Jharkhand Student Protest: झारखंड के ‘सोनम वांगचुक’ कहे जाने वाले छात्र नेता देवेंद्र महतो कौन हैं? रांची के Gen-Z प्रोटेस्ट का बने चेहरा

Who is Devendra Nath Mahto: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं परीक्षा JPSC, JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राजधानी रांची में सैकड़ों छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी परीक्षा अनियमितताओं की CBI जांच और भर्ती एजेंसियों में सुधार की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी 29 जुलाई से एक स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो इस Gen-Z आंदोलन के प्रमुख चेहरा हैं।

उन्हें झारखंड के विरोध प्रदर्शन का ‘सोनम वांगचुक’ कहा जा रहा है क्योंकि उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में रविवार रात (2 अगस्त) को रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। वहीं, Gen Z प्रदर्शनकारी 29 जुलाई से स्टेडियम में धरना दे रहे हैं। उन्हें पूरे देश से समर्थन मिल रहा है। अलग-अलग शहरों से लोग ऑनलाइन डिलीवरी ऐप के जरिए प्रदर्शन स्थल पर खाने की चीजें उपलब्ध करा रहे हैं।

भर्ती परीक्षाओं में भारी अनियमितताओं का विरोध

महतो और छात्र झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में भारी अनियमितताओं का विरोध कर रहे हैं। वह CBI और ED से जांच की मांग कर रहे हैं। महतो ने 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को तब तक रद्द करने की मांग की है जब तक कि पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित न हो जाए।

महतो ने अपना अनशन तोड़ा

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने चार दिन बाद मंगलवार को अपना अनशन समाप्त कर दिया है। महतो ने बुधवार को एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की अपील पर अपनी भूख हड़ताल के दौरान पानी पिया। एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने महतो से बातचीत की और उनका हाल चाल-जाना। महतो JPSC, JSSC-CGL और दूसरी कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा, “हम 25 जुलाई से सत्याग्रह कर रहे हैं। मैं 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठा हूं। मैं बहुत थक गया था। यह एक नाजुक समय था… यहां 26 सालों से पेपर लीक हो रहे हैं… कल डॉक्टर ने चेतावनी दी थी कि अगर मैंने पानी नहीं पिया, तो मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा।”

इस दौरान एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कहा, “कृपया थोड़ा पानी पी लीजिए, यह आत्महत्या जैसा है… आपको कुछ समय चाहिए, लेकिन इसमें 2-3 हफ्ते भी लग सकते हैं और मुझे उम्मीद है कि सरकार बात समझेगी और सही फैसला लेगी।”

महतो ने रविवार रात करीब 10 बजे जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन स्थल पर भूख हड़ताल शुरू की। इसमें 14वीं जेपीएससी परीक्षा, जेएसएससी-सीजीएल और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की सीबीआई तथा ईडी से जांच कराने की मांग की गई। अपनी भूख हड़ताल शुरू करने से पहले, उन्होंने कहा कि कथित अनियमितता के मामले में केंद्र और राज्य सरकारों का लापरवाही वाला रवैया छात्रों, युवाओं और अभ्यर्थियों का मनोबल तोड़ रहा है।

कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो?

देवेंद्र नाथ महतो रांची के एक छोटे से गांव के रहने वाले छात्र नेता हैं। उन्होंने रांची के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी में उच्च शिक्षा प्राप्त करने से पहले बुंडू में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। संस्कृत के साथ-साथ कुर्माली, आदिवासी और क्षेत्रीय भाषाओं में पोस्ट-ग्रेजुएट महतो के पास हजारीबाग से बैचलर ऑफ एजुकेशन (B.Ed.) की डिग्री भी है।

महतो ने साल 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में तमार निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भी चुनाव लड़ा था। वह 2015 से छात्र सक्रियता में शामिल रहे हैं। उन्होंने छात्रवृत्ति, पेपर लीक, भर्ती नियमों और आरक्षण नीतियों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया है। रविवार को उन्हें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का भी समर्थन मिला। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि उन्होंने महतो और अन्य छात्र नेताओं के साथ वीडियो कॉल की थी।

