सोशल मीडिया पर एक कंपनी की कथित कर्मचारी निगरानी से जुड़ी एक्सेल शीट तेजी से वायरल हो रही है। सोशल मीडिया पर किए पोस्ट में व्यक्ति ने दावा किया कि, इस शीट के जरिए कर्मचारियों के काम करने के घंटे, कंप्यूटर गतिविधि और माउस जिगलर जैसे टूल के इस्तेमाल तक पर नजर रखी जा रही थी। एक्स (पहले ट्विटर) पर एक यूजर ने इसका स्क्रीनशॉट शेयर किया। स्क्रीनशॉट सामने आने के बाद से वर्कप्लेस प्राइवेसी और कर्मचारियों की निगरानी को लेकर इंटरनेट पर नई बहस शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर ये तेजी से वायरल हो रहा है।
सोशल मीडिया पर किया पोस्ट
X यूजर lolhith07 एक्स पर यूजर ने इस स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए लिखा, “किसी ने रेडिट पर बताया कि उसकी कंपनी इस तरह कर्मचारियों पर नजर रख रही है।” लेकिन, स्प्रेडशीट के असली होने की इंडिपेंडेंटली पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा, जिसके बाद कई लोगों ने कंपनियों की कर्मचारी निगरानी प्रणाली और वर्कप्लेस प्राइवेसी को लेकर सवाल उठाए।
शेयर किया स्क्रीनशॉट
वायरल स्क्रीनशॉट में “June 2026″ नाम की एक एक्सेल शीट दिखाई दे रही है। इसमें दावा किया गया है कि एक कर्मचारी की रोजाना की कामकाजी गतिविधियों को अलग-अलग मानकों के आधार पर रिकॉर्ड किया जा रहा था। शीट में प्रोडक्टिव घंटे, सिस्टम से दूर रहने का समय (AAFS), लंबे समय तक कीबोर्ड इस्तेमाल, जिगलर डिटेक्शन, संदिग्ध माउस मूवमेंट और MS Teams कॉल के गलत इस्तेमाल जैसे कई कॉलम शामिल दिखाई दे रहे हैं।”
Someone posted on reddit on how his/her company tracking them pic.twitter.com/gCWRD9znHL
— Lohith (@lolhith07) August 4, 2026
प्रोडक्टिविटी की करते हैं निगरानी
वायरल स्प्रेडशीट में कर्मचारी की रोजाना की प्रोडक्टिविटी का भी रिकॉर्ड दिखाई दे रहा था। स्क्रीनशॉट के अनुसार, 10 जून को 7.93 घंटे, 11 जून को 7.01 घंटे और 12 जून को 7.32 घंटे की प्रोडक्टिव एक्टिविटी दर्ज की गई थी। इसके अलावा भी कई दिनों के आंकड़े शीट में मौजूद थे। इस पोस्ट पर चर्चा तब और बढ़ गई, जब रेडिट पर इसे शेयर करने वाले व्यक्ति ने बताया कि उनके मुताबिक यह डैशबोर्ड कर्मचारियों की किन-किन गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।
रेडिट पर शेयर किया पोस्ट
रेडिट पर पोस्ट शेयर करने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि, “जो लोग ऐसे डैशबोर्ड बनाते हैं, वे भी जानते हैं कि ये किसी कर्मचारी के असली काम का सही आकलन नहीं करते। मैनेजमेंट ज्ञान और सोच पर आधारित काम को नहीं माप सकता, इसलिए वह केवल कीबोर्ड की गतिविधि जैसी चीजों को ही मापता है। यहां ‘प्रोडक्टिव घंटे’ का मतलब सिर्फ अलग-अलग विंडो में होने वाले इनपुट इवेंट्स से है। अगर कोई अनुभवी कर्मचारी दो घंटे तक किसी बड़े आर्किटेक्चर या समाधान के बारे में सोच रहा हो, तो सिस्टम उसे भी निष्क्रिय मान लेता है। यह तरीका पूरी तरह गलत है।”
लोगों ने किया कमेंट
इस पोस्ट के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की खूब प्रतिक्रियाएं सामने आईं। एक यूजर ने लिखा, “कंपनियां ऐसे निगरानी वाले टूल्स पर करोड़ों-अरबों रुपये खर्च कर रही हैं, लेकिन कर्मचारियों की खुशी और उनका मनोबल बढ़ाने पर ध्यान नहीं देतीं। साल में कुछ बार पिज्जा खिलाकर उन्हें खुश करने की कोशिश की जाती है, जबकि असली जरूरत बेहतर कार्य माहौल बनाने की है।”
एक अन्य यूजर ने दावा किया कि वायरल स्प्रेडशीट में दिखाई गई निगरानी सिर्फ शुरुआती स्तर की है। उसने लिखा कि, “कई कंपनियों में इससे कहीं ज्यादा एडवांस मॉनिटरिंग की जाती है, जिसमें स्क्रीन रिकॉर्डिंग, ऑडियो रिकॉर्डिंग, कीस्ट्रोक लॉगिंग, लोकेशन हिस्ट्री, आईपी और नेटवर्क की जानकारी, इस्तेमाल किए गए एप्लिकेशन और देखी गई वेबसाइटों तक का रिकॉर्ड रखा जा सकता है।” वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, “कुछ डॉक्टर माउस जिगलर का इस्तेमाल इसलिए करते थे, ताकि मरीजों के रिकॉर्ड बार-बार लॉक न हों और सिस्टम उन्हें अपने आप लॉग आउट न कर दे। साथ ही उसने हैरानी जताई कि आखिर यह कैसे पता लगाया गया कि माउस जिगलर का इस्तेमाल किया जा रहा था।”

