दिल्ली पुलिस 2022 की तरह CJP प्रदर्शन से जुड़े छात्रों से वापस लेगी केस? सामने आया बड़ा अपडेट्स

Delhi Police: संसद परिसर के हाल में और जंतर-मंतर पर आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामलों को वापस लेने के लिए दिल्ली पुलिस वर्ष 2022 में अपनाई गई प्रक्रिया को दोहरा सकती है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस इस संबंध में कानूनी सलाह ले रही है। मंगलवार 28 जुलाई तक इस पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2022 में किसान आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने के दौरान दिल्ली पुलिस, तत्कालीन दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल (LG) कार्यालय के बीच समन्वय स्थापित कर एक प्रक्रिया अपनाई गई थी। उसी मॉडल को इस बार भी लागू करने पर विचार किया जा रहा है।

17 मामलों को वापस लेने का प्रस्ताव

सूत्रों के अनुसार, उस समय पुलिस ने 17 मामलों को वापस लेने का प्रस्ताव तत्कालीन आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को भेजा था। इसके बाद फाइल तत्कालीन उपराज्यपाल अनिल बैजल के कार्यालय से तत्कालीन गृह मंत्री सत्येंद्र जैन के पास पहुंची। गृह मंत्री की मंजूरी मिलने के बाद फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी गई। फिर 28 फरवरी को एलजी कार्यालय लौटने पर उसी दिन उसे मंजूरी मिल गई थी।

कानूनी विशेषज्ञों से मांगी राय 

अब संसद प्रदर्शन से जुड़े मामलों में भी दिल्ली पुलिस ने कानूनी विशेषज्ञों से राय मांगी है कि FIR वापस लेने की प्रक्रिया किस तरह अपनाई जाए। एक विकल्प यह भी माना जा रहा है कि दिल्ली पुलिस दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इन मामलों को रद्द (Quash) कराने का अनुरोध करे।

15 FIR दर्ज

रिपोर्ट के मुताबिक, संसद प्रदर्शन के संबंध में दिल्ली पुलिस ने अब तक 15 से अधिक एफआईआर दर्ज की हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान असामाजिक तत्वों की पहचान की गई है। जिन लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई जाएगी, उनके खिलाफ जांच जारी रहेगी।

सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जिनकी भूमिका गंभीर नहीं पाई गई है। उन्हें फिलहाल जांच के दायरे से बाहर रखा जा सकता है। इन मामलों में गैरकानूनी जमावड़ा, सरकारी कर्मचारियों पर हमला, आपराधिक साजिश, निषेधाज्ञा का उल्लंघन और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी धाराएं लगाई गई हैं। कुछ मामलों में हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराएं भी शामिल की गई हैं।

 पुलिस ने उठाकर मसूरी छोड़ दिया

टाइम्स ऑफ इंडिया की इस रिपोर्ट में एक अन्य मामले का भी उल्लेख किया गया है। प्रदर्शनकारियों को खाना देने वाले एक स्वयंसेवक जुनैद ने आरोप लगाया है कि शुक्रवार रात दिल्ली पुलिस के कुछ कर्मी उन्हें अपने साथ ले गए। उनका कहना है कि उनसे पूछताछ की गई, आंखों पर पट्टी बांधी गई और अगले दिन उन्हें उत्तराखंड के मसूरी में छोड़ दिया गया।

जुनैद के अनुसार, पुलिस ने उनसे खाना बांटने के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता और इतने बड़े स्तर पर भोजन की व्यवस्था के बारे में सवाल पूछे। वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि जुनैद के लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, जुनैद ने दावा किया कि उन्हें भोजन और पानी समर्थकों से मिलने वाले दान और डिलीवरी के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता था।

पीएम मोदी के मामले में होगी कार्रवाई?

दिल्ली पुलिस विरोध-प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य नेताओं को निशाना बनाकर सोशल मीडिया पर की गई आपत्तिजनक और अपमानजनक पोस्ट के खिलाफ कार्रवाई पर विचार कर रही है। एक सूत्र ने बताया कि पुलिस ऐसे पोस्ट, वीडियो और टिप्पणियों को हटाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर सकती है।

सूत्र ने कहा, “विरोध-प्रदर्शन के दौरान और उसके बाद अपलोड की गई सामग्री की समीक्षा के बाद पुलिस अपमानजनक प्रकृति की पोस्ट हटाने के लिए नोटिस जारी करेगी।” उन्होंने कहा, “विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी सामग्री की पहचान करने का अभियान पहले ही शुरू किया जा चुका है।”

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सूत्र के मुताबिक, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या किसी सामग्री में किसी कानून का उल्लंघन हुआ है या उससे सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने होने की आशंका थी। सूत्र ने बताया कि दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया निगरानी टीम पूरे दिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर नजर रखे हुए है, ताकि विरोध-प्रदर्शन से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री की पहचान की जा सके।

Service Charge: आपके रेस्टोरेंट के बिल में जुड़ा है सर्विस चार्ज? जानिए कैसे बचा सकते हैं अपने पैसे

Service Charge: वीकेंड पर परिवार या दोस्तों के साथ रेस्टोरेंट में खाना खाने के बाद जब बिल आता है, तो उसमें अक्सर 5 से 10 प्रतिशत तक का ‘सर्विस चार्ज’ जुड़ा हुआ दिखाई देता है। कई बार ग्राहक इसे हटाने की मांग करते हैं। लेकिन रेस्तरां कर्मचारी इसे अनिवार्य बताकर हटाने से इनकार कर देते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या रेस्टोरेंट ग्राहकों से जबरन सर्विस चार्ज वसूल सकते हैं?

यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है क्योंकि केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने हाल ही में साफ कहा था कि रेस्तरां द्वारा अनिवार्य रूप से सर्विस चार्ज वसूलना नियमों के खिलाफ है। ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सरकार की सख्त चेतावनी

प्रह्लाद जोशी ने कहा कि उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लिया है। संबंधित अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि जो रेस्तरां इस अवैध प्रथा को जारी रखेंगे, उन्हें न सिर्फ भारी जुर्माना भरना पड़ेगा। बल्कि उनकी प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंच सकता है।

सरकार का यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने देशभर के 41 रेस्तरां के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। इनमें Chaayos और Barbeque Nation जैसी लोकप्रिय चेन भी शामिल हैं। इन रेस्तरां पर ग्राहकों के बिल में बिना अनुमति डिफॉल्ट रूप से सर्विस चार्ज जोड़ने की शिकायतें मिली थीं।

क्या होता है सर्विस चार्ज?

सर्विस चार्ज कोई सरकारी टैक्स नहीं है। यह वह अतिरिक्त राशि होती है जिसे रेस्तरां अपने कर्मचारियों की सेवा के बदले ग्राहकों से वसूलते हैं। आमतौर पर यह कुल बिल का 5 से 10 प्रतिशत होता है। यह राशि GST से अलग होती है। जहां GST सरकार के खाते में जमा होता है। वहीं, सर्विस चार्ज रेस्तरां के पास ही रहता है। अलग-अलग रेस्तरां इसे अपने कर्मचारियों में अलग-अलग तरीके से बांटते हैं।

क्या रेस्तरां आपको सर्विस चार्ज देने के लिए मजबूर कर सकते हैं?

सरकारी गाइडलाइंस के अनुसार इसका जवाब है…नहीं। CCPA ने वर्ष 2022 में जारी दिशानिर्देशों में स्पष्ट किया था कि कोई भी रेस्तरां ग्राहकों के बिल में अपने आप सर्विस चार्ज नहीं जोड़ सकता। इसे अनिवार्य या बाध्यकारी नहीं बताया जा सकता। यदि कोई ग्राहक इसे देने से इनकार करता है तो उसे सेवा देने या रेस्तरां में एंट्री से भी मना नहीं किया जा सकता। सरकार का कहना है कि सर्विस चार्ज देना या न देना पूरी तरह ग्राहक की इच्छा पर निर्भर होना चाहिए।

फिर भी क्यों वसूला जा रहा है सर्विस चार्ज?

CCPA के गाइडलाइंस जारी होने के बाद कई रेस्तरां संगठनों ने इन्हें अदालत में चुनौती दी। उनका तर्क है कि सर्विस चार्ज उनकी मूल्य निर्धारण नीति का हिस्सा है। इसकी जानकारी पहले से मेन्यू कार्ड या रेस्तरां में नोटिस के जरिए ग्राहकों को दे दी जाती है। यदि ग्राहक यह जानकारी देखकर भी भोजन करता है तो उसने इन शर्तों को स्वीकार कर लिया है।

हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि सिर्फ मेन्यू या नोटिस बोर्ड पर जानकारी लिख देने से ग्राहक पर अतिरिक्त शुल्क थोपने का अधिकार नहीं मिल जाता। फिलहाल यह मामला अदालत में लंबित है, इसलिए कई रेस्तरां अब भी सर्विस चार्ज वसूल रहे हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा?

मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि सर्विस चार्ज को अनिवार्य बनाना अनुचित व्यापारिक व्यवहार (Unfair Trade Practice) माना जा सकता है। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि क्या रेस्तरां सूचीबद्ध कीमत और लागू टैक्स के अलावा ग्राहकों से अतिरिक्त राशि देने के लिए उन्हें बाध्य कर सकते हैं। हालांकि इस मामले में अभी अंतिम फैसला नहीं आया है।

क्या मेन्यू पर ‘सर्विस चार्ज लागू है’ लिखने से भुगतान अनिवार्य हो जाता है?

इसका जवाब है नहीं। कई रेस्तरां अपने मेन्यू या परिसर में सर्विस चार्ज लागू होने का नोटिस लगाते हैं। रेस्तरां संगठनों का कहना है कि यह पहले से दी गई सूचना है। लेकिन उपभोक्ता संरक्षण अधिकारियों का मानना है कि केवल सूचना देने से ग्राहक का यह अधिकार खत्म नहीं हो जाता कि वह अनिवार्य रूप से लगाए गए सर्विस चार्ज को देने से इनकार कर सके।

क्या सर्विस चार्ज न देने पर रेस्तरां आपको रोक सकता है?