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उन्होंने अपने हालिया X पोस्ट में लिखा, “यह संघर्ष, जो 5 जुलाई को शुरू हुआ था और 25 जुलाई से जारी दिन-रात का सत्याग्रह अब एक मुश्किल दौर में पहुंच गया है। शरीर में कमजोरी है, लेकिन छात्रों को न्याय दिलाने का संकल्प पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है।” उन्होंने समर्थकों से आंदोलन को शांतिपूर्ण और संवैधानिक बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवा उम्मीदवारों के भविष्य के लिए है।

NEET विरोध प्रदर्शन के दौरान वांगचुक की भूख हड़ताल

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने NEET विरोध प्रदर्शन को सुर्खियों में ला दिया, जिसने इस महीने की शुरुआत में पूरे देश में हलचल मचा दी थी। जहां एक तरफ ‘कॉकरोच जनता पार्ट’ के नेताओं की अगुवाई में छात्र 6 जून से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे थे, वहीं वांगचुक 28 जून को इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा की।

उनके शामिल होने से इस आंदोलन को काफी सपोर्ट मिला। देश भर के छात्र विरोध प्रदर्शन में शामिल होने लगे। उन्होंने 23 जुलाई, 2026 की देर रात अपनी 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म की, जब उन्हें केंद्र सरकार से परीक्षा में व्यापक सुधारों के बारे में आधिकारिक लिखित आश्वासन मिला। उन्होंने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में सूप पीकर अपना अनशन तोड़ा। वांगचुक का वजन लगभग 11 किलो कम हो गया। उनकी भूख हड़ताल बेकार नहीं गई, क्योंकि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मुख्य मांग 25 जुलाई को पूरी हो गई।

झारखंड में छात्रों का विरोध प्रदर्शन

25 जुलाई से हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। विभिन्न सरकारी परीक्षाओं विशेष रूप से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यह विरोध प्रदर्शन जवाबदेही, पारदर्शी भर्ती और शिक्षा सुधारों की मांग करते हुए पूरे राज्य में फैल गया है, जिसका केंद्र रांची है।

इसकी शुरुआत JPSC सिविल सेवा परीक्षा में OMR शीट के साथ छेड़छाड़ और पेपर लीक की खबरों के बाद हुई। झारखंड में छात्र राज्य में परीक्षा से जुड़ी कई अन्य अनियमितताओं को लेकर नाराज हैं। वे 2024 झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) CGL परीक्षा का पेपर लीक होने और हाई कोर्ट के दखल के बाद परीक्षा को दोबारा आयोजित करने के फ़ैसले पर जवाब मांग रहे हैं।

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इस साल की शुरुआत में झारखंड आबकारी कांस्टेबल प्रतियोगी परीक्षा (JECCE) में लीक हुए पेपर सेट को याद करने के लिए प्रति व्यक्ति ₹15 लाख तक का भुगतान करते हुए पकड़े जाने के बाद 159 उम्मीदवारों और रैकेट के 5 सरगनाओं को अरेस्ट किया गया था। इसके अलावा, कोडरमा और गिरिडीह जैसे जिलों में JAC क्लास 10 बोर्ड परीक्षा (2025) के साइंस और हिंदी के पेपर भी परीक्षा से पहले या एग्जाम के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हो ग। इसके कारण परीक्षाएं रद्द कर दोबारा परीक्षा करानी पड़ी।

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NEET-PG cut-off case: डीजीएचएस की अध्यक्षता वाली समिति करेगी नीट पीजी प्रवेश प्रक्रिया का ऑडिट, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी

NEET-PG cut-off case: नीट पीजी प्रवेश प्रक्रिया की समीक्षा के लिए 12 सदस्यों वाली एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है। यह समिति नीट पीजी प्रवेश प्रक्रिया में मौजूद कमियों की पहचान करेगी। इसे ठीक करने के लिए सभी संबंधित पक्षों को सलाह देगी और आंतरिक ऑडिट के लिए एक व्यवस्था बनाएगी। केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी है। शीर्ष अदालत में नीट पीजी 2025-26 प्रवेश के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल में कमी को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच को एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि समिति का गठन 23 जुलाई के नोटिफिकेशन के जरिए कोर्ट के पहले के निर्देशों के मुताबिक किया गया था। कमेटी को डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) डी लवनीश जी कृष्णा हेड कर रहे हैं, जबकि असिस्टेंट डायरेक्टर जनरल (मेडिकल एजुकेशन) डॉ प्रवीण कुमार दास मेंबर सेक्रेटरी के तौर पर काम करेंगे।

