UPESSC PRT Recruitment 2026: प्राइमरी टीचर भर्ती के लिए आवेदन की तारीख बढ़ी, जानें 12,405 पदों के लिए कब तक कर सकते हैं अप्लाई

UPESSC PRT Recruitment 2026: उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने असिस्टेंट टीचर प्राइमरी भर्ती 2026 के लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख बढ़ाकर 28 अक्टूबर, 2026 कर दी है। जिन उम्मीदवारों ने अभी तक अपना आवेदन जमा नहीं किया है, वे आयोग की आधिकारिक वेबसाइट upessc.up.gov.in के जरिए पंजीकरण प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

पहले आवेदन की आखिरी तारीख 15 अक्टूबर, 2026 तय की गई थी। एक्सटेंशन के बाद, उम्मीदवारों के पास अपने जमा किए गए आवेदन फॉर्म में करेक्शन करने के लिए अतिरिक्त समय भी होगा। आयोग द्वारा जारी शॉर्ट नोटिस के अनुसार, आवेदन विवरण में बदलाव करने की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर, 2026 है। इस भर्ती प्रक्रिया का मकसद उत्तर प्रदेश में असिस्टेंट टीचर की 12,405 वैकेंसी को भरना है। इसमें उत्तर प्रदेश बेसिक एजुकेशन काउंसिल के तहत प्राइमरी स्कूल और उससे जुड़े नॉन-गवर्नमेंट एडेड प्राइमरी स्कूल शामिल हैं।

UPESSC PRT भर्ती 2026: पदवार बंटवारा

आयोग ने प्राथमिक शिक्षक के पोस्ट की दो श्रेणी में 12,405 पदों की घोषणा की है। कुल पदों में से 11,508 उत्तर प्रदेश बेसिक एजुकेशन काउंसिल के तहत शहरी प्राइमरी स्कूलों में असिस्टेंट टीचर के लिए हैं। बाकी 897 पोस्ट लड़कों और लड़कियों के लिए मान्यता प्राप्त एडेड प्राइमरी स्कूलों में असिस्टेंट टीचर के लिए हैं। श्रेणी के हिसाब से बंटवारा इस तरह है:

पोस्ट कैटेगरी वैकेंसी

यूपी बेसिक एजुकेशन काउंसिल के तहत शहरी प्राइमरी स्कूलों में असिस्टेंट टीचर 11,508

लड़कों और लड़कियों के लिए एफिलिएटेड नॉन-गवर्नमेंट एडेड प्राइमरी स्कूलों में असिस्टेंट टीचर 897

कुल 12,405

विज्ञापित पदों के लिए पे स्केल लेवल 6 है, जो Rs 35,400 से Rs 1,12,400 तक है। उम्मीदवारों को लागू योग्यता आवश्यकताओं, चयन प्रक्रिया और दूसरी सेवा शर्तों के लिए विस्तृत भर्ती नोटिफिकेशन देखना चाहिए।

UPESSC PRT भर्ती 2026: जरूरी तारीखें

जानकारी पिछली तारीख बढ़ी हुई तारीख

अप्लाई करने की आखिरी तारीख 15 अक्टूबर, 2026 28 अक्टूबर, 2026

एप्लीकेशन में सुधार की आखिरी तारीख दी गई जानकारी में नहीं बताई गई है 31 अक्टूबर, 2026

UPESSC PRT भर्ती 2026: अप्लाई करने के स्टेप्स

  • ऑफिशियल वेबसाइट, upessc.up.gov.in पर जाएं।
  • विज्ञापन संख्या 05/2026 के तहत असिस्टेंट टीचर प्राइमरी भर्ती 2026 लिंक खोलें।
  • रिक्रूटमेंट नोटिफिकेशन पढ़ें और एलिजिबिलिटी शर्तें चेक करें।
  • अगर जरूरी हो, तो ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रोसेस पूरा करें।
  • आवेदन फॉर्म में बताई गई पर्सनल, एजुकेशनल और दूसरी जानकारी भरें। जरूरी डॉक्यूमेंट्स बताए गए फॉर्मेट में अपलोड करें।
  • अगर लागू हो, तो ऑफिशियल नोटिफिकेशन में बताए अनुसार एप्लीकेशन फीस भरें।
  • भरी गई डिटेल्स देखें और आवेदन फॉर्म जमा करें।
  • आगे के लिए कन्फर्मेशन पेज डाउनलोड या प्रिंट करें।

