पावर सेक्टर में 2030 के बाद SCADA इंपोर्ट बंद होगा, देश में बनाने की तैयारी; इन स्टॉक्स पर रखें नजर

सरकार ने पावर सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले SCADA सिस्टम का आयात 2030 के बाद बंद करने का फैसला किया है। लक्ष्य 2028-29 तक इसका स्वदेशी विकल्प तैयार करना है। अभी इन सिस्टम में लोकल कंटेंट 20% से भी कम है। सरकार इसे बढ़ाना चाहती है।

आप SCADA को पावर ग्रिड का कंट्रोल सिस्टम समझ सकते हैं। इससे पावर प्लांट, सब-स्टेशन और ग्रिड की रियल टाइम निगरानी होती है। जरूरत पड़ने पर कई इक्विपमेंट को दूर से कंट्रोल भी किया जा सकता है।

स्वदेशीकरण क्यों जरूरी हुआ?

यह पूरा मामला सिर्फ मेक इन इंडिया तक सीमित नहीं है। इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर सिक्योरिटी भी बड़ी वजह है। अभी SCADA के कई अहम सॉफ्टवेयर और कंपोनेंट विदेशों से आते हैं। ऐसे में अपडेट, तकनीकी मदद और साइबर सिक्योरिटी सपोर्ट के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भरता रहती है।

ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान यह चिंता और बढ़ी। पावर मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मई 2025 में 8-10 दिनों के दौरान भारत के पावर सिस्टम पर करीब 2 लाख साइबर अटैक की कोशिशें हुई थीं। ऐसे में सरकार चाहती है कि देश के पावर ग्रिड को चलाने वाली अहम टेक्नोलॉजी पर भारत का अपना नियंत्रण हो।

2028-29 तक तैयार होगा स्वदेशी सिस्टम

CEA ने SCADA के स्वदेशीकरण के लिए रोडमैप तैयार किया है। इसमें 38 सॉफ्टवेयर मॉड्यूल और 25 हार्डवेयर कंपोनेंट शामिल हैं।

सरकार National SCADA Mission या एक स्पेशल वर्किंग ग्रुप बनाने पर भी विचार कर रही है। इसमें Power Grid, GRID-India और घरेलू टेक्नोलॉजी कंपनियों को साथ लाया जा सकता है।

किन स्टॉक्स पर नजर रखें?

शेयर बाजार में इस थीम का सबसे सीधा नाम Power Grid है। प्रस्तावित मॉडल में कंपनी का नाम सीधे आया है। उसके पास ग्रिड ऑटोमेशन और SCADA का अनुभव भी है।

इसके अलावा Siemens, Hitachi Energy India, GE Vernova T&D और ABB India जैसी कंपनियां भी ग्रिड ऑटोमेशन और SCADA के कारोबार में हैं। स्वदेशी सिस्टम के विकास और पुराने सिस्टम के अपग्रेड से इन्हें अवसर मिल सकते हैं। TCS जैसी IT कंपनियों के लिए भी सॉफ्टवेयर, साइबर सिक्योरिटी और सिस्टम इंटीग्रेशन का मौका बन सकता है।

कंपनीसंभावित फायदा
Power Grid
SCADA, ग्रिड ऑटोमेशन और इंटीग्रेशन

Siemens
SCADA और एनर्जी मैनेजमेंट

Hitachi Energy India
ग्रिड ऑटोमेशन और SCADA

GE Vernova T&D Indiaट्रांसमिशन और ग्रिड ऑटोमेशन
ABB Indiaपावर ऑटोमेशन और डिजिटल ग्रिड
TCSसॉफ्टवेयर, साइबर सिक्योरिटी और इंटीग्रेशन

निवेशकों के लिए क्या अहम?

अभी इसे सीधे खरीदने का संकेत मानना ठीक नहीं है। असली फायदा तब साफ होगा जब सरकार कंपनियों का चयन करेगी और SCADA के अलग-अलग हिस्सों के लिए ऑर्डर जारी होंगे। फिलहाल Power Grid समेत SCADA, ग्रिड ऑटोमेशन और साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी कंपनियों पर नजर रखी जा सकती है।

सीधी बात है। सरकार अब पावर ग्रिड की अहम टेक्नोलॉजी पर विदेशी निर्भरता घटाना चाहती है। Operation Sindoor के दौरान सामने आए साइबर खतरे ने इस जरूरत को और गंभीर बना दिया। इससे आने वाले वर्षों में पावर और टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए बड़ा घरेलू बाजार बन सकता है।

DRDO Missile: सरकार ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को मंजूरी दी, इन 7 डिफेंस स्टॉक्स पर रखें नजर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

बिहार से गुजरात के लिए एक और ट्रेन, 26 अगस्त से दौड़ेगी नई अमृत भारत एक्सप्रेस, जानिए इसका रूट, स्टॉपेज और टाइमिंग

Ahmedabad-Bhagalpur Amrit Bharat Express: भारतीय रेलवे भागलपुर और अहमदाबाद के बीच एक नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन शुरू करने जा रहा है। इससे बिहार और गुजरात के बीच रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी। ईस्टर्न रेलवे के मुताबिक, नई ट्रेन से यात्रियों की बढ़ती मांग पूरी होगी और देश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा।

ईस्टर्न रेलवे ने कहा, “भागलपुर को ‘भारत की सिल्क सिटी’ के नाम से जाना जाता है और यह बिहार का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है। नई ट्रेन से भागलपुर की गुजरात के बड़े औद्योगिक और आर्थिक केंद्र अहमदाबाद से रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी।”

बता दें कि भारतीय रेलवे ने मौजूदा 09447/09448 अहमदाबाद-पटना-अहमदाबाद क्लोन स्पेशल ट्रेन को अब नियमित ट्रेन के तौर पर चलाने का फैसला किया है। इसे 19423/19424 अहमदाबाद-भागलपुर-अहमदाबाद साप्ताहिक अमृत भारत एक्सप्रेस के रूप में चलाया जाएगा।

कल से शुरू होगी बिहार और अहमदाबाद के बीच ट्रेन

इसका परिचालन अहमदाबाद से 26 अगस्त, 2026 से प्रत्येक बुधवार को तथा भागलपुर से 28 अगस्त, 2026 से प्रत्येक शुक्रवार को किया जायेगा।

इस गाड़ी में LSLRD के 2, पेट्रीकार का 1, जनरल सेकेंड क्लास के 11 तथा स्लीपर क्लास के 08 कोचों सहित कुल 22 कोच लगाये जायेंगे।

भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस: दूरी और सफर का समय

भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस पूरी यात्रा लगभग 36 घंटे 10 मिनट में तय करेगी। इसमें जनरल अनरिजर्व्ड और स्लीपर क्लास के डिब्बे होंगे। ट्रेन 110 से 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी।

भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस: रूट, कितनी बार चलेगी और कहां रुकेगी?

भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस हफ्ते में एक दिन चलेगी। रास्ते में यह कई प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी। इनमें आनंद, छायापुरी, गोधरा, दाहोद, रतलाम, भवानी मंडी, रामगंज मंडी, कोटा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, हिंडौन सिटी, बयाना, ईदगाह आगरा, टूंडला, गोविंदपुरी, सुबेदारगंज, पं. दीन दयाल उपाध्याय, बक्सर, आरा, दानापुर, पटना, बख्तियारपुर, मोकामा, किऊल, अभयपुर, जमालपुर और सुल्तानगंज शामिल हैं।

गाड़ी नंबर 19423 अहमदाबाद-भागलपुर अमृत भारत एक्सप्रेस का शेड्यूल

ट्रेन नंबर 19423 अहमदाबाद-भागलपुर वीकली अमृत भारत एक्सप्रेस 26 अगस्त, 2026 से हर बुधवार शाम 6:30 बजे अहमदाबाद से रवाना होगी और यह गुरूवार को 21.13 बजे डीडीयू, 22.30 बजे बक्सर, 23.15 बजे आरा, 23.50 बजे दानापुर, शुक्रवार को 00.43 बजे पटना स्टेशन, 01.25 बजे बख्तियारपुर, 02.08 बजे मोकामा, 03.30 बजे किउल, 04.01 बजे अभयपुर, 04.30 बजे जमालपुर, 05.13 बजे सुलतानगंज रूकते हुए 06.40 बजे भागलपुर पहुंचेगी।

गाड़ी नंबर 19424 भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस का शेड्यूल

