संजय बांगर की बेटी Anaya Bangar Australia के लिए खेलेगी? Cricket Australia की मंजूरी के बाद जानें क्या है पूरा रास्ता

पूर्व मुंबई अंडर-19 क्रिकेटर अनाया बांगर (Anaya Bangar) के लिए महिला क्रिकेट में वापसी का रास्ता खुल गया है। मार्च में जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी (Gender Affirming Surgery) कराने वाली अनाया को क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने ऑस्ट्रेलिया में महिला कम्युनिटी क्रिकेट खेलने की मंजूरी दे दी है। हालांकि, अगर वह विमेंस बिग बैश लीग (WBBL) जैसी एलीट क्रिकेट प्रतियोगिताओं में खेलना चाहती हैं, तो उन्हें क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की टेस्टोस्टेरोन से जुड़ी पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी।

 

अनाया मुंबई की एज-ग्रुप क्रिकेट में खेल चुकी हैं। वह टेस्ट क्रिकेट खेल चुके सरफराज खान और उनके भाई मुशीर खान के साथ भी मुंबई के लिए क्रिकेट खेल चुकी हैं।

 

 'मुझे लगा था कि मैं फिर कभी क्रिकेट नहीं खेल पाऊंगी'

 

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से मंजूरी मिलने के बाद अनाया ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में इसे अपने लिए बेहद खास दिन बताया। उन्होंने कहा कि एक समय उन्हें लगा था कि वह शायद दोबारा क्रिकेट नहीं खेल पाएंगी।

 

 “यह मेरे लिए बहुत खास दिन है, खासकर यह जानने के बाद कि मैं दोबारा क्रिकेट खेल सकती हूं। एक समय ऐसा भी था जब मुझे लगा था कि मैं फिर कभी क्रिकेट नहीं खेल पाऊंगी। लेकिन क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का शुक्रिया, जिसने मुझे एक और मौका दिया।”

 

अनाया ने जून में क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से संपर्क किया था। इसके जवाब में 20 जुलाई को उन्हें बताया गया कि वह तुरंत कम्युनिटी क्रिकेट खेल सकती हैं। हालांकि, एलीट क्रिकेट में खेलने के लिए उन्हें टेस्टोस्टेरोन से जुड़े पात्रता मानदंड पूरे करने होंगे।

 

 

 

 

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 मार्च 2027 तक कम्युनिटी क्रिकेट खेलने की अनुमति

 

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की हेड ऑफ इंटीग्रिटी जैकी पार्ट्रिज ने अनाया को भेजे पत्र में स्पष्ट किया कि वह मार्च 2027 तक ऑस्ट्रेलिया के किसी भी राज्य या क्षेत्र में प्रीमियर क्रिकेट प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकती हैं।

 

“मार्च 2027 तक आप ऑस्ट्रेलिया के किसी भी राज्य या क्षेत्र में प्रीमियर क्रिकेट प्रतियोगिताओं में खेलने के लिए पात्र हैं। चूंकि प्रीमियर क्रिकेट को इस नीति के तहत एलीट क्रिकेट के बजाय कम्युनिटी क्रिकेट की श्रेणी में रखा गया है, इसलिए इस फैसले का आपकी इन प्रतियोगिताओं में भागीदारी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।”

 

यानी अनाया मार्च 2027 तक ऑस्ट्रेलिया में कम्युनिटी लेवल पर महिला क्रिकेट खेल सकती हैं। हालांकि, इसके बाद एलीट क्रिकेट में उनकी पात्रता टेस्टोस्टेरोन टेस्ट समेत अन्य शर्तों पर निर्भर होगी।

 

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के अनुसार, खिलाड़ी का सीरम टेस्टोस्टेरोन स्तर कम से कम 12 महीनों तक 10 nmol/L से नीचे होना चाहिए। मार्च 2027 से एलीट क्रिकेट में खेलने के लिए अनाया को ऑस्ट्रेलिया पहुंचने पर ब्लड टेस्ट भी कराना होगा।

 

 “मार्च 2027 से एलीट क्रिकेट में आपकी पात्रता इस बात पर निर्भर करेगी कि आप ऑस्ट्रेलिया पहुंचने पर एक ब्लड टेस्ट उपलब्ध कराएं, जिसमें यह पुष्टि हो कि आपके सीरम टेस्टोस्टेरोन का स्तर 10 nmol/L से कम है और आप नीति में तय पात्रता की अन्य सभी शर्तों को पूरा करना जारी रखती हैं।”

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 ICC का ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को लेकर क्या नियम है?

 

इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने 2023 में ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों की एलीट महिला क्रिकेट में भागीदारी को लेकर अपनी नीति स्पष्ट की थी। इसके तहत ऐसे ट्रांसजेंडर खिलाड़ी, जिन्होंने पुरुष यौवन यानी मेल प्यूबर्टी का अनुभव किया है, एलीट महिला इंटरनेशनल क्रिकेट में हिस्सा नहीं ले सकते।

 

भारत में हालांकि इस तरह के मामले को लेकर BCCI की अभी कोई स्पष्ट नीति नहीं है। BCCI के एक शीर्ष अधिकारी ने *द इंडियन एक्सप्रेस* से कहा कि बोर्ड ने ट्रांस महिलाओं के महिला क्रिकेट खेलने को लेकर अभी कोई फैसला नहीं लिया है।

 

“जहां तक ICC की बात है, उसने ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को लेकर अपना फैसला स्पष्ट कर दिया है। BCCI ने अभी यह तय नहीं किया है कि ऐसे मामलों में क्या किया जाना चाहिए। चूंकि यह पहली बार है जब इस तरह का मामला सामने आया है, इसलिए बोर्ड ने अभी इस पर कोई रुख तय नहीं किया है। खास तौर पर घरेलू क्रिकेट में उन्हें खेलने की अनुमति देने को लेकर।”

 

अनाया ने बताया, कैसे मिली क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से मंजूरी

 

अनाया ने बताया कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उनके मामले को विस्तार से देखा। उनकी मेडिकल हिस्ट्री, टेस्ट रिपोर्ट और सर्जरी से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा की गई।

 

उन्होंने कहा कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उनकी एथलीट टेस्टिंग रिपोर्ट और मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी से जुड़ी रिपोर्ट भी देखी। अनाया के मुताबिक, बोर्ड ने उनकी स्थिति का आकलन करने के लिए एक पूरी टीम के जरिए उनके मामले की समीक्षा की।

 

 “मेरी एथलीट टेस्टिंग रिपोर्ट और बाकी सभी जानकारी सामने आने के बाद भी BCCI की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। वहीं, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने वास्तव में मेरी रिपोर्ट पढ़ी, मेरी पूरी मेडिकल हिस्ट्री देखी और मेरी स्थिति का आकलन करने के लिए एक पूरी टीम बनाई।”

 

 “मैंने क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से संपर्क किया और उन्होंने निष्पक्षता और समावेशिता को ध्यान में रखते हुए मुझे खेलने की मंजूरी दी। उन्होंने मुझसे मेरी ब्लड टेस्ट रिपोर्ट और टेस्टोस्टेरोन टेस्ट की रिपोर्ट मांगी। उन्होंने मेरी सर्जरी से जुड़े दस्तावेज भी मांगे। इसके अलावा, उन्होंने मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी की वह रिपोर्ट भी मांगी, जिसे मैंने एक साल से ज्यादा समय पहले सार्वजनिक किया था।”

 

अनाया ने आगे कहा कि अगर वह अच्छा प्रदर्शन करती हैं और बाकी पात्रता शर्तें पूरी करती हैं, तो उनके पास WBBL में खेलने का मौका हो सकता है।

 

 “अगर सब कुछ ठीक रहा और मैं अच्छा प्रदर्शन करती हूं, तो मेरे पास WBBL में खेलने का मौका होगा।”

 

हार्मोन थेरेपी पर रिसर्च का भी हिस्सा बनी थीं अनाया

 

अनाया इससे पहले मैनचेस्टर मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट के एक रिसर्च प्रोजेक्ट का हिस्सा रही हैं। इस प्रोजेक्ट में हार्मोन थेरेपी के दौरान उनकी स्ट्रेंथ, स्टैमिना, हार्मोन और ग्लूकोज लेवल में होने वाले बदलावों का अध्ययन किया गया था।

 

उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए BCCI और ICC के प्रतिनिधियों से भी ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को लेकर स्पष्ट नीति बनाने की अपील की थी। अनाया का कहना रहा है कि ऐसी नीतियां पुराने विचारों के बजाय वैज्ञानिक डेटा और रिसर्च पर आधारित होनी चाहिए।

 

 अभी क्लब की तलाश में अनाया

 

जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी के बाद अनाया फिलहाल रिकवरी कर रही हैं। इसके साथ ही वह ऑस्ट्रेलिया में अपने लिए एक क्लब की तलाश भी कर रही हैं, जहां से वह कम्युनिटी क्रिकेट में अपनी नई पारी शुरू कर सकें।

 

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से मिली मंजूरी को अनाया ने सिर्फ अपने लिए ही नहीं, बल्कि दूसरे खिलाड़ियों के लिए भी बड़ा कदम बताया।

 

 “मैं सच में यकीन नहीं कर पा रही थी कि मैं दोबारा क्रिकेट खेल पाऊंगी। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया और उसकी प्रगतिशील व समावेशी नीतियों की वजह से यह संभव हुआ है। ये नीतियां ट्रांस महिलाओं के लिए महिला खेलों में निष्पक्षता और समावेश पर ध्यान देती हैं।”

 

 “यह सिर्फ मेरे लिए ही नहीं, बल्कि मेरे जैसे दूसरे खिलाड़ियों के लिए भी एक बहुत बड़ा पड़ाव है, जो खेल में आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उन्हें या तो खेल चुनना पड़ता है या फिर जेंडर ट्रांजिशन का विकल्प चुनना पड़ता है।”

नेतन्याहू के लिए ब्रिटेन एक इस्लामी देश क्यों है?