CCPA के दिशानिर्देशों के मुताबिक बिल्कुल नहीं। रेस्तरां किसी ग्राहक को रेस्टोरेंट में सिर्फ इसलिए एंट्री देने से इनकार नहीं कर सकता क्योंकि वह सर्विस चार्ज नहीं देना चाहता। इसके अलावा ग्राहक पर भुगतान के लिए दबाव बनाना, डराना-धमकाना या सर्विस चार्ज का भुगतान होने तक उसे रेस्तरां से बाहर जाने से रोकना भी नियमों के खिलाफ है।

यदि रेस्तरां सर्विस चार्ज हटाने से मना कर दे तो क्या करें?

यदि आपको लगता है कि सर्विस चार्ज गलत तरीके से लगाया गया है तो सबसे पहले विनम्रता से इसे हटाने की मांग करें और संशोधित बिल देने के लिए कहें। अगर रेस्तरां मना कर देता है तो बिल की प्रति अपने पास रखें और नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन या संबंधित उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। हाल ही में CCPA द्वारा की गई कार्रवाई भी उपभोक्ताओं की शिकायतों के आधार पर ही शुरू हुई है।

क्या सर्विस चार्ज और टिप एक ही चीज हैं?

जवाब है नहीं…। टिप (Tip) पूरी तरह स्वैच्छिक होती है, जिसे ग्राहक अच्छी सेवा से संतुष्ट होकर अपनी इच्छा से देता है। जबकि सर्विस चार्ज रेस्तरां द्वारा बिल में जोड़ी जाने वाली अतिरिक्त राशि है। यदि सर्विस चार्ज हट भी जाए, तब भी ग्राहक चाहे तो अपनी इच्छा से टिप दे सकता है या बिल्कुल भी नहीं दे सकता।

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‘मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए…’; NEET पेपर लीक को लेकर CJP के प्रोटेस्ट पर बोले सलमान खान

Salman Khan Neet News: नीट पेपर लीक को एक गंभीर मुद्दा बताते हुए बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने बुधवार (22 जुलाई) को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों को नुकसान पहुंचा, उनके प्रति उनकी गहरी संवेदनाएं हैं। सलमान खान ने छात्रों के रुख की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने भविष्य और एक बेहतर, शिक्षित भारत के निर्माण के लिए मेहनत, ईमानदारी और पढ़ाई के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है।

सलमान खान ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि उन्हें खुशी है कि देश के छात्र बेहतर शिक्षा प्रणाली के लिए एकजुट हुए हैं। उनके माता-पिता ने भी उनका साथ दिया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था। लेकिन इसके हिंसक रूप लेने की खबरें बेहद दुखद हैं।

उन्होंने सोशल मीडिया पर एक सोच-समझकर लिखी गई पोस्ट में कहा, “यह आंदोलन इतना शांतिपूर्ण था, लेकिन यह देखकर दुख होता है कि इसे हिंसक मोड़ लेना पड़ा। घायल हुए छात्रों और उनके परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। पेपर लीक एक बहुत गंभीर मुद्दा है। यह जानकर और देखकर खुशी होती है कि देश के बच्चे बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए एकजुट हुए हैं। उनके माता-पिता ने भी उनका साथ दिया है।”

युवाओं को दी सलाह

हालांकि, सलमान खान ने यह भी कहा कि इन प्रदर्शनों को राजनीतिक रूप से अपने कब्जे में नहीं लिया जाना चाहिए। सलमान ने छात्रों के साहस और अनुशासन की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह पीढ़ी शिक्षा के प्रति गंभीर है। भविष्य में देश का नाम रोशन करेगी। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से किया गया यह आंदोलन सही दिशा में उठाया गया कदम है।

अभिनेता ने इस मुद्दे को राजनीति से दूर रखने की अपील करते हुए कहा, “यह मामला छात्रों और शिक्षा व्यवस्था के बीच का है। इसे राजनीतिक रूप नहीं दिया जाना चाहिए। इस आंदोलन का श्रेय सिर्फ देश के छात्रों को मिलना चाहिए। मुझे भरोसा है कि सरकार भी छात्रों का पूरा सहयोग करेगी और शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाएगी। यह सभी के लिए जीत की स्थिति होगी।” सलमान खान ने यह भी कहा कि भारत को भविष्य में दुनिया का प्रमुख शिक्षा केंद्र बनना चाहिए, जिसके लिए मजबूत और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था बेहद जरूरी है।

दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा मामला

इस बीच, 20 जुलाई को हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित बल प्रयोग के आरोपों को लेकर दायर तीन जनहित याचिकाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और अन्य सभी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए हैं। NEET पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्रों का विरोध लगातार जारी है। वे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

इस बीच, पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बुधवार को कहा कि अगर केंद्र सरकार उन्हें यह भरोसा दिलाए कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई बल प्रयोग नहीं किया जाएगा। न ही उनके खिलाफ कोई FIR या अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, तो वह अपना आमरण अनशन समाप्त कर देंगे। वांगचुक ने कहा कि भले ही अनशन के दौरान उनका वजन लगभग 11 किलोग्राम कम हो गया है, फिर भी वह अपने काम पर लौटना चाहते हैं।

सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के लिए रखीं 3 शर्तें, संसद मार्च से पहले आंदोलन में आया बड़ा मोड़

sonam wangchuk hunger strike

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च से पहले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है। वांगचुक अपना अनशन समाप्त करने के लिए राजी है लेकिन उन्होंने इसके लिए 3 शर्ते रखी है। ALSO READ: क्‍या अनशन खत्‍म करेंगे सोनम वांगचुक, अस्पताल में ही चलेगा इलाज, अनशन को लेकर क्‍या बोली पत्‍नी?

