video: हर नौकरी बदलने पर 30% सैलरी बढ़ना भी पड़ सकता है भारी, जानिए कम पैकेज का खेल

नौकरी बदलते समय सैलरी में बढ़ोतरी होना अक्सर करियर की सफलता जैसा लगता है। लेकिन हर बार मिलने वाला इन्क्रीमेंट आपकी असली मार्केट वैल्यू को नहीं दर्शाता। अगर किसी कर्मचारी ने करियर की शुरुआत कम पैकेज से की है, तो आगे की नौकरियों में भी वही पुरानी सैलरी उसके लिए आधार बन सकती है। ऐसे में प्रतिशत के हिसाब से अच्छी बढ़ोतरी मिलने के बावजूद कमाई बाजार के मुकाबले पीछे रह सकती है। नोएडा की फाउंडर वान्या गोयल ने सोशल मीडिया पर इसी समस्या की ओर ध्यान दिलाया है। उन्होंने समझाया कि 20 या 30 फीसदी की बढ़ोतरी हर बार पर्याप्त नहीं होती, खासकर तब जब शुरुआती पैकेज ही कम हो।

समय के साथ यह अंतर इतना बढ़ सकता है कि कर्मचारी को अपनी मौजूदा सैलरी और बाजार में चल रहे पैकेज के बीच बड़ा फर्क नजर आने लगे। इसलिए करियर में सिर्फ नौकरी बदलना और इन्क्रीमेंट देखना ही काफी नहीं है, बल्कि अपनी सही मार्केट वैल्यू समझना भी जरूरी है।

कम पैकेज से शुरू हुआ सफर बन सकता है लंबा गैप

वान्या गोयल के मुताबिक, कम शुरुआती सैलरी की सबसे बड़ी समस्या सिर्फ उस समय कम कमाई होना नहीं है। असली परेशानी तब शुरू होती है, जब अगली कंपनी भी आपकी पिछली सैलरी को ही नई पेशकश का आधार बना देती है। मान लीजिए किसी व्यक्ति की सैलरी 6 लाख रुपये सालाना है। नौकरी बदलने पर उसे 30 फीसदी बढ़ोतरी के साथ करीब 7.2 लाख का पैकेज मिलता है। अगली बार यही रकम 8.6 लाख और फिर करीब 10.3 लाख तक पहुंच सकती है। कागज पर हर बार अच्छी बढ़ोतरी दिखाई देती है, लेकिन बाजार में उसी भूमिका की सैलरी अगर इससे काफी ज्यादा बढ़ चुकी हो, तो कर्मचारी धीरे-धीरे पीछे रह सकता है।

हर बार इन्क्रीमेंट नहीं, कभी चाहिए Salary Correction

यही वजह है कि गोयल ने कर्मचारियों को सिर्फ प्रतिशत बढ़ोतरी के पीछे भागने से बचने की सलाह दी। उनके मुताबिक, कुछ मामलों में सामान्य इन्क्रीमेंट के बजाय सैलरी करेक्शन की जरूरत होती है। यानी कर्मचारी को यह देखना चाहिए कि उसके अनुभव, जिम्मेदारी और काम के हिसाब से बाजार में उसकी वास्तविक कीमत क्या है।

सिर्फ मेहनत करना काफी नहीं

करियर में आगे बढ़ने के लिए अच्छा काम करना जरूरी है, लेकिन केवल मेहनत करने से हमेशा सही सैलरी मिलना तय नहीं है। गोयल का कहना है कि कर्मचारियों को अपने काम का असर सामने रखना भी आना चाहिए। उन्होंने उपलब्धियों का रिकॉर्ड रखने, काम के नतीजों को आंकड़ों में दिखाने और अपनी जिम्मेदारियों को सही तरीके से पेश करने पर जोर दिया।

अपनी कीमत बताना भी करियर का हिस्सा

कई कर्मचारी अच्छा काम करते हैं, लेकिन अपनी उपलब्धियों के बारे में बात करने या सैलरी पर बातचीत करने में पीछे रह जाते हैं। इसका नुकसान लंबे समय में उनकी कमाई पर पड़ सकता है।गोयल के मुताबिक, कर्मचारियों को अपनी मार्केट वैल्यू समझनी चाहिए, उपलब्धियों को सामने रखना चाहिए और जरूरत पड़ने पर बेहतर पैकेज के लिए बातचीत करनी चाहिए।

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30% की बढ़ोतरी हमेशा बड़ी जीत नहीं