नेतन्याहू के लिए ब्रिटेन एक इस्लामी देश क्यों है?

UK Israel relations

UK Israel relations: इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने, एक इंटरव्यू में कुछ दिन पूर्व ब्रिटेन का मज़ाक उड़ते हुए उसे “इस्लामिक रिपब्लिक ब्रिटेन” कहा। कहने की आवश्यकता नहीं कि ब्रिटिश सरकार ने इस टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हुए इसे “पूर्णतः अस्वीकार्य” बताया है।

 

इसराइली प्रधानमंत्री इस इंटरव्यू में अपने देश के प्रति ब्रिटेन के रुख की आलोचना कर रहे थे। एक मिलिट्री रेडियो पॉडकास्ट के दौरान दिए गए अपने इंटरव्यू में उन्हो़ंने कहा, “किसी ने एक बार कहा था कि परमाणु हथियारों वाला पहला इस्लामिक रिपब्लिक, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ग्रेट ब्रिटेन होगा।…हम इसराइली यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि ईरान ऐसा दूसरा देश न बन पाए।” ब्रिटिश सरकार के एक प्रवक्ता ने नेतन्याहू की इन टिप्पणियों को “पूरी तरह से अस्वीकार्य” बताया।

ब्रिटेन में इस्लाम की बढ़ती धाक

नेतन्याहू ने ऐसा करके, अपने आप को पश्चिमी देशों के उन दक्षिणपंथी राजनेताओं और टिप्पणीकारों की पांत से जोड़ लिया है, जिन्होंने आगाह किया था कि बड़े पैमाने पर आप्रवासन (इमिग्रेशन) के कारण ब्रिटेन के कुछ हिस्से इस्लामी कानूनों के दायरे में आ गए हैं। बाद में इन नेताओं और टिप्पणीकारों पर “इस्लामोफोबिया” (इस्लाम-विरोधी होने) के आरोप भी लगे थे। ब्रिटेन उन यूरोपीय देशों में से एक है, जिन्होंने पिछले साल फ़िलिस्तीनी राज्य को मान्यता भी दी थी; इस कदम से स्वाभाविक है कि इसराइल इन देशों से प्रसन्न नहीं है। ALSO READ: स्पेन में मोरक्को से घुसपैठ, यूरोपीय संघ में मचा हड़कंप

 

ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने हाल ही में अपने पूर्ववर्ती कीर स्टारमर की आलोचना की। उन्होंने कहा कि स्टारमर, गाज़ा पट्टी में अपना हमला रोकने के लिए इसराइल पर पर्याप्त दबाव बनाने में नाकाम रहे। अपना पद संभालने से कुछ समय पहले, “द गार्डियन” को दिए एक इंटरव्यू में बर्नहम ने कहा कि ग्रेट ब्रिटेन, “वेस्ट बैंक” में स्थित इसराइली बस्तियों से आने वाले सामानों के व्यापार पर रोक लगाने के बारे में गंभीरता से विचार करेगा। “वेस्ट बैंक” जॉर्डन नदी के पश्चिम में स्थित फ़िलिस्तीन का एक क्षेत्र है और 1967 से इसराइली क़ब्ज़े में है, जिसे अंतरराष्ट्रीय क़ानून के अनुसार अवैध माना जात है।

ख़राब होते रिश्ते

ब्रिटेन पारंपरिक रूप से अमेरिका का हमेशा क़रीबी सहयोगी रहा है; इसराइल के साथ उसके रिश्ते तब से ख़राब हुए हैं जब इस साल अमेरिका और इसराइल ने मिलकर ईरान पर हमला किया— इसी के साथ मध्यपूर्व में युद्ध भी छिड़ गया। ग्रेट ब्रिटेन और अमेरिका परमाणु शक्तियां हैं और यह बात भी जग-जाहिर है कि इसराइल के पास भी परमाणु हथियार हैं; हालांकि उसने सार्वजनिक रूप से इसे कभी स्वीकार नहीं किया है। 1998 में पाकिस्तान परमाणु शक्ति वाला पहला इस्लामी देश बना था।  ALSO READ: महिलाओं का यौन शोषण यूरोप-अमेरिका में बना नया शौक

 

इसराइल उस समय भारत के सहयोग से पाकिस्तानी बम बनने को रोकना चाहता था, पर इंदिरा गांधी इसके लिए तैयार नहीं थीं। अत: नेतन्याहू का इसराइल, अब हर हाल में ईरान को “दूसरी इस्लामी परमाणु शक्ति” बनाने से रोकने के लिए पूर्णत: कटिबद्ध है।

 

नेतन्याहू द्वारा ब्रिटेन को एक “इस्लामिक रिपब्लिक” कहने के पीछे एक दूसर प्रमुख कारण संभवत: यह भी है कि ब्रिटेन में मुस्लिम जनसंख्या न केवल तेज़ी से बढ़ी है और अब भी बढ़ रही है, वहां की सरकारें इसे रोकने के बदले दुम दबाकर “मुस्लिम तुष्टीकरण” नीति की कायल बन गई हैं। ब्रिटेन की सरकारें मुस्लिम प्रवासियों द्वारा वहां की रहन-सहन के नियमों को ठुकराने की ही नहीं, उनका वोट पाने के लिए उनके द्वारा देश के क़ानूनों की अवहेलना के विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई करने से बिदकती हैं। ALSO READ: तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने किया त्रिपक्षीय सैन्य समझौता

पाकिस्तानी और बांग्लादेशी सबसे बड़े मुस्लिम समूह

ताज़े अनुमानों के अनुसार, ब्रिटेन की मुस्लिम जनसंख्या लगभग 41 लाख है, जो वहां की कुल जनसंख्या के 6.5 प्रतिशत के बराबर है। पाकिस्तानी और बांग्लादेशी सबसे बड़े मुस्लिम समूह हैं। अप्रैल 2026 के एक मत सर्वेक्षण के अनुसार, 25 प्रतिशत ब्रिटिश मुस्लिम इसराइल विरोधी हमास के प्रबल समर्थक हैं। 45 प्रतिशत का मानना है कि ब्रिटेन के समाचार मीडिया में यहूदियों की धाक चलती है। 16 प्रतिशत ब्रिटिश मुस्लिम सीरिया में यज़ीदियों का नरसंहार करने वाले अल बगदादी के “इस्लामी राज्य” के प्रशंसक हैं और 15 प्रतिशत ओसामा बिन लादेन के अल क़ायदा की यादें अब भी संजोए हुए हैं। ईरान में हर तरह के जन—असंतोष को निर्ममता से कुचलने वाले वहां के तथाकथित “पसदारान” (रिवल्यूशनरी गार्ड) के समर्थकों की संख्या भी कुछ कम नहीं है।

रोज़मर्रा की अविश्वसनीय वास्तविकता

इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पॉडकास्ट वाले वक्तव्य से कुछ ही दिन पहले, ब्रिटेन के एक सांसद रूपर्ट लो ने वहां की संसद में एक ऐसा वक्तव्य पढ़ कर सुनाया, जो ब्रिटेन में रोज़मर्रा की एक अविश्सनवीय वास्तविकता है। ब्रिटेन में रहने वाले मुख्यतः पाकिस्तानियों द्वारा, वहां की मूल ईसाई लड़कियों और महिलाओं के साथ छेड़-छाड़ और बलात्कार के लिए कुख्यात, तथाकथित “ग्रूमिंग गैंग्स” के काले कारनामों का वर्णन करते हुए रूपर्ट लो ने कहा कि उनका वक्तव्य, उनकी खुद की जांच-परख पर आधारित है।

 

उदाहरण के तौर पर, बलात्कार पीड़ित एक लड़की की आपबीती को रूपर्ट लो ने उसी के शब्दों में संसद में सुनाया: “उसने (बलात्कारी ने) जैक डेनियल्स (शराब) की बोतल उठाई, जो अब खाली हो चुकी थी, और उसे ज़बरदस्ती मेरे (गुप्तांग के) अंदर घुसेड़ दिया। बोतल वहीं तोड़ दी। उस समय मैं लगभग 12 साल की थी। लगातार ऐसी टिप्पणियां की जाती थीं कि गोरी लड़कियों—- यानी ईसाई लड़कियों में— नैतिकता की या अच्छे मूल्यों की कमी होती है, जबकि मुस्लिम लड़कियों को गरिमापू्र्ण और उच्च नैतिक स्तर वाला बताया जाता है।”

