रैपिडो ड्राइवर ने पकड़ लिया हाथ और देने लगा क्रीपी इस्माइल! इस लड़की ने सुनाई पूरी दास्तां तो आया ये रिएक्शन

बेंगलुरु की एक महिला ने रैपिडो बाइक टैक्सी के एक राइडर पर गलत तरीके से छूने का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि उसे उसकी रिहायशी सोसाइटी के बाहर छोड़ने के बाद भी राइडर वहीं रुका रहा, जिससे वह असुरक्षित महसूस करने लगी। महिला ने इस घटना के बारे में ‘X’ (ट्विटर) पर पोस्ट किया, जिस पर बेंगलुरु सिटी पुलिस और राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म का ध्यान गया।

अपनी पोस्ट में महिला ने बाइक-टैक्सी यात्रियों की सुरक्षा के लिए किए गए इंतजामों पर सवाल उठाए। उसने बताया कि बारिश की वजह से वह पहले राइड लेने में हिचकिचा रही थी, लेकिन राइडर ने बार-बार उससे बुकिंग कैंसिल न करने के लिए कहा। उसने लिखा- “मुझे समझ नहीं आता कि ऐसे राइडर्स के लिए रैपिडो की कोई जवाबदेही कैसे नहीं है।”

“उसने मुझे अजीब सी मुस्कान के साथ मेरा हाथ पकड़ लिया”

महिला ने बताया कि ड्राइवर बहुत ज्यादा घुल-मिलकर बात कर रहा था और उसने उसे रेनकोट देने की भी कोशिश की। महिला ने आगे बताया कि ड्राइवर बार-बार पूछ रहा था कि क्या वह सहज (कंफर्टेबल) है। उसने कहा, “उसने मुझे मेरी सोसाइटी के पास छोड़ा और जब मैं उसे उसका हेलमेट वापस दे रही थी, तो उसने कुछ सेकंड के लिए मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे देखकर अजीब सी मुस्कान दी।”

उन्होंने आगे बताया कि जब उन्होंने पेमेंट करने के लिए QR कोड मांगा तो राइडर ने कहा कि बारिश की वजह से उसका फोन काम नहीं कर रहा है और उसने उनका फोन नंबर मांग लिया। फिर पेमेंट के लिए अपना नंबर देने को कहा। मैंने QR कोड पर ही जोर दिया और पेमेंट कर दिया।”

“मैं बहुत असुरक्षित और सदमे में महसूस कर रही थी”

अपने घर पर पहुंचने के बाद उन्होंने बताया कि वह तुरंत अपनी रेजिडेंशियल सोसाइटी के अंदर नहीं गईं क्योंकि उन्हें असुरक्षित महसूस हो रहा था। उन्हें तब और भी बड़ा झटका लगा, जब एक सिक्योरिटी गार्ड के जाने के लिए कहने के बावजूद राइडर वहीं एंट्री गेट के पास खड़ा रहा। गार्ड के दूसरी बार कहने पर वह वहां से गया।

महिला ने लिखा- “मैं बहुत असुरक्षित महसूस कर रही थी और सदमे में थी। हकीकत यह है कि खराब सुरक्षा इंतजामों की वजह से पीक आवर्स के दौरान भी आप बाइक, ऑटो या कैब में सुरक्षित महसूस नहीं कर सकते।”

बेंगलुरु सिटी पुलिस और रैपिडो ने उनकी शिकायत पर प्रतिक्रिया दी

महिला की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए बेंगलुरु सिटी पुलिस ने उनसे लोकेशन की जानकारी और संपर्क विवरण डायरेक्ट मैसेज (DM) के जरिए साझा करने को कहा। वहीं रैपिडो ने भी जवाब दिया, इस अनुभव के लिए माफी मांगी और आरोपों की गंभीरता को स्वीकार किया। उन्होंने लिखा, “इस परेशान करने वाले अनुभव के लिए हमें सचमुच खेद है। बिना सहमति के शारीरिक संपर्क और ऐसा व्यवहार जिससे आप असुरक्षित महसूस करें, बहुत गंभीर मामला हैं। उस कैप्टन को रैपिडो प्लेटफॉर्म से हमेशा के लिए सस्पेंड कर दिया गया है।”

रैपिडो ने आगे कहा-अगर कभी भी राइड के दौरान आप असहज या असुरक्षित महसूस करें तो तुरंत मदद पाने के लिए रैपिडो ऐप में दिए गए SOS विकल्प का इस्तेमाल करें। आपकी सुरक्षा और सम्मान हमारे लिए बहुत मायने रखते हैं।”

“यह बहुत भयानक है”

