Mercedes-Benz India unveils AI-powered car scanner for servicing

Mercedes-Benz India unveils AI-powered car scanner for servicing
Mercedes-Benz India unveils AI-powered car scanner for servicing

Mercedes-Benz India has revealed an AI-powered device that enables quicker vehicle inspection upon entry to its service centre. Dubbed the XENTRY Scanner, the service debuted at the brand’s newly established centre by Landmark Cars in Jogeshwari, Mumbai.

  1. Mercedes’ first AI-powered car scanning system arrives at its largest workshop in Mumbai.
  2. Uses a 360-degree camera system to identify damage on a car’s exterior.
  3. Service Select debuts as a new scheme for older Mercedes vehicles.

Currently, the scanner is the only one of its kind in India at this service centre, which spans around 58,000 sq. ft., making it the brand’s largest in Mumbai. This facility consists of 16 preventive maintenance and general repair bays, 9 body and paint bays and 9 supporting bays, supported by a dedicated 6,000 sq. ft. spare-parts area.

How does Mercedes’ XENTRY Car Scanner work?

The brand calls it an MRI scanner for its cars

Mercedes-Benz’s XENTRY car scanner.

As the car enters the workshop, it is made to pass through the XENTRY scanner. The scanner utilises a 360-degree high-resolution camera system comprising 13 cameras and a LiDAR sensor. Images of the car are captured and analysed across four categories: body, underbody, windshield and tyres. The system captures 150 images within 3 to 5 seconds and then transmits the data to the Mercedes-Benz cloud.

Artificial intelligence then comes into play, identifying every kind of damage on the car’s exterior, even the ones that aren’t visible to the naked eye. It also provides in-depth tyre information, including their health, tread depth and braking performance. To maintain privacy, the system does not capture images of the driver. The findings are added directly to the job card of the particular car without manual entry, enabling better co-ordinated workshop processes. Mercedes says the process is entirely paperless, reducing walking distances, waiting times and paperwork that traditionally accompanied service reception.

Speaking about the thinking behind such initiatives, Mr Santosh Iyer, MD and CEO, Mercedes-Benz India said, “Productivity has to be the core. Reason being, from a real estate perspective, you need to turn cars around faster, while initiatives like the car scanner are more of a productivity enhancement. But on the customer side too, they expect the car to be turned around quickly, which is a pure mobility requirement for the customer.”

Through AI, external wear and tear is automatically detected by the XENTRY car scanner.

Next, a service advisor receives all the information on a tablet and informs the customer of a detailed list of vehicle wear and tear. It is then up to the customer to approve servicing of the concerned parts on the spot. The brand claims that a digital record of service status eliminates the need for manual inspections by the customer.

Interestingly, Landmark’s own internal research points to a shift in service revenue coming from EV adoption growth. “Landmark did a study of the service cost of EV versus ICE. Over the last six months, they’ve seen that the cost is the same in terms of maintenance. But this isn’t coming from maintenance; it’s coming from the body shop. More of the latter is done on EVs compared to ICE cars, said Mr Iyer.

At around 58,000 sq ft, the Landmark Cars workshop in Jogeshwari is the brand’s largest in Mumbai.

India now adds to the list of countries to offer Mercedes’ XENTRY scanner. Previously, the tech was available in international markets like Germany, Italy, Korea, the Netherlands, Switzerland, and Turkey. Furthermore, Mercedes-Benz plans to expand to more than 20 ‘world-class’ luxury outlets in 2026 in India, supported by an investment of more than Rs 450 crore by franchise partners over the next two years.

Mercedes Service Select: A service plan for older Mercedes vehicles

While Mercedes-Benz provides a standard 3-year warranty on new cars, it has also introduced a new service scheme for older vehicles. Called ‘Service Select’, Mercedes cars 7 years or older are eligible for this service. The scheme enables up to 25 percent savings for periodic service and brake care, a 2-year warranty on spare parts, benefits of its ‘Mobilio Lite’ service facility, and residual value protection of the vehicle.

With inputs from Hormazd Sorabjee

Renting vs Buying: घर खरीदें या किराये पर रहें? जानिए EMI, रेंट रेश्यो और रिटर्न का पूरा गणित

Buying vs Renting Real Estate Guide: बड़े शहरों जैसे मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु या पुणे में घर खरीदना लोगों का सपना होता है। कई लोग इसे ‘इमोशनल ओनरशिप’ से जोड़कर देखते हैं, तो कुछ लोग इसे केवल ‘फाइनेंशियल रिटर्न’ के नजरिए से देखते हैं।

लेकिन क्या मेट्रो शहरों में आज की तारीख में घर खरीदना फायदे का सौदा है, या फिर किराये पर रहकर पैसों को शेयर बाजार या अन्य ऑप्शन में निवेश करना ज्यादा समझदारी है? आइए इसे EMI-to-Rent Ratio, रेंटल यील्ड और रियल-लाइफ कैलकुलेशन से समझते हैं।

किराए पर रहना vs घर खरीदना: गणित क्या कहता है?