इसमें नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC), नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA), नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBE) और हेल्थ मिनिस्ट्री के दूसरे अधिकारियों के रिप्रेजेंटेटिव भी शामिल हैं। भाटी ने कहा कि कमेटी का काम मौजूदा पीजी प्रवेश प्रक्रिया के विस्तृत आंतरिक ऑडिट के लिए एक तंत्र बनाना और सुधार लागू करने लायक सुझाव देना है। उन्होंने बेंच को बताया कि इस काम में आठ हफ्ते लगेंगे। केंद्र का जवाब दर्ज करने के बाद बेंच ने कमेटी को आठ हफ्ते के अंदर अपनी रिपोर्ट फाइल करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने कहा, “रिपोर्ट आने के बाद हम इस मुद्दे पर सक्रिय तौर से चर्चा करेंगे।” पीठ ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो कमेटी नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (NCISM) और नेशनल कमीशन फॉर होम्योपैथी (NCH) से मेंबर्स को को-ऑप्ट कर सकती है।

पिटीशनर हरिशरण देवगन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पिंकी आनंद और एडवोकेट सत्यम सिंह राजपूत ने एक एमिकस क्यूरी नियुक्त करने का सुझाव दिया। भाटी ने जवाब दिया कि सीनियर एडवोकेट मनिंदर सिंह को इस मामले में पहले ही एमिकस अपॉइंट किया जा चुका है।

नीट पीजी प्रवेश प्रक्रिया पर याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन और डॉक्टर सौरव कुमार, लक्ष्य मित्तल और आकाश सोनी की तरफ से फाइल की गई है। इसमें नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) के 13 जनवरी के नोटिस को चुनौती दी गई है, जिसमें नीट पीजी 2025-26 काउंसलिंग के तीसरे राउंड के लिए मिनिमम क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल कम कर दिया गया था।

संशोधित योग्यता मापदंड के तहत, सामान्य श्रेणी का कट-ऑफ स्कोर 276 से घटाकर 103 कर दिया गया, जबकि क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल 50 से घटकर सातवें पर्सेंटाइल पर आ गया। SC, ST और OBC कैंडिडेट्स के लिए, कट-ऑफ स्कोर 235 से घटाकर माइनस 40 कर दिया गया। पिटीशनर्स का कहना है कि यह फैसला मनमाना, गैर-संवैधानिक है और संविधान के आर्टिकल 14 और 21 का उल्लंघन करता है।

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विदेश में पढ़ाई के खर्चे पर अभिजीत दीपके ने बताया सच, कहा अब लोन चुकाना है

Abhijeet Deepke

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी अमेरिका में पढ़ाई के खर्चे को लेकर उठे सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी बोस्टन यूनिवर्सिटी में एमएस (पब्लिक रिलेशंस) की डिग्री स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन से पूरी हुई। उन्होंने स्कॉलरशिप दस्तावेज भी सार्वजनिक रूप से दिखाने की पेशकश की है।

अभिजीत दीपके ने पत्रकार बरखा दत्त को दिए इंटरव्यू में कहा, “मैं बोस्टन यूनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप प्राप्त की थी और बाकी खर्च के लिए एजुकेशन लोन लिया था, जिसे मुझे अभी चुकाना है।” उन्होंने डीन स्कॉलरशिप का दस्तावेज साझा करते हुए बताया कि यूनिवर्सिटी ने उन्हें प्रति सेमेस्टर 12,500 डॉलर की स्कॉलरशिप दी, जो तीन सेमेस्टर के लिए कुल 37,500 डॉलर (लगभग 30 लाख रुपये से अधिक) बनी।
 
विवाद की शुरुआत : विवाद तब शुरू हुआ जब सूरत के आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके (महाराष्ट्र सरकार के रिटायर्ड जूनियर इंजीनियर) की वित्तीय स्थिति की जांच की मांग की। तिवारी ने सवाल उठाया कि मासिक वेतन लगभग 60-65 हजार रुपए वाले रिटायर्ड कर्मचारी ने अमेरिका जैसी महंगी पढ़ाई का खर्च कैसे उठाया। उन्होंने चुनाव आयोग, इनकम टैक्स विभाग और महाराष्ट्र सरकार को पत्र लिखकर जांच की अपील की थी।

