारियों को ज्यादा छूट देने का नुकसान

ऑफिस में हर कर्मचारी चाहता है कि उसका बॉस समझदार, सहज और दोस्ताना हो। लेकिन क्या बहुत ज्यादा ‘कूल’ बनना कभी बॉस के लिए ही परेशानी खड़ी कर सकता है? उद्यमी हेमंत वाधवानी के एक वायरल वीडियो ने इसी सवाल पर बहस छेड़ दी है। उन्होंने अपनी पुरानी नौकरी का अनुभव साझा करते हुए बताया कि कर्मचारियों के साथ जरूरत से ज्यादा दोस्ताना व्यवहार करने का उन्हें नुकसान उठाना पड़ा।

‘मैं बॉस बनकर रौब नहीं दिखाना चाहता था’

वाधवानी ने बताया कि वह अपने जूनियर कर्मचारियों को हमेशा अपने बराबर मानने की कोशिश करते थे। उन्हें यह पसंद नहीं था कि टीम के सदस्यों को बार-बार यह एहसास कराया जाए कि वह उनके सीनियर या बॉस हैं। उनका मानना था कि अगर ऑफिस का माहौल सहज रहेगा, तो कर्मचारी खुलकर बात करेंगे और काम भी बेहतर तरीके से होगा। इसलिए उन्होंने टीम के साथ दोस्ताना रिश्ता बनाए रखा और उन्हें काफी आजादी भी दी। लेकिन वक्त के साथ उन्हें लगा कि उनकी यही सोच उलटी पड़ने लगी।

जब भरोसा ही बनने लगा परेशानी की वजह

वाधवानी के मुताबिक, उन्होंने टीम के सदस्यों को जो भरोसा और आजादी दी, कुछ लोगों ने उसका फायदा उठाना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि कई मौकों पर कर्मचारियों ने उनके साथ मिली छूट का गलत इस्तेमाल किया और आखिरकार कुछ लोगों ने उन्हें ‘बैकस्टैब’ भी किया। यहीं से उन्हें महसूस हुआ कि बॉस और कर्मचारी के बीच दोस्ताना व्यवहार के साथ प्रोफेशनल सीमाएं होना भी बेहद जरूरी है।

‘Never, ever be a cool boss’

अपने वीडियो में वाधवानी ने काफी सीधे शब्दों में कहा, “Never, ever be a cool boss.” उनका कहना है कि मैनेजर को टीम के साथ अच्छा व्यवहार जरूर करना चाहिए, लेकिन उसे यह भी स्पष्ट रखना चाहिए कि किस हद तक व्यक्तिगत और पेशेवर रिश्ता आगे बढ़ सकता है। उनके अनुसार, बहुत ज्यादा लचीलापन देने से कभी-कभी कर्मचारी उस छूट को अपनी सुविधा के लिए इस्तेमाल करने लगते हैं। इसलिए शुरुआत से ही सीमाएं तय करना जरूरी है।

क्या अच्छा बॉस दोस्ताना नहीं हो सकता?

वाधवानी की बात सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की राय बंट गई। कुछ यूजर्स ने उनकी बात से सहमति जताई, जबकि कुछ का मानना था कि अच्छा लीडर बनने के लिए सख्त दूरी बनाना जरूरी नहीं है। एक यूजर ने कहा कि सही तरीका यह हो सकता है कि बॉस कर्मचारियों के साथ अच्छा और सहज व्यवहार करे, लेकिन जरूरत पड़ने पर उन्हें यह भी पता हो कि मैनेजर अपना रुख सख्त कर सकता है।

असली सवाल- डर या सम्मान?

वायरल वीडियो ने आधुनिक ऑफिस कल्चर को लेकर एक दिलचस्प सवाल खड़ा कर दिया है। क्या कर्मचारियों से काम करवाने के लिए बॉस का सख्त होना जरूरी है, या फिर भरोसे और सम्मान पर आधारित माहौल ज्यादा बेहतर होता है?

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

‘भारत में इंटरव्यू अमेरिका से ज्यादा कठिन, लेकिन सैलरी आधी’ टेक प्रोफेशनल का दावा, Reddit पोस्ट वायरल

‘भारत में इंटरव्यू अमेरिका से ज्यादा कठिन, लेकिन सैलरी आधी’ टेक प्रोफेशनल का दावा, Reddit पोस्ट वायरल

भारत में टेक सेक्टर की नौकरी हासिल करना कई युवाओं के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होता। खासकर बड़ी टेक कंपनियों के इंटरव्यू में मुश्किल coding questions और कई दौर की technical screening उम्मीदवारों की अच्छी-खासी तैयारी करवा देती है। अब Reddit पर एक टेक प्रोफेशनल की पोस्ट ने इसी मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है।

पोस्ट करने वाले यूजर का कहना है कि भारत में टेक जॉब इंटरव्यू अमेरिका की तुलना में कहीं ज्यादा कठिन होते हैं, जबकि कई मामलों में मिलने वाली सैलरी काफी कम होती है। इस दावे के बाद Reddit पर टेक इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने अपने अनुभव साझा करने शुरू कर दिए।