 

“इस पूरे यौन शोषण के दौरान, देश के अलग अलग हिस्सों में कई पुलिस अधिकारियों ने मेरा बलात्कार किया। ईद और छुट्टियों के दौरान पार्टियां और भी बड़ी हो जाती थीं—हालात और भी बदतर हो जाते थे। पार्टियों में और अधिक हिंसक लोग शामिल हो जाते थे— और अधिक लोग हुए, तो उनकी हवश के लिए और अधिक लड़कियां भी होनी चाहिए! मुझे याद है, एक आदमी ने एक वैन का पिछला दरवाज़ा खोला और मैने देखा कि उसमें 15 से 20 लड़कियां कुत्तों के पिंजरों में बंद थीं।” यह मात्र एक उदाहरण है। ऐसे अनगिनत मामले हैं।

कु्ख्यात “ग्रूमिंग गैंग”

“ग्रूमिंग गैंग” ऐसे लोगों के एक संगठित नेटवर्क को कहते हैं, जो सुनियोजित तरीके से कमज़ोरों-पीड़ितों को—आमतौर पर बच्चों और किशोरवय लड़के-लड़कियों—को बहला-फुसलाकर उनका शोषण करते हैं। उन्हें गंभीर दुर्व्यवहार का शिकार बनाते हैं; इसमें बच्चों का यौन शोषण और मानव तस्करी भी शामिल है। अपने शिकारों को उपहारों, मादक द्रव्यों, शराब आदि के द्वारा ललचाया और पटाया जाता है। घर-परिवार से दूर रखकर, गैंग पर निर्भर बनाकर यौन शोषण सहित उनका हर तरह से दुरुपयोग किया जाता है।

 

ब्रिटिश पुलिस भी मुस्तैदी से काम नहीं करती। 2021 में, ब्रिटिश अख़बार “टाइम्स” की एक जांच से पता चला कि साउथ यॉर्कशायर पुलिस, बच्चों के यौन शोषण से जुड़े संदिग्धों के मामले में नियमित रूप से यह दर्ज नहीं कर रही थी कि शोषण करने वाले किस जाति, धर्म, देश या समुदाय के लोग थे। रॉदरहैम में, पुलिस ने 67 प्रतिशत मामलों में ऐसे विवरण लिखना ज़रूरी ही नहीं समझा। ग्रेटर मैनचेस्टर इलाके में तीन साल की अवधि में बलात्कार और यौन शोषण के मामलों के 52 प्रतिशत अपराधी “एशियाई” मूल के दर्ज किए गए, जिनमें सबसे बड़ा समूह पाकिस्तानियों का था, जबकि 38 प्रतिशत “श्वेत” (White) यानी गोरे दर्ज किए गए थे। इस रिपोर्ट के अनुसार, मैनचेस्टर की स्थानीय आबादी में 21 प्रतिशत लोग एशियाई मूल के हैं।

पाकिस्तानी लड़कियां भी सुरक्षित नहीं

पाकिस्तानी महिलाओं के एक स्थानीय समूह का कहना था कि पाकिस्तानी टैक्सी ड्राइवर और मकान-मालिक पाकिस्तानी लड़कियों को अपनी हवश का निशाना बनाते हैं। लेकिन, इसकी शिकायत करने पर अपनी शादी की संभावनाओं पर असर पड़ने के डर से लड़कियां पुलिस के पास जा कर कोई रिपोर्ट दर्ज करने से कतराती रही हैं।

 

इन सब तथ्यों के प्रकाश में, इसराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू का—भले मज़ाक के ही तौर पर— ब्रिटेन को “इस्लामिक रिपब्लिक ब्रिटेन” कहना क्या सही नहीं है?

रियल लाइफ में कब विश्वकप जीतेंगी चक दे गर्ल्स, 15 में से सिर्फ 8 बार करा है क्वालिफाय

शाहरुख खान अभिनीत फिल्म चकदे इंडिया को देखा जाए तो भारतीय महिला हॉकी टीम साल 2007 में ही विश्वकप जीत चुकी है। लेकिन असल मैदान यानि कि एस्ट्रो टर्फ पर भारतीय महिला हॉकी टीम अन्य हॉकी टीमों के आगे कमजोर नजर आती है। बीच बीच में आए संघर्ष के पलों को छोड़ दिया जाए तो 15 बार में से 8 बार तो चकदे गर्ल्स विश्वकप के लिए क्वालिफाय भी नहीं कर पाई हैं।

विश्व कप 1974 से 2022 तक , फ्रांस से स्पेन तक भारतीय महिला हॉकी टीम का सफर :

1974 फ्रांस :

अजिंदर कौर की कप्तानी में भारतीय टीम ने नीदरलैंड जैसी मजबूत टीम को ग्रुप चरण में हराकर सभी को चौंका दिया था। मैक्सिको और स्पेन को हराने वाली यह टीम बेल्जियम से एकमात्र पराजय के बाद ग्रुप में शीर्ष पर रही लेकिन सेमीफाइनल में अर्जेंटीना एक गोल से हार गई। कांस्य पदक के मुकाबले में उसे पश्चिम जर्मनी ने 2-0 से हराया।

भारतीय टीम भले ही पदक नहीं जीत पाई लेकिन इस ऐतिहासिक प्रदर्शन ने देश में महिला हॉकी को गंभीरता से लेने पर मजबूर किया। नीदरलैंड ने अर्जेंटीना को एक गोल से हराकर खिताब जीता और पूरे टूर्नामेंट में नीदरलैंड को हराया तो सिर्फ भारत ने।

1976 बर्लिन :

पहले विश्व कप में चौथे स्थान पर रहने के बावजूद भारतीय महिला हॉकी टीम आर्थिक दिक्कतों, संस्थागत प्रायोजन के अभाव और भारतीय महिला हॉकी संघ के पास कोष नहीं होने के कारण दूसरे विश्व कप में भाग नहीं ले सकी।

1978 मैड्रिड :

रूपा सैनी की कप्तानी में भारतीय महिला हॉकी टीम ने स्पेन में तीसरे विश्व कप में भाग लिया और दस टीमों में सातवें स्थान पर रही। पूल ए में भारत को एकमात्र जीत चेकोस्लोवाकिया पर मिली जबकि उसे नीदरलैंड और अर्जेंटीना ने हराया। कनाडा से भारत ने 1-1 से ड्रॉ खेला। क्रासओवर मुकाबले में भारत ने जापान से तीन गोल से हारने के बाद स्पेन को एक गोल से हराया।नीदरलैंड ने पश्चिम जर्मनी को हराकर खिताब जीता जबकि अर्जेंटीना तीसरे स्थान पर रहा।

1981 ब्यूनस आयर्स :

मॉस्को ओलंपिक 1980 में चौथे स्थान पर रहने के बावजूद भारतीय महिला हॉकी टीम अर्जेंटीना में 12 टीमों के विश्व कप में जगह नहीं बना सकी। राष्ट्रीय महासंघ के सामने आर्थिक और प्रशासनिक दिक्कतों के कारण भारतीय महिला टीम की भागीदारी उपमहाद्वीपीय टूर्नामेंटों और आमंत्रण टूर्नामेंटों तक ही सिमटकर रह गई थी।पश्चिम जर्मनी ने नीदरलैंड को हराकर खिताब जीता जबकि सोवियत संघ तीसरे स्थान पर रहा।

1983 कुआलालम्पुर :

एशियाई खेल 1982 की स्वर्ण पदक विजेता भारतीय टीम की विश्व कप में वापसी हुई लेकिन सलमा डिसिल्वा की कप्तानी वाली टीम ग्रुप चरण में पांच में से चार मैच हारकर और वेल्स से एक ड्रॉ के बाद आखिरी स्थान पर रही। क्लासीफिकेशन मैच में अर्जेंटीना से एक गोल से हारकर उसे बारह टीमों में 11वें स्थान से संतोष करना पड़ा।नीदरलैंड ने कनाडा को हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा।

1986 एम्सटेलवीन :

ब्यूनस आयर्स में 1985 में हुए विश्व कप क्वालीफायर में पांचवें स्थान पर रही भारतीय टीम टूर्नामेंट में जगह बनाने में नाकाम रही। भारत ने 1986 में सियोल एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता था।नीदरलैंड ने पश्चिम जर्मनी को हराकर चौथी बार खिताब जीता जबकि कनाडा तीसरे स्थान पर रहा।

1990 सिडनी :

