दो साल का अनुभव लेकर 600 जगह भेजा आवेदन, फिर भी नहीं मिली नौकरी, Reddit पर छिड़ी बहस

भारत के तकनीकी क्षेत्र में नौकरी पाना इन दिनों कई युवाओं के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसी बीच रेडिट पर एक नौकरी तलाश रहे शख्स की पोस्ट ने लोगों का ध्यान खींचा है। करीब दो साल के अनुभव वाले इस व्यक्ति ने दावा किया कि वह सैकड़ों नौकरियों के लिए आवेदन कर चुका है, लेकिन उसे बहुत कम जगहों से जवाब मिला। शख्स ने बताया कि करीब 500-600 आवेदन भेजने के बावजूद उसकी स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ। इसके उलट, सोशल मीडिया और रेडिट पर उसे लगातार ऐसी कहानियां दिखाई दे रही थीं, जिनमें लोगों को नौकरी से निकाले जाने के कुछ ही महीनों बाद बड़ी तकनीकी कंपनियों से नए प्रस्ताव मिल रहे थे।

किसी को अमेजन के बाद गूगल, तो किसी को मेटा के बाद कई ऑफर

रेडिट उपयोगकर्ता ने कुछ ऐसी पोस्ट का जिक्र किया, जिन्हें देखकर वह खुद को दूसरों से बिल्कुल अलग स्थिति में महसूस करने लगा। एक व्यक्ति ने दावा किया कि अमेजन से नौकरी जाने के करीब पांच महीने बाद उसे गूगल में नौकरी मिल गई। एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि नौकरी जाने के सिर्फ तीन महीने के भीतर उसे 25 प्रतिशत अधिक वेतन वाली नई नौकरी मिल गई। इतना ही नहीं, नौकरी की तलाश के दौरान वह विदेश यात्रा पर भी गया।

सबसे ज्यादा हैरानी एक अन्य दावे से हुई, जिसमें एक व्यक्ति ने बताया कि मेटा से नौकरी जाने के बाद उसने गूगल, एप्पल और ओपनएआई में साक्षात्कार दिए और तीनों जगह से उसे नौकरी के प्रस्ताव मिले। आखिर में उसने गूगल को चुना।

दूसरी तरफ 500-600 आवेदन के बाद भी इंतजार

इन कहानियों की तुलना करते हुए मूल पोस्ट लिखने वाले शख्स ने सवाल किया कि क्या वह किसी अलग ही दुनिया में रह रहा है। उसके मुताबिक, जहां कुछ लोग बड़ी तकनीकी कंपनियों के प्रस्ताव आसानी से हासिल कर रहे हैं, वहीं उसे सैकड़ों आवेदन भेजने के बाद भी मुश्किल से कोई प्रतिक्रिया मिल रही है। उसने बताया कि अब तक उसका सबसे अच्छा नतीजा एक अस्थायी छह महीने की नौकरी के लिए बातचीत तक पहुंचना रहा है।

क्या बड़ी कंपनियों का अनुभव ही सबसे बड़ा फर्क है?

पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक उपयोगकर्ता ने सवाल उठाया कि क्या नौकरी तलाश रहे व्यक्ति का दो साल का अनुभव भी मेटा या अमेजन जैसी कंपनियों में रहा है। उसका तर्क था कि बड़ी तकनीकी कंपनियों में पहले से काम कर चुके लोगों के लिए नई नौकरी पाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है, क्योंकि ऐसी कंपनियों में चयन अपने आप में कठिन माना जाता है। एक अन्य व्यक्ति ने इसी चर्चा के बीच नौकरी के लिए मदद और संदर्भ की मांग भी कर दी।

कुछ लोगों ने सोशल मीडिया की सफलता की कहानियों पर उठाए सवाल

हर किसी ने इन सफलता की कहानियों को सच नहीं माना। कुछ रेडिट उपयोगकर्ताओं ने कहा कि इंटरनेट पर दिखाई जाने वाली ऐसी पोस्ट पूरी तस्वीर नहीं दिखातीं। एक टिप्पणी में इन्हें प्रभावशाली लोगों द्वारा लोगों को झूठी उम्मीद देने वाला प्रचार तक बताया गया। यानी ऑनलाइन कुछ लोगों की तेज सफलता देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर तकनीकी पेशेवर के लिए नौकरी का बाजार एक जैसा है।

