Sunny Deol: हम कलीग हैं दोस्त नहीं…, ‘डर’ के दौरान हुई लड़ाई के बाद शाहरुख खान संग अपने बॉन्ड पर बोले सनी देओल

Sunny Deol: ‘डर’ फिल्म की शूटिंग के दौरान सनी देओल और शाहरुख खान के बीच हुई अनबन किसी से छिपी नहीं है। दोनों एक्टर्स 1993 की इस फिल्म के क्लाइमेक्स को लेकर सहमत नहीं थे और सनी इतने गुस्से में थे कि उन्होंने अपनी जीन्स को अपने हाथों से ही फाड़ दिया था। उनकी लड़ाई इतनी जबरदस्त थी कि उन्होंने एक-दूसरे से बात करना बंद कर दिया था। 2023 में ‘गदर 2’ की सफलता के बाद ही वे फिर से दोस्त बने। सनी ने हाल ही में इस झगड़े के बारे में बात की और बताया कि क्या अब वे शाहरुख के दोस्त हैं।

सनी और शाहरुख की लड़ाई इनसिक्योरिटी की वजह से हुई…

शुभंकर मिश्रा के साथ बातचीत में सनी ने गुस्से में अपनी जींस फाड़ने की बात याद की। उन्होंने कहा कि वह खुद से नाराज हैं और उन्होंने कहा, “छोटी उम्र में मैं ये तो नहीं कहूंगा कि एक दूसरे से वो चीज नहीं होती है। वो होती है। मैं असुरक्षित व्यक्ति नहीं हूं, लेकिन असुरक्षा के कारण, कितने अभिनेता बहुत कुछ ऐसी चीजें कर जाते हैं जो उन्हें करने की कोई जरूरी नहीं है।”

सनी ने समझाया, “हम वही किरदार निभा सकते हैं जो हम हैं। उससे अलग कुछ नहीं बन सकते। लेकिन कई बार एक्टर्स असुरक्षित महसूस करते हैं और इस वजह से माहौल खराब हो जाता है। ऐसी चीजें हो जाती हैं, जिनकी कोई जरूरत नहीं थी। लेकिन यही तो फिल्म बनाने की सच्चाई है।”

शाहरुख खान साथी हैं, दोस्त नहीं- सनी देओल

जब उनसे पूछा गया कि क्या आज शाहरुख खान उनके दोस्त हैं, तो ‘बंटवारा 1947’ के एक्टर ने कहा, “उस समय भी हम दुश्मन तो नहीं थे। हां, दोस्त का मतलब है कि हम सब साथी (colleagues) हैं। फ़िल्म इंडस्ट्री में मैं कहूंगा कि हम सब साथी ज़्यादा हैं, बजाय इसके कि…” एक्टर ने कहा कि उनके असली दोस्त वे हैं, जो स्कूल के समय बने थे, न कि बॉलीवुड वाले, क्योंकि “दोस्ती वो होती है जहां आप पूरी तरह खुले और बेझिझक हों और ऐसी दोस्ती बचपन में ही होती है।”

सनी देओल और शाहरुख खान के बीच झगड़ा किस बात पर हुआ था?

सनी देओल और शाहरुख खान के बीच अनबन 1993 में शुरू हुई थी, जब वे अपनी फ़िल्म ‘डर’ की शूटिंग कर रहे थे। खबरों के मुताबिक भले ही सनी फिल्म के हीरो थे, लेकिन वे इस बात से खुश नहीं थे कि शाहरुख खान के विलेन वाले किरदार के मुकाबले उनके किरदार को कैसे दिखाया गया था। ‘डर’ के रिलीज होने के बाद, दोनों एक्टर्स ने 16 साल तक एक-दूसरे से बात नहीं की।

Sunny Deol: ‘मेरा जमीर नहीं मानता…’, पान-मसाला के एड ठुकराने पर बोले सनी देओल

Sunny Deol: सनी देओल ने साफ कर दिया है कि पान मसाला के विज्ञापन करना एक ऐसी कैटेगरी है जिसमें उन्हें कोई दिलचस्पी नहीं है। एक्टर का कहना है कि उन्हें ऐसे ऑफर मिले हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा उन्हें ठुकरा दिया है क्योंकि इस तरह के प्रोडक्ट का प्रमोशन करना उनकी अपनी सोच और मान्यताओं के खिलाफ है।

शुभंकर मिश्रा के पॉडकास्ट पर बात करते हुए, सनी ने ब्रांड एंडोर्समेंट को लेकर अपने नजरिए के बारे में बताया और यह भी बताया कि क्यों कुछ बहुत फ़ायदेमंद ऑफ़र भी उन्हें पसंद नहीं आते। सनी देओल का कहना है कि वह कभी भी पान मसाला का विज्ञापन नहीं करेंगे।