इसे समझने के लिए ₹1 करोड़ की कीमत वाले 2BHK फ्लैट का उदाहरण लेते हैं:

सिनेरियो A: अगर आप घर खरीदते हैं

प्रॉपर्टी की कीमत: ₹1 करोड़

डाउन पेमेंट (20%): ₹20 लाख (अपनी बचत से)

होम लोन (80%): ₹80 लाख (8.5% ब्याज दर पर 20 साल के लिए)

मासिक EMI: लगभग ₹69,400 प्रति महीना

अन्य खर्च: मेंटेनेंस, प्रॉपर्टी टैक्स, स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन कॉस्ट (₹6-8 लाख एक्स्ट्रा)।

20 साल में कुल भुगतान: ₹80 लाख के लोन पर आप 20 साल में लगभग ₹86.5 लाख केवल ब्याज देंगे। यानी कुल भुगतान ₹1.66 करोड़ होगा (प्रिंसिपल + इंटरेस्ट)।

सिनेरियो B: अगर आप किराये पर रहते हैं और बाकी पैसा इन्वेस्ट करते हैं

मासिक किराया: भारत के मेट्रो शहरों में औसतन रेंटल यील्ड 2.5% से 3% होती है। यानी ₹1 करोड़ के मकान का मासिक किराया लगभग ₹22,000 से ₹25,000 होगा।

बचत (EMI vs Rent Diff): EMI (₹69,400) और Rent (₹25,000) के बीच का अंतर = ₹44,400 प्रति महीना।

डाउन पेमेंट की बचत: डाउन पेमेंट के ₹20 लाख भी आपके पास निवेश के लिए बचते हैं।

कंपाउंडिंग का जादू: अगर आप ₹20 लाख जो डाउन पेमेंट की बचत से हुआ है उसे म्यूचुअल फंड में 12% सालाना रिटर्न पर 20 साल के लिए इन्वेस्ट करते हैं, तो यह रकम बढ़कर लगभग ₹1.93 करोड़ हो जाती है।

साथ ही अगर आप हर महीने बची हुई ₹44,400 की SIP (12% रिटर्न के साथ) 20 साल तक करते हैं, तो इससे लगभग ₹4.43 करोड़ का फंड तैयार होता है। 20 साल बाद आपकी कुल वेल्थ ₹6.36 करोड़ होगी जो टैक्स और सालाना रेंट हाइक एडजस्ट करने के बाद भी एक बड़ा कॉर्पस आपके पास होगा।

EMI-to-Rent Ratio: क्या कहता है यह फॉर्मूला?

EMI-to-Rent Ratio यह तय करने का एक आसान तरीका है कि आपको घर खरीदना चाहिए या किराये पर रहना चाहिए:

EMI-to-Rent Ratio= मंथली Rent/ मंथली EMI

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अनुपात 1 से 1.5 के बीच: अगर आपकी EMI और रेंट लगभग बराबर हैं, तो घर खरीदना ज्यादा बेहतर विकल्प है।

अनुपात 2.5 से अधिक: बड़े शहरों में अक्सर EMI (₹70,000) किराए (₹25,000) से 2.8 गुना अधिक होती है। जब अनुपात इतना ज्यादा हो, तो वित्तीय दृष्टि से किराये पर रहना और सरप्लस पैसे को इन्वेस्ट करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।

Renting vs Buying: घर खरीदें या किराये पर रहें?

Renting vs Buying: घर खरीदें या किराये पर रहें? जानिए EMI, रेंट रेश्यो और रिटर्न का पूरा गणित

इमोशनल ओनरशिप बनाम फाइनेंशियल प्रैक्टिकैलिटी

भारत में घर सिर्फ एक एसेट नहीं है, बल्कि एक सामाजिक प्रतिष्ठा और मानसिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है। ये रहे खुद के घर के फायदे:

  • सुरक्षा का अहसास: आपको कोई मकान मालिक खाली करने को नहीं कह सकता।
  • अपने हिसाब से बदलाव: आप इंटीरियर, रेनोवेशन या बदलाव अपनी पसंद से कर सकते हैं।
  • रिटायरमेंट एसेट: बुढ़ापे में रहने के लिए सिर पर पक्की छत रहती है।

किराये के घर के फायदे

  • जॉब फ्लेक्सिबिलिटी: अगर आपकी नौकरी बेंगलुरु से गुड़गांव शिफ्ट होती है, तो आप बिना किसी परेशानी के मूव कर सकते हैं।
  • बेहतर लोकेशन: जितने किराए में आप किसी प्रीमियम लोकेशन पर रह सकते हैं, उतना महंगा घर खरीदना आपकी क्षमता से बाहर हो सकता है।

आपके लिए क्या सही है?