इस घटना ने इंटरनेट पर लोगों को गुस्से से भर दिया है और कई लोग रैपिडो से महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। एक व्यक्ति ने कमेंट किया- “हे भगवान यह बहुत भयानक है। बिल्कुल भी बर्दाश्त करने लायक नहीं। उम्मीद है कि आप ठीक होंगी।”

एक यूजर ने कहा, “रैपिडो (Rapido) का इस्तेमाल करने से बचें। यहां डेटा प्राइवेसी नहीं है… राइड कैंसिल करने के बाद भी ड्राइवर आपको कॉल कर सकते हैं। हो सकता है कि इस बदतमीज इंसान ने आपका नंबर भी सेव कर लिया हो और वह आपसे संपर्क करने की कोशिश करे। भले ही थोड़ा महंगा पड़े, लेकिन उबर (Uber) या ओला (Ola) का इस्तेमाल करें। आप अपनी सुरक्षा के लिए पैसे दे रहे हैं।”

एक और व्यक्ति ने लिखा- “अरे बाप रे, यह तो बहुत ही डरावना है। उम्मीद है कि रैपिडो कोई ठोस कदम उठाएगा। नियमों को लागू करने के मामले में तो यह ऐप एकदम बेकार है।”

साल भर में 92 लाख का टैक्स दिया, अब 90 लाख की नौकरी भी नहीं मिल रही – Uber इंजीनियर के पोस्ट ने मचाया बवाल

नई दिल्ली। अच्छी सैलरी वाली नौकरी और लाखों रुपये का इनकम टैक्स देने के बाद भी नौकरी जाने का डर खत्म नहीं होता। ऐसा ही एक मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में है। Uber में सीनियर इंजीनियर होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि पिछले साल उन्होंने 92 लाख रुपये इनकम टैक्स दिया था। लेकिन अब पैटरनिटी लीव के दौरान नौकरी जाने के बाद वे नई नौकरी खोजने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने रेडिट (Reddit) पर 7 अक्टूबर 2026 को शेयर की गई उनकी पोस्ट के मुताबिक, घर में नवजात बच्चा है और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच नई नौकरी ढूंढना आसान नहीं होता है।

नौकरी छूटने का कारण रहा पैटरनिटी लीव

इंजीनियर का कहना है कि वे चार महीने की पैटरनिटी लीव (Paternity leave) पर थे, तभी उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। घर में नवजात बच्चा है और परिवार की मदद के लिए भी कोई खास सहारा नहीं है। ऐसे में बच्चे की देखभाल के साथ नई नौकरी ढूंढना उनके लिए मुश्किल हो रहा है।

उन्होंने बताया कि परिवार की जिम्मेदारियों के चलते वे नौकरी खोजने और इंटरव्यू की तैयारी पर पूरा समय नहीं दे पा रहे हैं। नौकरी जाने के बाद घर के खर्च और बच्चे की देखभाल की चिंता भी बढ़ गई है। वह कहते है कि नौकरी जाने के बाद उन्हें ऐसी नई नौकरी नहीं मिल पा रही है, जिसमें सालाना कम से कम 90 लाख रुपये मिलें।

सेवरेंस पे पर टैक्स से नाराज, भारत छोड़ने की कही बात

नौकरी जाने के बाद मिलने वाले पैसे यानी सेवरेंस पे (Severance pay) पर टैक्स लगने से भी इंजीनियर नाराज हैं। उनका कहना है कि नई नौकरी मिलने तक परिवार का खर्च चलाने के लिए उन्हें इस पैसे की जरूरत है। ऐसे में टैक्स कटने से उनकी परेशानी बढ़ सकती है। इंजीनियर ने कहा कि वे जल्द ही भारत छोड़ देंगे और वापस नहीं आना चाहते।

इस घटना ने एक बार फिर नौकरी की सुरक्षा, टैक्स और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन जैसे मुद्दों पर चर्चा शुरू कर दी है।

बेंगलुरु में Urban Company की सर्विस पर विवाद, पत्नी की अंगूठी चोरी होने के आरोप पर कंपनी का आया जवाब

ऑनलाइन ऐप से घर की सफाई के लिए प्रोफेशनल बुलाना आजकल आम बात है, लेकिन अगर इसी दौरान घर से कोई कीमती सामान गायब हो जाए तो भरोसे पर सवाल उठना लाजिमी है। बेंगलुरु के एक विज्ञापन पेशेवर ने Urban Company की क्लीनिंग सर्विस को लेकर ऐसा ही आरोप लगाया है। उनका दावा है कि घर की सफाई के दौरान उनकी पत्नी की शादी की सोने की अंगूठी गायब हो गई। मामला तब और चर्चा में आ गया, जब उन्होंने बताया कि पुलिस ने अंगूठी शहर से करीब 100 किलोमीटर दूर से बरामद की। इस घटना के बाद कंपनी की ग्राहक सेवा और ऑनलाइन बुकिंग वाली घरेलू सेवाओं की जवाबदेही पर बहस छिड़ गई है।