हर नौकरी बदलने पर 25 या 30 फीसदी वेतन बढ़ना सुनने में शानदार लग सकता है। लेकिन अगर शुरुआती पैकेज ही बाजार से काफी कम था, तो लगातार प्रतिशत के हिसाब से बढ़ती सैलरी भी आपको वास्तविक मार्केट रेट से पीछे रख सकती है।

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कभी ₹3,000 महीना कमाते थे पवन, आज ₹58 लाख सालाना की नौकरी, NIT छोड़कर ऐसे बनाई पहचान

कभी आर्थिक तंगी के चलते NIT की पढ़ाई छोड़ने वाला एक युवक आज अपनी कमाई को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा में है। पवन चिंडकुर ने NIT आंध्र प्रदेश में B.Tech ECE की पढ़ाई शुरू की थी, लेकिन परिवार की खराब आर्थिक स्थिति और पिता की तबीयत से जुड़ी परेशानियों के बीच उन्हें पहले ही साल पढ़ाई छोड़नी पड़ी। हालात ऐसे थे कि एक समय उन्होंने Uber ड्राइवर बनने तक का विचार किया। इसके बाद दोस्तों की सलाह पर लोन लेकर लैपटॉप खरीदा और YouTube से टेक्नोलॉजी सीखना शुरू किया।

Reddit और Discord जैसी ऑनलाइन कम्युनिटीज से जुड़कर उन्होंने अपनी स्किल्स को निखारा और ₹3,000 महीने की नौकरी से शुरुआत की।  धीरे-धीरे उनकी कमाई बढ़ती गई और अब रिपोर्ट के मुताबिक वह करीब ₹58 लाख सालाना की रिमोट नौकरी कर रहे हैं। उनकी कहानी ने सोशल मीडिया पर पढ़ाई, स्किल्स और करियर के रास्तों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

परिवार की हालत ने बदल दी पढ़ाई की राह

COVID-19 महामारी के दौरान पवन के परिवार की आर्थिक स्थिति काफी मुश्किल हो गई थी। उनके पिता ऑटो चलाते थे और उस दौरान उनकी तबीयत भी ठीक नहीं रहती थी। परिवार की जिम्मेदारियों को देखते हुए पवन ने NIT आंध्र प्रदेश में B.Tech ECE की पढ़ाई पहले साल के बाद छोड़ दी। उस समय उनके सामने आगे पढ़ने से ज्यादा जरूरी परिवार को संभालना था।

कभी Uber ड्राइवर बनने का भी आया ख्याल

पढ़ाई छोड़ने के बाद पवन के सामने करियर को लेकर कोई आसान रास्ता नहीं था। एक समय उन्होंने Uber ड्राइवर बनने तक के बारे में सोचा। लेकिन दोस्तों की सलाह ने उनकी दिशा बदल दी। उन्होंने लोन लेकर एक लैपटॉप खरीदा और YouTube के जरिए टेक्नोलॉजी सीखना शुरू कर दिया।

YouTube से शुरू हुई असली तैयारी

पवन ने सिर्फ वीडियो देखकर सीखने तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने Reddit और Discord जैसी ऑनलाइन कम्युनिटीज से जुड़कर अपनी स्किल्स पर काम करना शुरू किया। इसी दौरान उन्हें पहली नौकरी मिली, जहां उनकी कमाई महज ₹3,000 प्रति माह थी। छोटी शुरुआत के बावजूद उन्होंने सीखना और काम करना जारी रखा।

₹3,000 से ₹60 हजार महीना

करियर में अगला बड़ा मोड़ तब आया, जब पवन ने दुबई की एक स्टार्टअप कंपनी जॉइन की। यहां उनकी कमाई बढ़कर करीब ₹60,000 प्रति माह हो गई। इसके बाद LinkedIn पर बने एक कनेक्शन ने उन्हें Cactro में नौकरी दिलाने में मदद की। यहां उनकी मासिक सैलरी करीब ₹1.2 लाख तक पहुंच गई।

फिर आया ₹58 लाख वाला बड़ा ब्रेक

पवन की सबसे बड़ी छलांग इसके बाद लगी। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने Lingk.io में रिमोट रोल हासिल किया, जहां उनका सालाना पैकेज करीब ₹58 लाख बताया जा रहा है। उनकी कहानी को शेयर करने वाले पोस्ट में इसे एक लाइन में समेटा गया “Skills >>>>>> Traditional Path.”

क्या डिग्री से ज्यादा जरूरी हैं स्किल्स?