आपको घर तब खरीदना चाहिए जब आपके पास इनकम का परमानेंट सोर्स हो, आप अगले 10-15 साल उसी शहर में बसना चाहते हैं, आपके पास डाउन पेमेंट का पर्याप्त फंड है, और आपके लिए मानसिक शांति वित्तीय रिटर्न से ज्यादा मायने रखती है।

वहीं आपको किराये पर तब रहना चाहिए जब आपकी उम्र 20-35 साल के बीच है, करियर में ग्रोथ और सिटी चेंज की संभावना है, और आप बचे हुए पैसों (EMI और रेंट के अंतर) को अनुशासित तरीके से शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट कर सकते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Realty Stocks : निफ्टी रियल्टी इंडेक्स ने लगाई जबरदस्त छलांग, एनालिस्ट्स को इन चुनिंदा शेयरों में अभी नजर आ रहा दम

Real Estate Stocks : पिछले महीने निफ्टी रियल्टी इंडेक्स सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला सेक्टोरल इंडेक्स रहा है। इसमें 10.8% की बढ़त हुई और इसने बाकी सभी सेक्टर इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया। मजबूत बिक्री,नए प्रोजेक्ट्स की अच्छी पाइपलाइन और रेजिडेंशियल रियल एस्टेट साइकल के बने रहने की उम्मीदों के चलते इन्वेस्टर्स लिस्टेड डेवलपर्स में रुचि ले रहे हैं। इसके चलते इस सेक्टर में अच्छी तेजी आई है।

निफ्टी रियल्टी इंडेक्स ने इस अवधि में दूसरे सेक्टर इंडेक्सों के मुकाबले काफी बेहतर प्रदर्शन किया है। इसी दौरान,निफ्टी IT इंडेक्स में 3.6% की बढ़त हुई,जबकि बैंकिंग,फाइनेंशियल सर्विस और अधिकांश दूसरे सेक्टर में मामूली बढ़त हुई या फिर उनमें सुस्ती रही। निफ्टी रियल्टी की यह बढ़त व्यापक रही जिसमें लोढ़ा डेवलपर्स,गोदरेज प्रॉपर्टीज़,प्रेस्टीज एस्टेट्स प्रोजेक्ट्स,ब्रिगेड एंटरप्राइजेज,ओबेरॉय रियल्टी,फीनिक्स मिल्स और अनंत राज जैसे शेयरों की अहम भूमिका रही।

मिरे एसेट शेरखान के रिसर्च एनालिस्ट अक्षय शेट्टी का कहना है कि यह तेजी किसी एक वजह से नहीं,बल्कि बेहतर मैक्रो स्थितियों और कंपनियों के मज़बूत होते फंडामेंटल्स के मिले-जुले असर से आ रही है। भू-राजनीतिक तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में सुधार से जोखिम लेने की क्षमता बेहतर हुई है। साथ ही,बड़े लिस्टेड डेवलपर्स लगातार अच्छी प्री-सेल्स,मजबूत बिज़नेस डेवलपमेंट और लॉन्च की मजबूत पाइपलाइन की जानकारी दे रहे हैं,जिससे यह भरोसा मजबूत होता है कि रेजिडेंशियल रियल एस्टेट का साइकिल कायम है।

उन्होंने बताया कि 2026 की पहली छमाही में भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेशकों ने लगभग 4.3-4.4 अरब डॉलर निवेश किया जो सालाना आधार पर 23-25% की बढ़ोतरी दिखाता है। कुल बैंक क्रेडिट ग्रोथ लगभग 18% रही,जबकि हाउसिंग लोन में सालाना आधार पर लगभग 11% की बढ़ोतरी देखने को मिली जिससे मांग में तेजी के संकेत मिल रहे हैं।

ब्याज दरों के कम रहने की उम्मीद से भी लोगों का भरोसा बढ़ा है। RBI का रेपो रेट 5.25% है और होम लोन की दरें लगभग 7.1% से शुरू हो रही हैं, जिससे घर खरीदना आसान हो गया है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की AVP और रिसर्च एनालिस्ट स्नेहा पोद्दार ने कहा कि यह तेजी रेजिडेंशियल रियल एस्टेट मार्केट में आए स्ट्रक्चरल सुधारों को दिखाती है। हाउसिंग सेक्टर की स्थिति अच्छी बनी हुई है। डिमांड अपने पीक लेवल से थोड़ी कम हुई है,लेकिन सप्लाई पर कंट्रोल रहा है,जिससे इन्वेंट्री का बहुत ज्यादा स्टॉक जमा नहीं हुआ है। लिस्टेड डेवलपर्स ने पिछले चार-पांच सालों में अपना कर्ज काफी कम किया है,जिससे कैश जेनरेशन बेहतर हुआ है और उनकी बैलेंस शीट मज़बूत हुई है।

उन्होंने यह भी कहा कि इंडस्ट्री में कंसोलिडेशन की वजह से बड़े ब्रांडेड डेवलपर्स लगातार मार्केट शेयर बढ़ा रहे हैं। साथ ही,प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट में मजबूत डिमांड और बेहतर बैलेंस शीट की वजह से डेवलपर्स जमीन के बड़े सौदे कर रहे हैं और नए इलाकों में अपना कारोबार फैला रहे हैं।

कहां करें निवेश?