इस विश्व कप का क्वालीफायर 1989 इंटर कांटिनेंटल कप दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम पर खेला गया जिसमें 12 टीमों में से शीर्ष चार को विश्व कप में जगह मिली। भारत ने पांच में से दो मैच जीते लेकिन तीन हारे। 15 गोल किये लेकिन नौ गंवाये और पूल बी में चौथे स्थान पर रहकर विश्व कप में जगह नहीं बना सकी।नीदरलैंड ने दक्षिण कोरिया को हराकर पांचवीं बार खिताब जीता और इंग्लैंड तीसरे स्थान पर रहा।

1994 डबलिन :

भारतीय टीम मामूली अंतर से इस विश्व कप में जगह बनाने से चूक गई। फिलाडेल्फिया में 1993 में हुए क्वालीफायर में 12 टीमों ने भाग लिया जिनमें से शीर्ष पांच को जगह मिली थी लेकिन भारतीय टीम छठे स्थान पर रही।आस्ट्रेलिया ने अर्जेंटीना को हराकर खिताब जीता जबकि अमेरिका तीसरे स्थान पर रहा।

1998 यूट्रेक्ट :

प्रीतम रानी सिवाच की कप्तानी में भारतीय महिला टीम लगातार तीन बार बाहर रहने के बाद विश्व कप में लौटी। पूल ए में पांचों मैच हारने के बाद भारतीय टीम बारहवें और आखिरी स्थान पर रही।आस्ट्रेलिया ने नीदरलैंड को 3 . 2 से हराकर खिताब जीता जबकि जर्मनी तीसरे स्थान पर रही।

2002 पर्थ :

जून 2002 में कठिन क्वालीफाइंग दौर में अमेरिका से हारने के बाद भारतीय टीम विश्व कप में जगह तो नहीं बना सकी लेकिन जुलाई अगस्त 2002 में मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर धूम मचा दी और यह जीत बाद में शाहरूख खान की फिल्म ‘चक दे इंडिया’ की प्रेरणा भी बनी।अर्जेंटीना ने नीदरलैंड को पेनल्टी शूटआउट में 4- 3 से हराकर खिताब जीता जबकि चीन तीसरे स्थान पर रहा।

2006 मैड्रिड :

इस विश्व कप में भारत की सुरिंदर कौर सर्वाधिक गोल करने वालों की सूची में नीदरलैंड की किम लामेर्स के साथ पांच गोल करके दूसरे स्थान पर रही। नीदरलैंड की ही सिल्विया कारेस ने छह गोल दागे थे।भारतीय टीम पूल ए में पांच में से चार मैच हारकर और एक ड्रॉ के बाद आखिरी स्थान पर और 12 टीमों में 11वें स्थान पर रही। नीदरलैंड ने आस्ट्रेलिया को हराकर खिताब जीता जबकि अर्जेंटीना तीसरे स्थान पर रहा।

2010 रोसारियो :

इस विश्व कप ने भारत को रानी रामपाल जैसा बेहतरीन मिडफील्डर दिया जिसने सात गोल दागकर सभी का ध्यान खींचा। पूल चरण में भारत को एकमात्र जीत जापान के खिलाफ मिली जबकि बाकी चार मैच हारकर टीम पांचवें स्थान पर रही। क्लासीफिकेशन मैच में दक्षिण अफ्रीका को 4-3 से हराकर भारत नौवे स्थान पर रहा।अर्जेंटीना ने नीदरलैंड को हराकर स्वर्ण पदक जीता जबकि इंग्लैंड तीसरे स्थान पर रहा।

2014 द हेग :

कुआलालम्पुर में 2013 में हुए एशिया कप के चैम्पियन को विश्व कप में जगह मिलनी थी लेकिन भारत सेमीफाइनल में दक्षिण कोरिया से हार गया। चीन को पेनल्टी शूटआउट में हराकर भारतीय टीम ने तीसरा स्थान हासिल किया लेकिन इस महाद्वीपीय क्वालीफायर से जापान ने विश्व कप में जगह बनाई।नीदरलैंड ने आस्ट्रेलिया को 2- 0 से हराकर सातवीं बार खिताब जीता जबकि अर्जेंटीना तीसरे स्थान पर रहा।

2018 लंदन :

रानी रामपाल की कप्तानी में भारतीय टीम इस विश्व कप के क्वार्टर फाइनल तक पहुंची। पूल बी में इंग्लैंड और अमेरिका से ड्रॉ खेलने के बाद आयरलैंड से हारी भारतीय टीम तीसरे स्थान पर रही। क्रॉसओवर में लालरेम्सियामी, वंदना कटारिया और नेहा गोयल के गोल से भारत ने इटली को हराया लेकिन क्वार्टर फाइनल में आयरलैंड से पेनल्टी शूटआउट में हार गई।नीदरलैंड ने आयरलैंड को 6-0 से हराकर खिताब जीता जबकि स्पेन तीसरे स्थान पर रहा।

2022 एम्सटेलवीन, नीदरलैंड और टेरासा, स्पेन :

सविता पूनिया की कप्तानी में भारतीय टीम ने स्पेन में पूल बी के मैचों में इंग्लैंड और चीन से ड्रॉ खेला लेकिन न्यूजीलैंड से हार गई। क्रॉसओवर में भारतीय टीम ने कनाडा को पेनल्टी शूटआउट में 3-2 से हराया और जापान को 3- से मात देकर चीन के साथ नौवे स्थान पर रही।नीदरलैंड ने अर्जेंटीना को 3-1 से हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा।

OTT Releases This Week: ‘कॉकटेल 2’, ‘भारत भाग्य विधाता’, ‘रीचर 4’ और बहुत कुछ…, सिर्फ आपके फेवरिट ओटीटी चैनल्स पर

OTT Releases This Week: अगस्त के दूसरे हफ़्ते में Netflix, Prime Video, JioHotstar, Lionsgate Play और दूसरे स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म पर कोर्टरूम ड्रामा, उलझे हुए रोमांस, राजनीतिक साज़िशें, सच्ची क्राइम कहानियाँ, साइकोलॉजिकल हॉरर और पसंदीदा शो की वापसी देखने को मिलेगी। सबसे आगे हैं ‘कॉकटेल 2’, जिसमें शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना एक रोमांटिक एक्सपेरिमेंट में शामिल होते हैं जो बुरी तरह बिगड़ जाता है; ‘भारत भाग्य विधाता’, जो 26/11 के मुंबई हमलों के दौरान सर्वाइवल ड्रामा पर आधारित है; और ‘रीचर सीज़न 4’, जिसमें फ़िलाडेल्फ़िया सबवे पर एक परेशान करने वाली घटना के बाद एलन रिचसन एक और बड़ी साज़िश में फंस जाते हैं।

फ़ुटबॉल मैनेजमेंट में दो दशकों के सफ़र पर जोस मोरिन्हो की नज़र से लेकर ‘आख़िरी सवाल’ में एक युवा स्कॉलर का अपने मशहूर मेंटर को सबके सामने चुनौती देने तक, यहां 10 अगस्त से 14 अगस्त के बीच आने वाली OTT रिलीज़ की पूरी और बदली हुई लिस्ट दी गई है।

कॉकटेल 2 – 14 अगस्त (नेटफ्लिक्स)

‘कॉकटेल 2’ होमी अदजानिया की 2012 की रोमांटिक ड्रामा फ़िल्म का सीक्वल है। यह फ़िल्म कुणाल, दिया और एली के इर्द-गिर्द घूमती है। ये तीनों लोग यह महसूस करते हैं कि कैसे एक मासूम सा रिलेशनशिप एक्सपेरिमेंट उनके बीच के इमोशनल बैलेंस को कितनी तेज़ी से बिगाड़ सकता है। शाहिद कपूर ने कुणाल का रोल किया है, जो एक शेफ है और आर्किटेक्ट दिया (रश्मिका मंदाना) के साथ लंबे समय से रिलेशनशिप में है। शादी के बढ़ते दबाव को नज़रअंदाज़ करते हुए यह कपल छुट्टी मनाने सिसिली जाता है, जहां उनकी मुलाक़ात दिया की आज़ाद ख्यालों वाली यूनिवर्सिटी की दोस्त एली (कृति सेनन) से होती है। इसके बाद जो होता है, उसकी शुरुआत लगभग एक मज़ाक के तौर पर होती है। दिया, एली से कुणाल की वफ़ादारी परखने के लिए उससे फ़्लर्ट करने को कहती है। समस्या तब शुरू होती है जब एली सचमुच कुणाल को पसंद करने लगती है और फ़्लर्टिंग महज़ दिखावा नहीं रह जाती। जिस चीज़ का मकसद दिया को भरोसा दिलाना था, वह असल में इनसिक्योरिटी, आकर्षण और उन असहज सवालों को सामने ले आती है कि जिस रिश्ते को बचाने में उन्होंने सालों लगाए हैं, उस पर उन्हें असल में कितना भरोसा है।

भारत भाग्य विधाता – 14 अगस्त (ZEE5)

