Jantar Mantar: अब दिल्ली में जंतर-मंतर पर नहीं होगा धरना-प्रदर्शन, रामलीला मैदान समेत इन 3 जगहों पर कर सकेंगे प्रोटेस्ट

Jantar Mantar News: राजधानी दिल्ली में धरना-प्रदर्शन करने की जगहों को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शन करने के लिए जंतर-मंतर को निर्धारित स्थलों की लिस्ट से हटा दिया है। अब उसकी जगह दिल्ली में प्रोटेस्ट के लिए तीन नए स्थान निर्धारित किए हैं। पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने इस संबंध में सोमवार (12 अक्टूबर) को एक स्थायी आदेश जारी किया है। इसके मुताबिक विरोध प्रदर्शन और धरने आयोजित करने के लिए तीन नए स्थान निर्धारित किए हैं। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान शामिल हैं।

आदेश के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मौजूदा निर्धारित स्थल के विकल्प के तौर पर विरोध प्रदर्शन और धरने आयोजित करने के लिए उपयुक्त स्थानों की समीक्षा करने के वास्ते एक समिति गठित की थी। आदेश में कहा गया है कि समिति की सिफारिशों के आधार पर जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल के रूप में गैर अधिसूचित किया गया है।

अब यहां कर सकेंगे प्रदर्शन

जंतर-मंतर को लिस्ट से निकालकर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान को प्रदर्शन आयोजित करने के लिए तीन नए स्थानों के तौर पर तय किया गया है। पुलिस के अनुसार, इन तीनों स्थानों पर विरोध प्रदर्शन और धरने आयोजित करने के लिए विस्तृत एवं संशोधित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) अलग से जारी की जाएगी। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए लोगों को जुटाने की अपीलों के बीच राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जा रही है।

जंतर-मंतर पर हमेशा होता रहता है प्रदर्शन

जंतर-मंतर लंबे समय से दिल्ली में राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समूहों के विरोध प्रदर्शनों के लिए प्रमुख स्थान रहा है। यहां अलग-अलग मुद्दों को लेकर धरने और प्रदर्शन आयोजित किए जाते रहे हैं। हालांकि, दिल्ली पुलिस के ताजा आदेश के बाद जंतर-मंतर अब निर्धारित प्रदर्शन स्थल नहीं रहेगा। अइस बदलाव के बाद विरोध प्रदर्शन करने वाले संगठनों को नए निर्धारित स्थलों के अनुसार अपनी गतिविधियों की योजना बनानी होगी।

दिल्ली में यह बदलाव ऐसे समय किया गया है, जब जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के लिए लोगों को जुटाने की अपीलों के बाद सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जा रही है। राजधानी के संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए अहम है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में आदेश के पीछे किसी एक विशिष्ट कारण का विस्तृत उल्लेख नहीं है। इसलिए इस फैसले को किसी खास राजनीतिक दल या प्रदर्शन से सीधे जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।

प्रदर्शन करने वालों के लिए क्या बदलेगा?

जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों को अब नए निर्धारित स्थानों पर प्रदर्शन की योजना बनानी होगी। इससे विरोध प्रदर्शन के आयोजन, स्थान के चयन और सुरक्षा प्रबंधन की व्यवस्था में बदलाव आएगा। हालांकि, नए स्थलों पर प्रदर्शन आयोजित करने के लिए अनुमति, समय, भीड़ की संख्या और अन्य शर्तों से जुड़े नियम क्या होंगे, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध आदेश के आधार पर अलग से सत्यापित की जानी चाहिए।

दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है, “भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने नागरिकों के विरोध-प्रदर्शन के अधिकार के लिए मौजूदा तय जगह के अलावा अन्य उपयुक्त जगहों की जांच करने के लिए एक समिति बनाई थी। समिति की सिफारिशों के आधार पर जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर हटा दिया गया है। विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने के लिए तीन नई जगहों रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD ग्राउंड (पूर्वी दिल्ली) को तय किया गया है। इन तीन जगहों पर विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने के लिए विस्तृत और संशोधित SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) अलग से जारी की जाएगी।”

