नौकरी से छंटनी हुई तो इस शख्स को मिल गया जीवन बदलने का मौका, AI की मदद से मिल गई 1.5 करोड़ की जॉब! जानिए कैसे

एक ही कंपनी में दस साल बिताने के बाद नौकरी छूटने से किसी का भी आत्मविश्वास डगमगा सकता है। एक प्रोफेशनल के लिए, उसके बाद के महीने अनिश्चितता, बार-बार रिजेक्शन और ऐसे इंटरव्यू से भरे रहे जिनसे कोई नतीजा नहीं निकला।

हार मानने के बजाय, उन्होंने अपनी तैयारी का तरीका बदल दिया। इंटरव्यू की प्रैक्टिस करने और अपने जवाबों को बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके, उन्हें आखिरकार एक नई नौकरी मिल गई, जिसमें सालाना लगभग 1.5 करोड़ रुपये का पैकेज मिलता है।

AI ने उनके इंटरव्यू की तैयारी का तरीका बदल दिया

इस प्रोफेशनल ने Reddit पर “kml3141” यूज़रनेम से अपना अनुभव शेयर किया। उन्होंने बताया कि एक ही कंपनी में 10 साल काम करने और तीन प्रमोशन पाने के बाद फरवरी के आखिर में उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। यह फैसला एक झटके जैसा था, और अगले पांच महीने नौकरी की मुश्किल तलाश में बीते। उन्होंने कई इंटरव्यू दिए लेकिन उन्हें बार-बार निराशा का सामना करना पड़ा।

कुछ पद रद्द कर दिए गए, कुछ को होल्ड पर डाल दिया गया, जबकि कुछ पद आखिरकार कंपनी के अंदर के लोगों से ही भर दिए गए। अपने चांस बेहतर करने के लिए, उन्होंने इंटरव्यू की तैयारी में AI का इस्तेमाल करना शुरू किया। उन्होंने बताया कि वे AI टूल्स में जॉब डिस्क्रिप्शन पेस्ट करते थे और उन लोगों के बारे में भी जानकारी शेयर करते थे जो उनका इंटरव्यू लेने वाले थे।

इसके बाद AI ने उन्हें इंटरव्यू में पूछे जा सकने वाले संभावित सवालों का अंदाजा लगाने, इंटरव्यू लेने वालों के बारे में जानकारी जुटाने और STAR मेथड का इस्तेमाल करके जवाब तैयार करने में मदद की। उन्होंने यह भी बताया कि AI की मदद से वे इंटरव्यू के दौरान बहुत ज़्यादा बातें करने के बजाय अपने जवाब छोटे और काम की बात पर केंद्रित रख पाए।

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Layoffs

आखिरकार मेहनत रंग लाई

कई महीनों की खोज के बाद, उन्हें एजेंसी इंडस्ट्री से बाहर की एक कंपनी से नौकरी का ऑफर मिला। इस नई नौकरी में सालाना सैलरी $155,000 (लगभग ₹1.5 करोड़) है, साथ ही 15% सालाना बोनस और पहले दिन से ही एम्प्लॉई बेनिफिट्स भी मिलेंगे। इसमें फ्लेक्सिबल वर्किंग अरेंजमेंट्स के साथ हाइब्रिड वर्क मॉडल की सुविधा भी है।

हालांकि उन्होंने सैलरी पर बातचीत (नेगोशिएशन) करने के बारे में सोचा था, लेकिन उन्होंने ऑफर स्वीकार करने का फैसला किया क्योंकि यह उनकी पिछली नौकरी की कमाई से ज़्यादा था। पीछे मुड़कर देखने पर, Reddit यूज़र ने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें धैर्य रखने और लगातार अप्लाई करते रहने का महत्व सिखाया, भले ही कोई नौकरी पहुंच से बाहर लग रही हो।

उनकी पोस्ट को दूसरे Reddit यूज़र्स से भी काफी सपोर्ट मिला। एक यूज़र ने पूछा, “बधाई हो! आपने इंटरव्यू की तैयारी कैसे की? आजकल वे ज़्यादातर व्यवहार और स्थिति-आधारित (बिहेवियरल और सिनेरियो-बेस्ड) इंटरव्यू पर ज़ोर देते हैं।”एक और यूज़र ने लिखा, “बधाई हो! यहां दूसरों का हौसला बढ़ाने के लिए धन्यवाद।”

एक व्यक्ति ने कमेंट किया, “अरे OP, इस बड़ी कामयाबी के लिए बधाई। अगर आपको कोई दिक्कत न हो, तो क्या मैं आपसे DM में उन प्रॉम्प्ट्स के बारे में कुछ मदद ले सकता हूं जिनका आपने इस्तेमाल किया था? ये इंटरव्यू की तैयारी में मेरे काम आ सकते हैं। मुझे आपसे कुछ मेंटरशिप चाहिए।”

एक और यूज़र ने बताया, “मैंने एक एजेंसी के लिए काम किया था और मैं दोबारा ऐसा कभी नहीं करूंगा। आपकी नई नौकरी के लिए शुभकामनाएं! अब इस बात पर ध्यान दें कि आपके पास एक बड़ा इमरजेंसी फंड हो और आप अपना कोई भी बकाया कर्ज़ चुका दें।”

 ‘इन-हैंड सैलरी कितनी मिलेगी?’ बस इतना पूछा और कंपनी ने कर दिया रिजेक्ट, सोशल मीडिया पर छिड़ गई बहस

नौकरी की तलाश में हर उम्मीदवार चाहता है कि उसे कंपनी, काम और सैलरी से जुड़ी पूरी जानकारी पहले से मिल जाए। लेकिन एक शख्स के लिए सिर्फ सैलरी के बारे में सवाल पूछना ही परेशानी का कारण बन गया। उसने जॉब ऑफर मिलने के बाद जब अपनी इन-हैंड सैलरी जाननी चाही, तो कंपनी के जवाब ने उसे हैरान कर दिया। इस पूरे मामले को उम्मीदवार ने Reddit पर शेयर किया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर नौकरी में पारदर्शिता और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

कई लोगों ने कहा कि किसी भी जॉब को स्वीकार करने से पहले वेतन, कटौती और मिलने वाली रकम की जानकारी लेना एक सामान्य प्रक्रिया है। वहीं, कुछ यूजर्स ने कंपनी के रवैये पर सवाल उठाए और इसे नौकरी देने वालों की सोच से जोड़कर देखा।

2 LPA की नौकरी, लेकिन सवाल पूछते ही बदल गया रवैया

उम्मीदवार ने बताया कि उसने Indeed के जरिए एक कंपनी में आवेदन किया था। कुछ समय बाद एक छोटी कंपनी के प्रतिनिधि ने उससे संपर्क किया और बताया कि इस पद के लिए 2 LPA का पैकेज ऑफर किया जा रहा है। जब उम्मीदवार ने नौकरी में रुचि दिखाई, तो उसने सिर्फ इतना पूछा कि कटौती के बाद हर महीने मिलने वाली इन-हैंड सैलरी कितनी होगी।

