Rakhi Bandhne Ke Niyam: राखी बांधते समय ध्यान रखें दिशा का यह नियम, जानें राखी बांधने के ये जरूरी नियम

Rakhi Bandhne Ke Niyam: रक्षा बंधन का त्योहार 28 अगस्त को मनाया जाएगा। सावन माह की पूर्णिमा को मनाए जाने वाले इस पर्व का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। यह पर्व भाई-बहन के अटूट रिश्ते, भरोसे और प्रेम का प्रतीक है। बहनें इस दिन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और भगवान से उनके लिए लंबी आयु, सुख-समृद्धि और संपन्नता का आशीर्वाद मांगती हैं। इस रक्षा सूत्र के बदले भाई अपने बहन की हमेशा रक्षा करने का वचन देते हैं।

इस दिन भाई और बहन को राखी बांधते समय कुछ बातों को लेकर बेहद सतर्क रहना चाहिए। माना जाता है कि राखी बांधते समय सही दिशा और विधि का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। ऐसा करने से भाई-बहन के रिश्ते में मिठास बनी रहती है। साथ ही, जीवन में सकारात्मकता और खुशहाली आती है। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राखी बांधते समय भाई और बहन दोनों की दिशा का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है :

भाई का मुख : राखी बंधवाते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। ज्योतिष और वास्तु दोनों ही शास्त्रों में इस दिशा को शुभ माना गया है। माना जाता है कि सही दिशा का ध्यान रखते हुए रक्षा बंधन करने पर जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है। यह बात ध्यान रखनी बहुत जरूरी है कि राखी बांधते समय गलती से भी भाई का चेहरा दक्षिण दिशा की ओर नहीं होना चाहिए। यह दिशा यम और पितरों की होती है।

बहन का मुख : भाई का मुख पूर्व या उत्तर में होने पर बहन का मुख अपने आप पश्चिम या दक्षिण दिशा की ओर होगा। इस विधि से राखी बांधना शास्त्र सम्मत और सकारात्मक माना जाता है।

राखी बांधने के मुख्य नियम

सिर पर कपड़ा रखें : भाई को नंगे सिर राखी नहीं बंधवानी चाहिए। राखी बंधवाते समय सिर पर रुमाल या कोई कपड़ा अवश्य रखें।

अक्षत और तिलक : सबसे पहले भाई के माथे पर कुमकुम/रोली का तिलक लगाएं और उस पर अक्षत (चावल) लगाएं। ध्यान रखें कि चावल टूटे हुए न हों।

दाहिने हाथ की कलाई : राखी हमेशा भाई की दाहिनी कलाई पर ही बांधी जानी चाहिए।

तीन गांठें लगाएं : राखी बांधते समय उसमें 3 गांठें लगाना शुभ माना जाता है। ये तीन गांठें ब्रह्मा, विष्णु, महेश यानी त्रिदेव का प्रतीक मानी जाती हैं।

आरती उतारें : राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारें, उसका मुंह मीठा कराएं और भाई अपनी बहन के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद ले या उससे छोटी बहन को आशीर्वाद व उपहार दे।

भद्रा काल और राहूकाल का ध्यान : भद्रा काल और राहूकाल में राखी बांधना वर्जित माना जाता है, इसलिए हमेशा शुभ मुहूर्त में ही रक्षासूत्र बांधें।

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Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन पर ग्रहण और भद्रा के साथ रहेगा पंचक का साया, जानें त्योहार पर पंचक का क्या होगा असर

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम का पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहनों की हमेशा रक्षा करने का वचन देते हैं और राखी बांधने पर उन्हें उपहार देते हैं। यह पर्व हर साल सावन की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इस पर्व और इस दिन का विशेष स्थान है। इसके अलावा इस साल रक्षा बंधन पर कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं।