तीन नए धरना-प्रदर्शन केंद्रों की डिटेल्स

दिल्ली पुलिस के आदेश के अनुसार, राजधानी में विरोध प्रदर्शन के लिए तीन नए निर्धारित स्थल होंगे:-

1. रामलीला मैदान: दिल्ली का रामलीला मैदान लंबे समय से बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों, रैलियों और जन आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। अब इसे निर्धारित प्रदर्शन स्थलों में शामिल किया गया है।

2. बुराड़ी मैदान: बुराड़ी क्षेत्र में स्थित मैदान को भी धरना-प्रदर्शन के लिए निर्धारित किया गया है। यहां प्रदर्शन आयोजित करने की प्रक्रिया संशोधित SOP के तहत तय की जाएगी।

3. सीबीडी मैदान, पूर्वी दिल्ली: पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान को तीसरे निर्धारित स्थल के रूप में चुना गया है। इसके जरिए राजधानी में प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

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2022 के पुराने आदेश में किया गया संशोधन

दिल्ली पुलिस ने बताया कि नया आदेश 28 अप्रैल 2022 को जारी किए गए पुराने स्थायी आदेश में आंशिक संशोधन करता है। नए स्थलों पर धरना-प्रदर्शन की व्यवस्था को लेकर आगे अलग से गाइडलाइंस जारी किए जाएंगे। इस बदलाव के बाद प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थानों और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। हालांकि, उपलब्ध आदेश में नई SOP के सभी डिटेल्स नियमों का उल्लेख नहीं किया गया है।

Delhi Protest: दिल्ली में CJP प्रदर्शन से पहले वकीलों की हिरासत पर बवाल, SCAORA और SCBA ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत से की ये अपील

सुप्रीम कोर्ट के पास शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के लिए जुटे वकीलों को हिरासत में लिए जाने की खबर ने न्यायिक व्यवस्था और विरोध-प्रदर्शन की आजादी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में लॉयर एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन (LAFC) ने भी चिंता जताई है। एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA), सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) और बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन के साथ मिलकर शनिवार (10 अक्टूबर) को दिल्ली में पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन पर लगाई गई पाबंदियों पर चिंता जताई है।

CJI सूर्यकांत से दखल देने की अपील

10 अक्टूबर को जारी एक प्रेस रिलीज में LAFC ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से इस मामले में तुरंत दखल देने की अपील की है। एसोसिएशन ने कहा कि हिरासत में लिए गए वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, उन्हें कानूनी मदद दी जाए और जिन वकीलों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।

एसोसिएशन ने कहा, “शांतिपूर्ण विरोध का जवाब ताकत, गोपनीयता या अंधाधुंध हिरासत से नहीं दिया जा सकता।” साथ ही, एसोसिएशन ने कानून के मुताबिक जवाबदेही तय करने की भी मांग की।

इसके साथ ही LAFC ने हिरासत में लिए गए हर वकील के नाम, उनके ठिकाने, सुरक्षा और उन्हें हिरासत में लेने के कानूनी आधार की जानकारी मांगी। एसोसिएशन ने उन वकीलों को रिहा करने की मांग की जिन्हें हिरासत में लेने का कोई ठोस और कानूनी आधार नहीं था। इसके अलावा, उन्हें वकील, परिवार के सदस्यों और जरूरी मेडिकल मदद तक पहुंच देने की भी मांग की।

पुलिस कार्रवाई से जुड़े सबूत सुरक्षित रखने की मांग

एसोसिएशन ने विरोध-प्रदर्शन, कथित बल प्रयोग और उसके बाद की हिरासत से जुड़े CCTV फुटेज, बॉडी-कैमरा रिकॉर्डिंग, पुलिस स्टेशन के रिकॉर्ड, हिरासत रजिस्टर और अन्य सबूतों को सुरक्षित रखने की मांग की। एसोसिएशन ने बल प्रयोग की खबरों—खासकर महिला वकीलों के खिलाफ—की एक तय समय-सीमा वाली, स्वतंत्र जांच की भी मांग की, और जहां भी गैर-कानूनी कार्रवाई साबित हो, वहां जवाबदेही तय करने और उचित राहत देने की बात कही।

