‘तुझे पैदा करके गलती कर दी’, ₹95 हजार की नौकरी जाने के बाद बदल गया घर का माहौल, 22 साल के युवक ने बताया कैसे माता-पिता के तानों ने बढ़ाई मुश्किलें

एक अच्छी नौकरी और मोटी सैलरी होने के बावजूद जिंदगी हमेशा एक जैसी नहीं रहती। कभी-कभी हालात ऐसे बदलते हैं कि इंसान को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। लेकिन मुश्किलें तब और बढ़ जाती हैं, जब बाहर की परेशानियों के बीच अपने ही साथ देना छोड़ दें। सोशल मीडिया पर 22 साल के एक युवक की आपबीती कुछ ऐसी ही कहानी बयां कर रही है। नौकरी छूटने के बाद उसकी जिंदगी में आए बदलाव और परिवार के कथित व्यवहार ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

युवक की पोस्ट पर कई लोग उसके दर्द को समझने की कोशिश कर रहे हैं, तो कुछ ने उसे आत्मनिर्भर बनने और भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने की सलाह दी है। इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि मुश्किल दौर में परिवार का साथ कितना मायने रखता है।

नौकरी छूटते ही घर में बदल गया व्यवहार

22 वर्षीय युवक ने बताया कि थर्ड-टियर कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद उसे आईटी सेक्टर में नौकरी मिली थी। उसकी मासिक सैलरी करीब 95,000 रुपये थी, लेकिन छह महीने बाद ही उसकी नौकरी चली गई। अब उसे बेरोजगार हुए दो महीने हो चुके हैं।

युवक के मुताबिक, पिछले एक महीने से माता-पिता उसे कथित तौर पर निकम्मा और दूसरों पर निर्भर रहने वाला कहकर ताने दे रहे हैं। उसने अपनी पोस्ट का शीर्षक रखा, ‘Parents said Galti kardi tujhe paida karke’। उसके अनुसार, एक दिन माता-पिता ने उसकी थाली से खाना हटा दिया और कहा कि उसे पैदा करके गलती कर दी।

दो दिन से खाना नहीं मिलने का दावा

युवक ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि उसने पिछले दो दिनों से कुछ नहीं खाया था और घर में किसी ने उससे खाने के बारे में नहीं पूछा। उसने यह भी आरोप लगाया कि परिवार ने कूलर उससे ले लिया और पेट्रोल खत्म होने पर उसे अपनी बाइक करीब तीन किलोमीटर तक खींचनी पड़ी।

उसका कहना है कि आर्थिक परेशानी के साथ घर का माहौल भी उसकी मानसिक स्थिति पर असर डाल रहा है। वह नाइट गार्ड की नौकरी तलाश रहा था, ताकि काम के साथ भविष्य के इंटरव्यू की तैयारी कर सके। उसने फूड डिलीवरी का काम भी आजमाया, लेकिन उसके मुताबिक, इससे तैयारी के लिए समय नहीं मिल पा रहा था।

अच्छी कमाई के बावजूद नहीं की बचत

युवक ने बताया कि उसने अपनी कमाई से बाइक खरीदी थी और इसके लिए कोई ईएमआई नहीं चल रही थी। हालांकि, नौकरी जाने के बाद उसे महसूस हुआ कि भविष्य की मुश्किलों के लिए पर्याप्त बचत करना कितना जरूरी है।

उसने दूसरे युवाओं को सलाह दी कि बाइक या कार जैसी महंगी चीजें खरीदने से पहले कुछ पैसे आपातकालीन जरूरतों के लिए जरूर बचाकर रखें।

Parents said “Galti kardi tujhe paida karke”

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Reddit यूजर्स ने बढ़ाया हौसला

युवक की कहानी पर कई लोगों ने उसे हिम्मत रखने और नौकरी की तलाश जारी रखने की सलाह दी। एक यूजर ने उसकी जॉब प्रोफाइल पूछते हुए अपने परिचितों के जरिए नौकरी के अवसर तलाशने में मदद की पेशकश की। कुछ लोगों ने उसे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और भविष्य में अपनी परिस्थितियों के अनुसार अलग रहने पर विचार करने को कहा। यह मामला युवक की Reddit पोस्ट में किए गए दावों पर आधारित है, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी उसकी कहानी एक अहम सवाल उठाती है मुश्किल समय में अपनों को तानों की जरूरत होती है या थोड़े सहारे और समझदारी की?