इस साल रक्षा बंधन पर साल 2026 का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण लग रहा है। सावन पूर्णिमा पर भद्रा का साया रहेगा और साथ ही पंचक भी रहेगा। यह तीनों ही ऐसी बातें हैं, जिनमें शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। राखी बांधते समय भद्रा, ग्रहण और पंचक का विचार किया जाता है। ऐसे में लोगों के मन में राखी के त्योहार को लेकर भ्रम हो रहा है कि भद्रा और पंचक के दौरान राखी बांधने को लेकर क्या नियम और मान्यताएं हैं :

भद्रा का विचार : शास्त्रों में भद्रा के समय राखी बांधना पूरी तरह वर्जित माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण को उसकी बहन सूर्पणखा ने भद्रा काल में ही राखी बांधी थी, जिसके कारण उसके पूरे कुल का नाश हो गया। इसलिए भद्रा समाप्त होने के बाद ही राखी बांधी जाती है।

पंचक का विचार : पंचक के दौरान राखी बांधने पर कोई प्रतिबंध या दोष नहीं होता है। पंचक का प्रभाव मुख्य रूप से नए घर के निर्माण, छत ढालने, लकड़ी इकट्ठा करने, दक्षिण दिशा की यात्रा करने या अंतिम संस्कार जैसे कार्यों पर लागू होता है। रक्षाबंधन जैसे शुभ और धार्मिक त्यौहार पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता। इस बार पंचक का आरंभ गुरुवार से हो रहा है। गुरुवार से जो पंचक आरंभ होता है उसे सामान्य माना जाता है।

राखी बांधने का सही नियम :

यदि रक्षाबंधन पर भद्रा का साया है, तो भद्रा काल बीतने का इंतजार करें।

पंचक चल रहा हो तब भी आप भद्रा रहित शुभ मुहूर्त में आराम से राखी बांध सकते हैं।

रक्षाबंधन पर पंचक और भद्रा का समय

27 अगस्त को पंचक दोपहर 1 बजकर 36 मिनट पर लग जाएगा। 28 तारीख को रक्षाबंधन है और पंचक पूरे पांच दिन रहता है। पंचक 1 सितंबर को सुबह 3 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगा।

27 अगस्त को भद्रा पूर्णिमा तिथि आरंभ होने के साथ ही लग जाएगी और रात 9 बजकर 29 मिनट तक रहेगी। इसलिए रक्षाबंधन 27 की बजाय 28 अगस्त को मनाया जाएगा। 28 को सूर्योदय के साथ पूर्णिमा तिथि 9 बजकर 49 मिनट तक ही है जो भद्रा मुक्त है।

रक्षाबंधन के दिन शतभिषा नक्षत्र रहेगा। इसलिए इस दिन राखी बांधने को कोई दोष नहीं लगेगा। रक्षाबंधन शतभिषा नक्षत्र में होगा। इसलिए आप बेफिक्र होकर राखी बांध सकते हैं।

रक्षाबंधन पर रहेगा चंद्र ग्रहण?

इस साल का दूसरा और अंतिम चंद्रग्रहण 28 अगस्त को लगने जा रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि चंद्रग्रहण के दिन क्या राखी बांध सकते हैं। चंद्रग्रहण का सूतक काल ग्रहण आरंभ होने से 9 घंटे पहले लग जाता है। लेकिन, यह चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए इसका सूतक भी मान्य नहीं होगा। इसलिए रक्षाबंधन का पर्व आप बिना किसी के चिंता का मना सकते हैं।

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Rakshabandhan 2026: इस रक्षाबंधन पर एक नहीं बल्कि 7 शुभ योग बन रहे हैं, जानें रक्षाबंधन की तारीख और राखी बांधने के शुभ मुहूर्त

Rakshabandhan 2026: रक्षाबंधन 2026 शुक्रवार, 28 अगस्त को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, इस साल यह त्योहार खास तौर पर शुभ माना जा रहा है क्योंकि एक ही दिन सात अत्यंत दुर्लभ और शुभ योग बन रहे हैं। ग्रहों और नक्षत्रों का ऐसा मेल होने की उम्मीद है, जिसका परिणाम बहुत शुभ होगा। इससे भी जरूरी बात यह है कि भद्रा त्योहार पर असर नहीं डालेगी, जिससे बहनों को अपने भाइयों की कलाई पर पवित्र धागा बांधने के लिए ज्यादा समय मिलेगा।

