एक्टर डिनो मोरिया के अरेस्ट होने के दावे का पूरा सच आया सामने, मीठी नदी घोटाला वाला केस भी जान लीजिए

बॉलीवुड एक्टर डिनो मोरिया इन दिनों मीठी नदी की सफाई से जुड़े 65 करोड़ रुपये के घोटाला मामले में को लेकर चर्चा में है। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 2 अक्टूबर को उनसे करीब आठ घंटे तक पूछताछ की। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उनकी गिरफ्तारी का दावा किया गया था। डिनो मोरिया ने खुद इन खबरों को गलत बताया। वहीं EOW की ओर से भी गिरफ्तारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल मीठी नदी से जुड़े मामले में जांच जारी है। आइए जानते हैं क्या है मीठी नदी की सफाई घोटाले से जुड़ा मामला

डिनो मोरिया को नहीं किया गया गिरफ्तार

डिनो मोरिया ने मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा गिरफ्तारी या हिरासत में लिए जाने की खबरों को खारिज कर दिया। इससे पहले कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि बांद्रा स्थित उनके घर पर पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। मोरिया की गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद एक्टर ने व्हाट्सऐप के जरिए संबंधित मीडिया आउटलेट को बताया कि ये खबरें “सच नहीं हैं”। बाद में सामने आई रिपोर्ट में भी मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की ओर से डीनो मोरिया की गिरफ्तारी की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी।

EOW के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जांच के दौरान सामने आई जानकारियों के आधार पर डीनो मोरिया से पूछताछ की जा रही थी। इस मामले में आगे की कार्रवाई जांच पूरी होने के बाद तय की जाएगी।

 

क्या है पूरा मामला

ये मामला मुंबई की मीठी नदी की सफाई और सुधार से जुड़े ठेकों में कथित आर्थिक गड़बड़ी को लेकर EOW जांच कर रहा है। जांच एजेंसी ठेकेदारों, बिचौलियों और कुछ नगर निगम अधिकारियों की भूमिका के साथ-साथ प्रोजेक्ट से जुड़े ठेकों और पेमेंट की भी जांच कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में बीएमसी को करीब 65.54 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा किया गया है।

पहले भी हो चुकी है पूछताछ

इस मामले में डीनो मोरिया से पहले भी पूछताछ हो चुकी है। मई 2025 में EOW ने उनसे और उनके भाई सैंटिनो मोरिया से सवाल किए थे। जांच के दौरान अधिकारियों को कुछ ऐसे फोन रिकॉर्ड मिले थे, जिनसे कथित तौर पर मामले से जुड़े लोगों के साथ उनके संपर्क की जानकारी सामने आई थी। इसके अलावा, जांच एजेंसी सैंटिनो की कंपनी UBO Ridez और केस से जुड़े लोगों के बीच हुए पैसों के लेनदेन की भी जांच कर रही थी।

इस मामले की जांच में केतन कदम का नाम भी सामने आया है, जिन्हें 2025 में हिरासत में लिया गया था। जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मोरिया के घर पर तलाशी ली थी। यह कार्रवाई मीठी नदी से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं की बड़ी जांच के तहत की गई थी।

Vijay Varma: किसी ने कहा कार्टून… तो कोई बोला मेल उर्फी जावेद, विजय वर्मा का ऑल-ब्लैक कट-आउट लुक देख यूजर्स की छूटी हंसी

फर्जी CSR डोनेशन रैकेट पर ED की बड़ी कार्रवाई, 4 राज्यों में 8 ठिकानों पर की छापेमारी

केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुंबई जोन-I ने फर्जी CSR डोनेशन रैकेट से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात और दिल्ली-NCR में कुल 8 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया है। यह कार्रवाई डॉ. धर्मेंद्र कुमार चंद्रदेव सिंह और अन्य से जुड़े मामले में की जा रही है।

ED की तलाशी के दायरे में मार्केट ऑपरेटर्स, ट्रस्टी, बिचौलिए और CSR फंड से जुड़े अन्य लोगों के ठिकाने शामिल हैं। शुरुआती जांच में कथित तौर पर सैकड़ों करोड़ रुपये के फर्जी CSR नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

PMLA के तहत शुरू हुई जांच

ED ने यह जांच 12 जुलाई 2026 को जुहू पुलिस स्टेशन, ग्रेटर मुंबई में दर्ज FIR नंबर 1044/2026 के आधार पर शुरू की है। FIR में धर्मेंद्र कुमार चंद्रदेव सिंह के खिलाफ Maharashtra Medical Practitioners Act, 1961, National Medical Commission Act, 2019 और Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 के तहत आरोप दर्ज हैं।मामले में IPC की धारा 420, 467, 471 और 475 के अनुरूप अपराधों का भी उल्लेख है, जो PMLA की अनुसूची में शामिल हैं।

12वीं पास व्यक्ति ने करीब 30 साल तक खुद को बताया डॉक्टर

ED की जांच के मुताबिक, धर्मेंद्र कुमार सिंह के पास मान्यता प्राप्त मेडिकल योग्यता या मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण नहीं था और उन्होंने कथित तौर पर केवल 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की थी। इसके बावजूद वह करीब तीन दशकों तक खुद को डॉक्टर बताते रहे और ‘Doctor’ की उपाधि का इस्तेमाल करते रहे।

