जिंदगी के हर मोड़ पर आएंगी काम, ये 6 किताबें सिखाएंगी जीने का हुनर!

जिंदगी की बड़ी सीख किसी एक्सपीरियंस से नहीं मिलती। कई बार रोज की छोटी-छोटी बातें, लोगों से मिलना, रिश्ते और घटनाएं भी बहुत कुछ सिखा जाती हैं। कुछ किताबें ऐसी ही आम जिंदगी और छोटे पलों की कहानियां बताती हैं, जिनसे खुशी, रिश्तों, उम्मीद और खुद को समझने की सीख मिलती है।

 

 

द हाउस ऑन मैंगो स्ट्रीट – सैंड्रा सिस्नेरोस

THE HOUSE ON MANGO STREET by CISNEROS, SANDRA: (1983) | JOHN LUTSCHAK BOOKS

सैंड्रा सिस्नेरोस की यह किताब एस्पेरांजा नाम की एक लड़की की कहानी है। जो बड़ी हो रही है और धीरे-धीरे खुद को समझने की कोशिश करती है। उसके आसपास रहने वाले लोग, परिवार और रोज होने वाली छोटी-छोटी घटनाएं उसके सोच को बदलती हैं। कहानी यह समझाती है कि जिस जगह और माहौल में इंसान बड़ा होता है, उसका असर उसकी सोच और पहचान पर पड़ता है।

 

 

ऐन ऑफ ग्रीन गेबल्स – एल.एम. मोंटगोमरी

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एल.एम. मोंटगोमरी की यह कहानी ऐन शर्ली नाम की एक बहुत ही कल्पनाशील लड़की की है। ऐन को लंबे समय तक ऐसा लगता है कि उसे कोई नहीं चाहता, लेकिन बाद में उसे एक घर और अपनेपन का एहसास मिलता है। वह छोटी-छोटी चीजों में भी खुशी ढूंढ लेती है। प्रकृति, दोस्ती और रोज के अनुभव उसके लिए खास बन जाते हैं। यह किताब सिखाती है कि खुशी सिर्फ बड़ी चीजों से नहीं मिलती। सही सोच, उम्मीद, दया और छोटी खुशियों की कद्र करने से भी जिंदगी खूबसूरत बन सकती है।

 

 

अ मैन कॉल्ड ओवे – फ्रेडरिक बैकमैन

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फ्रेडरिक बैकमैन की यह कहानी ओवे नाम के एक अकेले और थोड़े गुस्सैल व्यक्ति की है। ओवे को जिंदगी में बदलाव बिल्कुल पसंद नहीं होता। लेकिन जब उसके नए पड़ोसी उसके जीवन में आते हैं, तो धीरे-धीरे उसकी दुनिया बदलने लगती है। उसके व्यवहार के पीछे छिपी अच्छाई सामने आने लगती हैं। कहानी बताती है कि कई बार कठोर दिखने वाले लोगों में भी प्यार और अपनापन छिपा होता है।

 

 

द स्टोरीड लाइफ ऑफ ए.जे. फिक्री – गैब्रिएल जेविन

गैब्रिएल जेविन की यह किताब ए.जे. फिक्री नाम के एक बुकस्टोर मालिक की कहानी है। वह अकेला रहता है और उसकी जिंदगी बहुत शांत तरीके से चल रही होती है।लेकिन अचानक होने वाली घटनाओं से उसका नजरिया बदलने लगता है। धीरे-धीरे उसे रिश्तों, दोस्ती और अपनेपन की अहमियत समझ आती है। यह कहानी बताती है कि जिंदगी में नई शुरुआत के लिए कभी देर नहीं होती।

 

 

द लिटिल प्रिंस – एंटोनी डी सेंट एक्सुपरी

एंटोनी डी सेंट-एक्सुपरी की ‘द लिटिल प्रिंस’ देखने में बच्चों की कहानी लगती है, लेकिन इसमें बड़ों के लिए भी बहुत सी जरूरी बातें छिपी हैं। कहानी में लिटिल प्रिंस अलग-अलग लोगों से मिलता है और उनके जरिए प्यार, दोस्ती, जिम्मेदारी और अकेलेपन को समझता है। यह किताब बताती है कि बड़े होने के बाद भी जिंदगी में छोटी चीजों को लेकर उत्सुकता और खुशी बनाए रखनी चाहिए।

 

 

ट्यूजडेज विद मॉरी -मिच एल्बम

मिच एल्बम की यह किताब राइटर और उनके पुराने प्रोफेसर मॉरी श्वार्ट्ज के बीच होने वाली मुलाकातों पर बेस्ड है। मॉरी बताते हैं कि लोग कई बार पैसा, काम और सफलता पाने की दौड़ में उन चीजों को भूल जाते हैं जो सच में खुशी देती हैं। वह रिश्तों को समय देने और अपने परिवार के साथ प्यार से रहने की बात करते हैं। इस किताब में जिंदगी की बड़ी सीख को आम बातचीत से समझाया गया है।