‘अगर सिर्फ सैलरी चिंता है तो हमारी कंपनी सही नहीं’

उम्मीदवार के सवाल का जवाब देने के बजाय रिक्रूटर ने कहा कि अगर सैलरी ही आपकी मुख्य चिंता है, तो शायद यह कंपनी आपके लिए सही जगह नहीं है। इसके बाद कंपनी ने उम्मीदवार को शुभकामनाएं देते हुए बातचीत खत्म कर दी। अचानक मिले इस जवाब से उम्मीदवार हैरान रह गया।

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कैंडिडेट ने कहा- सवाल पूछना गलत नहीं था

उम्मीदवार ने दोबारा जवाब देते हुए कहा कि उसका सवाल सिर्फ पैसों को लेकर नहीं था, बल्कि वह ऑफर को सही तरीके से समझना चाहता था। उसने लिखा कि नौकरी करने का एक बड़ा कारण कमाई भी होती है, इसलिए सैलरी से जुड़ी जानकारी लेना एक सामान्य और जरूरी सवाल है। उसने यह भी कहा कि अगर संभावित कर्मचारियों के साथ कंपनी का रवैया ऐसा है, तो कंपनी के लिए भी शुभकामनाएं।

सोशल मीडिया ने कहा- ‘अच्छा हुआ वहां नौकरी नहीं मिली’

पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स उम्मीदवार के समर्थन में आ गए। लोगों ने कहा कि किसी भी नौकरी को स्वीकार करने से पहले इन-हैंड सैलरी, कटौती और अन्य शर्तों की जानकारी लेना बिल्कुल जायज है। एक यूजर ने लिखा कि 2 LPA का पैकेज काफी कम है और ऐसी जगह काम करने से बच जाना बेहतर है।

कंपनी के रवैये पर उठे सवाल

कई लोगों ने कहा कि अगर कोई कंपनी शुरुआती बातचीत में ही सैलरी से जुड़े सवालों पर ऐसा व्यवहार करती है, तो भविष्य में कर्मचारियों के साथ उसका रवैया कैसा होगा, यह सोचने वाली बात है। एक यूजर ने मजाक में कहा कि अगर बाद में कर्मचारी वेतन बढ़ाने की मांग करता, तो शायद कंपनी उसे यह कहकर मना कर देती कि “हम यहां अनुभव के लिए काम करते हैं।”

जॉब मार्केट में पारदर्शिता की मांग

इस घटना ने एक बार फिर नौकरी में पारदर्शिता को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। उम्मीदवारों का कहना है कि सैलरी, इन-हैंड पेमेंट और कंपनी की नीतियों के बारे में पहले से स्पष्ट जानकारी मिलना जरूरी है, ताकि दोनों पक्ष सही फैसला ले सकें।

किसिंग वीडियो वायरल होने के बाद बदला पूरा मामला, सोशल मीडिया ने पूछ लिया ये सवाल

3 लाख सैलरी के बाद भी लाइफ में नहीं मिल रहा सुकून, इंजीनियर की ये पोस्ट हो रही खूब वायरल

सोशल मीडिया पर एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर का पोस्ट काफी वायरल हो रहा है। पोस्ट में इंजीनियर ने बताया कि, हर महीने 3 लाख रुपये सैलरी मिलने के बावजूद वह रोज 15-16 घंटे काम करने की वजह से पूरी तरह थक चुका है। लगातार काम का दबाव, लंबे घंटे और निजी जीवन के लिए समय न मिलने की वजह से ये नौकरी उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण बन गई। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है, वहीं कई लोग इस पर अपनी राय भी रख रहे हैं।

r/IndiaCareers पर शेयर की गई सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने एक Reddit पोस्ट किया। इस पोस्ट का टाइटल था “महीने में 3 लाख रुपये कमा रहा हूं… लेकिन फिर भी खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहा हूं।” इस पोस्ट में इंजीनियर ने अपनी मानसिक थकान और बर्नआउट का अनुभव शेयर किया।

महीने की 3 लाख है सैलरी

यूज़र ने लिखा, “मैं टेक इंडस्ट्री में काम करता हूं, महीने में 3 लाख रुपये से ज्यादा कमाता हूं और मेरे पास चार साल का अनुभव है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि ग्रेजुएशन के बाद से मैं एक ही मिड-साइज स्टार्टअप में काम कर रहा हूं।” उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उनकी सैलरी लगातार बढ़ी, लेकिन इसके बावजूद अब उन्हें अपनी नौकरी में पहले जैसी खुशी और संतुष्टि महसूस नहीं हो रही है।

रोज उसी काम से थक गया हूं

उन्होंने आगे बताया कि अब काम पहले जैसा चुनौतीपूर्ण नहीं रहा और रोज एक ही तरह का काम करते-करते वह थक चुके हैं। यूजर ने लिखा, “आजकल ऐसा लगता है कि मैं दिन-रात बस एक ही काम कर रहा हूं। मुझे महसूस होता है कि मैंने कुछ नया सीखना बंद कर दिया है। इसके अलावा काम का दबाव इतना ज्यादा है कि कई बार रोज 15 से 16 घंटे तक काम करना पड़ता है।” पोस्ट में यूजर ने बताया कि नई नौकरी के लिए इंटरव्यू की तैयारी करना भी उनके लिए आसान नहीं है।

इंटरव्यू की तैयारी के लिए वक्त नहीं

पोस्ट में यूजर ने बताया कि नई नौकरी के लिए इंटरव्यू की तैयारी करना भी उनके लिए आसान नहीं है। उन्होंने लिखा, “मेरे पास अपने लिए बिल्कुल समय नहीं बचता। मैं आगे बढ़ना चाहता हूं, लेकिन सबसे बड़ी परेशानी यह है कि इंटरव्यू की तैयारी के लिए वक्त ही नहीं मिल पाता। ऊपर से इस समय बहुत कम कंपनियां भर्ती कर रही हैं। अगर नौकरी बदलनी है, तो कम से कम 3 से 4 महीने की तैयारी करनी होगी और यह सब उसी काम के साथ करना पड़ेगा, जिसने पहले से ही मुझे पूरी तरह थका दिया है।”