पिछले महीने में हुई जबरदस्त बढ़त के बावजूद,एनालिस्ट्स का कहना है कि निवेशकों को इस सेक्टर में अच्छे रिटर्न के लिए अब चुनिंदा क्विलिटी शेयरों पर ही फोकस करना चाहिए। लिस्टेड कंपनियों में एनालिस्ट्स अब मजबूत बैलेंस शीट और समय पर काम पूरा करने की क्षमता वाले बड़े डेवलपर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं।

अक्षय शेट्टी को मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में काम करने के तरीके,अच्छे कलेक्शन,प्रीमियम लॉन्च और सोच-समझकर होने वाले कैपिटल एलोकेशन के कारण लोढ़ा डेवलपर्स सबसे ज्यादा पसंद है। इसके अलावी उनको गोदरेज प्रॉपर्टीज भी पसंद है। उनका मानना है कि कंपनी को मज़बूत बिज़नेस डेवलपमेंट पाइपलाइन और एसेट-लाइट विस्तार की रणनीति क फायदा मिलेगा। अनंत राज भी उनकी फेवरिट लिस्ट में शामिल है। उनका कहना है कि इस कंपनी को रियल एस्टेट बिजनेस के साथ-साथ बढ़ते डेटा सेंटर प्लेटफॉर्म का भी फायदा मिलेगा।

स्नेहा पोद्दार ने कहा कि ने कहा कि मोतीलाल ओसवाल की पसंदीदा कंपनियों में लोढ़ा डेवलपर्स,DLF और गोदरेज प्रॉपर्टीज शामिल हैं,क्योंकि इनके पास अच्छा फ्री कैश फ्लो,प्रीमियम प्रोजेक्ट पाइपलाइन और काम करने की मजबूत क्षमता है।

 

 

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भारत में प्रॉपर्टी खरीदने की होड़ शुरू! इन शहरों में निवेश से मिलेगा बम्पर रिटर्न

अब्रॉड में रहने वाले इंडियन (NRI) अब भारत में घर और प्रॉपर्टी (property) खरीदने में पहले से ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। अच्छी कमाई, बेहतर रिटर्न (returns) और भारत के रियल एस्टेट बाजार (real estate market) में बढ़ते भरोसे की वजह से वे बड़े शहरों में तेजी से इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं, इन शहरों में सबसे ज्यादा इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं NRI:

Delhi-NCR (दिल्ली-एनसीआर)

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दिल्ली-एनसीआर, खासकर गुरुग्राम (Bengaluru), NRI इंवेटर्स की पसंदीदा जगहों में शामिल है। यहां लग्जरी प्रोजेक्ट्स, अच्छी सड़क और मेट्रो कनेक्टिविटी (metro connectivity), बड़े कॉर्पोरेट ऑफिस (corporate office) और तेजी से डेवलप हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण प्रॉपर्टी की मांग लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि यहां इन्वेस्टमेंट करने पर अच्छे रिटर्न (return) की उम्मीद रहती है।

 

Bengaluru (बेंगलुरु)

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बेंगलुरु को भारत की IT केपिटल कहा जाता है। यहां देश-विदेश की बड़ी टेक कंपनियां (tech companies) मौजूद हैं, जिससे नौकरी के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। बढ़ती आबादी और किराये के घरों की मांग के कारण NRI इस शहर को लंबे समय के इन्वेस्टमेंट के लिए अच्छा ऑप्शन मानते हैं।

 

Hyderabad (हैदराबाद)

 

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हैदराबाद तेजी से आगे बढ़ता हुआ रियल एस्टेट (real estate) बाजार है। यहां बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी सेक्टर (IT sector) का विस्तार और दूसरे बड़े शहरों की तुलना में किफायती प्रॉपर्टी कीमतें इन्वेस्टर्स को अट्रैक्ट करती हैं। यही कारण है कि हाल के वर्षों में NRI का रुझान इस शहर की ओर तेजी से बढ़ा है।

 

Mumbai (मुंबई)

 

This may contain: an aerial view of a highway in the city with tall buildings and trees on both sides

मुंबई देश की आर्थिक राजधानी होने के साथ-साथ NRI इन्वेस्टर्स की सबसे पसंदीदा रियल एस्टेट मार्केट भी है। यहां लग्जरी अपार्टमेंट, प्रीमियम प्रोजेक्ट्स और ऊंची प्रॉपर्टी वैल्यू (property value) इन्वेस्टर्स को अट्रैक्ट करती है। 2024 में भारतीय रियल एस्टेट के प्राइवेट इक्विटी इन्वेस्टमेंट का लगभग 50% हिस्सा मुंबई को मिला, जिससे इसकी पॉपुलैरिटी और मजबूत हुई।

 

अच्छे रिटर्न (Good Returns) की उम्मीद

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भारत के कई शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में NRI मानते हैं कि आज किया गया इन्वेस्टमेंट आने वाले वर्षों में अच्छा प्रॉफिट दे सकता है। इसी वजह से वे रियल एस्टेट को सिक्योर और फायदेमंद इन्वेस्टमेंट मानते हैं।