अपना आवेदन जमा कर चुके उम्मीदवारों को अपना फॉर्म चेक कर लेना चाहिए। अगर उसमें किसी सुधार की जरूरत है, तो बदलाव करने की विंडो 31 अक्टूबर, 2026 को बंद हो जाएगी।

UPESSC PRT लिखित परीक्षा 3 और 4 दिसंबर को होगी

असिस्टेंट टीचर प्राइमरी भर्ती 2026 के लिए लिखित परीक्षा 3 और 4 दिसंबर, 2026 को होगी। एप्लीकेशन की आखिरी तारीख बढ़ने के साथ, जिन कैंडिडेट्स ने अभी तक अप्लाई नहीं किया है, उन्हें 28 अक्टूबर, 2026 तक प्रोसेस पूरा कर लेना चाहिए।

रांची के दुबलिया में बनेगा झारखंड का सबसे बड़ा मॉल! 7.36 लाख वर्गफुट में फैली होगी यह ग्रीन शॉपिंग डेस्टिनेशन

UPSC CRT 2026: एनसीटी के शिक्षा विभाग में प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल पद के लिए यूपीएससी सीआरटी पोस्टपोन, 828 पदों के लिए 9 जनवरी को होगी परीक्षा

UPSC CRT 2026: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में प्रिंसिपल और वाइस-प्रिंसिपल के पदों के लिए कंबाइंड रिक्रूटमेंट टेस्ट (CRT) को पोस्टपोन कर दिया है। यह परीक्षा पहले 1 नवंबर, 2026 को आयोजित की जानी थी। लेकिन 16 अक्टूबर, 2026 के एक करिजेंडम नोटिस के अनुसार, अब इस परीक्षा का आयोजन 9 जनवरी, 2027 को होगा।

यूपीएससी सीआरटी 2026 सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक सुबह के सत्र में होगी। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए कुल 828 पदों पर नियुक्ति की जाएगी। बदला हुआ शेड्यूल प्रिंसिपल के 124 पदों और वाइस-प्रिंसिपल के 704 पदों पर भर्ती के लिए लागू होगा। के लिए के लिए भर्ती पर लागू होता है।

UPSC CRT 2026: पदों का विवरण

भर्ती प्रक्रिया में ये पद शामिल हैं :

प्रिंसिपल : एनसीटी दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में 124 पद।

वाइस-प्रिंसिपल : एनसीटी दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में 704 पद। इन पदों को विज्ञापन संख्या 51/2026 के तहत नोटिफाई किया गया था।

UPSC CRT 2026: संशोधित परीक्षा तारीख

इवेंट डिटेल्स

नियुक्ति करने वाली संस्था : यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन

परीक्षा : कंबाइंड रिक्रूटमेंट टेस्ट

पहले की परीक्षा तारीख : 1 नवंबर, 2026

संशोधित परीक्षा तारीख : 9 जनवरी, 2027

परीक्षा का समय : सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक

कुल पद 828

परीक्षार्थियों को आगे क्या करना चाहिए?

कैंडिडेट को संशोधित तारीख पर ध्यान देना चाहिए और नए कार्यक्रम के हिसाब से तैयारी करनी चाहिए। उन्हें भर्ती प्रक्रिया से जुड़े आगे के नोटिस और अपडेट के लिए संघ लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट, upsc.gov.in भी चेक करनी चाहिए। करिजेंडम के अनुसार परीक्षा की तारीख 1 नवंबर, 2026 से बदलकर 9 जनवरी, 2027 कर दी गई है। नोटिस में भर्ती विवरण में किसी और बदलाव का जिक्र नहीं है।

प्रिंसिपल के पदों का वर्गों में बंटवारा

दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में प्रिंसिपल के कुल 124 पदों पर भर्ती होनी है। इनमें सामान्य यानी अनारक्षित वर्ग के लिए 69 पद निर्धारित किए गए हैं। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 11 पद हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के उम्मीदवारों के लिए 18 रिक्तियां हैं। अनुसूचित जाति (SC) के लिए 16 पद और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 10 पद निर्धारित हैं। इस तरह सभी श्रेणियों को मिलाकर प्रिंसिपल के कुल 124 पद हैं।