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लोगों से मांगी सलाह

पोस्ट के आखिर में इंजीनियर ने ऐसे लोगों से सलाह मांगी, जो पहले इसी दौर से गुजर चुके थे। इसके बाद कई यूजर्स ने नौकरी बदलने, मेंटल हेल्थ का ध्यान रखने और वर्क-लाइफ बैलेंस बेहतर करने जैसे सुझाव दिए। एक यूजर ने कॉर्पोरेट नौकरी के अलावा दूसरे विकल्प तलाशने की सलाह दी। उन्होंने कमेंट किया, “क्यों न अपना कुछ शुरू करें? जरूरी नहीं कि वह टेक से जुड़ा हो। यह आपकी हॉबी, किसी इवेंट या छोटा-सा ऑनलाइन बिजनेस भी हो सकता है। शुरुआत में शायद उससे खर्च न निकल पाए, लेकिन आपको खुशी जरूर मिलेगी। और अगर बाद में लगे कि यह सही नहीं है, तो आप दोबारा कॉर्पोरेट नौकरी में वापस जा सकते हैं।”

एक अन्य यूजर ने सलाह दी कि, “तुम्हें तैयारी के लिए 3-4 महीने क्यों चाहिए? 10-15 दिन की छुट्टी लो और दूसरी कंपनियों में आवेदन करना शुरू कर दो। मुझे लगता है कि तुम इंटरव्यू देने से घबरा रहे हो, क्योंकि काफी समय से कोई इंटरव्यू नहीं दिया है। थोड़ा ब्रेक लो और अप्लाई करना शुरू करो। अगर शुरुआत में चयन नहीं भी होता, तो चिंता की बात नहीं है, क्योंकि तुम्हारे पास पहले से नौकरी है।”

कई Reddit यूजर्स का मानना था कि इंजीनियर की सबसे बड़ी समस्या इंटरव्यू की तैयारी नहीं, बल्कि रोज़ 16 घंटे तक काम करना है। एक यूजर ने लिखा, “सबसे पहले किसी भी तरह अपने काम के घंटे कम करने की कोशिश करो। अगर जरूरत पड़े, तो स्वास्थ्य का कारण बता दो या फिर साफ कह दो कि तुम अपने लिए और परिवार के साथ ज्यादा समय बिताना चाहते हो। इसके अलावा, बिना किसी को बताए भी हर दिन अपने लिए थोड़ा समय निकालने की आदत डालो।”

IIT में एडमिशन नहीं मिला तो छात्र ने कर दी वेबसाइट हैक, अब मिल सकता है अपनी काबिलियत दिखाने का मौका

IIT कानपुर में साइबर सिक्योरिटी प्रोग्राम में दाखिला न मिलने के बाद एक छात्र का मामला चर्चा में आ गया है। छात्र ने कथित तौर पर IIT कानपुर और IIT मद्रास की वेबसाइट तक पहुंच बनाकर अपनी तकनीकी क्षमता दिखाने की कोशिश की। उसका कहना है कि उसका मकसद किसी सिस्टम को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि अपनी साइबर सिक्योरिटी स्किल साबित करना था। इस घटना के बाद जहां एक ओर हैकिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर IIT कानपुर छात्र की प्रतिभा को परखने और उसे सही दिशा देने पर विचार कर रहा है।

संस्थान अब कानूनी कार्रवाई से पहले उसकी तकनीकी योग्यता की जांच करने की तैयारी में है। ये मामला साइबर टैलेंट, सुरक्षा और युवाओं को मौके देने को लेकर नई बहस शुरू कर चुका है। वेबसाइट पर उसने संदेश छोड़ा—”Site is hacked. All I need is just a fair chance.” यानी उसे सिर्फ एक निष्पक्ष मौका चाहिए था।

छात्र का दावा

मामला सामने आने के बाद छात्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और Reddit पर कथित हैकिंग के स्क्रीनशॉट साझा किए। उसने दावा किया कि उसका उद्देश्य किसी सिस्टम को नुकसान पहुंचाना नहीं था, बल्कि अपनी साइबर सिक्योरिटी स्किल्स साबित करना था। छात्र के मुताबिक, उसने एडमिशन के लिए आवेदन किया, फीस जमा की, जरूरी दस्तावेज अपलोड किए और अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोजेक्ट्स की जानकारी भी दी थी।

हैकाथॉन में मौका नहीं मिलने से था नाराज

छात्र ने बताया कि सभी प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद उसका चयन नहीं हुआ। साथ ही, वह एडमिशन प्रक्रिया का हिस्सा रहे हैकाथॉन में भी शामिल नहीं हो सका। इसी के बाद उसने अपनी तकनीकी क्षमता दिखाने के लिए वेबसाइट में सेंध लगाने का दावा किया।

IIT कानपुर अब जांचेगा छात्र की काबिलियत

PTI की रिपोर्ट के अनुसार,  IIT कानपुर के डायरेक्टर मणिंद्र अग्रवाल ने बताया कि छात्र को इस सत्र में एडमिशन देना संभव नहीं है क्योंकि प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। हालांकि, संस्थान अब उसे बुलाकर एक विशेष टेस्ट के जरिए उसकी तकनीकी क्षमता जांचने पर विचार कर रहा है। अगर छात्र अपनी योग्यता साबित करता है, तो अगले एडमिशन चक्र में उसे मौका दिया जा सकता है।

वेबसाइट के कुछ हिस्सों तक पहुंच की पुष्टि

IIT कानपुर के निदेशक ने बताया कि छात्र ने IIT कानपुर और IIT मद्रास की आधिकारिक वेबसाइट के कुछ हिस्सों तक पहुंच बनाई थी। उन्होंने कहा कि फैकल्टी सदस्य और इंजीनियर छात्र से बातचीत करेंगे और उसे समझाएंगे कि बिना अनुमति किसी भी कंप्यूटर सिस्टम में प्रवेश करना कानून के खिलाफ है।

FIR दर्ज करने का था विचार, फिर बदला फैसला

IIT कानपुर ने शुरुआत में छात्र के खिलाफ FIR दर्ज कराने पर विचार किया था। लेकिन बाद में संस्थान ने पहले उसके दावों और तकनीकी क्षमता की जांच करने का फैसला लिया। अधिकारी के मुताबिक, IIT कानपुर साइबर सिक्योरिटी क्षेत्र में प्रतिभाशाली युवाओं को प्रोत्साहित करता रहा है।

पहले भी साइबर टैलेंट को मिला है मौका

इससे पहले IIT कानपुर ने एक ऐसे युवा को अपने C3iHub में काम करने का अवसर दिया था, जिसने CBSE के ऑनलाइन स्क्रीन-मार्किंग पोर्टल में सुरक्षा खामियों का पता लगाया था। अब इस छात्र का मामला भी चर्चा में है, जहां एक ओर अनधिकृत हैकिंग को लेकर सवाल हैं, वहीं दूसरी ओर उसकी साइबर स्किल्स को सही दिशा देने की संभावना भी दिखाई दे रही है।

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₹2 लाख सैलरी, नो लोन और अच्छी सेविंग्स… फिर भी 26 साल के युवक को क्यों लगता है कि वह गरीब है