अभिजीत ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि वे अपना स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन दस्तावेज दिखाने को तैयार हैं। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर चुनौती दी, “मैं अपना स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन लेटर दिखाने को तैयार हूं। क्या सम्राट अपना डिग्री दिखाएंगे?” कितना खर्च आया पढ़ाई पर? अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस के मास्टर कोर्स पर ट्यूशन फीस, रहन-सहन, स्वास्थ्य बीमा आदि मिलाकर कुल खर्च 30 लाख से 1 करोड़ रुपये तक हो सकता है। अभिजीत की स्कॉलरशिप ने काफी हिस्सा कवर किया, जबकि बाकी लोन से पूरा हुआ। उनके पिता ने पहले भी लोन लेकर बेटे को पढ़ाने की बात कही थी।

CJP की फंडिंग को लेकर भी सवाल : अभिजीत दीपके ने पुणे से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद वे अमेरिका गए और हाल ही में जून 2026 में भारत लौटकर बड़े प्रदर्शन आंदोलन का नेतृत्व किया। CJP की फंडिंग को लेकर भी सवाल उठे हैं, जिस पर उन्होंने क्राउडफंडिंग और पूर्ण पारदर्शिता का वादा किया है।यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जहां लोग दीपके के जवाब और RTI कार्यकर्ता के सवालों पर अपनी राय रख रहे हैं। अभिजीत दीपके की स्पष्टता ने कई सवालों के जवाब दिए हैं, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है। अभिजीत दीपके ने बयान दिया है कि पढ़ाई का खर्च स्कॉलरशिप और लोन से हुआ। अब लोन चुकाना है।

बता दें कि अभिजीत दीपके कॉकरोच पार्टी बनाकर चर्चा में आए थे। पार्टी बनाने के बाद उन्‍होंने दिल्‍ली के जंतर मंतर में प्रोटेस्‍ट किया। बाद में ये प्रोटेस्‍ट जेंनजी प्रोटेस्‍ट बन गया। जिसका असर यह हुआ कि नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्‍तीफा देना पडा। 

JOJO Stock Split: 2 टुकड़ों में टूटने वाला है शेयर, 7 अगस्त रिकॉर्ड डेट; 5 साल में 9000% चढ़ी कीमत

JOJO Ltd का स्टॉक स्प्लिट होने वाला है। इसके तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाला एक शेयर 5 रुपये फेस वैल्यू वाले 2 शेयरों में टूट जाएगा। रिकॉर्ड डेट 7 अगस्त है। इस तारीख तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुके होंगे, उनके स्टॉक स्प्लिट हो जाएंगे।

JOJO Ltd का पुराना नाम मधुवीर कॉम l8 नेटवर्क लिमिटेड था। यह गुजरात की एंटरटेनमेंट और मीडिया कंपनी है। इसका एक गुजराती OTT स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म है, यह फिल्में बनाती है, साथ ही लाइव इवेंट्स भी आयोजित करती है। कंपनी फार्मा ट्रेडिंग के बिजनेस में भी है। जोजो के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर ध्रुविन शाह हैं। कंपनी के 70 लाख से ज्यादा ग्लोबल गुजराती यूजर हैं।

जोजो के कंटेंट में फिल्में, शोज, वेब सीरीज, माइक्रो ड्रामा; बच्चों के लिए एनिमेटेड, एजुकेशन कंटेंट आदि शामिल है। इसके कुछ गेम्स भी हैं। कंपनी की ​सब्सिडियरीज में जोजो स्टूडियोज, जोजो ग्लोबल इंक और प्रीमियर एड्स वर्ल्ड शामिल हैं।

JOJO का शेयर 5 साल में 9000 प्रतिशत मजबूत

जोजो लिमिटेड के शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर 247 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 629 करोड़ रुपये है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 67.79 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर की कीमत एक महीने में 17 प्रतिशत और एक साल में लगभग 30 प्रतिशत चढ़ी है। 3 साल में शेयर 700 प्रतिशत और 5 साल में 9000 प्रतिशत की बढ़त देख चुका है। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 295 रुपये और एडजस्टेड लो 138.50 रुपये है।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