मुंबई में हुए 26/11 के आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि पर बनी ‘भारत भाग्य विधाता’ बड़े जियोपॉलिटिकल (भू-राजनीतिक) परिदृश्य से ध्यान हटाकर उन आम मेडिकल कर्मचारियों पर फोकस करती है, जो अचानक खुद को युद्ध जैसी स्थिति में पाते हैं। यह सर्वाइवल ड्रामा कामा और एल्ब्लेस हॉस्पिटल की नर्सों और दूसरे स्टाफ सदस्यों पर केंद्रित है, जब उनके आस-पास हिंसा भड़क उठती है। मरीज़ों, साथियों और आम नागरिकों की उन पर निर्भरता के कारण, मेडिकल कर्मचारियों को अपना काम जारी रखना पड़ता है, भले ही उन्हें पता हो कि उनकी अपनी जान को तुरंत खतरा है। यह फिल्म अपने किरदारों को पारंपरिक एक्शन हीरो में बदले बिना साहस को दिखाती है। इसके बजाय, यह उन पल-भर में लिए गए फैसलों, डर और ज़िम्मेदारी की भावना को उजागर करती है, जिसने आम प्रोफेशनल्स को हमले के दौरान सैकड़ों लोगों की सुरक्षा के लिए प्रेरित किया।

रीचर सीजन 4 – 12 अगस्त (प्राइम वीडियो)

एलन रिचसन, ली चाइल्ड के 13वें ‘रीचर’ नॉवेल ‘गॉन टुमॉरो’ पर आधारित सीज़न में जैक रीचर के रोल में लौट रहे हैं। जहाँ किताब की कहानी न्यूयॉर्क में सेट है, वहीं सीरीज़ में कहानी को फिलाडेल्फिया ले जाया गया है, जहां सबवे में एक अचानक हुई मुलाकात रीचर को एक और साज़िश में फंसा देती है। जब वह ट्रेन में एक परेशान महिला को देखते हैं, तो रीचर को अंदाज़ा हो जाता है कि कुछ गड़बड़ है। इसके बाद जो होता है, वह उन्हें एक ऐसी जाँच में खींच लेता है जिसके नतीजे सिर्फ़ एक यात्री या एक घटना से कहीं ज़्यादा गहरे हैं। जैसे-जैसे वह मामले की गहराई में जाते हैं, यह केस ऐसे ताकतवर लोगों की ओर इशारा करने लगता है जो पर्दे के पीछे से घटनाओं को बदलने की ताकत रखते हैं। मारिया स्टेन ‘नीग्ली’ के रोल में लौट रही हैं, जबकि सिडेल नोएल, एग्नेज़ मो, अंगगुन, केविन कॉरिगन, मार्क ब्लूकास, कैथलीन रॉबर्टसन और क्रिस्टोफर मार्क्वेट चौथे सीज़न की कास्ट में शामिल हो रहे हैं।

आखिरी सवाल – 14 अगस्त (लायंसगेट प्ले)

नमाशी चक्रवर्ती ने विक्की हेगड़े का किरदार निभाया है, जो एक होनहार लेकिन गुस्सैल स्कॉलर है। अपने मेंटर के साथ उसका एकेडमिक झगड़ा इतना बढ़ जाता है कि यह देश भर में चर्चा का विषय बन जाता है। संजय दत्त ने प्रोफेसर गोपाल नाडकर्णी का रोल किया है, जो एक जाने-माने इंटेलेक्चुअल हैं और RSS पर विक्की की थीसिस को खारिज कर देते हैं। इसके जवाब में विक्की, नाडकर्णी पर संस्थागत भेदभाव का सार्वजनिक आरोप लगाता है। यूनिवर्सिटी के अंदर का यह मामूली झगड़ा टीवी नेटवर्क और राजनीतिक समूहों के हाथ लग जाता है, जिससे मेंटर और स्टूडेंट टीवी पर होने वाली वैचारिक लड़ाई में एक-दूसरे के विरोधी बन जाते हैं। लेकिन विक्की का यह टकराव सिर्फ़ एकेडमिक निराशा की वजह से नहीं है। जैसे-जैसे उसके तीखे सवाल सार्वजनिक बहस की परतें खोलते हैं, एक बहुत ही निजी मकसद सामने आता है, जो आखिरकार रिसर्चर पल्लवी मेनन के रहस्यमय तरीके से गायब होने से जुड़े दशकों पुराने राज़ की ओर ले जाता है। इसमें अमित साध, समीरा रेड्डी, त्रिधा चौधरी और नीतू चंद्रा श्रीवास्तव भी हैं।

माई ब्रिलियंट करियर – 13 अगस्त (नेटफ्लिक्स)

माइल्स फ्रैंकलिन के 1901 के मशहूर ऑस्ट्रेलियाई नॉवेल पर पहली बार टेलीविज़न सीरीज़ बन रही है। इससे पहले 1979 में इस पर एक फ़िल्म बनी थी, जिसमें जूडी डेविस और सैम नील ने काम किया था। फिलिपा नॉर्थईस्ट ने सिबिला मेल्विन का किरदार निभाया है, जो 20वीं सदी की शुरुआत में ग्रामीण ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली एक समझदार और बेहद आज़ाद-ख्याल युवा महिला है। उसका परिवार शादी को ही उसके लिए सबसे सही भविष्य मानता है, लेकिन सिबिला लेखिका बनने के लिए पक्का इरादा कर चुकी है और दूसरों की तय की गई ज़िंदगी को चुपचाप स्वीकार करने से इनकार कर देती है। अमीर पड़ोसी हैरी बीचम (क्रिस्टोफर चुंग) के आने से उसकी यह सोच उलझन में पड़ जाती है। यह सीरीज़ सिर्फ़ करियर और रोमांस के बीच चुनाव की बात नहीं करती, बल्कि यह दिखाती है कि ऐसी दुनिया में, जहां महत्वाकांक्षा के बजाय आज्ञाकारिता को इनाम मिलता है, एक महिला के लिए आज़ाद होने की क्या कीमत चुकानी पड़ती है।

मोरिन्हो – 11 अगस्त (नेटफ्लिक्स)

यह तीन-भाग वाली डॉक्यूमेंट्री तब रिलीज़ हुई जब जोस मोरिन्हो ने रियल मैड्रिड में अपना दूसरा कार्यकाल शुरू किया। इसमें फुटबॉल के सबसे मशहूर, आक्रामक और चर्चा में रहने वाले मैनेजरों में से एक के दो दशकों से ज़्यादा के करियर की कहानी दिखाई गई है। दो साल तक शूट की गई यह सीरीज़ 2004 में FC पोर्टो की शानदार चैंपियंस लीग जीत से शुरू होती है और फिर मोरिन्हो के चेल्सी, इंटर मिलान, रियल मैड्रिड, मैनचेस्टर यूनाइटेड, टोटेनहम, रोमा और फेनरबाहचे के साथ बिताए समय को दिखाती है। यह कहानी सिर्फ़ मोरिन्हो के नज़रिए से ही नहीं, बल्कि उन फुटबॉल हस्तियों के ज़रिए भी बताई गई है जिन्होंने उनके साथ काम किया, उनके खिलाफ़ खेले या उन्हें करीब से देखा। सर एलेक्स फर्ग्यूसन, जॉन टेरी, इकर कैसिलास, डिडियर ड्रोग्बा, ज़्लाटन इब्राहिमोविच, मार्सेलो, सैमुअल एटो, जेवियर ज़ानेटी, फ्रैंक लैम्पार्ड और पेट्र चेक जैसे लोग इस डॉक्यूमेंट्री में शामिल हैं।

द ट्रेटर्स सीज़न 2 – 13 अगस्त (प्राइम वीडियो)

करण जौहर धोखे, हेराफेरी और रणनीतिक संदेह से भरे एक और सीज़न की मेज़बानी करने लौट रहे हैं, जहां 20 प्रतिभागी एक ऐसे खेल में प्रवेश करते हैं जहाँ सहयोग अनिवार्य है, भले ही विश्वासघात खेल का अभिन्न अंग हो। प्रतिभागी आपस में संबंध बनाते हैं, आरोप लगाते हैं और अंतिम पुरस्कार के लिए प्रतिस्पर्धा करते हुए दैनिक निष्कासन से बचने का प्रयास करते हैं। कोई भी दूसरे खिलाड़ी की वफादारी को हल्के में नहीं ले सकता, और हर बातचीत रणनीति का काम कर सकती है। दूसरा सीज़न एक बार फिर सामाजिक अवलोकन को खेल के केंद्र में रखता है, यह परखते हुए कि क्या प्रतिभागी गलत भरोसे के कारण घर भेजे जाने से पहले धोखे को पहचान सकते हैं।

हैमस्ट्रिंग चोट के कारण The Hundred से बाहर हुई जेमिमाह रॉड्रिग्स

Jemima Rodrigues

भारतीय बल्लेबाज़ जेमिमाह रॉड्रिग्स हैमस्ट्रिंग चोट के कारण द हंड्रेड से बाहर हो गई हैं।सदर्न ब्रेव ने उन्हें लगभग 76 लाख रूपए में अपनी टीम में अनुबंधित किया था और वह इस सीज़न में टीम की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में से एक रही हैं। जेमिमाह ने छह पारियों में 143 रन बनाए हैं, जिसकी बदौलत ब्रेव महिला प्रतियोगिता में 20 अंकों के साथ शीर्ष स्थान पर मौजूद ट्रेंट रॉकेट्स की बराबरी पर है। बेहतर नेट रन रेट के कारण रॉकेट्स पहले स्थान पर हैं। 25 वर्षीय जेमिमाह को इस दौरान दो बार प्लेयर ऑफ़ द मैच का पुरस्कार भी मिला।