वाइस प्रिंसिपल के 704 पद 

यूपीएससी सीआरटी 2026 भर्ती में सबसे ज्यादा रिक्तियां वाइस प्रिंसिपल के पदों पर हैं। वाइस प्रिंसिपल के कुल 704 पदों में से सामान्य वर्ग के लिए 287 पद निर्धारित किए गए हैं। EWS वर्ग के लिए 71 रिक्तियां हैं। ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 189 पद रखे गए हैं। वहीं एससी वर्ग के लिए 103 और एसटी वर्ग के लिए 54 पद निर्धारित किए गए हैं। इन सभी श्रेणियों को मिलाकर वाइस प्रिंसिपल के कुल 704 पदों पर भर्ती की जाएगी।

कैसे होगा चयन?

इस भर्ती में उम्मीदवारों का चयन निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा। यूपीएससी सीआरटी 2026 भर्ती परीक्षा के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। इसके बाद दस्तावेज सत्यापन भी किया जाएगा। इस दौरान उम्मीदवारों के सभी जरूरी प्रमाणपत्रों की जांच की जाएगी। सभी निर्धारित चरण पूरे होने के बाद अंतिम चयन किया जाएगा।

Rajasthan Bus Accident: कोटा में श्रद्धालुओं से भरी बस पलटी, 8 की मौत, 6 से ज्यादा घायल

इक्विटी, डेट और गोल्ड? ₹1 करोड़ का पोर्टफोलियो कैसे बनाए, एक्सपर्ट से समझें स्ट्रेटेजी

Asset Allocation Strategy: जब आपका निवेश का दायरा या कॉर्पस ₹1 करोड़ जैसे बड़े आंकड़े पर पहुंच जाता है, तब केवल ‘ज्यादा रिटर्न’ का पीछा करना काफी नहीं होता। बाजार के उतार-चढ़ाव, आपकी जोखिम लेने की क्षमता और पैसों की जरूरत की टाइमलाइन सबसे बड़े कारक बन जाते हैं।

ऐसे में मौजूदा बाजार की चाल को देखते हुए इक्विटी, डेट और गोल्ड में कितना पैसा लगाना चाहिए? प्रूडेंट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के सीईओ प्रशस्त सेठ के अनुसार, एक बैलेंस पोर्टफोलियो के लिए आदर्श रणनीति क्या होनी चाहिए, आइए बेहद आसान भाषा में समझते हैं।

₹1 करोड़ के पोर्टफोलियो का आइडियल बंटवारा

प्रशस्त सेठ का मानना है कि निवेशक अपने रिस्क प्रोफाइल और वित्तीय लक्ष्यों के आधार पर अपने पोर्टफोलियो को तीन हिस्सों में बांट सकते हैं:

1. एसेट क्लास: इक्विटी

हिस्सा (%): 65% – 75%

₹1 करोड़ पर निवेश: ₹65 लाख – ₹75 लाख

मुख्य भूमिका: लंबी अवधि में कैपिटल ग्रोथ

2. एसेट क्लास: डेट

हिस्सा (%): 15% – 25%

₹1 करोड़ पर निवेश: ₹15 लाख – ₹25 लाख

मुख्य भूमिका: पोर्टफोलियो में स्थिरता व लिक्विडिटी

3. एसेट क्लास: गोल्ड

हिस्सा (%): 5% – 10%

₹1 करोड़ पर निवेश: ₹5 लाख – ₹10 लाख

मुख्य भूमिका: रिस्क घटाने के लिए डायवर्सिफिकेशन

क्या इक्विटी में 70% पैसा लगाना सही है?

लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन के लिए इक्विटी सबसे बड़ा जरिया है, इसलिए यह पोर्टफोलियो का सबसे बड़ा हिस्सा बना रहेगा। लेकिन बाजार में तेजी देखकर अंधाधुंध पैसा लगाना सही नहीं है। निवेश करते समय कंपनी की ग्रोथ क्षमता (15–20% लॉन्ग टर्म ग्रोथ) और शेयर के सही भाव यानी वैल्यूएशन पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।

₹70 लाख के इक्विटी फंड में से 60–70% हिस्सा (लगभग ₹42 से ₹49 लाख) मजबूत लार्ज-कैप कंपनियों में होना चाहिए। बाकी हिस्सा मिड और स्मॉल-कैप में उनके वैल्यूएशन के हिसाब से बांटा जा सकता है। वैसे 70% इक्विटी में होने का मतलब यह नहीं है कि आप जोखिम भरी छोटी कंपनियों में दांव लगा रहे हैं, बल्कि बड़ा हिस्सा स्थापित कंपनियों में सुरक्षित रहता है।

डेट क्यों जरूरी है?