 

किराये से कमाई (Rental Income) का मौका

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कई NRI भारत में घर खरीदकर उसे किराये पर दे देते हैं। इससे उन्हें हर महीने रेगुलर इनकम होती है और साथ ही समय के साथ प्रॉपर्टी की कीमत (property’s value) बढ़ने का भी फायदा मिलता है।

 

निवेश (Investment) करना हुआ आसान

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सरकार ने NRI के लिए प्रॉपर्टी खरीदने की प्रोसेस पहले से ज्यादा आसान बना दी है। डिजिटल बैंकिंग (digital banking), ऑनलाइन डॉक्यूमेंटेशन (documentation) और सिंपल रेगुलेशन की वजह से अब विदेश में रहकर भी भारत में इन्वेस्टमेंट करना आसान हो गया है।

 

परिवार (Family) और भविष्य (Future) की जरूरत

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कई NRI अपने माता-पिता या परिवार के रहने के लिए भारत में घर खरीदते हैं। वहीं कुछ लोग रिटायरमेंट (retirement) के बाद भारत लौटने की प्लानिंग बनाकर पहले से ही प्रॉपर्टी में इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं।

Bajaj Finance पहुंचा आठ महीने के हाई पर, लगातार पांचवे दिन उछले शेयर, अब ये है अगला ट्रिगर

Bajaj Finance Share Price: बजाज ग्रुप की बजाज फाइनेंस के शेयर लगातार पांचवे कारोबारी दिन ऊपर चढ़ा है। इन पांच दिनों की तेजी के साथ आठ कारोबारी दिनों में यह 14 जुलाई को डेढ़ फीसदी से अधिक की गिरावट को छोड़ बाकी सात दिन यह मजबूत हुआ। आज की बात करें तो यह करीब 1% उछलकर आठ महीने के हाई पर पहुंच गया और अब रिकॉर्ड हाई से काफी करीब आ चुका है। अभी की बात करें तो बजाज फाइनेंस के शेयर बीएसई पर फिलहाल 0.29% की बढ़त के साथ ₹1067.00 पर है। इंट्रा-डे में यह 0.98% उछलकर ₹1,074.40 तक पहुंचा था।

जून में 11% से अधिक की बढ़त के बाद इस महीने अब तक यह 6% से अधिक उछल चुका है। इसके साथ ही पिछले साल सितंबर-अक्टूबर के बाद पहली बार लगातार दूसरे महीने यह मजबूती दिखा रहा है। हालांकि इस तेजी के साथ बजाज फाइनेंस का RSI (रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स) 71 हो गया यानी कि यह ओवरबॉट कैटेगरी में पहुंच गया। आरएसआई के 70 के ऊपर होने का मतलब स्टॉक का ओवरबॉट होना है।

क्यों चढ़ रहा Bajaj Finance का शेयर और अब आगे क्या है ट्रिगर?

बजाज फाइनेंस ने इस महीने की शुरुआत में जून 2026 तिमाही का बिजनेस अपडेट पेश किया था जिससे शेयरों को सपोर्ट मिल रहा है। इस वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में बजाज फाइनेंस का AUM (एसेट्स अंडर मैनेजमेंट) 23.9% बढ़कर ₹5.46 लाख करोड़ पर पहुंच गया तो डिपॉजिट्स भी करीब 15% उछलकर ₹72,109 करोड़ पर पहुंच गया। कंपनी ने जून तिमाही में रिकॉर्ड 51 लाख नए ग्राहक जोड़े और अब इसकी कस्टमर फ्रेंचाइजी 12.44 करोड़ पर पहुंच गई। जून तिमाही के आखिरी में कंपनी का डिपॉजिट बुक ₹68,500 करोड़ था।

बजाज फाइनेंस के लिए अब अगला ट्रिगर 30 जुलाई को आने वाला है, जिस दिन पूरी तिमाही के कारोबारी नतीजे पेश करेगी। नतीजे के साथ-साथ इस वित्त वर्ष 2027 के लिए गाइडेंस पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। अपनी एसेट क्वालिटी पर ध्यान देने के लिए बजाज फाइनेंस ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने ग्रोथ अनुमान को कम कर दिया था। कंपनी ने ग्रोथ के मामले में इस अनुमान को पहले के 25%-30% से घटाकर 22%-24% और नए कस्टमर जोड़ने के मामले में 1.5 करोड़-1.7 करोड़ कर दिया था।

एक साल में कैसी रही बजाज फाइनेंस की चाल

बजाज फाइनेंस के शेयरों ने निवेशकों को करारा झटका दिया। पिछले साल बीएसई पर 23 अक्टूबर 2025 को यह ₹1,102.45 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 5 ही महीने में यह 28.49% फिसलकर 23 मार्च 2026 को ₹788.40 पर आ गया था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

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Home Loan: सिर्फ सस्ते घर नहीं, आसान होम लोन भी जरूरी; एक्सपर्ट बोले- तभी बढ़ेगा हाउसिंग सेक्टर