उनका बाहर होना ब्रेव के लिए बड़ा झटका है। जेमिमाह इस टूर्नामेंट की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों में से एक हैं। ब्रेव के पास सीधे फ़ाइनल में जगह बनाने के लिए अभी दो मैच बाक़ी हैं। उन्हें अपने आख़िरी लीग मुकाबले मैनचेस्टर सुपर जायंट्स और ट्रेंट रॉकेट्स के ख़िलाफ़ खेलने हैं।

यह भारत के लिए भी चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि इस महीने के अंत में UAE में महिला एशिया कप शुरू होना है। जेमिमाह की हैमस्ट्रिंग चोट कितनी गंभीर है, इसका अभी पता नहीं चल पाया है। संभव है कि उनके चोट को बढ़ने से रोकने के लिए यह एहतियाती फ़ैसला लिया गया हो। भारत का अभियान 30 अगस्त को दुबई में थाईलैंड के ख़िलाफ़ मैच से शुरू होगा, जो अब 22 दिन दूर है।

ब्रेव ने जेमिमाह की जगह ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर चार्ली नॉट को टीम में शामिल किया है। नॉट इससे पहले 2024 संस्करण में भी ब्रेव के लिए खेल चुकी हैं। इंग्लैंड में इस T20 सीज़न में उनका प्रदर्शन शानदार रहा है। उन्होंने द ब्लेज़ के लिए वाइटैलिटी ब्लास्ट विजेता अभियान में 404 रन बनाए और 27 विकेट लिए, जो टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा थे।

लगातार दूसरे Commonwealth मेडल की तलाश में श्रीशंकर पहुंचे ऊंची कूद के फाइनल में

नीरज चोपड़ा 31 जुलाई को राष्ट्रमंडल खेलों में शिरकत करेंगे लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि ट्रैक एंड फील्ड यानि कि एथलेटिक्स में भारत को पहले ही अपना पहला पदक मिल जाए। ऊंची कूद में श्रीशंकर ने अपने पहले ही प्रयास में 8.01 मीटर का क्वालिफिकेशन मार्क को पार कर लिया है।  इस स्पर्धा का फाइनल 29 जुलाई देर रात 11.54 बजे खेला जाएगा।

गौरतलब है कि श्रीशंकर ही वह एथलीट है जिन्होंने पिछले संस्करण में 44 साल बाद इस स्पर्धा में भारत को मेडल दिलाया था। उनसे पहले 1978 में सुरेश बाबू ने कांस्य पदक जीता था।वह बाबू, अंजू बॉबी जॉर्ज (2002 में मैनचेस्टर खेलों में कांस्य), और एमए प्रजुषा (2010 में नयी दिल्ली खेलों में रजत) के बाद इन खेलों में लंबी कूद में पदक जीतने वाले चौथे भारतीय खिलाड़ी हैं।

पिछली बार वह मामूली अंतर से गोल्ड मेडल चूक गए थे और उनको सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा था। लंबे कद के इस एथलीट के लिए पदक जीतना आसान नहीं रहा था क्योंकि तीसरे प्रयास में बाद 7.84 मीटर कूद लगाकर छठे स्थान पर खिसक गए थे। इसके बाद उन्होंने अच्छी वापसी की और चौथे प्रयास में 8.08 मीटर कूद लगाई जिससे वह ऐतिहासिक रजत पदक हासिल करने में सफल रहे थे।

श्रीशंकर ने कहा, ‘‘हर एथलीट इस दौर से गुज़रा है। (वर्तमान ओलंपिक चैंपियन) मिल्टियाडिस टेंटोग्लू ने यूनान में मुझसे कहा कि वह भी कई बार छठे और सातवें स्थान पर आए हैं और फिर उन्होंने तोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता। यह कदम दर कदम आगे बढ़ने की प्रक्रिया है।’’

Vaibhav Sooryavanshi: ड्रॉप होने के बाद पहली बार बोले वैभव सूर्यवंशी, बोले- खुद पर पूरा भरोसा है

भारत और जिम्बाब्वे के बीच 3 मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला 23 जुलाई को खेला जाएगा। वैभव सूर्यवंशी को आयरलैंड और इंग्लैंड सीरीज के बाद जिम्बाब्वे सीरीज में भी मौका मिला है। वैभव ने इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे मुकाबले में डेब्यू का मौका मिला था। तीन मैचों में खेलने के बाद वैभव को एक मैच में ड्रॉप कर दिया गया था। वहीं हाल ही में 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने अपने डेब्यू और इंग्लैंड के खिलाफ आखिरी मुकाबले में ड्रॉप किए जाने पर चुप्पी तोड़ी है।

युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी अभी पूरी तरह जिम्बाब्वे के खिलाफ होने वाले पहले टी20 मुकाबले पर ध्यान लगा रहे हैं। शुरुआती चुनौतियों और टीम में अपनी जगह को लेकर उठे सवालों के बावजूद उन्होंने अपना फोकस बनाए रखा है और अब उनका लक्ष्य भारतीय टीम के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन करना है।

हर मैच में देना है 100 प्रतिशत

15 वर्षीय युवा ओपनर वैभव सूर्यवंशी ने कहा कि पिछले चार महीने उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहे, लेकिन इन एक्सपीरिएंस ने उन्हें मजबूत बनाया। उन्होंने माना कि भारतीय टीम में शुरुआत आसान नहीं रही, फिर भी उनका आत्मविश्वास पहले जैसा कायम है। सूर्यवंशी ने BCCI से कहा, “हां, पिछले चार महीनों में कई उतार-चढ़ाव आए हैं। यह क्रिकेट का हिस्सा है और ऐसा आगे भी होता रहेगा। मुझे सिर्फ अपनी प्रक्रिया पर भरोसा रखते हुए आगे बढ़ना है और हर मैच में टीम के लिए अपना 100 प्रतिशत देना है।”

वैभव ने तोड़ा सचिन का रिकॉर्ड

आईपीएल 2026 में अपने शानदार प्रदर्शन के बाद वैभव सूर्यवंशी को आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय टी20 टीम में चुना गया। आयरलैंड के खिलाफ उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में दूसरे टी20 मैच में उन्होंने इंटरनेशल क्रिकेट में डेब्यू किया। इसी के साथ 15 वर्षीय वैभव भारत के सबसे कम उम्र में इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ी बन गए और उन्होंने सचिन तेंदुलकर का पुराना रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया।

वैभव ने खेल पाए बड़ी पारी

वैभव को लगातार चार टी20 मैचों में मौका मिला, लेकिन वह बड़ी पारी नहीं खेल पाए। इसके बाद संजू की वापसी पर उन्हें अंतिम मैच से बाहर कर दिया गया। सूर्यवंशी ने इस कठिन दौर से बाहर निकलने का श्रेय अपने सपोर्ट सिस्टम को दिया। उन्होंने कहा, “मुझे जिस तरह की मदद और मार्गदर्शन की जरूरत होती है, कोच हमेशा उसे उपलब्ध कराते हैं। जिस तरह की प्रैक्टिस चाहिए, वह भी मुझे मिल रही है। मैं अच्छा महसूस कर रहा हूं और मेरा आत्मविश्वास भी बरकरार है।” अब जिम्बाब्वे दौरे के साथ वह एक बार फिर उस मैदान पर लौट रहे हैं, जो उनके युवा क्रिकेट करियर में खास महत्व रखता है।

इसी मैदान पर खेली थी बड़ी पारी

उन्होंने कहा, “यह मैदान मेरे लिए बहुत खास है। सिर्फ चार महीने पहले हमने यहां अंडर-19 वर्ल्ड कप का फाइनल खेला था और खिताब जीता था। भारत का प्रतिनिधित्व करना हर खिलाड़ी का सपना होता है और यह मेरे लिए बेहद यादगार पल है।” उन्होंने आगे कहा, “मैं फिर उसी मैदान पर खेलने जा रहा हूं, जहां हमने चार महीने पहले अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रचा था। इस मैदान पर दोबारा उतरना एक अलग ही एहसास है और मैं इसका पूरा आनंद ले रहा हूं।” उन्होंने कहा, “यहां की पिच और हालात के बारे में मुझे अच्छी जानकारी है, क्योंकि अंडर-19 वर्ल्ड कप के दौरान मैं यहां खेल चुका हूं। उस टूर्नामेंट से जो अनुभव मिला, उसे अब आने वाले मैचों में इस्तेमाल करने की कोशिश करूंगा और अच्छा प्रदर्शन करना चाहूंगा।”