 

क्या है सोनम वांगचुक की 3 शर्ते?

समर्थकों को लिखे पत्र में सोनम वांगचुक ने कहा कि आप में से कई लोगों ने पूछा है कि मैं अपना अनशन कब समाप्त करूंगा। जैसा कि मैंने पहले अपने समर्थकों से कहा था, मैं 20 जुलाई को अपना अनशन समाप्त कर दूंगा, यदि—

 

(क) सरकार शिक्षा व्यवस्था की हालिया विफलताओं (जैसे पेपर लीक आदि) की जिम्मेदारी स्वीकार करे।

 

(ख) यदि मैं और CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) का नेतृत्व संसद पहुंच जाएं, जहां विभिन्न राजनीतिक दलों के माननीय सांसद और नेता हमें यह आश्वासन दें कि वे इस मुद्दे को संसद में अवश्य उठाएंगे।

 

(ग) यदि मेरी स्वास्थ्य स्थिति या अन्य कारणों से यह संभव न हो, तो विभिन्न राजनीतिक दलों के माननीय सांसद और नेता इस अस्पताल में आकर मुझे ऊपर दिया गया आश्वासन दें। ALSO READ: Sonam Wangchuk News : 20 जुलाई को आजादी का दूसरा आंदोलन, सोनम का X पर पोस्ट, पत्नी की हाईकोर्ट में याचिका

 

पत्र के अंत में वांगचुक ने लिखा, सफदरजंग अस्पताल में कथित अवैध हिरासत से, जहां मेरी आवागमन की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सभी प्रकार के संचार के अधिकार पर प्रतिबंध लगाया गया है।

दिल्ली हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

दिल्ली हाईकोर्ट ने रविवार को वांगचुक को निजी अस्पताल स्थानांतरित करने की मांग पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि उनकी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सरकार द्वारा उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराना मनमाना नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने यह भी माना कि डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं और उपचार उनकी सहमति से किया जा रहा है।

संसद मार्च पर अभिजीत दिपके का बड़ा बयान

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने कहा कि भारत के इतिहास का सबसे बड़ा मार्च होने जा रहा है। पिछले 10-12 सालों से इस देश में लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिशें की जा रही हैं। जंतर-मंतर पर एक महीने तक बैठकर आप लोगों ने लोकतंत्र को फिर से जिंदा किया है। देश भर से लोग आ रहे हैं। जब मैं अमेरिका में था, तो लोग मुझसे कहते थे कि कोई भी सड़कों पर नहीं उतरेगा कि यह सिर्फ सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड बनकर रह जाएगा। आज जंतर-मंतर की ओर जाने वाली चारों सड़कों को देखिए; वे पूरी तरह से भरी हुई हैं… संसद जाने से हमें कोई नहीं रोक सकता।

सोनम वांगचुक को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, सफदरजंग अस्पताल में ही रहेंगे भर्ती…सरकार–पुलिस से मांगा जवाब

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई करते हुए अदालत ने फिलहाल राहत देने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने माना कि बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सरकार का उन्हें अस्पताल ले जाने का फैसला सही था। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि, सोनम वांगचुक सफदरजंग अस्पताल में उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों का पूरा सहयोग करें। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने का सरकार का फैसला कोई मनमाना कदम नहीं था, बल्कि उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए यह जरूरी था।

सुनवाई के दौरान अस्पताल की मेडिकल टीम के एक डॉक्टर ने अदालत को बताया कि सोनम वांगचुक ने अब लिक्विड आइटम, पोटैशियम क्लोराइड और शुगर-फ्री ओआरएस (ORS) लेना शुरू कर दिया है। हालांकि, डॉक्टरों की सलाह के बावजूद उन्होंने कई बार नसों के जरिए दिए जाने वाले फ्लूइड (IV) लेने से इनकार किया है।

वांगचुक ने IV फ्लूइड लेने से किया इनकार

सुनवाई के दौरान सफदरजंग अस्पताल के एक डॉक्टर ने अदालत को बताया कि सोनम वांगचुक का इलाज लगातार जारी है। डॉक्टर के मुताबिक, मेडिकल टीम लगातार उन्हें नसों के जरिए दिए जाने वाले फ्लूइड (IV) लेने के लिए समझा रही है, लेकिन उन्होंने अब तक इसके लिए सहमति नहीं दी है। डॉक्टर ने अदालत को बताया कि वांगचुक के शरीर में विटामिन की कमी है। साथ ही पोटैशियम और ब्लड शुगर जैसे कुछ जरूरी स्वास्थ्य मानक सामान्य से कम या सीमा के करीब हैं, इसलिए उनका इलाज सावधानी से किया जा रहा है। डॉक्टर की बात सुनने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनम वांगचुक से अपील की कि वह अपना इलाज कर रही मेडिकल टीम का पूरा सहयोग करें। वहीं, वांगचुक और उनकी पत्नी की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि सोनम वांगचुक न तो किसी हिरासत में हैं और न ही उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज है। ऐसे में उन्हें यह तय करने का पूरा अधिकार है कि वे किस अस्पताल में अपना इलाज कराना चाहते हैं।