पवन की कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर शिक्षा और करियर को लेकर बहस छिड़ गई। कई लोगों ने कहा कि सेल्फ-लर्निंग, प्रैक्टिकल स्किल्स और नेटवर्किंग भी करियर बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

हालांकि, कुछ यूजर्स ने यह भी याद दिलाया कि पवन का मामला एक असाधारण उदाहरण है और इसे हर छात्र के लिए पारंपरिक कॉलेज शिक्षा का विकल्प नहीं माना जा सकता।

सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?

एक यूजर ने पवन की सफलता की तारीफ करते हुए NIT आंध्र प्रदेश के 2025 NIRF आंकड़ों का संदर्भ दिया और कहा कि पवन की कमाई एक आउटलेयर उदाहरण है। वहीं दूसरे यूजर ने उनकी लगातार सीखने की आदत और वास्तविक काम से जुड़ी स्किल्स की तारीफ की। एक अन्य प्रतिक्रिया में कहा गया कि कई बार स्किल्स ऐसे मौके खोल सकती हैं, जो पारंपरिक रास्ते से आसानी से नहीं मिलते।

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एक साल में 8 लाख रुपये से सीधे 25 लाख का हो गया पैकेज! टेक प्रोफेशनल ने बताया 1 साल में कैसे 3 गुना बढ़ी सैलरी

कई प्रोफेशनल्स अपनी सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद में सालों बिता देते हैं, लेकिन एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के लिए, सिर्फ़ 12 महीनों में करियर से जुड़े कुछ फैसलों ने उनकी सैलरी में जबरदस्त बढ़ोतरी कर दी। रेडिट पर अपनी कहानी शेयर करते हुए, इस टेक प्रोफेशनल ने बताया कि कैसे नई नौकरी के लिए दूसरी जगह जाने के मुश्किल फैसले ने आखिरकार उनकी सालाना कमाई को लगभग तीन गुना करने में मदद की।

करीब 5 साल के अनुभव वाले जावा फुल स्टैक डेवलपर, इस सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने बताया कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) में ‘निंजा’ प्रोफ़ाइल के साथ की थी। पीछे मुड़कर देखने पर, उन्होंने अपने पहले प्रोजेक्ट को जावा, स्प्रिंग बूट, AWS, एंगुलर और पायथन जैसी टेक्नोलॉजीज़ का अनुभव दिलाने का श्रेय दिया।

एक ही प्रोजेक्ट पर लगभग चार साल बिताने और बेहतरीन परफॉर्मेंस रेटिंग पाने के बावजूद, उन्हें लगा कि उनकी सैलरी में बढ़ोतरी सीमित ही रही। अपनी रेडिट पोस्ट में उन्होंने लिखा, “लेकिन डिजिटल एग्ज़ाम (विंग्स 1) पास करने और अच्छे बैंड (A – 2022, B – 2023, A – 2024) पाने के बाद भी, मेरा CTC सिर्फ़ 7.8 LPA था।”

जुलाई 2025 में जब उन्होंने अपनी पहली नौकरी बदली, तब उनकी ज़िंदगी में एक अहम मोड़ आया। उस समय उनके पास कई ऑफ़र थे। एक ऑफ़र में रिमोट वर्क (घर से काम करने) की सुविधा थी, लेकिन सैलरी कम थी। दूसरे ऑफ़र में सबसे ज़्यादा पैकेज मिल रहा था, लेकिन उसके लिए बेंगलुरु जाना ज़रूरी था। तीसरा ऑफ़र घर के पास था और उसमें बेंगलुरु वाली नौकरी से थोड़ी कम सैलरी मिल रही थी।

वे खुद को इंट्रोवर्ट मानते थे, इसलिए किसी नए शहर में बसने का विचार उन्हें ज्यादा उत्साहित नहीं कर रहा था। उन्होंने माना कि वे सुरक्षित विकल्प चुनने की सोच रहे थे, लेकिन तभी एक कलीग ने उन्हें लंबे समय के फायदों के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने लिखा, “मैं आखिरी वाला ऑफर एक्सेप्ट करने की सोच रहा था, क्योंकि एक इंट्रोवर्ट होने के नाते, मुझे नए दोस्त बनाने में मुश्किल होती है और मुझे दूसरी जगह बसना बिल्कुल पसंद नहीं था।” “लेकिन मेरे एक कलीग ने मुझसे कहा कि मुझे बेंगलुरु वाला ऑफर स्वीकार कर लेना चाहिए और वहां चले जाना चाहिए, क्योंकि यह मेरे करियर के लिए बेहतर होगा।”