वापसी की दिशा में, ट्रेन नंबर 19424 भागलपुर-अहमदाबाद वीकली अमृत भारत एक्सप्रेस 28 अगस्त, 2026 से हर शुक्रवार शाम 4:45 बजे भागलपुर से रवाना होगी और यह 17.03 बजे सुलतानगंज, 17.48 बजे 18.13 बजे अभयपुर, 19.15 बजे किउल, 19.56 बजे मोकामा, 20.30 बजे बख्तियारपुर, 21.58 बजे पटना स्टेशन 22.21 बजे दानापुर, 22.53 बजे आरा, 23.41 बजे बक्सर, शनिवार को 02.53 बजे डीडीयू सहित अन्य स्टेशनों पर रूकते हुए रविवार को 05.25 बजे अहमदाबाद पहुंचेगी।

यह भी पढ़ें: सरकार ने लोकल इंडस्ट्री को DRDO की मिसाइल तकनीक ट्रांसफर करने की मंजूरी दी! रक्षा क्षेत्र में भारत के इस बड़े धमाके को समझिए

DRDO Missile: सरकार ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को मंजूरी दी, इन 7 डिफेंस स्टॉक्स पर रखें नजर

DRDO Missile: भारत के डिफेंस सेक्टर के लिए 25 अगस्त का दिन अहम रहा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO की डेवलप सभी पारंपरिक मिसाइल सिस्टम्स की टेक्नोलॉजी भारतीय कंपनियों को ट्रांसफर करने को मंजूरी दे दी। इससे देश में मिसाइलों का प्रोडक्शन बढ़ाने और विदेशी हथियारों पर निर्भरता घटाने का रास्ता खुलेगा।

इसका फायदा सिर्फ मिसाइल बनाने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। रडार, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉन्चर, गाइडेंस सिस्टम और दूसरे उपकरण बनाने वाली कंपनियों को भी नए ऑर्डर मिल सकते हैं। हालांकि, हर कंपनी को टेक्नोलॉजी या ऑर्डर मिलेगा, यह अभी तय नहीं है। कंपनियों को योग्यता और दूसरी जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी।

Bharat Dynamics

इस खबर से सबसे सीधा जुड़ा नाम सरकारी डिफेंस कंपनी भारत डायनेमिक्स यानी BDL है। कंपनी पहले से DRDO की कई मिसाइलों का उत्पादन करती है। आकाश, नाग, अस्त्र और MRSAM जैसी मिसाइल प्रणालियों से इसका कारोबार जुड़ा है।

देश में मिसाइल उत्पादन बढ़ता है तो BDL को नए ऑर्डर मिलने का फायदा हो सकता है। कंपनी के पास पहले से जरूरी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और अनुभव भी है। हालांकि, निजी कंपनियों की एंट्री से आगे प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।

Bharat Electronics

सरकारी कंपनी BEL सिर्फ मिसाइल नहीं बनाती। मिसाइल सिस्टम में रडार, इलेक्ट्रॉनिक्स और कंट्रोल सिस्टम भी जरूरी होते हैं। इस हिस्से में BEL की मजबूत मौजूदगी है।

आकाश और MRSAM जैसे सिस्टम में कंपनी की अहम भूमिका है। इसलिए मिसाइल उत्पादन बढ़ने के साथ रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की मांग बढ़ी तो BEL को भी फायदा मिल सकता है।

L&T

प्राइवेट सेक्टर में L&T बड़ा नाम है। कंपनी मिसाइल सिस्टम, लॉन्चर, रडार और एयर डिफेंस सिस्टम से जुड़े काम करती है। आकाश मिसाइल के लिए भी कंपनी कई अहम हिस्सों का उत्पादन कर चुकी है।

सरकार अगर प्राइवेट कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़ाती है तो L&T मजबूत दावेदार हो सकती है। कंपनी के पास बड़े डिफेंस प्रोजेक्ट संभालने का अनुभव और क्षमता दोनों हैं।

Bharat Forge

भारत फोर्ज का डिफेंस कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। Kalyani Strategic Systems के जरिए कंपनी हथियार, गोला-बारूद, एयर डिफेंस और दूसरे डिफेंस सिस्टम पर काम करती है।

मिसाइल और एयर डिफेंस का उत्पादन बढ़ा तो कंपनी को नए मौके मिल सकते हैं। इसे सीधे मिसाइल कंपनी की बजाय बड़े डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग प्ले के तौर पर देखना बेहतर होगा।

Solar Industries

प्राइवेट सेक्टर की Solar Industries डिफेंस में प्रोपेलेंट, विस्फोटक और दूसरे हाई-एनर्जी मटेरियल बनाती है। कंपनी ब्रह्मोस मिसाइल के लिए प्रोपेलेंट से जुड़े काम में भी रही है।

मिसाइलों का प्रोडक्शन बढ़ेगा तो उनके लिए जरूरी सामग्री की मांग भी बढ़ सकती है। इसलिए Solar को मिसाइल सप्लाई चेन के एक अहम खिलाड़ी के तौर पर देखा जा सकता है।

Data Patterns

डेटा पैटर्न्स डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स पर काम करती है। कंपनी रडार, गाइडेंस सिस्टम, टेस्टिंग सिस्टम और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाती है।

मिसाइलों में लगे सीकर और गाइडेंस सिस्टम काफी अहम होते हैं। इसलिए मिसाइल उत्पादन बढ़ने पर ऐसे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की मांग बढ़ सकती है।

Astra Microwave

Astra Microwave रडार और रेडियो फ्रीक्वेंसी सिस्टम बनाती है। मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम में इनकी अहम भूमिका होती है।

इसलिए मिसाइल उत्पादन बढ़ने का फायदा सीधे न सही, लेकिन डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ती मांग के जरिए कंपनी को मिल सकता है।

एक नजर में

कंपनीमुख्य फायदा
भारत डायनेमिक्समिसाइल उत्पादन
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स
रडार और इलेक्ट्रॉनिक्स

L&T
मिसाइल और एयर डिफेंस

भारत फोर्जडिफेंस मैन्युफैक्चरिंग
Solar Industriesप्रोपेलेंट और विस्फोटक
Data Patternsमिसाइल इलेक्ट्रॉनिक्स
Astra Microwaveरडार और रेडियो फ्रीक्वेंसी

निवेशकों के लिए जरूरी बात

अभी इसे सीधे शेयर खरीदने का संकेत नहीं मानना चाहिए। सरकार ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को मंजूरी दी है। आगे कंपनियों का चयन होगा। फिर प्रोडक्शन और ऑर्डर की तस्वीर साफ होगी।

फिलहाल BDL, BEL, L&T, भारत फोर्ज, Solar Industries, Data Patterns और Astra Microwave पर नजर रखी जा सकती है। असली फायदा किसे मिलेगा, यह आने वाले ऑर्डर और उनके असर से कंपनी की कमाई पर पता चलेगा।

Market Mantra : कंप्लीट सर्किल के गुरमीत चड्ढा से जाने, किन सेक्टर्स और शेयरों पर फोकस करना बेहतर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अपोलो माइक्रो सिस्टम्स ने नई डिफेंस कंपनी में 34% हिस्सेदारी खरीदी, वैज्ञानिक वीके सारस्वत करेंगे अगुवाई

Apollo Micro Systems: डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर की कंपनी Apollo Micro Systems ने नई रक्षा तकनीक कंपनी ShauryAstra Defence Systems में 34% हिस्सेदारी खरीदी है। कंपनी ने इसके लिए ₹34,000 का निवेश किया है। ShauryAstra का फोकस ऐसी रक्षा तकनीकों पर रहेगा, जिनकी जरूरत भारतीय सेना को है, लेकिन अभी उनके स्वदेशी समाधान उपलब्ध नहीं हैं।

ShauryAstra में 34% हिस्सेदारी

Apollo Micro Systems ने ShauryAstra के 3,400 इक्विटी शेयर खरीदे हैं। इनकी फेस वैल्यू ₹10 प्रति शेयर है। इस निवेश के बाद ShauryAstra में Apollo Micro Systems की हिस्सेदारी 34% हो गई है।

ShauryAstra को 21 अगस्त 2026 को शामिल किया गया था। अब यह Apollo Micro Systems की एसोसिएट कंपनी बन गई है।

डॉ. वी.के. सारस्वत का मिलेगा अनुभव

नई कंपनी का वैज्ञानिक नेतृत्व डॉ. वी.के. सारस्वत करेंगे। वह DRDO के पूर्व महानिदेशक और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के पूर्व सचिव रह चुके हैं। वह रक्षा मंत्री के पूर्व वैज्ञानिक सलाहकार भी रहे हैं।