कंपनी का जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 12.27 करोड़ रुपये रहा। इस बीच शुद्ध मुनाफा 1.16 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। वित्त वर्ष 2026 के दौरान जोजो लिमि​टेड का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 22.53 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 5.89 करोड़ रुपये रहा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Abhijeet Dipke: रिटायर्ड पिता ने विदेश में अभिजीत दिपके की पढ़ाई का खर्च कैसे उठाया? RTI कार्यकर्ता ने CJP के फंड पर उठाए सवाल, जांच की मांग

Abhijeet Dipke: सूरत के एक RTI कार्यकर्ता ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत डिपके के पिता की आर्थिक स्थिति की जांच की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया है कि एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी अपने बेटे की विदेश में हायर एजुकेशन का खर्च कैसे उठा सकता है? RTI एक्टिविस्ट ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) और सेंट्रल GST अधिकारियों से CJP के कानूनी स्टेटस और फंडिंग की जांच करने का भी आग्रह किया है।

RTI एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने अधिकारियों को पत्र लिखकर महाराष्ट्र सरकार के रिटायर्ड कर्मचारी और अभिजीत डिपके के पिता भगवान राव डिपके की आर्थिक स्थिति की जांच की मांग की है। तिवारी ने सवाल किया कि रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद भगवानराव डिपके अपने बेटे को हायर एजुकेशन के लिए विदेश कैसे भेज पाए। इसी आधार पर उनकी आर्थिक स्थिति की जांच की मांग की है।

लीगल डिफेंस फंड भी जांच के दायरे में

डिपके के पिता की आर्थिक जांच की मांग के अलावा, तिवारी ने CJP के उन प्रदर्शनकारियों के लिए घोषित लीगल डिफेंस फंड पर भी आपत्ति जताई है, जिन पर कथित NEET पेपर लीक आंदोलन से जुड़े पुलिस केस चल रहे हैं। तिवारी ने चुनाव आयोग को एक लेटर लिखकर यह पता लगाने को कहा है कि क्या लीगल डिफेंस फंड की घोषणा के बाद कॉकरोच जनता पार्टी को ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ की धारा 29A के तहत रजिस्टर किया गया है।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक तिवारी ने कहा, “कॉकरोच जनता पार्टी एक अनरजिस्टर्ड संस्था है। लेकिन एक पॉलिटिकल पार्टी के तौर पर काम कर रही है। अगर इसे लीगल डिफेंस फंड के तौर पर 1 करोड़ रुपये देने का वादा किया गया है, तो चुनाव आयोग को यह जांचना चाहिए कि क्या CJP ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ की धारा 29A के तहत उसके पास रजिस्टर्ड है।” उन्होंने आगे कहा कि अगर पार्टी रजिस्टर्ड नहीं है, तो पॉलिटिकल पार्टी के नाम पर उसका काम करना और फंड इकट्ठा करना या लेना जांच का विषय हो सकता है।

कपिल सिब्बल ने दिया 1 करोड़

एक अलग अर्जी में तिवारी ने सेंट्रल GST अधिकारियों से यह जांचने का आग्रह किया कि क्या सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिबल CJP प्रदर्शनकारियों के कानूनी बचाव के लिए दिए गए 1 करोड़ रुपये के योगदान पर 18 प्रतिशत GST देने के लिए जिम्मेदार होंगे। NEET पेपर लीक के आरोपों को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को कानूनी मदद देने के लिए CJP ने एक लीगल डिफेंस फंड बनाया है। सिब्बल ने इस फंड में 1 करोड़ रुपये का योगदान देने की घोषणा की है।

विवाद के बीच अभिजीत दिपके बीमार पड़े

यह नया विवाद सामने आने के बाद महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में अपने घर पर अभिजीत दिपके बीमार पड़ गए। डॉक्टरों ने उन्हें पूरी तरह आराम करने की सलाह दी है। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, दिपके शनिवार सुबह करीब 11:45 बजे अपने घर के पार्किंग एरिया में इंतजार कर रहे लोगों के एक समूह से मिलने के लिए नीचे आए। हालांकि, जल्द ही उन्हें बेचैनी महसूस हुई, जिसके बाद वे घर के पिछले हिस्से में गए और उल्टी की। इसके बाद वे मीडिया से बात किए बिना ही वापस ऊपर चले गए। उनके पिता भगवान दिपके ने बताया कि उनकी जांच के लिए तुरंत डॉक्टरों को बुलाया गया।