प्रीमियम क्लीनिंग सर्विस बुक की, फिर गायब हुई अंगूठी

बेंगलुरु के विज्ञापन पेशेवर शुभम मजूमदार ने LinkedIn पर अपना अनुभव साझा किया। उनके मुताबिक, उन्होंने Urban Company की InstaHelp सेवा के तहत घर की सफाई के लिए ‘Gold Expert’ कैटेगरी बुक की थी। इसी दौरान उनकी पत्नी की शादी की सोने की अंगूठी गायब हो गई।

मजूमदार ने आरोप लगाया कि सर्विस के लिए आए कर्मचारी ने अंगूठी चुराई। हालांकि, यह उनका आरोप है और मामले में किसी की दोषसिद्धि की जानकारी सामने नहीं आई है।

कंपनी से शिकायत की, लेकिन जवाब से नहीं हुए संतुष्ट

मजूमदार के मुताबिक, उन्होंने अंगूठी गायब होने की जानकारी तुरंत ऐप के जरिए कंपनी को दी। ग्राहक सहायता टीम ने उन्हें बताया कि कंपनी की रिकवरी टीम मामले की जांच करेगी और इसमें चार से पांच दिन लग सकते हैं।

उनका दावा है कि एक दिन बीतने के बाद भी कोई खास प्रगति नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने कंपनी के शिकायत अधिकारी से संपर्क कर मामले की जानकारी और संबंधित कर्मचारी का विवरण मांगा। लेकिन मजूमदार के अनुसार, उन्हें संतोषजनक जवाब मिलने के बजाय सामान्य तरह का संदेश मिला।

उन्होंने बताया कि कंपनी की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की सलाह भी दी गई, जबकि वह पहले ही पुलिस से संपर्क कर चुके थे।

100 किलोमीटर दूर से मिली अंगूठी, Uber भी करनी पड़ी बुक

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात अंगूठी की बरामदगी को लेकर सामने आई। मजूमदार ने दावा किया कि पुलिस ने अंगूठी बेंगलुरु से करीब 100 किलोमीटर दूर एक जगह से बरामद की। उनके मुताबिक, पुलिस को वहां तक पहुंचाने के लिए उन्हें इंटरसिटी Uber बुक करनी पड़ी।

शिकायत के बीच आया सर्विस रेटिंग का मैसेज

मजूमदार ने कंपनी के ऑटोमेटेड मैसेज के स्क्रीनशॉट भी साझा किए। उनका कहना था कि अंगूठी गायब होने की शिकायत के बीच कंपनी ने उनसे सर्विस को रेट करने और रिव्यू देने के लिए संदेश भेज दिया। इससे उनकी नाराजगी और बढ़ गई।

Urban Company ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए उनसे रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर निजी संदेश में साझा करने को कहा, ताकि मामले की जांच की जा सके। इस पर मजूमदार ने सवाल उठाया कि जब शिकायत पहले से दर्ज है, तो दोबारा जानकारी क्यों मांगी जा रही है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

इस घटना के बाद कुछ लोगों ने कंपनी की ग्राहक सेवा पर सवाल उठाए, जबकि कुछ यूजर्स ने ग्राहकों को कीमती सामान सुरक्षित रखने की सलाह दी। फिलहाल, यह मामला घरेलू सेवाओं में भरोसे, सुरक्षा और कंपनियों की जवाबदेही को लेकर चर्चा में है।

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GST Council Meeting: 7 अक्टूबर को नहीं होगी GST काउंसिल की बैठक, नई तारीख का हुआ ऐलान, जानें क्या है वजह

GST Council Meeting: गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) काउंसिल की 57वीं बैठक की तारीख में बदलाव किया गया है। GST काउंसिल की 57वीं बैठक पहले 7 अक्टूबर को होनी थी, लेकिन अब इसे एक दिन आगे बढ़ाकर 8 अक्टूबर कर दिया गया है। GST काउंसिल सेक्रेटेरिएट के मुताबिक, जरूरी परिस्थितियों (अनअवॉइडेबल सर्कम्स्टैंसेज) के कारण ये बदलाव किया गया है। ये बैठक 8 अक्टूबर को सुबह 11 बजे नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम के समिट रूम में आयोजित की जाएगी।

