संजय बांगर की बेटी Anaya Bangar Australia के लिए खेलेगी? Cricket Australia की मंजूरी के बाद जानें क्या है पूरा रास्ता

पूर्व मुंबई अंडर-19 क्रिकेटर अनाया बांगर (Anaya Bangar) के लिए महिला क्रिकेट में वापसी का रास्ता खुल गया है। मार्च में जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी (Gender Affirming Surgery) कराने वाली अनाया को क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने ऑस्ट्रेलिया में महिला कम्युनिटी क्रिकेट खेलने की मंजूरी दे दी है। हालांकि, अगर वह विमेंस बिग बैश लीग (WBBL) जैसी एलीट क्रिकेट प्रतियोगिताओं में खेलना चाहती हैं, तो उन्हें क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की टेस्टोस्टेरोन से जुड़ी पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी।

 

अनाया मुंबई की एज-ग्रुप क्रिकेट में खेल चुकी हैं। वह टेस्ट क्रिकेट खेल चुके सरफराज खान और उनके भाई मुशीर खान के साथ भी मुंबई के लिए क्रिकेट खेल चुकी हैं।

 

 'मुझे लगा था कि मैं फिर कभी क्रिकेट नहीं खेल पाऊंगी'

 

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से मंजूरी मिलने के बाद अनाया ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में इसे अपने लिए बेहद खास दिन बताया। उन्होंने कहा कि एक समय उन्हें लगा था कि वह शायद दोबारा क्रिकेट नहीं खेल पाएंगी।

 

 “यह मेरे लिए बहुत खास दिन है, खासकर यह जानने के बाद कि मैं दोबारा क्रिकेट खेल सकती हूं। एक समय ऐसा भी था जब मुझे लगा था कि मैं फिर कभी क्रिकेट नहीं खेल पाऊंगी। लेकिन क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का शुक्रिया, जिसने मुझे एक और मौका दिया।”

 

अनाया ने जून में क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से संपर्क किया था। इसके जवाब में 20 जुलाई को उन्हें बताया गया कि वह तुरंत कम्युनिटी क्रिकेट खेल सकती हैं। हालांकि, एलीट क्रिकेट में खेलने के लिए उन्हें टेस्टोस्टेरोन से जुड़े पात्रता मानदंड पूरे करने होंगे।

 

 

 

 

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 मार्च 2027 तक कम्युनिटी क्रिकेट खेलने की अनुमति

 

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की हेड ऑफ इंटीग्रिटी जैकी पार्ट्रिज ने अनाया को भेजे पत्र में स्पष्ट किया कि वह मार्च 2027 तक ऑस्ट्रेलिया के किसी भी राज्य या क्षेत्र में प्रीमियर क्रिकेट प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकती हैं।

 

“मार्च 2027 तक आप ऑस्ट्रेलिया के किसी भी राज्य या क्षेत्र में प्रीमियर क्रिकेट प्रतियोगिताओं में खेलने के लिए पात्र हैं। चूंकि प्रीमियर क्रिकेट को इस नीति के तहत एलीट क्रिकेट के बजाय कम्युनिटी क्रिकेट की श्रेणी में रखा गया है, इसलिए इस फैसले का आपकी इन प्रतियोगिताओं में भागीदारी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।”

 

यानी अनाया मार्च 2027 तक ऑस्ट्रेलिया में कम्युनिटी लेवल पर महिला क्रिकेट खेल सकती हैं। हालांकि, इसके बाद एलीट क्रिकेट में उनकी पात्रता टेस्टोस्टेरोन टेस्ट समेत अन्य शर्तों पर निर्भर होगी।

 

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के अनुसार, खिलाड़ी का सीरम टेस्टोस्टेरोन स्तर कम से कम 12 महीनों तक 10 nmol/L से नीचे होना चाहिए। मार्च 2027 से एलीट क्रिकेट में खेलने के लिए अनाया को ऑस्ट्रेलिया पहुंचने पर ब्लड टेस्ट भी कराना होगा।