डॉ. सारस्वत भारत के कई बड़े रक्षा कार्यक्रमों से जुड़े रहे हैं। इनमें पृथ्वी, धनुष, प्रहार और अग्नि-5 मिसाइल कार्यक्रम शामिल हैं। वह भारत के बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस कार्यक्रम, तेजस और INS अरिहंत से भी जुड़े रहे हैं।

फोकस होगा अगली पीढ़ी की रक्षा तकनीक पर

ShauryAstra संपूर्ण हथियार प्रणालियों, लंबी दूरी की प्रणालियों और मानव रहित प्लेटफॉर्म्स पर काम करेगी। कंपनी का फोकस एडवांस्ड डिफेंस टेक्नोलॉजी विकसित करने पर रहेगा।

खास बात यह है कि कंपनी सिर्फ मौजूदा जरूरतों पर काम नहीं करेगी। वह भविष्य के युद्धक्षेत्र में आने वाली तकनीकी जरूरतों और संभावित कमियों की भी पहचान करेगी।

Apollo की मौजूदा क्षमता का मिलेगा फायदा

Apollo Micro Systems पिछले चार दशक से डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार में है। कंपनी मिशन-क्रिटिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, एवियोनिक्स, रग्ड कंप्यूटिंग, फ्यूज, एक्ट्यूएटर्स और वेपन इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में काम करती है।

ShauryAstra रिसर्च और सिस्टम डिजाइन पर ज्यादा फोकस करेगी। वहीं Apollo Group की इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और सिस्टम इंटीग्रेशन क्षमता का इस्तेमाल उत्पादन के लिए किया जा सकेगा।

कंपनी का लक्ष्य क्या है?

Apollo Micro Systems अब सिर्फ कंपोनेंट और सबसिस्टम बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी संपूर्ण स्वदेशी हथियार प्रणालियों और प्लेटफॉर्म्स के विकास में बड़ी भूमिका बनाना चाहती है।

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर बी. करुणाकर रेड्डी के मुताबिक ShauryAstra इसी दिशा में अगला कदम है। यह पहल भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के मुताबिक भी है।

Apollo Micro Systems के शेयर NSE पर 0.14% गिरकर ₹384 प्रति शेयर पर बंद हुए।

Hyundai Motor India पर नोमुरा बुलिश, दोहराई ‘बाय’ रेटिंग; कहा- नई लॉन्चिंग्स से वॉल्यूम को मिलेगा बूस्ट

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

BrahMos और Agni-V में कौन ज्यादा ताकतवर? दोनों मिसाइलों का काम बिल्कुल अलग, समझिए फर्क

भारत के पास दुनिया की सबसे ताकतवर और खतरनाक मिसाइल है। जिसकी गति और मारक क्षमता देखकर पूरी दुनिया हैरान रहती है। भारत के इन मिसाइलों का एक नजारा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में दिखा था।  पिछले 40 साल में भारत ने मिसाइल तकनीक विकसित करने की शुरुआत से लेकर आधुनिक और बेहद ताकतवर मिसाइल सिस्टम तैयार करने तक लंबा सफर तय किया है। आज देश जमीन, समुद्र और हवा से होने वाले खतरों का मुकाबला करने की अपनी क्षमता लगातार बढ़ा रहा है। इस सफर में ब्रह्मोस और अग्नि-5 भारत की मिसाइल ताकत के दो बड़े उदाहरण हैं।

हालांकि ब्रह्मोस और अग्नि-5 दोनों ही भारत की ताकतवर मिसाइलों में शामिल हैं, लेकिन इन्हें एक-दूसरे से मुकाबला करने के लिए नहीं बनाया गया है। दोनों का काम और इस्तेमाल अलग है।

ब्रह्मोस का इस्तेमाल पारंपरिक सैन्य अभियानों में दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है। वहीं, अग्नि-5 भारत की रणनीतिक सुरक्षा का अहम हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन को किसी बड़े हमले से रोकना और भारत की जवाबी कार्रवाई की क्षमता को मजबूत करना है।

इसलिए ब्रह्मोस और अग्नि-5 की तुलना उनकी ताकत के आधार पर करने के बजाय यह समझना जरूरी है कि दोनों मिसाइलें अलग-अलग भूमिकाएं निभाती हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से दोनों का अपना अलग और महत्वपूर्ण स्थान है।

अलग-अलग मिशन तय करते हैं दोनों मिसाइलों की भूमिका

ब्रह्मोस और अग्नि-5 के बीच अंतर समझने का सबसे आसान तरीका यह जानना है कि दोनों को किस मकसद से बनाया गया है। दोनों आधुनिक और ताकतवर मिसाइलें हैं, लेकिन युद्ध में उनका इस्तेमाल अलग-अलग काम के लिए होता है।

ब्रह्मोस नाम ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्क्वा नदियों के नाम से लिया गया है। यह भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस की कंपनी एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया ने मिलकर विकसित की है। यह एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, यानी यह आवाज की रफ्तार से भी कई गुना तेज उड़ सकती है।

ब्रह्मोस का इस्तेमाल पारंपरिक सैन्य अभियानों में दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है। इसमें युद्धपोत, एयरफील्ड, रडार स्टेशन और सैन्य कमांड सेंटर जैसे लक्ष्य शामिल हो सकते हैं। यह मिसाइल भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना में शामिल है और भारत की प्रमुख स्ट्राइक मिसाइलों में से एक है।

वहीं, अग्नि-5 एक लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है। इसे डीआरडीओ ने भारत की रणनीतिक सुरक्षा और दुश्मन को हमले से रोकने की क्षमता मजबूत करने के लिए विकसित किया है।

ब्रह्मोस के विपरीत अग्नि-5 का इस्तेमाल आम युद्ध के मैदान में किसी ठिकाने पर हमला करने के लिए नहीं किया जाता। इसका मुख्य उद्देश्य लंबी दूरी से आने वाले बड़े खतरों के खिलाफ भारत की जवाबी कार्रवाई की क्षमता को मजबूत करना है। यह भारत की परमाणु प्रतिरोध नीति का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल अलग-अलग तरीके से काम करती हैं

ब्रह्मोस और अग्नि-5 दोनों ही मिसाइलें हैं, लेकिन इनके उड़ने और टारगेट तक पहुंचने का तरीका बिल्कुल अलग है। इसी वजह से दोनों का इस्तेमाल भी अलग-अलग काम के लिए किया जाता है।

ब्रह्मोस एक क्रूज मिसाइल है। यह वायुमंडल के अंदर एक विमान की तरह उड़ते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती है। इसमें रैमजेट इंजन का इस्तेमाल किया जाता है, जो इसे बहुत तेज गति से उड़ने में मदद करता है। यह कम ऊंचाई पर भी उड़ सकती है, जिससे दुश्मन के लिए इसे समय रहते पहचानना और रोकना मुश्किल हो सकता है।

वहीं, अग्नि-5 एक बैलिस्टिक मिसाइल है। यह ब्रह्मोस से बिल्कुल अलग तरीके से लक्ष्य तक पहुंचती है। लॉन्च होने के बाद यह बहुत ऊंचाई तक जाती है और फिर तेज गति से नीचे आते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती है। इस तरह यह लॉन्च वाली जगह से हजारों किलोमीटर दूर तक स्थित लक्ष्य को निशाना बनाने में सक्षम होती है।

आसान शब्दों में कहें तो ब्रह्मोस तेज गति से कम ऊंचाई पर उड़कर सटीक हमला करने वाली मिसाइल है, जबकि अग्नि-5 लंबी दूरी की रणनीतिक मिसाइल है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत की सुरक्षा और दुश्मन को हमले से रोकने की क्षमता को मजबूत करना है।

स्पीड और रेंज

ब्रह्मोस अपनी तेज रफ्तार के लिए जानी जाती है। यह करीब मैक 3 की गति से उड़ सकती है। इतनी तेज गति के कारण यह कुछ ही समय में अपने लक्ष्य तक पहुंच सकती है और दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिलता है। कम ऊंचाई पर उड़ने और लक्ष्य के करीब पहुंचने के दौरान दिशा बदलने की क्षमता के कारण इसे रोकना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

दूसरी ओर, अग्नि-5 को लंबी दूरी के लिए बनाया गया है। इसकी मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर से ज्यादा बताई जाती है। इसका इस्तेमाल युद्ध के मैदान में तुरंत हमला करने के बजाय भारत की लंबी दूरी की रणनीतिक प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करने के लिए किया जाता है।

आसान भाषा में समझें तो ब्रह्मोस की सबसे बड़ी ताकत उसकी रफ्तार और सटीक हमला करने की क्षमता है, जबकि अग्नि-5 की खासियत उसकी लंबी दूरी और रणनीतिक भूमिका है।

कौन सी मिसाइल ज्यादा ताकतवर है?