वित्त मंत्री की अध्यक्षता में होगी बैठक

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में होने वाली GST काउंसिल की बैठक में सभी राज्यों के वित्त मंत्री भी शामिल होंगे। करीब एक साल से अधिक समय बाद होने जा रही इस बैठक को लेकर 5 अक्टूबर को नया मेमोरेंडम जारी किया गया। राजस्व सचिव की मंजूरी से जारी इस पत्र में बैठक की तारीख बदलने की जानकारी दी गई है। वहीं GST काउंसिल के सभी सदस्यों को इसकी सूचना देने के लिए कहा गया है।

पिछले साल कब हुई थी बैठक

गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) काउंसिल की 56वीं बैठक 3 और 4 सितंबर 2025 को आयोजित हुई थी। इस बैठक में केंद्र और राज्यों ने GST व्यवस्था में बड़े बदलावों पर सहमति बनाई थी। खास तौर पर GST की दरों और अलग-अलग टैक्स स्लैब में बदलाव का फैसला लिया गया था। 22 सितंबर 2025 से नई GST व्यवस्था लागू हुई, जिसमें मुख्य रूप से 5% और 18% के दो टैक्स स्लैब रखे गए। वहीं, लग्जरी और कुछ खास महंगे सामान पर 40% की सबसे ज्यादा GST दर तय की गई। इससे पहले 1 जूलाई 2017 से 5%, 12%, 18% और 28% के चार स्लैब लागू थे।

अब पेट्रोल नहीं, सिर्फ EV से चलेंगी बाइक टैक्सी! महाराष्ट्र सरकार ने Ola, Uber और Rapido को दिया अल्टीमेटम

अब पेट्रोल नहीं, सिर्फ EV से चलेंगी बाइक टैक्सी! महाराष्ट्र सरकार ने Ola, Uber और Rapido को दिया अल्टीमेटम

महाराष्ट्र सरकार ने ओला, उबर और रैपिडो जैसी बाइक टैक्सी सेवाओं को लेकर बड़ा फैसला किया है। सरकार ने इन कंपनियों को जुलाई 2027 तक अपने पूरे बाइक टैक्सी बेड़े को 100 परसेंट इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) में बदलने का निर्देश दिया है। यानी तय समयसीमा के बाद इन कंपनियों की बाइक टैक्सी सेवाओं में सिर्फ इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) का इस्तेमाल किया जाएगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश के बाद महाराष्ट्र के परिवहन विभाग ने बाइक टैक्सी कंपनियों को इलेक्ट्रिक वाहनों पर जाने के लिए नौ महीने का समय दिया है।

इस दौरान कंपनियां चरणबद्ध तरीके से अपने मौजूदा बेड़े को EV में बदल सकेंगी। विभाग ने राज्य की राइड-हेलिंग कंपनियों और सभी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) को भी इस नई समयसीमा की जानकारी दे दी है।

6 महीने का मिलेगा समय

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नई योजना के मुताबिक, पेट्रोल वाली बाइक से टैक्सी सेवा देने वाले ऑपरेटरों को पहले चरण में अपने वाहनों को इलेक्ट्रिक बाइक से बदलने के लिए छह महीने का समय दिया जाएगा। यानी इस अवधि के दौरान उन्हें धीरे-धीरे पेट्रोल बाइक की जगह EV को अपने बेड़े में शामिल करना होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र बाइक टैक्सी नियम 2025 के तहत जिन कंपनियों ने पहले ही प्रोविजनल या टेम्पररी लाइसेंस के लिए आवेदन कर दिया है, उन्हें पहले फेज में इलेक्ट्रिक व्हीकल पर स्विच करने के लिए छह महीने का समय मिलेगा।

करीब 18 महीने दी जाए समयसीमा

सरकार का ये फैसला बाइक टैक्सी चालकों और उनके संगठनों की चिंताओं के बाद आया है। उनका कहना है कि कम समय में पेट्रोल बाइक को EV से बदलना ड्राइवरों पर आर्थिक बोझ डाल सकता है। महाराष्ट्र बाइक टैक्सी वेलफेयर एसोसिएशन ने सरकार से इलेक्ट्रिक वाहनों पर शिफ्ट होने के लिए अधिक समय देने की मांग की थी। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, राज्य के परिवहन मंत्री और परिवहन आयुक्त के सामने यह मुद्दा रखा था। संगठन की मांग थी कि बाइक टैक्सी चालकों को पेट्रोल से इलेक्ट्रिक बाइक पर जाने के लिए करीब 18 महीने की समयसीमा दी जाए, ताकि उन्हें अचानक ज्यादा खर्च का सामना न करना पड़े।

बाइक टैक्सी कंपनियों ने EV पर पूरी तरह शिफ्ट होने के लिए 2030 तक का समय मांगा था, लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने उनकी मांग नहीं मानी। सरकार ने कंपनियों को EV में बदलाव के लिए सिर्फ नौ महीने का समय दिया है।