Home Loan: भारत में घरों की मांग लगातार बढ़ रही है। अफोर्डेबल हाउसिंग, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और तेज मंजूरियों पर अक्सर चर्चा होती है। लेकिन इन सबसे पहले एक सवाल आता है। क्या आम परिवार के पास घर खरीदने के लिए आसान और समय पर लोन उपलब्ध है? एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत के हाउसिंग सेक्टर की अगली बड़ी ग्रोथ इसी सवाल के जवाब पर निर्भर करेगी।

होम लोन सिर्फ फाइनेंशियल प्रोडक्ट भर नहीं है। ज्यादातर परिवारों के लिए यह जिंदगी का सबसे बड़ा निवेश होता है। यह आर्थिक सुरक्षा, स्थिरता और बेहतर भविष्य का भरोसा देता है। लेकिन यह सपना तभी पूरा होता है, जब सही समय पर लोन मिल सके। इसलिए हाउसिंग सेक्टर की असली ताकत सिर्फ मकानों की संख्या नहीं, बल्कि लोगों तक क्रेडिट की पहुंच है।

तेजी से बढ़ सकता है होम लोन बाजार

CareEdge Ratings के मुताबिक, भारत का होम लोन बाजार फिलहाल करीब ₹33 लाख करोड़ का है। FY25 से FY30 के बीच इसके 15-16% CAGR से बढ़ने का अनुमान है। इस रफ्तार से बाजार का आकार ₹77 लाख करोड़ से ₹81 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है।

हालांकि, यह ग्रोथ सिर्फ बड़े शहरों या कॉर्पोरेट कर्मचारियों से नहीं आएगी। अगली बड़ी मांग छोटे शहरों, स्वरोजगार करने वालों, छोटे कारोबारियों और उन परिवारों से आने की उम्मीद है, जो अपना पहला घर खरीदना चाहते हैं।

असली चुनौती लोन तक पहुंच

देश में ऐसे लाखों लोग हैं, जिनके पास लोन चुकाने की क्षमता है। लेकिन पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था में उन्हें अक्सर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। वजह साफ है। बैंक लंबे समय तक सैलरी स्लिप, इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) और स्थायी नौकरी को ही सबसे बड़ा आधार मानते रहे हैं।

इस कारण छोटे दुकानदार, फ्रीलांसर, स्वरोजगार करने वाले और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कई लोग लोन से वंचित रह जाते हैं। जबकि उनकी आय और भुगतान क्षमता मजबूत हो सकती है।

AI और डिजिटल डेटा बदल रहे हैं तस्वीर

अब लोन देने का तरीका तेजी से बदल रहा है। फाइनेंस कंपनियां और बैंक डिजिटल डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक एनालिटिक्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे ग्राहक की वास्तविक वित्तीय स्थिति और भुगतान क्षमता को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।

अब सिर्फ कागजी दस्तावेज ही नहीं, बल्कि ग्राहक के फाइनेंशियल व्यवहार और लेनदेन का भी आकलन किया जा रहा है। इससे पहले जिन लोगों के लिए लोन लेना मुश्किल था, उनके लिए भी नए अवसर बन रहे हैं।

टेक्नोलॉजी के साथ भरोसा भी जरूरी

डिजिटल प्रक्रिया ने लोन लेना आसान बनाया है। फिर भी पहली बार घर खरीदने वाले लोगों के लिए यह फैसला आसान नहीं होता। दस्तावेज, नियम, EMI और दूसरी शर्तें कई बार लोगों को उलझन में डाल देती हैं।

ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि टेक्नोलॉजी के साथ भरोसेमंद सलाहकारों की भूमिका भी अहम बनी रहेगी। सही सलाह मिलने से ग्राहक बेहतर फैसला ले पाते हैं और पूरे लोन प्रोसेस को आसानी से समझते हैं।

सफलता का असली पैमाना क्या?

हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में सफलता सिर्फ इस बात से तय नहीं होगी कि कितना लोन बांटा गया। असली सफलता इस बात में होगी कि कितने नए परिवार अपने घर का सपना पूरा कर पाए।

जब ज्यादा लोगों तक आसान होम लोन पहुंचेगा, तो इसका फायदा सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं रहेगा। इससे रियल एस्टेट, निर्माण, रोजगार और पूरी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। यही वजह है कि आसान और समावेशी क्रेडिट एक्सेस को भारत की अगली हाउसिंग ग्रोथ स्टोरी का सबसे बड़ा आधार माना जा रहा है।

(यह आर्टिकल मनीकंट्रोल हिंदी के लिए अतुल मोंगा ने लिखा है, जो बेसिक होम लोन के को-फाउंडर और सीईओ हैं)

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Navi Mumbai रियल एस्टेट हॉटस्पॉट 2026: क्यों मुंबई को छोड़ नवी मुंबई में घर खरीद रहे हैं लोग? जानिए बड़े कारण