हाईकोर्ट में हुई सुनवाई

सोनम वांगचुक की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत में कहा कि वांगचुक किसी हिरासत में नहीं हैं और उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला भी नहीं चल रहा है। ऐसे में उन्हें अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने का पूरा अधिकार है। सिब्बल ने कहा कि वांगचुक इलाज से इनकार नहीं कर रहे हैं, बल्कि सिर्फ अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराना चाहते हैं। उन्होंने यह भी दलील दी कि वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराने का पिछला आदेश एकतरफा था, क्योंकि उस समय उनकी ओर से अदालत में कोई पक्ष नहीं सुना गया था।

वहीं इन दलीलों पर जवाब देते हुए जस्टिस पुष्करणा ने कहा कि अदालत को पूरे मामले को व्यापक नजरिए से देखना होगा। उन्होंने कहा कि भले ही सोनम वांगचुक हिरासत में नहीं हैं, लेकिन उनकी पत्नी, भाई और जीजा को उनसे मिलने की अनुमति दी गई है। अदालत ने संकेत दिया कि फिलहाल सबसे अहम बात उनकी सेहत और इलाज सुनिश्चित करना है।

पत्नी ने निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की

दिल्ली हाई कोर्ट में यह सुनवाई सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो की ओर से दायर याचिका पर हो रही है। याचिका में मांग की गई है कि वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से किसी निजी अस्पताल में इलाज के लिए शिफ्ट करने की अनुमति दी जाए। डॉ. गीतांजलि आंग्मो का आरोप है कि इलाज के नाम पर सोनम वांगचुक को गैर-कानूनी तरीके से अस्पताल में रोका गया है। उन्होंने सरकारी अस्पताल में मिल रहे इलाज और मेडिकल देखभाल पर भी सवाल उठाए हैं। याचिका में कहा गया है कि बेहतर इलाज के लिए वांगचुक को परिवार की पसंद के निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

‘सफदरजंग अस्पताल पर भरोसा नहीं…’, हाईकोर्ट पहुंची सोनम वांगचुक की पत्नी, कर दी ये बड़ी मांग

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक की पत्नी ने उन्हें प्राइवेट हॉस्पिटल में शिफ्ट करने की मांग की है। पत्नी गीतांजलि आंगमो ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। आंगमो का कहना है कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल पर भरोसा नहीं है। बता दें कि, सोनम वांगचुक पिछले तीन सप्ताह से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे। इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर उन्हें इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

पत्नी ने लगाए ये आरोप 

गीतांजलि आंग्मो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि अब उन्हें सरकारी अस्पताल पर भरोसा नहीं रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि वांगचुक की पोटैशियम जांच रिपोर्ट में गंभीर गड़बड़ी हुई है। उनके मुताबिक, अस्पताल ने परिवार को बताया कि वांगचुक का पोटैशियम स्तर घटकर 2.9 रह गया है, जिसे डॉक्टरों ने खतरनाक बताया। लेकिन परिवार की ओर से कराई गई एक स्वतंत्र लैब जांच में पोटैशियम का स्तर 3.5 आया, जिसे उन्होंने सामान्य सीमा में बताया। इसी वजह से परिवार ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की है।

सफदरजंग अस्पताल बोला- वांगचुक की हालत स्थिर

सफदरजंग अस्पताल का कहना है कि सोनम वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर है और वह पूरी तरह होश में हैं। हालांकि, उनमें शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, डॉक्टरों की सलाह के बावजूद वांगचुक ने कई बार मुंह से तरल पदार्थ पीने और नसों के जरिए फ्लूइड (IV) लेने से इनकार किया है।

प्राइवेट हॉस्पिटल में शिफ्ट करने की मांग

वहीं, वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों ने उन्हें अस्पताल से छुट्टी देने या किसी निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति नहीं दी। उनका यह भी दावा है कि अस्पताल परिसर में भारी पुलिस बल तैनात होने के कारण परिवार के लोगों की आवाजाही पर कड़ी पाबंदी लगी हुई है। उन्होंने इस स्थिति को “गैर-कानूनी हिरासत” बताया। आंग्मो ने कहा कि परिवार ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है ताकि वांगचुक की तबीयत और बिगड़ने से पहले उन्हें निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि अगर वांगचुक की सेहत को कोई नुकसान होता है, तो इसके लिए अस्पताल प्रशासन और सरकार जिम्मेदार होगी।

वांगचुक ने समर्थकों से संसद मार्च में शामिल होने की अपील की

शनिवार को गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि उनकी अनुमति के बिना सोनम वांगचुक को कोई दवा या फ्लूइड (तरल पदार्थ) नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भूख हड़ताल के दौरान वांगचुक की सेहत पर नजर रखने वाले डॉक्टरों को उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा है। वहीं, आंग्मो की ओर से साझा किए गए एक संदेश में सोनम वांगचुक ने अपने समर्थकों से 20 जुलाई को संसद तक प्रस्तावित मार्च में शामिल होने की अपील की। उन्होंने इस अभियान को “भारत का दूसरा आजादी का आंदोलन” बताया और लोगों से बड़ी संख्या में इसमें शामिल होने का आग्रह किया।

‘भूत बनकर आऊंगा…’, सोनम वांगचुक के एक बयान से ऐसा क्या हुआ कि आधी रात पुलिस को लेना पड़ा बड़ा एक्शन?