रक्षाबंधन पर भद्रा नहीं

पंचांग के अनुसार, भद्रा गुरुवार, 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे शुरू होगी और उसी दिन रात 9:27 बजे खत्म होगी। इसलिए, 28 अगस्त को भद्रा नहीं होगी, जिससे परिवार बिना इस रोक के रक्षाबंधन मना सकेंगे। भद्रा को राखी बांधने के लिए अशुभ समय माना जाता है। हालांकि, इस साल यह त्योहार से एक दिन पहले खत्म हो जाएगी।

रक्षाबंधन पर सात शुभ योग

रक्षाबंधन 2026 को खास बनाने के लिए कई अच्छे ज्योतिषीय संयोग बनने की उम्मीद है। इनमें शतभिषा नक्षत्र, सुकर्मा योग, त्रिपुष्कर योग और सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ-साथ दूसरे शुभ ग्रहों की स्थिति शामिल है।

शतभिषा नक्षत्र के प्रभाव में चंद्रमा कुंभ राशि में रहेगा। ज्योतिष में, यह नक्षत्र वरुण देव से जुड़ा है और राहु इसका स्वामी है। इस दौरान की जाने वाली पूजा, दान और दूसरे आध्यात्मिक कामों का खास महत्व माना जाता है।

कर्क राशि में बृहस्पति का होना भी अच्छा माना जाता है। इसके अलावा, भद्रा का न होना भी उन वजहों में गिना जा रहा है जो इस दिन को रक्षाबंधन की रस्में करने के लिए ज़्यादा सही बनाती हैं।

सावन पूर्णिमा तिथि कब से कब तक है?

पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह करीब 9:09 बजे शुरू होने और 28 अगस्त को सुबह करीब 9:48 बजे खत्म होने की उम्मीद है। पूर्णिमा 28 अगस्त को सूर्योदय के समय रहेगी, इसलिए उदया तिथि की परंपरा के अनुसार उसी दिन रक्षाबंधन मनाया जाएगा। पूर्णिमा का व्रत करने वाले श्रद्धालु 27 अगस्त को उपवास कर सकते हैं, जबकि बहनें 28 अगस्त को राखी बांध सकती हैं।

राखी बांधने का सबसे अच्छा समय

सुबह का मुहूर्त : सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक

शुभ चौघड़िया के आधार पर एक और शुभ समय इस समय रहने की उम्मीद है:

शुभ चौघड़िया : सुबह 11:45 बजे से दोपहर 1:19 बजे तक

राहु काल में राखी बांधने से बचें

राहु काल सुबह 10:11 बजे से 11:45 बजे तक रहने की उम्मीद है। ज्योतिष के हिसाब से समय मानने वाले परिवार इस दौरान राखी बांधने से बच सकते हैं।

पंचांग का समय शहर और कैलेंडर के हिसाब से थोड़ा अलग हो सकता है। इसलिए परिवार यह रस्म करने से पहले लोकल मुहूर्त देख सकते हैं।

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Raksha Bandhan 2026: 28 अगस्त को चंद्रमा को लगेगा ग्रहण, जानें कैसा होगा रक्षा बंधन का त्योहार और किस समय बांधी जाएगी राखी

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन का पर्व हमारे देश में मनाए जाने वाले सभी प्रमुख पर्व और त्योहारों में विशेष स्थान रखता है। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है। रक्षा बंधन का पर्व हर साल सावन माह की पूर्णिमा तिथि मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं, उनकी कलाई पर राखी बांधती हैं और आरती उतार कर मुंह मीठा कराती हैं। माना जाता है कि ऐसा करते हुए वे अपने भाई की सुख-समृद्धि, अच्छी सेहत और खुशहाली की कामना करती हैं। इसके बदले में भाई अपनी बहन की सदैव रक्षा करने का वचन देते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस पर्व का इतिहास पौराणिक काल में भगवान कृष्ण और द्रौपदी से जुड़ा हुआ है।