‘भारत में इंटरव्यू ज्यादा मुश्किल

टेक प्रोफेशनल ने अपनी पोस्ट में लिखा कि भारत में होने वाले इंटरव्यू अमेरिका की तुलना में काफी कठिन हैं और इसके बदले मिलने वाला मुआवजा भी कम है। उसके मुताबिक अमेरिकी कंपनियां उम्मीदवार को परखते समय केवल coding skills पर निर्भर नहीं रहतीं। वहां practical experience, system design और behavioural skills को भी काफी महत्व दिया जाता है। इसके उलट भारत में कई कंपनियों के इंटरव्यू में कठिन algorithm और coding problems पर ज्यादा जोर दिया जाता है।

45 मिनट में दो Hard सवाल?

Reddit यूजर ने दावा किया कि भारत में कई कंपनियों के hiring process में उम्मीदवारों को कई coding rounds से गुजरना पड़ता है। उसने खास तौर पर दावा किया कि कुछ जगहों पर staff-level पदों के उम्मीदवारों से 45 मिनट में दो कठिन coding problems हल करने की उम्मीद की जाती है। यूजर के अनुसार, अमेरिका में senior candidates के लिए professional experience और system-design skills ज्यादा अहम हो सकती हैं, जबकि भारत में coding rounds का दबाव काफी ज्यादा दिखाई देता है।

क्या असली नौकरी और इंटरव्यू की तैयारी अलग-अलग चीजें हैं?

यही सवाल इस पूरी बहस के केंद्र में है। कई Reddit यूजर्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मुश्किल coding problems हल करने में माहिर होना और असल दुनिया में किसी product या system को बनाने की क्षमता दो अलग चीजें हैं। एक यूजर ने दावा किया कि उसने ऐसे भारतीय उम्मीदवारों को देखा है जो coding questions में शानदार प्रदर्शन करते थे, लेकिन अपने वास्तविक काम को समझाने या system design पर चर्चा करने में संघर्ष करते थे। वहीं कुछ विदेशी उम्मीदवार experience-based सवालों में ज्यादा सहज नजर आए।

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‘इंटरव्यू कभी-कभी इंटरव्यूअर का शो बन जाता है’

एक अन्य यूजर ने भारतीय इंटरव्यू प्रक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि कई बार इंटरव्यू उम्मीदवार की क्षमता परखने से ज्यादा इंटरव्यू लेने वाले की अपनी समझ और ‘स्मार्टनेस’ दिखाने का मंच बन जाता है। उसका कहना था कि भारत में कुछ इंटरव्यू जरूरत से ज्यादा कठिन और वास्तविक नौकरी की जिम्मेदारियों से दूर होते हैं। खासकर तब, जब इंटरव्यू में उम्मीदवार को सीमित समय में ऐसे सवाल दिए जाएं जिनका रोजमर्रा के काम से सीधा संबंध न हो।

कुछ लोगों ने कहा- ‘मुश्किल है तो खुद को अपस्किल करो’

हालांकि Reddit पर हर कोई भारतीय इंटरव्यू प्रक्रिया के खिलाफ नहीं था। कुछ यूजर्स ने तर्क दिया कि अगर कंपनियां कठिन सवाल पूछने के बावजूद पर्याप्त उम्मीदवार खोज पा रही हैं, तो इसका मतलब है कि बाजार उस मॉडल को स्वीकार कर रहा है। एक यूजर ने कहा कि उम्मीदवारों को शिकायत करने के बजाय अपनी skills बेहतर करने पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि आने वाले समय में hiring bar कम होने की संभावना नहीं है।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

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3 लाख की नौकरी, रिजेक्शन और ताना… 5 साल में इस लड़के ने कैसे हासिल किया 29 लाख का पैकेज?

कभी नौकरी के लिए दर-दर भटकने वाला एक इंजीनियर आज लाखों रुपये के पैकेज पर काम कर रहा है। 2019 में B.Tech करने के बाद इस युवक के पास न अच्छी नौकरी थी और न ही करियर को लेकर कोई स्पष्ट दिशा। कई बार रिजेक्शन और मुश्किलों का सामना करने के बावजूद उसने कोशिश जारी रखी। Reddit के r/Indian_flex पर शेयर की गई उसकी कहानी बताती है कि करियर की शुरुआत भले ही कमजोर हो, लेकिन आगे की राह बदली जा सकती है।

इंजीनियरिंग के बाद भी नहीं थी नौकरी की तैयारी

युवक ने बताया कि कॉलेज के दौरान उसका पढ़ाई में ज्यादा मन नहीं लगता था। इंजीनियरिंग उसके लिए पसंद का करियर नहीं था। वह गेमिंग में काफी दिलचस्पी रखता था और दोस्तों के साथ वक्त बिताने में ज्यादा सहज महसूस करता था।

2019 में B.Tech पूरी करने के बाद उसका प्लेसमेंट नहीं हुआ। परिवार की उम्मीदें अलग थीं। पिता चाहते थे कि वह IT सेक्टर में अच्छी नौकरी हासिल करे। नौकरी नहीं मिलने की वजह से घर में तनाव बढ़ने लगा और युवक ने बेंगलुरु जाने का फैसला किया।