 

 “मार्च 2027 से एलीट क्रिकेट में आपकी पात्रता इस बात पर निर्भर करेगी कि आप ऑस्ट्रेलिया पहुंचने पर एक ब्लड टेस्ट उपलब्ध कराएं, जिसमें यह पुष्टि हो कि आपके सीरम टेस्टोस्टेरोन का स्तर 10 nmol/L से कम है और आप नीति में तय पात्रता की अन्य सभी शर्तों को पूरा करना जारी रखती हैं।”

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 ICC का ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को लेकर क्या नियम है?

 

इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने 2023 में ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों की एलीट महिला क्रिकेट में भागीदारी को लेकर अपनी नीति स्पष्ट की थी। इसके तहत ऐसे ट्रांसजेंडर खिलाड़ी, जिन्होंने पुरुष यौवन यानी मेल प्यूबर्टी का अनुभव किया है, एलीट महिला इंटरनेशनल क्रिकेट में हिस्सा नहीं ले सकते।

 

भारत में हालांकि इस तरह के मामले को लेकर BCCI की अभी कोई स्पष्ट नीति नहीं है। BCCI के एक शीर्ष अधिकारी ने *द इंडियन एक्सप्रेस* से कहा कि बोर्ड ने ट्रांस महिलाओं के महिला क्रिकेट खेलने को लेकर अभी कोई फैसला नहीं लिया है।

 

“जहां तक ICC की बात है, उसने ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को लेकर अपना फैसला स्पष्ट कर दिया है। BCCI ने अभी यह तय नहीं किया है कि ऐसे मामलों में क्या किया जाना चाहिए। चूंकि यह पहली बार है जब इस तरह का मामला सामने आया है, इसलिए बोर्ड ने अभी इस पर कोई रुख तय नहीं किया है। खास तौर पर घरेलू क्रिकेट में उन्हें खेलने की अनुमति देने को लेकर।”

 

अनाया ने बताया, कैसे मिली क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से मंजूरी

 

अनाया ने बताया कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उनके मामले को विस्तार से देखा। उनकी मेडिकल हिस्ट्री, टेस्ट रिपोर्ट और सर्जरी से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा की गई।

 

उन्होंने कहा कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उनकी एथलीट टेस्टिंग रिपोर्ट और मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी से जुड़ी रिपोर्ट भी देखी। अनाया के मुताबिक, बोर्ड ने उनकी स्थिति का आकलन करने के लिए एक पूरी टीम के जरिए उनके मामले की समीक्षा की।

 

 “मेरी एथलीट टेस्टिंग रिपोर्ट और बाकी सभी जानकारी सामने आने के बाद भी BCCI की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। वहीं, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने वास्तव में मेरी रिपोर्ट पढ़ी, मेरी पूरी मेडिकल हिस्ट्री देखी और मेरी स्थिति का आकलन करने के लिए एक पूरी टीम बनाई।”

 

 “मैंने क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से संपर्क किया और उन्होंने निष्पक्षता और समावेशिता को ध्यान में रखते हुए मुझे खेलने की मंजूरी दी। उन्होंने मुझसे मेरी ब्लड टेस्ट रिपोर्ट और टेस्टोस्टेरोन टेस्ट की रिपोर्ट मांगी। उन्होंने मेरी सर्जरी से जुड़े दस्तावेज भी मांगे। इसके अलावा, उन्होंने मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी की वह रिपोर्ट भी मांगी, जिसे मैंने एक साल से ज्यादा समय पहले सार्वजनिक किया था।”

 

अनाया ने आगे कहा कि अगर वह अच्छा प्रदर्शन करती हैं और बाकी पात्रता शर्तें पूरी करती हैं, तो उनके पास WBBL में खेलने का मौका हो सकता है।

 