जब उनसे खास तौर पर पान मसाला के विज्ञापनों से दूर रहने के बारे में पूछा गया, तो सनी ने कहा कि भविष्य में भी उनके इस रुख में कोई बदलाव नहीं आएगा। उन्होंने कहा, “मैं पान मसाला के विज्ञापन नहीं करता और न ही कभी करूंगा। मैं ऐसी कोई चीज़ नहीं करूंगा। ऑफ़र तो आते हैं, लेकिन मैं नहीं करूंगा। मैं ऐसा कुछ नहीं करना चाहता जिसमें मेरा विश्वास न हो।”

एक्टर ने आगे कहा कि वह पान मसाला को प्रमोट करने लायक चीज़ नहीं मानते, जिससे ऐसे विज्ञापनों को लेकर उनका रुख बिल्कुल साफ़ हो गया है। सनी ने कहा, “मैं इन सब चीज़ों को नहीं मानता। मुझे नहीं लगता कि इसे बढ़ावा देना कोई अच्छी बात है।” एक्टर के मुताबिक, इसी सोच ने उनके कई दूसरे प्रोफेशनल फैसलों पर भी असर डाला है। उन्होंने कहा कि ऐसे कई काम हैं जिन्हें उन्होंने सिर्फ़ इसलिए करने से मना कर दिया क्योंकि उनका ज़मीर उन्हें इसकी इजाजत नहीं देता था।

उन्होंने आगे कहा, “मैं कई काम इसलिए नहीं करता क्योंकि मेरा ज़मीर उन्हें मंज़ूरी नहीं देता, और जो काम करने होते हैं, उन्हें मैं कर लेता हूं।”बातचीत इस बात पर भी हुई कि एडवरटाइज़िंग की दुनिया में सनी कम ही नज़र आते हैं। जहां उनके साथ के कई कलाकार बड़े ब्रांड कैंपेन में लगातार दिखते हैं, वहीं सनी ने माना कि उन्हें खुद नहीं पता कि एडवरटाइज़र्स ने उनसे उतनी बार संपर्क क्यों नहीं किया।

उन्होंने कहा, “अगर मैं भारत का प्रतिनिधित्व करता हूं और बाकी चीज़ों का भी प्रतिनिधित्व करता हूं, तो भी किसी तरह ऐड मेरे पास नहीं आते। वे मेरे पास क्यों नहीं आते? मुझे कोई अंदाज़ा नहीं है।”सनी ने इस स्थिति की तुलना उस दौर से की जब उन्हें फ़िल्मों के ऑफ़र नहीं मिल रहे थे। उन्होंने कहा, “जैसे पहले फ़िल्में नहीं मिल रही थीं, वैसे ही विज्ञापनों के मामले में मुझे कुछ पता नहीं है।”

उनकी यह बात ऐसे समय में आई है जब बॉलीवुड सेलेब्रिटीज़ के पान मसाला से जुड़े ब्रांड्स का प्रचार करने को लेकर फिर से चर्चा हो रही है। महाराष्ट्र फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने हाल ही में शाहरुख़ ख़ान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ़ को ‘विमल इलायची’ के विज्ञापन में दिखने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

फ़िल्मों की बात करें तो सनी अभी ‘बंटवारा 1947’ में नज़र आ रहे हैं। इसके अलावा, एक्टर नितेश तिवारी की ‘रामायण’ में भी काम करने वाले हैं, जिसमें वे भगवान हनुमान का किरदार निभाएंगे।

Batwara 1947 Review: विभाजन के दर्द के बीच इंसानियत ने कायम कि मिसाल, सनी देओल की फिल्म ने जीता लोगों का दिल

Batwara 1947 Review: 1947 का विभाजन भारतीय इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में से एक रहा है। इस विषय पर बनी फिल्मों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि कहानी कहीं धर्म, राजनीति और हिंसा के दायरे तक सीमित न रह जाए। Batwara 1947 की खासियत यह है कि राजकुमार संतोषी विभाजन की त्रासदी के बीच भी अपना ध्यान इंसान और उसके रिश्तों पर बनाए रखते हैं।

यह फिल्म सिर्फ भारत-पाकिस्तान की सीमा बनने की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की कहानी है जिनकी जिंदगी उस सीमा के साथ ही बदल गई। जो घर अपना था, वह अचानक पराया हो गया। जो पड़ोसी वर्षों से परिवार का हिस्सा था, वह धर्म के नाम पर अजनबी बना दिया गया। इसी माहौल में फिल्म इंसानियत का सबसे जरूरी सवाल सामने रखती है-क्या नफरत के दौर में भी इंसान दूसरे इंसान के लिए खड़ा हो सकता है?