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आखिरकार उन्होंने उस सलाह को माना और बेंगलुरु चले गए। उन्होंने बताया कि यह बदलाव उम्मीद से कहीं बेहतर रहा। उन्हें बजट के अंदर रहने की जगह मिल गई, नए दोस्त बने और वे शहर की ज़िंदगी में घुल-मिल गए। करीब छह महीने तक सब कुछ ठीक-ठाक चलता रहा। लेकिन, जल्द ही लागत कम करने के उपायों का असर उनकी टीम पर पड़ा। कई साथियों को प्रोजेक्ट से हटा दिया गया, जबकि एक और साथी का काम खत्म हो गया। इन हालात ने उन्हें फिर से नए मौकों की तलाश शुरू करने के लिए प्रेरित किया।

उन्हें सबसे पहले एक फिनटेक कंपनी से ऑफर मिला, जिसके लिए उन्होंने एक ही दिन में इंटरव्यू के सभी राउंड पास कर लिए थे। हालांकि, सैलरी में जो बढ़ोतरी ऑफर की गई थी, वह उनके मौजूदा पैकेज से सिर्फ़ 22% ज़्यादा थी। अपने नोटिस पीरियड के दौरान, वे कई कंपनियों के साथ इंटरव्यू देते रहे, जिनमें फिलिप्स, डेल्टा एयरलाइंस, AMEX GBT और दूसरी सर्विस-बेस्ड कंपनियां शामिल थीं। जहां AMEX GBT ने 50% बढ़ोतरी का ऑफर दिया, वहीं डेल्टा एयरलाइंस ने 75% बढ़ोतरी की उनकी मांग को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि यह कंपनी के बजट से बाहर है।

आखिरकार, उन्होंने AMEX GBT का ऑफर स्वीकार कर लिया और इसी महीने कंपनी जॉइन कर ली। अपनी यात्रा के बारे में बताते हुए, डेवलपर ने कहा कि उन्होंने TCS में 3.3 LPA के पैकेज के साथ अपना करियर शुरू किया था। समय के साथ, लगातार अच्छा प्रदर्शन और स्किल्स में सुधार की वजह से उनका पैकेज बढ़कर 7.8 LPA हो गया। हालांकि, कंपनी बदलने और दूसरी जगह जाकर काम करने के लिए तैयार होने के बाद उन्हें बड़ी बढ़त मिली। बाद में उन्होंने कमेंट सेक्शन में बताया, “मेरा मौजूदा CTC 24.8 LPA है।”

60% सैलरी हाइक के ऑफर पर जॉब बदलने में इस शख्स ने की ऐसी गलती कि अब पछता रहा! Job स्विच करते वक्त आप भी रखें ये ख्याल

आज के अनिश्चित जॉब मार्केट में जब भी किसी को बड़ी सैलरी हाइक का ऑफर मिलता है तो वह बिना ज्यादा सोचे-समझे तुरंत कंपनी बदल लेता है। सवाल ये है कि क्या सिर्फ भारी-भरकम पैकेज देखकर नौकरी बदलना हमेशा सही होता है? बेंगलुरु के एक टेक प्रोफेशनल के सोशल मीडिया पोस्ट ने इस विषय पर इंटरनेट पर एक नई बहस छेड़ दी है। सनी कुमार नाम के एक शख्स ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है। ये काफी वायरल हो रहा है। उन्होंने अपने एक दोस्त की आपबीती सुनाते हुए दावा किया है कि आज के दौर में किसी छोटी कंपनी में ज्यादा सैलरी पाने से बेहतर है कि आप किसी बड़ी कंपनी में थोड़ी कम सैलरी पर काम करें। आइए जानते हैं कि उनके दोस्त ने 60% हाइक के चक्कर में क्या गलती की और नौकरी बदलते समय आपको किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।

60% हाइक का ऑफर और फिर लग गया बड़ा झटका

हमारी सहयोगी वेबसाइट न्यूज 18 ने इस वायरल वीडियो पर डिटेल्ड रिपोर्ट की है। इसके मुताबिक सनी कुमार ने वीडियो में बताया कि उनका एक दोस्त पुणे में मास्टरकार्ड जैसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता था। वहां उसकी सैलरी अच्छी थी, वर्क प्रोफाइल पूरी तरह स्टेबल था और वह अपने करियर में काफी अच्छा कर रहा था। इसी बीच उसे एक कंसल्टेंसी फर्म से 60 फीसदी सैलरी हाइक का बड़ा ऑफर मिला। इतने बड़े पैकेज के लालच में आकर उसने मास्टरकार्ड की स्टेबल नौकरी छोड़ दी और नई कंपनी जॉइन कर ली।