 

 

रोज की जिंदगी से सीख

इन सभी किताबों की कहानियां अलग हैं, लेकिन इनका मेसेज काफी हद तक एक जैसा है। जिंदगी की खुशी हमेशा बड़ी सफलता या बड़ी घटना में नहीं होती। परिवार के साथ बिताया समय, दोस्ती, किसी की मदद करना, छोटी खुशियों को महसूस करना और मुश्किल समय में उम्मीद बनाए रखना भी बहुत जरूरी है।

खुद को जानो! सुकरात का वह सिद्धांत, जिसे बूढ़े होने से पहले हर इंसान को अपनाना चाहिए

ज्यादातर लोग सुकरात को सिर्फ महान फिलोसोफर मानते हैं, उनका मानना था कि मजबूत दिमाग के साथ मजबूत शरीर भी उतना ही जरूरी है। उनका यह विचार आज भी हमें याद दिलाता है कि अपनी क्षमता को पहचानना और खुद को एक अच्छा इंसान बनाना खुद की जिम्मेदारी है।

सुकरात का आज का विचार (Socrates’ Thought of the Day)

सुकरात का कहना था कि हर इंसान को अपने शरीर का ध्यान रखना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति अपनी ताकत और क्षमता को जाने बिना बूढ़ा हो जाए, तो यह दुख की बात है। उनका यह विचार सिर्फ अच्छी बॉडी बनाने के बारे में नहीं था, बल्कि अपने शरीर को हेल्दी और मजबूत रखने के बारे में था। जैसे हम पढ़ाई और काम में मेहनत करते हैं, उसी तरह शरीर के लिए भी समय निकालना भी जरूरी है।

फिटनेस नहीं, जिम्मेदारी (More Than Fitness)

सुकरात कहते है कि फिट रहना सिर्फ अच्छा दिखने के लिए नहीं है। यह हमारी अपनी जिम्मेदारी भी है। अगर शरीर हेल्दी रहेगा, तो रोज के काम आसानी से होंगे, कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और जीवन भी खुशनुमा होगा। इसलिए सेहत को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

शरीर और दिमाग साथ-साथ (Mind & Body Connection)

सुकरात मानते थे कि शरीर और दिमाग एक-दूसरे से जुड़े हैं। अगर शरीर हेल्दी रहेगा, तो मन भी अच्छा रहेगा और सोचने-समझने की क्षमता बढ़ेगी। वहीं, अगर शरीर कमजोर होगा तो इसका असर कॉन्फिडेंस और काम करने की क्षमता पर भी पड़ सकता है। इसलिए दोनों का बराबर ध्यान रखना जरूरी है।

अपनी ताकत पहचानें (Discover Your Potential)

हर इंसान के अंदर कोई न कोई खास क्षमता होती है। सुकरात कहते है कि हमें अपनी इस क्षमता को पहचानना चाहिए और उसे आगे बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए। अगर हम कोशिश ही नहीं करेंगे, तो हमें कभी पता नहीं चलेगा कि हम क्या-क्या कर सकते हैं।

अनुशासन की अहमियत (Power of Discipline)

सुकरात का मानना था कि अच्छी आदतें इंसान को आगे बढ़ाती हैं। रोज थोड़ी एक्सरसाइज करना, नई चीजें सीखना और टाइम का सही उपयोग करना ये सब बातें आगे चलकर बड़ी सक्सेस दिलाती हैं। डिसिप्लिन इंसान को मजबूत और बेहतर बनाता है।

सिर्फ दार्शनिक नहीं, सैनिक भी थे (Socrates as a Soldier)

सुकरात सिर्फ ज्ञान की बातें नहीं करते थे, बल्कि उन्होंने खुद भी कठिन जीवन जिया था। पेलोपोनेसियन युद्ध में सैनिक रहे और मुश्किल परिस्थितियों का सामना किया। यही वजह है कि वे शारीरिक ताकत और डिसिप्लिन को बहुत महत्व देते थे।

सवाल पूछकर सिखाते थे (Socratic Method)

सुकरात लोगों को सीधे जवाब नहीं देते थे देने के बजाय बल्कि इनसे सवाल पूछते थे। उनका मानना था कि जब इंसान खुद से जवाब ढूंढता है, तभी वह सही मायने में सीखता है। आज भी कई स्कूलों, कॉलेजों और लॉ कॉलेजों में इस तरीके का उपयोग किया जाता है।

खास है यह सीख (Still Matters Today)

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग काम और मोबाइल में इतने बिजी हो जाते हैं कि अपनी सेहत पर ध्यान नहीं दे पाते। तब सुकरात की यह सीख पहले से भी ज्यादा जरूरी लगती है। उनका मैसेज है कि अच्छा जीवन जीने के लिए सिर्फ पैसा या सफलता नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर और बेहतर जीवन भी जरूरी है।