Sonam Wangchuk Hospitalization: दिल्ली के जंतर-मंतर पर बीती रात एक बड़ा एक्शन देखने को मिला। पिछले 20 दिनों से जारी आंदोलन के बीच शनिवार तड़के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल शिफ्ट कर दिया। इसके बाद माहौल पूरी तरह गरमा गया है।

इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बीच सोशल मीडिया पर सोनम वांगचुक का बयान तेजी से वायरल हो रहा है। इस बयान में उन्होंने 20 जुलाई के संसद मार्च को लेकर एक ऐसी बात कही थी, जो आज जंतर-मंतर पर हुई कार्रवाई के बाद लोगों के जेहन में दोबारा तैरने लगी है। आइए आपको बताते हैं कि सोनम वांगचुक ने पिछले दिनों क्या कहा था, आज की घटना से उसका क्या कनेक्शन है और क्या उनके इस बयान से प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं।

’20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा, वरना भूत बनकर आऊंगा…’

भूख हड़ताल के दौरान अपने समर्थकों और देश की जनता को संबोधित करते हुए सोनम वांगचुक ने अपनी शारीरिक स्थिति और आंदोलन के भविष्य को लेकर बड़ी बात कही थी। उन्होंने कहा था, ‘मैं बाहर से भले ही कमजोर हूं, लेकिन अंदर से बहुत मजबूत हूं। मुझे उम्मीद है आप लोग भी अंदर-बाहर दोनों तरफ से बहुत मजबूत होंगे। हमें यह मजबूती 20 जुलाई तक चाहिए, जब बहुत शांतिपूर्ण तरीके से संसद मार्च निकालेंगे। हम एक साथ चलेंगे और देश के मंदिर में अपनी प्रार्थना सुनाएंगे। आप सब चलेंगे हमारे साथ? वादा करते हैं ना? मैं 20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा। अगर नहीं आए और 20 जुलाई का प्रदर्शन सफल नहीं रहा तो मैं ‘भूत’ बनके आऊंगा।’

क्या वांगचुक के इस ‘संकल्प’ से डर गया प्रशासन?

सोनम वांगचुक का यह बयान केवल एक भावनात्मक अपील नहीं थी, बल्कि यह उनके अटूट संकल्प को दिखा रहा था। आज जब 21वें दिन पुलिस ने उन्हें जबरन प्रदर्शन स्थल से उठाकर अस्पताल में भर्ती कराया, तो समर्थकों का कहना है कि प्रशासन कहीं न कहीं वांगचुक के इसी इरादे और 20 जुलाई के ‘संसद मार्च’ की तैयारी से घबरा गया था।

आंदोलन को बिखेरने की कोशिश?

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने वांगचुक को इसलिए हटाया ताकि 20 जुलाई को होने वाले बड़े प्रदर्शन की धार को कमजोर किया जा सके।

वहीं दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस और डॉक्टरों का कहना है कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक दबाव में नहीं, बल्कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश और वांगचुक की जान बचाने के लिए की गई है, क्योंकि 21 दिनों के अनशन के कारण उनके शरीर में पानी की बेहद कमी हो चुकी थी।

अस्पताल में शिफ्टिंग के बाद और मजबूत हुआ समर्थकों का इरादा

सोनम वांगचुक ने अपने बयान में जिस ‘मजबूती’ का जिक्र किया था, वह आज जंतर-मंतर पर साफ देखने को मिली। वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने के बाद भी आंदोलन थमा नहीं है। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने खुद शनिवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठने का ऐलान कर दिया है।

कार्यकर्ताओं का साफ कहना है कि अगर वांगचुक अस्पताल में भी रहते हैं, तो भी 20 जुलाई को मानसून सत्र के पहले दिन संसद मार्च हर हाल में निकाला जाएगा और देश के लोकतंत्र के मंदिर संसद तक अपनी बात पहुंचाई जाएगी।

VIDEO: जबरन घसीटते हुए ले गई पुलिस… आ गया पूरा वीडियो, वांगचुक की पत्नी ने पुलिस को दी ये चेतावनी

Sonam Wangchuk Wife Gitanjali J Angmo: दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल शिफ्ट किए जाने के बाद यह मामला अब और गरमा गया है। वांगचुक के अनशन के 21वें दिन दिल्ली पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई पर उनकी पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। वहीं CJP के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि, दिल्ली पुलिस वांगचुक को जबरन घसीटते हुए अपने साथ ले गई है। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने दिल्ली पुलिस द्वारा सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाने का पूरा वीडियो शेयर किया है।

‘पुलिस ने जबरन घसीटा’… कार्यकर्ताओं का गंभीर आरोप

NEET पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, वांगचुक को ले जाए जाने के तुरंत बाद प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की और आरोप लगाया कि पुलिस वांगचुक को जबरन घसीटते हुए अपने साथ ले गई है।

‘बिना सहमति कुछ भी दिया, तो सीधे ठहराऊंगी जिम्मेदार’

सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराए जाने के कुछ ही घंटों बाद उनकी पत्नी गीतांजलि जे अंगमो अस्पताल पहुंचीं और एक्स पर लिखा, ‘मैं दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में हूं, जहां सोनम वांगचुक को भर्ती कराया गया है। मेरी, उनके परिवार की और पिछले 20 दिनों से उनकी सेहत की निगरानी कर रहे हमारे डॉक्टरों की सहमति के बिना उन्हें मुंह से या नस के जरिए कुछ भी नहीं दिया जाना चाहिए।’

गीतांजलि ने इससे पहले मीडिया से बातचीत में यह भी साफ कर दिया था कि अगर सोनम वांगचुक की सेहत के साथ कोई भी ऊंच-नीच होती है, तो इसके लिए वे सीधे तौर पर पुलिस और प्रशासन को जवाबदेह मानेंगी।

डॉक्टरों ने बताया कैसी है वांगचुक की हालत?