 “अगर सब कुछ ठीक रहा और मैं अच्छा प्रदर्शन करती हूं, तो मेरे पास WBBL में खेलने का मौका होगा।”

 

हार्मोन थेरेपी पर रिसर्च का भी हिस्सा बनी थीं अनाया

 

अनाया इससे पहले मैनचेस्टर मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट के एक रिसर्च प्रोजेक्ट का हिस्सा रही हैं। इस प्रोजेक्ट में हार्मोन थेरेपी के दौरान उनकी स्ट्रेंथ, स्टैमिना, हार्मोन और ग्लूकोज लेवल में होने वाले बदलावों का अध्ययन किया गया था।

 

उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए BCCI और ICC के प्रतिनिधियों से भी ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को लेकर स्पष्ट नीति बनाने की अपील की थी। अनाया का कहना रहा है कि ऐसी नीतियां पुराने विचारों के बजाय वैज्ञानिक डेटा और रिसर्च पर आधारित होनी चाहिए।

 

 अभी क्लब की तलाश में अनाया

 

जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी के बाद अनाया फिलहाल रिकवरी कर रही हैं। इसके साथ ही वह ऑस्ट्रेलिया में अपने लिए एक क्लब की तलाश भी कर रही हैं, जहां से वह कम्युनिटी क्रिकेट में अपनी नई पारी शुरू कर सकें।

 

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से मिली मंजूरी को अनाया ने सिर्फ अपने लिए ही नहीं, बल्कि दूसरे खिलाड़ियों के लिए भी बड़ा कदम बताया।

 

 “मैं सच में यकीन नहीं कर पा रही थी कि मैं दोबारा क्रिकेट खेल पाऊंगी। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया और उसकी प्रगतिशील व समावेशी नीतियों की वजह से यह संभव हुआ है। ये नीतियां ट्रांस महिलाओं के लिए महिला खेलों में निष्पक्षता और समावेश पर ध्यान देती हैं।”

 

 “यह सिर्फ मेरे लिए ही नहीं, बल्कि मेरे जैसे दूसरे खिलाड़ियों के लिए भी एक बहुत बड़ा पड़ाव है, जो खेल में आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उन्हें या तो खेल चुनना पड़ता है या फिर जेंडर ट्रांजिशन का विकल्प चुनना पड़ता है।”

Compassionate Jobs: अनुकंपा नौकरी में बड़े बेटे को मिलेगी पहले प्राथमिकता, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Compassionate Jobs: अनुकंपा नियुक्ति को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिस पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी मृत सरकारी कर्मचारी के एक से अधिक पात्र बच्चे अनुकंपा नियुक्ति का दावा करते हैं, तो बड़े बच्चे को उसकी वरिष्ठता के आधार पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने मुंगेली जिले के एक मामले में छोटे बेटे को दी गई अनुकंपा नियुक्ति का आदेश रद्द करते हुए मामला जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को वापस भेज दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि पात्रता की जांच के बाद बड़े बेटे के दावे पर 30 दिनों के भीतर विचार किया जाए।

मुंगेली के सरकारी स्कूल में चपरासी के पद पर कार्यरत ईश्वर सिंह क्षत्रिय की सितंबर 2016 में मृत्यु हो गई थी। उनकी दो पत्नियां थीं। पहली पत्नी के बेटे जितेंद्र सिंह क्षत्रिय (35 वर्ष) और दूसरी पत्नी के बेटे राजकुमार दोनों ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। 7 अगस्त 2019 को मुंगेली के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने छोटे बेटे राजकुमार को नौकरी दे दी। इसके खिलाफ बड़े बेटे जितेंद्र ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