प्रदर्शन करने पर वकीलों को परेशान न किया जाए

LAFC ने यह भी मांग की है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के कारण किसी वकील के खिलाफ बदले की भावना से FIR दर्ज न की जाए। वकीलों को डराने-धमकाने या उनके पेशेवर काम पर असर डालने वाली कार्रवाई से भी सुरक्षा मिलनी चाहिए।

इसके अलावा, एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास भविष्य में होने वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए स्पष्ट और पारदर्शी नियम बनाने की मांग की है, ताकि प्रदर्शन करने वालों के अधिकारों और सुरक्षा का ध्यान रखा जा सके।

इस बीच, बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन ने भी एक प्रस्ताव पास करके केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शनों और लोगों की आवाजाही पर लगाई गई पाबंदियों को तुरंत हटाने की मांग की। एसोसिएशन ने मौजूदा हालात को “अघोषित इमरजेंसी” करार देते हुए कहा कि ये हालात इमरजेंसी के दिनों की याद दिलाते हैं।

प्रस्ताव में कहा गया, “यह तय किया गया है कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शन पर लगाई गई मौजूदा पाबंदियों को तुरंत हटाया जाए। लोगों की आवाजाही पर लगाई गई सभी पाबंदियां भी फौरन हटाई जाएं, क्योंकि ये मौजूदा सरकार की असंवैधानिक और गैर-कानूनी गतिविधियां हैं।”

एसोसिएशन ने बताया कि यह प्रस्ताव 10 अक्टूबर को हुई एक आपातकालीन बैठक में सर्वसम्मति से पास किया गया। साथ ही, एसोसिएशन ने इस प्रस्ताव की एक कॉपी बॉम्बे बार एसोसिएशन और एडवोकेट्स एसोसिएशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया के अध्यक्षों को भेजने का भी फैसला किया।

सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने भी मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को पत्र लिखकर वकीलों को हिरासत में लिए जाने का मुद्दा उठाया है। एसोसिएशन ने कहा कि ऐसी खबरें सामने आई हैं कि पुलिस ने वरिष्ठ और युवा वकीलों के साथ-साथ महिला वकीलों को भी हिरासत में लिया। आरोप है कि हिरासत में लेने वाले कुछ पुलिसकर्मियों ने अपनी वर्दी पर बैज भी नहीं लगा रखे थे।

एसोसिएशन ने हिरासत में लिए गए लोगों के ठिकाने का पता बताने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें वकीलों व परिवार के सदस्यों से मिलने की सुविधा देने की मांग की। साथ ही, यह भी कहा कि अगर हिरासत में रखने का कोई कानूनी आधार नहीं है, तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।

इसी तरह, SCBA ने भी CJI से अनुरोध किया कि वे अधिकारियों के साथ इस मामले पर बात करें, हिरासत में लिए गए वकीलों का पता लगाएं और हिरासत में लेने की परिस्थितियों व कथित बल प्रयोग की जांच करें। इस प्रस्ताव पर मानद सचिव प्रज्ञा बघेल ने हस्ताक्षर किए।

ये मांगें ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रस्तावित “जंतर-मंतर 2.0” प्रदर्शन के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सामने आई हैं। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के लिए बुलाया गया है, जिन पर मतदाता सूची में गड़बड़ी और ‘विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया’ (Special Intensive Revision process) से जुड़े आरोप हैं।

मेट्रो पर लगी पाबंदियों को लेकर अवमानना ​​याचिका

इसके अलावा, वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के खिलाफ अवमानना ​​की कार्रवाई की मांग करते हुए याचिका दायर की। उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट के 9 अक्टूबर के निर्देशों का पालन नहीं किया गया।