दिपके का इलाज करने वाले डॉ. विशाल लहाने ने पत्रकारों को बताया कि उनका ब्लड प्रेशर गिरकर 100/60 mmHg हो गया था। उन्होंने उनकी इस हालत का कारण तनाव और चिंता को बताया। डॉक्टर ने कहा, “दिपके का ब्लड प्रेशर 100/60 के स्तर पर थोड़ा कम है। तनाव और चिंता के कारण उन्हें सुबह से ही बेचैनी और जी मिचलाने की समस्या हो रही है। उन्हें कुछ बार उल्टी हुई है और दस्त की भी शिकायत है।”

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डॉक्टर ने बताया कि दिपके को IV (नस के ज़रिए) फ्लूइड दिया गया। उन्हें दिन भर आराम करने की सलाह दी गई है। उन्होंने आगे कहा कि दिपके को बुखार नहीं है। उम्मीद है कि पर्याप्त आराम करने से वे ठीक हो जाएंगे। अगर उनकी हालत में सुधार नहीं होता है, तो डॉक्टर इलाज के अगले कदम पर फैसला लेने से पहले ब्लड टेस्ट करेंगे।

कौन सा है भारत का सबसे महंगा बोर्डिंग स्कूल? जहां पढ़ाई के साथ दुनिया की भी होती है सैर

स्कूल का नाम सुनते ही क्लासरूम और किताबें याद आ जाती है, लेकिन भारत में एक ऐसा बोर्डिंग स्कूल भी है, जहां पढ़ाई के साथ हर दिन हिमालय के खूबसूरत नजारे देखने को मिलते है। उत्तराखंड के मसूरी में वुडस्टॉक स्कूल अपनी शानदार लोकेशन और पहचान के कारण दुनियाभर में पॉपुलर है।

 

हिमालय की गोद में कैंपस (Himalayan Location)

यह स्कूल मसूरी में हिमालय की वादियों के बीच है। चारों ओर हरियाली, पहाड़ और शांत माहौल स्टूडेंट को प्रकृति के करीब रहकर सीखने का मौका देता है।

 

इतिहास और प्रकृति का संगम (Heritage & Nature)

वुडस्टॉक स्कूल की पहचान सिर्फ उसकी पढ़ाई से नहीं, बल्कि उसकी बिल्डिंग, हरियाली और शांत माहौल से भी है। यही वजह है कि यह भारत के सबसे खास बोर्डिंग स्कूलों में गिना जाता है।

दुनियाभर में पहचान (Global Recognition)

वुडस्टॉक स्कूल को दुनिया के सबसे खूबसूरत बोर्डिंग स्कूलों में शामिल किया गया है। इसकी शानदार लोकेशन और हिस्टोरिक कैंपस ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।

 

 

170 साल से ज्यादा पुराना इतिहास (Rich History)

करीब 172 साल पुराने इस स्कूल की शुरुआत एक छोटे इंस्टिट्यूट से हुई थी। समय के साथ यह भारत के इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूलों में शामिल हो गया।

वर्ल्ड-क्लास पढ़ाई (International Education)

यहां इंटरनेशनल बैकलॉरिएट (IB) पढ़ाया जाता है, जो दुनिया की कई बड़ी यूनिवर्सिटी में मान्य है। पढ़ाई के साथ स्टूडेंट के डेवलपमेंट पर भी ध्यान दिया जाता है।

दुनियाभर के छात्र (Diverse Community)

स्कूल में कई देशों के छात्र पढ़ते हैं। अलग-अलग कल्चर के बीच पढ़ाई करने से बच्चों को नई सोच बनाने का मौका मिलता है।

किताबों से आगे की सीख (Beyond Classroom)

यहां सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि स्पोर्ट्स, म्यूजिक, थिएटर, आउटडोर एक्टिविटी, पर्यावरण संरक्षण और भी कई एक्टिविटीज पर भी ध्यान दिया जाता है।