अदालत का फैसला

जस्टिस संजय के. अग्रवाल की पीठ ने DEO के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हालांकि दूसरी पत्नी से जन्मा बच्चा भी कानूनी वारिस होता है। लेकिन जब कई भाई-बहनों में से चुनाव करना हो तो वरिष्ठता (उम्र में बड़े होने) के नियम का पालन होना चाहिए। अदालत ने DEO को 30 दिनों के भीतर बड़े बेटे की पात्रता की जांच कर उसके दावे पर विचार करने का निर्देश दिया है।

दोनों बेटों ने किया था दावा

मामला मुंगेली के एक सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से जुड़ा है। वहां पदस्थ ईश्वर सिंह क्षत्रिय की 29 सितंबर 2016 को मृत्यु हो गई थी। उनके दो विवाह हुए थे। पहली पत्नी से उनका बेटा जितेंद्र सिंह क्षत्रिय और दूसरी पत्नी से बेटा राजकुमार था। पिता की मृत्यु के बाद दोनों बेटों ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। हालांकि, जिला शिक्षा अधिकारी ने 7 अगस्त 2019 को राजकुमार को नौकरी देने का फैसला किया। इस फैसले को जितेंद्र ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय के. अग्रवाल ने 8 अगस्त के आदेश में मुंगेली DEO के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें छोटे बेटे राजकुमार को अनुकंपा नियुक्ति दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि जब एक से अधिक पात्र संतान अनुकंपा नियुक्ति का दावा करती हैं, तो उम्र और वरिष्ठता के आधार पर बड़े बच्चे के दावे को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल बड़ा होना ही पर्याप्त नहीं है। बड़े बेटे को नियुक्ति के लिए निर्धारित सभी पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा। इसी कारण मामला दोबारा DEO के पास भेजा गया है।

शादीशुदा होना अनुकंपा नियुक्ति के रास्ते में बाधा नहीं

मामले में यह भी महत्वपूर्ण सवाल उठा कि क्या शादीशुदा संतान अनुकंपा नियुक्ति का लाभ ले सकती है। कोर्ट ने कहा कि विवाह अपने आप में आश्रित संतान को अनुकंपा नियुक्ति के लाभ से बाहर करने का आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने इस संबंध में पूर्व में दिए गए पटना हाईकोर्ट और झारखंड हाईकोर्ट के फैसलों का भी उल्लेख किया। अदालत ने माना कि यदि अन्य पात्रता शर्तें पूरी होती हैं तो केवल वैवाहिक स्थिति के आधार पर दावा खारिज नहीं किया जा सकता।

सरकार को बड़े बेटे के दावे की जांच करनी होगी

हाईकोर्ट ने मामले को जिला शिक्षा अधिकारी के पास वापस भेजते हुए निर्देश दिया कि जितेंद्र के दावे की पात्रता की जांच की जाए और उसके बाद 30 दिनों के भीतर उचित निर्णय लिया जाए। इस फैसले से उन मामलों में महत्वपूर्ण दिशा मिलती है, जहां मृत सरकारी कर्मचारी के एक से अधिक बच्चे अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र होते हैं। कोर्ट के मुताबिक ऐसे मामलों में केवल विभाग की पसंद या किसी एक संतान को नियुक्ति देना पर्याप्त नहीं है। बल्कि पात्रता, वरिष्ठता और प्रशासनिक नियमों को ध्यान में रखकर फैसला किया जाना चाहिए।

वरिष्ठता अकेले सरकारी पद पर हक नहीं देती

इसी मामले से जुड़े एक अन्य फैसले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ वरिष्ठता के आधार पर किसी सरकारी कर्मचारी को ऊंचे पद पर नियुक्ति या प्रभार पाने का स्वतः अधिकार नहीं मिल जाता। एक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) ने जूनियर सहकर्मी को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बनाए जाने को चुनौती दी थी।

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कोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखा। पीठ ने कहा कि किसी अधिकारी को अस्थायी रूप से उच्च पद का प्रभार देना एक प्रशासनिक व्यवस्था है। इसमें प्रशासनिक उपयुक्तता और अधिकारी के पूरे रिकॉर्ड को भी देखा जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वरिष्ठता महत्वपूर्ण कारक हो सकती है, लेकिन वह अकेले किसी अधिकारी को उच्च पद का स्वतः अधिकार नहीं देती।