जांच एजेंसी के मुताबिक, इसी पहचान और डॉक्टर की सामाजिक विश्वसनीयता का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने चैरिटेबल ट्रस्ट और अन्य संस्थाओं का नेटवर्क खड़ा किया। इन संस्थाओं के जरिए स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी CSR गतिविधियों के नाम पर PSUs और निजी कंपनियों से बड़ी मात्रा में CSR फंड जुटाए गए।

CSR फंड के डायवर्जन का कथित नेटवर्क

ED की जांच में सामने आए प्रमुख बिंदुओं के मुताबिक—

ट्रस्ट, ट्रस्टी, बिचौलिए, कमीशन एजेंट और उपकरण सप्लायर का एक नेटवर्क कथित तौर पर बनाया गया था।इन ट्रस्टों का इस्तेमाल मुख्य रूप से PSUs से CSR डोनेशन हासिल करने के लिए किया गया।कंपनियों के सामने वैध CSR प्रोजेक्ट के तौर पर प्रस्ताव रखे गए, लेकिन आरोप है कि प्रोजेक्ट या तो आंशिक रूप से किए गए या प्राप्त फंड के अनुपात में काम नहीं हुआ।कथित तौर पर वेंडर बिलों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया और अतिरिक्त रकम को फर्जी या शेल संस्थाओं के जरिए बाहर निकालने की कोशिश की गई। इसके साथ ही ये भी जानकारी मिली कि CSR फंड हासिल कराने या लेन-देन में मध्यस्थता करने वाले बिचौलियों और ब्रोकरों को कमीशन/किकबैक दिए जाने का भी आरोप है।

निजी कंपनियों के CSR फंड को कैश में लौटाने का आरोप

जांच में CSR फंड के कथित कैश रीसाइक्लिंग मॉडल का भी पता चला है। ED के अनुसार, निजी कंपनियों से मिले CSR योगदान की बड़ी रकम कथित तौर पर नकद वापस कर दी जाती थी, जबकि ट्रस्ट अपने पास केवल एक छोटा हिस्सा कमीशन के तौर पर रखते थे।यानी आरोप है कि CSR व्यवस्था का इस्तेमाल अकाउंटेड रकम को अनअकाउंटेड कैश में बदलने के माध्यम के रूप में किया गया।

करीब 200 करोड़ रुपये CSR फंड की रूटिंग का अनुमान

ED की प्रारंभिक जांच के मुताबिक, इस कथित नेटवर्क के जरिए लगभग ₹200 करोड़ के CSR फंड को रूट किए जाने की जानकारी सामने आई है।तलाशी के दौरान बरामद दस्तावेजों और अन्य सामग्री के आधार पर जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि CSR फंड किन संस्थाओं और व्यक्तियों के जरिए ट्रांसफर किए गए, कितनी रकम कथित तौर पर डायवर्ट या रीसाइकिल की गई और इसमें कौन-कौन से बिचौलिए तथा लाभार्थी शामिल थे।

यह भी पढ़ें: फर्जी GST-ITC घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई: जमशेदपुर और कोलकाता में 4 ठिकानों पर छापेमारी

फर्जी GST-ITC घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई: जमशेदपुर और कोलकाता में 4 ठिकानों पर छापेमारी

केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रांची जोनल ऑफिस ने GST ITC Scam मामले में बड़ी कार्रवाई की है। दरअसल, ED की टीम ने आज यानी 30 सितंबर 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत चार ठिकानों पर सर्च और जब्ती की कार्रवाई शुरू की।

जमशेदपुर और कोलकाता में छापेमारी

ED के मुताबिक, तलाशी की कार्रवाई झारखंड के जमशेदपुर में तीन और पश्चिम बंगाल के कोलकाता में एक ठिकाने पर की जा रही है। ये परिसर ज्ञान चंद जायसवाल उर्फ बबलू जायसवाल, संजय पारेख (ज्ञान चंद जायसवाल के अकाउंटेंट) और अन्य संबंधित लोगों से जुड़े बताए गए हैं।

फर्जी GST ITC लेने का आरोप

यह कार्रवाई शिव कुमार देवरा और अन्य के खिलाफ दर्ज GST ITC Scam मामले से जुड़ी है। जांच में आरोप है कि ज्ञान चंद जायसवाल ने बिना किसी वास्तविक माल की आपूर्ति के फर्जी GST इनवॉयस हासिल कर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ लिया।

ED की जांच के अनुसार, कथित तौर पर ऐसी गैर-मौजूद संस्थाओं से इनवॉयस लिए गए, जिन्होंने वास्तव में कोई माल सप्लाई नहीं किया था। एजेंसी इन लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। फिलहाल ED की सर्च और सीजर कार्रवाई जारी है।

यह भी पढ़ें: यूपी, पंजाब, हरियाणा, MP से अगले 2-3 दिनों में मानसून की विदाई! उधर मौसम विभाग ने इन राज्यों में दिया भारी बारिश का अलर्ट