कभी ₹3,000 महीना कमाते थे पवन, आज ₹58 लाख सालाना की नौकरी, NIT छोड़कर ऐसे बनाई पहचान

कभी आर्थिक तंगी के चलते NIT की पढ़ाई छोड़ने वाला एक युवक आज अपनी कमाई को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा में है। पवन चिंडकुर ने NIT आंध्र प्रदेश में B.Tech ECE की पढ़ाई शुरू की थी, लेकिन परिवार की खराब आर्थिक स्थिति और पिता की तबीयत से जुड़ी परेशानियों के बीच उन्हें पहले ही साल पढ़ाई छोड़नी पड़ी। हालात ऐसे थे कि एक समय उन्होंने Uber ड्राइवर बनने तक का विचार किया। इसके बाद दोस्तों की सलाह पर लोन लेकर लैपटॉप खरीदा और YouTube से टेक्नोलॉजी सीखना शुरू किया।

Reddit और Discord जैसी ऑनलाइन कम्युनिटीज से जुड़कर उन्होंने अपनी स्किल्स को निखारा और ₹3,000 महीने की नौकरी से शुरुआत की।  धीरे-धीरे उनकी कमाई बढ़ती गई और अब रिपोर्ट के मुताबिक वह करीब ₹58 लाख सालाना की रिमोट नौकरी कर रहे हैं। उनकी कहानी ने सोशल मीडिया पर पढ़ाई, स्किल्स और करियर के रास्तों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

परिवार की हालत ने बदल दी पढ़ाई की राह

COVID-19 महामारी के दौरान पवन के परिवार की आर्थिक स्थिति काफी मुश्किल हो गई थी। उनके पिता ऑटो चलाते थे और उस दौरान उनकी तबीयत भी ठीक नहीं रहती थी। परिवार की जिम्मेदारियों को देखते हुए पवन ने NIT आंध्र प्रदेश में B.Tech ECE की पढ़ाई पहले साल के बाद छोड़ दी। उस समय उनके सामने आगे पढ़ने से ज्यादा जरूरी परिवार को संभालना था।

कभी Uber ड्राइवर बनने का भी आया ख्याल

पढ़ाई छोड़ने के बाद पवन के सामने करियर को लेकर कोई आसान रास्ता नहीं था। एक समय उन्होंने Uber ड्राइवर बनने तक के बारे में सोचा। लेकिन दोस्तों की सलाह ने उनकी दिशा बदल दी। उन्होंने लोन लेकर एक लैपटॉप खरीदा और YouTube के जरिए टेक्नोलॉजी सीखना शुरू कर दिया।

YouTube से शुरू हुई असली तैयारी

पवन ने सिर्फ वीडियो देखकर सीखने तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने Reddit और Discord जैसी ऑनलाइन कम्युनिटीज से जुड़कर अपनी स्किल्स पर काम करना शुरू किया। इसी दौरान उन्हें पहली नौकरी मिली, जहां उनकी कमाई महज ₹3,000 प्रति माह थी। छोटी शुरुआत के बावजूद उन्होंने सीखना और काम करना जारी रखा।

₹3,000 से ₹60 हजार महीना

करियर में अगला बड़ा मोड़ तब आया, जब पवन ने दुबई की एक स्टार्टअप कंपनी जॉइन की। यहां उनकी कमाई बढ़कर करीब ₹60,000 प्रति माह हो गई। इसके बाद LinkedIn पर बने एक कनेक्शन ने उन्हें Cactro में नौकरी दिलाने में मदद की। यहां उनकी मासिक सैलरी करीब ₹1.2 लाख तक पहुंच गई।

फिर आया ₹58 लाख वाला बड़ा ब्रेक

पवन की सबसे बड़ी छलांग इसके बाद लगी। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने Lingk.io में रिमोट रोल हासिल किया, जहां उनका सालाना पैकेज करीब ₹58 लाख बताया जा रहा है। उनकी कहानी को शेयर करने वाले पोस्ट में इसे एक लाइन में समेटा गया “Skills >>>>>> Traditional Path.”

क्या डिग्री से ज्यादा जरूरी हैं स्किल्स?

पवन की कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर शिक्षा और करियर को लेकर बहस छिड़ गई। कई लोगों ने कहा कि सेल्फ-लर्निंग, प्रैक्टिकल स्किल्स और नेटवर्किंग भी करियर बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

हालांकि, कुछ यूजर्स ने यह भी याद दिलाया कि पवन का मामला एक असाधारण उदाहरण है और इसे हर छात्र के लिए पारंपरिक कॉलेज शिक्षा का विकल्प नहीं माना जा सकता।

सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?