प्रैक्टिस पर पूरा भरोसा

उन्होंने आगे कहा, “मैं अपनी प्रैक्टिस और अपने खेल पर पूरा भरोसा रखूंगा। टीम के लिए जितना भी योगदान दे सकूं, वह देने की कोशिश करूंगा। मैंने इस मैदान पर दो मैच खेले हैं और दोनों मेरे लिए अच्छे रहे। अब कोशिश होगी कि उसी प्रदर्शन को आगे भी जारी रखूं।” महज चार महीने पहले वैभव सूर्यवंशी ने भारत को अंडर-19 विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभाई थी। फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने सिर्फ 80 गेंदों में 175 रन की विस्फोटक पारी खेली थी, जिसकी बदौलत भारत ने खिताब अपने नाम किया।

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विश्वकप ही नहीं गोल्डन बॉल और ग्लब्स समेत कई अवार्ड मिले स्पेन को

Rodri

स्पेन के गोलकीपर रो़ड्री ने फीफा विश्वकप 2026 में सारे मैचों में एक दीवार का काम किया। स्पेन की पूरी टीम ने ग्रुप स्टेज से लेकर फाइनल तक सिर्फ एक गोल ही खाया। यह गोल बेल्जियम के खिलाफ आया। इसका काफी कुछ श्रेय स्पेन के गोलकीपर उनाई सिमोन को जाता है।

स्पेन ने रविवार को न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर अपना दूसरा पुरुष विश्व कप खिताब जीतकर व्यक्तिगत पुरस्कारों की हैट्रिक अपने नाम की।स्पेन फुटबॉल टीम के कप्तान और मिडफील्डर रोड्रिगो हर्नाडेज कैस्केन्टे (रोड्री) ने टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के रूप में गोल्डन बॉल का पुरस्कार जीता, उनाई सिमोन ने गोलकीपर के रूप में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए गोल्डन ग्लव जीता, और पाउ कुबार्सी ने अपने साथी 19 वर्षीय टीम के साथी लामिन यामल को हराकर सर्वश्रेष्ठ युवा खिलाड़ी का पुरस्कार अपने नाम किया।

स्पेन के गोलकीपर उनाई साइमन ने ना केवल इस विश्वकप बल्कि पिछले विश्वकप में भी कई मैचों तक स्पेन को गोल खाने से रोका था।साइमन ने दो विश्वकपों को मिलाकर प्रतिद्वंदी टीम को 519 मिनट तक गोल करने से रोका है। उन्होंने 36 साल पुराने इटनी के वाल्टर जेंगा के 517 मिनट तक गोल बचाने के रिकॉर्ड को पार किया।

पुरस्कार के बाद रोडी ने कहा, “यह टीम अविश्वसनीय है। हम दो बार विश्व चैंपियन बने हैं। यह एक कठिन उपलब्धि है, जिसे हासिल करना सबसे मुश्किल है। और हमने अर्जेंटीना जैसी टीम के खिलाफ यह खिताब जीता।”उन्होंने कहा, “मुझे गर्व है और मैं चाहता हूं कि आने वाली पीढ़ियां देखें कि यह संभव है। एक खिलाड़ी जो आसमान छूता है और फिर नीचे में गिर जाता है, वह फिर से उठने में भी सक्षम होता है। यह विपरीत परिस्थितियों पर विजय पाने का एक उदाहरण है, और आपको विश्वास रखना होगा। सच कहूं तो, यह अविश्वसनीय है।”

मैनचेस्टर सिटी के इस मिडफील्डर ने टूर्नामेंट में एक भी गोल नहीं किया, लेकिन उनके पास देने और गेंद पर नियंत्रण रखने की क्षमता स्पेन की खेल शैली का अहम हिस्सा है। वे विश्व कप, यूईएफए चैंपियंस लीग और बैलोन डी’ओर जीतने वाले सिर्फ 11वें खिलाड़ी बने।

एंडी बर्नहैम ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बने:10 साल में सातवें PM; पाकिस्तानी मूल की शबाना महमूद वित्त मंत्री बन सकती हैं

ब्रिटेन में सोमवार को एंडी बर्नहैम ने नए प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया। वह पिछले 10 साल में ब्रिटेन के सातवें प्रधानमंत्री बने हैं। उन्होंने देश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव का वादा करते हुए कहा है कि उनकी सरकार लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं, जैसे महंगाई और खराब सार्वजनिक सेवाओं, पर सबसे ज्यादा ध्यान देगी। पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर विदाई भाषण देने के बाद किंग चार्ल्स को अपना इस्तीफा सौंपा। इसके बाद ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर एंडी बर्नहैम ने किंग से मुलाकात की और औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। 56 वर्षीय बर्नहैम ऐसे समय सत्ता में आए हैं, जब ब्रिटेन कई चुनौतियों से जूझ रहा है। इनमें धीमी आर्थिक वृद्धि, खराब प्रदर्शन करने वाली सार्वजनिक सेवाएं और बुनियादी सुविधाओं की समस्याएं प्रमुख हैं। सरकार संभालने के साथ ही उन्हें अपनी नई कैबिनेट का भी गठन करना है। नई कैबिनेट पहली चुनौती होगी प्रधानमंत्री बनने के बाद बर्नहैम की पहली बड़ी चुनौती अपनी कैबिनेट का गठन होगी। खास तौर पर वित्त मंत्री की नियुक्ति पर सभी की नजर रहेगी, क्योंकि पहले भी प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के बीच मतभेद कई सरकारों के लिए मुश्किल बने हैं। ऊर्जा सुरक्षा मंत्री एड मिलिबैंड को पहले इस पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन अब गृह मंत्री शबाना महमूद का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। शबाना पाकिस्तानी मूल की नेता हैं। हालांकि बर्नहैम ने कहा है कि उन्होंने अभी अपनी टीम पर अंतिम फैसला नहीं लिया है और अटकलों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। पहला फैसला- डिजिटल पहचान पत्र लागू करने का फैसला रद्द किया बर्नहैम सरकार के शुरुआती फैसलों पर भी सबकी नजर रहेगी। सरकार ने पहले ही एक अहम कदम उठाते हुए सभी कर्मचारियों के लिए डिजिटल पहचान पत्र लागू करने की योजना रद्द कर दी है। इस की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर सरकार ने सितंबर 2025 में की थी। इसका मकसद यह था कि देश में काम करने वाले हर कर्मचारी की पहचान और उसके काम करने के कानूनी अधिकार की डिजिटल तरीके से पुष्टि की जा सके। सरकार का मानना था कि इससे फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कम होगा और अवैध प्रवासन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। हालांकि इस योजना का शुरुआत से ही विरोध होने लगा। आलोचकों का कहना था कि इससे सरकार नागरिकों की निजी जानकारी पर जरूरत से ज्यादा कंट्रोल हासिल कर सकती है। डेटा सुरक्षा और निजता को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए। बर्नहैम के सामने 5 बड़ी चुनौतियां 1. सुस्त अर्थव्यवस्था को रफ्तार देना ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पिछले कई वर्षों से कमजोर बनी हुई है। 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी, ब्रेक्जिट और कोविड-19 महामारी के कारण लोगों का जीवन स्तर लगातार प्रभावित हुआ है। बर्नहैम ने वादा किया है कि वह आम लोगों की जिंदगी में वास्तविक सुधार लाएंगे। उन्होंने टैक्स न बढ़ाने का भी वादा किया है। 2. यूक्रेन, मिडिल ईस्ट और अमेरिका के साथ रिश्तों में संतुलन बर्नहैम घरेलू मुद्दों पर ज्यादा ध्यान देना चाहते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात उन्हें ऐसा करने की पूरी छूट नहीं देंगे। यूक्रेन युद्ध अभी जारी है और मिडिल ईस्ट में भी तनाव बढ़ा हुआ है। माना जा रहा है कि इन दोनों मुद्दों पर ब्रिटेन की विदेश नीति में बहुत बड़ा बदलाव नहीं होगा, क्योंकि NSA जोनाथन पॉवेल अपने पद पर बने रह सकते हैं। साथ ही अमेरिका के साथ ब्रिटेन के रिश्ते भी नई सरकार के लिए अहम होंगे। पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ अच्छे संबंध बनाने की कोशिश की थी, लेकिन ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों का खुलकर समर्थन नहीं करने के कारण दोनों नेताओं के बीच तनाव पैदा हो गया था। 3. रक्षा बजट बढ़ाना और उसके लिए पैसा जुटाना रक्षा खर्च बढ़ाने को लेकर मतभेद की वजह से पिछले महीने कीर स्टार्मर सरकार के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने इस्तीफा दे दिया था। उनका कहना था कि सेना के लिए प्रस्तावित बजट बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है। इसके कुछ हफ्तों बाद स्टार्मर ने अगले चार वर्षों में रक्षा बजट में 15 अरब पाउंड (करीब 1.9 लाख करोड़ रुपए) की बढ़ोतरी का ऐलान किया। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि एक्स्ट्रा पैसा कहां से आएगा और किन सरकारी विभागों के बजट में कटौती कर इसकी भरपाई की जाएगी। 4. इमिग्रेशन पर सख्त नीति और राजनीतिक संतुलन हाल के वर्षों में ब्रिटेन में शुद्ध प्रवासन (नेट माइग्रेशन) में काफी गिरावट आई है। इसकी वजह पिछली कंजर्वेटिव सरकार द्वारा लागू की गई सख्त इमिग्रेशन नीतियां हैं। इसे लेबर सरकार ने भी जारी रखा है। मई में एंडी बर्नहैम ने माना था कि इमिग्रेशन में कमी आई है, लेकिन उन्होंने कहा कि इसे और कम करने की जरूरत है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह पूर्व गृह मंत्री शबाना महमूद की सख्त इमिग्रेशन नीति को बड़े पैमाने पर जारी रखेंगे। हालांकि लेबर पार्टी के कई सांसद और उदारवादी समर्थक इसका विरोध करते रहे हैं। ऐसे में बर्नहैम के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी पार्टी के भीतर विरोध के बीच संतुलन बनाना होगी। 5. बढ़ता कल्याण और पेंशन खर्च ब्रिटेन में सरकार का सामाजिक कल्याण (वेलफेयर) पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसकी एक बड़ी वजह कामकाजी उम्र के उन लोगों की बढ़ती संख्या है, जो मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के आधार पर सरकारी सहायता ले रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या युवाओं की है, जो बेरोजगार हैं। हालांकि सामाजिक सुरक्षा पर होने वाले कुल सरकारी खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा सेवानिवृत्त लोगों पर जाता है। सरकारी पेंशन और दूसरी सहायता योजनाओं पर कुल सामाजिक सुरक्षा बजट का आधे से ज्यादा हिस्सा खर्च होता है। अगर बर्नहैम इस खर्च को नियंत्रित कर पाते हैं, तो उनके पास सामाजिक आवास जैसी दूसरी योजनाओं पर ज्यादा पैसा खर्च करने का मौका मिलेगा। लेकिन यह आसान नहीं होगा। कीर स्टार्मर ने भी वेलफेयर खर्च घटाने की कोशिश की थी, लेकिन उनकी ही पार्टी के सांसदों के विरोध के बाद उन्हें अपने फैसले वापस लेने पड़े थे। यही वजह है कि बर्नहैम के लिए यह आर्थिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी सबसे कठिन चुनौतियों में से एक होगी।