पैसा इंसान की कई जरूरतें पूरी कर सकता है, लेकिन क्या यह हमेशा मन को संतुष्टि और सुरक्षा का एहसास भी देता है? ऐसा ही सवाल एक 26 वर्षीय युवक की कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। युवक ने बताया कि वह हर महीने करीब ₹2 लाख कमाता है और उस पर किसी तरह का कर्ज भी नहीं है, फिर भी उसे कई बार खुद को आर्थिक रूप से असुरक्षित महसूस होता है।

अपनी भावनाओं को साझा करते हुए उसने ऑनलाइन कम्युनिटी में बताया कि अच्छी कमाई के बावजूद भविष्य की जिम्मेदारियों और खर्चों को लेकर चिंता बनी रहती है। उसकी पोस्ट ने लोगों का ध्यान खींचा और यूजर्स ने इस बात पर चर्चा शुरू कर दी कि आर्थिक सफलता और मानसिक संतुष्टि के बीच कितना गहरा संबंध है।

छोटे कमरे से शुरू हुआ सफर

युवक ने बताया कि उसका बचपन काफी साधारण परिस्थितियों में बीता। उसके परिवार की कुल आय कभी ₹6-7 हजार रुपये महीने से ज्यादा नहीं रही। वह 21 साल की उम्र में पहली नौकरी मिलने तक बेहद सीमित संसाधनों में रहा। उसने बताया कि वह कभी सिर्फ 10×10 के छोटे कमरे में अपने परिवार के साथ रहता था। नौकरी लगने के बाद उसकी पहली प्राथमिकता अपने माता-पिता की जिंदगी आसान बनाना थी। उसने अपने माता-पिता को काम से आराम दिया और उन्हें अपने शहर में 2BHK घर में शिफ्ट कराया। वहीं, वह खुद बेंगलुरु में अपने 2BHK घर में रहता है।

कमाई का बड़ा हिस्सा बचत और निवेश में लगा देता है

युवक ने बताया कि वह अपनी सैलरी का बड़ा हिस्सा भविष्य के लिए सुरक्षित रखता है।

उसके अनुसार:

  • ₹30 हजार रुपये हर महीने म्यूचुअल फंड में निवेश करता है।
  • ₹10 हजार रुपये FD या RD में डालता है।
  • ₹10 हजार रुपये गोल्ड सेविंग में लगाता है।
  • ₹15-20 हजार रुपये हर महीने माता-पिता को भेजता है।
  • किराए और अन्य खर्चों पर करीब ₹25 हजार रुपये खर्च होते हैं।

नौकरी शुरू करने के बाद उसने अलग-अलग निवेशों में अच्छी रकम जमा कर ली है। उसके पास करीब ₹4 लाख के शेयर, ₹2 लाख की FD, ₹2-2.5 लाख का सोना और ₹6 लाख रुपये बैंक खाते में हैं।

परिवार के लिए खर्च किया पैसा, फिर भी नहीं आया ‘अमीर’ होने का एहसास

युवक ने बताया कि उसकी कमाई का बड़ा हिस्सा परिवार की सुविधाओं पर खर्च हुआ। उसने माता-पिता के घर को बेहतर बनाया, ₹60 हजार रुपये का स्कूटर खरीदा, ₹70 हजार रुपये का MacBook M2 और ₹25 हजार रुपये का OnePlus फोन लिया। इसके अलावा उसने माता-पिता के लिए सालाना ₹30 हजार रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस और खुद के लिए ₹24 हजार रुपये की लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी भी ली। लेकिन इन सब उपलब्धियों के बावजूद उसे लगता है कि वह अभी भी आर्थिक रूप से पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।

शादी, कार और जमीन के सपने बढ़ा रहे हैं भविष्य की चिंता

युवक ने बताया कि आने वाले समय में उसके कई बड़े खर्च सामने हैं। इसी वजह से वह मानसिक दबाव महसूस करता है।

उसकी योजनाओं में शामिल हैं:

  • शादी पर करीब ₹10 लाख खर्च करना।
  • ₹3-4 लाख की कार खरीदना।
  • ₹10-15 लाख की जमीन लेना।
  • करीब ₹2 लाख की बाइक खरीदना।

उसका कहना है कि बचत होने के बावजूद वह हर चीज एक साथ नहीं खरीद सकता और हर आर्थिक फैसला उसे किसी न किसी चीज का त्याग करने जैसा लगता है।

गांव लौटने पर होती है दूसरों से तुलना

युवक ने बताया कि सबसे ज्यादा अजीब उसे तब लगता है जब वह अपने गांव जाता है और ऐसे लोगों को देखता है जो उससे काफी कम कमाते हैं, लेकिन ज्यादा खुश नजर आते हैं। उसने लिखा कि उसके कई दोस्त दिहाड़ी मजदूरी करते हैं या ऑटो चलाते हैं। उनके लिए अतिरिक्त ₹1000 भी बड़ी खुशी लेकर आता है, जबकि वह अच्छी कमाई के बावजूद संतुष्ट महसूस नहीं कर पाता।

कर्ज से दूर रहना बना उसकी सबसे बड़ी आदत

युवक ने बताया कि उसके कई दोस्त अपनी इच्छाएं पूरी करने के लिए लोन लेते हैं, लेकिन उसने हमेशा कर्ज से बचने की कोशिश की। हालांकि, यही सोच कई बार उसके लिए परेशानी भी बन जाती है। छोटी-छोटी चीजें खरीदते समय भी वह सोचने लगता है कि क्या उसे पैसे खर्च करने चाहिए या नहीं।

सब हासिल किया, फिर भी तनाव खत्म नहीं हुआ’

युवक ने लिखा कि उसने जिंदगी को आरामदायक बनाने के लिए लगभग सभी जरूरी कदम उठा लिए हैं, फिर भी अंदर से तनाव महसूस करता है। उसने कहा कि ₹750 से ज्यादा की शर्ट खरीदने से पहले भी वह कई बार सोचता है। हालांकि वह बाहर खाना खाता है, दोस्तों के साथ घूमता है और यात्राएं भी करता है, लेकिन फिर भी उसे अमीर होने या संतुष्ट होने का एहसास नहीं होता।

Reddit यूजर्स ने दी सलाह- उपलब्धियों को पहचानो

पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने युवक को सलाह दी कि समस्या उसकी कमाई में नहीं बल्कि उस मानसिकता में है जो संघर्ष भरे बचपन से बनी है। एक यूजर ने कहा कि उसे अपनी पुरानी सोच और आज की उपलब्धियों के बीच संतुलन बनाना चाहिए। वहीं दूसरे यूजर ने सलाह दी कि वह खुद पर ज्यादा सख्ती न करे और अपनी मेहनत से हासिल की गई चीजों की सराहना करे।