एक यूजर ने पवन की सफलता की तारीफ करते हुए NIT आंध्र प्रदेश के 2025 NIRF आंकड़ों का संदर्भ दिया और कहा कि पवन की कमाई एक आउटलेयर उदाहरण है। वहीं दूसरे यूजर ने उनकी लगातार सीखने की आदत और वास्तविक काम से जुड़ी स्किल्स की तारीफ की। एक अन्य प्रतिक्रिया में कहा गया कि कई बार स्किल्स ऐसे मौके खोल सकती हैं, जो पारंपरिक रास्ते से आसानी से नहीं मिलते।

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₹1 करोड़ सालाना की नौकरी छोड़कर खेती की राह चुनी, Uber India की पूर्व CMO ने बताया सफल होने का तरीका

कभी करोड़ों रुपये की कॉर्पोरेट दुनिया का हिस्सा रहीं अवनी गुप्ता ने आज अपनी जिंदगी का रास्ता पूरी तरह बदल लिया है। बड़े ब्रांड्स में ऊंचे पदों पर काम करने के बाद अब वह पंचकूला के पास एक पर्माकल्चर फार्म में प्रकृति के बीच रह रही हैं। यहां न चमकदार ऑफिस है, न मीटिंग्स का दबाव और न ही शहर जैसी भागदौड़। चारों तरफ हजारों पेड़, अलग-अलग तरह की फसलें और मिट्टी से बना उनका साधारण घर है। खास बात यह है कि उन्होंने यह बदलाव अचानक नौकरी छोड़कर नहीं किया। इस नई जिंदगी की तैयारी करीब 12 साल पहले शुरू हो गई थी।

कॉर्पोरेट करियर के दौरान ही उन्होंने और उनके पति ने जमीन खरीदी और धीरे-धीरे फार्म लाइफ को समझना शुरू किया। मुंबई से गुरुग्राम और फिर पंचकूला तक का सफर तय करने के बाद उन्होंने आखिरकार शहर की नौकरी वाली जिंदगी को पीछे छोड़कर फार्म को अपना स्थायी ठिकाना बना लिया।

20 हजार रुपये से शुरू हुआ सफर

गुप्ता ने 1997 में यूनिलीवर से अपने करियर की शुरुआत की थी। उस समय उनकी मासिक कमाई करीब 20 हजार रुपये थी। आगे चलकर उन्होंने Colgate-Palmolive, Axis Bank, Clix Capital और Uber जैसी कंपनियों में बड़े पद संभाले। Uber छोड़ने तक उनकी सालाना कमाई करीब 1 करोड़ रुपये पहुंच चुकी थी।

इसके बावजूद उन्होंने कॉर्पोरेट दुनिया से दूरी बनाने का फैसला किया। उनका कहना है कि नौकरी छोड़ते समय उन्हें ऐसा नहीं लगा कि वह पैसा छोड़ रही हैं, क्योंकि मानसिक रूप से वह पहले ही उस जीवन से आगे बढ़ चुकी थीं।

नौकरी छोड़ने से पहले जमीन पर शुरू कर दी थी तैयारी

गुप्ता और उनके पति ने 2010 में हरियाणा में जमीन खरीदी। उस वक्त दोनों अपने करियर के अच्छे दौर में थे। उन्होंने तुरंत शहर छोड़ने के बजाय धीरे-धीरे फार्म पर समय बिताना शुरू किया। पहले मुंबई से गुरुग्राम आए, फिर पंचकूला में दो साल रहे और आखिरकार फार्म को अपना स्थायी घर बना लिया। इस दौरान उन्हें यह समझने का मौका मिला कि ग्रामीण जीवन वास्तव में उनके लिए सही है या नहीं।

खेती को सिर्फ कमाई का जरिया समझना बड़ी भूल

गुप्ता का कहना है कि सिर्फ खेती करके कॉर्पोरेट सैलरी जैसी कमाई की उम्मीद करना सही नहीं है। उदाहरण के तौर पर, ऑर्गेनिक पालक का एक बंडल सीधे ग्राहक को करीब 40 रुपये में बिक सकता है, लेकिन थोक बाजार में इसकी कीमत काफी कम हो सकती है। इसीलिए उन्होंने फार्म की कमाई को एक ही स्रोत पर निर्भर नहीं रखा। बीजों की ऑनलाइन बिक्री, फार्म स्टे, टूर, ट्रेनिंग, कंसल्टेंसी, यूट्यूब और अतिरिक्त उपज बेचने समेत कई माध्यमों से आमदनी होती है।