डेट को आमतौर पर कम रिटर्न वाला विकल्प माना जाता है, लेकिन इसका रोल केवल रिटर्न देना नहीं है। यह बाजार के झटकों से बचाव करता है। जब शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आती है, तो डेट पोर्टफोलियो को संभालता है।

अगर आपको अगले 1–3 सालों में किसी बड़े काम के लिए पैसे चाहिए, तो उस रकम को शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव में नहीं डाला जा सकता। ऐसे में ₹15 से ₹25 लाख का डेट बकेट लिक्विडिटी और सुरक्षा दोनों देता है।

गोल्ड: रिटर्न के पीछे भागने के लिए नहीं, सेफ्टी के लिए

सोने ने हाल के दिनों में शानदार रिटर्न दिया है, लेकिन केवल हालिया प्रदर्शन देखकर गोल्ड आवंटन नहीं बढ़ाना चाहिए। सोना और शेयर बाजार अक्सर एक-दूसरे के विपरीत दिशा में चलते हैं। जब इक्विटी पर दबाव होता है, तब सोना पोर्टफोलियो के नुकसान को कम करता है। यह डायवर्सिफिकेशन का बेस्ट जरिया है। ₹1 करोड़ के पोर्टफोलियो में ₹5 से ₹10 लाख (5–10%) की सोने में हिस्सेदारी पर्याप्त मानी जाती है।

न करें ये भूल

₹1 करोड़ का पोर्टफोलियो बनाकर छोड़ देने से काम नहीं चलेगा। जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, आपके वित्तीय लक्ष्य करीब आते हैं या बाजार के भाव बदलते हैं, आपको समय-समय पर इसमें जरूरी बदलाव करते रहना चाहिए।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Batwara 1947 Review: विभाजन के दर्द के बीच इंसानियत ने कायम कि मिसाल, सनी देओल की फिल्म ने जीता लोगों का दिल

Batwara 1947 Review: 1947 का विभाजन भारतीय इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में से एक रहा है। इस विषय पर बनी फिल्मों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि कहानी कहीं धर्म, राजनीति और हिंसा के दायरे तक सीमित न रह जाए। Batwara 1947 की खासियत यह है कि राजकुमार संतोषी विभाजन की त्रासदी के बीच भी अपना ध्यान इंसान और उसके रिश्तों पर बनाए रखते हैं।

यह फिल्म सिर्फ भारत-पाकिस्तान की सीमा बनने की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की कहानी है जिनकी जिंदगी उस सीमा के साथ ही बदल गई। जो घर अपना था, वह अचानक पराया हो गया। जो पड़ोसी वर्षों से परिवार का हिस्सा था, वह धर्म के नाम पर अजनबी बना दिया गया। इसी माहौल में फिल्म इंसानियत का सबसे जरूरी सवाल सामने रखती है-क्या नफरत के दौर में भी इंसान दूसरे इंसान के लिए खड़ा हो सकता है?

सनी देओल के करियर का नया चैप्टर

सनी देओल के लिए ‘कमबैक’ शब्द पिछले कुछ समय से लगातार इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन Batwara 1947 देखने के बाद लगता है कि यह सिर्फ वापसी नहीं, बल्कि उनके अभिनय के एक नए दौर की शुरुआत है। सिकंदर मिर्जा के किरदार में सनी देओल अपनी आवाज, व्यक्तित्व और गुस्से का प्रभावी इस्तेमाल करते हैं। हालांकि उनका सबसे असरदार अभिनय उन सीन्स में दिखाई देता है, जहां वह ऊंची आवाज में नहीं, बल्कि अपनी आंखों और भावनाओं से बात करते हैं।