सफदरजंग अस्पताल प्रशासन ने सोनम वांगचुक के हेल्थ बुलेटिन को लेकर एक आधिकारिक बयान जारी किया है। डॉक्टरों के मुताबिक, सोनम वांगचुक फिलहाल होश में हैं और उनकी स्थिति स्थिर है। लेकिन लगातार 21 दिनों तक भूखे रहने के कारण उनके शरीर में पानी की भारी कमी हो गई है, जिससे वे बेहद कमजोर हो चुके हैं।

अस्पताल का कहना है कि उनके शरीर के सभी मानकों को दोबारा सामान्य स्तर पर लाने के लिए उन्हें लगातार डॉक्टरों की निगरानी, मॉनिटरिंग और इलाज की सख्त जरूरत है।

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने लिया एक्शन

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने यह कदम दिल्ली हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद उठाया है। दो दिन पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने वांगचुक की गिरती सेहत से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि ‘देश के किसी भी नागरिक का जीवन बेहद कीमती होता है।’ कोर्ट ने प्रशासन को आदेश दिया था कि वांगचुक की रोजाना क्लिनिकल जांच की जाए और जरूरत पड़ने पर जरूरी मेडिकल हस्तक्षेप भी किया जाए। इसी आदेश के आधार पर शनिवार तड़के पुलिस जंतर-मंतर पहुंची थी।

वांगचुक के बाद अब अभिजीत दिपके बैठेंगे अनशन पर

सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने के बाद भी आंदोलन खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने ऐलान कर दिया है कि सोनम सर को अस्पताल भेजने से यह आंदोलन नहीं रुकेगा। अब वे खुद शनिवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ रहे हैं। दिपके ने साफ किया कि मानसून सत्र के पहले दिन यानी 20 जुलाई को संसद की तरफ निकाला जाने वाला उनका विरोध मार्च अपने तय शेड्यूल के हिसाब से ही होगा।

चारों तरफ पर्दे, सादे कपड़ों में पुलिस और आधी रात का एक्शन… सोनम वांगचुक की मिडनाइट शिफ्टिंग की पूरी इनसाइड स्टोरी

Sonam Wangchuk Shifted to Hospital: दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से जारी पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शनिवार तड़के एक नाटकीय मोड़ पर खत्म हुई। पुलिस ने बेहद सीक्रेट अभियान से वांगचुक को धरना स्थल से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया।

यह केवल एक सामान्य मेडिकल शिफ्टिंग नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक गहरी प्रशासनिक रणनीति और कानूनी मजबूरी थी। आइए जानते हैं जंतर-मंतर पर रात के सन्नाटे में हुए इस पूरे एक्शन की ‘इनसाइड स्टोरी’ कि आखिर कैसे और क्यों ऐसा किया गया।

आधी रात का सन्नाटा और सादे कपड़ों में पुलिस की घेराबंदी

इस पूरे ऑपरेशन की टाइमिंग और तरीका बेहद चौंकाने वाला था। पुलिस नहीं चाहती थी कि दिन के उजाले में कार्रवाई करने से समर्थकों की भारी भीड़ जुट जाए या जंतर-मंतर पर कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़े। इसलिए तड़के का समय चुना गया।

धरना स्थल पर अचानक पहुंचे पुलिस बल के कई जवान सादे कपड़ों में थे ताकि प्रदर्शनकारियों को तुरंत भनक न लगे कि कोई बड़ा एक्शन होने जा रहा है। उन्होंने आते ही वांगचुक के चारों तरफ एक अभेद्य सुरक्षा घेरा बना दिया।

ऑपरेशन ‘पर्दा’: कैमरे और लाइव स्ट्रीमिंग रोकने की कवायद

इंसाइड स्टोरी का सबसे दिलचस्प हिस्सा था सोनम वांगचुक को ले जाने का तरीका। वांगचुक को व्हीलचेयर या स्ट्रेचर पर ले जाने से पहले उनके चारों तरफ बड़े-बड़े पर्दे तान दिए गए।

सोशल मीडिया के इस दौर में पुलिस किसी भी ऐसे वीडियो या लाइव स्ट्रीमिंग को रोकना चाहती थी, जिससे यह संदेश जाए कि वांगचुक के साथ जबरदस्ती की जा रही है। पर्दे के पीछे ही उन्हें सुरक्षित रूप से गाड़ी तक ले जाया गया, जिससे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता कुछ समझ पाते, तब तक गाड़ी निकल चुकी थी।