अमेरिका में इमिग्रेशन को लेकर नया बिल पेश:भारतीय H-1B वीजाधारकों समेत लाखों प्रवासियों को हो सकता है फायदा

अमेरिका में डेमोक्रेटिक सीनेटर एलेक्स पडिला ने एक नया विधेयक पेश किया है, जिसके तहत सात साल से लगातार अमेरिका में रह रहे प्रवासी ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकेंगे। प्रस्तावित कानून से भारतीय H-1B वीजाधारकों समेत लाखों लोगों को फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, रिपब्लिकन विरोध के कारण इसके पारित होने की राह आसान नहीं मानी जा रही है। क्या है प्रस्तावित विधेयक रिन्यूइंग इमिग्रेशन प्रोविजंस ऑफ द इमिग्रेशन एक्ट 1929 नाम के इस विधेयक के तहत ऐसे प्रवासी जो कम से कम सात वर्ष से लगातार अमेरिका में रह रहे हैं, ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए आवेदक का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए और उसे ग्रीन कार्ड की अन्य पात्रता शर्तें भी पूरी करनी होंगी। भारतीय H-1B वीजाधारकों के लिए क्यों अहम है प्रस्ताव यह प्रस्ताव भारतीय पेशेवरों के लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि अमेरिका में H-1B वीजा धारकों का बड़ा हिस्सा भारतीयों का है। रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड पर लागू देशवार वार्षिक सीमा (Per-Country Cap) के कारण उन्हें स्थायी निवास के लिए कई वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है। यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो सात वर्ष से लगातार अमेरिका में रह रहे पात्र H-1B वीजाधारकों को ग्रीन कार्ड पाने का एक वैकल्पिक रास्ता मिल सकता है। इससे वे लोग भी लाभान्वित हो सकते हैं, जो वर्षों से अस्थायी वर्क वीजा का नवीनीकरण कराते हुए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा, लंबे समय से वीजा पर रह रहे लोगों के 21 वर्ष की आयु पूरी करने वाले बच्चों, ड्रीमर्स (Dreamers), टेम्पररी प्रोटेक्टेड स्टेटस (TPS) धारकों, आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों और अन्य उच्च कौशल वाले पेशेवरों को भी इस प्रस्ताव से राहत मिल सकती है। सीनेटर एलेक्स पडिला के कार्यालय के अनुसार, इस विधेयक से 80 लाख से अधिक लोगों को फायदा हो सकता है। कानून में क्या बदलाव होगा विधेयक इमिग्रेशन एंड नेशनेलिटी एक्ट के सेक्शन 249 (रजिस्ट्री) में संशोधन का प्रस्ताव देता है। वर्तमान में इस प्रावधान का लाभ केवल उन लोगों को मिल सकता है जो 1 जनवरी 1972 से पहले अमेरिका में रह रहे हों। नया प्रस्ताव इस निश्चित तारीख को हटाकर सात साल के निरंतर निवास की शर्त लागू करेगा। कानून बनने के 60 दिन बाद यह व्यवस्था प्रभावी होगी। राजनीतिक समर्थन, लेकिन राह आसान नहीं इस विधेयक का नेतृत्व सीनेटर एलेक्स पडिला के साथ सीनेट के डेमोक्रेटिक व्हिप डिक डर्बिन कर रहे हैं। इसे 14 डेमोक्रेटिक सीनेटरों का समर्थन प्राप्त है, जबकि प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में इसी तरह का विधेयक सांसद जोई लोफग्रेन ने पेश किया है। हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी के विरोध के कारण इसके कानून बनने की राह फिलहाल चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।