Stocks to Watch: Sensex की एक्सपायरी पर ग्रीन शुरुआत! Vedanta, Infosys और Indigo समेत इन स्टॉक्स पर फोकस

Stocks to Watch: अधिक एशियाई बाजारों में रौनक के बीच आज गिफ्ट निफ्टी से घरेलू मार्केट में ग्रीन शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 99.00 प्वाइंट्स यानी 0.41% की गिरावट के साथ 23.977.00 पर है। चूंकि आज सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी है तो मार्केट में तेज हलचल दिख सकती है। एक कारोबारी दिन पहले 08 जुलाई को सेंसेक्स (Sensex) 1677.12 प्वाइंट्स यानी 2.15% की फिसलन के साथ 76,503.60 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 516.65 प्वाइंट्स यानी 2.12% की गिरावट के साथ 23,882.04 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर रहेगी नजर

Infosys

इन्फोसिस ने नॉर्वे के सबसे बड़े बैंक डीएनबी बैंक एएसए के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने का ऐलान किया है। इसके तहत यह नाइस एक्टिमाइज एक्स-साइट एंटरप्राइज (NICE Actimize X-Sight Enterprise) प्लेटफॉर्म के जरिए बैंक के फाइनेंशियल क्राइम (FinCrime) ऑपरेशन्स को नए जमाने के हिसाब से बनाएगी।

Vedanta

ईडी ने ने वेदांता और इसकी सब्सिडियरी हिंदुस्तान जिंक के कुछ ऑफिसों का दौरा किया।

Bliss GVS Pharma

महाराष्ट्र के पालघर में स्थित ब्लिस जीवीएस फार्मा की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को डब्ल्यूएचओ से इंस्पेक्शन क्लोजर रिपोर्ट मिला है। इस यूनिट को डब्ल्यूएचओ ने GMP (गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज) स्टैंडर्ड्स के पैमाने पर खरा पाया।

Dhanuka Agritech

धनुका एग्रीटेक का ₹70 करोड़ तक का शेयर बायबैक ऑफर 4 जून को खुलेगा। इस बायबैक ऑफर के तहत कंपनी ने प्रति शेयर ₹1,400 के भाव पर 5 लाख तक शेयर खरीदने का लक्ष्य रखा है।

Advait Energy Transitions

अद्वैत एनर्जी ट्रांजिशन्स की सब्सिडियरी अद्वैत बीईएसएस भेसान ने गुजरात ऊर्जा विकास निगम (GUVNL) के साथ बैटरी एनर्जी स्टोरेज परचेज एग्रीमेंट (BESPA) किया है। यह एग्रीमेंट 150 MW/300 MWh की कुल क्षमता वाले स्टैंडअलोन बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) प्रोजेक्ट के डेवलपमेंट के लिए है।

John Cockerill India

जॉन कॉकरिल इंडिया को जेएसडब्ल्यू विजयनगर मेटालिक्स से एक सीआरएनओ प्रोजेक्ट के लिए ₹1,250-₹1,300 करोड़ का ऑर्डर मिला है।

Canara Bank

केनरा बैंक के बोर्ड ने अगले वित्त वर्ष 2027 के लिए बैंक को डेट इंस्ट्रूमेंट्स के जरिए ₹8,500 करोड़ तक जुटाने की मंजूरी दी है। बैंक की योजना बेसल III-कम्प्लायंट एडिशनल टियर-I बॉन्ड्स के जरिए ₹4,500 करोड़ और बेसल III-कम्प्लायंट टियर-II बॉन्ड्स के जरिए ₹4,000 करोड़ जुटाने की है।

Adani Ports and Special Economic Zone

अडानी पोर्ट्स ने मई 2026 में 48.3 MMT कार्गो वॉल्यूम हैंडल किया जो सालाना आधार पर 16% अधिक रहा इसे लिक्विड और कंटेनर्स से सपोर्ट मिला। मई 2026 में लॉजिस्टिक्स रेल वॉल्यूम 48,170 TEUs रहा, जो सालाना आधार पर 19% कम रहा।

InterGlobe Aviation (Indigo)

इंटरनेशनल एयरस्पेस में लगातार रुकावटों और लागत से जुड़ी चुनौतियों के चलते इंडिगो ने 31 अगस्त 2026 से मैनचेस्टर आने-जाने वाली अपनी फ्लाइट्स को कुछ समय के लिए बंद करने का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद इंडिगो ने डैम्प/वेट लीज पर लिए गए छह बोइंग 787-9 ड्रीमलाइनर जहाजों में से एक नोर्स अटलांटिक एयरवेज को वापस करने की योजना बना रही है।

बल्क और ब्लॉक डील्स

Alkem Laboratories

प्रमोटर ग्रुप की जयंती सिन्हा ने अल्केम लैबोरेटरीज में अपनी पूरी 1.04% हिस्सेदारी (12.38 लाख शेयर) ₹643.87 करोड़ में बेच दी। इसके अलावा संप्रदा एंड ननहमती सिंह फैमिली ट्रस्ट ने 5.5 लाख शेयर ₹286 करोड़ में बेचे। ये लेन-देन प्रति शेयर ₹5,200 के भाव पर हुए। दूसरी तरफ प्रमोटर्स की बेची हुई हिस्सेदारी को नौ देशी-विदेशी निवेशकों- ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड, HDFC म्यूचुअल फंड, DSP म्यूचुअल फंड, BNP पारिबा आर्बिट्राज, सोसिएट जेनरल, निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड, मॉर्गन स्टेनली एशिया सिंगापुर, गोल्डमैन सैक्स बैंक यूरोप और एडलवाइस म्यूचुअल फंड ने खरीदा।

Neogen Chemicals

एक्सिस म्यूचुअल फंड ने नियोजेन केमिकल्स के 2.66 लाख शेयर ₹47.56 करोड़ में प्रति शेयर ₹1,788.01 के भाव पर बेचे।एक्सिस म्यूचुअल फंड ट्रस्टी के पास एक्सिस स्मॉल कैप फंड के ज़रिए 18 अप्रैल 2026 तक नियोजेन केमिकल्स में पहले से ही 5.59% हिस्सेदारी थी।

एक्स-डेट

आज अशोक लेलैंड, फोसेको इंडिया, मोनार्क सर्वेयर्स एंड इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स, नवनीत एजुकेशन और रेम्सन्स इंडस्ट्रीज के शेयर एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगे तो आनंद राठी वेल्थ के बोनस और सर शादी लाल एंटरप्राइजेज के विलय की आज एक्स-डेट है।

F&O Ban

आज अंबर एंटरप्राइजेज इंडिया और कीन्स टेक्नोलॉजी इंडिया में एफएंडओ की नई पोजिशन नहीं ले पाएंगे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।