नए पुलिस कमिश्नर की ताजपोशी और 24 घंटे में एक्शन

इस कार्रवाई के पीछे प्रशासनिक गलियारों में हो रही हलचल भी एक बड़ा कारण थी। जंतर-मंतर पर 20 दिनों से अनशन चल रहा था, लेकिन यह सख्त एक्शन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अनुराग कुमार को दिल्ली का नया पुलिस कमिश्नर बनाए जाने के ठीक एक दिन बाद हुआ। उन्होंने सतीश गोलचा की जगह ली है। नए नेतृत्व के आते ही पेंडिंग पड़े इस संवेदनशील मामले को तुरंत निपटाने का फैसला लिया गया।

दिल्ली हाईकोर्ट का ‘सुरक्षा कवच’ और मेडिकल मजबूरी

पुलिस के इस कदम के पीछे दिल्ली हाईकोर्ट का वह सख्त आदेश था, जिसने पुलिस को कानूनी रूप से मजबूत आधार दिया। दो दिन पहले हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने साफ कहा था कि ‘किसी भी नागरिक का जीवन कीमती है’। कोर्ट ने प्रशासन को वांगचुक की रोजाना क्लिनिकल जांच करने और जरूरत पड़ने पर तुरंत मेडिकल दखल देने का आदेश दिया था।

20 दिनों के उपवास के कारण वांगचुक के शरीर में पानी की गंभीर कमी हो चुकी थी और वे बेहद कमजोर हो चुके थे। डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने कोर्ट के आदेश का हवाला देकर यह कदम उठाया ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए प्रशासन को जिम्मेदार न ठहराया जा सके।

अस्पताल के अंदर का माहौल और पत्नी की चेतावनी

सफदरजंग अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती होने के बाद भी यह मामला शांत नहीं हुआ है। डॉक्टरों ने वांगचुक को स्थिर लेकिन बेहद कमजोर बताया है। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने अस्पताल प्रशासन को दो टूक कह दिया है कि उनकी लिखित सहमति के बिना वांगचुक को कोई भी ड्रिप, दवा या जबरन खाना न दिया जाए। उन्होंने किसी भी ऊंच-नीच के लिए सीधे प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने की बात कही है।

प्रशासन की अगली चुनौती: 20 जुलाई का ‘संसद मार्च’

पुलिस ने वांगचुक को तो अस्पताल पहुंचा दिया और जंतर-मंतर को भी खाली करा लिया है, लेकिन आंदोलनकारियों के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने खुद भूख हड़ताल शुरू कर दी है और ऐलान किया है कि मानसून सत्र के पहले दिन यानी 20 जुलाई को होने वाला ‘संसद मार्च’ किसी भी कीमत पर रुकने वाला नहीं है। अब दिल्ली पुलिस के सामने 20 जुलाई को संसद के घेराव को रोकने की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

20 दिन की भूख हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक की बिगड़ी तबीयत, दिल्ली पुलिस ने अस्पताल में कराया भर्ती

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से अनशन कर रहे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को शनिवार को पुलिस अस्पताल लेकर गई। लंबे समय से जारी भूख हड़ताल के कारण उनकी सेहत को लेकर काफी चिंता जताई जा रही थी। पुलिस द्वारा वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद प्रदर्शन स्थल पर मौजूद अन्य प्रदर्शनकारियों को भी वहां से हटाया जा रहा है। बता दें कि सोनम वांगचुक 28 जून से नीट (NEET) जैसी बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक के मामलों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

वहीं, पुलिस द्वारा सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के कार्यकर्ताओं ने विरोध-प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू कर दी।

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई

यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट में वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर हुई सुनवाई के बाद की गई। दो दिन पहले, कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे इस क्लाइमेट एक्टिविस्ट की रोजाना क्लिनिकल जांच करें। साथ ही यह भी कहा था कि “किसी भी नागरिक की जान कीमती होती है” और उनकी सेहत पर लगातार नजर रखने के साथ जरूरत पड़ने पर तुरंत मेडिकल सहायता दी जानी चाहिए।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, रोजाना जारी होने वाले मेडिकल बुलेटिन में लगातार वांगचुक की हालत को लेकर चिंता जताई गई थी। दो दिन पहले जारी एक अपडेट में डॉक्टरों ने बताया था कि भूख हड़ताल के दौरान उनका वजन 8 किलोग्राम से ज्यादा घट गया है और उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही है।

दिल्ली पुलिस ने दी जानकारी 

वहीं, अब दिल्ली पुलिस ने बताया कि जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को शनिवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, क्योंकि उनके अनशन के 21वें दिन उनकी तबीयत बिगड़ गई थी।

पुलिस ने एक बयान में कहा, “माननीय हाई कोर्ट के आदेशों और एक्सपर्ट मेडिकल सलाह के अनुसार, सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें जरूरी मेडिकल देखभाल के लिए अस्पताल ले जाया गया है। माननीय हाई कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए जब उन्हें ले जाया जा रहा था, तो प्रदर्शनकारियों ने बाधा डालने की कोशिश की, जिससे थोड़ी अफरातफरी मची। हालांकि, पुलिस ने बहुत संयम बरता और पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित रूप से पूरा किया।”

वहीं, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि वे अपना आंदोलन खत्म कर जंतर-मंतर स्थल को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण तरीके से खाली कर दें।

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