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बीमार पत्नी के इलाज के लिए 80 साल का यह बुजुर्ग रोज चलाता है 16 घंटे टैक्सी, इनकी कहानी सुन रो पड़ेगा दिल

लगभग 80 साल की उम्र में भी, जब उनका शरीर उनके इरादों का साथ नहीं देता, रवींद्रनाथ सरकार हर सुबह अपनी पीली टैक्सी का स्टीयरिंग व्हील थाम लेते हैं। वे ऐसा किसी बड़े मकसद के लिए नहीं, बल्कि अपनी 67 साल की बीमार पत्नी का खर्च उठाने के लिए करते हैं। घर का गुजारा करने के लिए वे किराए की पीली टैक्सी चलाते हैं।

सोशल मीडिया पर चैताली बोस नाम की यूजर द्वारा शेयर किए गए इस वीडियो ने हज़ारों लोगों का दिल जीत लिया है। लोग उनके जज्बे की तारीफ कर रहे हैं और कोलकाता के दम दम में रेलवे ट्रैक के पास रहने वाले इस बुज़ुर्ग जोड़े की मदद करने की अपील कर रहे हैं। क्लिप में बताया गया है कि सरकार, जो लगभग 52 सालों से गाड़ी चला रहे हैं, रोजाना सुबह 6 बजे से लेकर 16 घंटे तक कोलकाता की सड़कों पर गुजारा करने के लिए टैक्सी चलाते हैं।

उम्र बढ़ने और सेहत खराब होने के बावजूद, वे बिना एक दिन की छुट्टी लिए किराए की पीली टैक्सी चलाते रहते हैं। कभी-कभी वे रात 11 बजे तक गाड़ी चलाते हैं, और अगर उन्हें पूरे दिन कोई सवारी न मिले या एक रुपया भी न कमा पाएं, तब भी उन्हें टैक्सी का किराया मालिक को देना ही पड़ता है। यह जोड़ा, जिसकी देखभाल करने वाला कोई बच्चा नहीं है, उनकी कमाई से ही गुजारा करता है, लेकिन उनकी कमाई दवाइयां खरीदने के लिए काफी नहीं है।

उनकी अपनी सेहत की दिक्कतों को देखते हुए उनकी कहानी और भी खास हो जाती है। महिला ने बताया कि सरकार को लंबे समय से अस्थमा की बीमारी है, जबकि उनकी पत्नी को दिल से जुड़ी एक बीमारी है। बोस ने बताया कि इतनी तकलीफों के बावजूद, 80 साल के ये बुज़ुर्ग अपनी सवारी से उतना ही किराया लेते हैं जितना वे सही समझें।

इस जोड़े के रहने की हालत भी बहुत मुश्किल है। वे टीन के एक छोटे से घर में रहते हैं, जिसकी छत मॉनसून के दौरान टपकती है। बारिश का पानी घर के अंदर आ जाता है, और मरम्मत करवाना उनकी पहुंच से बाहर है। क्लिप के आखिर में, बोस ने लोगों से अपील की कि वे जिस तरह से भी हो सके, उनकी मदद के लिए आगे आएं।

उनकी कहानी ने ऑनलाइन लोगों के दिलों को छू लिया है। एक यूजर ने कहा, “जिन लोगों ने अपनी ज़िंदगी सम्मान के साथ काम करते हुए बिताई है, उन्हें कभी भी अपने बुढ़ापे के दिन गुजारा करने के लिए संघर्ष करते हुए नहीं बिताना चाहिए। अगर हम थोड़ी सी भी मदद कर सकते हैं, तो हमें करनी चाहिए। दया कोई दान नहीं है, बल्कि एक-दूसरे के प्रति हमारा फर्ज है।”

एक और व्यक्ति ने कहा, “ऐसे हालात में लोगों को भीख तक मांगनी पड़ती है और वे इस उम्र में भी कड़ी मेहनत कर रहे हैं। एक ने लिखा कि “मुझे लगता है कि अन्नपूर्णा योजना के लिए तय की गई रकम कम कर दी जानी चाहिए और उस पैसे को बुढ़ापे की पेंशन के तौर पर दिया जाना चाहिए। सक्षम महिलाएं अपनी कोशिशों से कुछ कमा सकती हैं, लेकिन इन बुज़ुर्गों की काम करने की क्षमता कम होती है और उन्हें ज्यादा पैसे की जरूरत होती है।”