ब्रह्मोस और अग्नि-5 की तुलना करते समय अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि दोनों में से कौन ज्यादा ताकतवर है। लेकिन इसका सीधा जवाब देना आसान नहीं है, क्योंकि दोनों मिसाइलों को अलग-अलग उद्देश्यों के लिए बनाया गया है। इसलिए इनकी ताकत का आकलन मिशन के हिसाब से करना ज्यादा सही होगा।

अगर लक्ष्य दुश्मन के युद्धपोत, एयरबेस या सैन्य कमांड सेंटर पर तेजी से हमला करना है, तो ब्रह्मोस ज्यादा उपयोगी है। इसकी तेज रफ्तार, सटीक निशाना लगाने की क्षमता और कम ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता इसे एक प्रभावी क्रूज मिसाइल बनाती है।

वहीं, अगर बात लंबी दूरी की रणनीतिक सुरक्षा और दुश्मन को बड़े हमले से रोकने की है, तो अग्नि-5 की भूमिका अहम हो जाती है। इसकी 5,000 किलोमीटर से ज्यादा की मारक क्षमता भारत की रणनीतिक मिसाइल ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस भूमिका में मिसाइल की रफ्तार से ज्यादा उसकी लंबी दूरी और रणनीतिक क्षमता मायने रखती है।

इसलिए ब्रह्मोस और अग्नि-5 को एक-दूसरे का प्रतिद्वंद्वी कहना सही नहीं होगा। ब्रह्मोस भारत की तेज और सटीक पारंपरिक हमला करने की क्षमता को मजबूत करती है, जबकि अग्नि-5 लंबी दूरी की रणनीतिक प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करती है। दोनों की भूमिकाएं अलग हैं और इसी वजह से दोनों भारत की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।

आधी वजनी लेकिन दोगुनी घातक! भारत की BrahMos-NG के सामने दुश्मन के एयर डिफेंस फेल, जानिए ब्रह्मोस और NG में क्या है फर्क

भारत की ब्रह्मोस मिसाइल ने दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक के रूप में अपनी खास पहचान बनाई है। भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना में शामिल होने के बाद से इसने देश की हमलावर क्षमता को काफी मजबूत किया है। अब इसी कड़ी में एक नया नाम चर्चा का विषय बना है और वो है ‘ब्रह्मोस एनजी’ (BrahMos Next Generation)। आइए समझते हैं भारत के इस नए विनाशक हथियार की जर्नी और ये भी जानते हैं कि ये मूल ब्रह्मोस से कितनी अलग है, क्या-क्या खास है इसमें?

क्यों पड़ी ब्रह्मोस NG को विकसित करने की जरूरत?

आपतो बता दें कि ब्रह्मोस मिसाइल जमीन पर हमला करने और समुद्री जहाजों को निशाना बनाने वाले ऑपरेशन में काफी सफल रही। इसके बावजूद अपने भारी-भरकम आकार और वजन की वजह से इसे ले जाने सकने वाले विमान कम थे। काफी वजन होने की वजह से भारतीय वायु सेना के मौजूदा विमानों में मूल ब्रह्मोस मिसाइल को सिर्फ सुखोई सु-30एमकेआई (Su-30MKI) फाइटर जेट पर ही तैनात किया जा सकता है। ब्रह्मोस एनजी का डेवलपमेंट इसी चुनौती से पार पाने के लिए किया गया है। सुपरसोनिक रफ्तार को बरकरार रखते हुए इसके छोटे आकार और कम वजन की वजह से भारत इसे कई तरह के लड़ाकू और नौसैनिक विमानों पर तैनात करने की योजना बना रहा है। इससे सशस्त्र बलों को अपने अभियानों में अधिक संख्या में मिसाइलों का इस्तेमाल करने की सुविधा मिलेगी।

आकार और वजन में बड़ा बदलाव

दोनों मिसाइलों के बीच सबसे बड़ा अंतर उनके आकार और वजन का है। मूल ब्रह्मोस मिसाइल लगभग 8.4 मीटर लंबी है और इसके हवा से दागे जाने वाले वर्जन का वजन करीब 3 टन है। इसके उलट ब्रह्मोस एनजी करीब 6 मीटर लंबी होगी और इसका वजन करीब 1.3 से 1.6 टन के बीच होगा। अपने छोटे और कॉम्पैक्ट डिजाइन की वजह से इसे कई अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर ले जाना और तैनात करना बहुत आसान हो जाएगा। जो विमान अभी मूल ब्रह्मोस को ले जाने में सक्षम नहीं हैं, वे भी इस नई मिसाइल को ले जा सकेंगे। इसके अलावा आकार छोटा होने से एक ही फाइटर जेट एक भारी मिसाइल के बजाय कई ब्रह्मोस एनजी मिसाइलें ले जा सकता है जिससे लड़ाकू विमान की हमलावर क्षमता काफी बढ़ जाती है।

रफ्तार और रेंज में नहीं होगी कोई कमी

मिसाइल का आकार छोटा करने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि इसकी रफ्तार से कोई समझौता किया गया है। ब्रह्मोस एनजी से उसी सुपरसोनिक क्षमता को बनाए रखने की उम्मीद है जिसने पुरानी ब्रह्मोस को दुनिया भर में फेसम बनाया है। मौजूदा ब्रह्मोस करीब 3 मैक की रफ्तार से उड़ान भरती है, जिससे यह सबसोनिक क्रूज मिसाइलों की तुलना में अपने टारगेट तक बहुत तेजी से पहुंचती है। इसकी तेज स्पीड दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को रिएक्शन देने का बेहद कम वक्त देती है और इसीलिए इसे हवा में रोकना बेहद कठिन हो जाता है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के मुताबिक ब्रह्मोस एनजी भी करीब 3 मैक की गति से उड़ान भरेगी।

रेंज के मामले में भी मूल ब्रह्मोस मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) में भारत के शामिल होने के बाद अपनी शुरुआती 290 किमी की सीमा से काफी आगे बढ़ चुकी है। ब्रह्मोस एनजी भी उसी के समकक्ष ऑपरेटिंग रेंज देगी, जबकि इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, गाइडेंस सिस्टम और टोटोल एफिशियंसी में सुधार देखने को मिलेगा।

कई फाइटर जेट्स से दागी जा सकेगी मिसाइल

मूल ब्रह्मोस मोबाइल लैंड लॉन्चर्स, भारतीय नौसेना के युद्धपोतों और विशेष रूप से संशोधित सु-30एमकेआई लड़ाकू विमानों से फायर होती है। हल्की ब्रह्मोस एनजी सु-30एमकेआई के अलावा तेजस एमके1ए (Tejas Mk1A), एचएएल तेजस एमके2 (HAL Tejas Mk2), टीइडीबीएफ (TEDBF) और भविष्य में एएमसीए (AMCA) जैसे उन्नत लड़ाकू विमानों के साथ इंटिग्रेट हो सकती है। इससे भारतीय वायु सेना अपनी पूरी फ्लीट के माध्यम से इन सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों को तैनात कर सकेगी।

गाइडेंस, सटीकता और पेलोड क्षमता

ब्रह्मोस ने न सिर्फ अपनी रफ्तार बल्कि अपनी अचूक क्षमता की वजह से भी फेमस है। यह चलते हुए जहाजों और जमीन पर बने दुश्मन के ठिकानों को सटीक निशाना बनाने के लिए इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम, सैटेलाइट नेविगेशन और टर्मिनल फेज़ में एक्टिव रडार सीकर का इस्तेमाल करती है। ब्रह्मोस एनजी इन्हीं सिद्धांतों पर काम करेगी, लेकिन नए इलेक्ट्रॉनिक्स और छोटे आकार की वजह से इसके ऑनबोर्ड सिस्टम टारगेट को खोजने और नेविगेशन में ज्यादा बेहतर होंगे।

आकार छोटा होने की वजह से ब्रह्मोस एनजी का पेलोड वजन थोड़ा कम होगा। मूल ब्रह्मोस करीब 200 से 300 किग्रा का पारंपरिक वॉरहेड ले जाती है, जो भारी सुरक्षा वाले सैन्य ठिकानों को नष्ट करने के लिए पर्याप्त है। ब्रह्मोस एनजी लगभग 200 किग्रा का थोड़ा हल्का वॉरहेड ले जाएगी। पेलोड हल्का होने के बावजूद यह युद्धपोतों, कमांड सेंटरों, रडार प्रतिष्ठानों और एयर डिफेंस सिस्टम जैसे हाई वैल्यू टारगेट्स का काम तमाम कर पाएगी।

एक ही विमान से दागी जा सकेंगी कई मिसाइलें

ब्रह्मोस एनजी का सबसे बड़ा रणनीतिक फायदा यह है कि एक विमान अब ज्यादा मिसाइलें ले जा सकेगा। पहले वाली ब्रह्मोस भारी होने की वजह से एक सु-30एमकेआई विमान आमतौर पर एक मिशन के दौरान सिर्फ एक ही मिसाइल ले जा पाता है। हल्की ब्रह्मोस एनजी इस समीकरण को बदल देगी। वही विमान अब तीन ब्रह्मोस एनजी मिसाइलें ले जा सकेगा।

कौन सी मिसाइल है ज्यादा बेहतर?