इस साल भाई बहन का यह पवित्र पर्व रक्षा बंधन 28 अगस्त 2026 को पूरे देश में धूम धाम से मनाया जाएगा। लेकिन इसी दिन एक और दुर्लभ खगोलीय घटना भी घटने जा रही है, जिससे इस दिन का महत्व बढ़ गया है। दरअसल, इसी दिन साल 2026 का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण भी लगने जा रहा है। इस दिन चंद्र ग्रहण लगने से लोगों में इस बात का कंफ्यूजन हो रहा है कि बहनें अपने भाइयों को राखी कैसे बांधेंगीं, सूतक कब से कब तक रहेगा और ग्रहण का क्या समय रहेगा? आइए जानें इन सभी सवालों के जवाब।

रक्षाबंधन 2026

पंचांग के अनुसार, सावन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 27 अगस्त 2026, गुरुवार को सुबह 9 बजकर 8 मिनट से होगी। इसका समापन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर होगा। तिथि के अनुसार, 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा।

रक्षाबंधन 2026 शुभ मुहूर्त

28 अगस्त को राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इस दिन लाभ-उन्नति मुहूर्त सुबह 7 बजकर 33 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 9 बजकर 10 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।

रक्षाबंधन पर भद्रा का साया

इस साल 27 अगस्त को भद्रा का प्रभाव सुबह 9 बजकर 8 मिनट से रात 9 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इसलिए 28 अगस्त को बिना किसी बाधा के श्रद्धा और उल्लास के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा सकेगा।

चंद्र ग्रहण 2026

28 अगस्त 2026 को राखी के दिन साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भी लगेगा। ग्रहण की शुरुआत 28 अगस्त को सुबह 6 बजकर 53 मिनट पर होगी। इसका समापन दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर माना जा रहा है। यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए इसका सूतक काल और ग्रहण से जुड़े नियम दोनों ही मान्य नहीं रहेंगे। ऐसे में बहनें बिना सूतक की बाधा के अपने भाई को राखी बांध सकती हैं।

कहां दिखाई देगा ग्रहण?

28 अगस्त का आंशिक चंद्र ग्रहण अफ्रीका, यूरोप, उत्तर एवं दक्षिण अमेरिका तथा पश्चिमी एशिया के कई देशों में दिखाई देगा। हालांकि, भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा।

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कंधे पर खूब जच रही है ये 7 ट्रेंडी डिजाइन, सावन में आया मेहंदी का नया अंदाज!

सावन और त्योहारों के मौके पर मेहंदी लगाना हर किसी को पसंद आता है। इस बार हाथों और पैरों की मेहंदी से कुछ अलग ट्रेंड अपनाया जा सकता है। कंधे पर बनी मेहंदी डिजाइन इन दिनों काफी पसंद की जा रही है। स्लीवलेस ब्लाउज, ऑफ-शोल्डर ड्रेस और फ्यूजन आउटफिट के साथ कंधे की मेहंदी बहुत खूबसूरत लगती है।

 

मंडला फ्लोरल डिजाइन

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मंडला और फूलों से बनी मेहंदी कंधे पर बेहद सुंदर दिखाई देती है। डिजाइन की शुरुआत बीच में बने गोल मंडला से होती है, जिसके चारों तरफ छोटी पंखुड़ियां, पत्तियां और महीन बेलें बनाई जाती हैं। कंधे के गोल हिस्से पर यह पैटर्न खूबसूरत लगते है। हल्के रंग के कपड़ों या स्लीवलेस ब्लाउज के साथ यह डिजाइन खास तौर पर उभरकर दिखाई देता है।

 