सिकंदर का गुस्सा सिर्फ हिंसा के खिलाफ नहीं है, बल्कि उस इंसानियत के लिए है जो उसके आसपास खत्म होती जा रही है। एक बुजुर्ग हिंदू महिला को बचाने के लिए भीड़ के सामने खड़े होने वाला उसका किरदार फिल्म के मूल संदेश को मजबूती देता है।

शबाना आजमी का काम

शबाना आजमी की ‘माई’ इस कहानी का भावनात्मक केंद्र हैं। वह सिर्फ एक पीड़ित महिला नहीं हैं। उनके किरदार में आत्मसम्मान, जिद, हंसी, समझदारी और अपने घर से गहरा लगाव है। शबाना इस भूमिका को इतनी सहजता से निभाती हैं कि धीरे-धीरे माई किसी फिल्मी किरदार की बजाय अपने परिवार की किसी बुजुर्ग महिला जैसी महसूस होने लगती हैं। सनी देओल और शबाना आजमी के बीच का रिश्ता फिल्म का सबसे खूबसूरत हिस्सा है। धर्म की दीवारों के बीच पनपता मां-बेटे जैसा यह रिश्ता दिखाता है कि इंसानी रिश्ते किसी धर्म या सीमा के मोहताज नहीं होते।

करण देओल की एक्टिंग

सनी देओल के सामने स्क्रीन शेयर करना करण देओल के लिए आसान चुनौती नहीं थी। इसके बावजूद वह कई दृश्यों में आत्मविश्वास के साथ अपनी जगह बनाते हैं। उनकी संवाद अदायगी में विश्वास है और भावनात्मक तथा टकराव वाले दृश्यों में उनकी ऊर्जा दिखाई देती है। सबसे अच्छी बात यह है कि वह अपने पिता की शैली को दोहराने के बजाय अपने किरदार के लिए अलग अंदाज तलाशते हैं।

प्रीति जिंटा और अली फजल का प्रभाव

प्रीति जिंटा की वापसी फिल्म में सिर्फ नॉस्टैल्जिया नहीं जोड़ती, बल्कि कहानी के भावनात्मक पक्ष को मजबूती देती है। अली फजल अपने शांत और संवेदनशील अभिनय से फिल्म की तीव्रता के बीच कुछ सुकून भरे पल लेकर आते हैं। वहीं अभिमन्यु सिंह का याकूब पहलवान कट्टर सोच का प्रतिनिधित्व करता है, जहां इंसान की पहचान से पहले उसका धर्म देखा जाता है। पूरी सपोर्टिंग कास्ट मिलकर उस दौर के टूटते समाज की तस्वीर को विश्वसनीय बनाती है।

1947 का लाहौर दिखा पर्दे पर

फिल्म का प्रोडक्शन डिजाइन, सिनेमैटोग्राफी, कॉस्ट्यूम, लोकेशन और बैकग्राउंड स्कोर मिलकर 1947 के लाहौर का माहौल तैयार करते हैं। राजकुमार संतोषी मूल कहानी को सिर्फ मंचीय प्रस्तुति की तरह शूट नहीं करते, बल्कि उसे बड़े पर्दे के लिए विस्तार देते हैं। गलियां, घर, भीड़ और बदलता सामाजिक माहौल फिल्म को एक मजबूत सिनेमाई पहचान देते हैं। दूसरे हिस्से में कहानी का भावनात्मक असर और गहरा होता जाता है। क्लाइमैक्स के बारे में ज्यादा बताना उचित नहीं होगा, क्योंकि उसका प्रभाव तभी महसूस होगा जब दर्शक उसे खुद देखें।

Batwara 1947 की सबसे बड़ी सफलता यह है कि यह विभाजन की हिंसा दिखाते हुए भी नफरत को बढ़ावा नहीं देती। इसके बजाय यह इंसानियत को केंद्र में रखती है। फिल्म एक बेहद जरूरी सवाल छोड़ जाती है-जब पूरी दुनिया आपको किसी से नफरत करने की वजह दे रही हो, तब क्या आप फिर भी इंसानियत और प्रेम को चुन सकते हैं? सनी देओल और राजकुमार संतोषी की जोड़ी इस बार अपने गुस्से को ज्यादा संवेदनशील और परिपक्व रूप देती है। फिल्म का जवाब तलवार या हिंसा में नहीं, बल्कि रिश्तों और इंसानियत में मिलता है। हम फिल्म को 5 में से 4 स्टार रेटिंग देते हैं।