ये बात मिसाइल के स्पेसिफिकेशन के बजाय मिशन की जरूरत पर डिपेंड करती है। मूल ब्रह्मोस एक बेहद प्रभावी मिसाइल है जो पहले से ही तीनों सेनाओं में सेवा दे रही है। यह अधिकतम मारक क्षमता वाले अभियानों के लिए इस्तेमाल होती रहेगी। ब्रह्मोस एनजी, मूल मिसाइल की जगह लेने के लिए नहीं बल्कि उसके सप्लिमेंट के रूप में काम करेगी। जहां अधिकतम विनाशात्मक क्षमता की जरूरत होगी वहां मूल ब्रह्मोस का इस्तेमाल किया जाएगा और जहां लड़ाकू विमानों की क्षमता बढ़ाने और एक साथ कई मिसाइलें दागने की जरूरत होगी वहां ब्रह्मोस एनजी काम आएगी। भारतीय सशस्त्र बल इन दोनों मिसाइलों का एक साथ इस्तेमाल करेंगे।

क्या भारत की Agni-6 मिसाइल धरती के किसी भी कोने तक पहुंच सकती है? समझिए ICBM की पूरी साइंस

Agni-6: भारत के अग्नि मिसाइल प्रोग्राम में अग्नि-6 को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। इसे भारत की भविष्य की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के रूप में देखा जाता है। सबसे ज्यादा चर्चा इसकी संभावित मारक क्षमता को लेकर है। कहा जा रहा है कि इस नई मिसाइल की रेंज बहुत ज्यादा हो सकती है। लेकिन यह हजारों किलोमीटर की दूरी कैसे तय कर सकती है? कई रिपोर्टों में अग्नि-6 की संभावित रेंज 8,000 से 12,000 किलोमीटर तक बताई गई है। हालांकि इसकी फाइनल ऑपरेशनल रेंज को लेकर अभी आधिकारिक और डिटेल्स जानकारी सामने नहीं आई है।

सवाल यह है कि कोई मिसाइल आखिर हजारों किलोमीटर की दूरी कैसे तय कर सकती है? इसके पीछे रॉकेट प्रोपल्शन, मल्टी-स्टेज रॉकेट तकनीक, बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी, गाइडेंस सिस्टम और सबसे मुश्किल चरणों में से एक वायुमंडल में री-एंट्री का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

Agni-6 मिसाइल क्या है?

अग्नि-6 को भारत की अगली पीढ़ी की लंबी दूरी की मिसाइल प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जाता है। इसे भविष्य की ICBM क्षमता से जोड़ा जाता है। हालांकि, इस प्रोजेक्ट की कई तकनीकी जानकारियां अभी सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट नहीं हैं। कहा जाता है कि Agni-6 एक ICBM (इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल) है जिसे भारत भविष्य में विकसित करेगा। इसमें भारत की Agni मिसाइलों की रिसर्च के दौरान विकसित की गई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा।

भारत ने अग्नि मिसाइल परिवार के अलग-अलग वर्जन के विकास के दौरान रॉकेट, गाइडेंस, नेविगेशन, एयरोडायनामिक्स, कंट्रोल सिस्टम और हाई-टेम्परेचर मटेरियल जैसी टेक्नोलॉजी में लगातार प्रगति की है। इन्हीं क्षेत्रों में हासिल विशेषज्ञता किसी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है।

Agni-6 को कैसे विकसित किया गया?

Agni सीरीज में इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी में DRDO और भारतीय एयरोस्पेस और डिफेंस इंडस्ट्री की कोशिशों से कई दशकों से लगातार सुधार हो रहा है। इसके लिए सॉलिड रॉकेट प्रोपल्शन, गाइडेंस, मटीरियल साइंस, एयरोडायनामिक्स और कंट्रोल सिस्टम में बहुत ज्यादा महारत की जरूरत होती है। इन टेक्नोलॉजीज़ में स्पेस इंजीनियरिंग से काफी समानताएं हैं। हालांकि, इनका इस्तेमाल अलग-अलग तरह से किया जाता है।

हजारों किलोमीटर दूर तक कैसे पहुंचती है बैलिस्टिक मिसाइल?

बैलिस्टिक मिसाइल का काम सामान्य विमान की तरह लगातार इंजन चलाकर पूरी दूरी तय करना नहीं होता। इसका एक बड़ा हिस्सा बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी के आधार पर तय होता है। मिसाइल के शुरुआती चरण में रॉकेट इंजन उसे तेज गति प्रदान करते हैं। ये काफी ऊंचाई तक पहुंचाते हैं। जब उसका पावर्ड फ्लाइट चरण पूरा हो जाता है, तो वाहन गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में एक निर्धारित घुमावदार पथ पर आगे बढ़ता है। यानी शुरुआती चरण में रॉकेट इंजन मुख्य भूमिका निभाते हैं। जबकि उसके बाद गति, गुरुत्वाकर्षण और निर्धारित रूट्स के आधार पर मिसाइल बहुत लंबी दूरी तय कर सकती है।

Agni-6 धरती पर कहीं भी उड़ सकती है?

अग्नि-6 को लेकर कभी-कभी यह दावा किया जाता है कि यह धरती के किसी भी हिस्से तक पहुंचने में सक्षम हो सकती है। इसका अर्थ तकनीकी तौर पर यह नहीं है कि मिसाइल सचमुच पृथ्वी के हर स्थान पर पहुंच सकती है। जब कहा जाता है कि Agni-6 “धरती पर कहीं भी” उड़ सकती है, तो इसका मतलब है कि इसमें बहुत दूर तक उड़ने की क्षमता है।

दरअसल, कोई भी बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च की जगह, ट्रेजेक्टरी और पेलोड के आधार पर इतनी दूर तक नहीं उड़ सकती। इस टेक्नोलॉजी के पीछे की फिजिक्स काफी आसान है। जब बैलिस्टिक व्हीकल अपनी पावर्ड फ्लाइट की ऊंचाई तक पहुंच जाता है, तो वह ग्रेविटी के असर से आर्क ट्रेजेक्टरी (घुमावदार रास्ते) पर उड़ता है।

टेस्ट के लिए कई रॉकेट स्टेज का इस्तेमाल 

मल्टी-स्टेजिंग एक आसान आइडिया पर आधारित है। बिना इस्तेमाल वाले हिस्से को अलग करके व्हीकल का वजन कम करना। हर रॉकेट स्टेज में व्हीकल के फ्यूल टैंक और इंजन होते हैं। जब फ्यूल खत्म हो जाता है, तो उसे अलग किया जा सकता है। बाकी बचा रॉकेट हल्का हो जाएगा और ज्यादा स्पीड पकड़ सकेगा। किसी भी बैलिस्टिक मिसाइल की वास्तविक पहुंच कई कारकों पर निर्भर करती है।

इनमें लॉन्च लोकेशन, प्रक्षेपवक्र, पेलोड और मिसाइल की वास्तविक क्षमता शामिल हैं। इसलिए ‘कहीं भी पहुंचने’ जैसी भाषा आमतौर पर इसकी अत्यधिक लंबी दूरी की क्षमता को दर्शाने के लिए इस्तेमाल की जाती है। अग्नि-6 की वास्तविक रेंज और ऑपरेशनल क्षमता को लेकर आधिकारिक तौर पर जितनी जानकारी उपलब्ध है, उससे आगे के दावों को सावधानी से देखना जरूरी है।

मल्टी-स्टेज रॉकेट टेक्नोलॉजी क्यों है अहम?