एक जवाब ने कहा- समस्या औसत होने की भी हो सकती है

चर्चा में एक टिप्पणी ने सबसे सीधा जवाब दिया। उपयोगकर्ता ने तर्क दिया कि अत्यधिक कुशल लोग अक्सर कई कंपनियों के लिए आकर्षक उम्मीदवार होते हैं। ऐसे लोग कम समय में जटिल समस्याओं को हल करने की क्षमता रखते हैं, इसलिए उन्हें नौकरी के ज्यादा अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, उस टिप्पणी में यह भी कहा गया कि औसत होना कोई बुरी बात नहीं है। कौशल को लगातार मेहनत और सीखने के जरिए बेहतर बनाया जा सकता है। यही वजह है कि इस पूरी चर्चा ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है क्या तकनीकी क्षेत्र में नौकरी पाने के लिए सिर्फ अनुभव काफी है, या सही कौशल और क्षमता भी उतनी ही जरूरी है?

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भिड़े OpenAI और SpaceX, इस कारण टूटने जा रहा एआई सर्विसेज का कॉन्ट्रैक्ट

OpanAI vs SpaceX: चैटजीपीटी (ChatGPT) की पैरेंट कंपनी ओपनएआई और एलॉन मस्क (Elon Musk) के स्पेसएक्स (SpaceX) के बीच की साझेदारी खत्म हो सकती है। न्यूज एजेंसी रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ओपनएआई स्पेसएक्स के कोडिंग-टूल कंपनी कर्सर (Cursor) को एआई मॉडल की उपलब्धता बंद करने की योजना बना रही है। इस कदम से ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन और एलॉन मस्क के बीच लंबे समय से चल रही कड़वाहट भरी टक्कर और बढ़ गई है। बता दें कि जून में स्पेसएक्स ने कर्सर बनाने वाले स्टार्टअप एनीस्फीयर (Anysphere) को $6 हजार करोड़ की ऑल-स्टॉक डील में खरीदने का ऐलान किया था और इस महीने की शुरुआत में यह अधिग्रहण पूरा हो गया।

OpanAI vs SpaceX: Cusror को क्यों बंद होगी सर्विसेज?

ओपनएआई ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि कर्सर को एआई मॉडल नहीं देने का फैसला इसलिए लिया जा रहा है क्योंकि उन्हें भरोसा नहीं है कि स्पेसएक्स उनकी तकनीक का इस्तेमाल तय शर्तों के अनुसार करेगा। ओपनएआई ने यह भरोसा नहीं होने की वजह एलॉन मस्क की कंपनियों का ओपनएआई के साथ हुए कॉन्ट्रैक्ट्स की शर्तों के उल्लंघन के लंबे अनुभव को बताया। वहीं इस मामले को लेकर कर्सर के को-फाउंडर माइकल ट्रुएल (Michael Truell) का कहना है कि वह ओपनएआई के शुरुआती यूजर्स में से एक है और अब इसके साथ मौजूदा मुद्दे को सुलझाने के लिए वहीं ओपनएआई की टीम से बातचीत कर रहे हैं।

ओपनएआई का कहना है कि स्पेसएक्स जैसी बड़ी कंपनियों के साथ काम करने के लिए खास कॉन्ट्रैक्ट्स होता है और इसमें यह तय किया जाता है कि तकनीक का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर सुरक्षा के साथ किया जाए। ओपनएआई के मुताबिक कर्सर को उसकी सर्विसेज 12 नवंबर 2026 तक बंद की जा सकती है। ओपनएआई का कहना है कि कर्सर के साथ कॉन्ट्रैक्ट में स्वामित्व में बदलाव के बादसीमित समय में कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने का अधिकार मिल गया है।

Elon Musk vs Sam Altman: लंबा है टकराव

एलॉन मस्क और सैम ऑल्टमैन के बीच कई वर्षों से टकराव चल रही है, और यह कोर्ट केस तक पहुंच गया। सुनवाई के दौरान मस्क के वकील ने कहा था कि मस्क और दूसरे गवाहों ने ऑल्टमैन के झूठे होने की गवाही दी है तो ओपनएआई का कहना था कि मस्क कंपनी पर कंट्रोल चाहते थे।

दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क ने ओपनएआई पर $15 हजार करोड़ का मुकदमा किया था। मस्क ने कंपनी और ऑल्टमैन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने फायदे के लिए कंपनी के मूल नॉन-प्रॉफिट मिशन से धोखाधड़ी करके एक चैरिटी को हड़प लिया। इस साल की शुरुआत में एक फेडरल जूरी ने मस्क के खिलाफ फैसला सुनाया और कहा कि उन्होंने बहुत देर से केस फाइल किया था।

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