अमेरिका में इमिग्रेशन को लेकर नया बिल पेश:भारतीय H-1B वीजाधारकों समेत लाखों प्रवासियों को हो सकता है फायदा

अमेरिका में डेमोक्रेटिक सीनेटर एलेक्स पडिला ने एक नया विधेयक पेश किया है, जिसके तहत सात साल से लगातार अमेरिका में रह रहे प्रवासी ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकेंगे। प्रस्तावित कानून से भारतीय H-1B वीजाधारकों समेत लाखों लोगों को फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, रिपब्लिकन विरोध के कारण इसके पारित होने की राह आसान नहीं मानी जा रही है। क्या है प्रस्तावित विधेयक रिन्यूइंग इमिग्रेशन प्रोविजंस ऑफ द इमिग्रेशन एक्ट 1929 नाम के इस विधेयक के तहत ऐसे प्रवासी जो कम से कम सात वर्ष से लगातार अमेरिका में रह रहे हैं, ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए आवेदक का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए और उसे ग्रीन कार्ड की अन्य पात्रता शर्तें भी पूरी करनी होंगी। भारतीय H-1B वीजाधारकों के लिए क्यों अहम है प्रस्ताव यह प्रस्ताव भारतीय पेशेवरों के लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि अमेरिका में H-1B वीजा धारकों का बड़ा हिस्सा भारतीयों का है। रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड पर लागू देशवार वार्षिक सीमा (Per-Country Cap) के कारण उन्हें स्थायी निवास के लिए कई वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है। यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो सात वर्ष से लगातार अमेरिका में रह रहे पात्र H-1B वीजाधारकों को ग्रीन कार्ड पाने का एक वैकल्पिक रास्ता मिल सकता है। इससे वे लोग भी लाभान्वित हो सकते हैं, जो वर्षों से अस्थायी वर्क वीजा का नवीनीकरण कराते हुए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा, लंबे समय से वीजा पर रह रहे लोगों के 21 वर्ष की आयु पूरी करने वाले बच्चों, ड्रीमर्स (Dreamers), टेम्पररी प्रोटेक्टेड स्टेटस (TPS) धारकों, आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों और अन्य उच्च कौशल वाले पेशेवरों को भी इस प्रस्ताव से राहत मिल सकती है। सीनेटर एलेक्स पडिला के कार्यालय के अनुसार, इस विधेयक से 80 लाख से अधिक लोगों को फायदा हो सकता है। कानून में क्या बदलाव होगा विधेयक इमिग्रेशन एंड नेशनेलिटी एक्ट के सेक्शन 249 (रजिस्ट्री) में संशोधन का प्रस्ताव देता है। वर्तमान में इस प्रावधान का लाभ केवल उन लोगों को मिल सकता है जो 1 जनवरी 1972 से पहले अमेरिका में रह रहे हों। नया प्रस्ताव इस निश्चित तारीख को हटाकर सात साल के निरंतर निवास की शर्त लागू करेगा। कानून बनने के 60 दिन बाद यह व्यवस्था प्रभावी होगी। राजनीतिक समर्थन, लेकिन राह आसान नहीं इस विधेयक का नेतृत्व सीनेटर एलेक्स पडिला के साथ सीनेट के डेमोक्रेटिक व्हिप डिक डर्बिन कर रहे हैं। इसे 14 डेमोक्रेटिक सीनेटरों का समर्थन प्राप्त है, जबकि प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में इसी तरह का विधेयक सांसद जोई लोफग्रेन ने पेश किया है। हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी के विरोध के कारण इसके कानून बनने की राह फिलहाल चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।

Indiramma Scheme: सिर्फ 6 लाख में मिलेगा 528 sq ft का अपना फ्लैट! तेलंगाना सरकार ने लॉन्च की इंदिरम्मा आवास योजना, ये हैं शर्तें