लंबी दूरी के रॉकेट और मिसाइल सिस्टम में मल्टी-स्टेजिंग एक महत्वपूर्ण तकनीक है। इसका मूल सिद्धांत काफी सरल है। इस हिस्से का ईंधन खत्म हो गया है। उसे अलग कर दिया जाए ताकि बाकी वाहन का वजन कम हो सके। जब किसी चरण का ईंधन खत्म हो जाता है, तो उस खाली चरण को अलग किया जा सकता है। इससे आगे बढ़ रहे वाहन का वजन कम होता है। उपलब्ध ऊर्जा का ज्यादा प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकता है। यही वजह है कि लंबी दूरी की रॉकेट सिस्टम में मल्टी-स्टेज डिजाइन का इस्तेमाल महत्वपूर्ण माना जाता है।

अग्नि परिवार के विकास में DRDO की भूमिका

भारत के अग्नि मिसाइल परिवार का विकास कई दशकों में हुआ है। इसमें DRDO और भारतीय एयरोस्पेस एवं डिफेंस उद्योग से जुड़े वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने गाइडेंस, नियंत्रण, संरचनात्मक डिजाइन और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में काम किया है।

लंबी दूरी की मिसाइल तैयार करने के लिए केवल शक्तिशाली इंजन पर्याप्त नहीं होता। उसे सही दिशा में बेहद सटीक तरीके से नियंत्रित करना, उड़ान के दौरान उसकी स्थिति निर्धारित करना और अलग-अलग परिस्थितियों में उसके ढांचे को सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है। इनमें से कई तकनीकी क्षेत्र अंतरिक्ष अभियानों में इस्तेमाल होने वाली इंजीनियरिंग से जुड़े हैं।

धरती पर Agni-6 की री-एंट्री के समय क्या होता है?

तेज रफ्तार वाली उड़ान में ‘री-एंट्री’ (वापसी) को सबसे मुश्किल चरणों में से एक माना जाता है। जैसे ही यान पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, उसे लगातार ज्यादा घनी हवा का सामना करना पड़ता है। रफ्तार बढ़ने के साथ-साथ, हवा के घर्षण और दबाव से बहुत ज्यादा गर्मी पैदा होती है। इसका मतलब है कि पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा एंट्री करने के दौरान होने वाली कठोर स्थितियों को झेलने के लिए यान को खास तरह की सामग्रियों की जरूरत होती है। किसी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल के लिए वायुमंडल में दोबारा प्रवेश यानी री-एंट्री बेहद चुनौतीपूर्ण चरण होता है।

सिर्फ लंबी दूरी ही नहीं, सटीकता भी जरूरी

किसी ICBM की क्षमता का आकलन केवल उसकी रेंज से नहीं किया जाता। लंबी दूरी तय करने के साथ-साथ उसे निर्धारित रूट्स पर बनाए रखना और लक्ष्य क्षेत्र तक आवश्यक सटीकता के साथ पहुंचाना भी महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए गाइडेंस और कंट्रोल सिस्टम अहम भूमिका निभाते हैं। मिसाइल की उड़ान के दौरान उसका रूट कंट्रोल करने और आवश्यक सुधार करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों की जरूरत होती है।

अग्नि-6 को लेकर बड़ी बातें

अग्नि-6 को भारत की भविष्य की लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता से जोड़ा जाता है। लेकिन इसकी सटीक रेंज, अंतिम डिजाइन, तैनाती और अन्य ऑपरेशनल क्षमताओं को लेकर सार्वजनिक जानकारी सीमित है। 8,000 से 12,000 किलोमीटर जैसी रेंज का उल्लेख विभिन्न रिपोर्टों में मिलता है। लेकिन इसे अग्नि-6 की आधिकारिक रूप से घोषित अंतिम ऑपरेशनल रेंज मानना उचित नहीं होगा।

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कुल मिलाकर, अग्नि-6 जैसी लंबी दूरी की मिसाइल की क्षमता के पीछे केवल एक शक्तिशाली रॉकेट नहीं। बल्कि मल्टी-स्टेज प्रोपल्शन, बैलिस्टिक उड़ान, गाइडेंस एवं कंट्रोल, एयरोडायनामिक्स और हाई-स्पीड री-एंट्री तकनीक जैसी कई जटिल तकनीकों का संयोजन होता है। यही तकनीकें किसी मिसाइल को हजारों किलोमीटर की दूरी तय करने में सक्षम बनाती हैं।

UPSSSC PET 2026 Registration: आज से शुरू हुआ पीईटी 2026 के लिए रजिस्ट्रेशन, जानें कैसे कर सकते हैं आवेदन

UPSSSC PET 2026 Registration: उत्त प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने स्टेट-लेवल स्क्रीनिंग परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। ग्रुप सी पदों पर नियुक्ति के इच्छुक उम्मीदवार 3 अगस्त से 1 सितंबर, 2026 तक आधिकारिक वेबसाइट के जरिए अपने आवेदन जमा कर सकते हैं। प्रीलिमिनरी एलिजिबिलिटी टेस्ट (PET) उत्तर प्रदेश में अलग-अलग ग्रुप सी पदों पर भर्ती के लिए इच्छुक उम्मीदवारों के लिए एक जरूरी क्वालिफाइंग परीक्षा है। इनमें लेखपाल, जूनियर असिस्टेंट, VDO, स्टेनोग्राफर, असिस्टेंट अकाउंटेंट और कई दूसरे पद शामिल हैं। कैंडिडेट को आवेदन फॉर्म भरने से पहले एक बार पंजीकरण (OTR) पूरा करना चाहिए।

यूपीएसएसएससी पीईटी 2026 एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया

  • अप्लाई करने से पहले कैंडिडेट को ये एलिजिबिलिटी शर्तें पूरी करनी होंगी:
  • किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से कक्षा 10 पास होना चाहिए।
  • कक्षा 12, डिप्लोमा, ग्रेजुएशन या उससे ज्यादा वाले उम्मीदवार भी योग्य हैं।
  • 1 जुलाई, 2026 को कम से कम उम्र 18 साल होनी चाहिए। ज्यादा से ज्यादा उम्र 40 साल होनी चाहिए।
  • आरक्षित कैटेगरी के लिए उम्र में छूट उत्तर प्रदेश सरकार के नियमों के हिसाब से मिलेगी।

पीईटी भर्ती का पहला स्टेज है। इसलिए, पीईटी स्कोर की वैलिडिटी के दौरान यूपीएसएसएससी द्वारा घोषित किए गए पोस्ट-स्पेसिफिक मुख्य परीक्षाओं के लिए अप्लाई करने के लिए कैंडिडेट्स को इसे क्वालिफाई करना होगा।

यूपीएसएसएससी पीईटी 2026 के लिए अप्लाई कैसे करें?

  • ऑफिशियल वेबसाइट upsssc.gov.in पर जाएं।
  • वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) पूरा करें।
  • रजिस्टर्ड क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल करके लॉग इन करें।
  • PET 2026 एप्लीकेशन फॉर्म भरें।
  • ज़रूरी फोटो और सिग्नेचर अपलोड करें।
  • एप्लीकेशन फीस पे करें।
  • फॉर्म सबमिट करें।
  • भविष्य के लिए कन्फर्मेशन पेज डाउनलोड करके सेव कर लें।

एग्जाम पैटर्न

  • परीक्षा में 100 मल्टीपल क्वेश्च्न पूछे जाएंगे।
  • पेपर हल करने के लिए 2 घंटे का समय दिया जाएगा।
  • पेपर 100 नंबर का होगा।
  • हर गलत जवाब पर 1/4 अंक की नेगेटिव मार्किंग होगी।

क्वेश्चन इतिहास, भूगोल, अर्थव्यवस्था, संविधान, सामान्य विज्ञान, गणित, हिंदी, अंग्रेजी, रीजनिंग, करेंट अफेयर्स और जनरल अवेयरनेस जैसे सब्जेक्ट्स से पूछे जाएंगे।

आवेदन शुल्क

जनरल और ओबीसी उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 185 रुपये और एससी/एसटी उम्मीदवारों के लिए 95 रुपये है। पीडब्लूडी कैंडिडेट्स को 25 रुपये की ऑनलाइन प्रोसेसिंग फीस पे करनी होगी।

DRDO Apprentice Recruitment 2026: अप्रेंटिस भर्ती के लिए डीआरडीओ में आवेदन शुरू, जानें अप्लाई करने की लास्ट डेट और स्टाइपेंड की डिटेल

DRDO Apprentice Recruitment 2026: अप्रेंटिस भर्ती के लिए डीआरडीओ में आवेदन शुरू, जानें अप्लाई करने की लास्ट डेट और स्टाइपेंड की डिटेल