Navi Mumbai Real Estate Hotspot: मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) के रियल एस्टेट मार्केट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कभी मुंबई के एक सैटेलाइट टाउनशिप के रूप में प्लान की गई नवी मुंबई अब इससे कहीं आगे निकल चुकी है। नाइट फ्रैंक इंडिया की गुरुवार को जारी छमाही रियल एस्टेट रिपोर्ट के मुताबिक नवी मुंबई अब तेजी से मुंबई के तीसरे सबसे बड़े ग्रोथ कॉरिडोर के रूप में बदल रही है।

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में छपी नाइट फ्रैंक इंडिया की इस रिपोर्ट के मुताबिक, नवी मुंबई में घरों की बढ़ती कीमतों और मांग ने ग्रेटर मुंबई को भी पीछे छोड़ना शुरू कर दिया है। सबसे खास बात यह है कि अब नवी मुंबई में यह बूम सिर्फ कम कीमतों की वजह से नहीं है। बल्कि इसके पीछे कई दूसरी बड़ी वजहें भी हैं। आइए जानते हैं कि क्यों घर खरीदार मुंबई को छोड़ नवी मुंबई का रुख कर रहे हैं। वहां के रियल एस्टेट मार्केट के लेटेस्ट आंकड़े क्या कहते हैं।

पनवेल और खारघर में सबसे तेज उछाल: क्या हैं प्रॉपर्टी रेट्स?

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में पूरे मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में नवी मुंबई के पनवेल इलाके में घरों की कीमतों में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले एक साल के दौरान नवी मुंबई में प्रॉपर्टी की औसत दरों में 9 प्रतिशत का उछाल आया है। पनवेल के साथ ही पड़ोसी इलाके खारघर में भी इसी टाइम पीरियड के दौरान कीमतें 6 फीसदी बढ़ी हैं।

क्यों बढ़ रहा है क्रेज? कनेक्टिविटी ने बदला गेम

नाइट फ्रैंक इंडिया की रिपोर्ट में बताया गया है कि नवी मुंबई का विकास अब सिर्फ सस्ते घरों की वजह से नहीं हो रहा बल्कि बेहतर होती कनेक्टिविटी और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर भी इसकी मुख्य वजहें हैं। इसके अलावा कुछ बड़े प्रोजेक्ट्स हैं जो इस इलाके कीकनेक्टिविटी की तस्वीर बदल रहे हैं। इन्हें यहां नीचे देखा जा सकता है:-

मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक (MTHL/अटल सेतु): इस लिंक ने दक्षिण मुंबई से नवी मुंबई की दूरी को काफी कम कर दिया है। इससे अब यहां की ड्राइव महज 30 मिनट की रह गई है।

नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट: आने वाला इस नए एयरपोर्ट के चलते इस पूरे क्षेत्र की वैल्यू बढ़ गई है।

अपकमिंग मेट्रो कॉरिडोर: आगामी मेट्रो लाइन्स से इंटरनल और एक्सटर्नल कनेक्टिविटी काफी मजबूत हो रही है।

विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर और पनवेल-कर्जत रेलवे दोहरीकरण परियोजना ने भी इस पूरे क्षेत्र के प्रति घर खरीदारों और निवेशकों के आकर्षण को काफी बढ़ा दिया है।

नए लॉन्चेस में नंबर-1 बना नवी मुंबई, ग्रेटर मुंबई पिछड़ा

साल 2026 के पहले छह महीनों के आंकड़ों को देखें तो रियल एस्टेट मार्केट का केंद्र अब बदल चुका है। नए घरों को लॉन्च करने के मामले में नवी मुंबई सबसे आगे निकल गया है। नए लॉन्चेस में सबसे बड़ी हिस्सेदारी 21 प्रतिशत के साथ नवी मुंबई की रही। वसई और विरार जैसे बाहरी पश्चिमी उपनगर 19 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे नंबर पर रहे। कल्याण, डोंबिवली, भिवंडी और कर्जत जैसे बाहरी मध्य उपनगरों की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत रही। ग्रेटर मुंबई के पश्चिमी उपनगर नए लॉन्चेस के मामले में पिछड़ गए और इनकी हिस्सेदारी सिर्फ 17 प्रतिशत रही।

मार्केट में बिक्री का पैटर्न भी इसी तरह का रहा। इसमें बाहरी मध्य उपनगरों ने सबसे बड़ी हिस्सेदारी दर्ज की। यह दर्शाता है कि उन बाजारों में मांग लगातार बनी हुई है जहां आवास तुलनात्मक रूप से किफायती हैं।

पिछले 10 सालों में ऐसे बदला नवी मुंबई का दबदबा

पिछले एक दशक (2014 से 2026) के दौरान एमएमआर क्षेत्र के भीतर नवी मुंबई का महत्व लगातार बढ़ा है। साल 2014 में कुल आवासीय लॉन्चेस में नवी मुंबई की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत थी। ये 2026 की पहली छमाही में बढ़कर 21 प्रतिशत हो गई है। इसी पीरियड में नवी मुंबई की सेल्स हिस्सेदारी 16 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत पर पहुंच गई है।