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नौकरी जाने का दर्द तब और बढ़ जाता है जब कर्मचारी को लगे कि उसे अपनी बात रखने का मौका ही नहीं मिला। ऐसा ही दावा एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने किया है, जिसने एक भारतीय IT कंपनी में कॉन्ट्रैक्ट पर नौकरी शुरू करने के सिर्फ छह महीने बाद अचानक बाहर किए जाने की बात कही है।इंजीनियर के मुताबिक कंपनी ने खराब प्रदर्शन को कारण बताया, लेकिन न तो कोई ठोस सबूत दिखाया गया और न ही पहले कोई चेतावनी या फीडबैक दिया गया। अब यह मामला Reddit पर चर्चा का विषय बन गया है, जहां कई लोगों ने वर्कप्लेस में परफॉर्मेंस रिव्यू सिस्टम को लेकर सवाल उठाए हैं।

इंजीनियर ने मांगा जवाब

Reddit पोस्ट में इंजीनियर ने बताया कि उसे अचानक जानकारी दी गई कि उसका कॉन्ट्रैक्ट परफॉर्मेंस से जुड़ी चिंताओं के कारण खत्म किया जा रहा है। हालांकि, वह यह समझ नहीं पाया कि कंपनी ने यह फैसला किस आधार पर लिया। उसने सवाल उठाया कि रोजाना उसके साथ काम करने वाली क्लाइंट टीम से कोई फीडबैक क्यों नहीं लिया गया। इंजीनियर ने बताया कि सात लोगों की टीम में उसने पिछले 90 रिलीज किए गए स्टोरी पॉइंट्स में से 40 पर काम किया था।

बग्स और देरी के आरोपों पर भी जताई आपत्ति

इंजीनियर ने अपने ऊपर लगाए गए ज्यादा बग्स के आरोपों पर भी सफाई दी। उसका कहना था कि कई प्रोडक्शन इश्यू बाद में उसके पास इसलिए भेजे गए क्योंकि वे लाइव सिस्टम से जुड़े थे और उन्हें तुरंत ठीक करना जरूरी था। उसने यह भी बताया कि कुछ मिनट देर से होने वाली डेली स्टैंडअप मीटिंग को भी बाद में परफॉर्मेंस इश्यू के तौर पर देखा गया, जबकि टीम और मैनेजर को उसकी मेडिकल अपॉइंटमेंट की जानकारी पहले से थी।

AI ट्रेनिंग और ऑनलाइन स्टेटस मॉनिटरिंग पर भी सवाल

इंजीनियर ने कंपनी की कुछ नीतियों पर भी नाराजगी जताई। उसका कहना था कि अनिवार्य AI ट्रेनिंग सेशन उसके वास्तविक काम से ज्यादा जुड़े हुए नहीं थे। इसके अलावा, रिमोट कर्मचारियों से पूरे दिन Slack और Microsoft Teams पर एक्टिव स्टेटस बनाए रखने की उम्मीद को लेकर भी उसने सवाल उठाए। अपना अनुभव बताते हुए उसने लिखा कि सबसे ज्यादा निराशा इस बात से हुई कि उसे कोई चेतावनी, फीडबैक, पारदर्शिता या सुधार का मौका नहीं मिला।

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Reddit यूजर्स ने बताया अपना अनुभव

पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने इंजीनियर का समर्थन किया। कुछ लोगों ने कहा कि कंपनियों को नौकरी खत्म करने से पहले स्पष्ट फीडबैक और सुधार का अवसर देना चाहिए। एक यूजर ने लिखा कि ऐसी वर्क कल्चर में बदलाव की जरूरत है, जबकि कुछ अन्य लोगों ने कहा कि रिमोट कर्मचारियों के साथ कई जगह इसी तरह का व्यवहार देखने को मिलता है।

क्या परफॉर्मेंस रिव्यू सिस्टम में बदलाव की जरूरत है?

हालांकि कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि पूरी कहानी का सिर्फ एक पक्ष सामने आया है, लेकिन ज्यादातर लोगों ने इस बात पर सहमति जताई कि कर्मचारियों को किसी भी बड़े फैसले से पहले स्पष्ट संवाद, सही फीडबैक और अपनी स्थिति सुधारने का मौका मिलना चाहिए।

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44 साल की उम्र में 6.5 करोड़ का पोर्टफोलियो बनाकर मजे से नौकरी छोड़ रिटायर हो गया ये इंजीनियर, फिर बताया अपना फॉर्म्युला

Viral News: कॉर्पोरेट लाइफ की भागदौड़, काम के लंबे घंटे और ऑफिस की राजनीति से परेशान होकर क्या कोई अपनी सफल नौकरी को अलविदा कह सकता है? एक 44 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने ऐसा ही कर दिखाया है. लेकिन उन्होंने यह कदम किसी बिना तैयारी के नहीं बल्कि 6.5 करोड़ रुपये का एक मजबूत इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो बनाने के बाद उठाया है.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट (Reddit) पर My FIRE Journey: Walking Away at 44 टाइटल के साथ इस शख्स ने अपनी कहानी शेयर की है. अब उनकी ये स्टोरी टॉकिंग प्वाइंट बन गई है. इस इंजीनियर ने बताया कि वह इंजीनियरिंग से रिटायर नहीं हुए हैं बल्कि कॉर्पोरेट जीवन के बर्नआउट से रिटायर हुए हैं.

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आइए जानते हैं कि इस टेक पेशेवर ने इतनी कम उम्र में इतना बड़ा फंड कैसे खड़ा किया और उनका वह सीक्रेट फॉर्म्युला क्या है जिसने उन्हें काम के दबाव से मुक्ति और आजादी की जिंदगी दी.

14 घंटे काम और खराब होती सेहत: जीवन का वो टर्निंग पॉइंट

रेडिट पोस्ट के मुताबिक इस सॉफ्टवेयर इंजीनियर की शादी हो चुकी है और उनका एक 11 साल का बेटा है. उन्होंने देश के एक प्रतिष्ठित कॉलेज से अपनी यूजी और पीजी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और अपने करियर का लगभग पूरा हिस्सा स्टार्टअप कंपनियों में बिताया. कई बार तो उन्होंने कंपनी पर भरोसे के चलते महीनों तक बिना सैलरी के भी काम किया. उनकी पत्नी हमेशा से एक होममेकर रही हैं.

करियर के दौरान एक स्टार्टअप में रेफरल के जरिए शामिल होना उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बना. वहां का माहौल बेहद टॉक्सिक था और हर तरफ बस ऑफिस पॉलिटिक्स चलती थी. उन्हें हफ्ते में 6 दिन और रोजाना 14-14 घंटे काम करना पड़ता था.

इस भयानक दबाव के कारण उनको नींद न आने की समस्या हो गई. वह बॉर्डरलाइन डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापे का शिकार हो गए. आखिरकार साल 2023 में उन्होंने एक ब्रेक लिया और रुककर अपनी सेहत व अपनी वित्तीय स्थिति दोनों का बारीकी से देखा.

कैसे बना 6.5 करोड़ का यह विशाल पोर्टफोलियो?