DRDO Apprentice Recruitment 2026: रक्षा अनुसंधान क्षेत्र में काम करने वाली डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) की सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी (SSPL) ने आईटीआई, डिप्लोमा और ग्रेजुएट अप्रेंटिस पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 21 अगस्त, 2026 तक बताए गए फॉर्मेट में अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। आधिकारिक विज्ञापन के अनुसार, अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण रक्षा मंत्रालय के तहत सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी (SSPL), तिमारपुर, दिल्ली में आयोजित की जाएगी। ट्रेनिंग का समय 12 महीने का होगा, और चुने गए उम्मीदवारों को लागू नियमों के अनुसार स्टाइपेंड मिलेगा।

डीआरडीओ अप्रेंटिस भर्ती 2026: पदों का विवरण

डीआरडीओ अप्रेंटिस भर्ती अभियान के तहत आईटीटाई अप्रेंटिस, डिप्लोमा अप्रेंटिस और ग्रेजुएट अप्रेंटिस की तीन श्रेणियों में उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। इसमें शामिल हैं

आईटीआई अप्रेंटिस – पदों की संख्या अलग-अलग ट्रेड के अनुसार तय की जाएगी।

डिप्लोमा अप्रेंटिस – 41 वैकेंसी

ग्रेजुएट अप्रेंटिस : विभिन्न विषयों में भर्ती की जाएगी।

डीआरडीओ ने स्पष्ट किया है कि लैबोरेटरी की जरूरतों के आधार पर अप्रेंटिसशिप पोजीशन की संख्या बदल सकती है।

शैक्षिक योग्यता

आईटीआई अप्रेंटिस : कैंडिडेट्स ने कक्षा 10 पास की हो और नीचे दिए गए किसी भी ट्रेड में आईटीआई में फर्स्ट डिवीजन हासिल की हो :

  • फिटर
  • इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक
  • इलेक्ट्रीशियन
  • कंप्यूटर ऑपरेटर और प्रोग्रामिंग असिस्टेंट (COPA)
  • मशीनिस्ट
  • कारपेंटर

डिप्लोमा अप्रेंटिस : कैंडिडेट्स के पास इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंस्ट्रूमेंटेशन या कंप्यूटर साइंस में फर्स्ट डिवीजन डिप्लोमा होना चाहिए, साथ ही क्लास 10 फर्स्ट डिवीज़न में होनी चाहिए।

ग्रेजुएट अप्रेंटिस : एप्लिकेंट्स के पास नीचे दिए गए किसी भी ट्रेड में फर्स्ट डिवीजन होनी चाहिए:

  • फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथमेटिक्स या कंप्यूटर साइंस में बीएससी
  • बीए या बीकॉम
  • किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या इंस्टीट्यूशन से इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, वीएलएसआई या केमिकल इंजीनियरिंग में बीई/बीटेक

योग्यता मानदंड

जिन कैंडिडेट्स ने 2022, 2023, 2024, 2025 या 2026 में अपनी क्वालिफाइंग डिग्री या डिप्लोमा पूरा किया है, वे आवेदन करने के लिए योग्य हैं। 2022 से पहले पास हुए उम्मीदवार आवेदन न करें। सिर्फ वे कैंडिडेट ही अप्लाई कर सकते हैं जिन्होंने रेगुलर स्टूडेंट के तौर पर अपना क्वालिफाइंग कोर्स पूरा किया है।

डिप्लोमा और ग्रेजुएट अप्रेंटिस एप्लीकेंट को नेशनल अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग स्कीम (NATS) पोर्टल पर रजिस्टर करना होगा, जबकि ITI कैंडिडेट को अप्लाई करने से पहले अप्रेंटिसशिप इंडिया पोर्टल पर रजिस्टर करना होगा। SC, ST, OBC, PwD, और EWS कैंडिडेट्स के लिए रिजर्वेशन अप्रेंटिस एक्ट, 1961, अप्रेंटिसशिप रूल्स, 1992, और अप्रेंटिसशिप (अमेंडमेंट) रूल्स, 2015 के प्रोविज़न के अनुसार दिया जाएगा।

अप्लाई कैसे करें

कैंडिडेट्स को सही तरीके से भरा हुआ एप्लीकेशन फॉर्म सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स की सेल्फ-अटेस्टेड कॉपी के साथ पोस्ट से इस पते पर भेजना होगा:

डायरेक्टर, SSPL

कृपया ध्यान दें: HRD

सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी (SSPL)

डीआरडीओ, लखनऊ रोड, तिमारपुर, दिल्ली – 110054

एप्लीकेशन 21 अगस्त, 2026 को या उससे पहले लेबोरेटरी में पहुंच जाना चाहिए।

जरूरी बातें

  • अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग 12 महीने की होगी।
  • ऑफर लेटर सहित सभी कम्युनिकेशन सिर्फ ईमेल से भेजे जाएंगे।

चुने हुए कैंडिडेट्स को जॉइनिंग के बाद पुलिस वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट जमा करना होगा। अप्रेंटिसशिप पूरी होने से डीआरडीओ या एसएसपीएल में नौकरी की गारंटी नहीं मिलती। एसएसपीएल के पास बिना कोई कारण बताए अप्रेंटिसशिप की पोस्ट की संख्या बढ़ाने या घटाने या रिक्रूटमेंट प्रोसेस को कैंसिल करने का अधिकार है।

UPSC CMS 2026 Exam Pattern: मेडिकल अफसर बनने के लिए यूपीएससी की परीक्षा कल, परीक्षा से पहले समझ लें मार्किंग स्कीम

Stocks to Watch: आज 24 जुलाई को Tata Steel, Vedanta, Swiggy, Bajaj Finance, Astra Microwave समेत इन शेयरों पर नजर, बड़ी हलचल की उम्मीद

शुक्रवार, 31 जुलाई को कई शेयरों में तेज उतारचढ़ाव देखने को मिल सकता है। इनमें टाटा स्टील, वेदांता, स्विगी, बजाज फाइनेंस, मारुति सुजुकी इंडिया, बजाज फिनसर्व, एस्ट्रा माइक्रोवेव प्रोडक्ट्स, अबर्न कंपनी, नवीन फ्लोरीन, आरती इंडस्ट्रीज, मझगांव डॉक, रेलटेल, महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे नाम प्रमुख हैं। कुछ कंपनियों ने एक दिन पहले तिमाही नतीजे जारी किए थे। वहीं कुछ कंपनियां आज नतीजे जारी करने वाली हैं। कुछ कंपनियां ऐसी भी हैं, जिन्होंने एक दिन पहले नई डील, कॉन्ट्रैक्ट या अन्य तरह के ​डेवलपमेंट्स की जानकारी दी थी। इन पर बाजार शुक्रवार को प्रतिक्रिया देगा।

इसके अलावा 65 से ज्यादा कंपनियों के शेयर 31 जुलाई को एक्स-डिविडेंड ट्रेड करने वाले हैं। साथ ही 2 लिस्टिंग भी होने वाली हैं। आइए डिटेल में जानते हैं किन प्रमुख शेयरों पर रहेगी नजर…

आज इन कंपनियों के आएंगे नतीजे

मारुति सुजुकी इंडिया, बजाज फिनसर्व, अर्बन कंपनी, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, GAIL (इंडिया), ITC, सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज, ABB इंडिया, आधार हाउसिंग फाइनेंस, श्री सीमेंट, आदित्य बिड़ला कैपिटल, डिक्सन टेक्नोलोजिज (इंडिया), नारायण हृदयालय, ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स, क्लीन मैक्स एनवायरो एनर्जी सॉल्यूशंस, नेशनल एल्युमीनियम कंपनी, बजाज होल्डिंग्स एंड इनवेस्टमेंट और शैडोफैक्स टेक्नोलॉजिज

1 अगस्त को ये कंपनियां जारी करेंगी तिमाही रिजल्ट

डिविस लैबोरेटरीज, एपीएल अपोलो ट्यूब्स, मुथूट फाइनेंस, गुजरात अंबुजा एक्सपोर्ट्स, लेटेंट व्यू एनालिटिक्स, आदित्य बिड़ला लाइफस्टाइल ब्रांड्स, क्लीन साइंस एंड टेक्नोलॉजी, ईपैक प्रीफैब टेक्नोलोजिज और उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक

आज इन प्रमुख शेयरों पर रहेगी खास नजर

Tata Steel: अप्रैल-जून 2026 तिमाही (Q1) में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 11.6% बढ़कर 2,318.5 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 14.3% बढ़कर 60,794.3 करोड़ रुपये हो गया।

Vedanta: जून 2026 तिमाही में कंसोलिडेटेड बेसिस पर शुद्ध मुनाफा (कंपनी के मालिकों के लिए) 5473 करोड़ रुपये रहा। यह एक साल पहले के मुनाफे से 72 प्रतिशत ज्यादा है। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 53.6 प्रतिशत बढ़कर 24205 करोड़ रुपये हो गया।

महिंद्रा एंड महिंद्रा: Q1 में शुद्ध लाभ एक साल पहले से 34 प्रतिशत बढ़कर 5,455 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 28 प्रतिशत बढ़कर 58,188 करोड़ रुपये हो गया।

Swiggy: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड घाटा सालाना आधार पर घटकर 791 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले घाटा 1,197 करोड़ रुपये का था। रेवेन्यू 37.3% बढ़कर 6,812 करोड़ रुपये हो गया।

Bajaj Finance: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 27 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 5985.75 करोड़ रुपये हो गया। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू करीब 20 प्रतिशत बढ़कर 23165.45 करोड़ रुपये हो गया। शुद्ध ब्याज आय में सालाना आधार पर 24 प्रतिशत का इजाफा देखा गया और यह 11,495 करोड़ रुपये हो गई।

Torrent Pharmaceuticals: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 3.3% बढ़कर 566 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 54.8% बढ़कर 4,921 करोड़ रुपये रहा।

RailTel Corporation of India: Q1 में मुनाफा सालाना आधार पर 0.5% घटकर 65.8 करोड़ रुपये रह गया। रेवेन्यू 20.1% बढ़कर 893.3 करोड़ रुपये हो गया।

Mazagon Dock Shipbuilders: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 21.5% बढ़कर 549.4 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 12.1% की बढ़ोतरी के साथ 2,942.7 करोड़ रुपये हो गया।

LIC Housing Finance: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 9.9% बढ़कर 1,499 करोड़ रुपये हो गया। शुद्ध ब्याज आय 0.6% की बढ़ोतरी के साथ 2,087.2 करोड़ रुपये रही।

Data Patterns India: Q1 में मुनाफा सालाना आधार पर 13.5% घटकर 22.1 करोड़ रुपये रह गया। रेवेन्यू 16.8% बढ़कर 116 करोड़ रुपये हो गया।

AWL Agri Business: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 48.2% बढ़कर 350.3 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 17.5% बढ़कर 20,048.1 करोड़ रुपये रहा। कंपनी ने पंकज गोयल को 31 जुलाई से चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर नियुक्त किया है।

Thermax: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 83.4% घटकर 25.2 करोड़ रुपये पर आ गया। रेवेन्यू 6.7% की बढ़ोतरी के साथ 2,302.7 करोड़ रुपये हो गया।

Aarti Industries: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 260.5% बढ़कर 155 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 42.4% बढ़कर 2,387 करोड़ रुपये हो गया।

Indegene: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 0.2% घटकर 116.2 करोड़ रुपये रह गया। रेवेन्यू 39.7% बढ़कर 1,063.1 करोड़ रुपये हो गया।

Astra Microwave Products: कंपनी को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स से 2,205.23 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर ‘उत्तम रडार प्रोग्राम’ के लिए 122 एडवांस्ड एयरबोर्न एक्टिव ऐरे यूनिट्स (AAAUs) और 121 इंटरफेस फ्रेम के लिए है।

Navin Fluorine International: कंपनी ने डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) के साथ सोडियम बोरोहाइड्राइड के बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए एक समझौता किया है। इसका मकसद एक अहम डिफेंस मैटीरियल के लिए स्वदेशी प्रोसेस डेवलपमेंट को तेज करना है।

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बल्क और ब्लॉक डील्स

IIFL Finance: FIH मॉरीशस इनवेस्टमेंट्स ने IIFL फाइनेंस में 63.39 लाख शेयर 374.02 करोड़ रुपये में बेचे। अमेरिकन फंड इंश्योरेंस सीरीज ग्लोबल स्मॉल कैपिटलाइजेशन फंड ने 9.8 करोड़ रुपये में 1.66 लाख शेयर खरीदे। स्मॉलकैप वर्ल्ड फंड ने 364.2 करोड़ रुपये में 61.73 लाख शेयर खरीदे।

Sapphire Foods India: फिडेलिटी फंड्स इंडिया फोकस फंड ने अतिरिक्त 20.22 लाख शेयर 39.58 करोड़ रुपये में खरीदे हैं। सिंगापुर सरकार ने 18.95 लाख शेयर 37.1 करोड़ रुपये में बेचे हैं।

Xtranet Technologies: मित्तल ग्रोथ पार्टनर्स LLP ने 9.4 लाख शेयर 12.69 करोड़ रुपये में खरीदे हैं।

Bai-Kakaji Polymers: अबाकस वेंचर अपॉर्चुनिटीज फंड ने 6.08 लाख शेयर 12.18 करोड़ रुपये में खरीदे हैं। टाइगर स्ट्रैटेजीज फंड-I ने 2.16 करोड़ रुपये में 1.08 लाख शेयर बेचे हैं। संजय पोपटलाल जैन ने 6.84 करोड़ रुपये में 3.42 लाख शेयर बेचे हैं।

इन कंपनियों की होगी लिस्टिंग

क्यूब हाईवेज ट्रस्ट

सिल्वरस्टॉर्म पार्क्स एंड रिसॉर्ट्स

आज ये शेयर करेंगे एक्स-डिविडेंड ट्रेड

कोल इंडिया

आयशर मोटर्स

REC

भारती हेक्साकॉम

एस्ट्राजेनेका फार्मा इंडिया

ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज

कल्याणी स्टील्स

मफतलाल इंडस्ट्रीज

पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन

AU स्मॉल फाइनेंस बैंक

अनंत राज

कोरोमंडल एग्रो प्रोडक्ट्स एंड ऑयल्स

सिटी यूनियन बैंक

ASK ऑटोमोटिव

बेजल प्रोजेक्ट्स

बाटा इंडिया

ADC इंडिया कम्युनिकेशंस

ऑलडिजी टेक

बाटलीबोई

सेलो वर्ल्ड

सेंटम इलेक्ट्रॉनिक्स

बंगाल टी एंड फैब्रिक्स

अमल

बॉम्बे डाइंग एंड मैन्युफैक्चरिंग कंपनी

कैंपस एक्टिववियर

कार्बोरंडम यूनिवर्सल

सिएट

DCM श्रीराम

EIH

ममता मशीनरी

नेक्सोम कैपिटल मार्केट्स

इंटरनेशनल ट्रैवल हाउस

एक्सप्लेओ सॉल्यूशंस

केल्टेक एनर्जीज

किर्लोस्कर ऑयल इंजन्स

KPT इंडस्ट्रीज

फाइन ऑर्गेनिक इंडस्ट्रीज

कैरा कैन कंपनी

केसी इंडस्ट्रीज

गैलेक्सी सर्फेक्टेंट्स

गंधार ऑयल रिफाइनरी (इंडिया)

एंड्योरेंस टेक्नोलोजिज

GE पावर इंडिया

हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन

फाइव-स्टार बिजनेस फाइनेंस

ग्रीनपैनल इंडस्ट्रीज

इगाराशी मोटर्स इंडिया

रेडटेप

वरुण बेवरेजेज

V-गार्ड इंडस्ट्रीज

RK स्वामी

PNB हाउसिंग फाइनेंस

इंडिजीन

प्लेटिनमवन बिजनेस सर्विसेज

इंडियन मेटल्स एंड फेरो अलॉयज

प्रिवी स्पेशलिटी केमिकल्स

प्रदीप मेटल्स

प्रिसिजन वायर्स इंडिया

सिंगर इंडिया

सिरका पेंट्स इंडिया

रामा फॉस्फेट्स

सैकसॉफ्ट

शिलचर टेक्नोलोजिज

टिम्केन इंडिया

स्मृति ऑर्गेनिक्स

स्पाइस आइलैंड्स इंडस्ट्रीज

स्ट्राइड्स फार्मा साइंस

WPIL

स्टॉक स्प्लिट के लिए ये शेयर करेंगे एक्स-स्प्लिट ट्रेड

नर्मदा एग्रोबेस

Asian Market Today: चिप शेयरों में जोरदार खरीदारी से एशियाई बाजारों में रौनक,कोस्पी 13% ऊपर, निक्केई 5% चढ़ा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।