कंधे पर खूब जच रही है ये 7 ट्रेंडी डिजाइन, सावन में आया मेहंदी का नया अंदाज!

सावन और त्योहारों के मौके पर मेहंदी लगाना हर किसी को पसंद आता है। इस बार हाथों और पैरों की मेहंदी से कुछ अलग ट्रेंड अपनाया जा सकता है। कंधे पर बनी मेहंदी डिजाइन इन दिनों काफी पसंद की जा रही है। स्लीवलेस ब्लाउज, ऑफ-शोल्डर ड्रेस और फ्यूजन आउटफिट के साथ कंधे की मेहंदी बहुत खूबसूरत लगती है।

 

मंडला फ्लोरल डिजाइन

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मंडला और फूलों से बनी मेहंदी कंधे पर बेहद सुंदर दिखाई देती है। डिजाइन की शुरुआत बीच में बने गोल मंडला से होती है, जिसके चारों तरफ छोटी पंखुड़ियां, पत्तियां और महीन बेलें बनाई जाती हैं। कंधे के गोल हिस्से पर यह पैटर्न खूबसूरत लगते है। हल्के रंग के कपड़ों या स्लीवलेस ब्लाउज के साथ यह डिजाइन खास तौर पर उभरकर दिखाई देता है।

 

मोर वाली मेहंदी

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सावन के मौसम में मोर का डिजाइन काफी खूबसूरत लगता है। कंधे पर गर्दन के पास मोर शेप बनाकर उसके पंखों को बारीक पैटर्न से सजाते है। इसके साथ छोटी बेलें, फूल और पत्तियां जोड़ने से डिजाइन और भी अट्रैक्टिव बन जाता है। मोर की लंबी आकृति कंधे से बांह की तरफ जाती हुई बनाई जाए, तो पूरा पैटर्न ज्यादा स्टाइलिश दिखाई देता है।

 

ज्वेलरी स्टाइल मेहंदी

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भारी गहनों के बजाय कंधे पर ज्वेलरी जैसा मेहंदी पैटर्न काफी अलग अंदाज देता है। इसमें नेकलेस, चेन, झूमर और मोतियों जैसी आकृतियां बनाई जाती हैं। कंधे के ऊपरी हिस्से से शुरू होकर डिजाइन को नीचे की ओर हल्का फैलाया जा सकता है। मेहंदी की बारीक लाइनें इसे ज्वेलरी लुक देती हैं। साड़ी, लहंगा या फ्यूजन आउटफिट के साथ यह डिजाइन काफी रॉयल नजर आता है।

 

बोहो मेहंदी डिजाइन

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बोहो स्टाइल मेहंदी में ट्रेडिशनल पैटर्न के साथ मॉडर्न मोटिफ्स का ब्लेंड देखने को मिलता है। मंडला, छोटी चेन, लटकन, पत्तियां और ज्योमेट्रिक आकृतियां इस डिजाइन का हिस्सा बन सकती हैं। कंधे पर इसे हल्के और खुले पैटर्न में बनाया जाता है। यह डिजाइन इंडो-वेस्टर्न या वेस्टर्न आउटफिट के साथ अच्छा लगता है।

 

अरैबिक फ्लोरल डिजाइन

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अरैबिक मेहंदी में बड़े फूल, पत्तियां और घुमावदार बेलें प्रमुख होती हैं। कंधे पर इस डिजाइन को एक तरफ से शुरू करके बांह की ओर बढ़ाया जा सकता है। मोटी आउटलाइन और बीच में खाली जगह होने के कारण यह डिजाइन दूर से भी साफ दिखाई देता है। ज्यादा भरी हुई मेहंदी पसंद न करने वालों के लिए यह स्टाइल अच्छा रहता है।

 

मिनिमल टैटू मेहंदीThis may contain: the back of a woman's shoulder with henna tattoos on it and flowers

छोटे और साफ डिजाइन पसंद करने वालों के लिए मिनिमल टैटू मेहंदी काफी अच्छी रहेगी। कंधे पर छोटा फूल, तितली, चांद, पत्ती, स्टार या कोई सुंदर प्रतीक बनाया जा सकता है। सावन के मौके पर बेलपत्र, त्रिशूल, डमरू या ॐ जैसे छोटे मोटिफ्स भी शामिल किए जा सकते हैं। डिजाइन छोटा होने के बावजूद कंधे पर काफी स्टाइलिश दिखाई देता है।

 

बेल और पत्तियों वाली डिजाइन

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कंधे से बांह की तरफ जाती हुई बेल और पत्तियों की मेहंदी बहुत नाजुक और खूबसूरत लगती है। इसमें छोटी पत्तियों, फूलों और घुमावदार बेलों को एक फ्लो में बनाया जाता है। डिजाइन को ज्यादा गहरा भरने के बजाय कुछ हिस्से खाली रखे जाते हैं, जिससे पैटर्न हल्का और क्लासी नजर आता है। स्लीवलेस सूट, ब्लाउज या ऑफ-शोल्डर ड्रेस के साथ यह डिजाइन खूबसूरत लगेगा।