शुरुआत में वह पैसों को लेकर बहुत अधिक अनुशासित नहीं थे और न ही FIRE (Financial Independence, Retire Early) टाइप मूवमेंट उनका कोई टारगेट था. लेकिन उनके एक सही फैसले ने उनकी किस्मत बदल दी। एक फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लेने के बाद उन्होंने साल 2018 में एसआईपी के जरिए निवेश करना शुरू किया.

ESOP से मिला बड़ा बूस्ट

साल 2019 में जिस स्टार्टअप में वह काम कर रहे थे, उसका अधिग्रहण हो गया. इससे उन्हें ईशॉप के रूप में लगभग 1.4 करोड़ रुपये का पेआउट मिला. उन्होंने इस बड़ी रकम को खर्च करने के बजाय पूरी तरह इन्वेस्टेड रखा. नियमित निवेश और शेयर बाजार की शानदार ग्रोथ की बदौलत आने वाले सालों में उनका पैसा तेजी से बढ़ता चला गया.

अप्रैल 2026 में एसेट एलोकेशन कैसा था?

अप्रैल 2026 तक उनका कुल इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो करीब 6.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. उन्होंने अपने इस फंड को इस तरह से बांट रखा था। पोर्टफोलियो का लगभग 60% हिस्सा शेयरों में निवेशित था. शेष 40% हिस्सा डेट फंड्स, लिक्विड इन्वेस्टमेंट्स और प्रोविडेंट फंड (PF) की सेविंग्स में फैला हुआ था.

खर्च का गणित

इंजीनियर ने बताया कि उनके परिवार का सालाना खर्च लगभग 14 लाख रुपये है और टियर 1 शहर में उनका अपना खुद का घर भी है. जब उन्होंने देखा कि उनके पास जरूरत से ज्यादा पैसा है और काम करना अब मजबूरी नहीं बल्कि एक चॉइस बन चुका है तो उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी.

नौकरी छोड़ने के बाद जिंदगी में आए ये बड़े बदलाव

नौकरी छोड़ने के तीन महीने बाद ही उनके जीवन में बैंक बैलेंस से परे कई चमत्कारी बदलाव देखने को मिले हैं. उनका वजन काफी कम हो गया है. उनकी नींद की समस्या दूर हो गई है और अब उनका ब्लड प्रेशर पूरी तरह से नियंत्रण में है. अब उनका रोज का रूटीन पूरी तरह बदल चुका है. वह अपना समय ध्यान करने, एक्सरसाइज करने, अपने परिवार के साथ रहने, लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स पर रिसर्च करने और ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट्स में योगदान देने में बिताते हैं.

इंजीनियर ने बताए जल्दी रिटायर होने के 5 बड़े फॉर्म्युले

अपनी इस यात्रा से सीख लेते हुए उन्होंने उन लोगों के लिए कुछ जरूरी टिप्स और सबक साझा किए हैं जो जल्दी रिटायर होना चाहते हैं.

1- अपने फाइनेंशियल टारगेट तय करें: उन्होंने कहा कि काश उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में ही अपना FIRE टारगेट तय कर लिया होता. हर व्यक्ति को पता होना चाहिए कि उसे कितनी रकम के बाद काम छोड़ना है.

2- सैलरी के लिए नेगोशिएट करें: उन्होंने अपने पूरे 20 साल के करियर में एक बार भी अपनी सैलरी के लिए नेगोशिएट नहीं किया था जिससे उन्हें करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ होगा. इसलिए अपनी सैलरी को लेकर हमेशा नेगोशिएट करें.

3- लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन से बचें: वह कभी भी बहुत बड़े खर्च करने वाले इंसान नहीं रहे. फिजूलखर्ची से दूर रहने के कारण उनके लिए नियमित निवेश करना बहुत आसान हो गया.

4- खुद का घर होना फायदेमंद: उन्होंने बताया कि खुद का घर होने की वजह से उन्हें किराए का भुगतान नहीं करना पड़ता था. इससे उनके मासिक खर्चे बेहद कम हो गए और रिटायरमेंट के लिए आवश्यक कुल फंड का आकार भी छोटा हो गया.

5- पारिवारिक सहयोग: वह खुद को भाग्यशाली मानते हैं क्योंकि उनके माता-पिता और उनकी पत्नी के माता-पिता उनके बेटे की उच्च शिक्षा का खर्च उठाने वाले हैं, जिससे उनका भविष्य का एक बहुत बड़ा खर्च पहले ही हट गया.

क्या वह दोबारा नौकरी करेंगे?

इंजीनियर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पूरी तरह से काम करना बंद नहीं किया है. यदि भविष्य में उन्हें कोई सार्थक और अच्छा अवसर मिलता है तो वह दोबारा काम करने पर विचार कर सकते हैं. लेकिन फिलहाल वह अपने समय को अपनी शर्तों पर, अपने परिवार के साथ और कुछ नया सीखने में बिता रहे हैं.

अस्वीकरण (Disclaimer): यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर किसी यूजर द्वारा शेयर की गई सामग्री पर आधारित है. मनीकंट्रोल (Moneycontrol) ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही वह इनका समर्थन करती है.

AI के दौर में नौकरी गई तो क्या करें? 15 दिन में नई जॉब पाने वाले इंजीनियर ने बताए टिप्स

AI के बढ़ते प्रभाव और कंपनियों में लगातार हो रही छंटनी ने नौकरीपेशा लोगों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर टेक सेक्टर में बदलते हालात के बीच कर्मचारियों के लिए हर दिन नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे माहौल में एक भारतीय टेक प्रोफेशनल की कहानी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर खूब चर्चा बटोर रही है। नौकरी जाने के बाद जहां कई लोग लंबे समय तक नए अवसर की तलाश में संघर्ष करते हैं, वहीं इस शख्स ने मुश्किल वक्त में हार मानने के बजाय तेजी से कदम उठाए। उसने अपने अनुभव, नेटवर्क और लगातार कोशिशों के दम पर कुछ ही दिनों में नई नौकरी हासिल कर ली।

उसकी पोस्ट अब हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है। कई यूजर्स इसे मौजूदा जॉब मार्केट की सच्चाई और सही रणनीति का उदाहरण बता रहे हैं। यह कहानी बताती है कि बदलते दौर में सिर्फ स्किल्स ही नहीं, बल्कि नेटवर्किंग, तैयारी और धैर्य भी सफलता की बड़ी कुंजी बन चुके हैं।

घबराने के बजाय अपनाई नई रणनीति

नौकरी जाने के बाद उसने समय बर्बाद नहीं किया और तुरंत नए अवसरों की तलाश शुरू कर दी। उसने LinkedIn पर रिक्रूटर्स से संपर्क किया, लेकिन सबसे ज्यादा फायदा उसे अपने नेटवर्क और दोस्तों से मिला। उसने अपने परिचितों से अलग-अलग कंपनियों में रेफरल दिलाने के लिए मदद मांगी।

