जिस IIT में पढ़ाई की, उसी की विदेश में बड़ी जिम्मेदारी संभाली प्रीति अघलायम ने!

किसी इंस्टीटूशन में स्टूडेंट रहने के बाद फिर वहीं की बड़ी जिम्मेदारी संभालना अपने आप में खास सफर है। प्रीति अघलायम की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। वह 1991 में IIT मद्रास में केमिकल इंजीनियरिंग की स्टूडेंट रहकर पढ़ाई कर चुकी है। अब तीन दशक से ज्यादा समय बाद वह इसी इंस्टिट्यूट के इंटरनेशनल कैंपस IIT मद्रास जंजीबार की डायरेक्टर-इन-चार्ज बनीं है। जुलाई 2023 में मिली इस जिम्मेदारी के साथ वह IIT लीड करने वाली पहली महिला बनीं।

प्रीति अघलायम की साइंस में रुचि बचपन से थी। उनका परिवार भी पढ़ाई और शिक्षा से जुड़ा हुआ था। उनके पिता केमिस्ट्री के प्रोफेसर थे, जबकि उनकी मां ने दूसरी जिम्मेदारियों के साथ PhD की। अपनी मां को पढ़ाई और एकेडेमिक वर्क जारी रखते देखकर प्रीति को भी हायर एजुकेशन के लिए इंस्पिरेशन मिली।

MIT से IIT Bombay तक का सफर

BTech के बाद अमेरिका चली गईं – यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर से MS और UMass Amherst से PhD (2000)

MIT में पोस्टडॉक्टोरल रिसर्च की

2002 में भारत लौटीं और IIT बॉम्बे में प्रोफेसर बनीं

2010 में वापस अपने होम IIT – IIT मद्रास में प्रोफेसर बनीं

रिसर्च: Underground Coal Gasification, ऑटोमोबाइल से होने वाले NOx प्रदूषण को कम करना

IIT बॉम्बे से एक्सपीरियंस लेकर फिर IIT मद्रास लौटीं

अमेरिका में पढ़ाई और काम का एक्सपीरियंस लेने के बाद प्रीति भारत लौटीं और IIT बॉम्बे में फैकल्टी के तौर पर अपना एकेडेमिक करियर शुरू किया। साल 2010 में वह फिर से IIT मद्रास से जुड़ गईं। यहां उन्होंने केमिकल इंजीनियरिंग पढ़ाने के साथ रिसर्च पर भी काम किया।

IIT मद्रास में उनके रिसर्च के कई एरिया रहे। इनमें अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन, गाड़ियों से निकलने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड को कम करना, रिएक्टर मॉडलिंग और जटिल केमिकल रिएक्शन को समझना शामिल है। उनके एकेडेमिक वर्क को इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल इंजीनियर्स जैसे इंस्टिट्यूट से भी पहचान मिली।

जंजीबार में मिली नई जिम्मेदारी

प्रीति अघलायम के करियर में बड़ा बदलाव तब आया, जब जुलाई 2023 में उन्हें IIT मद्रास जंजीबार का डायरेक्टर-इन-चार्ज बनाया गया। यह भारत के बाहर IIT का पहला इंटरनेशनल कैंपस था, इसलिए यहां काम करना उनके लिए एक नई चुनौती थी। IIT मद्रास के डायरेक्टर वी कामकोटि ने कहा था -“हम सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स को फॉलो कर रहे हैं और जेंडर बैलेंस लाना चाहते हैं, इसलिए प्रीति पहली महिला IIT डायरेक्टर हैं।” पहले बैच में जंजीबार, तंजानिया, भारत और नेपाल से स्टूडेंट पहुंचे।

फिलहाल प्रीति अघलायम IIT मद्रास के ऑफिस ऑफ ग्लोबल एंगेजमेंट की डीन हैं। वह IIT मद्रास जंजीबार से अपनी पहले की डायरेक्टर और फैकल्टी की जिम्मेदारियों के कारण भी जुड़ी रही हैं।

कौन सा है भारत का सबसे महंगा बोर्डिंग स्कूल? जहां पढ़ाई के साथ दुनिया की भी होती है सैर

स्कूल का नाम सुनते ही क्लासरूम और किताबें याद आ जाती है, लेकिन भारत में एक ऐसा बोर्डिंग स्कूल भी है, जहां पढ़ाई के साथ हर दिन हिमालय के खूबसूरत नजारे देखने को मिलते है। उत्तराखंड के मसूरी में वुडस्टॉक स्कूल अपनी शानदार लोकेशन और पहचान के कारण दुनियाभर में पॉपुलर है।

 

हिमालय की गोद में कैंपस (Himalayan Location)

यह स्कूल मसूरी में हिमालय की वादियों के बीच है। चारों ओर हरियाली, पहाड़ और शांत माहौल स्टूडेंट को प्रकृति के करीब रहकर सीखने का मौका देता है।

 

इतिहास और प्रकृति का संगम (Heritage & Nature)

वुडस्टॉक स्कूल की पहचान सिर्फ उसकी पढ़ाई से नहीं, बल्कि उसकी बिल्डिंग, हरियाली और शांत माहौल से भी है। यही वजह है कि यह भारत के सबसे खास बोर्डिंग स्कूलों में गिना जाता है।

दुनियाभर में पहचान (Global Recognition)

वुडस्टॉक स्कूल को दुनिया के सबसे खूबसूरत बोर्डिंग स्कूलों में शामिल किया गया है। इसकी शानदार लोकेशन और हिस्टोरिक कैंपस ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।

 

 

170 साल से ज्यादा पुराना इतिहास (Rich History)

करीब 172 साल पुराने इस स्कूल की शुरुआत एक छोटे इंस्टिट्यूट से हुई थी। समय के साथ यह भारत के इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूलों में शामिल हो गया।

वर्ल्ड-क्लास पढ़ाई (International Education)

यहां इंटरनेशनल बैकलॉरिएट (IB) पढ़ाया जाता है, जो दुनिया की कई बड़ी यूनिवर्सिटी में मान्य है। पढ़ाई के साथ स्टूडेंट के डेवलपमेंट पर भी ध्यान दिया जाता है।

दुनियाभर के छात्र (Diverse Community)

स्कूल में कई देशों के छात्र पढ़ते हैं। अलग-अलग कल्चर के बीच पढ़ाई करने से बच्चों को नई सोच बनाने का मौका मिलता है।

किताबों से आगे की सीख (Beyond Classroom)

यहां सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि स्पोर्ट्स, म्यूजिक, थिएटर, आउटडोर एक्टिविटी, पर्यावरण संरक्षण और भी कई एक्टिविटीज पर भी ध्यान दिया जाता है।