यहां Blinkit-Zomato नहीं, मौसम तय करता है तनाव

फार्म लाइफ बाहर से जितनी खूबसूरत दिखती है, उतनी आसान नहीं है। यहां तुरंत डिलीवरी, आसान कचरा प्रबंधन और शहर जैसी सुविधाएं नहीं हैं। सामाजिक मेल-जोल भी कम हो सकता है। गुप्ता के मुताबिक, कॉर्पोरेट जीवन का तनाव अब मौसम और फसलों से जुड़ गया है। तेज बारिश से बाढ़ की चिंता होती है और बारिश कम हो तो खेती प्रभावित होने का डर रहता है।

उनका मंत्र- पहले आजमाएं, फिर नौकरी छोड़ें

गुप्ता का सबसे अहम संदेश उन लोगों के लिए है जो कॉर्पोरेट जिंदगी छोड़कर गांव या फार्म पर बसने का सपना देखते हैं। उनका कहना है कि इसे अचानक फैसला बनाने के बजाय नौकरी के साथ-साथ धीरे-धीरे तैयार करना चाहिए। उनके मुताबिक, ग्रामीण जीवन को सोशल मीडिया की खूबसूरत तस्वीरों से नहीं, उसकी वास्तविक चुनौतियों के साथ समझना जरूरी है। तभी यह बदलाव किसी पलायन के बजाय सोच-समझकर चुनी गई नई जिंदगी बन सकता है।

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बेंगलुरु में कैब चलाकर Uber Black ड्राइवर ने एक हफ्ते में कमाए ₹46000, कमाई देखकर सोशल मीडिया यूजर्स हुए हैरान

बेंगलुरु जैसे व्यस्त शहर में कैब चलाना किसी के लिए सिर्फ रोजगार हो सकता है, लेकिन एक Uber Black ड्राइवर ने अपनी कमाई और रोजमर्रा की जिंदगी की झलक दिखाकर सोशल मीडिया पर लोगों को चौंका दिया। Instagram पर वायरल हुए एक वीडियो में Hamtor Debbarma ने बताया कि वह किस तरह अपने दिन की शुरुआत करते हैं, शहर में यात्रियों को छोड़ते हैं और इसी काम के जरिए एक सप्ताह में ₹46,000 से ज्यादा कमा लेते हैं।

सुबह की शुरुआत से सड़क तक का सफर

वीडियो की शुरुआत Hamtor की सुबह की दिनचर्या से होती है। वह उठकर ब्रश करते हैं, नहाते हैं, नाश्ता तैयार करते हैं और काम पर जाने से पहले अपने कपड़े प्रेस करते हैं। इसके बाद वह घर पर अपने काम की तैयारी करते हैं और Uber ड्राइवर की पहचान वाली सफेद शर्ट और काली पैंट पहनकर निकलते हैं।

काम शुरू करने से पहले वह अपनी कार की सफाई भी करवाते हैं। इसके बाद बेंगलुरु की सड़कों पर उनका सफर शुरू होता है, जहां वीडियो में उनकी कुछ राइड्स की छोटी-छोटी झलकियां दिखाई गई हैं।

कैब ड्राइविंग है साइड हसल

Hamtor ने बताया कि Uber Black के लिए ड्राइविंग करना उनका मुख्य काम नहीं, बल्कि एक साइड हसल है। उनके प्रोफाइल के मुताबिक उन्होंने B.Com की पढ़ाई Yenepoya University से की है और वह क्रिप्टो तथा फॉरेक्स ट्रेडिंग में भी रुचि रखते हैं।

वीडियो में वह दिनभर की व्यस्तता के बीच एक परिचित के साथ लंच करते हुए भी नजर आते हैं। यानी उनका दिन सिर्फ ड्राइविंग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन की भी झलक देता है।

एक हफ्ते की कमाई ने चौंकाया

वीडियो का सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला हिस्सा उनकी साप्ताहिक कमाई थी। उनके फोन की स्क्रीन पर एक सप्ताह की कमाई ₹46,022.30 दिखाई दी। इस आंकड़े को देखकर कई सोशल मीडिया यूजर्स हैरान रह गए। वीडियो के अंत में Hamtor ने अपने फॉलोअर्स के लिए एक संदेश भी साझा किया उन्होंने लोगों को विनम्र और जमीन से जुड़े रहने की सलाह दी और याद दिलाया कि कोई भी पद या स्थिति हमेशा के लिए नहीं रहती।

सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?

वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने उनकी मेहनत और काम के प्रति रवैये की तारीफ की। कुछ लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उनकी जिंदगी कॉरपोरेट नौकरी करने वालों से ज्यादा शानदार नजर आ रही है। एक यूजर ने लिखा कि उनकी जिंदगी अपनी जिंदगी से ज्यादा फैंसी लग रही है। वहीं एक अन्य ने कहा कि यह कमाई कॉरपोरेट नौकरी से कहीं बेहतर है।

कुछ लोगों ने इसे IT और कॉरपोरेट सेक्टर में काम करने वालों के लिए उम्मीद से जोड़कर देखा। एक कमेंट में कहा गया कि ऐसी कहानी IT प्रोफेशनल्स को भी नई संभावनाओं के बारे में सोचने की प्रेरणा देती है।

‘काम कोई छोटा नहीं होता’

इस पोस्ट पर एक यूजर ने अपने बेटे का उदाहरण देते हुए Hamtor और ऐसे काम करने वाले लोगों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में पढ़े-लिखे और मेहनती लोगों की जरूरत है और अपने सपनों तक पहुंचने तक अपने काम का आनंद लेना चाहिए।

इस पूरी कहानी ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि सफलता को सिर्फ पारंपरिक 9-5 नौकरी के पैमाने से क्यों देखा जाए। Hamtor की कहानी सोशल मीडिया पर इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्होंने अपने काम को छिपाने के बजाय उसे खुले तौर पर दिखाया और अपनी मेहनत से जुड़ी कमाई भी लोगों के साथ साझा की।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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Uber ड्राइवर ने गलती से भेजे गए ₹37,000 पैसेंजर को लौटाए, इनाम लेने से भी किया मना

कोलकाता की एक पत्रकार ने बताया कि कैसे एक उबर ड्राइवर ने उन्हें 37,000 रुपये कुछ ही मिनटों में लौटा दिए, जब उन्होंने गलती से Google Pay के जरिए उसे पैसे भेज दिए थे। उन्होंने कहा कि इस घटना ने ऑनलाइन धोखाधड़ी और स्कैम को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच लोगों में उनका भरोसा फिर से जगा दिया है।

संचारी घोष ने लिंक्डइन पोस्ट में इस घटना का जिक्र करते हुए बताया कि 1 सितंबर को Google Pay से पेमेंट करते समय उन्होंने गलती से आनंद दास नाम के गलत व्यक्ति को 37,000 रुपये भेज दिए थे।

मनीकंट्रोल से बात करते हुए घोष ने कहा कि वह एक ऐसे कॉन्टैक्ट को पैसे भेजना चाहती थीं, जिसका पहला नाम और सरनेम उनके फोन में सेव किसी दूसरे व्यक्ति जैसा ही था। उन्हें अपनी गलती का एहसास कई घंटों बाद हुआ, जब जिस व्यक्ति को पैसे मिलने थे, उसने पेंडिंग पेमेंट के बारे में उनसे संपर्क किया।

उन्होंने पैसे पाने वाले शख्स को कैसे ढूंढा?

गलती का पता चलने के बाद, घोष ने HDFC बैंक और कोलकाता पुलिस के साइबर सेल से संपर्क किया। अपनी ट्रांजैक्शन हिस्ट्री देखने और यह शक होने पर कि पैसे पाने वाला व्यक्ति शायद उनकी पिछली किसी राइड से जुड़ा हो सकता है, उन्होंने उबर से भी संपर्क किया।

लेकिन, जब आधिकारिक तरीकों से मामले पर कार्रवाई हो रही थी, तब उन्होंने खुद भी छानबीन करने का फैसला किया।

घोष ने पब्लिकेशन को बताया कि उन्होंने अपने पिछले ट्रांजैक्शन चेक किए और पाया कि उन्होंने 24 अगस्त को आनंद दास नाम के ड्राइवर को उबर का 180 रुपये का किराया दिया था।

इसके बाद उन्होंने अपनी पिछली राइड की जानकारी निकाली और सीधे उस ड्राइवर से संपर्क करने में कामयाब रहीं।

15 मिनट में पैसे वापस मिल गए

घोष ने बताया कि उन्होंने दास को पूरी बात बताई। दास ने तुरंत ट्रांजैक्शन की जांच की और पूरे 37,000 रुपये वापस कर दिए।

उन्होंने ‘मनीकंट्रोल’ को बताया, “पूरी बात सुनने के बाद, उन्होंने तुरंत जांच की और पूरी रकम वापस कर दी।” पत्रकार ने आगे बताया कि बाद में उन्होंने दास से मिलकर उन्हें तारीफ के तौर पर कुछ छोटा-सा तोहफा देने की पेशकश की, लेकिन उन्होंने विनम्रता से मना कर दिया। इसके बजाय, दास ने उनसे कहा: “आपकी तारीफ और भरोसा ही मेरे लिए सबसे बड़ा तोहफा है। 37,000 रुपये से मैं कब तक गुजारा कर पाता? लेकिन यह भरोसा मुझे बहुत आगे ले जाएगा।”

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