सनी देओल के करियर का नया चैप्टर

सनी देओल के लिए ‘कमबैक’ शब्द पिछले कुछ समय से लगातार इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन Batwara 1947 देखने के बाद लगता है कि यह सिर्फ वापसी नहीं, बल्कि उनके अभिनय के एक नए दौर की शुरुआत है। सिकंदर मिर्जा के किरदार में सनी देओल अपनी आवाज, व्यक्तित्व और गुस्से का प्रभावी इस्तेमाल करते हैं। हालांकि उनका सबसे असरदार अभिनय उन सीन्स में दिखाई देता है, जहां वह ऊंची आवाज में नहीं, बल्कि अपनी आंखों और भावनाओं से बात करते हैं।

सिकंदर का गुस्सा सिर्फ हिंसा के खिलाफ नहीं है, बल्कि उस इंसानियत के लिए है जो उसके आसपास खत्म होती जा रही है। एक बुजुर्ग हिंदू महिला को बचाने के लिए भीड़ के सामने खड़े होने वाला उसका किरदार फिल्म के मूल संदेश को मजबूती देता है।

शबाना आजमी का काम

शबाना आजमी की ‘माई’ इस कहानी का भावनात्मक केंद्र हैं। वह सिर्फ एक पीड़ित महिला नहीं हैं। उनके किरदार में आत्मसम्मान, जिद, हंसी, समझदारी और अपने घर से गहरा लगाव है। शबाना इस भूमिका को इतनी सहजता से निभाती हैं कि धीरे-धीरे माई किसी फिल्मी किरदार की बजाय अपने परिवार की किसी बुजुर्ग महिला जैसी महसूस होने लगती हैं। सनी देओल और शबाना आजमी के बीच का रिश्ता फिल्म का सबसे खूबसूरत हिस्सा है। धर्म की दीवारों के बीच पनपता मां-बेटे जैसा यह रिश्ता दिखाता है कि इंसानी रिश्ते किसी धर्म या सीमा के मोहताज नहीं होते।

करण देओल की एक्टिंग

सनी देओल के सामने स्क्रीन शेयर करना करण देओल के लिए आसान चुनौती नहीं थी। इसके बावजूद वह कई दृश्यों में आत्मविश्वास के साथ अपनी जगह बनाते हैं। उनकी संवाद अदायगी में विश्वास है और भावनात्मक तथा टकराव वाले दृश्यों में उनकी ऊर्जा दिखाई देती है। सबसे अच्छी बात यह है कि वह अपने पिता की शैली को दोहराने के बजाय अपने किरदार के लिए अलग अंदाज तलाशते हैं।

प्रीति जिंटा और अली फजल का प्रभाव

प्रीति जिंटा की वापसी फिल्म में सिर्फ नॉस्टैल्जिया नहीं जोड़ती, बल्कि कहानी के भावनात्मक पक्ष को मजबूती देती है। अली फजल अपने शांत और संवेदनशील अभिनय से फिल्म की तीव्रता के बीच कुछ सुकून भरे पल लेकर आते हैं। वहीं अभिमन्यु सिंह का याकूब पहलवान कट्टर सोच का प्रतिनिधित्व करता है, जहां इंसान की पहचान से पहले उसका धर्म देखा जाता है। पूरी सपोर्टिंग कास्ट मिलकर उस दौर के टूटते समाज की तस्वीर को विश्वसनीय बनाती है।

1947 का लाहौर दिखा पर्दे पर

फिल्म का प्रोडक्शन डिजाइन, सिनेमैटोग्राफी, कॉस्ट्यूम, लोकेशन और बैकग्राउंड स्कोर मिलकर 1947 के लाहौर का माहौल तैयार करते हैं। राजकुमार संतोषी मूल कहानी को सिर्फ मंचीय प्रस्तुति की तरह शूट नहीं करते, बल्कि उसे बड़े पर्दे के लिए विस्तार देते हैं। गलियां, घर, भीड़ और बदलता सामाजिक माहौल फिल्म को एक मजबूत सिनेमाई पहचान देते हैं। दूसरे हिस्से में कहानी का भावनात्मक असर और गहरा होता जाता है। क्लाइमैक्स के बारे में ज्यादा बताना उचित नहीं होगा, क्योंकि उसका प्रभाव तभी महसूस होगा जब दर्शक उसे खुद देखें।