मोर वाली मेहंदी

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सावन के मौसम में मोर का डिजाइन काफी खूबसूरत लगता है। कंधे पर गर्दन के पास मोर शेप बनाकर उसके पंखों को बारीक पैटर्न से सजाते है। इसके साथ छोटी बेलें, फूल और पत्तियां जोड़ने से डिजाइन और भी अट्रैक्टिव बन जाता है। मोर की लंबी आकृति कंधे से बांह की तरफ जाती हुई बनाई जाए, तो पूरा पैटर्न ज्यादा स्टाइलिश दिखाई देता है।

 

ज्वेलरी स्टाइल मेहंदी

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भारी गहनों के बजाय कंधे पर ज्वेलरी जैसा मेहंदी पैटर्न काफी अलग अंदाज देता है। इसमें नेकलेस, चेन, झूमर और मोतियों जैसी आकृतियां बनाई जाती हैं। कंधे के ऊपरी हिस्से से शुरू होकर डिजाइन को नीचे की ओर हल्का फैलाया जा सकता है। मेहंदी की बारीक लाइनें इसे ज्वेलरी लुक देती हैं। साड़ी, लहंगा या फ्यूजन आउटफिट के साथ यह डिजाइन काफी रॉयल नजर आता है।

 

बोहो मेहंदी डिजाइन

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बोहो स्टाइल मेहंदी में ट्रेडिशनल पैटर्न के साथ मॉडर्न मोटिफ्स का ब्लेंड देखने को मिलता है। मंडला, छोटी चेन, लटकन, पत्तियां और ज्योमेट्रिक आकृतियां इस डिजाइन का हिस्सा बन सकती हैं। कंधे पर इसे हल्के और खुले पैटर्न में बनाया जाता है। यह डिजाइन इंडो-वेस्टर्न या वेस्टर्न आउटफिट के साथ अच्छा लगता है।

 

अरैबिक फ्लोरल डिजाइन

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अरैबिक मेहंदी में बड़े फूल, पत्तियां और घुमावदार बेलें प्रमुख होती हैं। कंधे पर इस डिजाइन को एक तरफ से शुरू करके बांह की ओर बढ़ाया जा सकता है। मोटी आउटलाइन और बीच में खाली जगह होने के कारण यह डिजाइन दूर से भी साफ दिखाई देता है। ज्यादा भरी हुई मेहंदी पसंद न करने वालों के लिए यह स्टाइल अच्छा रहता है।

 

मिनिमल टैटू मेहंदीThis may contain: the back of a woman's shoulder with henna tattoos on it and flowers

छोटे और साफ डिजाइन पसंद करने वालों के लिए मिनिमल टैटू मेहंदी काफी अच्छी रहेगी। कंधे पर छोटा फूल, तितली, चांद, पत्ती, स्टार या कोई सुंदर प्रतीक बनाया जा सकता है। सावन के मौके पर बेलपत्र, त्रिशूल, डमरू या ॐ जैसे छोटे मोटिफ्स भी शामिल किए जा सकते हैं। डिजाइन छोटा होने के बावजूद कंधे पर काफी स्टाइलिश दिखाई देता है।

 

बेल और पत्तियों वाली डिजाइन

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कंधे से बांह की तरफ जाती हुई बेल और पत्तियों की मेहंदी बहुत नाजुक और खूबसूरत लगती है। इसमें छोटी पत्तियों, फूलों और घुमावदार बेलों को एक फ्लो में बनाया जाता है। डिजाइन को ज्यादा गहरा भरने के बजाय कुछ हिस्से खाली रखे जाते हैं, जिससे पैटर्न हल्का और क्लासी नजर आता है। स्लीवलेस सूट, ब्लाउज या ऑफ-शोल्डर ड्रेस के साथ यह डिजाइन खूबसूरत लगेगा।

 