10 अक्टूबर को सुबह 8.17 बजे डायरी नंबर 63801/2026 के तहत दायर इस याचिका में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और DMRC की चेयरपर्सन डी. थारा को प्रतिवादी बनाया गया है। इसमें संविधान के अनुच्छेद 129 और ‘कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971’ की धारा 12 का हवाला दिया गया है।

त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि कोर्ट के इस स्पष्टीकरण के बावजूद कि सेवाओं को रेगुलेट किया जा सकता है लेकिन पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता, मेट्रो स्टेशन के गेट बंद रखे गए। बता दें कि 9 अक्टूबर को CJI सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा था कि “मेट्रो ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाई जाएगी” और अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे ट्रांसपोर्ट से जुड़े नियमों का प्रचार करें और चार दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट सौंपें।

लगभग 500 लोगों को हिरासत में लिया गया

ANI के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने एहतियाती उपायों के तहत समूहों में आ रहे लगभग 500 लोगों को हिरासत में लिया और आपराधिक बैकग्राउंड वाले करीब 50 लोगों को पकड़ा। बता दें कि नई दिल्ली को 20 जोन में बांटा गया था और स्टेडियमों में डिटेंशन सेंटर बनाए गए थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कनॉट प्लेस में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या लगभग 200 थी।

मुंबई से आने के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में ले लिया गया। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि उसकी कानूनी टीम की प्रमुख रत्ना सिंह और तीन अन्य वकीलों को बिना कारण बताए हिरासत में ले लिया गया। पार्टी ने गुरुग्राम स्थित आवास से ध्रुव राठी को हिरासत में लिए जाने की भी निंदा की।

सुरक्षा के लिए RAF और CRPF की तैनाती

सुरक्षा व्यवस्था में रैपिड एक्शन फोर्स, दिल्ली पुलिस पिंक फोर्स और CRPF शामिल थे। साथ ही मोहन एस्टेट में ड्रोन, मजबूत बैरिकेड्स और स्पाइक स्ट्रिप्स भी तैनात किए गए थे। इस दौरान CJP ने प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों के लिए 12-सूत्रीय एडवाइजरी जारी कर हिंसा, तोड़फोड़, आगजनी, नफरत फैलाने वाले भाषण और अफवाहों से बचने, आपातकालीन रास्तों को खाली रखने, कानूनी निर्देशों का पालन करने और हिरासत में लिए जाने पर कानूनी सहायता लेने का आग्रह किया है।

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चारों तरफ पर्दे, सादे कपड़ों में पुलिस और आधी रात का एक्शन… सोनम वांगचुक की मिडनाइट शिफ्टिंग की पूरी इनसाइड स्टोरी

Sonam Wangchuk Shifted to Hospital: दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से जारी पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शनिवार तड़के एक नाटकीय मोड़ पर खत्म हुई। पुलिस ने बेहद सीक्रेट अभियान से वांगचुक को धरना स्थल से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया।

यह केवल एक सामान्य मेडिकल शिफ्टिंग नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक गहरी प्रशासनिक रणनीति और कानूनी मजबूरी थी। आइए जानते हैं जंतर-मंतर पर रात के सन्नाटे में हुए इस पूरे एक्शन की ‘इनसाइड स्टोरी’ कि आखिर कैसे और क्यों ऐसा किया गया।

आधी रात का सन्नाटा और सादे कपड़ों में पुलिस की घेराबंदी

इस पूरे ऑपरेशन की टाइमिंग और तरीका बेहद चौंकाने वाला था। पुलिस नहीं चाहती थी कि दिन के उजाले में कार्रवाई करने से समर्थकों की भारी भीड़ जुट जाए या जंतर-मंतर पर कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़े। इसलिए तड़के का समय चुना गया।