6 महीने में ही पलट गई बाजी

सनी के मुताबिक यह फैसला उनके दोस्त के लिए सही साबित नहीं हुआ। नई कंसल्टेंसी कंपनी को जॉइन किए हुए अभी महज छह महीने ही हुए थे कि कंपनी के हाथ से वो प्रोजेक्ट ही फिसल गया जिसके लिए उनके दोस्त को हायर किया गया था। इसके तुरंत बाद कंपनी ने उसके दोस्त से कहा कि या तो वह खुद इस्तीफा दे दे या फिर उसे नौकरी से निकाल दिया जाएगा।

आईटी सेक्टर में अस्थिरता: सनी कुमार की सलाह

इस घटना का उदाहरण देते हुए सनी कुमार ने प्रोफेशनल्स को सलाह दी है कि वे सिर्फ बड़ा पे-चेक देखकर नौकरी बदलने से पहले दो बार जरूर सोचें। उन्होंने वीडियो में कहा कि अगर आप एक अच्छी और स्टेबल कंपनी में हैं, जहां आपकी सैलरी अच्छी है तो मेरा सुझाव यही होगा कि भले ही आपको 60-70% या 100% तक की हाइक भी क्यों न मिल रही हो, कम से कम अगले 6 महीने से एक साल तक जॉब स्विच न करें। इन दिनों आईटी सेक्टर काफी वोलटाइल यानी अस्थिर है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

सनी कुमार का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और इस पर नौकरीपेशा लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक यूजर ने सनी की बात से सहमति जताते हुए कहा कि जॉब सिक्योरिटी जरूरी है लेकिन मेट्रो शहरों की हकीकत भी देखनी होगी। यूजर ने लिखा कि कम सैलरी में मेट्रो शहर के कमरे का किराया और राशन का खर्च उठाना मुश्किल होता है। इसलिए किसी के बहकावे में आने के बजाय अपना फैसला खुद लें। मास्टरकार्ड अच्छी कंपनी है और हमें समझना चाहिए कि हर बार बात सिर्फ हाइक की नहीं, स्टेबिलिटी की होती है।

एक दूसरे यूजर ने कुमार के विचार का समर्थन करते हुए लिखा कि मैं हमेशा सुनिश्चित करता हूं कि जब भी जॉब बदलूं तो एक बड़ी कंपनी से दूसरी बड़ी कंपनी में ही जाऊं। मैं किसी छोटी कंपनी में नौकरी खोने का रिस्क और उसका रोज का तनाव नहीं झेल सकता।

दूसरा पक्ष: बड़ी कंपनियां भी नहीं हैं लेऑफ से सुरक्षित

कई सोशल मीडिया यूजर्स ने सनी के इस तर्क का विरोध किया कि बड़ी कंपनियां पूरी तरह सुरक्षित होती हैं। उन्होंने इसके लिए उदाहरण भी दिए। एक यूजर ने कमेंट किया कि कोई भी कंपनी सुरक्षित नहीं है।। मुझे बीती 15 जून को ही HSBC से लेऑफ (नौकरी से निकालना) कर दिया गया। दूसरे यूजर ने लिखा कि क्या गारंटी है कि मास्टरकार्ड से भी उसे नहीं निकाला जाता… आजकल बड़ी कंपनियां भी बहुत ज्यादा रीस्ट्रक्चरिंग कर रही हैं। एक तीसरे शख्स ने चुटकी लेते हुए कहा, ‘निकाले तो आप बड़ी कंपनी से भी जा सकते हैं और छोटी से भी। अंतर बस इतना है कि छोटी कंपनी ने कम से कम वहां रहने के दौरान आपको 60% ज्यादा पैसे तो दिए।’

जॉब स्विच करते वक्त केवल कंपनी का साइज न देखें, इन बातों का रखें ख्याल

बहस के बीच एक यूजर ने बहुत ही काम की सलाह दी कि फैसला सिर्फ कंपनी के छोटे या बड़े होने के आधार पर नहीं होना चाहिए बल्कि आज के दौर में कुछ अन्य महत्वपूर्ण चीजों का एनालिसिस करना जरूरी है:

SaaS कंपनियों से बचें: यूजर के मुताबिक इन दिनों SaaS (सॉफ्टवेयर एज अ सर्विस) कंपनियों में जाने से बचना चाहिए। नौकरी बदलने से पहले कंपनी के ग्लोबल हेडकाउंट और भारत में उनके कर्मचारियों की संख्या की जांच करें। कंपनी का कुल रेवेन्यू कितना है और उसका नेट प्रॉफिट क्या है, इसकी जानकारी जरूर जुटाएं। कंपनी के भविष्य के प्लान क्या हैं और वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में कितना निवेश कर रहे हैं, इन सभी पहलुओं को चेक करने के बाद ही कोई फैसला लें।

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