15 दिनों में बदली तस्वीर, मिले कई ऑफर

लगातार कोशिशों का नतीजा यह रहा कि उसे पांच कंपनियों में इंटरव्यू के मौके मिले। इनमें से दो कंपनियों ने मना कर दिया, लेकिन तीन कंपनियों ने उसे जॉब ऑफर दे दिए। आखिरकार उसने नोएडा की एक HCM डोमेन वाली प्रोडक्ट कंपनी का ऑफर स्वीकार किया और पुणे की दो स्टार्टअप कंपनियों के प्रस्ताव ठुकरा दिए।

लेऑफ के बावजूद नहीं मिला सेवरेंस

टेक प्रोफेशनल ने बताया कि पुरानी कंपनी ने उसे 31 जुलाई तक पेरोल पर रखा था, लेकिन प्रोबेशन पीरियड में होने के कारण उसे सेवरेंस पैकेज नहीं मिला। इसके बावजूद उसने इस मुश्किल दौर को हार मानने की बजाय नई शुरुआत का मौका बनाया।

नौकरी मिल गई, लेकिन तैयारी नहीं रुकेगी

अपने अनुभव से सीख लेते हुए उसने अन्य प्रोफेशनल्स को सलाह दी कि नौकरी मिलने के बाद भी तैयारी बंद नहीं करनी चाहिए। उसका कहना है कि मौजूदा जॉब मार्केट काफी चुनौतीपूर्ण है और भविष्य में प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है। इसलिए वह नई नौकरी मिलने के बाद भी DSA और सिस्टम डिजाइन जैसी स्किल्स पर काम जारी रखेगा।

Reddit पर लोगों ने की हिम्मत की तारीफ

इस पोस्ट पर कई यूजर्स ने उसकी मेहनत और सही समय पर नेटवर्किंग करने की रणनीति की सराहना की। कुछ लोगों ने कहा कि लेऑफ के बाद जल्दी नौकरी मिलना आत्मविश्वास बढ़ाता है, वहीं कई यूजर्स ने इसे आज के अनिश्चित जॉब मार्केट में तैयारी की जरूरत का उदाहरण बताया।

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Viral Post: ‘पहले हां कहा, फिर कर दिया मना’ सीट बदलने से इनकार करने वाले यात्री का पोस्ट वायरल

ट्रेन में सीट बदलने को लेकर एक पैसेंजर की सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों खूब वायरल हो रही है। पैसेंजर ने बताया कि दो युवतियों ने उनसे सीट बदलने का अनुरोध किया था और वह इसके लिए तैयार भी हो गया था। लेकिन बातचीत के दौरान उनके व्यवहार से उसे असहज महसूस हुआ, जिसके बाद उसने अपना फैसला बदल दिया। इस घटना को शेयर करते हुए पैसेंजर ने पूछा कि क्या दूसरे लोगों ने भी ट्रेनों में अक्सर होने वाले “एडजस्ट कर लीजिए” वाले दबाव का सामना किया है। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

सीट बदलने को लेकर पोस्ट वायरल

Reddit पोस्ट में व्यक्ति ने बताया, “लड़की ने मुझसे सीट बदलने के लिए कहा, लेकिन उसका व्यवहार ठीक नहीं था” टाइटल से शेयर किए गए। पैसेंजर ने बताया कि, वह ट्रेन के 3E कोच में मिडिल बर्थ पर सफर कर रहा था। तभी दो महिलाएं उसके पास आईं और सीट बदलने का अनुरोध किया। उनमें से एक की उसी कंपार्टमेंट में ऊपरी बर्थ थी, जबकि दूसरी महिला की सीट उसी कोच में किसी दूसरे स्थान पर थी। पैसेंजर ने बताया, “मैंने शुरुआत में सीट बदलने के लिए हां कर दी थी।”

सीट देने से कर दिया मना

उन्होंने कहा कि, “मैंने अपनी सीट पर पहले ही बिस्तर लगा लिया था, इसलिए उसे बस उस सीट पर बिस्तर लगाना चाहिए। ठीक है, है ना?” उनकी सिर्फ एक शर्त थी कि उन्होंने अपनी सीट पर पहले से ही बिस्तर लगा रखा है, इसलिए दूसरी सीट पर भी बिस्तर वही लगा दें। उसके मुताबिक, इस पर महिला ने जवाब दिया, “ये भी मैं ही करूं? इतना तो खुद कर लो।” पैसेंजर का कहना है कि इसी जवाब के बाद उसने अपना फैसला बदलने का मन बना लिया। पैसेंजर ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मुझे नहीं पता उस समय मुझे क्या हुआ, लेकिन मैं नाराज हो गया और मैंने साफ कह दिया, ‘आप किसी और से पूछ लीजिए, मैं किसी भी हालत में सीट नहीं बदलूंगा।'”

लोगों ने कहा सीट बदलने को

उसके मुताबिक, महिला वहां से चली गई, लेकिन कुछ देर बाद लौटकर बोली, “ठीक है, मैं बिस्तर लगा दूंगी।” वहीं, तब तक पैसेंजर अपना फैसला बदल चुका था और उसने सीट बदलने से इनकार कर दिया। पैसेंजर के मुताबिक, मामला तब और बढ़ गया जब दूसरे यात्रियों ने भी उससे सीट बदलने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने कहा, “अरे, जाने दीजिए, सबको कहीं न कहीं जाना है। थोड़ा एडजस्ट करके चलना चाहिए।” इस पर उसने पास बैठे एक पैसेंजर से पूछा, “अगर ऐसा है, तो क्या आप अपनी सीट बदलने के लिए तैयार हैं?” जवाब में उस पैसेंजर ने कहा कि वह अपने परिवार के साथ सफर कर रहा है, इसलिए ऐसा नहीं कर सकता।

फैसले पर कोई पछतावा नहीं

पोस्ट में आगे पैसेंजर ने लिखा कि उसने भी बाकी सभी की तरह पूरा किराया देकर टिकट लिया है और उसका मानना है कि सीट बदलने की बात विनम्रता से रखी जानी चाहिए, यह मानकर नहीं कि सामने वाला हर हाल में मान जाएगा। उसने लिखा, “मुझ पर रौब मत दिखाइए और फिर यह उम्मीद मत रखिए कि मैं आपकी हर बात मान लूंगा।” उसने यह भी कहा कि कुछ देर के लिए आसपास बैठे लोगों की नजरों से उसे अपराधबोध जरूर हुआ, लेकिन बाद में उसे अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं हुआ।