रिपोर्ट में एक बेहद महत्वपूर्ण बात सामने आई है कि हाल के वर्षों में नवी मुंबई में आवासीय बिक्री की रफ्तार नए प्रोजेक्ट्स के लॉन्च होने की तुलना में कहीं अधिक तेज रही है। यह संकेत देता है कि बाजार में नई सप्लाई आने की तुलना में यहां घरों की मांग बहुत तेजी से मजबूत हो रही है।

ऑफिस लीजिंग में 33% का उछाल

आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद 2026 की पहली छमाही में रियल एस्टेट मार्केट स्थिर और मजबूत बना रहा है। डेवलपर्स ने साल के पहले छह महीनों में 49161 घर लॉन्च किए। ये पिछले साल की समान अवधि से 8 प्रतिशत अधिक है। इस अवधि में बिक्री मामूली रूप से 1 प्रतिशत बढ़कर 47355 यूनिट रही। मार्केट में अनसोल्ड इन्वेंट्री में 4 प्रतिशत की गिरावट आई है और अब यह घटकर 1.57 लाख घरों पर आ गई है।

कमर्शियल प्रॉपर्टी सेगमेंट के लिए भी साल की शुरुआत बेहद शानदार रही है। 2026 की पहली छमाही में ऑफिस लीजिंग सालाना आधार पर 33 प्रतिशत बढ़कर 7.3 मिलियन स्क्वायर फीट पर पहुंच गई। इसमें सबसे बड़ा योगदान जेपी मॉर्गन का रहा। इसने पवई में 2.2 मिलियन स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस लीज पर लिया है।

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नाइट फ्रैंक इंडिया को उम्मीद है कि एंड-यूजर डिमांड, यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और नई सप्लाई की स्थिर पाइपलाइन के दम पर रेजिडेंशियल मार्केट आगे भी मजबूत बना रहेगा। आने वाले समय में पुराने और जर्जर घरों को रिन्यू करने और बाजार में फ्रेश इन्वेंट्री जोड़ने के लिए रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में बड़े डेवलपर्स की भूमिका और बढ़ने की उम्मीद है।

दिल्ली में घर खरीदना बन गया सपना! 2 लाख महीने कमाने वाले शख्स ने बयां किया अपना दर्द

दिल्ली जैसे बड़े शहर में घर लेना काफी मुश्किल होता है। वहीं इन दिनों सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर बताया कि परिवार की हर महीने करीब 2 लाख रुपये की कमाई होने के बावजूद वह अपनी पसंद का 2BHK फ्लैट नहीं खरीद पा रहा है। व्यक्ति ने बताया कि वह अपने पार्टनर के साथ ऐसे इलाके में 2BHK फ्लैट तलाश रहा था, जहां सुरक्षा अच्छी हो, आने-जाने की सुविधा हो और आसपास पार्क जैसी सुविधाएं मौजूद हों। लेकिन जब उन्होंने घरों की कीमतें देखीं तो वे हैरान रह गए। व्यक्ति का ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

दिल्ली में फ्लैट लेना मु्श्किल

व्यक्ति ने Reddit पर किए अपनी पोस्ट में लिखा, “हमारी कुल सैलरी लगभग 2L प्रति माह है। भले ही हम पार्कों के पास के इलाकों में 2BHK फ्लैट देखें और उन्हें सुरक्षित माना जाए, वे 2-2.50Cr की बहुत ज्यादा कीमत पर हैं। जिन लोगों के पास माता-पिता या पुश्तैनी पैसे का कोई सहारा नहीं है, उनके लिए ये हमारी पहुंच से बाहर है। उदाहरण के लिए, हमने द्वारका, पीतमपुरा, वगैरह में फ्लैट देखे, और यह हमारी लोन रेंज से बहुत बाहर है। अब, क्या हम ऐसा करेंगे?”

यूजर ने पोस्ट को , “क्या मिड-सैलरी वाले लोगों को अब फ्लैट या घर खरीदने के बारे में सोचना बंद कर देना चाहिए?” टाइटल के साथ शेयर किया।

यूजर्स ने किया कमेंट

ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और इस पर लोगों ने जमकर अपनी राय दी। कई यूजर्स ने कहा कि दिल्ली में बढ़ती प्रॉपर्टी की कीमतों के कारण अच्छी कमाई करने वालों के लिए भी घर खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। एक यूजर ने लिखा, “मुझे लगता है कि प्रॉपर्टी खरीदना जिंदगी का एक बहुत थका देने वाला हिस्सा है। लेकिन मुझे यह भी लगता है कि अगर आपको खरीदना चाहिए, तो यह किसी दूसरे इलाके में होना चाहिए जहां सर्कल रेट कम हों लेकिन पोटेंशियल हो।” एक और यूजर ने कहा, “आप दिल्ली NCR में नहीं कर सकते और न ही करना चाहिए। टियर 2-3 शहरों में जमीन देखें। वहां भी, आप सिर्फ बाहरी इलाकों में ही जमीन खरीद पाएंगे।”