 

चांद-सितारा डिजाइन

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कंधे पर चांद और सितारों वाली मेहंदी डिजाइन काफी खूबसूरत और अलग नजर आती है। इसमें एक छोटा सा चांद बनाकर उसके आसपास सितारे, छोटी पत्तियां और बारीक डॉट्स बनाए जा सकते हैं। डिजाइन को कंधे से थोड़ा नीचे तक फैलाने पर यह अच्छी लगती है। सावन के त्योहारों में यह डिजाइन स्टाइलिश लुक देती है

Gen Z की अनोखी नौकरी वाली मांग ने छेड़ी बहस, IITian फाउंडर ने बताया क्यों कैंडिडेट को किया सिलेक्ट

नौकरी के इंटरव्यू में कैंडिडेट आमतौर पर सैलरी, छुट्टियों, वर्क फ्रॉम होम और जॉब रोल से जुड़ी बातें पूछते हैं। लेकिन नोएडा के एक फाउंडर के सामने एक उम्मीदवार ने ऐसी मांग रख दी, जिसने इंटरव्यू का माहौल ही बदल दिया। कैंडिडेट ने बेहद आत्मविश्वास के साथ कहा कि उसे हर दोपहर 30 मिनट की नींद लेने की जरूरत होगी, क्योंकि इससे उसकी productivity बेहतर होती है। हैरानी की बात यह थी कि उसने यह बात न तो मजाक में कही और न ही किसी झिझक के साथ।

फाउंडर नितिन वर्मा के मुताबिक, उम्मीदवार ने अपनी इस जरूरत को ऐसे रखा जैसे वह सैलरी पर बातचीत कर रहा हो। पहली प्रतिक्रिया में उन्हें इंटरव्यू खत्म करने का ख्याल आया, लेकिन बाद में उन्होंने इस मांग को एक अलग नजरिए से देखने का फैसला किया। सवाल यह था कि क्या कर्मचारी के काम के नतीजे अच्छे हों तो 30 मिनट की nap वास्तव में बड़ी समस्या है?

 ‘हर दोपहर मुझे Nap चाहिए’

IIT-backed कंपनी के फाउंडर और CEO नितिन वर्मा ने LinkedIn पर इस इंटरव्यू का अनुभव शेयर किया। उनके मुताबिक, उम्मीदवार ने पूरी गंभीरता और आत्मविश्वास के साथ कहा कि दोपहर की 30 मिनट की झपकी उसके काम को बेहतर बनाती है। वर्मा ने बताया कि उम्मीदवार ने यह बात ऐसे रखी, जैसे वह सैलरी पर बातचीत कर रहा हो। उनका पहला विचार इंटरव्यू खत्म करने का था, लेकिन फिर उन्होंने सोचा कि क्या यह मांग वाकई इतनी गलत है।

फाउंडर को पसंद आई कैंडिडेट की बेबाकी

नितिन वर्मा ने माना कि छोटी दोपहर की नींद से फोकस, एनर्जी और याददाश्त बेहतर हो सकती है। उन्होंने मजाक में कहा कि कॉरपोरेट ऑफिस में दोपहर की मीटिंग्स के दौरान कई लोग वैसे भी ऊंघते नजर आते हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि यह उम्मीदवार अपनी जरूरत खुलकर बता रहा था। फाउंडर के मुताबिक, ज्यादातर लोग इंटरव्यू में खुद को कंपनी की पसंद के हिसाब से पेश करते हैं, जबकि इस कैंडिडेट ने साफ बताया कि वह किस तरह काम करने पर सबसे ज्यादा productive रहता है।

‘मुझे फर्क नहीं पड़ता तुम कब सोते हो’

वर्मा ने कैंडिडेट को फिक्स 30 मिनट की Nap Break देने के बजाय साफ कहा कि उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि कर्मचारी कब आराम करता है। उनके लिए जरूरी यह है कि सौंपा गया काम समय पर पूरा हो। यानी शर्त सीधी थी, काम पूरा करो, तो घंटे गिनने की जरूरत नहीं; काम नहीं हुआ तो कोई Nap मदद नहीं करेगी।

आखिरकार मिल गई नौकरी

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि कैंडिडेट को नौकरी मिल गई। फाउंडर ने कहा कि उसकी Nap की मांग असली मुद्दा नहीं थी। उन्हें उसकी ईमानदारी और आत्मविश्वास ने प्रभावित किया। इस घटना ने उन्हें यह सोचने पर भी मजबूर किया कि क्या आधुनिक वर्कप्लेस में कर्मचारियों की productivity को ऑफिस में बिताए घंटों से मापा जाना चाहिए या उनके actual results से।

LinkedIn पर लोगों ने क्या कहा?

पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने इसे बदलते workplace culture का संकेत बताया। कुछ ने कहा कि अगर कर्मचारी अपना काम पूरा कर रहा है तो उसे अपनी working style में थोड़ी आजादी मिलनी चाहिए। वहीं, कुछ यूजर्स ने Gen Z के इस अंदाज पर मजाक भी किया। एक यूजर ने कहा कि Gen Z को पता है कि जरूरी benefits के लिए negotiation कैसे करनी है।

Raksha Bandhan Mehndi Designs: रक्षाबंधन पर हाथों की खूबसूरती में लगाएं चार चांद, ट्राई करें ये लेटेस्ट और आसान मेहंदी डिजाइन

बिना मेहंदी कोन के सिर्फ 10 मिनट में पाएं खूबसूरत डिजाइन, अपनाएं यह पारंपरिक तरीका

त्योहारों के मौके पर मेहंदी लगाए बिना महिलाओं का श्रृंगार अधूरा माना जाता है। गोरिंटाकू (Gorintaku) मेहंदी डिजाइन रक्षाबंधन और तीज जैसे खास अवसरों पर अगर आप कम समय में यूनिक और खूबसूरत मेहंदी डिजाइन चाहती हैं, तो यह पारंपरिक (traditional) तरीका आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है। इसमें मेहंदी कोन या बारीक डिजाइन बनाने की जरूरत नहीं पड़ती, फिर भी हाथों पर नेचुरल, अट्रेक्टिव और सबसे अलग पैटर्न उभरकर आता है:

त्योहारों पर अपनाएं गोरिंटाकू स्टाइल मेहंदी

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रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) और तीज (Teej) पर मेहंदी लगाना शुभ माना जाता है। अगर इस बार आप मेहंदी कोन और अरेबिक (Arabic) डिजाइन से हटकर कुछ अलग ट्राई करना चाहती हैं, तो गोरिंटाकू स्टाइल एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है। यह ट्रेडिशनल तरीका अपनी सादगी, नेचुरल लुक और जल्दी तैयार होने की वजह से फिर से पसंद किया जा रहा है।

ताजी मेहंदी, फूल और पत्ती से बनता है डिजाइन

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इस ट्रेडिशनल टेक्निक (traditional technique) में बारीक डिजाइन बनाने की जरूरत नहीं होती। हथेली के बीच में कोई ताजा फूल या सुंदर पत्ती रखी जाती है। इसके बाद उसके ऊपर और चारों तरफ ताजी पिसी हुई मेहंदी (Mehndi) का गाढ़ा पेस्ट गोल आकार में लगाया जाता है। चाहें तो उंगलियों के पोरों पर भी मेहंदी लगाई जाती है।

सूखने के बाद उभरता है खूबसूरत नेचुरल पैटर्न

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मेहंदी पूरी तरह सूखने के बाद फूल या पत्ती को हटा दिया जाता है। जिस जगह फूल या पत्ती रखी गई होती है, वहां रंग नहीं चढ़ता और गहरे लाल-भूरे रंग की मेहंदी के बीच उसकी साफ और सुंदर शेप उभरकर दिखाई देती है। यही इस टेक्निक की सबसे खास पहचान है।

सिर्फ 10 मिनट में तैयार हो जाता है फेस्टिव लुक

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आजकल जहां ब्राइडल (bridal) और अरेबिक मेहंदी (Arabic Mehndi) डिजाइन बनाने में काफी समय लगता है, वहीं इस पारंपरिक तरीके (traditional method) में करीब 10 मिनट में मेहंदी लग जाती है। इसलिए अगर रक्षाबंधन या तीज की तैयारियों के बीच समय कम हो, तो भी आप आसानी से खूबसूरत मेहंदी लुक पा सकती हैं।

केमिकल वाले कोन से बेहतर नेचुरल ऑप्शन

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इस टेक्निक में ताजी पिसी हुई मेहंदी की पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए यह केमिकल वाले मेहंदी कोन (Mehndi cone) की तुलना में ज्यादा नेचुरल ऑप्शन माना जाता है। कई लोगों का मानना है कि ताजी मेहंदी हाथों को ठंडक भी देती है, जिससे इसे लगाना और भी कम्फर्टेबल महसूस होता है।

हर बार मिलेगा अलग और यूनिक डिजाइन

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इस ट्रडिशनल मेहंदी स्टाइल (mehndi style) की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हर बार इस्तेमाल होने वाला फूल या पत्ती अलग होती है। इसलिए हर डिजाइन भी अलग और यूनिक बनता है।