यूजर ने किया कमेंट

सोशल मीडिया पर यह पोस्ट सामने आने के बाद कई लोगों ने अपनी राय दी। बड़ी संख्या में यूजर्स ने पैसेंजर के फैसले का समर्थन किया। वहीं, कई अन्य लोगों ने भी ट्रेन यात्रा के दौरान सीट बदलने के लिए दबाव बनाए जाने से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा की। एक यूजर ने लिखा, “ओपी, बदतमीज लोगों के लिए कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए। अगर उनका व्यवहार अच्छा होता, तो शायद उन्हें सीट मिल जाती। यह पूरी तरह उनकी अपनी गलती है।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “लोग अक्सर किसी की विनम्रता को उसकी कमजोरी समझ लेते हैं। तुमने बिल्कुल सही किया। जब सामने वाले ने देखा कि तुमने पहले से बिस्तर लगा रखा है, तब उसे सम्मान से बात करनी चाहिए थी। यह सामान्य शिष्टाचार है।” एक और यूजर ने रिएक्शन देते हुए कहा, “तुम्हारा जवाब बिल्कुल सही था। ऐसे लोगों को सीधे और साफ जवाब मिलना ही चाहिए।”

फाइनल राउंड तक पहुंचा उम्मीदवार, फिर कंपनी ने ऐसा किया जिसकी उम्मीद नहीं थी

एक अच्छी नौकरी की तलाश में उम्मीदवार कई चरणों से गुजरते हैं और हर सफल राउंड के बाद उनकी उम्मीदें बढ़ने लगती हैं। ऐसा ही कुछ एक सीनियर एग्जीक्यूटिव पद के उम्मीदवार के साथ हुआ, जिसे लंबी इंटरव्यू प्रक्रिया के बाद लगा कि अब उसका चयन लगभग तय है। कंपनी की ओर से मिले सकारात्मक संकेतों और भरोसे भरी बातचीत ने उसकी उम्मीदों को और मजबूत कर दिया था। लेकिन अंतिम चरण के बाद कहानी अचानक बदल गई। जिस कंपनी से जल्द जवाब मिलने की उम्मीद थी, वहां से कोई संदेश नहीं आया।

न ऑफर की जानकारी मिली और न ही प्रक्रिया आगे बढ़ने को लेकर कोई अपडेट। इस अनुभव ने हायरिंग प्रक्रिया में उम्मीदवारों के साथ होने वाले व्यवहार और ‘घोस्टिंग’ की समस्या पर नई बहस छेड़ दी है।

5 घंटे के फाइनल इंटरव्यू के बाद भी नहीं मिला अपडेट

उम्मीदवार ने यह अनुभव Reddit पर साझा किया और पूछा कि क्या सीनियर लेवल की भर्ती प्रक्रिया में ऐसा व्यवहार सामान्य है। उसने बताया कि वो एक बड़ी टेलीकॉम कंपनी में Senior Director पद के लिए इंटरव्यू देने गया था।

फाइनल राउंड के लिए उसने करीब 5 घंटे कंपनी के ऑफिस में बिताए। इस दौरान उसने लीडरशिप टीम के सामने प्रेजेंटेशन दिया और कई बड़े अधिकारियों से मुलाकात की।

रिक्रूटर के भरोसे से बढ़ी उम्मीदें

उम्मीदवार के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया के दौरान रिक्रूटर का रवैया काफी सकारात्मक था। रिक्रूटर ने उसे भरोसा दिलाया कि कंपनी उसकी जरूरतों के हिसाब से भूमिका तैयार करने की कोशिश करेगी। उम्मीदवार ने बताया कि क्योंकि वो शहर बदलना नहीं चाहता था, इसलिए रिक्रूटर ने दूसरे ऑफिस से रिपोर्टिंग जैसी संभावनाओं पर भी चर्चा की थी।

‘आपकी पसंद के हिसाब से बनाएंगे भूमिका’

उम्मीदवार का कहना है कि रिक्रूटर ने ये भी कहा था कि भूमिका को उसके पसंदीदा काम के अनुसार तैयार किया जा सकता है। इसके अलावा जल्दी निर्णय लेने का संकेत भी दिया गया था।

इन बातों के बाद उम्मीदवार को लगा कि चयन लगभग तय है। उसने इंटरव्यू से जुड़ी यात्रा खर्च की जानकारी भी तुरंत जमा कर दी।

धन्यवाद मेल का भी नहीं आया जवाब

इंटरव्यू के चार दिन बाद उम्मीदवार ने कंपनी को धन्यवाद मेल भेजा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसी बीच उसने देखा कि कंपनी ने उसी पद की वैकेंसी दोबारा ऑनलाइन डाल दी।

दो हफ्ते बीत जाने के बाद भी न तो उसे रिजेक्शन मिला, न प्रक्रिया में देरी की जानकारी दी गई और न ही कोई अपडेट आया।

उम्मीदवार ने पूछा- क्या यह सामान्य है?

अपनी पोस्ट में उम्मीदवार ने सवाल किया कि क्या सीनियर लेवल की भर्ती में पहले इतना भरोसा दिलाकर बाद में पूरी तरह संपर्क खत्म कर देना आम बात है।

उसने इसे “उम्मीदें बढ़ाने के बाद अचानक गायब हो जाना” बताया और Reddit यूजर्स से अपने अनुभव साझा करने को कहा।

रिक्रूटर और हायरिंग मैनेजर की भूमिका अलग होती है

Reddit पर कई लोगों ने कहा कि रिक्रूटर का सकारात्मक व्यवहार हमेशा नौकरी पक्की होने का संकेत नहीं होता। उनके अनुसार, रिक्रूटर का काम उम्मीदवारों को प्रक्रिया में बनाए रखना होता है, जबकि अंतिम फैसला हायरिंग मैनेजर और कंपनी के अधिकारियों का होता है।

कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि कई बार बजट में बदलाव, कंपनी की अंदरूनी मंजूरी या संगठनात्मक बदलाव के कारण भर्ती रुक सकती है।

खर्च की वापसी और नौकरी को अलग रखें

कुछ लोगों ने उम्मीदवार को सलाह दी कि यात्रा खर्च की वापसी को नौकरी के फैसले से अलग रखें। उनके अनुसार, उम्मीदवार को खर्च के लिए अलग से स्पष्ट ईमेल भेजकर भुगतान की समय सीमा मांगनी चाहिए।

वहीं, कुछ यूजर्स ने सुझाव दिया कि उम्मीदवार को कंपनी के अधिकारियों से संपर्क बनाए रखना चाहिए, क्योंकि भविष्य में दूसरे अवसर मिल सकते हैं।

हायरिंग प्रक्रिया में बढ़ रही है ‘घोस्टिंग’ की समस्या

ये मामला एक बार फिर दिखाता है कि लंबी भर्ती प्रक्रिया और सकारात्मक संकेतों के बावजूद अंतिम फैसला हमेशा निश्चित नहीं होता। उम्मीदवारों के लिए जरूरी है कि वे ऑफर लेटर मिलने तक दूसरी संभावनाओं को खुला रखें और केवल मौखिक आश्वासनों पर निर्भर न रहें।

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