धरना स्थल पर अचानक पहुंचे पुलिस बल के कई जवान सादे कपड़ों में थे ताकि प्रदर्शनकारियों को तुरंत भनक न लगे कि कोई बड़ा एक्शन होने जा रहा है। उन्होंने आते ही वांगचुक के चारों तरफ एक अभेद्य सुरक्षा घेरा बना दिया।

ऑपरेशन ‘पर्दा’: कैमरे और लाइव स्ट्रीमिंग रोकने की कवायद

इंसाइड स्टोरी का सबसे दिलचस्प हिस्सा था सोनम वांगचुक को ले जाने का तरीका। वांगचुक को व्हीलचेयर या स्ट्रेचर पर ले जाने से पहले उनके चारों तरफ बड़े-बड़े पर्दे तान दिए गए।

सोशल मीडिया के इस दौर में पुलिस किसी भी ऐसे वीडियो या लाइव स्ट्रीमिंग को रोकना चाहती थी, जिससे यह संदेश जाए कि वांगचुक के साथ जबरदस्ती की जा रही है। पर्दे के पीछे ही उन्हें सुरक्षित रूप से गाड़ी तक ले जाया गया, जिससे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता कुछ समझ पाते, तब तक गाड़ी निकल चुकी थी।

नए पुलिस कमिश्नर की ताजपोशी और 24 घंटे में एक्शन

इस कार्रवाई के पीछे प्रशासनिक गलियारों में हो रही हलचल भी एक बड़ा कारण थी। जंतर-मंतर पर 20 दिनों से अनशन चल रहा था, लेकिन यह सख्त एक्शन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अनुराग कुमार को दिल्ली का नया पुलिस कमिश्नर बनाए जाने के ठीक एक दिन बाद हुआ। उन्होंने सतीश गोलचा की जगह ली है। नए नेतृत्व के आते ही पेंडिंग पड़े इस संवेदनशील मामले को तुरंत निपटाने का फैसला लिया गया।

दिल्ली हाईकोर्ट का ‘सुरक्षा कवच’ और मेडिकल मजबूरी

पुलिस के इस कदम के पीछे दिल्ली हाईकोर्ट का वह सख्त आदेश था, जिसने पुलिस को कानूनी रूप से मजबूत आधार दिया। दो दिन पहले हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने साफ कहा था कि ‘किसी भी नागरिक का जीवन कीमती है’। कोर्ट ने प्रशासन को वांगचुक की रोजाना क्लिनिकल जांच करने और जरूरत पड़ने पर तुरंत मेडिकल दखल देने का आदेश दिया था।

20 दिनों के उपवास के कारण वांगचुक के शरीर में पानी की गंभीर कमी हो चुकी थी और वे बेहद कमजोर हो चुके थे। डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने कोर्ट के आदेश का हवाला देकर यह कदम उठाया ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए प्रशासन को जिम्मेदार न ठहराया जा सके।

अस्पताल के अंदर का माहौल और पत्नी की चेतावनी

सफदरजंग अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती होने के बाद भी यह मामला शांत नहीं हुआ है। डॉक्टरों ने वांगचुक को स्थिर लेकिन बेहद कमजोर बताया है। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने अस्पताल प्रशासन को दो टूक कह दिया है कि उनकी लिखित सहमति के बिना वांगचुक को कोई भी ड्रिप, दवा या जबरन खाना न दिया जाए। उन्होंने किसी भी ऊंच-नीच के लिए सीधे प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने की बात कही है।

प्रशासन की अगली चुनौती: 20 जुलाई का ‘संसद मार्च’

पुलिस ने वांगचुक को तो अस्पताल पहुंचा दिया और जंतर-मंतर को भी खाली करा लिया है, लेकिन आंदोलनकारियों के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने खुद भूख हड़ताल शुरू कर दी है और ऐलान किया है कि मानसून सत्र के पहले दिन यानी 20 जुलाई को होने वाला ‘संसद मार्च’ किसी भी कीमत पर रुकने वाला नहीं है। अब दिल्ली पुलिस के सामने 20 जुलाई को संसद के घेराव को रोकने की सबसे बड़ी चुनौती होगी।