बेंगलुरु में भी नहीं बदली तस्वीर

नौकरी की तलाश में बेंगलुरु पहुंचने के बाद भी उसके सामने सबसे बड़ी परेशानी स्किल की कमी थी। कुछ दोस्तों के साथ रहते हुए शुरुआती दिन किसी नए कॉलेज लाइफ जैसे ही गुजरते रहे। इसी बीच एक रेफरेंस के जरिए उसे यूरोप बेस्ड स्टार्टअप में करीब ₹12,000 महीने की नौकरी मिली। लेकिन काम में जरूरी तकनीकी पकड़ नहीं होने के कारण वह वहां ज्यादा समय नहीं टिक पाया। करीब 20 दिन बाद उसकी नौकरी चली गई।

कोविड ने और बढ़ाई परेशानी

नौकरी जाने के कुछ ही समय बाद कोरोना महामारी आ गई। लॉकडाउन के कारण हालात और मुश्किल हो गए। आखिरकार जून 2020 में वह घर लौट आया। उस समय परिवार को लगता था कि वह नौकरी कर रहा है, जबकि वह कई महीनों से बेरोजगार था। माता-पिता के सवालों से बचने के लिए उसे अपनी नौकरी और सैलरी को लेकर झूठ तक बोलना पड़ा। करीब नौ महीने बाद आखिरकार उसे एक सर्विस बेस्ड कंपनी में नौकरी मिल गई। पैकेज था सिर्फ ₹3.37 LPA, लेकिन उसके लिए यह नौकरी किसी बड़ी राहत से कम नहीं थी।

यहीं से लौटा आत्मविश्वास

कम सैलरी के बावजूद इस नौकरी ने उसके अंदर एक बड़ा बदलाव किया। प्रोजेक्ट में उसका प्रदर्शन अच्छा रहा और वह टीम के प्रमुख परफॉर्मर्स में शामिल होने लगा। यहीं उसे महसूस हुआ कि शायद उसमें उतनी कमी नहीं है, जितना वह खुद समझता था। इसके बाद उसने बेहतर अवसरों के लिए इंटरव्यू देना शुरू किया।

कई बार ऑफर मिला, लेकिन किस्मत ने रोका

2022 में उसने ₹7.72 LPA के एक अवसर के लिए इंटरव्यू के सभी जरूरी राउंड पार कर लिए, लेकिन HR राउंड में कुल अनुभव से जुड़ी शर्त के कारण चयन नहीं हो पाया।

बाद में उसे Big4 कंपनी में ₹8.75 LPA का ऑफर मिला। नौकरी शुरू करने के कुछ ही समय बाद उसने ₹16.5 LPA का इंटरव्यू भी क्लियर किया, लेकिन करियर के शुरुआती गैप की वजह से HR राउंड में फिर रिजेक्शन हो गया।

यह उसके लिए बेहद निराशाजनक दौर था, क्योंकि तकनीकी और इंटरव्यू प्रक्रिया पार करने के बावजूद अंतिम चरण में मौका हाथ से निकल गया।

शादी से पहले बदली कमाई की तस्वीर

कुछ समय बाद उसकी शादी तय हुई। शादी से करीब 20 दिन पहले उसे एक नई कंपनी से ऑफर मिला और पैकेज बढ़कर ₹15.8 LPA हो गया। इसके बाद भी उसने ग्रोथ की तलाश जारी रखी। करीब एक साल बाद उसने फिर स्विच करने का फैसला किया और एक Big4 कंपनी से शुरुआत में ₹25.3 LPA का ऑफर मिला।

My Career Journey from Unemployed to Good Pay with heartbreaks

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नेगोशिएशन के बाद पहुंचा ₹29.05 LPA

मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। दूसरी तरफ से काउंटर ऑफर मिलने के बाद पैकेज में और बदलाव हुआ। बातचीत के बाद Big4 कंपनी का ऑफर बढ़कर ₹29.05 LPA हो गया, जिसमें वैरिएबल और जॉइनिंग बोनस शामिल था। यानी जिस शख्स ने अपने करियर की शुरुआत ₹12 हजार महीने की नौकरी और फिर ₹3.37 LPA के पैकेज से की थी, वह कुछ वर्षों में करीब 29 लाख रुपये के पैकेज तक पहुंच गया।

‘मैं एक्सपर्ट नहीं, लेकिन कोशिश करता हूं’

युवक ने अपनी कहानी में खुद को प्रोग्रामिंग का बहुत बड़ा एक्सपर्ट नहीं बताया। उसका कहना है कि वह चीजों को समझने, काम पूरा करने और लगातार प्रयास करने पर भरोसा करता है। उसकी कहानी की खास बात यही है कि करियर में कई बार दरवाजे बंद हुए, लेकिन उसने कोशिश करना नहीं छोड़ा। नौकरी छूटने से लेकर रिजेक्शन और कम पैकेज तक, हर मुश्किल के बाद उसने अगला मौका तलाशा।

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