Batwara 1947 की सबसे बड़ी सफलता यह है कि यह विभाजन की हिंसा दिखाते हुए भी नफरत को बढ़ावा नहीं देती। इसके बजाय यह इंसानियत को केंद्र में रखती है। फिल्म एक बेहद जरूरी सवाल छोड़ जाती है-जब पूरी दुनिया आपको किसी से नफरत करने की वजह दे रही हो, तब क्या आप फिर भी इंसानियत और प्रेम को चुन सकते हैं? सनी देओल और राजकुमार संतोषी की जोड़ी इस बार अपने गुस्से को ज्यादा संवेदनशील और परिपक्व रूप देती है। फिल्म का जवाब तलवार या हिंसा में नहीं, बल्कि रिश्तों और इंसानियत में मिलता है। हम फिल्म को 5 में से 4 स्टार रेटिंग देते हैं।

Batwara 1947: ‘बंटवारा 1947’ में सनी देओल का किरदार सबसे ताकतवर, राजकुमार संतोषी का बड़ा दावा

Batwara 1947: आमिर खान प्रोडक्शंस की ‘बंटवारा 1947’, जिसका निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है और जिसमें शबाना आज़मी, सनी देओल और प्रीति जी जिंटा मुख्य भूमिकाओं में हैं, 14 अगस्त 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। हाल ही में रिलीज़ हुए फिल्म के ट्रेलर ने भारत के बंटवारे के दर्दनाक इतिहास की दमदार झलक दिखाकर दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर उत्साह और भी बढ़ा दिया है।

आमिर खान प्रोडक्शंस की ‘बंटवारा 1947’ भारतीय सिनेमा की सबसे बहुप्रतीक्षित फिल्मों में से एक है। शबाना आज़मी, सनी देओल और प्रीति जी जिंटा स्टारर इस फिल्म ने अपने दमदार टीजर से पहले ही जबरदस्त चर्चा बटोरी थी और अब हाल ही में रिलीज़ हुए ट्रेलर ने दर्शकों का उत्साह और बढ़ा दिया है। ट्रेलर अपनी भावुक कहानी और दमदार परफॉर्मेंस से लोगों का दिल जीत रहा है। यह भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास के सबसे दर्दनाक दौर की झलक दिखाते हुए इंसानियत को धर्म से ऊपर रखने का मैसेज देता है।

ट्रेलर में सनी देओल एक बार फिर दमदार किरदार में नजर आ रहे हैं। हाल ही में निर्देशक राजकुमार संतोषी ने साफ किया कि ‘बंटवारा 1947’ में सनी देओल का किरदार ‘गदर’ के तारा सिंह से बिल्कुल अलग है और दोनों किरदारों की तुलना नहीं की जा सकती।

राजकुमार संतोषी ने कहा, “तारा सिंह अपने हक के लिए लड़ता है। हमारी फिल्म का किरदार किसी और के लिए लड़ता है और इसके लिए वह अपने परिवार तक की परवाह नहीं करता। मुझे भरोसा है कि मैं अच्छे एक्शन हीरो लिख सकता हूं, चाहे ‘घातक’ हो या ‘घायल’। लेकिन इस फिल्म में मैंने सनी के लिए जो किरदार लिखा है, मैं उसे सुपरमैन, आयरन मैन और बाकी सभी सुपरहीरोज़ से भी बेहतर मानता हूं। क्योंकि कोई इंसान किसी एक व्यक्ति, एक समूह या एक सेना से तो लड़ सकता है, लेकिन यहां सनी कट्टरता के खिलाफ लड़ रहे हैं। दुनिया का कोई भी सुपरहीरो उसके सामने टिक नहीं सकता।”

‘बंटवारा 1947’ में शबाना आज़मी, सनी देओल, प्रीति जी जिंटा, करण देओल, अली फज़ल और अभिमन्यु सिंह जैसे दमदार कलाकार नजर आएंगे। खास बात यह है कि करीब 30 साल बाद राजकुमार संतोषी और सनी देओल की सुपरहिट जोड़ी फिर से साथ आ रही है।

आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी ‘बंटवारा 1947’ का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है। फिल्म का संगीत ए. आर. रहमान ने दिया है, जबकि गीत जावेद अख्तर ने लिखे हैं। फिल्म को आमिर खान और अपर्णा पुरोहित ने प्रोड्यूस किया है। ‘बंटवारा 1947’ 14 अगस्त 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। ‘बंटवारा 1947’ में सनी देओल का किरदार सबसे ताकतवर, राजकुमार संतोषी का बड़ा दावा

आमिर खान प्रोडक्शंस की ‘बंटवारा 1947’, जिसका निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है और जिसमें शबाना आज़मी, सनी देओल और प्रीति जी जिंटा मुख्य भूमिकाओं में हैं, 14 अगस्त 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। हाल ही में रिलीज़ हुए फिल्म के ट्रेलर ने भारत के बंटवारे के दर्दनाक इतिहास की दमदार झलक दिखाकर दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर उत्साह और भी बढ़ा दिया है।