चांद-सितारा डिजाइन

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कंधे पर चांद और सितारों वाली मेहंदी डिजाइन काफी खूबसूरत और अलग नजर आती है। इसमें एक छोटा सा चांद बनाकर उसके आसपास सितारे, छोटी पत्तियां और बारीक डॉट्स बनाए जा सकते हैं। डिजाइन को कंधे से थोड़ा नीचे तक फैलाने पर यह अच्छी लगती है। सावन के त्योहारों में यह डिजाइन स्टाइलिश लुक देती है

Raksha Bandhan 2026: इस साल क्या भद्रा के साये में मनाया जाएगा रक्षा बंधन का पर्व? भाई की तरक्की के लिए बहनें राखी बांधने से पहले करें ये उपाय

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन के पर्व का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। यह पर्व पूरे साल में आने वाले सभी उत्सव और त्योहारों में सबसे मासूम और प्यारा माना जाता है, क्योंकि ये भाई-बहन के बीच प्रेम और मधुरता का प्रतीक है। रक्षा बंधन का पर्व हर साल सावन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके स्वस्थ, सुखी जीवन और दीर्घायु की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहन की रक्षा और हर मुश्किल घड़ी में उसके साथ खड़े रहने का वचन देता है।

रक्षा बंधन के पर्व की शुरुआत पौराणिक काल से जुड़ी हुई है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवासुर संग्राम के समय सुदर्शन चक्र के कारण श्री कृष्ण की उंगली कट गई थी, जिससे उनकी उंगली से खून निकलने लगा। द्रौपदी ने यह दृश्य देखा और तुरंत अपनी साड़ी का किनारा फाड़ कर उनकी उंगली में बांध दिया। भगवान कृष्ण द्रौपदी के इस स्नेह और समर्पण से भावुक हो गए। श्रीकृष्ण ने जीवन भर द्रौपदी की रक्षा का वचन दिया और जब द्रौपदी के सम्मान पर संकट आया, तब श्रीकृष्ण ने उनकी लाज बचाकर अपना वचन निभाया। माना जाता है कि इस दिन बहनें राखी बांधने से पहले अगर एक उपाय कर लें, तो उससे भाइयों की तरक्की होती है। आइए जानें इस साल कब मनाया जाएगा राखी का त्योहार और क्या इस दिन रहेगा भद्रा का साया

कब है रक्षा बंधन ?

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल सावन पूर्णिमा तिथि का आरंभ 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 9 मिनट पर होगा और इसका समापन 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 49 मिनट पर होगा। चूंकि 28 अगस्त को पूर्णिमा उदया तिथि में रहेगी। इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व इसी दिन मनाया जाएगा। उदया तिथि के कारण 28 अगस्त को पूरे दिन त्योहार मनाया जा सकेगा।

रक्षाबंधन पर भद्रा का प्रभाव

शास्त्रों के अनुसार, भद्रा काल में रक्षा बंधन वर्जित माना गया है। राहत की बात यह है कि 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के दिन भद्रा नहीं रहेगी। हालांकि सावन पूर्णिमा पर 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 8 मिनट से रात 9 बजकर 32 मिनट तक भद्रा का प्रभाव रहेगा। लेकिन 28 अगस्त को पूर्णिमा उदया तिथि के साथ-साथ भद्रा रहित भी रहेगी।

राखी बांधने से पहले करें भगवान गणेश और विष्णु का पूजन

राखी बांधने से पहले भगवान गणेश और भगवान विष्णु का पूजन करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे पूजा में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

राखी बांधने का शुभ समय

28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन बहनें सुबह 5 बजकर 57 मिनट से सुबह 9 बजकर 48 मिनट के बीच अपने भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। इस अवधि को रक्षा सूत्र बांधने के लिए शुभ माना गया है। इसके अलावा बहनें सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट के समय अभिजीत मुहूर्त में भी भाई की कलाई पर राखी बांध सकेंगी।

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रक्षाबंधन पर एथनिक लुक में लगाएं ग्लैमर का तड़का, ट्राई करें ये 5 ब्लाउज डिजाइन!

रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) का त्योहार नजदीक आते ही महिलाओं में अपने फेस्टिव लुक को लेकर उत्साह बढ़ जाता है। इस बार आप साड़ी पहनने का प्लान बना रही हैं और सबसे अलग दिखना चाहती हैं, तो सही ब्लाउज डिजाइन चुनना आपके पूरे लुक को खास बना सकता है। देखें ऐसे लेटेस्ट डिजाइनर ब्लाउज डिजाइन्स, जो रक्षाबंधन 2026 पर आपको स्टाइलिश और एलिगेंट लुक देंगे:

Mulberry Silk V-Neck Blouse (मलबरी सिल्क वी-नेक ब्लाउज)

अगर आप रॉयल और एलिगेंट लुक चाहती हैं, तो मलबरी सिल्क का वी-नेक ब्लाउज (V-neck blouse) बेहतरीन ऑप्शन है। इसका मुलायम फैब्रिक और शानदार फिनिश आपकी साड़ी के लुक को और निखार देता है। यह खासतौर पर कांजीवरम (Kanjeevaram) और बनारसी (Banarasi) साड़ी के साथ बेहद खूबसूरत लगता है।

Brocade Design Blouse (ब्रोकेड डिजाइन ब्लाउज)

ट्रेडिशनल लुक के लिए ब्रोकेड ब्लाउज हमेशा ट्रेंड में रहता है। इसका बुना हुआ डिजाइन बिना ज्यादा कढ़ाई के भी रिच और रॉयल लुक देता है। सिल्क या पारंपरिक साड़ियों के साथ यह शानदार लगता है और कोहनी तक की स्लीव्स इसे पूरे दिन पहनने में आरामदायक बनाती हैं।

Inverted V-Cut Blouse (इनवर्टेड V-कट ब्लाउज)

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अगर आप मॉडर्न और स्टाइलिश लुक चाहती हैं, तो इनवर्टेड V-कट ब्लाउज ट्राई करें। इसकी यूनिक बैक डिजाइन (back design) आपके एथनिक लुक में ग्लैमरस टच जोड़ती है और यह यंग वुमन के बीच काफी पसंद किया जा रहा है।

Corset-Style Blouse (कोर्सेट स्टाइल ब्लाउज)

Latest Blouse Front Neck Design Patterns | Front Neck Blouse Design | New Blouse Front Neck 2022

ये चारों डिजाइन इस समय फैशन ट्रेंड में हैं। जैकेट स्टाइल ब्लाउज रॉयल लुक देता है, कोर्सेट ब्लाउज फिगर को स्टाइलिश शेप देता है, केप स्टाइल ब्लाउज यूनिक और फ्यूजन लुक देता है, जबकि मिरर वर्क ब्लाउज बिना ज्यादा ज्वेलरी के भी फेस्टिव लुक को अट्रेक्टिव बना देता है।

Tissue Fabric Blouse (टिशू फैब्रिक ब्लाउज)

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हल्की चमक और एलिगेंट लुक पसंद है, तो टिशू फैब्रिक ब्लाउज चुनें। पान (leaf-shaped) या स्वीटहार्ट (sweetheart) नेकलाइन वाला यह ब्लाउज ऑर्गेंजा (organza) और शिफॉन (chiffon) साड़ियों के साथ बेहद खूबसूरत लगता है। इसकी सॉफ्ट शाइन दिन और शाम, दोनों तरह के फंक्शन के लिए परफेक्ट है।

Sleeveless Sequin Blouse (स्लीवलेस सीक्विन ब्लाउज)

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आप कम ज्वेलरी में भी ग्लैमरस दिखना चाहती हैं, तो स्लीवलेस सीक्विन ब्लाउज बढ़िया ऑप्शन है। इसका हल्का सीक्विन वर्क (sequin work) और वी-नेक डिजाइन शिफॉन व जॉर्जेट (georgette) साड़ियों के साथ शानदार लगता है। साथ ही इसका स्लीवलेस पैटर्न पूरे दिन कम्फर्टेबल भी रहता है।