Indiramma Scheme details: गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए अपने घर का सपना सच करने की दिशा में तेलंगाना सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने मंगलवार को हैदराबाद और आउटर रिंग रोड (ORR) के भीतर आने वाले शहरी क्षेत्रों यानी कोर अर्बन रीजन इकोनॉमी (CURE) क्षेत्र के लिए एक किफायती स्वामित्व आवास योजना इंदिरम्मा इंदलू (Indiramma Indlu) की आधिकारिक शुरुआत कर दी है। हमारे सहयोगी CNBC TV 18 की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के आवास मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी, मंत्री पोन्नम प्रभाकर, दुद्डिला श्रीधर बाबू और मोहम्मद अजहरुद्दीन ने राज्य सचिवालय में इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्घाटन करते हुए इसके लिए पात्रता मानदंड, आवेदन प्रक्रिया और प्रोजेक्ट से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा की।

आइए जानते हैं कि इस योजना के तहत फ्लैट की कीमत क्या होगी, सरकार कितनी सब्सिडी दे रही है और इसमें आवेदन करने के क्या-क्या नियम हैं।

1 लाख फ्लैट बनाने की योजना, पहले चरण में बनेंगे 7680 फ्लैट्स

तेलंगाना सरकार की योजना GHMC, साइबराबाद और मलकाजगिरि नगर निगम की सीमाओं के भीतर चरणबद्ध तरीके से 1 लाख किफायती फ्लैट्स बनाने की है। शुरुआती चरण में तेलंगाना हाउसिंग बोर्ड 16 विधानसभा क्षेत्रों में 7680 लो इनकम ग्रुप (LIG) फ्लैट्स बनाएगा। बाद में इस प्रोजेक्ट का विस्तार करके 26 विधानसभा क्षेत्रों को इसमें शामिल किया जाएगा। हर LIG फ्लैट का बिल्ट-अप एरिया 528 वर्ग फीट (400 वर्ग फीट कारपेट एरिया) होगा।

क्या होगी फ्लैट की कीमत? ₹5 लाख मिलेगी सरकारी सब्सिडी

आवास मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने बताया कि सरकार उन इलाकों में भी घर उपलब्ध करा रही है जहां जमीन की कीमतें 2 लाख रुपये से 3 लाख रुपये प्रति वर्ग गज तक हैं। इस योजना के तहत हर पात्र लाभार्थी को ₹5 लाख की सरकारी सब्सिडी मिलेगी। लाभार्थी महिला/परिवार को सिर्फ ₹6 लाख का भुगतान करना होगा। सरकार परियोजना के लिए जमीन मुफ्त उपलब्ध करा रही है। इससे घर की कुल लागत काफी कम हो गई है। सूचना प्रौद्योगिकी और उद्योग मंत्री दुद्डिला श्रीधर बाबू ने कहा कि सरकार का संकल्प तेलंगाना को झोपड़ी-मुक्त राज्य बनाना है।

कैसे करें आवेदन?

इंदिरम्मा इंदलू योजना के तहत आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया भी विस्तार से बताई गई है। इसके लिए 23 जुलाई से 10 अगस्त के बीच आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। उम्मीदवार मीसेवा (MeeSeva) केंद्रों और व्हाट्सएप के जरिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए एप्लीकेशन फीस ₹100 तय की गई है। आवेदकों को ₹10000 की रिफंडेबल अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (EMD) जमा करनी होगी। अगर फ्लैट आवंटित हो जाता है तो यह राशि लाभार्थी के हिस्से में एडजस्ट कर ली जाएगी। अगर फ्लैट अलॉट नहीं होता है तो ये पैसा रिफंड कर दिया जाएगा।

क्या हैं पात्रता की शर्तें?

योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदकों को नीचे दी गईं शर्तों को पूरा करना अनिवार्य होगा-

  • निवासी होना जरूरी: आवेदक कम से कम 10 वर्षों से CURE क्षेत्र में रह रहा हो।
  • कोई अन्य घर या प्लॉट न हो: आवेदक के पास आउटर रिंग रोड (ORR) की सीमा के भीतर अपना कोई मकान, फ्लैट या प्लॉट नहीं होना चाहिए।
  • आय सीमा: परिवार की कुल वार्षिक आय ₹6 लाख तक होनी चाहिए।
  • प्रति परिवार एक आवेदन: एक परिवार से सिर्फ एक ही आवेदन स्वीकार किया जाएगा।

लॉटरी सिस्टम और वेरिफिकेशन: अगर आवेदनों की संख्या उपलब्ध फ्लैटों से अधिक होती है तो दस्तावेजों की जांच और 360-डिग्री सत्यापन के बाद पारदर्शी लॉटरी सिस्टम के माध्यम से फ्लैट्स का आवंटन किया जाएगा।

10 साल तक बेचने या किराए पर देने पर रोक: आवंटित फ्लैट को लाभार्थी 10 साल तक न तो बेच सकेंगे और न ही किराए पर दे सकेंगे। होम लोन के लिए बैंक में मॉर्गेज (बंधक) रखने की अनुमति होगी।

किस्तों में पेमेंट का शेड्यूल

तेलंगाना हाउसिंग बोर्ड ने लाभार्थियों के लिए चरणबद्ध पेमेंट प्लान भी पेश किया है-

  • आवेदन के समय: ₹100 फीस + ₹10000 EMD
  • अस्थायी आवंटन पर: ₹1 लाख
  • आरसीसी (RCC) स्ट्रक्चर पूरा होने पर: ₹2 लाख
  • फिनिशिंग स्टेज के दौरान: ₹2 लाख
  • कब्जा मिलने से पहले: शेष राशि

आरक्षण के नियम भी होंगे लागू

राज्य सरकार की नीति के मुताबिक योजना में विशेष आरक्षण का प्रावधान किया गया है। कुल फ्लैटों का 50% हिस्सा एससी (SC), एसटी (ST), बीसी (BC), दिव्यांगजनों, आउटसोर्सिंग/क्लास-IV कर्मचारियों और स्वच्छता कर्मचारियों ॉके लिए आरक्षित रहेगा। हर श्रेणी में 30% फ्लैट्स महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगे।

पहले चरण में किन-किन इलाकों में मिलेंगे 480-480 फ्लैट्स?

पहले चरण के तहत CURE क्षेत्र के 16 विधानसभा क्षेत्रों में फ्लैट आवंटित किए जाएंगे। राजेंद्रनगर (मेलारदेवपल्ली), महेश्वरम (जालपल्ली), सेरिलिंगमपल्ली (रायदुर्गम), इब्राहिमपटनम (बंदलागुड़ा एलआईजी कॉलोनी), मल्काजगिरि (कोवकूर), कारवान (कुलसुमपुरा), बहादुरपुरा (नंदी मुसलीगुड़ा), अंबरपेट (सिटी पुलिस लाइन्स), कुकटपल्ली (केपीएचबी कॉलोनी), मेडचल (पोचारम एलआईजी कॉलोनी), कुथबुल्लापुर (गाजुलारामारम), सनतनगर (पतिगड्डा), सिकंदराबाद छावनी (मारेडपल्ली-महेंद्र हिल्स), और मलकपेट (गड्डियनारम आरएंडबी क्वार्टर), इन क्षेत्रों में 480-480 फ्लैट्स मिलेंगे।

  • नामपल्ली (480 फ्लैट्स): 360 फ्लैट्स एचएमडब्ल्यूएसएसबी कार्यालय के पास रेड हिल्स में और 120 फ्लैट्स निलोफर अस्पताल के पास।
  • खैरताबाद (480 फ्लैट्स): 120 फ्लैट्स हकीमपेट दरगाह पर और 360 फ्लैट्स जुबली हिल्स में एमएलए कॉलोनी के पास।